# Bhagwan Dei v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 10 ILRA 765
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-10-16
- **Case number:** Criminal Appeal No. 7317 of 2018
- **Bench:** Arvind Singh Sangwan, Mohd. Azhar Husain Idrisi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/bhagwan-dei-v-state-of-u-p-51106
- **Pages:** 25

## Headnote

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Section - 313 - Indian Penal Code,
1860 - Sections 34 & 302 - Appeals - against
Conviction and Sentence - FIR - offence of Murder
- investigation - victim died during treatment -
Chargesheet - cognizance - sentence - Evaluation
of Evidence - credibility of witness testimonies and
the admissibility of the dying declaration - court
finds that - the applicants were convicted for the
murder of deceased, who died from service burn
injuries - the prosecution alleged that the
appellants, along with the victim's husband, were
responsible for her death - however, husband
was found innocent, and the evidence against the
appellants was deemed insufficient - the
prosecution failed to prove the charges against
the appellants - held - appellants acquitted of
charges due to lack of credible evidence linking
them to the crime - prosecution witnesses not
being reliable or trustworthy - dying declaration
deemed
suspicious
and
not
admissible
-
impugned judgment set aside - present appeal is
allowed - direction issued for releasing them
accordingly. (Para - 62, 63, 64)

Appeals Allowed. (E-11)

## Text

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10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
765
प्रकिया संदहता के प्रावविान िारा 39 ननयम 2क व्यवहार प्रकिया संदहता के अन्तगडत प्रस्तुत
ककए गए प्राथडना पि पर लागू नहीं होंगे।

9. उपरोक्त समीक्षा के आलोक में
ववद्वान ससववल जज (अवर खंड), गोंडा द्वारा
प्रकीणड वाि संख्या 543 सन 2024 में पाररत
आिेश दिनांक 09.09.2024 ववधि में संिायड
नहीं है तथा ननरस्त ककए जाने योग्य है।

10. तिनुसार, याधचका थवीकार की जाती
है। वाि संख्या 543 सन 2024 में पाररत आिेश
दिनांक 09.09.2024 ननरस्त ककया जाता है।

11. ववद्वान अपर ससववल जज (अवर
खंड) गोंडा को यह ननिेश दिया जाता है कक
याधचकाकताड द्वारा आिेश 39 ननयम 2-क
व्यवहार प्रकिया संदहता के अन्तगडत प्रस्तुत
प्रकीणड वाि संख्या 543 सन 2024 में पक्षों को
नोदटस ननगडत करके ववधिनुसार अजन्तम
कायडवाही करना सुननजश्चत करें।
----------
(2024) 10 ILRA 765
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 16.10.2024

BEFORE

THE HON'BLE ARVIND SINGH SANGWAN, J.
THE HON'BLE MOHD. AZHAR HUSAIN
IDRISI, J.

Criminal Appeal No. 7317 of 2018
And
Criminal Appeal No. 7326 of 2018

Bhagwan Dei ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent
Counsel for the Appellant:
Nagendra Bahadur Singh, Sudarshan Singh

Counsel for the Respondent:
G.A.

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Section - 313 - Indian Penal Code,
1860 - Sections 34 & 302 - Appeals - against
Conviction and Sentence - FIR - offence of Murder
- investigation - victim died during treatment -
Chargesheet - cognizance - sentence - Evaluation
of Evidence - credibility of witness testimonies and
the admissibility of the dying declaration - court
finds that - the applicants were convicted for the
murder of deceased, who died from service burn
injuries - the prosecution alleged that the
appellants, along with the victim's husband, were
responsible for her death - however, husband
was found innocent, and the evidence against the
appellants was deemed insufficient - the
prosecution failed to prove the charges against
the appellants - held - appellants acquitted of
charges due to lack of credible evidence linking
them to the crime - prosecution witnesses not
being reliable or trustworthy - dying declaration
deemed
suspicious
and
not
admissible
-
impugned judgment set aside - present appeal is
allowed - direction issued for releasing them
accordingly. (Para - 62, 63, 64)

Appeals Allowed. (E-11)

(Delivered by Hon'ble Arvind Singh
Sangwan, J.)

1. The present appeals have been filed
challenging the judgment of conviction and
order of sentence dated 13.11.2018, passed
by VIth Additional Sessions Judge/Special
Judge, Prevention of Corruption (UPSEB),
Bareilly in Sessions Trial No. 254 of 2013
by which the appellants were held guilty of
offence punishable under Section 302 IPC
read with Section 34 of IPC and were
sentenced to imprisonment for life with
fine of Rs. 20,000/- each and in case of
default in payment of fine, to further
undergo six months' imprisonment.
766 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

2. Heard Sri Vinay Kumar Tripathi,
learned counsel for the appellant and
learned A.G.A. for the State.

3. Paper book is ready. LCR is
requisitioned. With the assistance of
learned Advocates, the entire trial court
record as well as the paper book are rescrutinized
and
the
evidence
is
reappreciated.

4. The Supreme Court, in S.L.P.
Criminal No.193 of 2024 vide order dated
2.1.2024 has directed to dispose of the
present appeals expeditiously.

5. The FIR was registered on a
complaint given by informant PW-1,
Sanjeev Kumar which read as under:

"श्रीमान थाना प्रिारी आवला

महोिय

ननवेिन इस प्रकार है कक मेरी
मझली बहन कक शािी लगिग 7-8 वर्ड पूवड
ग्राम पैगा तह० आवला जज० बरेली में
बलवीर ससंह पुि िानू प्रताप ससंह के साथ
मेरे वपता जी ने सम्पन्न की थी। शािी में
3 लाख रू० नगि लगिग 4 लाख का
समान दिया था परन्तु बलवीर ससंह फौज
में कायडरत है। इससलए वह ककसी को नहीं
समझता है। जब घर पर आता है तो शराब
पीकर अपनी पत्नी और गांव वालो के साथ
झगड़ा करता है। और अपनी पत्नी डडंम्पल
से बार बार पैसो एवं रूपया अपने मायके
से लाने को कहता है। हम लोगो ने इसको
कई बार आधथडक एव िन की सहायता की
परन्तु यह शराब पीकर बार बार कई बार
मेरी बहन को मारने का प्रयास ककया आज
दिनांक 14.5. 2014 को बलवीर के वपता न
होने पर आज मेरी बहन को बलवीर ससंह
फौजी, की मॉ एवं उसकी छोटी बहन काजन्त
एवं फौजी के िाई नरोत्तम ने समलकर मेरी
बहन को मारा पीटा और बाि में तेल
नछड़ककर आग लगा िी इस समय मेरी
बहन मृत्यु और जजन्िगी से जूझ रही है।

अतः आप से ननवेिन है कक हम
िाईयॉ(का०फटा) बहन के प्रनत होने वाले
अत्याचार को िेखते हुए उपरोक्त लोगो पर
कायडवाही करने की कृपा करे।
आपकी महान कृपा होगी।

लेखक

राजीव कुमार

प्राधथड संजीव कुमार s/o राम चन्र

नन. खुली थाना िमोरा

 इक्ज क- 1 जजला बरेली"

6. Thereafter, the chik FIR was
registered.
The
victim
Dimple
was
admitted in Ishan Hospital, Bareilly where
statement of victim was recorded by PW-9,
Laxmi
Shankar
Singh,
Executive
Magistrate, which read as under:

"Patient Dimple can

Give statement

ह० अप०

14.5.14 8.30 पी.एम.

