# Bilal & Ors v. State of U.P. & Ors. Opp. Parties

- **Citation:** (2023) 2 ILRA 1141
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-01-03
- **Case number:** Application u/s 482 No. 22250 of 2022
- **Bench:** Umesh Chandra Sharma
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/bilal-ors-v-state-of-u-p-ors-opp-parties-49627
- **Pages:** 4

## Headnote

Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-Cross case
1142 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
by both the parties-already a matrimonial case
pending between the parties-cross case depicts
enmity between the parties-incidence cannot be
denied.

Application rejected. (E-9)

## Text

2 All. Bilal & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
1141
vehicle in police station for long period and
directed the judicial magistrates to exercise
their powers under section 451 Cr.P.C.
expeditiously and judicially and entrusted
interim custody of the articles and vehicles
seized to the owner of the property or to the
person who is entitled to be in possession
of the property.

16. In the present case also the vehicle
is lying in police station since 11.3.2021 and
when the vehicle is parked unattended the
valuable parts of the vehicle are taken away
or stolen. The vehicle also occupies larger
space causing inconvenience to the police
department and if during trial the vehicle is
kept in open it would be specifically
deteriorated and if the court finally finds that
the vehicle was unused in the offence or if it
was used in the offence not within the
knowledge of the owner of the vehicle, the
owner will have to collect only scraps of the
vehicle. Thus, nobody is getting to be
benefited if the vehicle got parked totally
unattended at police station. Thus the three
wheeler of the applicant which is said to be
not confiscated yet and is parked in police
station in open since last more than one year
and ten months, if it is not given in the
interim custody of the applicant, the sun and
rain would certainly damage its tyres, colour,
machinery and battery and also the interior,
which is neither in the interest of nation nor
in the interest of the applicant. Admittedly the
applicant has not been chargesheeted in the
case thus, it is not yet proved that the vehicle
was being used in the offence within the
knowledge of the applicant. So in the opinion
of the court, the vehicle of the applicant needs
to be released in favour of the applicant
during trial. The order of the trial court in not
releasing the vehicle in favour of the
applicant even after one year of is seizure is
legally unsustainable, hence, the order dated
24.3.2022 is quashed

17. Let the vehicle no. UP-65-TD9967 be released in favour of the applicant,
the owner of the vehicle, subject to the
production of all necessary documents, on
furnishing a personal bond of Rs. one lakh
and two sureties of Rs. one lakh each to the
satisfaction of the court concerned on the
following conditions;

1. The applicant will not dispose of the
vehicle during the pendency of the trial.

2. The applicant will produce the
vehicle before the court at his own cost,
whenever and wherever, ordered by the
court.

3. The applicant shall not alienate or
change the nature of the vehicle in any
manner.

4. The release of the vehicle shall also
remain subject to confiscation proceedings,
if any.

18. The application 482 Cr.P.C. is
allowed in above mentioned terms.
----------
(2023) 2 ILRA 1141
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 03.01.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Application u/s 482 No. 22250 of 2022

Bilal & Ors. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Ors. ...Opp. Parties

Counsel for the Applicants:
Sri Ravi Prakash Singh

Counsel for the Opp. Parties:
G.A.

Criminal
Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-Cross case
1142 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
by both the parties-already a matrimonial case
pending between the parties-cross case depicts
enmity between the parties-incidence cannot be
denied.

Application rejected. (E-9)

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J.)

1. प्राथी की िरफ से श्री रदव प्रकाश दसांह एवां
दवपक्षी सां० 1 की िरफ से अपर शासकीय अदधविा
को सुना गया। सूचना होने के बावजूि दवपक्षी सां० 2
की िरफ से कोई उपस्स्थि नहीां हुआ।

2. प्राथीगण ने 482 िां०प्र०सां० के अांिगषि यह
यादचका असांज्ञेय अपराध सां०- 109/2018 अांिगषि
धारा- 323,504 एवां 506 आई०पी०सी० थाना- दसदवल
लाइन्स, दजला- अलीगढ़ लांदबि न्यायालय न्यादयक
िण्डादधकारी अलीगढ़ के िास्ण्डक वाि सां०-
750/11/2018 राज्य बनाम दबलाल और अन्य में सत्र
न्यायाधीश अलीगढ़ द्वारा िण्ड दनगरानी सां०-
490/2021 अयूब उफष अनवर सईि एवां अन्य बनाम
उिर प्रिेश राज्य एवां अन्य में पाररि आिेश दिनाांदकि
09.11.2021 िथा मुख्य न्यादयक िण्डादधकारी
अलीगढ़ द्वारा पाररि आिेश दिनाांदकि 22.10.2018
को दनरस्त करने के दलए प्रस्तुि दकया है।

3. सांक्षेप में वाि के िथ् यह हैं दक प्रारांभिः
एक असांज्ञेय िण्ड पररवाि दिनाांक 01.10.2018 को
दवपक्षी 2 द्वारा प्राथीगण के दवरुद्ध थाना दसदवल
लाइन्स दजला अलीगढ़ में धारा- 323,504 एवां 506
भारिीय िण्ड सांदहिा के अांिगषि िजष कराया गया जो
सांलग्नक 1 है। सूचना िािा के अनुसार दिनाांक
29.09.2018 को एक अदभयुि सुल्तान मुकिमा
अपराध सां०- 562/2018 िथा मुकिमा अपराध सां०-
207/2017 अांिगषि धारा- 147,148,307,504 एवां
506 भारिीय िण्ड सांदहिा दजला- अलीगढ़ के अांिगषि
अदभरक्षा में था। सूचना िािा उस मुकिमें के नादजम
एवां सगीर के साथ पैरवी करिा था िथा उसने िेखा
दक घटना के समय प्राथीगण भी दवद्यमान थे िथा
उन्ोांने भी दवपक्षी सां०- 2 पर आक्रमण दकया िथा
दवपक्षी सां० 2 के साथ मारपीट दकया। शोर मचाने पर
वह सभी लोग भाग गये।

4. असांज्ञेय सूचना िजष कराने के उपरान्त
दवपक्षी सां०- 2 सरफराज (सरफराज पुत्र मुन्ना) ने
दजला दचदकत्सालय अलीगढ़ में दिनाांक 1.10.2018
को दचदकत्सीय परीक्षण कराया। दचदकत्सा परीक्षण
आख्या प्रिशष जो सांलग्नक 2 है। दवपक्षी सां०- 2 ने
दिनाांक 5.10.2018 को धारा 155(2) िण्ड प्रदक्रया
सांदहिा के अांिगषि दववेचना के दलए प्राथषना पत्र
सांलग्नक 3 प्रस्तुि दकया। दजस पर दववेचना के दलए
पाररि आिेश दिनाांदकि 22.10.2018 सांलग्नक 4
है। दववेचना की अवदध में दववेचक ने सूचना िािा
मो० नादजर एवां मो० समीर का धारा 161 िण्ड
प्रदक्रया सांदहिा के अांिगषि कथन अांदकि दकया
दजनकी प्रदिदलदपयाां सांलग्नक 5 हैं। दववेचना समाप्त
करने के उपरान्त दववेचक ने प्राथीगण के दवरुद्ध
आधारहीन िथ्ोां एवां पररस्स्थदियोां के आधार पर
उदचि साक्ष्य सांकदलि दकये दबना आरोप पत्र
सांलग्नक 6 प्रस्तुि दकया। दिनाांक 22.10.2018 को
पाररि आिेश के दवरुद्ध िण्ड दनगरानी प्रस्तुि दकया
गया जो दिनाांक 9.11.2021 को पोर्णीय न होने के
कारण अांगीकरण के स्तर पर सत्र न्यायाधीश
अलीगढ़ द्वारा दनरस्त कर दिया गया। दजसकी प्रदि
सांलग्नक 7 है।

5. वास्तदवकिा यह है दक इस घटना के पूवष
दिनाांक 24.08.2015 को प्राथी सां० 1 ने सगीर,
शहनवाज एवां नादजम पुत्रगण मुन्ना उफष जब्बार,
मुस्तकीम पुत्र दफरोज जो दवपक्षी सां० 2 के भाई हैं,
के दवरुद्ध मुकिमा अपराध सां० 307/2015 में धारा
406,323,504,506 एवां 307 आई०पी०सी० के
अांिगषि प्रथम सूचना ररपोटष िजष कराया दजसमें
दववेचनोपरान्त दववेचक ने कदथि अदभयुिगण के
दवरुद्ध दिनाांक 27.04.2017 को आरोप पत्र प्रस्तुि
दकया।

6. प्राथी सां० 1 की मौसी रुकसाना द्वारा भी
एक प्रथम सूचना ररपोटष दवपक्षी सां० 2 एवां उसके
पररजनोां के दवरुद्ध दिनाांक 26 मई 2017 को
अपराध सां० 207/2017 अांिगषि धारा 323,324 एवां
506 आई०पी०सी० भारिीय िण्ड सांदहिा के अांिगषि
थाना- कोिवाली नगर, दजला- अलीगढ़ में िजष
कराया गया था। दजसमें दिनाांक 29.06.2018 को
दववेचक द्वारा अदभयुिगण के दवरुद्ध धारा
323,324,504,506,147 एवां 326 भारिीय िण्ड
2 All. Bilal & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
1143
सांदहिा के अांिगषि आरोप पत्र प्रस्तुि दकया गया था।
प्राथी सां० 1 द्वारा िजष कराये गये प्रथम सूचना ररपोटष
एवां आरोप पत्र की प्रदिदलदपयाँ सांलग्नक 8 एवां 9 हैं।

7. पक्षकारोां के मध्य वैवादहक दववाि लांदबि
है। इसी मध्य दवपक्षी सां० 2 द्वारा प्राथी सां० 1 एवां 4
िथा रुकसाना, सुल्तान एवां केशर के दवरुद्ध अपराध
सां० 207/2017 में धारा 147,148,307,452 एवां
504 भारिीय िण्ड सांदहिा के अांिगषि प्रथम सूचना
ररपोटष थाना- कोिवाली नगर, अलीगढ़ में िजष
कराया गया दजसमें मौसा नादजम चक्षुिशी साक्षी है।
उस प्रथम सूचना ररपोटष दिनाांदकि 15.05.2017 की
प्रदिदलदपयाँ सांलग्नक 10 है।

8. अदभयोजन कथानक के अनुसार दवपक्षी
सां० 2 नादजम एवां रुकसाना के मध्य लांदबि मुकिमे
की पैरवी के दलए दवपक्षी सां० 2 दजला न्यायालय
जािा है। उसके द्वारा िुभाषवनावश झूठा एवां फजी
आघाि आख्या 2 दिन बाि दवलांब को स्पष्ट दकये
बगैर
िैयार
कराया
गया।
घटना
दिनाांक
29.10.2018 की है, जब दक असांज्ञेय सूचना दिनाांक
1.10.2018 को 2 दिन दवलांब से िजष करायी गयी
है। पक्षकारोां के मध्य वैवादहक दववाि िास्ण्डक
प्रकीणष प्राथषना पत्र सां० 37751/2018 श्रीमिी
रुकसाना एवां अन्य बनाम उिर प्रिेश राज्य एवां एक
अन्य िथा िास्ण्डक प्रकीणष प्राथषना पत्र सां०
47106/2018 सुल्तान दवरुद्ध उिर प्रिेश राज्य एवां
एक अन्य भी लांदबि है। दजनमें माननीय न्यायालय
द्वारा प्राथीगण के पक्ष में आिेश पाररि दकया गया
है। दजनकी सांलग्न प्रदि सांलग्नक 11 है।

9. रुकसाना ने दवपक्षी सां० 2 िथा अन्य
व्यस्ियोां
के
दवरुद्ध
मुकिमा
अपराध
सां०
222/2017 अांिगषि धारा 323,324 एवां 504
भारिीय िण्ड सांदहिा थाना- कोिवाली नगर,
अलीगढ़ में िजष कराया, दजसमें दवपक्षी सां० 2 एवां
उसके भाई नादजम ने रुकसाना के साथ मारपीट
दकया था। रुकसाना ने एक अन्य मुकिमा मुकिमा
अपराध सां० 400/2017 अांिगषि धारा 498ए,406
एवां 506 भारिीय िण्ड सांदहि िथा धारा 3⁄4 िहेज
प्रदिर्ेध अदधदनयम के अांिगषि थाना- अिरौली
जनपि- आजमगढ़ में िजष कराया गया था दजसके
सांबांध में दवपक्षी सां० 2 ने िास्ण्डक प्रकीणष प्राथषना पत्र
सां० 39172/2018 नादजम एवां अन्य बनाम उिर
प्रिेश राज्य एवां 1 अन्य प्रस्तुि दकया था दजसमें
माननीय न्यायालय ने अांिररम आिेश सांलग्नक 12
पाररि दकया था।

10. िुभाषवनावश काउण्टर ब्लास्ट के रूप में
प्राथीगण को विषमान मुकिमें में झूठा फांसाया गया है
िथा मुख्य न्यादयक िण्डादधकारी एवां सत्र न्यायाधीश
ने न्यादयक मस्स्तष्क का प्रयोग दकये बगैर िथा िथ्ोां
एवां पररस्स्थदियोां पर दवचार दकये बगैर प्रश्नगि आिेश
पाररि दकया है। प्राथीगण का कोई आपरादधक
इदिहास नहीां है वह कानून मानने वाले शाांदिदप्रय
व्यस्ि हैं। यह िण्ड वाि िुभाषवनावश िथा िूरस्थ
आशय से प्राथीगण को प्रिादडि करने के दलए प्रस्तुि
दकया गया है। अिः प्रश्नगि आिेश दिनाांक
22.10.2018 िथा दिनाांक 9.11.2021 पाररि द्वारा
मुख्य न्यादयक िण्डादधकारी एवां सत्र न्यायाधीश
दनरस्त दकया जाये।

11. दवपक्षी सां० 2 पर उसके भाई सगीर के
माध्यम से सिन िादमला पयाषप्त है परन्तु दवपक्षी सां०
2 अथवा दवपक्षी सां० 1 उिर प्रिेश राज्य की िरफ
से कोई प्रदि शपथ पत्र प्रस्तुि नहीां दकया गया है।

12. सुना िथा पत्रावली का अवलोकन दकया।

13. स्ीकृि रूप में इस प्रकरण में असांज्ञेय
अपराध काररि करने की सूचना िजष की गयी थी
दजसमें दववेचक धारा 155(2) ि०प्र०सां० के अांिगषि
सांबांदधि मदजस्टरेट द्वारा अनुमन्य दकये जाने के दबना
दववेचना प्रारांभ नहीां कर सकिा। इस स्तर पर
प्रस्तादवि अदभयुिगण का कोई अदधकार उत्पन्न
नहीां होिा अिः उन्ें प्रश्नगि आिेशोां को चुनौिी िेने
का अदधकार नहीां है न ही मुख्य न्यादयक
िण्डादधकारी को यह अदधकार प्राप्त होना पाया
जािा है दक वह धारा 155(2) िां०प्र०सां० का प्राथषना
पत्र को दनरस्त कर िें। ऐसी कोई सामग्री भी मुख्य
न्यादयक मदजस्टरेट के समक्ष उपलब्ध नहीां थी जब
उन्ोांने दिनाांक 22.10.2018 को धारा 155(2)
िां०प्र०सां० के प्राथषना पत्र को स्ीकार दकया था। ऐसा
प्रिीि होिा है दक चूांदक प्राथीगण पूवष से ही इस
प्रकरण पर अपना ध्यान केस्न्द्रि दकये हुए थे, अिः
उन्ोांने उि आिेश के दवरुद्ध िण्ड दनगरानी सां०
1144 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
490/2021 प्रस्तुि कर दिया दजसके अांगीकरण के
प्रश्न पर सुनवाई करिे हुए सत्र न्यायाधीश अलीगढ़ ने
मुख्य न्यादयक मदजस्टरेट के आिेश को अांिषविी
आिेश (Interlocutory Order) मानिे हुए िथा यह
दनष्कर्ष िेिे हुए दक प्रस्तादवि अदभयुि की दनगरानी
प्रस्तुि करने का अदधकार नहीां है, दनगरानी खाररज
कर दिया। सत्र न्यायाधीश ने इस िथ् का भी सांज्ञान
दलया गया दक न िो उनके दवरुद्ध कोई दवदधक
प्रदक्रया ही जारी की गयी है न ही मामले का सांज्ञान
ही दलया गया है।

14. इस स्तर पर यह दनष्कर्ष नहीां दिया जा
सकिा है दक सांज्ञेय सूचना के िथ् गलि हैं िथा
काउण्टर ब्लास्ट के रूप में यह असांज्ञेय सूचना िजष
करायी गयी है। दनदिि रूप में उभय पक्षोां में दववाि
एवां िुश्मनी है। दववाि या िुश्मनी िोधारी िलवार
होिी है, जो घटना काररि करने का कारण भी हो
सकिा है िथा गलि फांसायें जाने का कारण भी बन
सकिा है। परन्तु इस स्तर पर यह नहीां कहा जा
सकिा दक यह प्रश्नगि असांज्ञेय सूचना गलि रूप से
प्राथीगण को फांसाने के दलए ही िजष करायी गयी है।

15. दनगरानीकिाष की िरफ से यह िकष भी
प्रस्तुि दकया गया दक असांज्ञेय अपराध सांख्या गलि
दलखी गयी िथा धारा 155(2) िां०प्र०सां० के प्राथषना
पत्र में सरफराज के स्थान पर उसके भाई नादजम
द्वारा हस्ताक्षर दकया गया। जहाँ िक गलि अांज्ञेय
अपराध की सांख्या दलखने का प्रश्न है यह दलदपकीय
त्रुदट हो सकिी है। इस न्यायालय के मिानुसार जब
यह धारा 482 िां०प्र०सां० की यादचका ही सांधायष नहीां
है िथा प्राथीगण को अभी वाि कारण ही उत्पन्न नहीां
हुआ है, अिः इन िथ्ोां पर दवचार करने का प्रश्न
उत्पन्न नहीां होिा है।

16. उपरोि पररस्स्थदियोां में इस न्यायालय का
भी यह अदभमि है दक अधीनस्थ न्यायालयोां द्वारा पाररि
िोनोां आिेश िथ्िः एवां दवदधिः सही एवां वैध हैं िथा
धारा 482 िां०प्र०सां० के अांिगषि उि िोनोां आिेश
खस्ण्डि दकये जाने योग्य नहीां हैं। धारा 482 िां०प्र०सां०
दनम्नवि है-

17. इस सांदहिा में कुछ भी उच्च न्यायालय के
अांिदनषदहि शस्ियाां व्यावृदि इस सांदहिा की कोई बाि
उच्च न्यायालय को ऐसा आिेश िेने की अांिदनषदहि
शस्ियोां को सीदमि या प्रभावी करने वाली न समझी
जाएगी जैसा इस सांदहिा के अधीन ऐसे दकसी आिेश
को प्रभावी करने के दलए या दकसी न्यायालय की
कायषवाही का िुरुपयोग दनवाररि करने के दलए या
दकसी अन्य प्रकार से न्याय के उद्देश्योां की प्रास्प्त
सुदनदिि करने के दलए आवश्यक है।

18. इस न्यायालय के अनुसार प्राथीगण द्वारा
अनुदचि िौर पर ऐसे आिेशोां की धारा 482 िां०प्र०सां० के
अांिगषि चुनौिी दिया गया है, दजन्ें चुनौिी िेने का अभी
कोई वाि कारण उन्ें प्राप्त नहीां है। अिः यह यादचका
अपररपक्व होने के कारण खाररज दकये जाने योग्य है।

19. दनगरानीकिाष की िरफ से प्रभू चावला बनाम
राजस्थान राज्य और एक अन्य िण्ड अपील सां०
842/2016 एवां िण्ड अपील सां० 845-846/2016 में
उच्चिम न्यायालय द्वारा पाररि आिेश दिनाांक 5
दसिांबर 2016 को स्यां पर आधाररि दकया गया दजसके
िथ् प्रस्तुि मामले के िथ्ोां से पूणषिया दभन्न थे। अिः
इसमें दनधाषररि दवदध का दसद्धान्त प्राथीगण के के पक्ष में
प्रयुि नहीां होिा।

आदेि

20. यह यादचका उपरोिानुसार दनरस्त की
जािी है। इस दनणषय की एक प्रदि मुख्य न्यादयक
िण्डादधकारी अलीगढ़ को सूचनाथष एवां अनुपालनाथष
प्रेदर्ि की जाये।
----------
(2023) 2 ILRA 1144
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 30.09.2022

BEFORE

THE HON'BLE SAMIT GOPAL, J.

Application U/S 482. No. 17101 of 2020
And
Other Connected Cases

Zaki Ur Rahman Siddiqui ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties