# Akhilesh Chauhan v. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors

- **Citation:** (2025) 9 ILRA 379
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-09-26
- **Case number:** Writ A No. 14011 of 2025
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/akhilesh-chauhan-v-chairman-u-p-gramin-bank-ors-53934
- **Pages:** 13

## Text

_Characters 0–39,903 of 41,827. This is a partial read: ask again with offset=39903 for what follows._

9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
379
from suitable candidates' group within the
meaning of Article 14 of the Constitution.
Confining such a candidate to the reserved
category only for the reason that list has
been
published
category-wise,
would
definitely amount to discrimination.

50. On the point of changing rules of
the game while selection is on and the point
that petitioners having submitted to the
advertisement, they could not have raised
this issue, suffice it to observe that
interpretation
to
Clause
(14)
of
advertisement
would
not
amount
to
changing the rules of the game. Even
otherwise if legal position through common
law judgments has already got crystallized,
more especially in the circumstances when
in State of U.P. there are no rules as such,
this Court may, therefore, intervene to
arrest any discrimination or arbitrariness at
the end of selection body. Qualifying
standard for final selection to migrate a
candidate to unreserved category means he
must not have been placed in reserved
category for any relaxation other than age
and fee cancessation this does not mean
preparation of unreserved category list in
preliminary
examination
would
oust
meritorious reserved category candidates
and so also on the principle of law laid
down by Supreme Court in Deependra
Yadav
(supra)
and
Division
Bench
judgment of this Court in the case of U.P.
Power Corporation (supra). This would
amount
to
discrimination
as
already
observed in preceding paragraph.

51. However, I may hasten to add here
that there is no rule framed as such in the
State of U.P. for preparation of result by
the selecting body by drawing list of
unreserved category first bringing within its
hold those reserved category candidates
who have attained marks matching or
above unreserved category candidates but it
is a matter of interpretation of existing
circulars
and
memorandum
and
the
conditions given under advertisement, in
consonance with principle and object
behind reservation and of course, in the
light of common law through judgments
that have made this above principle of
preparation list of suitable candidates
permissible
even
in
preliminary
examination.

52. In view of above, all these
petitions succeed and are allowed to the
extent that respondent U.P. Public Service
Commission shall re-draw the merit list of
the preliminary examination result of
suitable candidates to qualify for next stage
of final examination for the purposes of
selection
and
appointment
against
vacancies advertised vide advertisement
No. A-3/E-1/2024 dated 10.4.2024 and
thereafter only Commission shall be
holding main examination on the basis of
such
revised
preliminary
examination
result.

53. There will be no order as to cost.
----------
(2025) 9 ILRA 379
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 26.09.2025

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ A No. 14011 of 2025

Akhilesh Chauhan ...Petitioner
Versus
Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
 ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
380 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Aditendra Singh, Vinod Kumar Singh,
Indresh Kumar Singh

Counsel for the Respondents:
Ramesh Kumar Shukla

विचारणीय मुद्दा

1. जांचोपरान्त 'आन्तररक पररिाद सलमनत' द्िारा की गई
न्यूितम प्रनतफल की अिुशंसा के उपरान्त सक्षम अचधकार
द्िारा दोबारा की गई ििीि विभागीय जांच में याचचकाकताम
पर अचधरोवपत अनििायम सेिानििृवि के दडिादेश की
िैधानिकता। 2. सूत्रिाक्य 'जिरेललया स्पेशल बॅस िाि
िेरोगेडट'
(generalia
specialibus
non
derogant)
का
अिुप्रयोग।

सार-टिप्पणी (हेडनोट्स)

क. सेिा कानून दण्डादेश अननिायह सेिाननिृवि लैंश्रगक
उत्पीडन का आरोप आन्तररक पररिाद सशमनत द्िारा जाांच
पीडडता और आरोपी याश्रचकाकताह की आपसी सहमनत से
तय ककया गया कक व्यश्रित मटहला और उसके पररिार
द्िारा कोई भी बाहरी जाएगी, बशते आांतररक जाांच जारी
रखी जाएगी याश्रचकाकताह ने क्षमा माांगा पररिाद सशमनत
न्यूनतम प्रनतफल की अनुशांसा की गई इसके इसके उपरान्त
सक्षम अश्रधकारी द्िारा दोबारा की जाांच आख्या टदनाांककत
23.12.2024 प्रथतुत की कायहिाही या आपराश्रधक कायहिाही
नहीां की और याश्रचकाकताह पीडडता से क्षमा माांगेगा की जाांच
आख्या टदनाांककत 17.12.2023 में विरुद्ध कोई अपील नहीां
दाखखल की गई गई विभागीय जाांच में जाांच अश्रधकारी
द्िारा गई, क्जसमें याश्रचकाकताह पर आरोप शसद्ध पाया गया
अननिायह सेिाननिृवि का दण्डादेश पाररत - िैधाननकता को
चुनौती दी गई :

अशभननधाहररत : नियोक्ता बैंक द्िारा 'आंतररक पररिाद
सलमनत' की जांच आख्या के उपरान्त, ििीि रूप से
अिुशासिात्मक कायमिाह करिे की कोई आिश्यकता िह ं
थी। परन्तु जब अिुशासिात्मक कायमिाह का निटकर्म भी
आरोवपत आरोप को सत्य मािता है ि उपलब्ध सामग्री के
आधार पर भी आरोप लसद्ध हुआ है कक याचचकाकताम िे
लैंचगक उत्पीडि का कदाचार काररत ककया तो न्यायालय का
मत है कक उक्त अिुशासिात्मक कायमिाह 'अनियलमत' हो
सकती है, परन्तु 'अविचधक' िह ं हो सकती है, क्योंकक
अन्ततः 'आंतररक पररिाद सलमनत' का निटकर्म और
अिुशासिात्मक कायमिाह का निटकर्म समाि है चूंकक
अिुशासिात्मक प्राचधकार िे आंतररक पररिाद सलमनत की
दडि के ललए की गयी अिुशंसा का संज्ञाि िह ं ललया था
और इस कारण से न्यूितम प्रनतफल का अथम, अथामत
न्यूितम दडि देिे के विर्य पर विचार ह िह ं ककया गया।
अतः इस स्तर पर दडिादेश का निणमय, विचधविरूद्ध हो
जाता है। (पैरा 20 एिं 21)

ख. विश्रध ननिहचन विशशष्ि विश्रध एिां सामान्य विश्रध के
मध्यम अन्तविहरोध 'जनरेशलया थपेशलीबॅस नान डेरोगेण्ि'
(generalia specialibus non derogant) अनुप्रयोग :

अशभननधाहररत : 'विशेर् अचधनियम' के उपबन्ध सामान्यतः
'सामान्य अचधनियम' के उपबन्धों पर प्रबल होंगे एिं
अचधनियम 2013 की धारा 28 के अिुसार इस अचधनियम के
उपबंध तत्समय प्रिृि ककसी अन्य विचध के उपबंध के
अनतररक्त होंगे ि कक अल्पीकरण में 'विनियम 2010' बैंक
द्िारा आंतररक विर्यों पर लागू विनियम है इस कारण से
भी 'अचधनियम 2013' के उपबंध बैंक पर पूणम रूप से लागू है
और बाध्यकार है एिं 'विनियम 2010' के उपबंधों पर प्रबल
है। (पैरा 23) उद्धृत निणमयविचध (केस लॉ)

मेधा कोतिाल लेले एिं अन्य बिाम् यूनियि आफ इक्डिया
एिं अन्य, (2003) 1 एस. सी. सी. 297; औरेललयािो
फिामक्न्िज बिाम् स्टेट आफ गोआ एिं अन्य, (2024) 1 एस.
सी. सी. 632; प्रद प मंिल बिाम् यूनियि आफ इक्डिया एिं
अन्य, 2016 (4) सी. एच. एि. (सी. ए. एल.) 118; विशाखा ि
अन्य बिाम् राजस्थाि सरकार ि अन्य, (1997) 6 एस. सी.
सी. 241 संदलभमत ।

अन्तननहटहत कानून

मदहलाओं का कायमस्थल पर लैंचगक उत्पीडि (नििारण,
प्रनतर्ेध
और
प्रनततोर्)
अचधनियम,
आयामितम
बैंक
(अचधकाररयों और कममचाररयों) 2013 धारा 4, 9, 10, 13 (13)
(i) एिं 18 सेिा विनियम, 2010 विनियम 18, 38 एिं 39

