# Dharmendra Yadav & Anr v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2023) 2 ILRA 1202
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-01-10
- **Case number:** Application U/S 482. No. 29725 of 2022
- **Bench:** Umesh Chandra Sharma
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/dharmendra-yadav-anr-v-state-of-u-p-anr-49629
- **Pages:** 4

## Headnote

Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-summoning
order impugned-not named in the FIR-not
named by the victim in her St.ment-no medical
examination-no St.ment u/s 164 Cr.P. C.
recorded-applicant not present at the place of
incidence-affidavit by the victim stating that
Applicant is not involved in the alleged crimebut not part of the investigation-no case for
interference-as the same is subject matter of
the Trial.

Application dismissed. (E-9)

List of Cases cited:

## Text

1202 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
and
is
allowed.
The
impugned
cognizance/summoning
order
dated
02.04.2019 passed by passed by the
Additional Chief Judicial Magistrate-I,
Faizabad in Case No. 1004/2019, under
Sections 427, 188 I.P.C. relating to Crime
No.
493/2018,
Police
Station
Pura
Kalandar, District Faizabad is hereby
quashed.

27. The matter is remitted back to
Additional Chief Judicial Magistrate-I,
Faizabad directing him to decide afresh the
issue for taking cognizance and summoning
the applicant and pass appropriate orders in
accordance with law keeping in view the
observations made by this Court as well as
the direction contained in the judgments
referred to above within a period of two
months from the date of production of a
copy of this order.

28. The party shall file certified copy
or computer generated copy of such order
downloaded from the official website of
High Court Allahabad or certified copy
issued from the Registry of the High Court,
Allahabad.

30. The concerned Court/ Authority/
Official shall verify the authenticity of such
computerized copy of the order from the
official website of High Court Allahabad
and shall make a declaration of such
verification in writing.
----------
(2023) 2 ILRA 1202
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 10.01.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Application U/S 482. No. 29725 of 2022
Dharmendra Yadav & Anr. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicants:
Sri Amar Nath Singh, Sri Rajesh Kumar
Singh, Sri Rajeshwar Singh

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

Criminal
Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-summoning
order impugned-not named in the FIR-not
named by the victim in her St.ment-no medical
examination-no St.ment u/s 164 Cr.P. C.
recorded-applicant not present at the place of
incidence-affidavit by the victim stating that
Applicant is not involved in the alleged crimebut not part of the investigation-no case for
interference-as the same is subject matter of
the Trial.

Application dismissed. (E-9)

List of Cases cited:

1. Arun Shankar Shukla Vs St. of U.P. AIR 1999
SCC2554

2. St. of U.P. Vs Kasturi Lal, 2004 CRLJ 3866

3. Pawan Kumar Bhaalautiya Vs St. of W.B.,
2005 CRLJ1810 SC

4. T.J. Stephen Vs Parle Battling Co. Pvt. Ltd.
AIR 1985 SCC 994

5. Mac kuloch Vs Sate of W. B.1947 CRLJ 182
Cal HC

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J.)

1. यह प्राथषना पत्र धारा 482 ि०प्र०सां० के
अांिगषि िण्ड वाि सां0 77/2021 उिर प्रिेश राज्य
बनाम गनेश प्रसाि एवां अन्य अपराध सां० 606/2020
अांिगषि धारा 147, 452, 323, 504, 406, 422, 354 एवां
354B भा०ि०सां० थाना िाजगांज जनपि आगरा लांदबि
न्यायालय मुख्य न्यादयक िण्डादधकारी, आगरा की
2 All. Dharmendra Yadav & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
1203
कायषवाही को स्थदगि एवां खस्ण्डि करने के दलए
शपथ पत्र सदहि प्रस्तुि दकया गया है।

