# Ankita Punia v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 8 ILRA 59
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-08-13
- **Case number:** Criminal Appeal No. 940 of 2021
- **Bench:** Ashwani Kumar Mishra, Dr. Gautam Chowdhary
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/ankita-punia-v-state-of-u-p-52410
- **Pages:** 11

## Headnote

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Sections 161 & 374(2) - Indian
Penal Code,1860 - Sections 302, 376, 458,
506
& 511
-
Scheduled
Caste
and
Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities)
Act, 1989 - Sections 3(2)5 - Appeal -
against conviction & sentence - accused
committed offence of rape, murder and threats
to the informant's Grand-mother who belongs to
a scheduled caste member - FIR - investigation
- victim who is aged about 100 years died
during treatment - arrest - charge-sheet - in
defence, plea taken that, accused appellant
taken a loan from the informant and when he
failed to returned it they lodged a false FIR so
that they will success in getting monetary relief
under the victim compensation scheme from
govt. - court finds that, (i) contradiction in
testimony of witness, (ii) in medical evidences -
no sign of any external force of being used, no
sign of nay external injury, cause of death is
'septic Simia shock', (iii) no any report of vaginal
semen nor any blood matching report, (iv) no
any recovery nor any independent witnesses (v)
prosecution witness accepted that they got 8 lacs
rupees form the govt. - held, prosecution is failed
to stablished offence committed by the accused
appellant beyond reasonable doubt - Perhaps
charges of murder & sexual assault was imposed
just to get money from the government -
consequently, the conviction and sentence of the
accused appellant is reversed - Appeal is allowed -
conviction and sentence is set aside - direction
issued accordingly. (Para - 19, 20, 21, 22)

Appeal is allowed. (E-11)

## Text

8 All. Ankit Punia Vs. State of U.P.
59
25.01.2006
passed
by
the
learned
Additional Session Judge, Hardoi is hereby
set aside and reversed. The appellants are
relieved from the obligation to pay the
forfeited amount. The appellants are
discharged
from
their
obligations
as
sureties in this case.

23. A certified copy of the order be
also sent to the court concerned for
compliance.

24. Office is directed to communicate
this order to the court concerned for
necessary compliance.

25. Lower court record, if any, shall
also be sent back to the district court
concerned.
----------
(2024) 8 ILRA 59
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 13.08.2024

BEFORE

THE HON'BLE ASHWANI KUMAR MISHRA, J.
THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Appeal No. 940 of 2021

Ankita Punia ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Appellant:
Sri Arun K. Deshwal, Sri Jitendra Kumar
Shishodia

Counsel for the Respondent:
Y, Y, G.A.

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Sections 161 & 374(2) - Indian
Penal Code,1860 - Sections 302, 376, 458,
506
& 511
-
Scheduled
Caste
and
Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities)
Act, 1989 - Sections 3(2)5 - Appeal -
against conviction & sentence - accused
committed offence of rape, murder and threats
to the informant's Grand-mother who belongs to
a scheduled caste member - FIR - investigation
- victim who is aged about 100 years died
during treatment - arrest - charge-sheet - in
defence, plea taken that, accused appellant
taken a loan from the informant and when he
failed to returned it they lodged a false FIR so
that they will success in getting monetary relief
under the victim compensation scheme from
govt. - court finds that, (i) contradiction in
testimony of witness, (ii) in medical evidences -
no sign of any external force of being used, no
sign of nay external injury, cause of death is
'septic Simia shock', (iii) no any report of vaginal
semen nor any blood matching report, (iv) no
any recovery nor any independent witnesses (v)
prosecution witness accepted that they got 8 lacs
rupees form the govt. - held, prosecution is failed
to stablished offence committed by the accused
appellant beyond reasonable doubt - Perhaps
charges of murder & sexual assault was imposed
just to get money from the government -
consequently, the conviction and sentence of the
accused appellant is reversed - Appeal is allowed -
conviction and sentence is set aside - direction
issued accordingly. (Para - 19, 20, 21, 22)

Appeal is allowed. (E-11)

(Delivered by Hon'ble Dr. Gautam
Chowdhary, J.)

1- अपीलार्थी की ओर से यह दाण्डिक
अपील, मु०अ०सं० 550 सन 2017 अन्तर्गत
धारा 458, 376, 302, 506 भा०८०वि०, र्थाना
जानी, ण्जला मेरठ से उद्‌भूत दाण्डिक िाद सं०
01
सन
2018
में
विशेष
न्यायाधीश
(एस०सी०/एस०टी० ऐक्ट) मेरठ दिारा पाररत
ननर्गय दद० 20-11-2020, ण्जसके दिारा
अपीलार्थी/अभभयुक्त अककत पूननया को धारा
302 भा०दं०वि० के अपराध में आजीिन
कारािास एिं रू० 25,000/- अर्थगदडि से तर्था
60 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है, धारा
376/511 ना०द०वि० के अपराध में 7 िषग के
कारािास एिं रू० 10,000/- अर्थगदडि से एिं
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है तर्था
धारा 458 भा०द०वि० के अपराध में 7 िषग का
कारािास एिं रू० 10,000/- अर्थगदडि से एिं
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है, के
विरूदध योण्जत की र्यी है।

2- िाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कक
िादी मुकदमा शनन कुमार बाण्ममकी ननिासी
ग्राम रघुनार्थपुर र्थाना जानी, ण्जला मेरठ, ने
तहरीर र्थानाध्यक्ष को इस कर्थन के सार्थ प्रेवषत
की कक िह बाण्ममकी जानत (अनुसूचित जानत)
का व्यण्क्त है। उसकी 100 साल की िृदध एिं
बीमार दादी मां श्रीमती फुमलो देिी पत्नी स्ि.
श्री दहम्मत भसंह ननिासी ग्राम रघुनार्थपुर, र्थाना
जानी, मेरठ, ददनांक 29.10.2017 को समय
करीब 11:30 पीएम रात्रि में बीमारी के कारर्
बेहोशी की हालत में रजाई ओढकर अपनी
िारपाई पर घर के बरामदे में सोई हुई र्थी। िह
और उसकी पत्नी श्रीमती अंजु बरामदे के पास
बने हुए एक कमरे में लेटे हुए र्थे तभी बरामदे में
अदगध बेहोशी की हालत में सोई हुई उसकी दादी
मां के कराहने की आबाज उसे ि उसकी पत्नी
श्रीमती अंजु को सुनाई दी तो उसने ि उसकी
पत्नी ने बाहर ननकलकर बरामदे में देखा कक
उसके ही र्ांि का अंककत पूननया पुि स्ि.
सतेन्र पूननया उसकी 100 साल की िृदध और
बीमार दादी मां के सार्थ उनके ऊपर लेटा हुआ
संभोर् कर रहा है। उसने और उसकी पत्नी ने
उसे बडी मुण्ककल से दादी मां के ऊपर से उठाया
तो अंककत पूननया शराब के नशे में धुत र्था और
जब उसने उसे पकडने का प्रयास ककया तो यह
दरिाजे से भार् र्या। िह अपनी दादी मां को
एम्बूलेंस में िालकर र्थाने लाया। उसकी ररपोटग
दजग कर कायगिाही की जाए।

3- उपरोक्त तहरीर पर अभभयुक्त अंककत
पूननया के विरूदध ददनांक 30.10.2017 को
समय 1:45 बजे मुकदमा अपराध संख्या
550/2017, अन्तर्गत धारा 458, 376 ना०द०सं०
ि धारा 3(2)5 एस.सी.एस.टी. एक्ट दजग हुआ
ण्जस पर क्षेिाचधकारी दिारा वििेिना की र्यी।

4- वििेिक दिारा वििेिना के दौरान
घटनास्र्थल का मौका मुआयना ककया र्या।
पीडिता का चिककत्सीय परीक्षर् कराया र्या।
दौरान वििेिना ददनांक 30.10.2017 को समय
करीब तीन बजे रात्रि पीडिता की मृत्यु हो र्यी
ण्जस कारर् मामला धारा 302 भा०द०सं० में
जी०िी० संख्या 20, पररिनतगत हुआ। अभभयुक्त
को चर्रफ्तार ककया र्या ण्जसका हिाला
जी०िी० सं० 27 ददनांककत 30.10.2017 में ददया
र्या है।

5- वििेिक ने मृतका का पंिायतनामा ि
पोस्टमाटगम कराया। र्िाहान के बयान दजग
ककये। मृतका की स्लाईड जांि हेतु विचध
विज्ञान प्रयोर्शाला भेजी र्यी। वििेिक दिारा
8 All. Ankit Punia Vs. State of U.P.
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मौका मुआयना कर नक्शा नजरी बनाया र्या।
अभभयुक्त के विरूदध प्रर्थम दृष्टया मामला
पाते हुए आरोप पि अन्तर्गत धारा 458, 376,
302 506 भा०दं०सं० ि धारा 3(2)5 एस
सी.एस.टी एक्ट प्रेवषत ककया र्या।

6- अभभयुक्त को आरोप विरचित ककये
जाने हेतु कारार्ार से तलब ककया र्या और
ददनांक 20.7.2018 को धारा 458, 376, 302,
506 भा०दं०सं० ि धारा 3 (2) 5 एस.सी. /
एस.टी.एक्ट में आरोप विरचित ककया र्या।
अभभयुक्त ने आरोप से इंकार ककया और
परीक्षर् िाहा।

7- आरोप को साबित करने हेतु अबियोजन पक्ष की ओर
से दस्तावेजी साक्ष्य में तहरीर प्रदर्श क-१, पंचायतनामा प्रदर्श क-2,
बचबकत्सीय परीक्षण ररपोर्श प्रदर्श क-3.बचबकत्सक द्वारा जारी मृत
ररपोर्श प्रदर्श क-4 पोस्र् मार्शम ररपोर्श प्रदर्श क-5. बचबकत्सीय
ररपोर्श प्रदर्श क-6, प्रथम सूचना ररपोर्श प्रदर्श क-7, जी०डी०
कायमी प्रदर्श क-8, पुबिस प्रपत्र सं० 13 प्रदर्श क-9, फोर्ोनार्
प्रदर्श क-10, प्रबतसार बनरीक्षक को प्रेबित पत्र प्रदर्श क-11, मुख्य
चिककत्साचधकारी को प्रेवषत पि प्रदशग क 12.
नमूना मोहर प्रदशग क-13, नक्शा नजरी प्रदशग क
14 एिं आरोप पि प्रदशग क-15 तर्था विचध
विज्ञान प्रयोर्शाला की ररपोटग ददनांककत
4.7.2020 प्रस्तुत की र्यी।

8- मौखखक साक्ष्य में बादी मुकदमा शनन
कुमार को अभभयोजन साक्षी सं0-1. िकमदीद
र्िाह श्रीमती अंजू अभभयोजन साक्षी सं०-2,
िादी के वपता इममे अभभयोजन साक्षी सं०-3,
चिककत्सीय ररपोटग देने िाली िा० नमृता
अभभयोजन साक्षी सं०-4, पोस्टमाटगम करने
िाले िा० िी०के० शमाग अभभयोजन साक्षी सं०-5,
एफआईआर लेखक शभमगम जहां अभभयोजन
साक्षी
सं०-6,
एस०आई०
विनोद
कुमार
अभभयोजन साक्षी सं0-7, वििेिक संतोष कुमार
भसंह अभभयोजन साक्षी सं०-8 को परीक्षक्षत
ककया र्या।