मूल-शब्द (कीिडह) की सूची

लैंचगक उत्पीडि; जांच प्रनतिेदि ररपोटम; न्यूितम प्रनतफल;
अिुशंसा; आंतररक पररिाद सलमनत; अिांछिीय आचरण;
क्षमाः व्यचथत मदहला; जांच आख्या; अलभयोग के तथ्य
अलभयोग के समथमि में आरोपों का वििरण; कदाचार; धोखा,
लैंचगक अिुगमिः विभागीय जांच कायमिाह ; िैसचगमक न्यायः
बचाि का समुचचत अिसरः आरोप पबत्रत अचधकार ;
9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
381
लशकायतकतामः दूरभार् िातामलाप; दडकॉ ररकाडििंग;; अपील;
आरंभ से ह शून्य अिुशासिात्मक; दडिादेशः अनििायम
सेिानििृविः िृहद शाक्स्त; अल्पीकरण।

मामले का उद्भि

सक्षम अचधकार द्िारा पाररत आदेश ददिांक 15.07.2025,
क्जसके द्िारा अनििायम सेिानििृवि का दडिादेश अचधरोवपत
ककया गया, और अपील य प्राचधकार द्िारा पाररत आदेश
ददिांक 11. 08.2025, क्जसके द्िारा आदेश ददिांक
15.07.2025 के विरुद्ध अपील निरस्त की गई।

पक्षकारों की ओर से उपक्थिनत

याचचकाकताम के अचधिक्ता: अददतेन्र लसंह, वििोद कुमार
लसंह, इंरेश कुमार लसंह।

विपक्षीगण के अचधिक्ता: रमेश कुमार शुक्ला ।

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

प्रस्तमिनम

१. वतटमान प्रकरण के तथ्यों व पररमटथमतयों के संदभट में
इस न्यायालय के समक्ष मनम्नमलमखत मवमधक मविय मवचाराथट
हैैः-

"ममहलाओं का कायटथल पर लैंमगक उत्पीडन
(मनवारण, प्रमतिेध और प्रमततोि) अमधमनयम, २०१३ (संक्षेप में
'अमधमनयम, २०१३') की धारा १३ के उपबंधों के अंतगटत
'आंतररक पररवाद समममत' के द्वारा वतटमान प्रकरण के संदभट में
उपलब्ध कराई गई 'जांच प्रमतवेदन ररपोटट' के मनष्किट मक 'सभी
साक्ष्यों व बयानों के आधार पर यह घटना सत्य प्रतीत होती है' और
प्रत्याथी के मवरुद्ध मनयोजक को 'मनयमानुसार न्यूनतम प्रमतफल की
संटतुमत' की अनुशंसा की गई है, तब 'अमधमनयम, २०१३' की
धारा १३(३) (i) के अनुसार, प्रयोज्य सेवा मनयमों के उपबंधों के
अंतगटत लैंमगक उत्पीडन के 'कदाचार' के मलए प्रत्याथी के मवरूद्ध
कायटवाही करने की मवमधक प्रमिया क्या होगी?"

तथ्यमत्र्क प्रमरूप

२. यामचकाकताट, शाखा प्रबंधक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण
बैंक के मवरूद्ध एक व्यमथत ममहला (कायाटलय कमटचारी) ने
एक 'लैंमगक उत्पीडन पररवाद पत्र' मदनांमकत १८.१२.२०२३,
बैंक के 'ममहला ककयाण समममत' (पररवाद समममत) को
'अमधमनयम २०१३' की धारा ९ के अंतगटत प्रेमित मकया, मक
यामचकाकताट ने १६.१२.२०२३ को उसके साथ, उसके मनवास
पर लैंमगक प्रकृमत का अवांछनीय आचरण करने का प्रयास
मकया, मजसके कारण वह अमत भयभीत एवं व्याकुल रही।
पररवाद पत्र में अवांछनीय आचरण का संमक्षप्त मववरण भी
मदया गया।

३. उपरोि 'लैंमगक उत्पीडन पररवाद पत्र' पर बैंक के
क्षेत्रीय प्रबंधक के आदेशानुसार 'अमधमनयम, २०१३' की धारा
४ के उपबंधों के अंतगटत गमठत 'आंतररक पररवाद समममत' को
उि पररवाद अमग्रम कायटवाही के मलए प्रेमित मकया।
'अमधमनयम, २०१३' की धारा १० के अनुसार व्यमथत ममहला
के अनुरोध पर दोनों पक्षों ने बैंक और कमटचाररयों की छमव को
सुरमक्षत रखने हेतु, उपबोधन के तहत, आपसी सहममत से तय
मकया, मक व्यमथत ममहला व उसके पररवार द्वारा कोई भी
बाहरी कायटवाही, मीमडया द्वारा, एवं पुमलस द्वारा नहीं की
जायेगी व प्रथम सूचना ररपोटट भी नहीं करी जाएगी, बशतें
'आंतररक पररवाद समममत' (आई.सी.सी.) द्वारा आंतररक जांच
जारी रखी जाएगी और यामचकाकताट सभी क्षेत्रीय कायाटलय
कमटचाररयों के समक्ष व्यमथत ममहला से अपने कृत्य की क्षमा
मांगेंगे, जो उसने मांगी भी। आपसी समझौते की एक प्रमत,
'आंतररक पररवाद समममत' की कायटवाही के अमभलेखों पर
सुरमक्षत रखी गई।

४. 'आंतररक पररवाद समममत' ने मनयमानुसार, पररवाद
की जााँच की प्रमिया, नैसमगटक मसद्धान्तों के सभी मनयमों का
पालन करते हुए सम्पूणट करी। व्यमथत ममहला ने अपना मवटतृत
मलमखत कथन अमभमलमखत कराया। साथ ही साथ बैंक की
कायाटलय सहायक व सहायक प्रबंमधका के कथन भी गवाहो के
रूप में अमभमलमखत मकये गये तथा दोनो पक्षों के वाट्सएप पर
वाताटलाप का टनैप शाट व कॉल ररकाडट के दटतावेज भी
कायटवाही के अमभलेखों पर सुरमक्षत कराये गये और अऩ्ततैः
382 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
एक जााँच आख्या, मदनांमकत २७.१२.२०२३, क्षेत्रीय प्रबंधक
को प्रेमित की गयी, मजसके प्रमुख अंश मनम्न हैैः-

"सचमचत द्वारा दोनों पक्षों व समबंचधत स्र्ाफ के
बयानों को धैयभपूवभक सुना गया। सचमचत के अनुसार दोनों ही
पक्षो को मालूम था चक घर पर कोई नहीं है और ऐसे में बंद घर
के अंदर जाने वाली पररचस्थत को र्ाला जा सकता था | अंदर
जाने के पश्चात सुश्री नेहा रानी की उनकी सहकमी सुश्री मोचनषा
से चनरंतर व्यहार् सअप के माध्यम से बात हो रही थी चजसमें वह
अपनी पररचस्थचतयों का चववरण उन्हें दे रही थी। सुश्री नेहा रानी
व सुश्री मोचनषा की बातों से ऐसा प्रतीत होता है चक सुश्री नेहा
रानी असहज महसूस कर रही थी और अत्यचधक प्रचतचिया न
करने के कारण वह तुरंत वहााँ से नहीं चनकाल पायी।

समस्त बयान व साक्ष्यों का सचमचत द्वारा
सावधानी से आंकलन चकया गया है व दोनों पक्षों के कथन,
कॉल ररकॉचडिंग एवं अन्य तथ्यों से यह प्रतीत होता है चक सुश्री
नेहा रानी को घर के अंदर जाने से पूवभ मालूम था चक घर के
अंदर कोई नहीं है एवं घर पर हुई बातिीत के संदभभ में श्री
अचखलेश िौहान दवारा फोन एवं क्षेत्रीय कायाभलय के समस्त
स्र्ाफ के सामने माफी मांगी गई है। सुश्री नेहा रानी व श्री
अचखलेश िौहान के बीि पहले से चकसी भी प्रकार के मतभेद
नहीं थे चजसकी पुचष्ट दोनों पक्षों ने की है। हालांचक यह घर्ना
पर दोनों ही पक्षों के चविार मेल नहीं खाते हैं। िूंचक घर्ना के
समय केवल श्री अचखलेश िौहान एवं कुमारी नेहा रानी ही घर
पर मौजूद थे इसचलए घर्ना से संबचन्धत कोई भी ठोस साक्ष्य
उपलब्ध नहीं है। सभी साक्ष्यों व बयानों के आधार पर यह
घर्ना सत्य प्रतीत होती है। श्री अचखलेश िौहान की अब तक
की साफ छचव को देखते हुये व उनके द्वारा उनके कृत्य के प्रचत
माफी मांगने के उपरांत सचमचत श्री अचखलेश िौहान के चलए
बैंक चनयमनुसार न्यूनतम प्रचतफल की संस्तुचत करती है।"

