# Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors v. State Of U.P. & Ors

- **Citation:** (2025) 3 ILRA 171
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-03-25
- **Case number:** Writ A No. 634 of 2025
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/dilip-kumar-singh-rajpoot-ors-v-state-of-u-p-ors-53043
- **Pages:** 17

## Headnote

Smt. Archana Singh, Sri Sanjay Kumar
Singh, Sri V.P. Singh Kachwa, Sri Jai
Prakash Singh, Sri Shashi Prakash Rai, Sri
Atul Kumar Shahi, Sri Abhishek Srivastava,
C.S.C., Sri A.K. Nagwanshi, A.C.S.C., Smt.
Stati Malviya

अ) सेवा नियम - शिक्षा िीनि - संवैधानिक मामले -
िैक्षणिक
संसाधि
व्यक्तियों
(ARP-
Academic
Resource Person) के चयि और काययकाल से संबंधधि
वववाद - ARP के चयि प्रक्रिया और काययकाल की वैधिा -
संवैधानिक अधधकारों का उल्लंघि - भारिीय संववधाि -
अिुच्छेद 14, 16 , उत्तर प्रदेि बेशसक शिक्षा अधधनियम -
समाििा का अधधकार - युक्तियुति वर्गीकरि - िीनिर्गि
निियों में न्यानयक हस्िक्षेप की सीमा - िीनिर्गि निियों में
न्यायालय िभी हस्िक्षेप करेर्गा जब वे मिमािे, िकयहीि या
संवैधानिक प्रावधािों के ववपरीि हों। (पैरा - 26,27)

याचिकाकर्ाा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में
सहायक अध्यापक के पद पर कायारर् हैं - ARP के रूप में
3 िर्ा र्क सेिा दे िुके हैं - शासनादेश ददनाांक
22.10.2019 के र्हर् ARP के पदों का पुनर्ाठन ककया
र्या - जिसमें नए ियन प्रकिया के भलए पूिा ARP को
अयोग्य घोवर्र् कर ददया र्या । (पैरा 1, 10, 17)

नििीि: याचिकाकर्ााओां का ARP पद पर पुनः ियन के
भलए अयोग्य घोवर्र् ककया िाना सांिैधाननक या विचधक
172 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
दृजटि से अमान्य नह ां है, क्योंकक यह नीनर्र्र् ननर्ाय है
िो शैक्षणर्क उद्देश्यों को पूरा करर्ा है। न्यायालय
नीनर्र्र् ननर्ायों में र्िी हस्र्क्षेप करेर्ा िब िे
मनमाने, र्काह न या सांविधान के प्रािधानों के विपर र्
हों। (पैरा 26, 27) (E-7)

उद्धृि मामलों की सूची:

## Text

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3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
171
16. At this stage, Court takes note
that during pendency of this writ petition
i.e. for last 5 years, much water has flown
and that posts have already been filled up
and since their selection are not under
challenge, therefore, relief sought in
present
writ
petition
is
rendered
infructuous.

17. However, Court takes note of
last submission of learned counsel for
petitioners that a direction be passed that
not only judgment of Supreme Court be
followed in letter and spirit but such
ambiguity may not be repeated.

18. In aforesaid circumstances, this
writ petition is disposed of with a direction
that judgment of Supreme Court in Mohd.
Sohrab Khan (supra) shall be followed in
its letter and spirit. Registrar, A.M.U. shall
remain cautious in future while publishing
advertisement that it may not to create
ambiguity but such ambiguity should be
removed i.e. words shall be chosen
carefully and instead of ambiguous words
"concerned/relevant/allied
subject",
the
University must specifically mention about
qualification so that all eligible candidates
may participate in advertisement and no
one be left prejudiced.

19. Registrar (Compliance) to take
steps.
----------
(2025) 3 ILRA 171
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 25.03.2025

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ A No. 634 of 2025
Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors.
 ...Petitioners
Versus
State Of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioners:
Sri Ashok Khare, Sri Radha Kant Ojha (Sr.
Adv.), Sri Anurag Tripathi, Sri Shevendu
Ojha, Sri Prabhakar Awasthi, Sri Seemant
Singh, Sri Ravindra Prakash Srivastava, Sri
Phool Chnadra Singh, Sri Bhanu Pratap
Singh, Sri Amit Kumar Tiwari, Sri Rajesh
Kumar Verma, Sri Jainendra Pandey, Sri
Kabir Tiwari

Counsel for the Respondents:
Smt. Archana Singh, Sri Sanjay Kumar
Singh, Sri V.P. Singh Kachwa, Sri Jai
Prakash Singh, Sri Shashi Prakash Rai, Sri
Atul Kumar Shahi, Sri Abhishek Srivastava,
C.S.C., Sri A.K. Nagwanshi, A.C.S.C., Smt.
Stati Malviya