9- अभभयोजन साक्षी सं० 1 िादी मुकदमा
ने मुख्य परीक्षा में सशपर्थ कर्थन ककया है कक
िह बाण्ममकी अनुसूचित जानत का है।
अभभयुक्त अंककत पूननया जाट त्रबरादरी का है
और उसी के र्ांि का है। ददनांक 29.10.2017 की
रात्रि 11:30 बजे की घटना है उसकी दादी फुमलो
देिी उम्र करीब 100 िषग बीमारी के कारर्
बेहोशी की हालत में रजाई ओढकर धर के
बरामदे में िारपाई पर सोई र्थी। िह अपनी
पत्नी अंजू के सार्थ बरामदे के सार्थ बने कमरे में
लेटा र्था। उसके वपता ऐलन भसंह जो कुछ ऊंिा
सुनते हैं, बरामदे में लेटे र्थे। दादी के कराहने की
आिाज सुनकर िह अपनी पत्नी के सार्थ
बरामदे में र्या तो उन्होने बमब की रोशनी में
देखा कक हाण्जर अदालत अंककत पूननया उसकी
दादी के ऊपर लेटा हुआ संभोर् कर रहा र्था।
उसकी दादी 15-20 ददन से बीमारी की हालत में
नीिे का कपडा नहीं पहनती र्थी क्योंकक लेटे
रहने के कारर् उनकी पीठ पर घाि हो र्ये र्थे।
उसने शोर मिाते हुए अपने वपता के सार्थ
अंककत पूननया को पकि भलया। जब िह अपनी
दादी को देखने लर्ा तो उसी समय अंककत
पूननया धमकी देते हुए कक इसका तो उसने काम
कर ददया है उसे भी नहीं छोिेर्ा, धक्का मुक्की
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करते हुए मौके से भार् र्या। उसके वपता
पकिने के भलए दौिे लेककन िह भार् र्या।
उसकी दादी की हालत अत्यचधक खराब हो र्यी
र्थी। उसने एम्बूलेंस बुलाई और र्थाने जाकर
तहरीर दी। र्िाह ने तहरीर प्रदशग क-1 को
सात्रबत ककया है। रात को उसकी दादी का
िाक्टरी मुआयना हुआ र्था। पहले जानी ले र्ये
र्थे बाद में पी०एल० शमाग अस्पताल ले र्ये।
इलाज के दौरान ही उसकी दादी की मृत्यु हो
र्यी र्थी। पुभलस ने पंिायतनामा भरा र्था।
र्िाह ने पंिायतनामा पर अपने हस्ताक्षर की
भशनाख्त कर उसे प्रदशग क-2 के रूप में सात्रबत
ककया है। पुभलस ने उसकी दादी का पोस्ट माटगम
कराया र्था। सीओ साहब ने उसकी ननशानदेही
पर नक्शा नजरी बनाया र्था।

10- अभभयोजन साक्षी सं0-2 श्रीमती अंजू
ने मुख्य परीक्षा में सशपर्थ कर्थन ककया है कक
उसकी दददया सास फुमलो देिी की उम्र करीब
100 िषग र्थी जो काफी बीमार ि िृदध र्थीं।
ददनांक 29.10.2017 की रात्रि लर्भर् 11:0011:30 बजे की घटना है। उसकी दददया सास
बरामदे में लेटी र्थीं जो अदगधबेहोशी की हालत में
र्थीं और कराह रही र्थीं। उसके ससुर ऐलन भसंह
बरामदे में ही लेटे र्थे। िह अपने पनत के सार्थ
बरामदे के पीछे बने कमरे में लेटी र्थी। िह
अपनी दददया सास के कराहने ि ससुर के
िीखने की आिाज सुनकर अपने पनत के सार्थ
बरामदे में र्यी तो बमब की रोशनी में देखा कक
हाण्जर अदालत मुण्मजम, जो र्ैर अनुसूचित
जानत का है, और उसी के र्ांि का है, उसकी
दददया सास के ऊपर लेटा हुआ बलात्कार कर
रहा र्था। उसकी दददया सास बीमारी के कारर्
नीिे कोई कपिा नहीं पहनती र्थी। अंककत
पूननया भी नग्न अिस्र्था में र्था। मौके पर
अंककत पूननया को उसके पनत ि ससुर ने पकि
भलया र्था लेककन दददया सास की हालत खराब
र्थी। जब उसके पनत दादी को देखने लर्े तो
धक्का-मुक्की देते हुए यह कहते हुए कक इसका
तो मैने काम कर ददया है उनको भी नहीं छोडेर्ा
ि जान से मारने की धमकी देते हुए चर्रते पिते
भार् र्या। िह नशे की हालत में र्था। अंककत
पूननया ने हमारी जानत को जानते हुए दददया
सास के सार्थ बलात्कार ककया है। उसके पनत ने
एम्बूलेंस बुलाई र्थी। िह एम्बूलेंस में दददया
सास को लेकर अपने पनत के सार्थ र्थाने र्यी।
र्थाने में तहरीर दी और उसके बाद पुभलस िालों
के सार्थ पी०एल० शमाग अस्पताल आये र्थे जहां
उसकी दददया सास का चिककत्सीय परीक्षर्
हुआ र्था। दौरान इलाज सुबह के समय उसकी
दददया सास की मृत्यु हो र्यी।

11- अभभयोजन साक्षी सं० 3 इममे,
ण्जसको ऊिा सुनाई देता है और कान के पास
बोलने पर सुनकर-समझकर जबाब दे रहा है, ने
मुख्य परीक्षा में सुशपर्थ कर्थन ककया है कक
उसकी मां का नाम फुमलो र्था। उसकी मां की
उम्र ककतनी र्थी उसे नहीं पता। उसे यह भी नह ीं
पता कि उसिी माीं िे साथ क्या हुआ था। उसे
नह ीं पता कि उसिी माीं िैसे मर । वह घर पर
था उसे नह ीं पता कि रात िो माीं िे साथ क्या
हुआ था। वह तो सो गया था। ववद्वान
8 All. Ankit Punia Vs. State of U.P.
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अभभयोजन अधििार िी प्राथथना पर न्यायालय
द्वारा इस गवाह िो पक्षद्रोह घोवित किया
गया।

12. अभभयोजन साक्षी स०-4 िा. नम्रता,
हाल तैनाती पीएिसी रोहटा सम्बदध 6 पीएसी.
12- मेरठ ने मुख्य परीक्षा में सशपर्थ कर्थन
ककया है कक घटना िाली रात ददनांक
30.10.2017 को िह िीिब्लू-एि मेरठ में तैनात
र्थी उस ददन समय लर्भर् तीन बजे एएम
(रात) म०का० 2683 सीमा र्थाना जानी मेरठ
श्रीमती फुमलो देिी पत्नी दहम्मत भसंह ननिासी
ग्राम रघुनार्थपुर को मैडिकल परीक्षर् हेतु लेकर
आयी र्थीं। श्रीमती फुमलो उस समय अदगध
मूण्छछत र्थीं। होश हिास में नहीं र्थीं एिं बोलने ि
जिाब देने में असमर्थग र्थीं। उनकी तरफ से उनके
बेटे की बहू लक्ष्मी ि उनके पोते की बहु अंजू ने
बातें बताई। श्रीमती फुमलो के बांये र्ाल पर एक
काला नतल र्था। अंजू ि लक्ष्मी ने बताया कक
ददनांक 29.10.2017 की रात्रि 11 बजे उनके घर
पर लिका अंककत घुस आया र्था और उसने
बरामदे में लेटी फुमलो देिी, जो एक महीने से
पूर्ग रूप से त्रबस्तर पर है, के सार्थ पूर्ग नग्न
अिस्र्था में यौन संबंध करते देखा। यह घटना
अपनी मां के पास बरामदे में सोये इलम भसंह ने
देखी र्थी और अंककत को नग्न अिस्र्था में पकडा
र्था। श्रीमती फुल्लो देवी िे एि मह ने से बिस्तर
पर लेटे रहने से उनिो 'िैडसोर" था। पीडडता िे
िोई चोट िे ननशान नह भमले थे। पीडडता ने
भसफग शटग पहनी र्थी। नीिे कुछ नहीं पहना र्था।
लेटी रहती र्थीं। पमस 80 प्रनत भमनट र्थी। बी.पी.
100-70 र्था। सांस 18 प्रनत भमनट र्थी। पीड़िता
िे शर र पर िोई िाह्य चोट नह थी। कोई
कपिा सुरक्षक्षत रखने हेतु नही भलया र्था। उसने
परीक्षर् के दौरान एक िैजायननल स्लाईि दो
िैजायननल स्लैब ि उएमएल ब्लि िार बंिल में
सील करके सिे मोहर के सार्थ आयी कांस्टेबल
को सौंप ददया र्था। िार सील बंद भलफाफे
मदहला कां० सीमा को सौंप ददये र्थे। र्िाह को
कार्ज संख्या 63/1 ता 63/9 ददखाये र्ये ण्जन
पर र्िाह ने अपने हस्ताक्षरों की पहिान की
और बताया कक यह मैडिकल उसके ही हस्तलेख
में है। र्िाह ने मैडिकल ररपोटग प्रदशग क-3 को
सात्रबत ककया है।

13- पीिब्लू-5 िा. िी० के०शमाग ने मुख्य
परीक्षा में सशपर्थ कर्थन ककया है कक उनके
दिारा ददनांक 30.10.2017 को समय करीब
3:30 पीएम हाल सी 2683 सीमा सोलंकी और
र्थाना जानी दिारा सीपी 359 सिेश कुमार र्थाना
जानी दिारा श्रीमती फुमलो देिी पत्नी स्ि०
दहम्मत भसंह, उम्र करीब 100 बषग मदहला
ननिासी ग्राम रघुनार्थपुर र्थाना जानी मेरठ का
शि पोस्ट माटगम हेतु लाया र्या ण्जसकी
पहिान सनी कुमार ि सचिन (पोते) दिारा की
र्यी। मृतका का शि पैरों को छोिकर सारा
अकडा हुआ र्था। मृतिा िे शर र पर पीछे िमर
िे ननचले हहस्से में और पीछे ननतम्ि पर
सींक्रभमत िैड सोल थे। जजसिा साइज 30 सेमी
X 22 सेमी था। फेफिे दोनो साईि के सक्रभमत
र्थे। उनकी राय में मृतका की मृत्यु का समय
लर्भर् आधे से एक ददन पहले का र्था। मृत्यु
64 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
सैजटटि सीभमया शॉि से हुई। टीम में िा० ररिा
देशिाल लेिी मैडिकल आकफसर सीएिसी
परीक्षक्षतर्ढ, मेरठ, में तैनात र्थी। िोई िाहर
चोट जिरदस्ती िा प्रमाण नह ीं था। मृतका के
दो िेजाइनल स्मीयर स्लाइि बनाई जो
फोरेण्न्सक
विभार्
भेजी।
र्िाह
दिारा
पोस्टमाटगम ररपोटग प्रदशग क-5 ि फोटो नाश
प्रदशग क 6 को सात्रबत ककया र्या है।

14- अभभयोजन साक्षी सं0-6 कां0 2401
शभमगन जहां अभभयोजन साक्षी सं० 7 एस०आई०
विनोद कुमार तर्था अभभयोजन साक्षी सं० ४
संतोष कुमार भसंह औपिाररक साक्षी हैं ण्जन्होंने
अपने-अपने दिारा की र्यी कायगिाही के संबंध
में बयान ददया है तर्था आिकयक फिग प्रदशग
आदद को सात्रबत ककया है।

15- अभभयोजन साक्ष्य सम्पन्न होने के
उपरांत अभभयुक्त का बयान अन्तर्गत धारा
313 द०प्र०सं० अंककत ककया र्या ण्जसमें उसने
घटना को र्लत बताया और र्लत वििेिना कर
झूठा आरोप पि प्रेवषत करने का कर्थन ककया।
उसने िश्थन किया कि सरिार से भमलने वाले
मृति आधश्रतों िे पैसे िे िारण झूठा फींसाया
है। बादी सनी कुमार ने पैसे के लेन देन के
कारर् रंण्जशन आपराचधक षियंि कर उसे
झूठा फंसाया है। अभभयुक्त को प्रनतरक्षा साक्ष्य
का अिसर ददया र्या ककन्तु उसके दिारा
प्रनतरक्षा साक्ष्य नहीं ददया र्या।

16- अपीलार्थी के विदिान अचधिक्ता श्री
ण्जतेन्र कुमार भशशोददया एिं उत्तर प्रदेश राज्य
की ओर से अिगना भसंह को सुना तर्था पिािली
का पररशीलन ककया।

17- अपीलार्थी के विदिान अचधिक्ता ने
तकग प्रस्तुत ककया कक िादी मुकदमा ने
अभभयुक्त से सुअर पालने हेतु एक लाख रूपये
उधार भलये र्थे. ण्जसको िह अदा नहीं कर रहा
र्था, उक्त उधार की रकम को िापस न देने के
उददेकय से तर्था सरकार से भमलने िाली आचर्थगक
सहायता पाने के भलए अभभयुक्त र्लत एिं
कपोलकण्मपत कहानी बनाकर झूठा फंसाया
र्या है तर्था िादी दिारा अभभयुक्त के विरूदध
प्रर्थम सूिना ररपोटग भलखकर दोहरा लाभ
अण्जगत ककया है। इस फजी एफ०आई०आर०
भलखाने से िाद जहााँ एि ओर उिार िी रिम
वापस िरने से िचा वह ीं दूसर ओर सरिार से
भी आधथथि सहायता प्राटत िी जजसे उसने
अपने ियानों में स्वीिार किया है। अभभयोजन
साक्षी त्तीं० 1 वाद ने अपने ियानों में यह भी
स्वीिार किया है कि वह घटना िे समय अपनी
पत्नी िे साथ गाजजयािाद में रह रहा था,
इसभलए वह चश्मद द गवाह नह ीं हो सिता, इस
प्रिार अभभयोजन साक्षी सीं० 1 एवीं अभभयोजन
साक्षी सीं० 2 िे ियान पर ववश्वास नह ीं किया
जा सिता। अभभयोजन साक्षी सीं० 3 ने
न्यायालय में सशपथ ियान हदया है कि उसिे
सामने िोई घटना नह ीं हुयी, न ह उसे
जानिार है। िोई स्वतींत्र गवाह पेश नह ीं किया
गया। घटना राबत्र िे समय िी है और
अभभयुक्त िो िप़िा छो़ििर भागने िा िथन
किया गया है, लेकिन वाद िे द्वारा वहाीं से िोई
8 All. Ankit Punia Vs. State of U.P.
65
िरामदगी नह ीं हदखायी गयी है। ववधि ववज्ञान
प्रयोगशाला में भी रक्त िी िोई मैधचींग नह ीं
पायी गयी और न ह िप़िों पर स्पमथ या वीयथ
पाया गया। पीड़िता िीमार थी तथा उसिी मृत्यु
िैडसोल िे िारण हुयी है, िलात्िार किये जाने
िा िोई साक्ष्य नह ीं है, अभभयोजन साक्षीगण िे
ियानों में घोर ववरोिाभाि है। अभभयोजन पक्ष
मामले िो सींदेह से परे साबित िरने में असफल
रहा है।

18- बवद्वान अपर र्ासकीय अबिवक्ता ने अपीिाथी के
बवद्वान अबिवक्ता के तको का प्रिि बवरोि करते हुए तकश प्रस्तुत
बकया बक अबियुक्त द्वारा राबत्र के समय गृह िेदने कर वृद्ध व िीमार
पीबडता से ििात्कार बकया गया, यह जानते हुए बक वह अनुसूबचत
जाबत की मबहिा है। ििात्कार करने के िाद पकडे जाने पर जान से
मारने की िमकी दी और इसी जघन्य कृत्य के कारण पीबडता फुल्िो
देवी की मृत्यु हुई जो बक हत्या की कोबर् में अबियुक्त के कृत्य के
कारण आयेगी। गवाहान ने घर्ना को िखूिी साबित बकया है।
अबियुक्त घर्ना के समय नर्े में िुत था। अबियोजन पक्ष द्वारा
मामिे को संदेह से परे साबित बकया गया है। इस आिार पर यह
अपीि बनरस्त बकए जाने योग्य है तथा बवद्वान बवर्ेि न्यायािीर् /
एस०सी० एस०र्ी० ऐक्र् द्वारा पाररत प्रश्नगत बनणशय बद० 19-112020 पुष्ट बकए जाने योग्य है।

19- उभय पक्ष िे ववद्वान अधिवक्ताओीं
िे तों िो सुनने तथा साक्ष्य िा पररशीलन िरने
िे उपरान्त न्यायालय िा अभभमत है कि :-

(क)-
विधारर्
न्यायालय
ने
अभभयुक्त को धारा 458. 376/511, 302
भा०८०वि० का दोषी पाने हेतु यह अभभमत
व्यक्त ककया है कक :-

"िूंकक घटना यादी के घर के अंदर
बरामदे में हुई तर्था घर के अंदर दुष्कमग अर्थिा
बलात्कार करने की नीयत से अभभयुक्त घर में
घु में घुसा र्था। घटना रात्रि के समय की है। ऐसे
में अभभयुक्त के दिारा रािी पृछछन्न र्ृह
अनतिार या रात्रि र्ृहमेदन का अपराध
अन्तर्गत धारा 458 भा०दं०सं० सन्देह से परे
सात्रबत होता है।

जहां तक धारा 376 भा०दं० सं० का
प्रकन है, र्िाह पी०िब्लू०-1 ব पी०िब्लू०-2
दिारा मौके अभभयुक्त युक्त को नग्न अिस्र्था
में पीडिता के उपर लेटा पर सम्भोर् करने की
ण्स्र्थनत में देखा। पीडिता पहले से ही बैिसोर के
कारर् नीिे से नग्न अिस्र्था में र्थी। मेडिकल
ररपोटग में दजग बयान के आधार पर भी पीडिता
भसफग टी-शटग पहने िैिसोर के कारर् नीिे कुछ
नहीं पहनी र्थी। पीडडता के कोई बाहरी िोट या
जबरदस्ती बलात्कार करने के ननशान नहीं है।
विचध विज्ञान प्रयोर्शाला की ररपोटग कार्ज
संख्या 37क के अनुसार शटग पर रक्त पाया र्या
र्था। िैजइनल स्मीयर स्लाइि पैन्ट टी-शटग
पेनाईल स्मीयर स्लाइि बक्कल स्मीयर स्लाइि
पर कोई रक्त नहीं भमला। ककसी िस्तु पर
शुक्रार्ु या िीयग नहीं पाया र्या और ना ही
पीडिता की मेडिकल ररपोटग में र्ुपतांर् पर कोई
बाहरी िोट के लक्षर् भमले। अभभयुक्त दिारा
पेनेट्रेशन ककये जाने का कोई साक्ष्य या लक्षर्
नहीं पाया र्या। बण्मक िह संभोर् कर प्रयत्न
कर रहा र्था। िूंकक अभभयुक्त बलात्कार करने
का प्रयत्न में र्था. ण्जसे र्िाहान दिारा सात्रबत
ककया र्या है। अतः अभभयुक्त दिारा अपराध
अन्र्तर्त धारा 376/511 भा०दं०सं० बलात्कार
करने का प्रयास करना सात्रबत होता है।
66 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
अभभयुक्त दिारा पीडडता से ददनांक 29-102017 की रात्रि 10.30 बजे बलात्कार करने का
प्रयत्न ककया र्या िह अत्यन्त िृदध बीमार
100 िषीय मदहला र्थी। बैड्सोर से पीडडत र्थी।
अभभयुक्त का उक्त कृत्य से मृतका को इतना
सदमा लर्ा कक उस सदमे के कारर् उसकी
मृत्यु हो र्यी। बीमारी ि िृदध अिस्र्था में उसके
सार्थ बलात्कार का प्रयास ककया र्या, ऐसा
सदमा उसके भलये मृत्यु काररत करने के भलए
पयागपत र्था। अभभयुक्त के उक्त कृत्य से ही उसी
रात में मृतका की मृत्यु हो र्यी। अभभयुक्त के
विरूदध धारा 302 मा०८०वि० का अपराध
सन्देह से परे सात्रबत होता है।"

(ख) इस न्यायालय का अभभमत है
कक अभभयोजन साक्षी सं० 2 िादी की पत्नी है
तर्था िह अपने को िकमदीद साक्षी कह रही है.
उसने अपनी ण्जरह में बयान ददया है कक
"अभभयुक्त नग्न अवस्था में ह भाग गया था.
हमने अभभयुक्त िो िप़िे पहनने िा मौिा नह ीं
हदया था, यह िात सह है कि मेरे घर से
अभभयुक्त िा िोई िप़िा, सामान, जूते चटपल
आहद न ह हमारे द्वारा िरामद किया गया और
न ह पुभलस द्वारा िरामद किया गया" िहीं पर
यह कहना सनीिीन प्रतीत होता है कक यदद
अभभयोजन साक्षी सं० 2 के इस कर्थन को मान
भी भलया जाय कक अभभयुक्त नग्न अिस्र्था में
ही भार् र्या र्था उसे कपडे पहनने का मौका
नहीं ददया र्या, तो उसके कपडे आदद
घटनास्र्थल से ही क्यों नहीं बरामद ककये र्ये,
इस तथ्य से अभभयोजन साक्षी सं० 2 का कर्थन
असत्य हो जाता है। इस अभभयोजन साक्षी ने
प्रनतपरीक्षा में यह भी कहा है कक "इस घटना िा
िोई अ़िोसी-प़िोसी गवाह नह ीं है" यह तथ्य
अपने आप में भ्रामक है कि वाद व उसिे
पररवार वालों िे शोर पर अभभयुक्त िे भागने
पर अ़िोस-प़िोस िे किसी व्यजक्त िे आने िा
किसी भी साक्षी ने जजि नह ीं किया है। वििारर्
न्यायालय ने स्ियं भी यह अभभमत व्यक्त
ककया है कक िैजइनल स्मीयर स्लाइि पैन्ट टी-
शटग पेनाईल स्मीयर स्लाइि बक्कल स्मीयर
स्लाइि पर कोई रक्त नहीं भमला। ककसी िस्तु
पर शुक्रार्ु या िीयग नहीं प्राया र्या और ना ही
पीडिता की मेडिकल ररपोटग में र्ुपतांर् पर कोई
बाहरी िोट के लक्षर् भमले। अभभयुक्त दिारा
पेनेट्रेशन ककये जानें का कोई साक्ष्य या लक्षर्
नहीं पाया र्या। अभभयोजन साक्षक्षयों के बयान
से वििारर् न्यायालय की यह अिधारर्ा र्लत
है कक अभभयुक्त बलात्कार करने के प्रयत्न में
र्था. इसभलए अभभयुक्त िे ववरुद्ि िारा
376/511 भा०दीं०वव० िलात्िार िरने िा प्रयास
िरना साबित नह ीं होता है।

(र्)- मृतका के चिककत्सीय परीक्षर्
आख्या में चिककत्सक ने कहा है कक "No
External injury Present at the time of
Examination" तर्था चिककत्सक ने अन्त में
अपना अभभमत व्यक्त ककया है कक "No Sign
of Force being used sexual assault can not
be ruled out."

(घ) - विचध विज्ञान प्रयोर्शाला को
प्रेवषत 6 िस्तु प्रदशों की जााँि के उपरान्त विचध
विज्ञान प्रयोर्शाला ने आख्या ददया है कि िस्तु
(1) से (6) पर शुिाणु अथवा वीयथ नह ीं पाया
गया
8 All. Ankit Punia Vs. State of U.P.
67

(४०)- मृतका के शि विछछेदन
आख्या में कहा र्या है कक "No Sign of any
external force of being used, No sign of
any external injury, 2 Sample of vaginal
semen slide sent to forensic, Final
comment can be given after submission
reports, however sexual assault can not
ruled out."

(ि) अभभयोजन साक्षी सं० 5 िा०
िी०के० शमाग, ण्जन्होंने मृतका का शि विछछेदन
ककया है के बयान के अनुसार " बैि सोल के
अलािा मृतका के शरीर पर कोई नारी िोट के
ननशान नहीं र्थे और न ही अन्दरूनी िोट र्थी ि
ननशान र्थे मृतका की मृत्यु सेजटटि सीनर ि
िृदधा अिस्र्था के कारर् मृत्यु हुयी है।"

(छ)- िूाँकक िाक्टर ने मृतका की मृत्यु
सेण्पटक सीमर से होना कहा है. इसभलए इस
स्तर पर "सैजटटि सीभमया शॉि" की पररभाषा
पर वििार ककया जाना आिकयक है, जो
ननम्नित् हैः-

"Septic shock is a potentially
fatal medical condition that occurs when
sepsis, which is organ injury or damage in
response to infection, leads to dangerously
low blood pressure and abnormalities in
cellular
metabolism.
The
Third
International Consensus Definitions for
Sepsis and Septic Shock (Sepsis-3) defines
septic shock as a subset of sepsis in which
particularly profound circulatory, cellular,
and metabolic abnormalities are associated
with a greater risk of mortality than with
sepsis alone. Patients with septic shock can
be clinically identified by requiring a
vasopressor to maintain a mean arterial
pressure of 65 mm Hg or greater and
having serum lactate level greater than 2
mmol/L (>18 mg/ dL) in the absence of
hypovolemia.
This
combination
is
associated with hospital mortality rates
greater than 40%.

The primary infection is most
commonly caused by bacteria, but also may
be by fungi, viruses or parasites. It may be
located in any part of the body, but most
commonly in the lungs, brain, urinary tract,
skin or abdominal organs.[2] It can cause
multiple
organ
dysfunction
syndrome
(formerly known as multiple organ failure)
and death. [3]

Frequently, people with septic
shock are cared for in intensive care units.
It
most
commonly
affects
children,
immunocompromised individuals, and the
elderly, as their immune systems cannot
deal with infection as effectively as those
of healthy adults. The mortality rate from
septic shock is approximately 25-50%

Causes

Septic shock is a result of a
systemic response to infection or multiple
infectious
causes.
The
precipitating
infections that may lead to septic shock if
severe enough include but are not limited to
appendicitis,
pneumonia,
bacteremia,
diverticulitis, pyelonephritis, meningitis,
pancreatitis, necrotizing fasciitus, MRSA
and mesenteric ischemia. [4][5]

According
to
the
earlier
definitions of sepsis updated in 2001,[6]
sepsis is a constellation of symptoms
secondary to an infection that manifests as
disruptions in heart rate, respiratory rate,
temperature, and white blood cell count. If
sepsis worsens to the point of end-organ
dysfunction
(kidney
failure,
liver
dysfunction, altered mental status, or heart
damage), then the condition is called severe
sepsis. Once severe sepsis worsens to the
point where blood pressure can no longer
be maintained with intravenous fluids
alone, then the criterion has been met for
septic shock."
68 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(ज) उपरोक्त साक्ष्य इंचर्त करते
हैं कक मृतका की उम्र करीब 100 िषग र्थी और
उसकी मृत्यु ककसी प्रहार या िोट इत्यादद से
नहीं हुयी। उसकी मृत्यु को मानि-िध की
श्रेर्ी में िाले जाने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत
नहीं ककया र्या है। ऐसी ण्स्र्थनत में इस
अिधारर्ा को समर्थगन भमलता है कक शायद
सरकार से धन प्रापत करने के भलए ही
Sexual offence और मानि िध का आरोप
लर्ाया र्या।

(झ)- उपरोक्त व्याख्या के प्रकाश
में यह तथ्य विकिसनीय है कक अभभयुक्त को
िादी ने सरकार से भमलने िाले मृतक आचश्रतों
को पैसों के कारर् झूठा फंसाया र्या तर्था
िादी सनी कुमार ने अभभयुक्त से भलए र्ए
पैसों के कारर् रंण्जशन आपराचधक षड्यंि
करके
झूठा
फंसाया
र्या
है.
क्योंकक
अभभयोजन साक्षी सं० 1 ने अपनी प्रनतपरीक्षा
में यह स्िीकार ककया है कक "मेर दाद फुल्लो
देवी िी मृत्यु िे पश्चात् तीनों भाई िो मेरे
पापा व उनिे दोनों भाइयों िो सरिार से सिा
आठ लाख रूपये भमले थे।"

(३०)- इस मामले में यह तथ्य भी
वििारर्ीय है कक ककसी भी साक्षी ने कहीं पर
भी मृतका को जानतसूिक शब्दों का प्रयोर्
नहीं ककया है. ऐसी ण्स्र्थनत में अभभयुक्त के
विरूदध एस०सी०/एस०टी० ऐक्ट का कोई
अपराध र्दठत नहीं होता है।

20- इस प्रिार अभभयुक्त अींकित
पूननया िे ववरूद्ि :-

(1) धारा 302 भा०दं०वि० का अपराध
र्दठत नहीं होता है िूंकक चिककत्सक के अनुसार
मृतका की मृत्यु का कारर् "सेजटटि सीमर"
पाया र्या है। इस आधार पर अिर न्यायालय
दिारा अभभयुक्त को धारा 302 भा०८०वि० में
की र्यी दोष-भसदचध का ननर्गय खण्डित ककया
जाता है।

(2) धारा 376/511 भा०दं०वि० का
अपराध र्दठत नहीं होता है कक िूंकक मृतका की
मृत्यु पूिग परीक्षर् करने िाले चिककत्सक दिारा
यह आख्या दी र्यी है कक "No External
injury
Present
at
the
time
of
Examination" तर्था चिककत्सक ने अन्त में
अपना अभभमत व्यक्त ककया है कक "No Sign
of Force being used sexual assault can
not be ruled out." इस आधार पर अिर
न्यायालय दिारा अभभयुक्त को धारा 376/511
भा०दं०वि० में की र्यी दोष-भसदचध का ननर्गय
खण्डित ककया जाता है।

(3) अभभयोजन साक्षीर्र् इस बात
को भी सात्रबत करने में असफल रहे हैं कक
अभभयुक्त रात्रि के समय घर के अन्दर दुष्कमग
अर्थिा बलात्कार करने की नीयत से घर के
अन्दर घुसा इसभलए अभभयुक्त दिारा रािो
पृछछन्न र्ृह अनतिार या रात्रि र्ृहभेदन का
अपराध अन्तर्गत धारा 458 भा०द०वि० का भी
अपराध सन्देह से परे सात्रबत नहीं होता है।

21- ननष्कषगतः यह दाण्डिक अपील
स्वीिार की जाती है तर्था अभभयुक्त को उस पर
लर्ाए र्ए आरोप अन्तर्गत िारा 302, 376,
511, 458 भा०दीं०वव० िे अपराि में दोि-मुक्त
8 All. Shiv Mohan Shilpkar Vs. State of U.P. & Anr.
69
किया जाता है एिं दाण्डिक िाद सं० 01 सन
2018
में
विशेष
न्यायाधीश
(एस०सी०/एस०टी० ऐक्ट) मेरठ दिारा पाररत
ननर्गय दद० 20-11-2020, ण्जसके दिारा
अपीलार्थी/अभभयुक्त अंककत पूननया को धारा
302 भा०दं०वि० के अपराध में आजीिन
कारािास एिं रू0 25,000/- अर्थगदडि से तर्था
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है.
धारा 376/511 ना०दं०वि० के अपराध में 7 िषग
के कारािास एिं रू0 10,000/- अर्थगदडि से एिं
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है तर्था
धारा 458 भा०दं०वि० के अपराध में 7 िषग का
कारािास एिं रू० 10,000/- अर्थगदडि से एिं
अर्थगदडि अदा न करने पर 3 माह के अनतररक्त
कारािास के दडि से दण्डित ककया र्या है. को
अपास्त ककया जाता है।

22- तद्‌नुसार संबंचधत न्यायालय को
ननदेभशत
ककया
जाता
है
कक
अपीलार्थी/अभभयुक्त
अंककत
पूननया
को
कारार्ार से ननयमानुसार मुक्त कर ददया जाय।

23- कायागलय को ननदेश ददया जाता है कक
वििारर् न्यायालय का अभभलेख िापस भेज
ददया जाय तर्था इस आदेश की एक प्रनतभलवप
संबंचधत अिर न्यायालय को अनुपालन हेतु
तुरंत भेजना सुननण्कित ककया जाय।
----------
(2024) 8 ILRA 69
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 08.08.2024

BEFORE

THE HON'BLE ASHWANI KUMAR MISHRA, J.
THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Appeal U/S 372 CR.P.C. No. 1251 of
2022
With
Government Appeal Defective No. 60 of 2022

Shiv Mohan Shilpkar ...Appellant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Respondents

Counsel for the Appellant:
Sri Daya Shankar

Counsel for the Respondents:
G.A., Sri Jyoti Bushan

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Sections 164 & 372 - Indian Penal
Code,1860 - Sections 376 & 511 -
Protection
of
Children
From
Sexual
Offence Act, 2012- Sections 3 & 4: -
Appeals - against acquittal - offence of attempt
to Rape - victim aged about 6 years - FIR -
charge-sheet - trial court finds that - victim was
examined medically but no external or internal
injuries were found - no spermatozoa is seen in
vaginal slides - hymen is also intact - in her
St.ment
made
before
court
victim
said
whatsoever which was told to her by her father
-court finds that - major contradictions in the
version of the victim viz-a-viz her father as well
as material improvements in her version from
what was St.d earlier u/s 164 Cr.P.C. also remain
unexplained - and neither any triable issue is
raised before us in these appeals nor any
perversity is shown, which may persuade this
court to interfere in these appeals - court in
agreement with the view of trial court that the
prosecution has failed to established its case
beyond reasonable doubt - held, view taken by
the court below is clearly a permissible view and
just because a different view could be taken
would ordinarily not be a ground for this court
to interfere with the order of acquittal - hence,
there is no occasion for this court to interfere