(रेखांचकत भाग पर चवशेष बल चदया गया)

५. अमववामदत रूप से यामचकाकताट ने 'आंतररक
पररवाद समममत' की जााँच आख्या, मदनांमकत २७.१२.२०२३,
के मनष्किट व की गई अनुशंसा के मवरूद्ध 'अमधमनयम २०१३'
की धारा १८ के उपबंध के अंतगटत कोई अपील दामखल नहीं
करी और न ही, उि जााँच आख्या को आक्षेमपत ही मकया
अथाटत उि जााँच आख्या के मनणटय व अनुशंसा को
यामचकाकताट ने टवीकार कर मलया।

६. वतटमान के प्रकरण में प्रथम मतमथ में सुनवाई के
दौरान न्यायालय की मटप्पमणयों को ध्यान में रखते हुए, अगली
मतमथ पर सुनवाई के दौरान, यामचकाकताट के मवद्वान अमधविा
द्वारा मौमखक रूप से उपरोि जााँच आख्या को वतटमान
यामचका में आक्षेमपत करने की चेष्ा/प्राथटना, इस न्यायालय
द्वारा टपष् रूप से अटवीकार कर दी गयी थी।

७. उपरोि पृष्भूमम में बैंक के सक्षम प्रामधकारी ने
यामचकाकताट को एक ज्ञापन (Memorandum)
मदनांमकत २०.०२.२०२४ को तामील कराया, मक उसके
मवरूद्ध आयाटवतट बैंक (अमधकाररयों और कमटचाररयों) सेवा
मवमनयम, २०१० (संक्षेप में 'मवमनयमावली - २०१०') के
मवमनयम ३९ के प्रावधानो के अंतगटत उसके द्वारा मकये गये
'कदाचार' के मलए शामटतयां आरोमपत करने हेतु कायटवाही
प्रारम्भ करी गयी है और ज्ञापन के साथ अमभयोग के तथ्य
(Article of charges) व अमभयोग के समथटन में
आरोपों का मववरण (Statement of allegations
in support of Article of charges) भी संलग्न
मकये गये। यह भी टपष् रूप से कथन मकया गया मक उसनें
'मवमनयमावली, २०१०' के मवमनयम संख्या १८ व ३८ से
संदभट में 'कदाचार' का कृत्य काररत मकया है। अमभयोग संख्या
१ के अनुसार यामचकाकताट (आरोपी) व्यमथत ममहलाकमी को
१७.१२.२०२३ को धोखे से अपने साथ अपने घर ले गये।
अपने घर पहुचने के उपरान्त मकसी न मकसी बहाने से व्यमथत
ममहलाकमी को अपने घर पर रोका और इसी दरम्यान उसने
व्यमथत ममहलाकमी के ऊपर अपना हाथ उसकी अनुममत के
मबना रखकर, उसके साथ लैंमगक अनुगमन करने का प्रयास
मकया।

८. 'मवमनयमावली २०१०' के संदमभटत मवमनयम संख्या
१८,३८ व ३९ मनम्न उद्दीमणटत मकये जा रहे हैैः-

"१८. विविर्म और आदेशों का पालि
करिे का दावर्त्ि- प्रत्येक अचधकारी या कमभिारी इन
9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
383
चवचनयमों का पालन करने को सुचनचश्चत करेगा और जो ऐसे
व्ययचि या व्ययचियों के द्वारा समय-समय पर उसे सभी आदेशों
और चनदेशों का पालन, अनुपालन और आदर करेगा जो उसे
चदए जाएं चजनकी अचधकाररता, अधीक्षण या चनयंत्रण के
अधीन वह तत्समय तैनात है।"

"३८. र्ौि उत्पीडि - कोई अचधकारी या
कमभिारी कायभस्थल पर कोई ऐसा कायभ नहीं करेगा जो चकसी
स्त्री के यौन उत्पीड़न की कोचर् में आता हो ।

स्पष्टीकरण - इस चवचनयम के प्रयोजनों के चलए
"यौन उत्पीड़न" के अंतगभत प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से
चनम्रचलचखत अवांछनीय लैंचगक रूप से कामुक व्ययवहार भी है-

(क) शारीररक स्पशभ और पहल;

(ख) यौन िाह की मांग या अनुरोधः

(ग) यौन रंचजत अभयुचियां;

(घ) कोई अश्लील साचहत्य चदखाना; या

(ङ) अवांछनीय शारीररक, मौचखक या गैरमौचखक यौन प्रकृचत का आिरण।

३९. शावस्िर्ाां-इस अध्याय के पूवभगामी
चवचनयमों पर प्रचतकूल प्रभाव डाले चबना कोई ऐसा अचधकारी
या कमभिारी जो इन चवचनयमों को भंग करता है या जो उपेक्षा,
अदक्षता या चनचष्ट्ियता प्रदचशभत करता है या जो ऐसे कृत्य
करता है जो बैंक के चहतों के चलए हाचनकारक हैं या उसके
अनुदेशों के चवरोध में है या जो अनुशासन भंग करता है अथवा
कदािार के चकसी अन्य कृत्य का दोषी है, चनम्नचलचखत में से
चकसी एक या अचधक शाचस्तयों का दायी होगा, अथाभतः-

१. अचधकारी:

(क) छोर्ी शाचस्तयां:

(i) पररनंदा करना;

(ii) संियी प्रभाव के चबना वेतनवृचि चवधाररत
करना या रोकनाः

(iii ) पदोन्नचत रोकना;

(iv) उपेक्षा या आदेश भंग द्वारा बैंक को हुई
चकसी संपूणभ धनीय हाचन या उसके भाग का उपलचब्धयों या
ऐसे अन्य रकमी से वसूली जो उसके प्रचत शोध्य है।

( v) संियी प्रभाव के चबना दो वषभ से अनचधक
की अवचध के चलए समय वेतनमान के चनम्रतर प्रिम तक
घर्ाना।

(ख) मुख्य शाचस्तयां:

(१) चवचनयम ३९ के उपचवचनयम (१) के खंड
(क) की मद (v) में यथा उपबंचधत के चसवाय चकसी चवचनचदभष्ट
अवचध के चलए समय वेतनमान में इस बारे में और चनदेशों
सचहत चनम्रतर प्रिम तक कमी चक क्या अचधकारी ऐसी कमी
की अवचध के दौरान वेतन वृचियां उपाचजभत करेगा या नहीं और
क्या ऐसी अवचध की समाचि पर कमी का उसके वेतन की
भावी वृचियों को स्थचगत करने का प्रभाव होगा या नहीं होगा;

(ii) चनम्रतर ग्रेड या पद में कमी;

(iii) अचनवायभ सेवा चनवृचत्त;

(iv) सेवा से हर्ाया जाना जो भावी चनयोजन के
चलए चनरहभता नहीं होगी;

(v) पदच्युचत जो सामान्यतः भावी चनयोजन के
चलए चनरहभता होगी।

स्पष्टीकरण- इस चवचनयम के प्रयोजनों के चलए,
चनम्नचलचखत बातें शाचस्त की कोचर् में नहीं आएंगी, अथाभतः-
384 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(i) चकसी अचधकारी की, उस पद की चनयुचि
के चनबंधनानुसार, जो उसने धारण चकया है, चवभागीय परीक्षण
या परीक्षा उत्तीणभ करने में उसकी असफलता के कारण उसकी
एक या अचधक वेतनवृचि को रोकना;

(ii) दक्षतारोध पार करने की अनुपयुिता के
आधार पर चकसी अचधकारी के समय वेतनमान में उसकी
दक्षतारोध पर वेतनवृचियों को रोकना;