Dr. Kaushal Kumar

Ms. (Surg) M.Ch

(Plastic Surqury)

डडम्पल w/o बलवीर ननवासी पैगा
थाना ऑवला, जजला बरेली जो इशान
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
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अस्पताल बरेली में आकजस्मक वाडड में िती
है ने मृत्युपूवड बयान ककया कक मेरा पती
बलवीर शराबी है तथा रोज शराब पीकर
मुझे मारता- पीटता है तथा खाने नही िेता
है। आज दिनांक 14.5.14 को समय लगिग
6.00 बजे मेरा पती शराब पीकर मुझे मारने
पीटने लगा। उसी बात पर झगड़ा हुआ। मेरे
पती बलवीर िेवर नरोत्तम तथा अम्बरीश
तथा सास िगवान िेई ने समलकर समट्टी
तेल नछड़ककर जला दिया। शािी हुए
लगिग 9 साल हो गये।

ह० अप०

शील अस्पटट

बयान सुनकर तस्िीक ककया।

14.5.14 समय 8.35

RTI डडम्पल

बयान सलखना 8.30 पी.एम. पर
प्रारम्ि ककया। बयान 8.35. पी.एम. पर पूणड
हुआ।

ह० लक्ष्मी शंकर ससंह

ह० अप०

ए.सी.एम. 1

शील अस्पटट

14.5.14 समय 8.35 पी.एम.
प्रिशड क - 8

Pt remind

conscious during

statement

ह०अप०

14.5.14 8.30 पी.एम.

Dr. Kaushal Kumar

Ms. (Surg) M.Ch

(Plastic Surqry)

प्रिशड क - 8"

7. The victim died during her
treatment on 18.5.2014 in the same
hospital.
After
her
death,
the
Panchayatnama was prepared and the dead
body
was
sent
for
post-mortem
examination.
After
post-mortem
was
conducted,
the
Investigating
Officer
recorded the statements of the witnesses
and also effected recording of certain
articles from the place of occurrence.
Finally, the charge-sheet was submitted
before the trial court.

8. The trial court framed the charges
against both the appellants- Bhagwan Dei
and Narrotam. The order framing charges is
reproduced as under:

"आरोप

"मै, मृिुलेश कुमार ससंह, अपर सि
न्यायािीश, कक्ष सं०ेः 13. बरेली आप
असियुक्तगण िगवानिेई एवं नरोत्तम पर
ननम्न आरोप लगाता हूाँः-

1- यह कक दिनोंकः 14.05 2014 से
लगिग 7-8 वर्ड पूवड वािी संजीव कुमार की
मझली बहन डडंपल की शािी बलवीर ससंह
के साथ होने के बाि जब वह वविा होकर
वहि ग्राम ग्राम पैगा थाना आाँवला जनपि
बरेली अपनी ससुराल आप लोगों के यहााँ
आयी तो आप लोगों ने डडंपल को िहेज में
रूपये पैसे लाने के सलए कहा। उक्त िहेज
की मााँग पूरी न होने पर आप लोगों ने
डडंपल को शारीररक व मानससक रूप से
प्रताडडत ककया। इस प्रकार आपने ऐसा
अपराि काररत ककया जो िारा 498 ए
768 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
िा०ि०सं० के अन्र्तगत िण्डनीय है और इस
न्यायालय के प्रसंज्ञान में है।

2- यह कक दिनॉकः 14.05.2014
को ककसी समय उपरोक्त स्थान पर आप
लोगो ने आपस में एक राय होकर वािी
संजीव कुमार की मझली बहन डडंपल को
मारपीट कर उसके ऊपर तेल नछड़ककर
आग लगा िी जजससे डडंपल की ईशन
अस्पताल में उपचार के िौरान मृत्यु हो
गयी। इस प्रकार आप लोगों ने डडंपल की
हत्या काररत की। इस प्रकार आपने ऐसा
अपराि काररत ककया जो िारा-302/34
िा०ि०सं० के अन्तडगत िण्डनीय अपराि है
जो इस न्यायालय के प्रसंज्ञान में है।

3- यह कक दिनॉकः 14.05.2014 से
लगिग 7-8 वर्ड पूवड वािी संजीव कुमार की
मझली बहन डडंपल की शािी बलवीर ससंह
के साथ होने के बाि जब वह वविा, होकर
वहि ग्राम ग्राम पैगा थाना ऑवला जनपि
बरेली अपनी ससुराल आप लोगों के यहााँ
आयी तो आप लोगों ने डडंपल को िहेज में
रूपये पैसे लाकर िेने हेतु िुटप्रेररत ककया।
इस प्रकार आपने ऐसा अपराि काररत
ककया जो िारा-3 िहेज प्रनतर्ेि अधिननयम
के अन्तगडत िण्डनीय है जो इस न्यायालय
के प्रसंज्ञान में है।

4- यह कक दिनांकः 14 05 2014 से
लगिग 7-8 वर्ड पूवड वािी

...व कुमार की मझली बहन
डडंपल की शािी बलवीर ससंह के साथ होने
के बाि जब वह वविा होकर वहि ग्राम
ग्राम पैगा थाना आाँवला जनपि बरेली
अपनी ससुराल आप लोगों के यहााँ आयी तो
आप लोगों ने डडंपल को अपने मायके से
िहेज में रूपये पैसे लाने की मााँग ककया।
इस प्रकार आपने ऐसा अपराि काररत
ककया जो िारा -4 िहेज प्रनतर्ेि अधिननयम
के अन्र्तगत िण्डनीय अपराि है जो इस
न्यायालय के प्रसंज्ञान में है।

एतद् द्वारा आपको ननिेसशत
ककया जाता है कक उक्त आरोप * के सलए
आपका ववचारण इस न्यायालय द्वारा
ककया जायेगा।"

Both the accused did not plead guilty
and claimed trial.

9. In prosecution evidence, PW-1, Sanjeev
Kumar-
informant
appeared
and
the
operative part of his statement read as
under:

"संजीव कुमार उम्र लगिग 33
वर्ड पेशा खेती पुि श्री रामचन्र नन. ग्राम
खुलीतार पुर थाना िमौरा जज० बरेली ने
सशपथ व्यान ककया कक मृतका डडम्पल
मेरी मझली बदहन थी। घटना से 7 वर्ड पूवड
श्री बलवीर ससंह फौजी ननवासी ग्राम पैगा
थाना आंवला के साथ की थी। शािी मे
हमने तीन लाख रूपया नकि व चार लाख
का सामान िहेज में दिया था। मेरी बदहन
डडम्पल शािी के बाि अपनी ससुराल पैंगा
मे रही थी। मेरी बदहन फौजी के साथ
उसके संयुक्त पररवार मे रही थी। उस
पररवार मे पनत बलवीर बदहन कान्ती, मााँ
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
769
िगवान िेई िेवर नरोत्तम िूसरा िेवर
अमरीश ससुर िानुप्रताप रहते थे। अिालत
में इस समय असियुक्त की मााँ िगवान िेई
हाजजर है। मेरे बहनोई फौज की नौकरी
करते है। मेरी बदहन डडम्पल अपनी ससुराल
में रहती थी। मेरी बदहन डडम्पल को मेरा
बहनोई किी अपनी नौकरी के स्थान पर
लेकर नही गया। छुट्दटयों में अथवा छुट्टी
लेकर रहने के सलए पैंगा घर पर आता था।