2. सांक्षेप में यादचका के िथ् यह हैं दक दवपक्षी
सां० 2 दवकास महाजन ने उि प्रथम सूचना ररपोटष
गनेश यािव एवां कप्तान दसांह यािव व 10-12 अज्ञाि
सह अदभयुिोां के दवरुद्ध दिनाांक 31 जुलाई 2020 को
समय 10:05 बजे पूवाषह्न िजष कराया दक दिनाांक
26.07.2020 को िोपहर में खसरा भूदम सां० 91A, 91B
स्स्थि शमशाबाि सडक दनकट भोला बाबा िुग्ध केन्द्र
के समीप मुकेश महाजन एवां उसके पत्नी के सांयुि
स्ादमत्व में है। दिनाांक 20 जुलाई 2020 को गणेश
यािव एवां कमान दसांह यािव 10-12 अन्य गुण्डे
सादथयोां के साथ प्राथी के प्लाट पर पहुांचे िथा
बाउण्डरी वाल की गेट पर लगे हुए िाले को िोड
दिया िथा जब वहाँ जमीन की िेखरेख कर रही
मदहला द्वारा मना करने पर उन्ोांने उस से मारपीट
दकया व धक्कामुक्की की दजससे उसके कपडे फट
गये िथा िाला िोडकर यह सभी लोग मदहला से
धक्का मुक्की करिे हुए बाउण्डरी के अांिर बने कमरे
में घुस गये। यह िेखिे हुए उस मदहला के लडके ने
पुदलस चौकी एकिा पर जाकर सूचना दिया जहाँ से
कमषचारी मौके पर आ गये उनके हस्तक्षेप के उपरान्त
मदहला को कमरे के अन्दर गाली गलौज व जान से
मारने की धमकी िेिे हुए वापस आने को कहकर
चले गये। अिः मुकिमा िजष कर आवश्यक कायषवाही
दकया जाये दजससे यह असामादजक ित्व व भू-
मादफया िोबारा गैर कानूनी किषव्य को अांजाम न िे
पावें।

3. दववेचनोपरान्त प्राथीगण गनेश यािव, कप्तान
दसांह यािव, प्रेम कुमार, धमेन्द्र यािव एवां अजय कुमार
के दवरुद्ध धारा 147,452, 323, 504, 506, 427, 354 एवां
354B भा० ि०सां० के अांिगषि अपराध सादबि होने पर
आरोप पत्र प्रस्तुि दकया गया। दिनाांक 9.03.2021 को
न्यायालय द्वारा सांज्ञान दलया गया िथा अदभयुिगण
को समन दकया गया। मात्र अदभयुि गनेश यािव
उपस्स्थि आये दजसे दिनाांक 22.08.2022 को जमानि
पर अवमुि करने का आिेश पाररि दकया गया िथा
शेर् अदभयुिगण के दवरुद्ध प्रथमिः समन ििुपरान्त
जमानिीय वारण्ट एवां बािहू अजमानिीय वारण्ट जारी
दकया गया।

4. प्राथीगण का यह कथन है दक वह प्रथम
सूचना ररपोटष में नादमि नहीां है, दववेचक ने उदचि एवां
दनष्पक्ष दववेचना दकये दबना आरोप पत्र प्रस्तुि कर
दिया है। दववेचक ने दवपक्षी सां० 2 का बयान अांदकि
दकया है िथा गांभीर दसांह यािव, िुगेश कुमार पुनीि
यािव का भी बयान अांदकि दकया है। उन्ोांने पीदडिा
बृजबाला का बयान भी अांदकि दकया है दजसमें उसने
प्राथीगण का नाम नहीां दलया है उसने दचदकत्सीय
परीक्षण कराने से भी इनकार दकया है िथा धारा 164
िण्ड प्रदक्रया सांदहिा का भी बयान नहीां दिया है।
प्राथीगण घटना के समय घटना स्थल पर दवद्यमान
नहीां थे। बृजबाला एवां अन्य साक्षीगण ने वररष्ठ पुदलस
अधीक्षक के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुि दकया है िथा
उसमें प्राथीगण की सांदलप्तिा से इांकार दकया है।
सूचना के अदधकार के अांिगषि प्राप्त सूचना के
अनुसार पीदडिा ने स्यां ही स्यां के साथ घटना
काररि होने से इनकार दकया है। पूरी कायषवाही
दवपक्षी सां० 2 के प्रभाव में िूरस्थ उद्देश्योां से झूठे िौर
पर प्राथीगण को सांदलप्त करिे हुए दकया गया है िथा
ग्राम पांचायि चुनाव भी इसमें कारण रहा है। प्राथीगण
का कदथि अपराध को काररि करना पूणषिया सांदिग्ध
एवां अदवश्वसनीय है। दवपक्षी सां० 2 िथा सह अदभयुि
गनेश यािव एवां कप्तान दसांह के मध्य जमीन सांबांधी
दववाि चल रहा है दजससे प्राथीगण का कोई सांबांध
नहीां है। प्रथम सूचना ररपोटष दवलांब से िजष करने का
कोई पयाषप्त आधार एवां कोई िादकषक स्पष्टीकरण नहीां
है। प्रथम दृष्टया उपरोि धाराओां का अपराध प्राथीगण
के दवरुद्ध नहीां बनिा है। सांज्ञान लेिे समय अधीनस्थ
न्यायालय ने दववेचना के िौरान सांकदलि दकये गये
साक्ष्योां को िकनीकी िरीके से िेखिे हुए सांज्ञान दलया
है। प्राथीगण को आरोप पत्र की कोई जानकारी नहीां
थी िथा जब उन्ें पुदलस कमषचाररयोां से िण्ड
कायषवाही की जानकारी हुई िथा उन्ोांने आवश्यक
अदभलेखोां की प्रदिदलदपयाां प्राप्त दकया िब उन्ोांने यह
यादचका प्रस्तुि दकया है। अिः उि धारा पर उि
िण्ड बाि की समस्त कायषवाही मय आरोप पत्र
खस्ण्डि दकया जाए।