(iii) चकसी अचधकारी का उस उच्ितर ग्रेड पद
के चलए स्थानापन्न कतभव्ययभार न देना या प्रोन्नचत न करना,
चजसके चलए वह चविार करने हेतु पात्र हो सकेगा चकंतु उसके
चलए उसके मामले पर चविार करने के पश्चात वह अनुपयुि
पाया जाता है;

(iv) प्रोन्नचत के चलए कचतपय अपेक्षा के पूरा न
होने या अनुशासचनक कायभवाचहयों के लंचबत रहने जैसे कारणों
के चलए चकसी अचधकारी की प्रोन्नचत को रोकना या स्थचगत
करना;

(v) उच्ितर ग्रेड या पद पर स्थानापन्न चकसी
अचधकारी का इस आधार पर चक उसे चविारण के पश्चात या
उसके आिरण से असंबि प्रशासचनक आधारों पर ऐसे
उच्ितर ग्रेड या पद के चलए अनुपयुि समझा गया, चनम्नतर
ग्रेड या पद पर प्रत्यावतभन;

(vi) पररवीक्षा की अवचध के दौरान या उसके
अंत में चकसी अन्य ग्रेड या पद के चलए पररवीक्षा पर 'चनयुि
चकसी अचधकारी का, उसकी चनयुचि के चनबंधनों, या चनयमों
अथवा ऐसी पररवीक्षा को शाचसत करने वाले आदेशों के
अनुसार पूवभ ग्रेड या पद पर प्रत्यावतभन;

(vii) प्रचतचनयुचि पर चकसी अचधकारी का
उसके मूल संगठन में प्रत्यावतभन;

(viii) चकसी अचधकारी की सेवा की समाचिः-

(क) चकसी संचवदा या करार के अधीन से
अन्यथा अस्थायी हैचसयत में चनयुि उस अवचध की समाचि
पर, चजसके चलए उसे चनयुि चकया गया या उससे पूवभ उसकी
चनयुचि के चनबंधनों के अनुसार;

(ख) चकसी संचवदा या करार के अधीन चनयुचि,
ऐसी संचवदा या करार के चनबंधनों के अनुसार;

(ग) छंर्नी के भाग रूप में,

परंतु चवचनयम ३९ के उप चवचनयम (१) के खंड
(क) की मद (१) से मद (v) में यथा चवचनचदभष्ट छोर्ी
शाचस्तयां सक्षम प्राचधकारी द्वारा तब तक अचधरोचपत नहीं की
जाएंगी जब तक अचधकारी को चलचखत में चनम्नचलचखत सूिना
नहीं दे दी जाती -

(i) उसे उन आधारों की सूिना देना चजसके
आधार पर उसने उि शाचस्तयों के अचधरोपण का प्रस्ताव
चकया है;

(ii) उसे सूिना की प्राचि की तारीख से १५
चदन की अवचध के भीतर चलचखत में प्रचतरक्षा का कथन तैयार
करने के चलए युचियुि अवसर देना और अचधकारी द्वारा
प्रस्तुत प्रचतरक्षा के कथन, यचद कोई हो, पर सुनवाई के पश्चात
चविार चकया जाएगाः

परंतु यह चक ऊपर चवचनचदभष्ट प्रमुख शाचस्तयों में
से चकसी शाचस्त के अचधरोपण का कोई आदेश सक्षम
प्राचधकारी द्वारा चलचखत रूप में हस्ताक्षररत चकसी आदेश के
चसवाय, नहीं चकया जाएगा और चलचखत में आरोप या आरोपों
को चवरचित चकए चबना और अचधकारी को चदए चबना और इस
जांि के चकए चबना चक उसके पास आरोप या आरोपों का उत्तर
देने और स्वयं की प्रचतरक्षा का युचियुि अवसर रहे, ऐसा कोई
आदेश पाररत नहीं चकया जाएगा।

परंतु यह और चक कोई जांि नहीं की जाएगी, यचद-
9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
385

(i) यचद ऐसे मामलों में कदािार साचबत हो
जाता है, बैंक का हर्ाए जाने या पदच्युचत का दंड अचधरोचपत
करने का आशय नहीं है; और

(ii) बैंक ने अचधकारी को कारण बताओं सूिना
जारी की है चजसमें उसे कंदािार और उस दंड की सूिना दी
गई है चजसका वह ऐसे कदािार के चलए दायी हो सकेगा; और

(iii) अचधकारी ने पूवोि कारण बताओ सूिना
के अपने जवाब में स्वयं के दोष को स्वेच्छा से स्वीकार कर
चलया है; "

९. मवभागीय जांच कायटवाही में ११ प्रबंधन प्रदशट व ५
बचाव प्रदशट प्रटतुत मकये गये। ३ प्रबंधक गवाह व २ बचाव
गवाहों के साक्ष्य भी अमभमलमखत करे गये। इसकी के साथ बैंक
ममत्र, आरोप पमत्रत अमधकारी व मशकायतकताट के कथन भी
अमभमलमखत करे गये।, जााँच अमधकारी ने जांच आख्या
मदनांमकत २३.१२.२०२४, महाप्रबंधक एवं सक्षम प्रामधकारी,
आयाटवतट बैंक, प्रधान कायाटलय, लखनऊ को प्रेमित करी और
यह मनणीत मकयाैः-

"उपरोक्त के आलोक में सांभाव्र्िा की
प्रबलिा के आधार पर आरोप पविि अवधकारी पर
आवटाकल-१ के माध्र्म से अवधरोवपि आरोप वसद्ध होिे
है।"

१०. उपरोि वमणटत जांच आख्या में जांच अमधकारी
का मनष्किट मनम्नमलमखत हैैः-

"जांि कायभवाही में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के
पररशीलन एवं प्रस्तुतकताभ अचधकारी की आख्या एवं उस पर
आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा प्रस्तुत बिाव अचभकथन के
आधार पर जांि अचधकारी का चनष्ट्कषभ चनम्नवत हैः-

श्री उबैश (DW-२) द्वारा ICC के समक्ष
(Mex-९ में चवचडओं स्र्ेर्मेंर् है) एवं जांि कायभवाही
(Daily Order sheet - ६ के पृष्ठ सं-४) में यह
बताया चक मैनेजर सर द्वारा १६.१२.२०२३ को सुबह लगभग
१०.३० बजे (समय की पुचष्ट Dex-२ से की जाती है) पर
काल कर के कहा चक कब तक आना है तो उनके (DW-२)
द्वारा बताया गया चक उनके चपता जी अस्वस्त हैं एवं उऩ्हें
डॉक्र्र को चदखाना पड़ सकता है। इसचलए वह १५-२० चमनर्
में यह कन्फमभ करेंगे चक वह वसूली हेतु आ पाएंगे अथवा नहीं
और उसके बाद DW-२ द्वारा फोन कर समय कन्फमभ नहीं
चकया जा सका। DW-२ द्वारा यह भी बताया गया चक आरोप
पचत्रत अचधकारी द्वारा उन्हें ११:३० बजे कॉल चकया गया था
चकन्तु यह फोन उठा नहीं पाए, बाद में उन्होने (DW-२ ने)
१२.१५-१२.३० बजे आरोप पचत्रत अचधकारी को बता चदया
था चक वो चपता जी को चदखाने ले गए हैं तथा वसूली पर नहीं
आ पाएंगे। अतः आरोप पचत्रत अचधकारी का कथन चक बैंक
चमत्र श्री उबैश द्वारा ICC के समक्ष चदए गये बयान
MEX६(२०) तथा Daily order sheet-६ के पृष्ठ
सं०-४ के अंत में EO के समक्ष यह बयान चदया गया है चक
श्री उबैश द्वारा १५-२० चमनर् स के चवलम्ब होने की जानकारी
आरोप पचत्रत अचधकारी को फोन के माध्यम से दी गयी थी,
असत्य है। साथ ही उल्लेखनीय है चक चजस ११.३० बजे की
काल की बात DW-२ कर रहा है वह आरोप पचत्रत
अचधकारी द्वारा चदए गए काल रेकाडभस (Dex-२) में कहीं भी
चदख नहीं रही है। साथ ही श्री राम बाबू द्वारा ICC के समक्ष
(Mex-९ में चवचडओ स्र्ेर्मन्र् है) अपने बयान में स्पष्ट रूप
से कहा है चक मैने सर और उऩके मध्य वसूली पर िलने हेतु
१-१.१५ बजे से पहले कोई बात नहीं हुई थी एवं वह डाक्र्र
के यह अपने बेर्े का प्लास्र्र कर्वाने गए थे, उनके द्वारा १५२० चमनर् में आने जैसी कोई बात नहीं कही गई थी। साथ ही
Dex-२ के अवलोकन से स्पष्ट है चक आरोप पचत्रत
अचधकारी द्वारा श्री उबैश को सुबह १०:३४ पर कॉल कर
वसूली हेतु आने का समय पूछा गया था तथा सुबह १०:३८
पर एक आउर्गोइंग कॉल (चजसका चववरण जांि कायभवाही में
नहीं प्रस्तुत चकया गया है) श्री रामबाबू के नंबर पर भी चदख
रहा है (चकन्तु श्री राम बाबू द्वारा उस कॉल की पुचष्ट नहीं की
गई है), तथाचप इन दोनों कॉल से पूवभ ही चशकायतकताभ को
सुबह १०:३१ पर कॉल कर वसूली का समय कन्फमभ कर चदया
गया था। उपरोि साक्ष्यों एवं गवाहों से स्पष्ट है चक आरोप
386 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
पचत्रत अचधकारी का बयान एवं वसूली पर जाने वाले अन्य ०२
सदस्यों (श्री उवेश पूवभ श्री रामबाबू) के बयानों मे चवरोधाभास
है तथा आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा चशकायतकताभ को अन्य
सदस्यों के १५-२० चमनर् स में आने की बात के संबंध में
असत्य जानकारी देकर अपने घर इंतजार हेतु लगभग ०२ घंर्े
बैठाया गया।

चशकायतकताभ के कंधे पर हाथ रखने का कोई
सीधा साक्ष्य / गवाह जांि कायभवाही में प्रस्तुत नहीं चकया गया
है. चकन्तु कई महत्वपूणभ साक्ष्य एवं गवाह जैसे MW-२ एवं
चशकायतकताभ की िैर् (Mex -१०) Mex-११
(चशकायतकताभ एवं आरोप पचत्रत अचधकारी के मध्य की कॉल
ररकॉचडिंग) एवं आरोप पचत्रत अचधकारी के बयानों में चदख रहे
चवरोधाभास (जैसे बैंक चमत्र एवं रामबाबू से वसूली श्री हेतु तय
समय श्री रामबाबू के ना आने का कारण चक बेर्े को चदखाना
था श्री अथवा पड़ोस में चकसी की मृत्यु हो गई थी ICC के
समक्ष चदए गए बयान में आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा बताया
गया चक उनके द्वारा चशकायतकताभ को पहले ही फोन करके
बताया गया था चक अभी समय लग रहा है चजस पर
चशकायतकताभ द्वारा ही कहा गया चक यहााँ पर कहा खड़े रहेंगे,
तो वो उसे अपने घर ले गए, जबचक Dex -२ के अवलोकन
से स्पष्ट है चक आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा १०:३१ बजे कॉल
करके चशकायतकताभ को वसूली पर आने हेतु कहने के पश्चात
कोई कॉल नहीं की गई है जबचक उनको बैंक चमत्र द्वारा आने
हेतु अस्पष्टता १०:३४ पर बता दी गई थी, इसके बाद
चशकायतकताभ द्वारा कमालगंज पहुंिने के पश्चात ११:०१ बजे
स्वयं आरोप पचत्रत अचधकारी को की गई थी; ICC के समक्ष
चदए गए बयान में आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा चशकायतकताभ
को घर चदखाने के संबंध में मना करना और कहना चक उनकी
बैठक से उनका पूरा घर चदखता है जबचक चशकायतकताभ को
स्पष्ट रूप से पता है चक उनके घर में पढाई सम्बन्धी नोर् र्ैग
आचद लगे हुए है तथा ICC की एक सदस्या द्वारा भी कहा
गया चक आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक के
केचबन में बताया गया था चक उसके चशकायतकताभ को घर
चदखाने की बात कही थी, तथा DW-३ द्वारा इस बात की
पुचष्ट भी की गई चक उनकी बैठक से चकिन और पूजा घर
चदखते है, आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा अपने बयान में कहा
गया चक चशकायतकताभ लगभग पौन घंर्े उनके घर रूकी थी
जबचक चशकायतकताभ द्वारा लगभग ०२ घंर्े वसूली पर जाने
हेतु इंतजार चकया गया। ICC के समक्ष चदए गए बयान में
आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा कहा गया चक देर होने पर
चशकायतकताभ द्वारा माकेर् की जाने लगी तो उनके द्वारा बैंक
चमत्र एवं रामबाबू को कॉल चकया गया और दोनों ने ही बताया
चक अभी देर लगेगी जबचक बैंक चमत्र के बयान से स्पष्ट है चक
सुबह १०:३४ पर बात होने के पश्चात उसकी बात आरोप
पचत्रत अचधकारी से नहीं हो पाई थी एवं जब १२:१५-१२:३०
बजे लगभग हुई तो उसने स्पष्ट तौर पर आने से मना कर चदया
था साथ ही श्री रामबाबू ने तो ०१:१५ बजे से पहले आरोप
पचत्रत अचधकारी से चकसी भी संपकभ को स्वीकार नहीं चकया
है), आचद के आधार पर चशकायतकताभ की चशकायत को बल
चमलता है एवं संभाव्ययता की प्रबलता पर यह आरोप चसि
होता है चक आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा चशकायतकताभ को
बहाने से अपने घर रोक कर रखा गया एवं उसकी अनुमचत के
चबना उसके कंधे पर हाथ रखने की कोचशश की गई एवं
असहज महसूस कराया गया । यहााँ उल्लेखनीय है चक
चशकायतकताभ द्वारा जब १६.१२.२०२३ को ०३ बजे के
लगभग कॉल कर के घर्ना के संबंध में आरोप पचत्रत
अचधकारी से अत्यंत तेज आवाज में सवाल जवाब चकया गया
एवं उसके कृत्य के संबंध में चशकायत की गई तो आरोप पचत्रत
अचधकारी द्वारा मात्र Sorry एवं Extremely Sorry
जैसे शब्दो का प्रयोग चकया गया तथा आरोप पचत्रत अचधकारी
का कहना चक उसने वसूली पर बुलाने हेतु सॉरी कहा है मानने
योग्य नहीं है, क्योचक चशकायतकताभ द्वारा काल पर आरोप
पचत्रत अचधकारी को बहुत कुछ कहा गया चक सर देचखए
लड़की आपकी भी है और ये िीज आपको भी पता है चक
आपके चवहेव्ययर कैसा था कैसा नहीं था, आप भी एक चपता है
आपको थोडा रीस्पानसबल होना िाचहए, जब आपने वसूली
पर बुलाया था तो आपको वसूली पर ही लेकर िलना िाचहए
था, आपको कम से कम अपने मैनेजर होने का रीस्पेक्र् करना
िाचहए आपको चकस िीज से लगा चक मै interested ह ाँ
या चहंर् भी दे रही ह ाँ, आपको नहीं लगा चक आपका चवहैव
बहुत घचर्या था आज का, आपको क्या लगा चक मैं चकसी को
कुछ भी बोलूंगी नहीं, भगवान ना करे कोई कभी आपकी
लड़की के साथ ये सब करे पर बहुत र्ािभरस होती है ये िीजे
महीनो तक हान्र् करती है, आचद तब पर भी आरोप पचत्रत
अचधकारी द्वारा काल पर बार बार चसफभ माफी ही मांगी जाती
9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
387
रही, यहााँ यह मानने योग्य नहीं है चक आरोप पचत्रत अचधकारी
को चशकायतकताभ की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी एवं वह
सगे संबंचधयों में बैठे होने के कारण बार बार माफी मांग रहे थे।

आरोप पचत्रत अचधकारी का कथन की घऱ से
चनकलने के पश्चात चशकायतकताभ सहजता से उसके साथ बाइक
पर बैठ कर बाहर गई तथा उसका घऱ १००-१५० मीर्र की
दूरी पर था र्ेम्पो स्र्ेन्ड के संदभभ में उल्लेखनीय है चक
चशकायतकताभ अचधकारी द्वारा बार बार कहा गया है चक उसे
र्ेम्पो स्र्ेन्ड से आरोप पचत्रत अचधकारी के घऱ का रास्ता उसे
नहीं ज्ञात था, अतः आरोप पचत्रत अचधकारी के साथ वापस
आने से आरोपी के खंडन को कोई बल नहीं चमलता है।

आरोपी पचत्रत अचधकारी का कथन की
चशकायतकताभ उसके प्रचत पूवाभग्रह से ग्रचसत थी के संदभभ में
आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा Mex-१० को उदभूत चकया है,
जो की पूवाभग्रह को साचबत करने हेतु पयाभि नहीं है।

उपरोि के आलोक में संभाव्ययता की प्रबलता के
आधार पर आरोप पचत्रत अचधकारी पर आचर्भकल-१ के
माध्यम से अचधरोचपत आरोप चसि होते है।"

(रेखांचकत भाग पर चवशेष बल चदया गया)

११. सक्षम अमधकारी द्वारा आरोप पमत्रत अमधकारी को
जांच अमधकारी की जांच आख्या मदनांमकत २३.१२.२०२४
की एक प्रमत, उसी मदन, अपना प्रमत उत्तर/ बचाव कथन
प्रटतुत करने के मलए प्रेमित की। जो उसने, अपने पत्र मदनांमकत
१३.०१. २०२५ के माध्यम से प्रटतुत करा। सक्षम अमधकारी
ने आरोप पत्र, जांच अमधकारी की जांच आख्या, आरोप
पमत्रत अमधकारी का बचाव अमभकथन तथा अनुशासमनक
प्रकरण से संबंमधत समटत साक्ष्यों एवं दटतावेजों के गहन
अध्ययन के उपरांत पाया की जांच की कायटवाही, नैसमगटक
न्याय के मनयमों के अनुपालन करते हुए, आरोप पमत्रत
अमधकारी को बचाव का समुमचत अवसर प्रदान करते हुए पूणट
करी गई। इस संदभट में श्री अमदतेन्र मसंह, यामचकाकताट के
मवद्वान अमधविा ने भी इस प्रमिया में मकसी प्रकार की कोई
मवमधक त्रुमट होने का कोई दृष्ांत प्रदमशटत नहीं मकया। अतैः
न्यायालय का मत है मक जांच प्रमिया, मवमधक रूप से पूणट की
गयी है।

१२. सक्षम अमधकारी ने संपूणट दटतावेजों व आरोप
पमत्रत अमधकारी द्वारा जांच आख्या पर मदया गया अमभकथन
व प्रबंधन साक्ष्य- ११, जो घटना के कुछ घंटो के बाद, आरोप
पमत्रत अमधकारी व मशकायतकताट के मध्य हुई सचल दूरभाि
वाताटलाप की कॉल ररकॉमडिंग है, को मवशेि रूप से श्रवण
मकया और ध्यान मदया। आदेश में उि वाताटलाप को पूणट रूप
से उद्दीमणटत भी मकया और आदेश में यह भी उकलेमखत मकया
मकैः-

"उि Recording के श्रवण से यह स्पष्ट है
चक आरोप पचत्रत अचधकारी को चशकायतकताभ की बातें भली-
भांचत स्पष्ट तौर पर समझ में आ रही थी और उनके द्वारा
चशकायतकताभ की बातों को Respond भी चकया जा रहा
था। उि वाताभ से स्पष्ट है चक संदचभभत घर्ना के उपरांत जब
चशकायतकताभ द्वारा लगभग ०३ बजे आरोप पचत्रत अचधकारी
को कॉल करके उनसे ऊंिे स्वर में घर्ना के संदभभ में सवालजवाब चकया गया तो आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा
"Sorry" एवं "Extremely Sorry जैसे शब्दों का
प्रयोग करते हुए वाताभ के दौरान अपनी गलती को स्वीकार
चकया गया था। अतएव आरोप पचत्रत अचधकारी का यह कथन
चक वे ररश्तेदारों के मध्य बैठे थे जहां शोरगुल हो रहा था, व
शोरगुल के िलते उन्हें कु० नेहा रानी की बातें स्पष्ट नहीं हो
रही थी, स्वीकार योग्य नहीं है।

यचद आरोप पचत्रत अचधकारी के उि कथन को
मान भी चलया जाए, तो उनके द्वारा अपने अधीनस्थ काचमभक से
बार-बार फोन पर माफी क्यों मांगी गयी व दूसरे चदन सब कुछ
स्पष्ट होने पर क्षेत्रीय कायाभलय के समस्त काचमभकों के समक्ष
माफी मांग कर िररत्र हनन करने वाले संगीन आरोपों को चकस
प्रकार अपना चलया गया। कोई भी चनदोष व्ययचि चकसी भी
पररचस्थचत में अत्यंत दबाव के बावजूद ऐसे संगीन आरोपों के
सापेक्ष कभी माफी नहीं मांगेगा क्योंचक ऐसे आरोप
प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से आरोचपत व्ययचि के िररत्र व उसकी छचव
को सामाचजक व पाररवाररक रूप से प्रभाचवत करते है ना चक
परोक्ष रूप से बैंक की छचव को प्रभाचवत करते है।
388 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

पूवभ में ICC के समक्ष हुए बयानों से यह स्पष्ट
है चक संदचभभत घर्ना के पूवभ कु० नेहा रानी तथा आरोप पचत्रत
अचधकारी के मध्य कोई मतभेद नहीं था, अतएव यह नहीं कहा
जा सकता चक संदचभभत चशकायती प्रकरण, कु० नेहा रानी द्वारा
चकसी प्रकार के पूवाभग्रह से ग्रचसत होकर उठाया गया था।

आरोप पचत्रत अचधकारी का यह कथन सत्य है
चक संदचभभत घर्ना यथा आरोप पचत्रत अचधकारी द्वारा
चशकायतकताभ के कंधे पर हाथ रखे जाने के सापेक्ष कोई
ठोस साक्ष्य नहीं है चकंतु कु० मोचनशा (MW-२) तथा
चशकायतकताभ के मध्य हुयी िैर् (Mex-१०),
चशकायतकताभ व आरोप पचत्रत अचधकारी के मध्य फोन पर
हुयी वाताभ की काल ररकाचडभग (Mex-११) एवं आरोप
पचत्रत अचधकारी के बयानों में दृचष्टगत चवरोधाभास से
चदनांक १७.१२.२०२३ को आरोप पचत्रत अचधकारी के
आवास पर हुये घर्नािम व चशकायतकताभ की चशकायत
को बल चमलता है व संभावना की प्रबलता के आधार पर
आरोप के चसि होने व चशकायती प्रकरण के सत्य होने की
संभावना प्रबल होती है। अतएव आरोप के संदभभ में आरोप
पचत्रत अचधकारी द्वारा प्रस्तुत प्रचतवाद स्वीकार योग्य नहीं
है।"

(रेखांचकत वाक्यांश पर चवशेष बल चदया गया)

१३. अतैः सक्षम अमधकारी ने आदेश मदनााँक
१५.०७.२०२५ द्वारा आरोप अनुच्छेद-१ मसद्ध पाया और
आरोप पमत्रत अमधकारी/यामचकाकताट के मवरूद्ध मनम्न
दण्डादेश पाररत मकयाैः-

"श्री अचखलेश िौहान, काचमभक सं० ९५९६, प्रबन्धक द्वारा कृत
कदािार पूणभ कृत्य हेतु उनके चवरूि जारी आरोप अनुच्छेद संदभभ
सं०
HO/IL/H-२९(२०२३-२४)/१२७०
चदनांक
२०.०२.२०२४ सहपचठत आरोपों की चववरणी संदभभ सं०
HO/IL/H-२९(२०२३-२४)/१२७१ चदनांक २०.०२.२०२४
के माध्यम से लगाये गये आरोप के चसि पाये जाने के सापेक्ष
आयाभवतभ बैंक (अचधकारी और कमभिारी) सेवा चवचनयमन, २०१०
के चवचनयम सं० ३९(१)(ख)(iii) के अंतगभत "अचनवायभ
सेवाचनवृचत्त", का दण्डादेश अचधरोचपत चकया जाता है।"

१४. यामचकाकताट द्वारा उपरोि दण्डादेश के मवरूद्ध एक
अपील मदनांमकत १७.२.२०२५, अपीलीय प्रामधकारी के समक्ष
दायर की, जो तथ्य व मवमधक पहलुओं पर संभावना की
प्रबलता/प्रचुरता के आधार पर, आदेश मदनांमकत ११.०८.२०२५
द्वारा मनरटत कर दी गई, मक सक्षम अमधकारी द्वारा पाररत मनणटय,
सकारण एवं समवटतार है और अमधरोमपत दण्ड यथावत रखा।

१५. उपरोि आदेश मदनांमकत १५.०१.२०२५ व
११.०८.२०२५, वतटमान यामचका में यामचकाकताट/आरोप पमत्रत
अमधकारी द्वारा आक्षेमपत मकयें गयें हैं।

यमवचकमकतमा/आरोप पवित अवधकमरी कम पक्ष

१६. (क) श्री अमदतेन्र मसंह, यामचकाकताट के मवद्वान
अमधविा नें प्रमतवेदन मकया मक, 'अमधमनयम २०१०' के प्रावधानों
के अंतगटत ' आंतररक पररवाद समममत' द्वारा जााँच आख्या को
अनुशासनात्मक कायटवाही में आधार नहीं बनाया गया। उि जााँच
आख्या के अनुसार 'घटना सत्य प्रतीत होती है' ऐसा मनधाटररत
मकया गया था और मनयोजक द्वारा 'न्यूनतम प्रमतफल की संटतुमत
की थी' परन्तु मनयोजक ने नये मसरे से अनुशासनात्मक कायटवाही
करी और आरोप को टवतंत्र रूप मसद्ध काररत करा और 'अमनवायट
सेवामनवृमत्त' का दण्डादेश पाररत कर मदया। जो 'अमधमनयम २०१०'
के मवमनयम ३१ के अंतगटत मुख्य शामटतयों में से एक है। यह
कायटवाही 'अमधमनयम २०१३' के उपबन्धों के पूणट रूप से मवपरीत
होने के कारण, आरम्भ से ही शून्य (वायड एब इमनमशयों) घोमित
करनी चामहयें।

(ख) मवद्वान अमधविा ने र्ेधम कोतिमल लेले
एिं अन्य प्रवत यूवनयन आफ इवण्डयम एिं अन्य;
(२०१३)१ एस.सी.सी. २९७ के मनणटय को संदमभटत करते हुए
अमभकथन मकया मक 'लैंमगक उत्पीडन की पररवाद समममत'
द्वारा की गई जााँच, अनुशासनात्मक कायटवाही के संदभट में जााँच
आख्या माननी चामहयें और सक्षम प्रामधकारी उि जााँच
आख्या के आधार व अनुशंसा पर ही दण्डादेश पाररत कर
सकते है। परन्तु वतटमान प्रकरण में बैक द्वारा 'आंतररक पररवाद
समममत' की जााँच आख्या के मनष्किट व मसफाररश को पूणट रूप
से अनदेखा करके, यामचकाकताट के मवरूद्ध नवीन रूप से
9 All. Akhilesh Chauhan Vs. Chairman, U.P. Gramin Bank & Ors.
389
अनुशासनात्मक कायटवाही करी और 'अमनवायट सेवामनवृमत्त' जो
मुख्य शामटतयों में से एक है, का दण्डादेश पाररत मकया। इस
प्रकार से 'अमधमनयम २०१३' के सभी उपबंधो की अवहेलना
की गयी, जो र्ेधम कोतिमल लेले (पूिा र्ें उवललवखत) व
उच्चतम न्यायालय द्वारा इसी मविय पर औरेवलयमनो
फनमानवडज़ प्रवत स्टेट आफ गोआ एिं अन्य (२०२४)१
एस.सी.सी. ६३२ के प्रकरण में पाररत मनणटय के भी मवरूद्ध
है। यहां यह टपष् मकया जाना आवमयक है मक 'र्ेधम
कोतिमल लेले (पूिा र्ें उवललवखत) 'अमधमनयम २०१३' के
लागू होने से पूवट का मनणटय है, जबमक औरेवलयमनो
फनमानवडज़ (पूिा र्ें उवललवखत) का मनणटय उि 'अमधमनयम
२०१३' के लागू होने के उपरांत पाररत मकया गया है परन्तु
मविय वटतु विट २०१३ से पूवट की है।

(ग) मवद्वान अमधविा ने आक्षेमपत आदेश को गुणदोि के संदभट में तकट मदया, मक 'आंतररक पररवाद समममत' ने कमथत
घटना को पूणट रूप से 'सत्य' नहीं माना और मात्र यह मनष्किट मदया
मक 'यह घटना सत्य प्रतीत होती है' और यामचकाकताट की अब तक
की साफ छमव को देखते हुए व उसके द्वारा क्षमा मांगने के कारण
बैंक से मनयमानुसार 'न्यूनतम प्रमतफल' की संटतुमत करी परन्तु इसके
मवपरीत बैंक के सक्षम अमधकारी द्वारा 'अमनवायट सेवामनवृमत्त' का
दण्डादेश अमधरोमपत मकया, जो अनुमचत है। सक्षम अमधकारी को
मात्र दण्डादेश का आदेश पाररत करना चामहए था वह भी छोटी
शामटतयों में एक दण्ड।

(घ) मवद्वान अमधविा ने यह भी प्रमतवेदन मकया
मक 'अमनवायट सेवामनवृमत्त' का आदेश आम तौर पर एक दंड नहीं
है और वो प्रशासन के सुधार एवं अक्षम कमटचाररयों को हटाने के
मलए जनमहत में मलया गया एक प्रासंमगक मनणटय हो सकता है।
वतटमान तथ्यों व 'आंतररक पररवाद समममत' की अनुशंसा के
दृमष्गत छोटी शामटतयों में से कोई एक दण्ड मदया जा सकता था।
इस कारण से भी यामचकाकताट के साथ अन्याय हुआ है।

प्रवतिमदी/वनयोक्त बैंक कम पक्ष

१७. (क) श्री रमेश कुमार शुक्ला, बैंक के मवद्वान
अमधविा ने उपरोि बहस के मवरोध में प्रमतवेदन मकया मक
'आंतररक पररवाद समममत' ने मनयोिा को यह टवतंत्रता दी की
वो उपरोि कृत्य को 'कदाचार' मानते हुए मनयमानुसार
कायटवाही करें। इसी कारण 'मवमनयम २०१०' के उपबन्धो के
अंतगटत, प्राकृमतक न्याय के मसद्धान्तो का पररपालन कर
यामचकाकताट व पीमडता का साक्ष्य और अन्य दटतावेज व
अन्य गवाहों के कथन को आधार बनाया व यामचकाकताट व
मशकायतकताट के घटना के कुछ समय उपरान्त हुई सचल
दूरभाि वाताटलाप को सुना भी और जााँच आख्या में भी
उकलेमखत मकया। इसके उपरान्त ही यह मनष्किट मदया मक
आरोप मसद्ध होता है और आरोप की गंभीरता के संदभट में वृहद
दण्डादेश का आदेश पाररत मकया, जो न्यायसंगत व उमचत है
और उसमें मकसी भी कारण से इस न्यायालय द्वारा हटताक्षेप न
करने की प्राथटना की।

(ख) 'अमधमनयम २०१३' के उपरान्त ऐसे
प्रकरण के जााँच की कायटवाही उि अमधमनयम के प्रावधानों के
अंतगटत ही हो सकती है तथा उसकी धारा १३ (३)(i) के
अऩुसार ही 'आंतररक पररवाद समममत' की मसफाररश पर
यामचकाकताट (प्रत्यथी) पर लागू सेवा मनयमों के उपबंधो के
अनुसार कदाचार के रूप में लैंमगक उत्पीडन की कायटवाही करी
और दण्डादेश पाररत मकया जो एक न्याय संगत आदेश है।

तथ्यमत्र्क ि विवधक विश्लेषण

१८. यहााँ यह अमववामदत है मक 'आंतररक पररवाद
समममत' की जााँच आख्या मदनांमकत २७.१२.२०२३ की एक
प्रमत, यामचकाकताट को प्राप्त होने के उपरांत भी उसने उि
आदेश के मवरूद्ध 'अमधमनयम २०१३' की धारा १८ के उपबंध
के अंतगटत कोई अपील दामखल नहीं करी। अतैः आंतररक
पररवाद समममत का मनष्किट मक 'सभी साक्ष्यों व बयानो के
आधार पर यह घटना सत्य प्रतीत होती है' मवमधक रूप से
अंमतम हो गया और इस टतर पर जब अनुशासनात्मक
कायटवाही भी पूणट हो चुकी है तब यामचकाकताट उि मनष्किट
को आक्षेमपत या खंमडत करने की प्राथटना नहीं कर सकता है।
अब एकमात्र प्रश्न यह रह जाता है मक 'आंतररक पररवाद
समममत' की मसफाररश की, 'ये बैंक द्वारा मनयमानुसार न्यूनतम
प्रमतफल की संटतुमत करती है' का मवमधक तात्पयट क्या है और
इन पररमटथमतयों में बैंक द्वारा क्या नवीन रूप से
390 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
अनुशासनात्मक कायटवाही की जा सकती है या उि मनष्किट व
अनुशंसा के दृमष्गत मात्र दण्डादेश ही पाररत मकया जा सकता
है।

१९. इस टतर पर कोलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा
प्रदीप र्ंडल प्रवत यूवनयन आफ इवण्डयम ि अऩ्य,
२०१६(४)सी.एच.एन. (सी.ए.एल.)११८, के प्रकरण में
पाररत मनणटय का संदभट लेना समीचीन होगा जहां वतटमान
प्रकरण के तथ्यों के समान तथ्यों के संदभट में मनम्न मनधाटररत
मकया गया मकैः-

(क) जब कमटचारी द्वारा 'आंतररक पररवाद
समममत' के मनष्किट व अनुशंसा के मवरूद्ध 'अमधमनयम २०१३'
की धारा १८ के अंतगटत कोई अपील दायर नहीं करी गयी हो
तो उि मनष्किट व अनुशंसा, मनयोिा पर आबद्धकारी होगी।

(ख) मनयोिा द्वारा 'आंतररक पररवाद समममत'
की जांच आख्या के उपरांत अनुशासनात्मक कायटवाही में
पाररत दण्डादेश और उसके मवरूद्ध अपील मनरटत होने के बाद
कमटचारी को 'आंतररक पररवाद समममत' के मनणटय के मवरूद्ध
अपील दायर करने की अनुममत नहीं दी जा सकती है।

(ग) उपरोि की दशा में 'अमधमनयम, २०१३'
की धारा १३(४) के अंतगटत 'आंतररक पररवाद समममत' का
मनष्किट व अनुशंसा को मनयोिा द्वारा या अनुशासनात्मक
अमधकारी या अपीलीय प्रामधकारी द्वारा कोई छेडछाड नहीं की
जा सकती है व वह मनयोिा पर पूणट रूप से बाध्य होती है
और अनुशासनात्मक प्रामधकारी को उि मनष्किट व अनुसंशा व
प्रकरण के तथ्यों के दृमष्गत, मात्र दण्डादेश पाररत करने का
अमधकार है। इस न्यायालय को उपरोि मवमधक मनष्किों का
अनुशरण करने में कोई मवमधक बाधा नहीं है।

२०. प्रदीप र्ंडल (पूिा र्ें उवललवखत) के प्रकरण में
पाररत मनणटय व 'अमधमनयम, २०१३' की धारा १३(४) के
दृमष्गत वतटमान प्रकरण में मनयोिा बैंक द्वारा 'आंतररक पररवाद
समममत' की जााँच आख्या के उपरान्त, नवीन रूप से
अनुशासनात्मक कायटवाही करने की कोई आवमयकता नहीं
थी। परन्तु जब अनुशासनात्मक कायटवाही का मनष्किट भी
आरोमपत आरोप को सत्य मानता है व उपलब्ध सामग्री के
आधार पर भी आरोप मसद्ध हुआ है मक यामचकाकताट नें
'लैंमगक उत्पीडन' का 'कदाचार' काररत मकया तो न्यायालय का
मत है मक उि अनुशासनात्मक कायटवाही 'अमनयममत' हो
सकती है, परन्तु 'अमवमधक' नहीं हो सकती है, क्योमक अन्ततैः
'आंतररक पररवाद समममत' का मनष्किट व 'अनुशासनात्मक
कायटवाही' का मनष्किट, समान है।

२१. अन्त में यह मनधाटररत करना है मक जबमक
'आंतररक पररवाद समममत' की अनुशंसा मक 'न्यूनतम
प्रमतफल' है तो क्या 'अमनवायट सेवामनवृमत्त' का दण्डादेश
जो एक वृहद शामटतयों में से एक है, न्यायसंगत होगा।
इस संदभट में न्यायालय का मत है मक चूाँमक
अनुशासनात्मक प्रामधकारी ने 'आंतररक पररवाद समममत'
की दण्ड के मलए की गयी अनुशंसा का संज्ञान ही नहीं
मलया था और इस कारण से न्यूनतम प्रमतफल का अथट,
अथाटत न्यूनतम दण्ड देने के मविय पर मवचार ही नहीं
मकया गया। अतैः इस टतर पर दण्डादेश का मनणटय, मवमध
मवरूद्ध हो जाता है।

२२. 'अमधमनयम, २०१३' एक 'मवशेि अमधमनयम' है
जो उच्चतम न्यायालय के एक महत्वपूणट मनणटय जो विशमखम
ि अन्य प्रवत रमजस्थमन सरकमर ि अन्य, (१९९७) ६
एस.सी.सी. २४१, के प्रकरण में मदनांक १३.०८.१९९७ को
पाररत मकया था। मजसके द्वारा कई महत्वपूणट मदशा मनदेश मदये
गये थे और उसी के पररणाम टवरूप करीब १६ विट बाद
'अमधमनयम, २०१३' अमधमनयममत हुआ। मजसका उद्देमय मनम्न
हैैः-

"लैंचगक उत्पीड़न के पररणामस्वरूप भारत के
संचवधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 15 के अधीन
समता तथा संचवधान के अनुच्छेद 21 के अधीन प्राण और
गररमा से जीवन व्ययतीत करने के चकसी मचहला के मूल
अचधकारों और चकसी वृचत्त का व्ययवसाय करने या कोई
उपजीचवका, व्ययापार या कारबार करने के अचधकार का,
चजसके अंतगभत लैंचगक उत्पीड़न से मुि सुरचक्षत वातावरण का
अचधकार
भी
है,
उल्लंघन
होता
है;
9 All. Sanjay Kumar Vs. Punjab National Bank & Ors.
391

और, लैंचगक उत्पीड़न से संरक्षण तथा गररमा से
कायभ करने का अचधकार, मचहलाओं के प्रचत सभी प्रकार के
चवभेदों को दूर करने संबधी अचभसमय जैसे अंतरराष्ट्ट्रीय
अचभसमयों और चलखतों द्वारा सवभव्ययापी मान्यताप्राि ऐसे
मानवाचधकार हैं, चजनका भारत सरकार द्वारा 25 जून, 1993
को अनुसमथभन चकया गया है;

और, कायभस्थल पर लैंचगक उत्पीड़न से
मचहलाओं के संरक्षण के चलए उि अचभसमय को प्रभावी करने
के चलए उपबंध करना समीिीन है;"

२३. यह भी अमववामदत मवमधक मसद्धान्त है मक
'मवशेि अमधमनयम' के उपबन्ध सामान्यतैः 'सामान्य
अमधमनयम' के उपबन्धों पर प्रबल होंगे एवं 'अमधमनयम
२०१३' की धारा २८ के अऩुसार इस अमधमनयम के उपबंध
तत्समय प्रवृत मकसी अन्य मवमध के उपबंध के अमतररि
होंगे न मक अकपीकरण में। यहााँ यह भी उकलेख करना
समीचीन होगा मक , 'मवमनयम २०१०' बैंक द्वारा आंतररक
मवियों पर लागू मवमनयम है इस कारण से भी 'अमधमनयम
२०१३' के उपबंध बैंक पर पूणट रूप से लागू है और
बाध्यकारी है एवं 'मवमनयम २०१०' के उपबंधो पर प्रबल
हैं।

२४. अतैः दण्डादेश वनरस्त मकया जाता है, एवं प्रकरण
को अनुशासनात्मक प्रामधकारी को प्रमत प्रेमित इस मनदेश के
साथ मकया जाता है मक वह 'आंतररक पररवाद समममत' की
अनुशंसा की 'न्यूनतम प्रमतफल की संटतुमत करने पर नये रूप
से मवचार करके नवीन दण्डादेश पाररत करेगा। एवं सुमनमश्चत
करेंगे मक यह प्रमिया आज से ३ माह के भीतर पूणट कर ली
जायें।

२५.