अ) सेवा नियम - शिक्षा िीनि - संवैधानिक मामले -
िैक्षणिक
संसाधि
व्यक्तियों
(ARP-
Academic
Resource Person) के चयि और काययकाल से संबंधधि
वववाद - ARP के चयि प्रक्रिया और काययकाल की वैधिा -
संवैधानिक अधधकारों का उल्लंघि - भारिीय संववधाि -
अिुच्छेद 14, 16 , उत्तर प्रदेि बेशसक शिक्षा अधधनियम -
समाििा का अधधकार - युक्तियुति वर्गीकरि - िीनिर्गि
निियों में न्यानयक हस्िक्षेप की सीमा - िीनिर्गि निियों में
न्यायालय िभी हस्िक्षेप करेर्गा जब वे मिमािे, िकयहीि या
संवैधानिक प्रावधािों के ववपरीि हों। (पैरा - 26,27)

याचिकाकर्ाा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में
सहायक अध्यापक के पद पर कायारर् हैं - ARP के रूप में
3 िर्ा र्क सेिा दे िुके हैं - शासनादेश ददनाांक
22.10.2019 के र्हर् ARP के पदों का पुनर्ाठन ककया
र्या - जिसमें नए ियन प्रकिया के भलए पूिा ARP को
अयोग्य घोवर्र् कर ददया र्या । (पैरा 1, 10, 17)

नििीि: याचिकाकर्ााओां का ARP पद पर पुनः ियन के
भलए अयोग्य घोवर्र् ककया िाना सांिैधाननक या विचधक
172 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
दृजटि से अमान्य नह ां है, क्योंकक यह नीनर्र्र् ननर्ाय है
िो शैक्षणर्क उद्देश्यों को पूरा करर्ा है। न्यायालय
नीनर्र्र् ननर्ायों में र्िी हस्र्क्षेप करेर्ा िब िे
मनमाने, र्काह न या सांविधान के प्रािधानों के विपर र्
हों। (पैरा 26, 27) (E-7)

उद्धृि मामलों की सूची:

1. आांध्र प्रदेश राज्य प्रनर् डा० िी. बी. िे. िेल कनी,
२०२४ आई.एन.एस.सी. ८९४

2. दयाराम सरोि एिां अन्य प्रनर् उत्तर प्रदेश राज्य एिां
अन्य २००६ एस.सी.सी. आनलाइन ए.एल.एल. २२८८

3. ए.एि.व्ह लर एण्ड को0.प्राo.भलo. एिां अन्य प्रनर्
यूनननयन आफ इजण्डया एिां अन्य : २००५ एस.सी.सी.
आनलाइन ए.एल.एल २०६

4. श्रद्धा यादि एिां ६ अन्य प्रनर् उत्तर प्रदेश राज्य एिां
१० अन्य ;२०२४ :ए.एि.सी.:४०८५

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

१. िर्ामान याचिकाओां के समूह के समस्र्
याचिकाकर्ाा, बेभसक भशक्षा पररर्द के अांर्र्ार्
सांिाभलर् विभिन्न
विद्यालयों में सहायक
अध्यापक के पद पर कायारर् हैं।

२. अपर मुख्य सचिि, उत्तर प्रदेश
शासन ने एक शासनादेश ददनाांक २२ अक्िूबर
२०१९ के द्िारा राज्य पररयोिना ननदेशक,
समग्र भशक्षर् अभियान, उत्तर प्रदेश (बेभसक
भशक्षा अनुिार्- ५) को विर्य "समग्र भशक्षा
अभियान के अांर्र्ार् स्थावपर् न्याय पांिायर्
सांसाधन केन्रों एिां ब्लाक सांसाधन केन्रों के
पुनर्ाठन के सांबांध में", सांबोचधर् ककया, जिसके
द्िारा पूिा में शासनादेश ददनाांक ०२.०२.२०१९ को
अििभमर् करर्े हुए एक निीन व्यिस्था लार्ू
ककए िाने का ननर्ाय भलया र्या। इस ननर्ाय
को लेने का कारर् पूिा व्यिस्था से अपेक्षक्षर्
पररर्ाम प्राप्र् न होना था।

३. उपरोक्र् शासनादेश के अांर्र्ार्
पुनर्ाठन की व्यिस्था ि सांरिना ि 'अकादभमक
ररसोसा पसान' (ए.आर.पी.) के ियन हेर्ु ननम्न
आहार्ा ननधााररर् की र्यी हैः-

" (१) पुनार्ठन की व्यिस्था ि
सांरिना-

उक्र् के पररप्रेक्ष्य में प्राथभमक एिां
उच्ि प्राथभमक विद्यालयों को अपेक्षानुरूप
शैक्षक्षक सहयोर्ात्मक पयािेक्षर् (Supportive
Supervision) प्रदान करने के भलये नयी
व्यिस्था में विर्य विशेर्ज्ञों के समूह का
पुनार्ठन ककया िा रहा है।

१. प्रत्येक विकास खण्ड हेर्ु कुल ६
Academic Resource Person (ARP) जिसमें
से ०५ विर्य विशेर्ज्ञ भशक्षक, ०१ डायि मेंिर
सदस्य होंर्े, Academic Resource Persons
(ARP) का ियन िनपद स्र्र पर ननधााररर्
ियन प्रकिया के माध्यम से ककया िाएर्ा। ०६
विशेर्ज्ञ सदस्यों का वििरर् ननम्निर् हैः-

२. ०१ विशेर्ज्ञ सामाजिक अध्ययन
विर्य के (ियन हेर्ु कला सांिर्ा में ननधााररर्
विर्य- समाि शास्र, इनर्हास, िूर्ोल, नार्ररक
शास्र, अथा शास्र, मनोविज्ञान, सैन्य विज्ञान,
साांजख्यकी, कृवर्)

३. ०१ विशेर्ज्ञ अांग्रेिी विर्य के
(ियन हेर्ु कला सांिर्ा में स्नार्क के अांनर्म
िर्ा में अांग्रेिी अननिाया हो।)
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
173

४.- ०१ विशेर्ज्ञ दहन्द विर्य के
(ियन हेर्ु कला सांिर्ा में स्नार्क में अांनर्म
िर्ा में दहन्द अननिाया हो)

५. ०१ विशेर्ज्ञ र्णर्र् विर्य के
(ियन हेर्ु िौनर्क विज्ञान, रसायन विज्ञान,
र्णर्र् पी. सी. एम सांिर्ा से अननिाया हो)

६. ०१ विशेर्ज्ञ विज्ञान विर्य के
(ियन
हेर्ु
िीि
विज्ञान,
िनस्पनर्
विज्ञान_िेड.बी सी. सिर्ा से अननिाया हो)

७. ०१ डायि मेंिर (सांबांचधर् विकास
खण्ड के भलये नाभमर् पदेन Academic
Resource Person (ARP)

८-
अकादभमक
सांदिा
समूह
Academic Resource
Group (ARG)
के
सदस्यों का ियन विद्यालयों को पूर्ाकाभलक
सहयोर्ात्मक पयािेक्षर् प्रदान करने एिां लननिंर्
आउिकम के सापेक्ष बच्िों में अचधर्म स्र्र
बढाने के भलए ककया िायेर्ा। इसके अनर्ररक्र्
उनसे अन्य काया नह ां भलया िायेर्ा।

(२) Academic Resource Person
(ARP) के चयि हेिु अहयिााः-

i. वांनछि ववषय में स्िािक के साथ
अध्यापक प्रशिक्षि योग्यिा हो।

ii. प्राथशमक/पूवय माध्यशमक ववद्यालय
में न्यूििम ०५ वषय का शिक्षि अिुभव हो।

iii. सेवा निवृि होिे में न्यूििम १०
वषय िेष हो।

iv. क्रकसी भी प्रकार की जांच
र्गनिमाि ि हो और ि ही पूवय में क्रकसी प्रकार
की अिुिासिात्मक काययवाही की र्गयी हो।"

४.
उक्र्
शासनादेश
के
अनुसार
ए.आर.पी. के ियन के मानदण्ड ि इनके
कायाकाल ि अन्य महत्िपूर्ा ननदेश ननम्न हैंः-

" (६) ियन हेर्ु मापदण्डः-

Academic
Resource
Person
(ARP) के ियन हेर्ु ननम्निर् अांक ननधााररर्
हैः-
ि०सां०
वििरर्
अांक
१
विर्यिार भलणखर् पर क्षा
६० अांक
२
माइिो ि चिांर्/भशक्षर् प्रदशान
(१० से १५ भमनि प्रनर्
प्रनर्िार्ी- श्रोर्ाओां को बााँधे
रखना, सांर्ुभलर् दृजटिकोर्,
सहि एिम् र्ाककाक प्रिाह,
एक अच्छे सम्प्रेर्क के रूप
में इत्यादद)
३० अांक
३
साक्षात्कार
(विर्यर्र्
िानकार ,
स्िप्रेरर्,
Leadership, Commitment,
प्रारांभिक
भशक्षा
के
प्रनर्
वििन इत्यादद)
१० अांक

कुल योर्
१०० अांक

१. भलणखर् पर क्षा में ६० प्रनर्शर् या
६० प्रनर्शर् से ऊपर अांक पाने िाले अभ्यथी ह
माइिो
ि चिांर्/भशक्षर्
प्रदशान
के
भलये
क्िाभलफाई करेंर्े।

२. माइिो ि चिांर्/भशक्षर् प्रदशान में ६०
प्रनर्शर् या ६० प्रनर्शर् से ऊपर अांक पाने िाले
अभ्यथी ह साक्षात्कार के भलये क्िाभलफाई
करेंर्े।