मेरे बहनोई का थवभाव झगडालू
ककथम का और जुआ खेलने व शराब पीने
का था। व मेर बहहन अपने पररवार के
सदथयों व गााँव वालो से झगडा करता था।
मेरे बहनोई फौज मे नौकर होने के कारण
कहता था कक उसका कोई कुछ नह ं बबगाड
सकता है। यह बात वह कई बार कहता था
कक पुललस मेरा कुछ नह ं बबगाड सकती
कानून मेरा कुछ नह ं बबगाड सकता।

मेर बहहन डडम्पल को उन्होने
कई बार मारा पीटा और उस से पैसा लाने
के ललए बार बार कहता था। कई बार हमने
आर्थक मदद की थी मगर उसके बावजूद
भी उसने मार पीट करना व पैसा मांगना
जार रखा।

घटना हद० 14.5.14 की है। मेरे
बहनोई ने सुबह से ह शराब पी ल थी।
शराब पीकर घर आया। मेर बहहन मसाला
पीस रह थी घर में मौजूद भगवान देई,
नरोत्तम, अमर श व बहहन क्राजन्त थे सभी
लोग मौजूद थे। पनत बलवीर मेर बहहन से
पूछ रहा था कक खाना नह बनाया है। मेर
बहहन के कहा बना तो रह हूाँ। इतने में वह
आग बबूला हो गया। लसल वटना उठा कर
उसने मुाँह पर मार हदया मेर बहहन के दााँत
भी टूट गये। मेर बहहन इन सब लोगों के
हाथ जोडती रह ककसी ने उसको बचाया
नह । मेर बहहन के बाल पकड के कमरे के
अन्दर लमट्ट का तेल नछडक कर पनत
बलवीर ले गया और भगवान देई, देवर
नरोत्तम, नन्द क्राजन्त दूसरा देवर अमर श
इन सबने लमलकर मेर बहहन डडम्पल में
आग लगा द । इस घटना को मेरे भान्जे
सर्चन मेर बडी? ममता और नरेन्र पाल
जो ममता का पडोसी है। इन लोगों ने देखा
व सुना था और उन्होने ही घटना के बारे
में मुझे बताया था। मेरी बदहन दि०
14.5.14 को नेम ससंह आदि द्वारा ईशान
अस्पताल मे बुरी तरह जली हुई हालत में
िती करायी गयी। दि० 14.5.14 को समय
करीब 5.30 6.00 बजे के बीच में (शाम को)
जलाने व मारपीट की घटना हुई थी। मैने
सूचना प्रा्त होने के बाि एक तहरीर अपने
िाई राजीव से बोल बोल कर सलखायी थी।
गवाह ने पिावली मे शासमल कागज सं0 4
क/2 को िेखकर कहा कक यह वही तहरीर है
जो मेरे बोलने पर मेरे िाई ने सलखी थी।
गवाह ने तहरीर 4क/2 को पढकर कहा कक
इसमे वही मजमून सलखा है जो मैने बोला
था। जब तहरीर पर िस्तखत नही है तो
मैने कहा ककये होगे। मेरे हस्ताक्षर हडवड़ी
मे करने मे रह गये होगें। तहरीर मे
मजमून नही सलखा है जो मैने बताया था।
770 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
इस तहरीर पर प्रिशड क-1 डाला गया।
तहरीर लेकर मै आंवला कोतवाली थाना
गया था। तहरीर मैने िीवान जी को िी थी।
और थाने पर मुकिमा कायम कराया था।"

10. In cross-examination, this witness
stated that he has given the report to the
police as per information given to him by
Narendra Pal and his sister Mamta and
nephew Sachin. He stated that on the
complaint Ex.Ka.1, neither he has signed
nor his brother Rajeev who scribed the
same has signed.

11. In further cross-examination, he
stated that regarding the death of the
victim, the police did not obtain his
signature on any document and he has
given the complaint as informed by the
aforesaid three persons.

12. PW-2- Narendra Pal made the
following deposition:

"दि० 14.5.14 की घटना है। मैं
अपने खेतो पर से काम करके वापस घर
आ रहा था। समय करीब 5 या 5.1/2 बजे
का रहा होगा। मै बलवीर के घर के सामने
पहुाँचा। मैने बलवीर के घर से बहुत तेज
(शोर) को सुना। बलवीर के गेट बाहर वाला
अन्िर से बन्ि था। लोहे का गेट है। टूटा
हुआ है। उसमे से साफ दिखाई िेता है। मैने
िेखा कक बलवीर नरोत्तम, अमरीश smt
िगवानिेई चारो लोग समलकर लात घुसा से
मारपीट कर रहे थे। पड़ोस की ममता िी
अपने घर से कूड़ डालने आयी थी। वह िी
शोर सुनकर आयी वह िी शोर सुनकर रूक
गयी डडम्पल ससल वटटा पर कुछ पीस रही
थी। बलवीर डडम्पल के बाल पकड़कर
खखचते हुए अन्िर ले गया। बाकी लोग
बलवीर के पीछे पीछे अन्िर चले गये। कफर
इन लोगो ने समट्टी का तेल नछड़ककर
आग लगा िी। मैने िरवाजे पर आवाज
लगायी कक सालो उसे क्या मार डालोगे।
मेरे शोर पर बहुत से लोग इक्टठे हो गये।
शोर सुनकर सिी मुजल्जमान बाहर वाला
गेट खोलकर जजस पर हम लोग खड़े थे।
खोलकर ननकल गये।

इसके बाि हम सिी लोग अन्िर
चले गये थे। सिी नें समलकर डडम्पल को
आग बुझायी थी। उस कमरे में डबल बेड के
वरावर मे 2 लीटर पे्सी की बोतल मे
लगिग 100 ग्राम समट्टी का तेल बचा हुआ
था। गांव का ही सधचन मौके पर आ गया।
उसके यहााँ बुलेरो गाड़ी है। उसने फोन करके
ड्राइवर व गाड़ी मगाँवायी थी। डडम्पल को
उस गाड़ी में बबठाकर कन्हई लाल नेमससंह,
Smt. राजकुमारी ईशान अस्पताल बरेली ले
गये। डडम्पल के जाने वाि मैं तथा अन्य
लोग वहााँ से चले गये थे। मैं अपने घर
चला गया था। िरोगा जी ने लगिग एक
माह बाि मेरा व्यान सलया था। मैं
हाजस्पदटल नही गया था।"

13. In cross-examination, this witness
stated as under:

"यह बात सही है। कक बलवीर
फौजी और ममता पनत सुरेन्र चार- छः घर
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
771
है। यह बात सही है कक डडम्पल सुरेन्र के
घर आती जाती थी। लेककन कम आती थी।
क्योकक बलवीर फौजी डडम्पल के साढू
सुरेन्र के घर आने से रोकता था। और इसी
पर बलवीर फौजी व डडम्पल की बहन
ममता के बीच मतिेि था। डडम्पल के
ममता अपनी बहन व बहनोई के कारण
उसके मरने से पूवड वववाि िी हुआ था। यह
बात इससलए ममता का पनत सुरेन्र बलवीर
फौजी से शराब पीने से नाराज रहते थे।
क्योंकक बलवीर फौजी शराब पीता था।
उसकी इस आित के कारण ममता व
सुरेन्र बुरा मानते थे और नाराज रहते थे।
बलवीर फौजी के यहााँ आना-जाना नही था।