5. प्राथीगण ने सुसांगि अदभलेखोां को सांलग्नक
के रूप में प्रस्तुि दकया है।

6. प्राथीगण ने पूरक शपथ पत्र 2/2022 सांलग्नकोां
सदहि प्रस्तुि दकया है दजसमें दिनाांक 4.06.2022 को
अदग्रम दववेचना के दलए प्रस्तुि प्राथषना पत्र सांलग्नक 1
िथा वररष्ठ पुदलस अधीक्षक द्वारा पाररि अदग्रम
दववेचना सांबांधी आिेश सांलग्नक 2, पीदडिा बृजबाला
का बयान अांिगषि धारा 164 ि०प्र०सां० प्रिशष 3 एवां
उसका शपथ पत्र प्रिशष 4, पुनीि यािव एवां िुगेश
कुमार का शपथ पत्र सांलग्नक 5 प्रस्तुि दकया गया है।

7. सूचनािािा दवपक्षी सां० 2 मुकेश महाजन ने
अपने बयान में यह बयान दिया है दक सूचना पाकर
वह िथा उसके साथी हरीकान्त यािव, गांभीर दसांह
1204 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
यािव, िुगेश कुमार एवां पुनीि यािव पहुांचे िो अन्य
अदभयुिगण सदहि प्राथीगण ने उन लोगोां के साथ भी
गाली-गलौज व बििमीजी दकया। यदि वह लोग नहीां
पहुांचिे िो यह लोग मदहला के साथ कोई और घटना
काररि कर सकिे थे। गांभीर दसांह यािव ने अपने
बयान में अन्य अदभयुिगण के साथ प्राथीगण को भी
दवपक्षी सां० 2 के प्लाट पर रहने वाली मदहला
बृजबाला पत्नी दिनेश िथा उसके पुत्र अनुराग के साथ
मारपीट करिे हुए िेखने का बयान दिया है िथा
सूचनािािा दवपक्षी सां० 2 की भाांदि बयान दिया गया।
िुगेश िथा पुनीि यािव ने भी प्रथम सूचना ररपोटष के
सांबांध में प्राथी अदभयुिगण को नादमि करिे हुए
बयान दिया है। पीदडिा ने प्रथमिः धारा 161 ि०
प्र०सां० के अांिगषि गनेश यािव, कप्तान दसांह व प्रेम
कुमार उफष बग्गा िथा 8-10 अन्य लोगोां द्वारा गेट का
िाला िोडने िथा मना करने पर उसे िथा उसके पुत्र
को गन्दी गन्दी गाली िेने िथा मना करने पर हाथ
पकडकर उसे खीांच लेने िथा कमरे में आ जाने पर
पीछे -पीछे कमरे में घुसकर मारपीट करिे हुए
कपडा फाड डालने पर शोर मचाने एवां शोर मचाने
पर उसके पडोसी हरीकान्त यािव व सूचना पाकर
सूचनािािा दवपक्षी सां० 2 मुकेश महाजन के मौके पर
आ जाने का साक्ष्य दिया है। यद्यदप पीदडिा ने धारा
164 ि०प्र०सां० का बयान कराने िथा दचदकत्सीय
परीक्षण कराने से इांकार दकया है। दववेचक द्वारा
दिनाांक 11.10.2020 को आरोप पत्र प्रस्तुि दकया गया
है।

8. प्राथीगण ने पीदडिा एवां साक्षीगण द्वारा बाि
में प्रस्तुि शपथ पत्रोां के आधार पर धारा 482
ि०प्र०सां० के अांिगषि आरोप पत्र एवां िास्ण्डक
कायषवाही को खस्ण्डि करने के दलए दनवेिन दकया
है। यह ध्यान िेने योग्य िथ् है दक पीदडिा श्रीमिी
बृजबाला ने प्राथी अदभयुिगण को घटना में सस्िदलि
न होने का शपथ पत्र दिनाांक 2.06.2022 को दनष्पादिि
दकया। इस प्रकार पुनीि यािव िथा िुगेश कुमार ने
दिनाांक 30.5.2021 को शपथ पत्र प्रस्तुि कर प्राथीगण/
अदभयुिगण को घटना में सस्िदलि नहीां होने का
शपथ पत्र दनष्पादिि दकया गया है। इन शपथ पत्रोां के
दनष्पािन के बहुि पूवष दिनाांक 9.03.2021 को ही
सांबांदधि न्यायालय द्वारा मुकिमे का सांज्ञान ले दलया
गया था िथा अदभयुिगण के दवरुद्ध समन जारी कर
दिया गया था। इस न्यायालय के मिानुसार दवचारण
के िौरान इस प्रकार के शपथ पत्रोां को सांज्ञान में नहीां
दलया जा सकिा िथा यह दवचारण में अनुदचि
हस्तक्षेप के रूप में माना जाएगा िथा यह माना
जाएगा दक प्राथी अदभयुिगण ने येन-केन प्रकारेण
प्रलोभन अथवा धमकी से उपरोि साक्षीगण को
प्रभादवि कर उन से इस प्रकार का शपथ पत्र
दनष्पादिि करवाकर उसके आधार पर यह धारा 482
ि०प्र०सां० का प्राथषना पत्र प्रस्तुि दकया है। यह
न्यादयक प्रदक्रया में अनुदचि हस्तक्षेप के रूप में दलया
जा सकिा है। आरोप पत्र प्रस्तुि होने के उपरान्त
िथा पूवष के बयानोां के दवपरीि शपथ पत्र िेने पर
उसका सांज्ञान दलया जाना दकसी भी दवदध द्वारा
स्थादपि न्यायालय के दलए सम्यक एवां उदचि नहीां है।
इस प्रकार की कायषवाही दकया जाना न्यादयक प्रदक्रया
में अनुदचि हस्तक्षेप के रूप में है। प्राथीगण को
चादहए था दक वह न्यायालय में उपस्स्थि होकर
जमानि करािे िथा आरोप दवरदचि करिे समय
उन्मोचन हेिु प्राथषना पत्र प्रस्तुि करिे एवां दवचारण में
भाग लेिे।

9. धारा 482 िण्ड प्रदक्रया सांदहिा दनम्नवि है-

" अदालत आपराकिक कायधवाही में,
सीआरपीसी की िारा 482 के तहत िक्ति का
प्रयोग करते हए, दुलधभ और असािारण मामलोों में,
सीआरपीसी के प्राविानोों को प्रभावी करने के कलए
या न्याय के लक्ष्य को सुरकक्षत करने के कलए
ककसी भी न्यायालय की प्रकक्रया का दुरुपयोग या
अन्यथा रोकने के कलए हस्तक्षेप करती है।"

10. अरुण िोंकर िुक्ला बनाम उत्तर प्रदेि
राज्य AIR 1999 उच्चतम न्यायालय 2554 में इस
धारा के अांिगषि उच्च न्यायालय को असीदमि शस्ियाां
प्राप्त नहीां हैं। यह असाधारण शस्ियाँ हैं, दजनका
प्रयोग यिा-किा ही दकया जाना चादहए। उत्तर प्रदेि
राज्य बनाम कस्तूरी लाल 2004 CRLJ 3866 में
उच्चिम न्यायालय ने अवधाररि दकया दक धारा 482
ि०प्र०सां० के अांिगषि शस्ि का प्रयोग अपवाि है और
उच्च न्यायालय की कोई नयी शस्ियाां प्रिान नहीां
करिा है। यह मात्र उस अांिदनषदहि शस्ि को बचािा
है दजसे सांदहिा के अदधदनयमन से पहले न्यायालय
न्यायालय के पास दवद्यमान थी। यह िीन पररस्स्थदियोां
की पररकिना करिा है दजसके अांिगषि दनदहि
क्षेत्रादधकार का प्रयोग दकया जा सकिा है।

1- सांदहिा के आिेश को प्रभावी करने के
दलए.

2- न्यायालय की प्रदक्रया के िुरुपयोग को
रोकने के दलए िथा

3- अन्यथा उद्देश्योां को सुरदक्षि करने के
दलए
2 All. Manish Kumar Pandey Vs. State of U.P. & Ors.
1205

11. इस सांबांध में दकसी कठोर दनयम को
दनधाषररि करना न िो सांभव है न ही वाांछनीय है जो
दनदहि क्षेत्रादधकार के उपयोग को दनयांदत्रि करेगा।
इस शस्ि के प्रयोग में बहुि सावधानी बरिने की
आवश्यकिा है। इस शस्ि का प्रयोग दकसी वैध
अदभयोजन को रोकने के दलए प्रयुि नहीां दकया जाना
चादहए।

12. पवन कुमार भालोकतया बनाम पकिम
बोंगाल राज्य 2005 CRLJ 1810 उच्चतम न्यायालय में
अवधाररि दकया गया है दक जहाँ िजष दकया गया
अपराध केवल यादचकाकिाष को उत्पीदडि करने का
होगा वहाँ इस शस्ि के अांिगषि िास्ण्डक कायषवाही
खस्ण्डि दकया जा सकेगा। आमिौर पर उच्च
न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालय के आपरादधक
मामले की कायषवाही में हस्तक्षेप नहीां करना चादहए,
लेदकन अवैध अदभयोजन के िुष्पररणाम से सुरदक्षि
रखने के दलए इस धारा की शस्ियोां को उच्च
न्यायालय द्वारा प्रयोग दकया जा सकिा है। जहाँ
िण्डादधकारी के समक्ष प्रदक्रया जारी करने के दलए
पयाषप्त सामग्री दवद्यमान है। अदभयुि उसे इस धारा
के अांिगषि चुनौिी िेने का अदधकारी नहीां है। टी.जे.
स्टीफेन बनाम पाले बाटकलोंग कों०प्रा०कल० AIR
1985 उच्चतम न्यायालय 994 में यह अवधाररि दकया
गया है दक दववेचना के अदभलेखोां का सांिभष िेखिे
हुए जब दक कम्प्प्लेण्ट में आरोदपि िथ् प्रथम दृष्टया
अपराध काररि करने का वणषन करिे हैं। ऐसे
कम्प्प्लेण्ट को खस्ण्डि नहीां दकया जा सकिा।

13. प्राथीगण का यह कथन है दक िुभाषवनापूणष
ढांग से यह प्रथम सूचना ररपोटष िजष करायी गयी िथा
आरोप पत्र प्रस्तुि दकया गया। मैक कुलोच बनाम
पकिम बोंगाल राज्य 1974 CRLJ 182 कलकत्ता उच्च
न्यायालय में यह अवधाररि दकया गया दक यह प्रश्न
दक अदभयुि के पास घटना काररि करने का
आपरादधक िुराशय दवद्यमान था अथवा नहीां, दवचारण
में सम्यक सामग्री एवां साक्ष्य प्रस्तुि कर ही िेखा जा
सकिा है िथा ऐसी िशा में उच्च न्यायालय द्वारा
अपनी अांिषदनदहि शस्ियोां का प्रयोग नहीां दकया जाना
चादहए। िथ् िथा दनष्कर्ष के सांबांध में अांिषदनदहि
शस्ि के अांिगषि हस्तक्षेप नहीां दकया जा सकिा। इस
स्तर पर उच्च न्यायालय यह जाांच नहीां कर सकिा
दक आरोप साक्ष्य से स्थादपि होांगे अथवा नहीां।

आदेि

उपरोि आधारोां पर इस न्यायालय का यह
दनष्कर्ष है दक प्राथीगण द्वारा दिया गया आधार धारा
482 ि०प्र०सां० के प्राथषना पत्र को स्ीकार कर
उपरोि वाि की कायषवाही एवां आरोप पत्र को
खस्ण्डि करने के दलए युस्ियुि आधार नहीां हैं।
अिैव प्राथषना पत्र अांिगषि धारा 482 ि०प्र०सां० ििनुसार
खाररज दकया जािा है।
----------
(2023) 2 ILRA 1205
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 16.02.2023

BEFORE

THE HON'BLE SHAMIM AHMED, J.

Application u/s 482 No. 1531 of 2023

Manish Kumar Pandey ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ...Opp. Parties

Counsel for the Applicants:
Prince Lenin

Counsel for the Opp. Parties:
G.A.

Criminal Law - Indian Penal Code, 1860 -
summoning
order-charge
sheet
and
summoning order impugned- FIR registered
against unknown persons-circulation of letter on
social media issued in the name of MLA (BJP) on
his letter pad-seeking information of criminal
cases against various political persons- found
forged-Applicant is journalist-posted the letter
as he received it from a reputed media personMLA denied the letter and his signature-prima
facie case is made out.

Applicant dismissed. (E-9)

List of Cases cited:

1. R.P. Kapoor Vs St. of Pun., AIR 1960 S.C. 866,

2. St. of Har. Vs Bhajanlal, 1992 SCC (Crl.)426,

3. St. of Bihar Vs P.P. Sharma, 1992 SCC
(Crl.)192

4. Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs Mohd.
Saraful Haq & anr., (Para-10) 2005 SCC
(Cri.)283