३. साक्षात्कार में ६० प्रनर्शर् या ६०
प्रनर्शर् से उपर अांक पाने िाले अभ्यथी ह
फाईनल ियन हेर्ु क्िाभलफाई करेंर्े।

४. भलणखर् पर क्षा, माइिो ि चिांर्
भशक्षर् प्रदशान र्था साक्षात्कार के कुल योर् को
िोडने के बाद जिन अभ्यचथायों का नम्बर ६०
प्रनर्शर् या ६० प्रनर्शर् से उपर होर्ा उन्हें
Academic Resource Person (ARP) के ियन
के भलये मेररि भलस्ि बनाई िाये।
174 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

५. यदद िनपद में ररक्र् पदो के
सापेक्ष अचधक अभ्यथी क्याभलफाई करर्े है र्ो
उस जस्थनर् में मेररि के आधार पर ियन ककया
िाये। शेर् क्िाभलफाई करने िाले अभ्यचथायों में
से विर्यिार अचधकर्म ०५ अभ्यचथायों की
प्रर्ीक्षा सूिी बनाई िाये िो ६ माह र्क िैध
होर्ी।

६. ियन के उपरान्र् यदद कुछ पद
ररक्र्
रह
िार्े
है
र्ो
ऐसी
दशा
में
उपरोक्र्ानुसार पुनः ियन प्रकिया सुननजश्िर्
करर्े हुए शर् प्रनर्शर् ननयुजक्र्याां सुननजश्िर् की
िायें।

७- साक्षात्कार सम्पन्न होने के दो
ददिस के अन्दर ियननर् अभ्यचथायों की सूिी
डायि एिां जिला बेभसक भशक्षा अचधकार
कायाालय के नोदिस बोडा पर िस्पा की िाये।

८- ियननर् Academic Resource
Person (ARP) का पदस्थापन काउांसभलांर् के
माध्यम से मेररि िररटठर्ा के िम में ककया
िायेर्ा। पदस्थापन का काया सूिी प्रकाशन की
अर्ल नर्चथ को अननिाया रूप से ककया िाना
होर्ा।

(७) Academic Resource Person
(ARP) का काययकाल एवं अन्य निदेि:-

I. Academic Resource Person
(ARP) का काययकाल ०१ वषय हेिु निधायररि
होर्गा। प्रत्येक वषय परफारमेन्स अप्रैजल के
आधार पर जिपदीय चयि सशमनि द्वारा
अिुमोदि के पश्चाि् इिका िवीिीकरि क्रकया
आयेर्गा। अधधकिम ०३ वषय के पश्चाि् पुिाः
चयि की प्रक्रिया की जायेर्गी।

II.
विद्यालयों
का
सहयोर्ात्मक
पयािेक्षर् (Supportive Supervision) करने हेर्ु
प्रत्येक Academic Resource Person (ARP)
को समग्र भशक्षा के वित्तीय ननयमों/अनुमोदन के
आधार पर Academic Resource Person को
रु. २५००.०० प्रनर्माह एिम डायि मेन्िर को रु.
१०००.०० प्रनर्माह मोबबभलि िाहन ित्ता िनपद
स्र्र से देय होर्ा।

III. Academic Resource Person
(ARP)
का
समुचिर्
िावर्ाक
मूलयाांकन
(Performance appraisal) की व्यिस्था की
िायेर्ी। मूलयाांकन हेर्ु जिला बेभसक भशक्षा
अचधकार एिां प्रािाया, डायि द्िारा र्दठर्
सभमनर् द्िारा की िायेर्ी। सभमनर् द्िारा
आख्या प्रस्र्ुर् करने के उपराांर् मुख्य विकास
अचधकार द्िारा स्िीकृनर् द िायेर्ी।

IV. Academic Resource Person
(ARP) के िावर्ाक मूलयाांकन में सांबांचधर् ब्लाक
का मेन्िर एक सदस्य के रूप में सजम्मभलर्
होर्ा।

V Academic Resource Person
(ARP) पदस्थापन के उपरान्र् जिला पररयोिना
कायाालय में कायािार ग्रहर् करेर्ें। पदस्थापन
उपरान्र् इनका कायाक्षेर सम्बजन्धर् ब्लाक
ननधााररर् होर्ा।

VI Academic Resource Person
(ARP) की काया अिचध मुख्यरूप से विद्यालय
समयािचध होर्ी ककसी काया की आिश्यकर्ा पर
विद्यालय समयािचध के बाद ह ब्लाक सांसाधन
केन्र पा िा सकेंर्े।

VII. Academic Resource Person
(ARP) द्िारा ननयोजिर् काया योिना के अांर्र्ार्
ककये िाने िाले काया के भलये सांकुल का मुख्य
विद्यालय अथिा सांकुल का अन्य विद्यालय
(िहाां पर अनर्ररक्र् कक्षा कक्ष/स्थान हो)
मुख्यर्ौर पर होर्ा।

VIII. Academic Resource Person
(ARP) की ननयभमर् उपजस्थनर् उनके द्िारा
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
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प्रेवर्र् सपोदिाक सुपरवििन ररपोिा प्रेरर्ा एप पर
अपलोड ककये िाने से मानी िाये।

IX. Academic Resource Person
(ARP) अपने विर्य से सांबांचधर् प्रभशक्षर्ों में ह
प्रनर्िार्ी । प्रभशक्षक के रूप में ननयोजिर् ककये
िायेर्े।"

५. उक्र् शासनादेश के द्िारा ए.आर.पी
के काया ि दानयत्ि िी ननधााररर् ककए र्ए हैं,
िो ननम्न हैंः-

 "(९) Academic Resource Person
(ARP) के काया ि दानयत्िः-

१. Academic Resource Person
(ARP) आर्ामी एक माह की कायायोिना एिां
भ्रमर् कायािम जिला समन्ियक प्रभशक्षर् के
माध्यम से जिला बेभसक भशक्षा अचधकार एिां
डायि प्रािाया को माह की २८ र्ार ख र्क
अिश्य प्रेवर्र् करेंर्े र्था कायायोिना के अनुसार
कियान्ियन सुननजश्िर् करेंर्े। यह कायायोिना
िर्ामान
विद्यालयों जस्थनर्यों
ि उपलब्ध
अकाद भमक िानकाररयों ि आांकडों के आधार पर
बनायेर्े। उसी प्रकार माभसक कायायोिना के
आधार पर उपलजब्ध आख्या (Achievement
Report) उपयुाक्र् उजललणखर् प्रकिया आर्ामी
माह की ५ र्ार ख र्क सम्बजन्धर् को प्रेवर्र्
करेंर्े।

२. प्रत्येक Academic Resource
Person (ARP) द्िारा प्रनर्माह न्यूनर्म ३०
विद्यालयों (डायि मेन्िर द्िारा १० विद्यालय)
(के.िी.बी.िी. में अचधकर्म हो बार) में 'प्रेरर्ा'
ऐप
के
माध्यम
से
आनलाईन
सपोदिाि
सुपरवििन सुननजश्िर् करेर्ें।

३. लननिंर् आउिकम पर आधाररर्
बच्िों का अचधर्म स्र्र आकलन का डािा
फीडडांर् पूर्ा करिाना र्था विद्यालयिार/ छारिार
उपलजब्ध आख्या अपने पास सुरक्षक्षर् रखेंर्े।

४.
विद्यालयों
का
सपोदिाि
सुपरवििन करने के दौरान लननिंर् आउिकम पर
आधाररर् बच्िों का अचधर्म स्र्र आकलन के
आधार पर सबसे कम परफारमेंस िाले ५ बच्िों
से बार्िीर् कर प्रर्नर् का विश्लेर्र् करेंर्े एिां
सुधार हेर्ु भशक्षक/प्रधानाध्यापक से िार्ाा कर
कायायोिना बनिायेंर्े। (अचधर्म स्र्र आकलन
के आधार पर कम उपलजब्ध िाले बच्िों को यह
एहसास न होने दें कक उनका परफारमेंस कम है)

५. द क्षा ऐप के प्रयोर् हेर्ु ननरन्र्र
समीक्षा कोर्े। द क्षा एप भशक्षर् सामग्री/
र्नर्विचध/आडडयो वििुअल विर्य िस्र्ु को देख
ि समझकर आत्मसार् करने एिां कक्षा भशक्षर्
में प्रयोर् कर बच्िों के सीखने की प्रकिया को
आनन्दकार बनाने हेर्ु भशक्षक को प्रेररर् करेंर्े।

६. द क्षा एप में आडडयो वििुअल
डडजििल सामग्री के Adoption एिां Viewing
Time बढाने हेर्ु भशक्षकों का अभिमुखकरर्
करना एिां उन्हें प्रेररर् करेंर्े।

७ िनपद में र्दठर् एस०आर०िी०.
खण्ड भशक्षा अचधकार , डायि एिां डी०पी०ओ० के
साथ समन्िय स्थावपर् करेंर्े।

८. पयािेक्षर् के समय विद्यालय की
शैक्षणर्क र्नर्विचधयों िैसे विद्यालय में बच्िों
को प्राथाना सिा, बैठक व्यिस्थाए समय-साररर्ी
का प्रयोर्, बाल सांसद/मीना मांि, पुस्र्कालय,
खेलकूद आदद र्नर्विचधयों का अिलोकन एिां
माडल भशक्षर् का प्रदशान (डडमान्सट्रेशन) करेंर्े।

९. प्रत्येक Academic Resource
Person (ARP) के पास अपने विर्य से
सम्बजन्धर् एक ककि होर्ा, जिसमें विर्य से
सम्बजन्धर् ि .एल.एम., सादहत्य, पाठ यिम,
176 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
लननिंर् आउिकम र्था कुछ ऐसी कच्िी सामग्री
एिां उपकरर् होंर्े जिनसे िह आिश्यकर्ानुसार
मौके पर अपनी विर्यिस्र्ु के सापेक्ष कुछ
ि .एल.एम./ सामग्री र्ैयार कर सके।