घटना के बाद मैं 20-25 हदन के
ललए बाहर चला गया था। घटना के बाद मैं
20-25 हदन के ललए बाहर चला गया था।
लगभग एक मह ने बाद दरोगा जी मेरे घर
आये थे। यह बात भी मैने दरोगा जी को
बता द थी कक मैने व अन्य वहााँ पर
मौजूद लोगो ने वहााँ पर डडम्पल के ऊपर
रेता व लमट्ट डालकर जलने से बचाया था।
अगर दरोगा जी ने यह बात मेरे ब्यानों में
नह ं ललखी है तो मैं इसका कोई कारण नह
बता सकता।"

14. PW-3- Mamta, sister of the victim
Dimpal made the following deposition:

"मृतका डडम्पल की शािी की
आज से लगिग 13-14 वर्ड हो चुके है।
मेरी शािी िी ग्राम पैगा मे सुरेन्र पाल के
यहााँ हुई है और इसी गााँव के बलवीर से
डडम्पल की शािी हुई थी। शािी के बाि
कुछ दिन तक माहौल सही रहा उसके बाि
बलवीर डडम्पल से पररवार वालो से िारू
पीकर झगड़ा मारपीट करता था। मेरी बदहन
ने अपनी परेशानी मुझे किी नही बतायी
थी जो बताया होगा वह मेरे मम्मी व पापा
को बताया होगा। मेरी मम्मी पापा ने मुझे
कुछ नहीं बताया कफर कहा कक एकाि बार
कहा था कक डडम्पल को बलवीर परेशान व
मारपीट करता है। मेरी बदहन को इन लोगो
ने अलग कर दिया था। पहनने को कपड़े
नहीं दिये थे। सब मेरे मम्मी पापा िेजते
थे।

घटना हद० 14.5.14 की है। मुझे
पता लगा जब मैं कूडा डालने जा रह थी।
डडम्पल के घर के बराबर में कूडा डालने
गयी थी तो मैने देखा कक यह सभी लोग
डडम्पल को मारपीट रहे थे। बलवीर के हाथ
में बटवा, नरोत्तम के हाथ मे डन्डा
अम्वर श? के हाथ मे फुकनी तथा सास के
हाथ में र्चमटा था। कफर डडम्पल का जूडा
पकड कर डडम्पल को अन्दर कमरे में ले
गया तथा लमट्ट का तेल नछडक कर आग
लगा द ।"

15. In cross-examination, she stated as
under:

"मेर बहहन डडम्पल को शाद के
5-6 साल बाद अलग कर हदया था। मेर
बहहन अलग कमरे में रहती थी। अपने
772 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
बच्चों के साथ अलग रहती थी। सास व
देवर अलग रहते थे। बहहन मेर अपना
खाना अलग बनाती थी। सास अपना खाना
अलग बनाती थी। यह बात सह है मेर
बहहन को मरने से 3-4 साल पहले अलग
कर हदया था। मेरी बदहन बलवीर के घर
आने पर ही मेरे घर आती थी। मेरे बलवीर
से अच्छे सम्बन्ि थे मेरा किी बलवीर से
लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ था। बलवीर शािी
से पहले से मेरे यहााँ आता जाता था उसको
मैं शािी से पहले से अच्छी तरह से जानती
थी। मेरे पनत ने उसे ट्यूशन पढ़ायी थी
इससलए वह मेरे पनत का सम्मान करता
था। बलवीर शाद के बाद से शराब पीने
लगा था। पहले कुछ नह पीता था। बलवीर
मे शराब पीने के अलावा जुआ व सभी ऐब
थे।

बलवीर फौजी के छोटे िाई
अम्बरीश पढते थे। नरोत्तम िी पढ़ाई करते
थे यह नहीं पता कक डाक्टरी की पढ़ाई
करते थे या क्या पढ़ाई करते थे। बलवीर
फौजी उनकी पढाई में आधथडक मिि करता
था

मेर बहहन पनत व ससुराल वालो से
मानलसक रूप से परेशान भी रहती थी।
मुझसे डडम्पल यह कहती थी कक तुमने ह
मेर शाद करायी है यहद आपने मेर शाद
अच्छे घर में करवायी होती तो मैं आपसे
आटा चावल व पैसा नह ं मॉगती, न ह मुझे
अपमाननत होना पडता और न ह आप
लोगो से मुझे बार बार मॉगनी पडती। मैने
फौजी को समझाया था लेककन फौजी पर
कोई असर नह ं पडा। मैं अपनी बहहन को
समझाती रहती थी। तो वह यह कहती थी
कक मैं आप लोगो से मदद लेते लेते बहुत
अपमाजन्त हो चुकी हूाँ अब मुझे अच्छा नह ं
लगता। फौजी बलवीर जब छुट्ट पर आता
था तो अपने घर पर ह रहता था। इस
घटना से पहले फौजी एक मह ना पहले
अवकाश पर आया था। इस अवकाश पर
आने से पहले फौजी अवकाश पर ककतने
हदनो पहले आया मुझे नह ं पता। बलवीर
फौजी के जुआ खेलने व शराब पीने के
कारण भी मेर बहहन मानलसक रूप से
परेशान रहती थी। मुझे भी उसने मरने से
पहले बताया था कक मैं मानलसक रूप से
बहुत परेशान हूाँ।"

16. However, this witness denied a
suggestion that the victim has committed
suicide.

17. PW-4- Sachin Singh, son of
Mamta-
PW-3
made
a
following
deposition:

"घटना हद० 14.5.14 की है। मैं
उस हदन अपने गााँव में मौजूद था। घटना
शाम के 5:30 बजे 6:00 बजे का समय रहा
होगा। बलवीर फौजी के घर से चीखने
र्चल्लाने की आवाजे आ रह थी तो इस पर
मॉ दौडती और र्चल्लाती हुई उसके घर की
ओर भागी। जब मेर मम्मी बलवीर फौजी
के घर पहुाँची तो मेर मौसी काफी जल
चुकी थी। जब मैं वहााँ पहुंचा तो मेरी मौसी
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
773
डडम्पल मुझसे, बरेली के सधचन मेरे मौसा
बलवीर और मेरी सास िगवान िेई, नरोत्तम
िेवर, अमरीश िेवर ने समलकर मुझे जलाया
है। कफर मेरी गाड़ी घटना स्थल पर मंगायी
गयी कफर उन्हें उसमे सलटाकर व बैठा कर
जीशान हास्पीटल ले गये। गाड़ी में नेम
ससंह, कन्हई व राजकुमारी अस्पताल जाने
में साथ थे। मैं और मेरी मााँ अस्पताल नहीं
गये।"

18. In cross-examination, this witness
stated as under:

"मौसी के मरने के बाि मेरी
अपने मौसेरे िाई बदहन से बात होती है
कम बात होती है। िोनो बच्चे समझिार है
और पढ़ते सलखते है। लेककन ककन ककन
कक्षाओं मे पढ़ते है मैं यह नहीं बता
सकता। सारा खचाड उनके िािी िािा और
वपता जी उठाते है।"

19. PW-5- Brij Kishore, another
prosecution witness, who was witness to
the Panchayatnama, was declared hostile
and did not support the prosecution version
as he has stated that he has not signed on
the opinion of Panches.

20. PW-6- Dr. Vijay Pal Singh, who
conducted the post-mortem of the victim
deposed as under:

"दिनांक 19.5.14 को मैं उक्त पि
पर तैनात था, उस दिन मेरी ड्यूटी
पोस्टमाटडम में थी। उक्त दिवस मेरे द्वारा
3.46 पी.एम. पर डडम्पल D/o रामचन्र
नतवारी पैगा ps आवला बरेली उम्र 30 वर्ड
(Sic) पी.एम. ककया गया था। मृतका का
शव मय 9 पुसलस प्रपिो सदहत सील बन्ि
हालत में एच.सी. हेमससंह ps कोतवाली
लेकर गये थे। मृतका की शय की पहचान
राजीव (िाई) एवं कुलिीप कुमार (जीजा)
की द्वारा की गयी थी।

मृतका के शव का सामान्य
परीक्षण करने पर पाया कक शव की औसत
उचाई 155 सेमी० की तथा कि काठी
सामान्य थी। आंखे मुहं खुले थे। अकड़न
मौजूि थी। सड़न के लक्षण मौजुि नहीं थे।

मृतका की शरीर पर मृत्यु पूवड
आयी वाहय चोटो का वववरणः-

मृतका का पूरा शर र पूरा ऊपर
एवं भीतर को जला हुआ था केवल तलवे
का छोडकर। बाल झुलसे थे। त्वचा जगह
जगह फट हुई थी। तथा लाइन आफ
रेडनेस मौजुद थी।

आन्तररक परीक्षण

मजस्तटक की खझजल्लयां सूजी थी।
िोनो तरफ फेफड़े सूजे हुये थे तथा काटने
पर पस पाया गया। हृिय का िायां दहस्सा
िरा, बायां खाली था तथा हृिय के अंिर
चेरी रेड रंग का रक्त मौजूि था। उिर, वपत्ती
जली हुई थी। पेट खाली था। यकृत सूजा
था तथा वजन 1200 ग्राम था। वपताशय
िरा था। नतल्ली सूजी थी वजन 110 ग्राम
था। िोनो तरफ के गुिे की काटने पर पस
पाया गया तथा वजन 230 ग्राम थे। मृतका
के गिाडशय से एक लड़की जजसकी लम्बाई
774 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
19 सेमी थी लगिग पांच माह के गिड के
बराबर पायी गयी। मृतका का (शव) शरीर
लगिग एक दिन पुराना था।

मेर राय में मृतका की मृत्यु
मृत्यु पूवक जलने के कारण जहर बाद
(सेफ ट सीलमया) के कारण हुई थी।

गवाह ने पिावली में शासमल
कागज सं० 9 क/1 को िेखकर कहा कक यह
पी.एम.आर. नं0 598 मैने िौरान शव
ववच्छेिन अपनी लेख व हस्ताक्षर में
तैय्यार ककया। मैं अपनी लेख व हस्ताक्षर
की पुजटट करता हूाँ प्रिशड क-2 डाला गया।

X X X X X X

मैने पी.एम करते समय मृतका के
शर र पर वनक इंजर के इलावा और कोई
चोट नह पायी थी। पी.एम.आर. के साथ
लाए व 9 पुसलस प्रपिो के साथ में
एफ.आई.आर साथ में नहीं आयी थी। साक्षी
ने पंचायतनामा िेखकर कहा कक इस पर
अपराि सं., िारा का कोई उल्लेख नहीं है
इसी तरह से नमूना मोहर फोटो लाश,
चालान फामड पर िी इजांच सं० व िारा
बनाम का उल्लेख नही है इसी तरीके से
जी.डी. की प्रनत पर िी अपराि िारा का
उल्लेख नही है। इसी तरीके से इसी प्रकार
ईशान अस्पताल द्वारा पी.एस. प्रिारी
ननरीक्षक कोतवाली को िेजा गया मेमो में
इस बात का उल्लेख है कक मृतका डडम्पल
को िगवानिेई (सास) ने (sic). इलाज ईशान
अस्पताल मे दि. 14.5.14 को िती ककया
गया। जजसकी िौराने इलाज अस्पताल में
ही मृत्यु हो गयी थी। मृतका का चेहरा
जला था। मैं नहीं बता सकता कक मृतका
ककस जस्थनत में ककस प्रकार से जली होगी।
मृतका आगे पीछे िोनो तरफ से जली थी।
बाल झुलसे थे।

यह कहना गलत है कक यह चोटे
आत्महत्या या अन्य (Sic) तरीके से ही
आयी होगी।"

21. PW-7- Dr. Kaushal Kumar, who
treated the victim at Ishan Hospital,
deposed as under:

"दि० 14.5.14 को समय 8-10
पी.एम पर smt डडम्पल 35-30 वर्ड W/O
बलवीर R/o पैगां ps आवलॉ बरेली श्री
िगवान िेई सास द्वारा संजीव िाई
जजसका मोबाइल नं० अंककत ककया गया
द्वारा िती कराया गया। िती के उपरान्त
मेरे द्वारा इसकी चोटो का ननरीक्षण ककया
व उसकी सामान्य परीक्षण ककए गए।
मरीज 95% जली थी, समट्टी की तेल की
महक आ रही थी। िती के समय पूछे जाने
पर कक आप कैसे जली, मरीज ने बताया कक
उसके पनत ससुर सास िोनो िेवर ने उसको
पीटा और कफर समट्टी का तेल डालकर
आग लगा िी। मरीज को िती कर के
उसकी जााँचोपरान्त इलाज शुरू ककया गया।
िौराने इलाज मरीज की 18.5.14 को 6.56
पी.एम पर उसकी मृत्यु हो गयी।

सुबह 7-15 बजे मरीज की बी०पी०
141/92 नब्ज 92, आक्सीजन की मािा
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
775
शरीर में 100% थी की सांस की गनत 24
प्रनत समनट थी। मेरी जानकारी में है मरीज
का मृत्यु कालीन व्यान का मेमो अस्पताल
द्वारा िेजा गया जजसपर लक्ष्मी शंकर ससंह
ए.सी.एम. । तत्कालीन द्वारा मृत्यु कालीन
व्यान सलखा गया। का० सं0 52ख 1 to 52ख3 पर प्रिशड िमश-3-4-5 डाला गया।

X X X By defence councel for all
accused.

साक्षी ने इलाज की केस सीट
िेखकर बताया कक मृतका को (SIC) इलाज
मेरे अस्पताल में इलाज हेतु उसकी सास
िगवानिेई द्वारा िती कराया गया।

केस सीट पर मृतका की सास के
अलावा (का० फटा) ककसी व्यजक्त का नन०
अंगूठा। हस्ताक्षर िती (का० फटा) समय
नही थे। जो व्यजक्त इलाज के सलये मरीज
को िती करता है वही व्यजक्त इलाज की
फीस जमा करता है। केस सीट 14.5.14 की
है। मरीज को िती करने की है वह मेरे
द्वारा तैयार की गयी है। उस पर लाने
वालो मे सास िगवानिेई का ही नाम है।
यह बात सह है कक केस सीट पर मर ज
का ननशानी अंगूठा। हथताक्षर नह कराया
गया उसके द्वारा मर ज द्वारा कोई
सत्यापन नह ं ककया गया।

पहले मरीज को िती करने के
पूवड ही मरीज के इलाज फस्टड एड िेना शुरू
कर िेते है उसकी बाि अन्य कायड वाही
इलाज से सम्बजन्ित करते है। इस
कायडवाही में आम तौर 15-20 समनट का
समय लग जाता है।

मरीज जजस समय िती ककया
उस समय सै्टीसीसमया जहर बाि नहीं था,
बजल्क वाि मे िौराने इलाज जहरबाि
सै्टीसीसमया होने की समांवना रहती है।
परन्तु इस मरीज की सै्टीसससमया नही
था। कफर साक्षी ने कहा कक यह चोटे बाि
जहरबाि होनी की संम्िावना रहती है।"

22.
PW-8-
Sabir
Hussain,
who
prepared the chik FIR, Ex.Ka.6 and made
G.D. entry, Ex.Ka.7. In cross-examination,
this witness stated as under:

"तहरीर मे घटना के समय का
उल्लेख नही है। तहरीर मे घटना की नतधथ
का िी उल्लेख नही है यह बात सही है कक
तहरीर पर वािी के हस्ताक्षर नही है मै
हस्ताक्षर वािी की तहरीर पर िूलवश िेख
नही पाया। मैने वववेचक की वववेचना हेतु
धचक की प्रनत सम्बजन्ित कायाडलय वाि
वापसी वववेचक 15.5.14 को दिया था।
वास्ते वववेचना ककस समय दिया ध्यान
नही है। जी०डी० की काबडन प्रनत जी०डी०
नं० 24, समय कटा है। उसके उपर जो
कागज सं0 16क/4 है। तार ख में ओवर
राईहटंग है यह मेरे द्वारा नह की गयी है
मुझे नह ं मालूम कक ककसने की मैंने र्चक
पर वाद के हथताक्षर कराए थे, मैने मूल
र्चक पर हथताक्षर नह कराए, र्चक
रजजथटर पर कराए थे। यह कहना गलत है
776 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
कक र्चक मैने अपनी? सुववधानुसार समय
डालकर ककता की है।"

23. PW-9- Laxmi Shankar Singh,
Administrative Officer, who recorded the
statement of the victim deposed as under:

"दिनांक 14.5.14 को मैं बरेली में
अपर नगर मजजस्रेट के पि पर तैनात था।
उस दिन मैने ईशान अस्पताल मे जाकर
डडम्पल S/O बलवीर R/o पैगां पी.एस.
आवला बरेली का मृत्यु पूवड व्यान अंककत
ककया। मेरे व्यान अंककत करने के पूवड
मरीज की सम्बन्ि? मे व्यान िेने की
जस्थनत में ही सवदहत? प्रमाणपि डा०
कौशल हाल तथा व्यान पूणड रूप से अंककत
करने के बाि डा० द्वारा अपना प्रमाणपि
अंककत ककया गया।

गवाह ने पिावली मे शासमल
कागज 60 क/1 को िेखकर कहा कक यही
मेरे द्वारा अंककत ककया गया व्यान
(डडम्पल w/o बलवीर का है।) इस कागज
पर 8-30 पी.एम. डा० प्रमाण पि, व्यान शुरू
होने के पूवड 8-40 पी.एम. व्यान खत्म होने
के बाि डा० द्वारा प्रमाण पि अंककत ककया
गया। व्यान गवाहान का नन० अंगूठा
(आर.टी.आई) मेरे समक्ष व्यान पर लगाया
गया। कागज 60क/1. पर मैने अपने
हस्तलेख हस्ताक्षर एवं अपनी मोहर की
पुजटट करता हूाँ। मृतका द्वारा अपने व्यान
मे पनत बलवीर द्वारा शराब पीकर मारना
पीटना और 14.5.14 को समय 6:00 बजे
शराब पीकर मारने पीटने लगा इसी बात
पर झगड़ा ककया जजस पर बलवीर नरोत्तम,
अम्बरीश, िगवानिेई द्वारा समलकर समट्टी
तेल नछड़क कर जला िेना के बारे मे
बताया तथा अपनी शािी को 09 वर्ड होना
बताया। कागज सं० 60 क/1 पर प्रिशड क-8
डाला गया।

X
X
X
By
accused
councel for all accused

व्यान में घटना 6 बजे होना
सलखा है जो उसने बताई थी, लेककन सुबह
की थी यह शाम की थी। यह मृतका ने
नही बताया। मैने इस व्यान अंककत करने
से पूवड डा0 से मरीज मृतका के स्वस्थ होने
की जानकारी ली थी। मृतका के स्वस्थ
मजस्तटक के संबंि मे डा० द्वारा प्रमाणपि
अंककत ककया गया। मैने स्वयं द्वारा इस
आरोप पि व्यान लेने से पूवड कोई उल्लेख
अंककत नही ककया। मेरे व्यान मे "डडम्पल
w/o बलवीर----- पीटने लगा"। और इसी
बात पर " तथद क ककया। उपरोक्त व्यान
(दोनो) मेरे द्वारा मेरे द्वारा अपने
हथतलेख में पूवक व्यान ललखा गया। यह
कहना गलत है कक मृतका के दोनो व्यान
अलग अलग हथतलेख मे है। " इसी बात
पर ------ तसद क ककया" बाद में अलग से
अन्य व्यजक्त के लेख में ललखा है। यह
कहना गलत होगा।

मैने
डडम्पल
का
आर.ट .आई
लगवाया है। उस पर मेरे द्वारा उक्त अंगूठे
को अलग से प्रमाणणत नह ं ककया है। व्यान
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
777
मे "व्यान ललखना 8-30 पी.एम-------- पूवक
हुआ" यह और" डडम्पल w/o बलवीर मारने
पीटने लगा" दोनो एक से लेख मे P.M. है।
इसी तर के से 14.5.14 समय 8-35PM तथा
मेरे हथताक्षर एक लेख मे है। शेष अलग
लेख मे है। यह कहना गलत होगा। समस्त
व्यान एक ही राइदटंग में मेरे द्वारा सलखे
गए है तथा व्यान सलखने के बाि व्यान
कताड को आर.टी.आई सलखा गया। तथा मेरे
हस्तलेख मे यह प्रमाणपि अंककत ककया
गया कक व्यान सलखना 8-30 पी.एम पर
प्रारम्ि ककया व्यान 8-35 पी.एम पर पूवड
(SIC) उसके बाि मैने अपने हस्ताक्षर
पढकर अंककत ककया गया। व्यान सलखने से
पूवड मृतका के पररवार वाले को अलग कर
दिया था।

व्यान सलखने से पूवड उसकी
पररवार को कौन कौन से सिस्यो को बाहर
ककया मैं नही बता सकता।"

24. PW-10- Manoj Prakash, Tehsildar
stated
that
he
conducted
the
Panchayatnama which is Ex.Ka.9 and also
prepared the challan of the dead body and
letter of CMO which are Ex.Ka.10 to
Ex.Ka.13.

25. In cross-examination, this witness
stated that the victim was admitted in the
hospital by her mother-in-law, Bhagwan
Dei. He further deposed as under:

"साक्षी के पंचायतनामा मे राय
पंचान मे पंच संजीव कुमार s/o रामचन्र
ननवासी खुल तारपुर व ककसी अन्य
पंचायतनामे के साक्षी ने यह मुझे नह ं
बताया कक मृतका को ककसके द्वारा जलाया
गया है केवल यह बताया गया कक मृतका
की मृत्यु िौराने इलाज िौराने जलने के
कारण आयी चोटो से ईशान अस्पताल
बरेली में हुई है। पचायतनामा की कायडवाही
19.5.14 को हुई थी यदि ककसी साक्षी ने
कहा
है
कक
कायडवाही
18.5.14
को
पचायतनामा की कायडवाही की गयी है। तो
साक्षी ने गलत व्यान दिया है मैने 18.5.14
को पचायतनामा की कोई कायडवाही नही की
थी न ही ककसी साक्षी के पंचायतनामा पर
हस्ताक्षर
कराए
थे।
पचायतनामा
की
कायडवाही की सूचना दि० 19.5.14 को 11-50
ए.एम. पर समली थी। पंचायतनामा की
कायकवाह के दौरान मृतका के हाथ दोनो
पूणकतः आगे पीछे हाथो की उगंललया व शव
आगे पीछे का थड एव पैर जल थी। पूणकतः
जले थे। मैने पुरे शर र मृतका के पूरे शर र
पर अथपताल की पट्ट बांधी थी। मृतका
की दोनो आखें - मुंह पूणकता जला था।"

26. PW-11- Baldev Prasad, one of the
Investigating Officers stated that he has
prepared the site plan, Ex.Ka.14 and
recovered a burnt mattress and some other
articles, which is Ex.Ka.15. He has
recorded the statement of the victim as
Ex.Ka.16. In cross-examination, he stated
that he has not taken the bed in possession
and no matchbox or other articles were
found. There was no mark of burning on
the walls or any other articles and he
denied a suggestion that the recoveries
were not effected at the spot.
778 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
27. In cross-examination, this witness
stated as under:

"यह बात सह है कक मैं जब
अथपताल पहुाँचा तो मजरूब डडम्पल के
भाई, मां राजकुमार मौजूद थे। उन्ह की
मौजूदगी मे मैं व्यान लेता रहा। यह बात
सह है कक मजरूब के मुंह में आक्सीजन
की नल लगी थी, परन्तु व्यान लेते समय
मैने उसको हटवा हदया अथाकत ननकलवा द
थी। यह बात डा० को बताई, उन्होने नल
ननकाल थी। यह बात सह है कक डाक्टर से
नल ननकलवाने के बाबत मैने कोई उल्लेख
नह ककया। मजरूब का व्यान लेने में मुझे
20 लमनट लगे थे। व्यान लेने के बाद मैने
डाक्टर से यह नह ं कहा कक मर ज को
आक्सीजन की नल पुनः लगा दो। मैने
व्यान लेने से पूवक उसके थवथ्य होने का
कोई प्रमाण पत्र नह ं ललया, न ललखा है।
व्यान लेने से पूवक थवतंत्र साक्षी का भी
व्यान नह ं ललया कक मजरूब व्यान देने की
जथथनत मे है।"

28.
PW-12-
Shakti
Singh,
who
conducted the further investigation stated
that he has recorded the statement of the
victim after taking permission of the court,
he proved certain G.D. entries regarding
recording the statement of the witnesses
which is Ex.Ka.14. This witness was
further cross-examined and stated that on a
complaint
(Ex.Ka-1)
given
by
the
informant neither informant has signed nor
scriber has signed. He further stated that
the entire dead body of the victim including
palms of hands and feet were burnt and
victim sustained 95% burn injuries. He also
admitted that as per the hospital record,
victim was admitted by mother-in-law,
Bhagwan Dei. He stated that he has seen
the statement of the victim which was
recorded by earlier Investigating Officer
and there are cuttings on the said statement.
He further stated that he cannot say that it
is recorded in two different hand writings.
He stated that he recorded the statement of
Narendra Pal on 13.6.2014, Sachin on
21.06.2014 and Mamta on 27.6.2014 i.e.
after one month.

29. PW-13- Rajeev Kumar, another
brother of the victim stated that he had no
knowledge about the incident and he has
scribed the complaint on asking of Sanjeev,
however, he did not sign the same as he
was perplexed and stated that Ex.Ka.1 is
the same complaint. In cross-examination,
this witness stated as under:

"मेरा बहनोई ने शाद के बाद से
शराब पीना शुरू कर द थी। बहनोई का
नाम बलवीर है। जुआ भी खेलना शुरू कर
हदया था। मेर बहहन जुआ शराब के ललए
मना करती थी तब ह बहनोई मेर बहहन
को मारता पीटता था। हम लोग भी जुआ
शराब के ललए मना करती थी परन्तु वह
नह ं मानता था गांव में भी उत्पात लडाई
झगडा करता था। मैं अपने बहनोई की
जुआ शराब झगडा उत्पात आहद बातो से
नराज रहता था।

मेर बहहन भी जुआ शराब के
ललए मना करती थी परन्तु यह मानता नह ं
था। और इसकी बुर आदतो की वजह से
नाराज रहती थी। मेर बडी बहहन ममता व
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
779
उसकी पनत भी समझाते थे लेककन यह बुर
आदते नह ं छोडता था जजसकी वजह से मेरे
बडे बहनोई व बहहन नाराज रहते थे।"

"मैने इस घटना से पूवड कोई
ररपोटड अपेन बहनोई व उसके पररवार वाले
के खखलाफ नही सलखवाई थी। मेरा बहनोई
िी पालन पोर्ण मेरी बदहन का करता था।
मेरे माता वपता िी आधथडक सहायता करते
थे। बलवीर फौजी अपने िोनो िाइयों को
पढ़ाता था और अपने माता- वपता की
सहायता करता था। मेरी बदहन डडम्पल से
बड़ी बदहन ममता की आधथडक जस्थनत
डडम्पल से अच्छी थी। मेरा बहनोई बलवीर
फौजी अपने साथ जहा तैनात था साथ
किी नहीं ले गया। इस वजह से मेरी बदहन
नाराज नही रहती थी, लेककन बदहन साथ
जाने को कहती थी परन्तु किी साथ नही
ले गया। मेरे बडे बहनोई सुरेन्र और
बलवीर फौजी के घर के बीच की दूर
लगभग 100-150 मीटर की दूर है। मेरी
बदहन डडम्पल के घर के पास उसके चधचया
ससुर का मकान है। आस पास मकान है।
उनके नाम नहीं मालूम। मेर बहहन डडम्पल
के घर से ममता के घर जाने के ललए गल
मुडकर जाना पडता है। मेर बहहन अलग
कमरे में रहती थी और अन्य पररवार जन
अलग अलग कमरे में रहते थे। मेर बहहन
के दोनो देवर पढ रहे थे लेककन ककस
क्लास में पढ़ रहे थे नह ं मालूम। मैं पुसलस
को लेकर डडम्पल के घर नहीं गया था
बजल्क बड़े िाई गए थे। मैं घर चला गया
था। मेरे बड़े िाई घटना वाले दिन पुसलस
लेकर उसी दिन गए थे जजस समय गए थे
नहीं मालूम।

जब मेरी बदहन की मृत्यु हुई थी
उस समय मै वहां मौजूि नहीं था, मुझे
सूचना िेकर बुलवाया गया था। मैं अपने
बदहन के शव को लेकर पोस्टमाटडम हाउस
गया था वहां पर और ररश्तेिार आ गए थे।
वहां पर पुसलस नहीं आयी थी। िगवानिेई
को मेरे सामने पुसलस ने धगरफ तार नहीं
ककया। मैं बदहन के जलने की सूचना
समलने पर अस्पताल गया था। बाि में िी
गया था। बदहन डडम्पल की मृत्यु की
सूचना समलने पर उसके घर नहीं गया सीिे
अस्पताल गया था। जब सूचना जलने की
समली तब उसके घर गया था. कफर उसके
बाि नही गया। अस्पताल में पुसलस ककस
समय आयी जानकारी नहीं है। मैं अस्पताल
गया था। िाई अस्पताल नही गया था।
मेरा िाई थाने में ररपोटड सलखाने गए थे।
मेरा िाई ररपोटड सलखाने के एक घंटे बाि
मुझे समला था। मेरा िाई ककस समय समला
याि नहीं है मेरा िाई लगिग 8-30 बजे या
9.00 बजे गांव से थाना ररपोटड सलखाने गया
था। वापस आने पर िाई ने बताया कक मैं
ररपोटड सलखाकर आया हूाँ।

मैं गांव पैगा से सीिे ररपोटड
सलखाने गए अस्पताल नही गया। िाई ने
ग्राम पैगा से मेरे साथ थाना गया था। थाने
से िोनो साथ साथ वापस आए थे। मैं थाने
के बाहर रूक गया मेरा िाई थाना के
780 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
अन्िर गया था। िाई के थाने से वापस
आने में करीब 15 समनट लगे थे। यह सही
है कक तहरीर पर मेरे व मेरे िाई के
हस्ताक्षर नही है। तहरीर के अन्त में नतधथ
अंककत नहीं है। कफर कहा कक तहरीर के
अन्िर जो मजबून सलखा है उसमे नतधथ
अंककत है। मुझे ककसी पुसलस वालो ने इस
घटना के बाबत उससे पूछताछ किी नहीं
की थी। यह सही है कक आज िूसरी बार
गवाही के सलए आया हूाँ। न्यायालय से मुझे
सम्मन समला था। मैं घटना के बाि बाहर
काम करने चला गया था। यह कहना गलत
है कक मेरे बत्ताए अनुसार मेरी बदहन के
साथ कोई घटना घदटत न हुई हो। बजल्क
मृतका का िाई होने व अपने पररवार के
िबाव में झूठी गवाही िे रहा हूाँ।

यह कहना गलत है कक मुझे
सूचना िेकर बुलाया गया हो।"

30. This witness denied a suggestion
that the deceased has committed the
suicide.

31. Thereafter, the statement of
accused was recorded under Section 313 of
Cr.P.C. in which all the incrimination
evidences were put to them. In reply to
question no. 4, the appellant- Bhagwan Dei
stated that she has taken her daughter-inlaw to Ishan Hospital and had borne the
entire medical expenses. In response to
question no. 16, she stated that the
deceased was not in a position to make
statement and her statement is recorded in
collusion with the informant. In reply to
question no.18, she stated that there are two
different statements of the victim and from
perusal of the same it is clear that in order
to make the case serious, the Investigating
Officer has made cuttings. In reply to para
26, the victim stated as under:

"प्रश्न सं०26 क्या आपको कुछ
और कहना है?

उत्तर- मेरा पुि बलवीर फौजी
वववाि के कुछ समय बाि पररवार से अलग
हो गया था और अपनी पत्नी व बच्चों के
साथ अलग रहता था वह पुि होने के कारण
आधथडक मिि पररवार की करता था। उसकी
आधथडक मिि के कारण ही मैं अपने पुि
नरोत्तम व अम्बरीश? को सशक्षा दिला रही थी।
जजसके कारण मृतका व बहन मृतका तथा
ममता का पुि सधचन एवं मृतका के िाई
संजीव व राजीव तथा उसके माता वपता
मुझसे व पुि बलवीर फौजी तथा मेरे
पररवाजन से नाराज रहते थे। मृतका अपने
पनत बलवीर के साथ जहााँ वह सैननक के
पि पर तैनात था मय बच्चों के साथ जाकर
रहना चाहती थी। फौजी ने पत्नी व बच्चों
को तैनाती स्थल पर साथ ले जाने से मना
कर दिया जजसके कारण तनाव व आवेश में
आकर पनत के ड्यूटी पर चले जाने के बाि
नाराज होकर स्वयं आग लगा ली। मृतका
को बचाने के सलए शहर के प्रनतजटठत बनड
इशान अस्पताल में मेरे द्वारा अन्य लोगों
के सहयोग से िती ककया लेककन वह बच न
सकी और िौरान इलाज उसकी मृत्यु हो
गयी। िहेज के सलए प्रताडड़त व परेशान नहीं
ककया गया। मैं ननिोर् हूाँ।"
10 All. Bhagwan Dei Vs. State of U.P.
781

32. Similar statement was made by
accused Narottam.

33. In defence, the accused examined
DW-1-
Nem
Singh
who
made
the
following deposition:

"मैं अपने गांव के िानुप्रताप को
जानता हूाँ। िानुप्रताप के 03 लड़के नाम
कमशः बलवीर, नरोत्तम, अम्बरीश है। बलवीर
फौज मे कायडरत है। इसकी शािी डडम्पल के
साथ हुई थी जो ग्रा० खुलीतारपुर ग्राम के
रामचन्र की लड़की थी। बलवीर के 2 बच्चे
है। बलवीर अपनी पत्नी डडम्पल के साथ
रहता था। अपने माता वपता से अलग रहता
था। मेरा घर बलवीर फौजी के पड़ोस से
तीसरा घर है। "

"बलवीर फौजी अपने माता वपता
िाईयों की आधथडक मिि करता था। इसी
कारण बलवीर व उसकी पत्नी डडम्पल,
डडम्पल के मायके वाले तथा डडम्पल का
बहनोई एवं डडम्पल की बदहन ममता व
उसका बहनोई सुरेन्र, फौजी व उसकी
पररवार वालो से नाराज रहते थे। बलवीर
फौजी के घर के पास कूड़ा आदि डालने की
जगह नहीं थी। बलवीर के घर के आस
पास (sic) है। सुरेन्र का मकान बलवीर के
मकान से 300 मीटर िूर है। गसलयां पार
करने के बाि।

बलवीर फौजी जब ड्यूहट पर चला
गया तो उनकी पत्नी डडम्पल द्वारा कमरे
में बन्द होकर आग लगा ल जजसमे वह
जल गई। मैं व गांव के काफी लोग इकट्ठा
हो गए। हम लोग डडम्पल को ककवाड
तोडकर ननकाला। जब हम लोगों ने ननकाला
तो बेहोश थी, हल्की सांसे चल रही थी।
उसके ककवाड़ तोड़कर मैने व गावं के अन्य
लोगों ने ननकाला उसके बाि डडम्पल को मै,
सास िगवानिेई राजकुमारी व राजेन्र गड़ी
से लेकर इलाज कराने बरेली अस्पताल गए
ले गए िगवानिेई ने डडम्पल को िती
कराया सारा खचाड िती से पहले व बाि मे
िगवानिेई ने ककया था। इलाज के िौरान
डडम्पल की मृत्यु हो गयी। मैंने आज व्यान
अपनी स्वेच्छा से बबना ककसी जोर िबाव के
सोच समझकर िे रहा हूाँ।

सुरेन्र के पररवार वालो से मेरी
कोई िुश्मनी नही है। बलवीर फौजी से िी
ररश्तेिारी नहीं है। गांव बस्ती के दहसाब व
बबरािरी के नाते िाई लगता है। डडम्पल के
िोनो बच्चों का लालन पोर्ड़ बलवीर के
माता वपता इस समय कर रहे है।"

34. In lengthy cross-examination, the
testimony of this witness could not be
shattered because the vicitm was residing
with her in-laws. Even to the court crossexaminations, he stated that there was no
demand of dowry in the village.

35.
DW-2-
Rajendra
made
the
following deposition: