# Amit Kumar Pandey v. U.P. Gramin Bank & Ors

- **Citation:** (2025) 10 ILRA 396
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-10-07
- **Case number:** Writ A No. 12309 of 2025
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/amit-kumar-pandey-v-u-p-gramin-bank-ors-52660
- **Pages:** 8

## Headnote

Dharmendra Vaish, Pradeep Kumar Sinha

विचारणीय वििाद्यक
न्यायािय के समक्ष विचाराथा मुख्य वििाद्यक यह था
कक क्या याचचकाकताा के विरुद्ि बैंक द्िारा की गई
वििागीय अनुशासनात्मक कायािाह प्राकृनतक न्याय के
लसद्िान्तों के अनुरूप थी, क्या बैंक िन के गबन एिं
किाचार के आरोप स्िीकारोजक्त कथन सदहत उपिब्ि
साक्ष्यों के आिार पर विचिसम्मत रूप से लसद्ि होते हैं,
तथा क्या अनुशासनात्मक एिं अपीि य प्राचिकार द्िारा
पाररत पिच्युत का िण्ड िैि एिं तकासंगत है, जजससे
उच्च न्यायािय के हस्तक्षेप का कोई आिार बनता है या
नह ं।

हेडनोट
बड़ौदा यू.पी. बैंक (अधिकाररयों एिं कर्मचाररयों) सेिा
विननयर्, 2020 - ननयर् 39 - याधचकाकर्ाम जो एक
'विसल ब्लोअर' था, उत्तर प्रदेश ग्रार्ीण बैंक (अब बड़ौदा
यू.पी. बैंक) की शाखा फकीराबाद च़ौराहा, क़ौशाम्बी र्ें
कायामलय सहायक के पद पर 01.11.2019 से
20.12.2022 र्क कायमरर् था, जजसके द़ौरान उसके
विरुद्ि लगभग 40 लाख रुपये के बैंक िन के गबन,
ननयर्ों के उल्लंघन एिं कदाचार के गंभीर आरोप लगे।
आरोप था कक याधचकाकर्ाम ने 20-20 लाख रुपये एक
व्यजतर् अजय कुर्ार को ददए, जजसके संबंि र्ें उसका
स्िीकारोजतर् कथन एिं उसके िीडडयो फुटेज के साक्ष्य भी
उपलब्ि थे। ददनांक 15.03.2023 को 12 आरोपों का
आरोप पत्र जारी कर उसके विरुद्ि बड़ौदा यू.पी. बैंक
(अधिकाररयों एिं कर्मचाररयों) सेिा विननयर्, 2020 के
अंर्गमर् विभागीय अनुशासनात्र्क कायमिाही प्रारम्भ की
गई। जांच के द़ौरान याधचकाकर्ाम को सभी दस्र्ािेज
उपलब्ि कराए गए र्था सुनिाई का अिसर ददया गया,
ककन्र्ु जांच अधिकारी ने सभी आरोप ससद्ि पाए।
र्त्पश्चार्
सक्षर्
प्राधिकारी
द्िारा
ददनांक
17.12.2024 को याधचकाकर्ाम को पदच्युर् ककए जाने
का दंडादेश पाररर् ककया गया, जजसे अपीलीय प्राधिकारी
ने भी ददनांक 29.07.2025 को पुजटट प्रदान की। उतर्
आदेशों को चुऩौर्ी देर्े हुए याधचकाकर्ाम ने िर्मर्ान ररट
याधचका उच्च न्यायालय के सर्क्ष दाखखल की। (E-13)

असभननिामररर्: याचचकाकताा यह लसद्ि करने में असफि
रहा कक अनुशासननक कायािाह में प्राकृनतक न्याय के
लसद्िान्तों का उल्िंघन हुआ - उसे सिी िस्तािेज
उपिब्ि कराए गए तथा अपना पक्ष रखने का पयााप्त
अिसर दिया गया, ककंतु उसने बचाि अचिकार ननयुक्त
नह ं ककया और समुचचत सुनिाई के उपरान्त
अनुशासनात्मक प्राचिकार द्िारा सकारण आिेश पाररत
ककया गया - स्िीकारोजक्त कथन एक िबाि में दिया हुआ
कथन था यह लसद्ि करने में याचचकाकताा पूणातः
असफि रहा - िह अपने बचाि के समथान में कोई िी
साक्ष्य प्रस्तुत करने में िी पूणातः असफि रहा -
याचचकाकताा पर नकि की जजम्मेिार थी और नकि ,
कम िी हुयी, जो िगिग चाि स िाख रू० से अचिक थी
- याचचकाकताा को ह यह बताना था कक िह नकि कहााँ
गयी, क्योकक सी.सी.ट .िी में िी कुछ नह ं दिखाई दिया
10 All. Amit Kumar Pandey Vs. U.P. Gramin Bank & Ors.
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है - आक्षेवपत आिेश में यह िी लसद्ि पाया गया कक
याचचकाकताा ने 3 िाख रूपए की जमा रसीि जार की,
परंतु उक्त रालश खाते में जमा नह ं की गई, जो साक्ष्यों से
प्रमाखणत है, तथा इस संबंि में दिया गया उसका
स्पष्ट करण असंतोषजनक होने के कारण विचिसम्मत
रूप से अस्िीकार ककया गया - यह िी लसद्ि हुआ कक 45 खातों में ग्राहकों को नकि प्राजप्त की रसीिें ि गईं,
परंतु संबंचित रालशयााँ खातों में जमा नह ं की गईं, तथा
प्रिेखी साक्ष्यों से विरोिािासी पाए जाने के कारण
याचचकाकताा के स्पष्ट करण को अमान्य ठहराने में
अनुशासननक प्राचिकार द्िारा कोई त्रुदट नह ं की गई -
यह िी लसद्ि पाया गया कक याचचकाकताा ने कई दिनों
तक रोकडडया को एकि अलिरक्षा में रखा तथा संयुक्त
अलिरक्षा में न्यूनतम रोकड बनाए रखी, जो बैंक की
ननिााररत प्रकक्रया के विपर त है, और इन तथ्यों का उसने
प्रिािी खंडन नह ं ककया; अतः उक्त आरोप विचिसम्मत
रूप से लसद्ि हुए - अन्ततः यह पाया गया कक
याचचकाकताा एिं उसकी पत्नी के खातों में जमा िनरालश
उसकी ज्ञात आय से अचिक थी और यह स्पष्ट करण कक
उक्त रालश पररिार जनों द्िारा जमा की गई,
अविचिसनीय है, क्योंकक व्यिसाय से अजजात आय
सामान्यतः व्यिसाय के स्िामी के खाते में ह जमा होती
है, न कक ककसी ररचतेिार के खाते में - न्यायािय ने यह
ननष्कषा ननकािा कक याचचकाकताा के विरुद्ि सिी आरोप
विचिसंगत वििागीय प्रकक्रया के माध्यम से लसद्ि हुए हैं,
जजसमें प्राकृनतक न्याय के लसद्िान्तों का पूणातः पािन
ककया गया - अतः अनुशासनात्मक एिं अपीि य
प्राचिकार द्िारा पाररत आिेश विचिसम्मत एिं िैि पाए
गए -
अतः याचचका ननरस्त कर ि गई| [पैरा 11, 12]

उद्िृर् न्यानयक ननणमय
िाता राम बनाम उत्तर प्रिेश राज्य एिं अन्य,
2025:ए.एच.सीीः 165927

अधिननयर्ों की सूची
बडौिा यू.पी. बैंक (अचिकाररयों एि

## Text

396 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
is willing to do so following the due
procedure of law.

66. In view of the above discussion,
this Court finds no merit, accordingly,
dismissed.

----------
(2025) 10 ILRA 396
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 07.10.2025

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ A No. 12309 of 2025

Amit Kumar Pandey ...Petitioner
Versus
U.P. Gramin Bank & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Kuldeep Kumar Mishra, Surendra Kumar
Chaubey

Counsel for the Respondents:
Dharmendra Vaish, Pradeep Kumar Sinha

विचारणीय वििाद्यक
न्यायािय के समक्ष विचाराथा मुख्य वििाद्यक यह था
कक क्या याचचकाकताा के विरुद्ि बैंक द्िारा की गई
वििागीय अनुशासनात्मक कायािाह प्राकृनतक न्याय के
लसद्िान्तों के अनुरूप थी, क्या बैंक िन के गबन एिं
किाचार के आरोप स्िीकारोजक्त कथन सदहत उपिब्ि
साक्ष्यों के आिार पर विचिसम्मत रूप से लसद्ि होते हैं,
तथा क्या अनुशासनात्मक एिं अपीि य प्राचिकार द्िारा
पाररत पिच्युत का िण्ड िैि एिं तकासंगत है, जजससे
उच्च न्यायािय के हस्तक्षेप का कोई आिार बनता है या
नह ं।

हेडनोट
बड़ौदा यू.पी. बैंक (अधिकाररयों एिं कर्मचाररयों) सेिा
विननयर्, 2020 - ननयर् 39 - याधचकाकर्ाम जो एक
'विसल ब्लोअर' था, उत्तर प्रदेश ग्रार्ीण बैंक (अब बड़ौदा
यू.पी. बैंक) की शाखा फकीराबाद च़ौराहा, क़ौशाम्बी र्ें
कायामलय सहायक के पद पर 01.11.2019 से
20.12.2022 र्क कायमरर् था, जजसके द़ौरान उसके
विरुद्ि लगभग 40 लाख रुपये के बैंक िन के गबन,
ननयर्ों के उल्लंघन एिं कदाचार के गंभीर आरोप लगे।
आरोप था कक याधचकाकर्ाम ने 20-20 लाख रुपये एक
व्यजतर् अजय कुर्ार को ददए, जजसके संबंि र्ें उसका
स्िीकारोजतर् कथन एिं उसके िीडडयो फुटेज के साक्ष्य भी
उपलब्ि थे। ददनांक 15.03.2023 को 12 आरोपों का
आरोप पत्र जारी कर उसके विरुद्ि बड़ौदा यू.पी. बैंक
(अधिकाररयों एिं कर्मचाररयों) सेिा विननयर्, 2020 के
अंर्गमर् विभागीय अनुशासनात्र्क कायमिाही प्रारम्भ की
गई। जांच के द़ौरान याधचकाकर्ाम को सभी दस्र्ािेज
उपलब्ि कराए गए र्था सुनिाई का अिसर ददया गया,
ककन्र्ु जांच अधिकारी ने सभी आरोप ससद्ि पाए।
र्त्पश्चार्
सक्षर्
प्राधिकारी
द्िारा
ददनांक
17.12.2024 को याधचकाकर्ाम को पदच्युर् ककए जाने
का दंडादेश पाररर् ककया गया, जजसे अपीलीय प्राधिकारी
ने भी ददनांक 29.07.2025 को पुजटट प्रदान की। उतर्
आदेशों को चुऩौर्ी देर्े हुए याधचकाकर्ाम ने िर्मर्ान ररट
याधचका उच्च न्यायालय के सर्क्ष दाखखल की। (E-13)

असभननिामररर्: याचचकाकताा यह लसद्ि करने में असफि
रहा कक अनुशासननक कायािाह में प्राकृनतक न्याय के
लसद्िान्तों का उल्िंघन हुआ - उसे सिी िस्तािेज
उपिब्ि कराए गए तथा अपना पक्ष रखने का पयााप्त
अिसर दिया गया, ककंतु उसने बचाि अचिकार ननयुक्त
नह ं ककया और समुचचत सुनिाई के उपरान्त
अनुशासनात्मक प्राचिकार द्िारा सकारण आिेश पाररत
ककया गया - स्िीकारोजक्त कथन एक िबाि में दिया हुआ
कथन था यह लसद्ि करने में याचचकाकताा पूणातः
असफि रहा - िह अपने बचाि के समथान में कोई िी
साक्ष्य प्रस्तुत करने में िी पूणातः असफि रहा -
याचचकाकताा पर नकि की जजम्मेिार थी और नकि ,
कम िी हुयी, जो िगिग चाि स िाख रू० से अचिक थी
- याचचकाकताा को ह यह बताना था कक िह नकि कहााँ
गयी, क्योकक सी.सी.ट .िी में िी कुछ नह ं दिखाई दिया
10 All. Amit Kumar Pandey Vs. U.P. Gramin Bank & Ors.
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है - आक्षेवपत आिेश में यह िी लसद्ि पाया गया कक
याचचकाकताा ने 3 िाख रूपए की जमा रसीि जार की,
परंतु उक्त रालश खाते में जमा नह ं की गई, जो साक्ष्यों से
प्रमाखणत है, तथा इस संबंि में दिया गया उसका
स्पष्ट करण असंतोषजनक होने के कारण विचिसम्मत
रूप से अस्िीकार ककया गया - यह िी लसद्ि हुआ कक 45 खातों में ग्राहकों को नकि प्राजप्त की रसीिें ि गईं,
परंतु संबंचित रालशयााँ खातों में जमा नह ं की गईं, तथा
प्रिेखी साक्ष्यों से विरोिािासी पाए जाने के कारण
याचचकाकताा के स्पष्ट करण को अमान्य ठहराने में
अनुशासननक प्राचिकार द्िारा कोई त्रुदट नह ं की गई -
यह िी लसद्ि पाया गया कक याचचकाकताा ने कई दिनों
तक रोकडडया को एकि अलिरक्षा में रखा तथा संयुक्त
अलिरक्षा में न्यूनतम रोकड बनाए रखी, जो बैंक की
ननिााररत प्रकक्रया के विपर त है, और इन तथ्यों का उसने
प्रिािी खंडन नह ं ककया; अतः उक्त आरोप विचिसम्मत
रूप से लसद्ि हुए - अन्ततः यह पाया गया कक
याचचकाकताा एिं उसकी पत्नी के खातों में जमा िनरालश
उसकी ज्ञात आय से अचिक थी और यह स्पष्ट करण कक
उक्त रालश पररिार जनों द्िारा जमा की गई,
अविचिसनीय है, क्योंकक व्यिसाय से अजजात आय
सामान्यतः व्यिसाय के स्िामी के खाते में ह जमा होती
है, न कक ककसी ररचतेिार के खाते में - न्यायािय ने यह
ननष्कषा ननकािा कक याचचकाकताा के विरुद्ि सिी आरोप
विचिसंगत वििागीय प्रकक्रया के माध्यम से लसद्ि हुए हैं,
जजसमें प्राकृनतक न्याय के लसद्िान्तों का पूणातः पािन
ककया गया - अतः अनुशासनात्मक एिं अपीि य
प्राचिकार द्िारा पाररत आिेश विचिसम्मत एिं िैि पाए
गए -
अतः याचचका ननरस्त कर ि गई| [पैरा 11, 12]

उद्िृर् न्यानयक ननणमय
िाता राम बनाम उत्तर प्रिेश राज्य एिं अन्य,
2025:ए.एच.सीीः 165927

अधिननयर्ों की सूची
बडौिा यू.पी. बैंक (अचिकाररयों एिं कमाचाररयों) सेिा
विननयम, 2020
कुंजी शब्दों की सूची
उच्च अचिकाररयों; विसि ब्िोअर; सहायक; कायाकाि
के िौरान; िरुपयोग; गबन; बैंक िन; व्यिहरण;
अनुशासनात्मक
कारािाई;
दिव्यांग;
भ्रष्टाचार;
िापरिाह ;
छवि;
िनीय
हानी;
विचिासनीयता;
स्िीकारोजक्त; िबाि; साक्ष्य; सी.सी.ट .िी.; संव्यिहार;
िस्तािे़ि; जांच अचिकार ; अपीि; सुनिाई; िण्डािेश;
पिच्युत; ननिंबन अिचि; ननिााह ित्ता; क्षेत्रीय प्रबंिक;
प्रिेखी साक्ष्य; नकि ; जमा िनराशी; लशकायत; चािू
खातािारक ग्राहक; कैश प्राजप्त की रशीि; न्यायसंगत;
प्राकृनतक न्याय

उत्पन्न र्ार्ला
मूि अचिकाररता: ररट ए संख्या 12309 / 2025
अपीि प्राचिकार - क्षेत्रीय प्रबंिक, बडौिा यू.पी. बैंक,
कौशाम्बी द्िारा अपीि में पाररत आिेश एिं ननणाय
दिनांक 29.07.2025

पक्षकारों की ओर से उपजस्थर्
याचचकाकताा के लिए अचििक्ता:
कुिि प कुमार लमश्रा, सुरेन्द्र कुमार चौबे
प्रनतिाि गण के लिए अचििक्ता;
िमेन्द्र विश, प्रि प कुमार लसन्हा

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

१. उत्तर प्रिेश ग्र मीण बैंक (अब बड़ौि यू.पी. बैंक)
की श ख फकीर ब ि चौर ह , कौश म्बी में क य गलय सह यक
के पि पर दिन ाँक ०१.११.२०१९ से दिन ाँक २०.१२.२०२२
के क यगक ल के िौर न, य दचक कत ग के दवरूद्ध िुरुपयोग,
गबन, व्यवहरण के गम्भीर आरोप लगे, दक उसने ४० ल ख
रूपए क गबन दकय और एक स्वीक रोदि कथन भी दिय ,
दजसक दवदडयो स क्ष्य भी उपलब्ि रह , दक उसने २०-२०
ल ख रूपए एक अजय कुम र न मक व्यदि को दिये, इसके
स थ ही उसके दवरूद्ध अन्य भी आरोप लग ए गये। इस प्रक र
एक आरोप पत्र दिन ंदकत १५.०३.२०२३, दजसमें १२ आरोप
रहे, उसको प्रेदषत दकय । ति्िम में उपरोि क दमगक के दवरूद्ध
398 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
बडौि यू०पी० बैंक (अदिक ररयों एवं कमगच ररयों) सेव
दवदनयम, २०२० के प्र वि नों के अंतगगत, एक अनुश सदनक
क यगव ही प्र रम्भ की गयी थी।

२. संक्षेप में य दचक कत ग के दवरूद्ध लग ये गये आरोपों
को दनम्न रूप से वदणगत दकय ज सकत है दक य दचक कत ग
द्व र बैंक िन क गबन दकय गय , उसके द्व र बैंक के
दनयमों, दनिेशों, स्थ दपत प्रदिय क घोर उकलंघन दकय गय ,
उसके कृत्य बैंक दहतों के दवरूद्ध रहे एवं उसके द्व र उसके
कतगव्यों के दनवगहन में ज नबूझकर ल परव ही बरती गयी, उसके
कृत्यों से बैंक को िनीय ह दन हुई, उसके कृत्यों से बैंक की
छदव दवपरीत रूप से प्रभ दवत हुई और उसके कृत्यों से
आमजनम नस में बैंक कमगच ररयों की दवश्वसनीयत िूदमल हुई।

३. य दचक कत ग ने आरोप पत्र क दलदखत उत्तर दिय
और मुख्य रूप से यह कथन दकय दक उसक स्वीक रोदि
कथन क दवदडयो जबरिस्ती व उसके ऊपर िब व ड लकर
बनव य गय थ । वह न तो अजय कुम र न मक दकसी व्यदि
को ज नत है और न ही उसने च लीस ल ख रूपए (२०-२०
ल ख) उस व्यदि को दिये। उदचत समय क सी.सी.टी.वी.
फुटेज ब र-ब र म ंगने पर भी नहीं दिय । कुछ त्रुदटय ाँ उससे हुई
होंगी पर वह गबन य व्यवहरण की श्रेणी में नहीं आती है।
उसके और उसकी पत्नी के बैंक ख तों में आयी िनर दश क
उसने युदियुि दववरण दिय दक वह उससे अदभभ वक द्व र
िी गयी िनर दश थी, जो उसके बैंक ख ते में जम की गयी है।
सी.सी.टी.वी. फुटेज जो अनुश सन त्मक प्रदिय के िौर न
प्रस्तुत दकय गय , उसमें यह नहीं पररलदक्षत होत है, दक
य दचक कत ग ने च लीस ल ख रूपए दकसी भी व्यदि को दिये
और यह भी दक गबन की गई िनर दश च लीस ल ख रूपए से
अदिक थी और शेष र दश जो एक ल ख रूपए से ऊपर थी,
उसक कोई भी दववरण न तो बैंक कमगच ररयों ने दिय और न
ही अनुश सन त्मक प्रदिय में ही प्रस्तुत दकय गय ।

४. य दचक कत ग, एक 'दवसल ब्लोअर' थ , जो बैंक में
उच्च अदिक ररयों द्व र दकये ज ने व ले भ्रष्ट च र के दवरूद्ध
आव ज उठ त थ । जो उच्च अदिक ररयों को न गव र गुजर ।
इसी क रण से उन्होंने, य दचक कत ग को झूठे प्रकरण में फंस य ।
उसने यह भी प्रिदशगत करने की चेष्ट करी की बैंक से च लीस
ल ख रूपए २०-२० ल ख रूपए के रूप में दजसको दकसी बड़े
बैग में ही ले ज य ज सकत है, परन्तु दकसी भी स्तर पर ऐसी
कोई सी.सी.टी.वी. फुटेज, जह ाँ कोई अन्ज न व्यदि बैंक से
ऐसे दकसी भी तरह क बैग इत्य दि ज त हुआ नहीं दिख यी
दिय है। य दचक कत ग को दबन बत ए, पुदलस को बुल न और
उसके द्व र म रपीट करन और इस िब व में कोई भी
स्वीक रोदि कथन म न्य नहीं दकय ज न च दहए थ ।

५. अनुश सन त्मक प्रदिय के िौर न, ज ंच अदिक री
ने क यगव ही दिन ंक ०४.११.२०२३ को प्र रम्भ करी और
जैस दक पत्र वली में उपदस्थत प्रपत्रों मे स्पष्ट रूप से
उदकलदखत दकय गय है, दक य दचक कत ग दिन ंक
१५.०९.२०२३, १०.११.२०२३ व २४.११.२०२३ को
क यगव ही के समय उपदस्थत रह और उसको ज ाँच अदिक री
ने अपने बच व प्रदतदनदि को दनयुि करने क ब र-ब र अवसर
प्रि न दकय , परन्तु कोई युदियुि क रण न िेते हुए, उसने कोई
भी बच व प्रदतदनदि दनयुि नहीं दकय । ज ाँच आख्य में यह
भी उदकलदखत दकय गय है, दक य दचक कत ग को सभी प्रपत्र
(एन.ई. ०१-एन.ई. ३९२) उपलब्ि कर ए गये, दजसक
दवस्तृत दववरण, ज ाँच आख्य में उदकलदखत दकय गय है।
अनुश सन त्मक प्रदिय में प्रबन्िन की तरफ से च र प्रबन्िन
गव ह प्रस्तुत दकये गये। य दचक कत ग ने भी कुल ६ िस्त वेज
(बी.ई. १-६) प्रस्तुत दकये और एक बच व गव ह क भी
कथन अदभदलदखत कर य और अन्ततः उभयपक्षों की सहमदत
से ज ंच क यगव ही दिन ंक ११.०६.२०२४ को सम प्त की गयी।
इसके उपर न्त आरोदपत कमगच री/य दचक कत ग को १० दिन
क समय उपलब्ि कर य दक वह दलदखत प्रत्युत्तर प्रस्तुत कर
सके, परन्तु तीन अनुस्म रक पत्रों के ब ि दलदखत प्रत्युत्तर
दिन ंक १०.०९.२०२४ को प्रस्तुत दकय गय । ज ाँच अदिक री
नें ज ाँच आख्य , दिन ंदकत २१.१०.२०२४, सक्षम अदिक री
को प्रेदषत की गयी, दजसके अनुस र सभी आरोप दसद्ध प ये
गये।

६. सक्षम अदिक री ने एक क रण बत ओ नोदटस,
ज ाँच आख्य को संलग्न करते हुए य दचक कत ग को प्रेदषत
दकय गय और उसको अपन प्रदतवेिन प्रस्तुत करने के दलए
समय वदि भी प्रि न की और पुनः उसके प्र थगन पर अदतररि
समय वदि प्रि न करी गयी। अन्ततः आरोदपत कमगच री दिन ंक
10 All. Amit Kumar Pandey Vs. U.P. Gramin Bank & Ors.
399
२०.११.२०२४ को सक्षम अदिक री के समक्ष प्रस्तुत हुआ
और अपन पक्ष दवस्तृत रूप से रख , दजसक दववरण सक्षम
अदिक री के आिेश दिन ंक १७.१२.२०२४ में दवस्तृत रूप से
दकय गय है। आरोदपत कमगच री ने पुनः अपने बच व में अपने
ऊपर लगे आरोपों से इन्क र करते हुए, यह प्रदतवेिन प्रस्तुत
दकय दक उसको झूठ फंस य गय है और उदचत समय क
सी.सी.टी.वी. फुटेज अनुश सदनक प्रदिय में प्रस्तुत नहीं दकय
गय है। वह दकसी भी अजय कुम र न मक व्यदि को नहीं
ज नत है और सी.सी.टी.वी. फुटेज से कहीं भी पररलदक्षत
नहीं है दक उसने २०-२० ल ख रूपए (कुल ४० ल ख रूपए)
दकसी अन्ज न य अजय कुम र न मक व्यदि को दिये। उसने
पुनः कथन दकय दक उसके द्व र दिय गय स्वीक रोदि कथन
दजसक दवदडयो, स क्ष्य के रूप में प्रस्तुत दकय गय है, वह
िब व में दिय गय कथन है, अतः उस पर दवश्व स न दकय
ज ए।

७. सक्षम अदिक री ने उपरोि सभी बच व के कथन
क परीक्षण दकय और अन्ततः उपरोि आिेश दिन ंदकत
१७.१२.२०२४ द्व र सभी आरोपों को दसद्ध प ते हुए 'पिच्युत'
क िण्ड प ररत दकय । उि आिेश के महत्वपूणग अंश दनम्न
उदकलदखत दकये ज रहें हैंः-

सक्षम प्राधिकारी/क्षेत्रीय
प्रबंिक
का
अधिमतः- मैं सक्षम प्रादिकारी यि पाता ि ूँ दक चूूँदक
आरोदपत कमवचारी के दवरुद्ध दभयोग संख्या १ से १२ दसद्ध
पाए गए िैं, अतः इसके आिार पर आरोप संख्या १,२,३,४,५
व ६ को दनम्नानुसार दसद्ध पाता ि ूँ।

१. श्री अदमत कुमार पाण्डेय द्वारा बैंक िन का
गबन दकया गया ।

२. श्री अदमत कुमार पाण्डेय द्वारा बैंक के
दनयमों, दनदेशों एवं स्थादपत प्रदिया का घोर उल्लंघन दकया
गया।

३. श्री अदमत कुमार पाण्डेय के कृत्य बैंक दितों
के दवरुद्ध िैं एवं उनके द्वारा अपने कतव्यों के दनवविन में
जानबूझकर लापरवािी बरती गई।

४. श्री अदमत कुमार पाण्डेय के कृत्यों से बैंक
को िनीय िादन िुई।

५. श्री अदमत कुमार पाण्डेय के कृत्यों से बैंक
की छदव दवपरीत रूप से प्रभादवत िुई।

६. श्री अदमत कुमार पाण्डेय के कृत्यों से आम
जनमानस में बैंक कमवचाररयों की दवश्वसनीयता िूदमल िुई।

अिोिस्ताक्षरी द्वारा जांच अदिकारी की जांच
आख्या ददनांदकत २१.१०.२०२४ का अवलोकन दकया गया
और यि पाया दक जांच कायवािी के दौरान आरोदपत कमवचारी
द्वारा प्रस्तुत तकों, गवाि और प्रासंदगक मुद्दों पर जांच
अदिकारी गिराई से दवचार दकया गया और अपनी जांच
आख्या में सदम्मदलत दकया गया िै। जांच अदिकारी की जांच
आख्या अदभयोग के तथ्यों पर आिाररत िै।

मैं पाता ि ूँ दक जांच अदिकारी द्वारा जांच
कायवािी के दौरान आरोदपत कमवचारी को साक्ष्यों व दस्तावेजों
के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के दलए पयावप्त अवसर
प्रदान दकए गए। आरोदपत कमवचारी द्वारा अपने पक्ष में कोई
दस्तावेजीय साक्ष्य प्रस्तुत निीं दकया गया दजससे यि दसद्ध िो
सके दक उि ज्ञापन पत्र में उदल्लदखत अदभयोग व आरोप
उनके द्वारा काररत निीं दकए गए िै।

मैं पाता ि ूँ दक श्री अदमत कुमार पाण्डेय द्वारा
अपने प्रदतवेदन ददनांदकत ११.११.२०२४ में कुछ भी नया
प्रस्तुत निीं गया जो उनके कृत्यों का समथवन करे साथ िी
अपने उि प्रदतवेदन के समथवन में कोई साक्ष्य/दस्तावेज प्रस्तुत
दकया गया िै। आरोदपत कमवचारी द्वारा अपने बचाव में ददए गए
तकव आिारिीन, अप्रासंदगक, अस्पष्ट व मनगढंत प्रतीत िोते िै
जो दक बैंक के दनयमों, दनदेशों एवं दनिावररत प्रदिया के
दवपरीत िै।

व्यदिगत सुनवाई ददनांक २०.११.२०२४ के
दौरान आरोदपत कमवचारी द्वारा अपना पक्ष दनम्नवत रखा गया -

"मिोदय जी मेरे द्वारा सारी कायवािी प्रदिया में
शाखा में लगे CCTV कैमरे के अवलोकन से सत्य असत्य
400 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
को स्पष्ट करने को बोला गया िै परन्तु मेरे द्वारा किी िुयी बातों
को ध्यान निीं ददया गया िै। शाखा में ४१ लाख लगभग रादश
कम िो गयी थी शाखा में इतनी बडी िनरादश कम िो गयी
और जो CCTV कैमरे में कैद निीं िो पाई और दकसी
ररकॉडव में निीं आ पाया जबदक दो लोगो की दजम्मेदारी में कैश
था दिर भी पैसा कम िो गया पैसा कैसे शाखा में कम गया
इसकी जांच पिले िोनी चादिए थी जो की ऐसा निीं िुआ और
गमन का आरोपी बना कर मेरे ऊपर कायवािी शुरू कर दी
गयी क्या संभव िै की शाखा से पैसा गायब िो जाये और
CCTV कैमरे और शाखा दसस्टम ररकॉडव में ना आए। मेरे
द्वारा दनवेदन िै दक नैसदगवक न्याय के अंतगवत शाखा में लगे
CCTV कैमरे को सवोतम प्राथदमकता देते िुए सत्य असत्य
की जांच दकया जाये CCTV कैमरा एक ऐसा साक्ष्य िै जो
की ना बनाया जा सकता िै और ना िी बदला सकता िै। जी
मेरा दवनम्र दनवेदन िै की CCTV कैमरे के अवलोकन से िी
स्पष्ट करके मुझे न्याय ददलाने की कृपा करें।"

मैं पाता ि ूँ दक व्यदिगत सुनवाई ददनांक
२०.११.२०२४ के दौरान आरोदपत कमवचारी द्वारा कोई नया
तथ्य, साक्ष्य व दस्तावेज प्रस्तुत निीं दकया गया बदल्क जांच
कायवािी के दौरान ददए गए अपने अदभकथन को िी दोिराया
गया िै। इनके द्वारा उठाए गए CCTV के प्रकरण को जांच
अदिकारी द्वारा पिले िी अपनी जांच ररपोटव में समादित दकया
जा चुका िै। उि सुनवाई में आरोदपत कमवचारी द्वारा स्वयं यि
स्वीकार दकया गया िै दक "दो लोगों की दजम्मेदारी में कैश था
दिर भी पैसा कम िो गया"।

उपरोि समस्त के आिार पर मैं पाता ि ं दक बैंक
कमी के रूप में आरोदपत कमवचारी से अपेदक्षत था दक वे अपने
कतव्यों का दनवविन दनष्ठापूववक करते एवं बैंक के दनयमों,
दनदेशों एवं दनिावररत प्रदिया का पालन करते िुए बैंक की छदव
और दवश्वास को खातािारकों के दलए सवोत्तम रखते िुए कायव
दनष्पादन करते| आरोदपत कमवचारी द्वारा ऐसा निीं दकया गया।
आरोदपत कमवचारी ने बैंक दनयमों एवं दनदेशों के अंतगवत अपने
कतव्यों का दनष्ठापूववक पालन निीं दकया एवं बैंक के दनयमों,
दनदेशों एवं दनिावररत प्रदिया का उल्लंघन दकया िै। आरोदपत
कमवचारी द्वारा दकये गए उि सभी संव्यविार (सन्देिास्पद िैं
तथा अनदिकृत एवं बददनयती से दकये गए िैं दजससे बैंक को
िनीय िादन िुई तथा बैंक की छदव दवपरीत रूप से प्रभादवत
िुई िै।

बैंक दितों के प्रदतकूल आरोदपत कमवचारी के
ज्ञापन पत्र (मेमोरेंडम) में वदणवत कृत्य जो दसद्ध पाए गए िै,
बडौदा यू. पी. (अदिकाररयों और कमवचाररयों) सेवा दवदनयम,
२०२० के अंतगवत कदाचार की श्रेणी में आते िै तथा आरोदपत
िमचारी दंड के पात्र िै।

अतः मामले से सम्बंदित समस्त तथ्यों एवं
पररदस्थदतयों पर गिन दवचारोपरांत मैं सक्षम प्रादिकारी एतद्वारा
बडौदा यू.पी. बैंक (अदिकाररयों और कमवचाररयों) सेवा
दवदनयम, २०२० के दवदनयम ३९ के अंतगवत आरोदपत
कमवचारी श्री अदमत कुमार पाण्डेय (क.कू.सं. ११४८३),
कायावलय सिायक (दनलंदबत) पर दनम्न दंड अदिरोदपत करता
ि ूँ, जो आदेश की दतदथ से प्रभावी िोगा

पदच्युधत (Dismissal)

दनलम्बन अवदि को ड्यूटी में व्यतीत की गई
अवदि के रूप में निीं माना जाएगा। श्री अदमत कुमार पाण्डेय
(क.कू.सं. ११४८३), कायावलय सिायक (दनलंदबत) को
दनलंबन की अवदि के दलए कोई वेतन व भत्ता देय निीं िोगा
दसवाय
जीवन
दनवावि
भत्ता
(Subsistence
allowance) के, जो उन्िें पूवव में प्राप्त िो चुका िै।

श्री अदमत कुमार पाण्डेय यदद चािें तो उि
आदेश की प्रादप्त के ४५ ददनों के अन्दर बडौदा यू. पी. बैंक
(अदिकाररयों और कमवचाररयों सेवा दवदनयम, २०२० समय
समय पर संशोदित) के प्रासंदगक दवदनयमों के अंतगवत
अपीलीय अदिकारी को अपनी अपील प्रस्तुत कर सकते िैं।

उपरोि दवभागीय जांच अंदतम रूप से दनस्ताररत
की जाती िै।"

८. य दचक कत ग के द्व र प्रस्तुत की गयी अपील को भी
दवस्तृत और सक रण आिेश दिन ंदकत २९.०७.२०२५ द्व र ,
क्षेत्रीय प्रबन्िक ने दनरस्त करी और सक्षम प्र दिक री द्व र
10 All. Amit Kumar Pandey Vs. U.P. Gramin Bank & Ors.
401
प ररत तकगसम्मत, उदचत व युदियुि आिेश और तकगसंगत
िण्ड िेश को सही म न व म न्य दकय ।

९. य दचक कत ग के दवद्व न अदिवि ने दनम्न प्रदतवेिन
दकयेः-

क. अजय न म क कोई भी व्यदि नहीं है और
उसको ढूढने की भी कोई चेष्ट नहीं की गयी।

ख. दकसी भी सी.सी.टी.वी. फुटेज/वीदडयों में
य दचक कत ग द्व र २०-२० ल ख रू०, दकसी भी व्यदि को
िेते हुए नहीं दिख ई िेत है।

ग. बैंक से इतनी बड़ी म त्र में िन, दबन दकसी
सी.सी.टी.वी. में ररक डग हुए दकसी व्यदि द्व र ले ज न संभव
नहीं है।

घ. कुल च दलस ल ख के ऊपर िन ग यब हुआ
है य दचक कत ग पर ४० ल ख क आरोप है परन्तु शेष िनर दश
(एक ल ख से अदिक की) अब तक न तो बर मि हुई और न
ही कोई और आरोपी बन य गय ।

ङ. स्वीक रोदि कथन िब व में दिय हुआ
कथन थ जो पुदलस के द्व र म र-पीट करने के ब ि दिय है।
अतः म न्य नहीं है। यह भी ध्य न नहीं दिय गय दक
य दचक कत ग एक दिव्य ंग है।

च. य दचक कत ग एक 'वीदसल ब्लोअर' रह
और इसी क रण से उसके उच्च अदिक ररयों द्व र उसको
फंस य गय ।

छ. अन्य आरोप भी दबन दकसी स क्ष्य के दसद्ध
करें गयें है जो न्य यसंगत नहीं है।

ज. य दचक कत ग ने अपने व अपनी पत्नी के
ख तों के जम िनर दश क भी युदियुि दववरण दिय परन्तु
वह आरोप भी अक रण ही दसद्ध म न गय ।

१०. उपरोि दनवेिन क दवरोि, बैंक के दवद्व न
अदिवि द्व र दकय गय एवं उसने दनम्न दनवेिन दकय ः-

क. अनुश सन त्मक प्रदिय में प्र कृदतक न्य य
के सभी दसद्ध न्तों क पूणग रूप से पररप लन दकय गय ।

ख. य दचक कत ग ने, स्वयं की इच्छ से, दबन
दकसी िब व से स्वीक रोदि कथन दिय दजसकी वीदडयोग्र फी
भी की गयी। दकसी भी तरह से कोई अनुव त ग कथन म न्य नहीं
दकय ज न च दहयें।

ग. य दचक कत ग ने स्वःइच्छ से स्वीक र दकय
दक उसने २०-२० ल ख रू० एक अजय न मक व्यदि को
दिय और केवल इस क रण दक वो सी.सी.टी.वी में नहीं दिख
रह , यह नहीं म न ज सकत दक ऐस नहीं हुआ, क्योदक
य दचक कत ग जो तत्समय नकिी के दलए दजम्मेि र थ और वो
यह बत ने में असफल रह दक इतनी बडी रकम ग यब कैसे हो
गयी।

घ. य दचक कत ग को अनुश सदनक प्रदिय के
िौर न सम्पूणग पत्र वली उपलब्ि कर यी गयी थी और अन्य
अदनयदमतत ओं के सम्बंि में भी उसनें कोई युदियुि
स्पष्टीकरण नहीं दिय । और न ही कोई युदियुि क रण बत य
गय दक बड़ी-बड़ी िनर दश उसके अदभभ वको व ररश्तेि रों
द्व र जो व्यवस य से उप दजगत की गयी उसके बैंक ख ते में
जम की गयी।

११. उपरोि के संिभग में इस न्य य लय क दवश्लेषण
एवं दनष्ट्कषग दनम्न हैः-

क. य दचक कत ग द्व र अनुश सदनक प्रदिय में
दकये गये दवदभन्न आलेखों िस्त वेजो के संिभग में यह प्रिदशगत
करने में असमथग रह दक प्रदिय में प्र कृदतक न्य य के
दसद्ध न्तों क पररप लन नहीं हुआ। उसको सभी आलेख दिये
गये। उसको अपन पक्ष रखने क सम्पूणग अवसर प्रि न दकय
गय , परन्तु उसने बच व अदिक री को दनयुि करने की
क यगव ही नहीं करी। ज ाँच आख्य के पररशीलन क मौक िेने
व अनुश सन त्मक प्र दिक री द्व र य दचक कत ग को उदचत
सुनव ई के उपर न्त ही एक सक रण एवं दवस्तृत आिेश प ररत
दकय ।

ख. स्वीक रोदि कथन एक िब व में दिय हुआ
कथन थ यह दसद्ध करने में य दचक कत ग पूणगतः असफल रह ।
402 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
वह अपने बच व के समथगन में कोई भी स क्ष्य प्रस्तुत करने में
भी पूणगतः असफल रह ।

ग. आक्षेदपत आिेश के पररशीलन से यह दवदित
है दक म त्र स्वीक रोदि कथन पर आि ररत आिेश नहीं वरन्
अन्य स क्ष्यों को भी आि र म न कर एक सक रण आिेश
प ररत दकय । य दचक कत ग पर नकि की दजम्मेि री थी और
नकिी, कम भी हुयी, जो लगभग च लीस ल ख रू० से
अदिक थी। य दचक कत ग को ही यह बत न थ दक वह नकिी
कह ाँ गयी, क्योदक सी.सी.टी.वी में भी कुछ नहीं दिख ई दिय
है। इस िश में स्वीक रोदि कथन भी महत्वपूणग हो ज त है।

घ. आक्षेदपत आिेश में शेष आरोप भी पूणग रूप
से दसद्ध हुए दक, य दचक कत ग ने ३ ल ख रू० की जम रसीि
एक च लू ख त ि रक ग्र हक को िी पर उि र दश ख ते मे
जम ही नही की गयी। यह आरोप स क्ष्य के आि र पर दसद्ध
हुआ। जो स्पष्टीकरण य दचक कत ग ने दिय वो संतोषजनक न
प ये ज ने के क रण उदचत रूप से अम न्य दकय गय ।

ङ इसी प्रक र और ख तों में भी कैश प्र दप्त की
रसीि ग्र हक को तो िी गयी परन्तु उि र दश उि ख तों में
जम नही हुई। ऐसे ख तों की संख्य ४ से ५ रही। य दचक कत ग
के द्व र दिये गये सभी सपष्टीकरण उपरोि प्रलेखी स क्ष्य से
पूणग रूप से दवरोि भ सी होने के क रण, अम न्य क ररत करने
में अनुश सदनक प्र दिक री ने कोई त्रुदट नहीं करी है।

च. य दचक कत ग पर लग ये गये अन्य आरोप दक
उसने कई दिवस रोकदड़य को एकल अदभरक्ष में रख तथ
संयुि अदभरक्ष में न्यूनतम रोकड रख । रोकदडय के एकल
अदभरक्ष में स म न्य रूप से क फी अदिक र दश रखी दजसक
दववरण प्रलेख पर उपलब्ि है और य दचक कत ग द्व र उि
आरोप को वस्तुतः नक र नहीं गय है। उपरोि कृत्य बैंक की
दनि गररत प्रदिय के दवपरीत रहे है, ऐस भी इंक र नहीं दकय
गय । अतः ये आरोप भी उदचत रूप से दसद्ध हुए है।

छ. अन्त में य दचक कत ग व उसकी पत्नी के
ख ते में जम िनर दश, उसके ज्ञ त आय के स्त्रोत से अदिक
रही और यह स्पष्टीकरण, दक पररव रीजन उसके बैंक ख ते में
स म न्य रूप से जम करते है दकसी भी प्रक र से सत्य नहीं
म न ज सकत है। यह अदवव दित है दक व्यवस य से अदजगत
िनर दश स म न्य रूप से उि व्यवस य के स्व मी के बैंक ख ते
में ही जम होती है न दक दकसी ररश्तेि र के बैंक ख ते में।

१२. उपरोि दवश्लेषण क एक ही दनष्ट्कषग है दक
य दचक कत ग के दवरूद्ध सभी आरोप एक दवदिसंगत प्रदिय
के म ध्यम से, जह ाँ प्रकृदतक न्य य के दसद्ध न्तों क पूणग रूप से
पररप लन दकय गय है, दसद्ध प ये गये। अतः आक्षेदपत
आिेश पूणगतः दवदिक आिेश हैं।

१३. इस स्तर पर यह न्य य लय दाता राम प्रवत उत्तर
प्रदेर् राज्य एिं अन्य, २०२५:ए.एच.सी: १६५९२७ में
प ररत दनणगय क संिभग ग्रहण करत है तथ उसके प्र संदगक
खण्ड को दनम्न उद्दीदणगत करत हैः-

७. प्राथी/यादचकाकताव के अदिविा यि प्रददशवत
करने में असिल रिे दक जांच प्रदिया में दकसी प्रकार की
दवदिक त्रुदट रिी िो या और उपलब्ि प्रालेखों के दृदष्टगत
आरोप दसद्ध करने में कोई दवदिक त्रुदट काररत की गयी। यि
भी बताने में असिल रिे दक दसद्ध दोषों के दृदष्टगत पद से
पदच्युत करने का दण्ड दकसी भी प्रकार से आश्चयवजनक रूप से
तारतम्यिीन िै। इस स्तर पर यि न्यायालय, उच्चतम न्यायालय
द्वारा भूपेन्र पाल दसंि दगल प्रदत पंजाब राज्य व अन्य २०२५
आई.एन.एस. सी. ८३ के प्रकरण में पाररत दनणवय का संदभव
लेता िै। जिाूँ पुनः यि दनिावररत दकया गया दक
अनुशासनात्मक कायवािी में पाररत आदेश को खदण्डत करने
के दलए उच्च न्यायालय के पास सीदमत सीमा क्षेत्र िै और
कायवािी में िस्तक्षेप तब िी दकया जा सकता िै जब या तो
प्राकृदतक न्याय के दसद्धान्तों का िनन िुआ िो या जाूँच
प्रदिया दवदिक दनयमों के दवरूद्ध िुई िो या जाूँच अदिकारी
का प्रदतवेदन (ररपोटव) या अनुशासनात्मक प्रादिकारी का
अंदतम दनणवय, 'प्रदिया के साक्ष्य और गुणदोष से परे दवचारों
से प्रभादवत िो या उसका दनष्कषव प्रत्यक्ष रूप से इतना मनमाना
िो दक कोई भी दववेकशील व्यदि ऐसे दनष्कषव पर निीं पिुंच
सकता िो परन्तु जैसा पूवव में दवस्तृत रूप से उदल्लदखत दकया
गया िै दक उपरोि में से कोई भी कारण या कारक वतवमान
प्रकरण में उपदस्थत निीं िै।

१४. य दचक तद्नुस र वनरस्त की ज ती है।
10 All. Ajeet Singh Vs. State Of U.P. & Ors.
403
----------
(2025) 10 ILRA 403
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 30.10.2025

BEFORE

THE HON'BLE VIKAS BUDHWAR, J.

Writ A No. 14825 of 2018

Ajeet Singh ...Petitioner
Versus
State Of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Adarsh Singh, Indra Raj Singh, Prabhakar
Awasthi, Ram Prakash Upadhyay, Seemant
Singh

Counsel for the Respondents:
C.S.C.

Issue for Consideration
Effect of the defective notice of resignation, not
in conformity with the provisions of S. 9 of the
Police Act and Reg. 505 of the Police
Regulations, on its acceptance.

Headnotes
(A) Service law - Police Act, 1861 - S. 9 -
U.P. Police Regulation - Reg. 505, first
proviso - Resignation - Recovery of
amount incurred on training and recovery
of salary - Petitioner resigned from the
post of Sub-Inspector of Police to enable
him to join post of Constable in Delhi due
to medical problem - Defective notice -
Two months prior notice before making
the resignation was not complied with -
And the debt prior to resignation was not
discharged - Effect - After enquiry,
though the resignation was accepted, but
recovery was also directed to be made -
Validity challenged :

Held : Section 9 of the Police Act r/w
Regulation 505 of the Police Regulations cast a
duty upon the Police Officer, who seeks
resignation to give a notice of two months of his
intention to resign - Once a request is made for
resignation and is accepted then the employee
cannot turn around and insist that the
resignation should be withdrawn, but here there
is a distinct feature that the notice itself was
defective. Once the notice was defective and
not in conformity with the provisions contained
under Section 9 of the Police Act read with
Regulation 505 of the Police Regulations, then it
could not have been taken notice of. [Paras 16
and 17]

Further held : First proviso to Regulation 505
of the Police Regulations also throws light that
the resignation can only be accepted by the
authority w.e.f. a date subsequent to the date
of expiry of the notice and not prior to it,
meaning thereby that two months notice is to
be given by the police personnel seeking
resignation - Regulation 505 of the Police
Regulation, also adds to one another aspect that
his resignation cannot be accepted until and
unless he fully discharged the debt. Here, the
Court finds that the order dated 22.06.2022
passed by the SSP Meerut, post acceptance of
the resignation on 20.01.2018 on 22.06.2022,
recovery is being sought to be made for
discharge of the debt. Thus, even otherwise, the
resignation could not have been accepted. [Para
21]

(B) Service law - Police Act, 1861 - S. 9 -
U.P. Police Regulation - Reg. 505 -
Resignation - Conditional resignation -
Resignation was made with condition that
the writ petitioner, who seeks resignation
post
acceptance
of
resignation,
be
repatriated or sent to Delhi Police - Effect

Held : As a matter of fact, in the request letter
dated 28.12.2017, there was a condition
mentioned with respect to resignation that the
writ petitioner, who seeks resignation post
acceptance of resignation, be repatriated or sent
to Delhi Police. Same partakes the character of
a
conditional
resignation,
which
is
not
contemplated either in Section 9 of the Police
Act or Regulation 505 of the Police Regulations.
[Para 20] (E-1)

Case Law Cited
Satya Paul Kalra v. Deputy Inspector General of
Police, AIR 1964 Alld 121; Dinesh Kumar v.