१०. विद्यालय भ्रमर् के दौरान
विभिन्न महत्त्िपूर्ा सांिेदनशील मुद्दे िैसे
लैंचर्क, समर्ा समानर्ा, िीिन कौशल भशक्षा,
पयाािरर् सांिेदना, सडक सुरक्षा, आपदा प्रबन्धन,
आत्मरक्षा, बाल अचधकार आदद विर्य पर वििार
विमशा के द्िारा भशक्षकों को सांिेदनशील
बनायेंर्े।

११.
विद्यालय
भ्रमर्
उपरान्र्
प्रधानाध्यापक एिां भशक्षकों के साथ ििाा करेंर्े
एिां पयािेक्षर् पांजिका में अपने द्िारा प्रदान
ककये र्ये शैक्षक्षक अनुसमथान एिां आर्ामी
कायायोिना के बबन्दुओां को अांककर् करेंर्े र्था
प्रधानाध्यापक एिां भशक्षक साथी हस्र्ाक्षर
उपरान्र् इसकी फोिो खीांिकर प्रेरर्ा ऐप पर
अपलोड करेंर्े। अर्ले भ्रमर् में यह सुननजश्िर्
करेंर्े कक ददए र्ए सुझािों ि र्य की र्यी
कायायोिना का विद्यालय द्िारा अनुपालन
ककया र्या अथिा नह ां।

१२.
विद्यालय
स्र्र
पर
छार
प्रोफाइल ि सर्र् व्यापक मूलयाांकन प्रपर िरने
में आ रह कदठनायों का ननदान करेर्ें।

१३. विद्यालय भ्रमर् के दौरान
भशक्षकों द्िारा ककए िा रहे निािारों या बेहर्र
भशक्षर्-अचधर्म प्रयासो अभिलेखीकरर् करेंर्े
र्था डायि, डी.पी.ओ. ि राज्य पररयोिना
कायाालय को प्रेवर्र् करेंर्े।

१४.
कक्षा
अिलोकन/भशक्षक
से
बार्िीर् के आधार पर भशक्षर् अचधर्म प्रकिया
में र्ुर्ित्ता सुधार हेर्ु भशक्षकों की आिश्यकर्ा
आधाररर् अभिमुखीकरर्/प्रभशक्षर् करेर्ें।

१५. ब्लाक स्र्र पर निािार ि
बेहर्र भशक्षर् अचधर्म काया करने िाले भशक्षकों
का समूह (पीयर लननिंर् कम्यूननि -PLC)
विकभसर् करेंर्े र्था निािार भशक्षकों द्िारा
ककये र्ये कायों को विकास खण्ड के अन्य
भशक्षकों के साथ साझा करेंर्े।

१६. बी.आर.सी. स्र्र पर होने िाल
प्रधानाध्यापकों की माभसक बैठकों में Academic
Resource Person (ARP) प्रनर्िार् करेंर्े र्था
विद्यालय स्र्र य अकादभमक उपलजब्धयों र्था
िुनौनर्यों से उऩ्हे अिर्र् करायेंर्े र्था इस
सांबांध में प्राप्र् आांकडो के आधार पर एक
कायायोिना विकभसर् करायेंर्े।

१७. िनपद में शैक्षक्षक र्ुर्ित्ता में
िृद्चध एिां शैक्षक्षक िार्ािरर् के ननमाार् हेर्ु
कायाशाला प्रभशक्षर्, र्ोटठी, सेभमनार, प्रनर्योचर्र्ा,
बैठक, रैल इत्यादद का आयोिन करेंर्े।"

६. समस्र् याचिकाकर्ाा उपरोक्र् िणर्ार्
ियन प्रकिया में सजम्मभलर् हुए और ए.आर.पी.
के पद पर कायाालय आदेश ददनाांक १३.०१.२०२०
द्िारा ननयुक्र् हुए और उनको अलर्-अलर्
जिलों में अलर्-अलर् विकास खण्ड आिांदिर्
हुए।

७. ननयुजक्र् आदेश के अनुसार उनकी
ननयुजक्र् अस्थाई ि प्रारजम्िक कायाकाल ०१ िर्ा
ननधााररर् ककया र्या एिां परफामेंस अप्रेसल के
अनुसार, ियन सभमनर् के अनुमोदन के पश्िार्,
प्रत्येक िर्ा निीनीकरर् ककए िाने का प्रािधान
िी रखा र्या एिां अचधकर्म कायाकाल ०३ िर्ा
ननधााररर् ककया र्या।

८. सिी याचिकाकर्ााओां का कथन है कक
उनके परफामेंस अप्रेसल पर हर िर्ा उनकी
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
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ननयुजक्र् का निीनीकरर् ए.आर.पी. के पद पर
ककया र्या और उन्होंने सफलर्ापूिाक ३ िर्ा पूर्ा
ककये एिां िर्ामान में िी काया कर रहे हैं अथाार््
िर्ामान र्क कर ब ५ िर्ा का कायाकाल पूर्ा
कर भलया है।

९. अब निीन ननयुजक्र् की प्रकिया प्रारांि
होने िाल है। इस स्र्र पर प्रमुख सचिि उत्तर
प्रदेश शासन के आदेश ददनाांक १०-१०-२०२४ के
माध्यम से एक शासनादेश, विर्य "समग्र भशक्षा
के अऩ्र्र्ार् स्थावपर् न्याय पांिायर् सांसाधन
केन्रों एिां ब्लाक सांसाधन केन्रों के पुनार्ठन
हेर्ु ननर्ार् शासनादेश के िम में अकादभमक
ररसोसा पसान्स (ए०आर०पी०) के कायाकाल की
अिचध विस्र्ाररर् ककये िाने के सम्बन्ध में"
ननर्ार् ककया र्या, जिसके प्रमुख अांश ननम्न हैंः-

"२- इस सांबांध में मुझे यह कहने का
ननदेश हुआ है कक शासन स्र्र पर सम्यक
वििारोपरान्र् विर्यर्र् प्रकरर् में ननम्निर्
ननर्ाय भलया र्या हैः-

१) शासनादेश सांख्या-९०२/६८-५-२०१९
ददनाांक २२ अक्िूबर, २०१९ एिां शासनादेश
सांख्या-२८४७/६८-५-२०२२ ददनाांक ०५ िनिर ,
२०२३ के िम में अकादभमक ररसोसा पसान्स
(ए०आर०पी०) के कायाकाल की अिचध माह
मािा, २०२५ र्क विस्र्ाररर् ककये िाने की
अनुमनर् प्रदान की िार्ी है. र्ाकक इनके द्िारा
विकास खण्ड के १० विद्यालयों को "ननपुर्
विद्यालय" के रूप में विकभसर् ककये िाने का
लक्ष्य सुननयोजिर् ढांर् से प्राप्र् ककया िा सके।
उक्र् सेिा अिचध अथाार्् ददनाांक ३१ मािा, २०२५
को जिन ए०आर०पी० का कायाकाल ०३ िर्ा या
इससे अचधक हो िायेर्ा, उन ए०आर०पी० का
कायाकाल स्िर्ः समाप्र् हो िायेर्ा र्था
ए०आर०पी० ियन हेर्ु पुनः निीन ियन प्रकिया
सांपाददर् की िायेर्ी।

(२) िर्ामान शैक्षक्षक सर २०२४-२५
(अथाार्् ददनाांक ३१ मािा, २०२५ र्क) के उपरान्र्
शासनादेश सांख्या-९०२/ ६८-५-२०१९ ददनाांक २२
अक्िूबर २०१९ के पररप्रेक्ष्य में ए०आर०पी० का
कायाकाल ०१ िर्ा हेर्ु ननधााररर् होर्ा र्था
प्रत्येक िर्ा ए०आर०पी० का परफारमेन्स अप्रेिल
के आधार पर िनपद य ियन सभमनर् द्िारा
अनुमोदन के पश्िार्् इनका निीनीकरर् ककया
िायेर्ा। अचधकर्म ०३ िर्ा के पश्िार्् पुनः
निीन ियन की प्रकिया अपनाई िायेर्ी।

(३) ए०आर०पी० के रूप में अधधकिम
०३ वषय का काययकाल पूिय करिे के उपरान्ि पूवय
में कायय कर चुके कोई भी अकादशमक ररसोसय
पसयन्स भववष्य में अकादशमक ररसोसय पसयि के
पद पर चयि के शलए अिहय होंर्गे।

(४) अकादभमक ररसोसा पसान्स के
ियन सांबांधी अन्य ददशा ननदेश शासनादेश
सख्या-९०२/६८-५-२०१९ ददनाांक २२ अक्िूबर,
२०१९ में उजललणखर् व्यिस्थानुसार यथािर््
रहेंर्े।"

१०.
समस्र्
याचिकाकर्ाा
उपरोक्र्
प्रस्र्र २(३) से क्षुब्द हैं क्योंकक उन्होंने ३ िर्ा से
अचधक का ए.आर.पी. के पद पर कायाकाल पूर्ा
कर भलया है, अर्ः अब िे निीन ननयुजक्र् की
प्रकिया में िार् नह ां ले पाएांर्े, क्योंकक उपरोक्र्
प्रस्र्र द्िारा उन्हें ियन के भलए अनहा घोवर्र्
कर ददया है।

११.
िर्ामान
सिी
याचिकाओां
में
उपरोक्र् खण्ड २(३) को ननरस्र् करने की प्राथाना
178 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
यह कहर्े हुये की र्यी है कक उनको अनहा
घोवर्र् करना एक मनमाना आदेश है।

१२. याचिकाकर्ााओां की ओर से श्री
अशोक खरे, िररटठ अचधिक्र्ा द्िारा सहायक श्री
अनुरार् बरपाठी, अचधिक्र्ा; श्री राधा कान्र्
ओझा; िररटठ अचधिक्र्ा द्िारा सहायक श्री
भशिेन्दू ओझा, अचधिक्र्ा र्था सिा श्री प्रिाकर
अिस्थी; श्री सीमाांर् भसांह; श्री रिीांर प्रकाश
श्रीिास्र्ि; श्री फूल िांर भसांह; श्री िानु प्रर्ाप
भसांह; श्री अभमर् कुमार नर्िार ; श्री रािेश कुमार
िमाा एिां श्री िैनेंर पाांडे, कबीर नर्िार ,
अचधिक्र्ार्र्ों नें अपना पक्ष रखा र्था उनके
द्िारा ददए र्ए र्का सांक्षेप में ननम्न हैंः-

(क) पूिा ननधााररर् ियन व्यिस्था में
ऐसी कोई अनहार्ा िणर्ार् नह ां की र्ई थी।

(ख) पूिा में ए.आर.पी. का कायाकाल
३ िर्ा पूर्ा करने के बाद िविटय में उपरोक्र्
पद के ियन के भलए अनहा काररर् का आदेश
पूर्ार्ः मनमाना है एिां िारर् के सांविधान के
अनुच्छेद १४ का पूर्ा रूपेर् उललांघन है।

(र्) याचिकाकर्ाा ियन का अचधकार
र्ो नह ां रखर्े है, परांर्ु ियन प्रकिया में िार्ीदार
होने का अचधकार अिश्य रखर्े हैं और यह
अचधकार मनमाने रूप से समाप्र् नह ां ककया िा
सकर्ा।

(घ) आक्षेवपर् प्रस्र्र २(३),िारर्ीय
सांविधान के अनुच्छेद १६ (लोक ननयोिन के
विर्य में अिसर की समानर्ा) का िी उललांघन
करर्ा है।

(ङ) याचिकाकर्ााओां ने ए.आर.पी. के
पद पर ३ िर्ा से अचधक काया ककया और उनके
विरुद्ध काया सांबांधी कोई िी भशकायर् नह ां की
र्ई। उनको मनमाने आदेश द्िारा निीन ियन
प्रकिया के भलए अनहा घोवर्र् करना 'िैध
अपेक्षा' के भसद्धान्र् के िी विपर र् है।

(ि) याचिकाकर्ााओां के ए.आर.पी. पर
३ िर्ों से ज्यादा काया करने में हुए अनुिि का
लाि देने के स्थान पर उनको ियन के भलए
अनहा घोवर्र् करना न्याय विरूद्ध है।

(छ) ए.आर.पी. के ियन की प्रकिया
का ननधाारर्, िैसा प्रारजम्िक स्र्र पर ककया
र्या था, उसके अऩुसार कोई िी अध्यापक
िणर्ार् शर्ें पूर्ा होने के बाद, िार् ले सकर्ा है।
ियन के मानदण्ड के अनुसार, प्रत्येक प्रनर्योर्ी
को भलणखर् पर क्षा, भशक्षर् प्रदशान ि साक्षात्कार
का िार्ीदार बनना होर्ा, अर्ः यह एक मुक्र्
प्रनर्योचर्र्ा है। याचिकाकर्ााओां को उनके पूिा
अनुििों के आधार पर कोई महत्ि नह ां ददया
िा रहा है। यदद उन्हें िी अन्य प्रनर्योचर्यों की
िाांनर् ह ियन प्रकिया में िार् लेने का अिसर
प्रदान ककया िार्ा है र्ो इससे ककसी दूसरे
प्रनर्योर्ी पर कोई प्रनर्कूल प्रिाि नह ां पडेे़र्ा।

(ि) सांविधान के अनुच्छेद १४ के
अांर्र्ार् अनुमय िर्ीकरर् के भलए दो कारकों
का होना आिश्यक है। पहला, िर्ीकरर्
बोधर्म्य वििेद पर आधाररर् होना िादहए ि
दूसरा, वििेद, िर्ीकरर् के उद्देश्य से र्ाककाक
रूप से सांबांचधर् होना िादहए। परांर्ु िर्ामान
र्थ्यों में वििेद, उपरोक्र् दोनों कारकों का
पालन नह ां करर्ा है अर्ः ननरस्र् ककया िाना
िादहए।

(झ) अचधिक्र्ाओां ने न्यायालय का
ध्यान िावर्ाक भशक्षा जस्थनर् ररपोिा (ग्रामीर्),
२०२४, (Annual Status of Education Report,
(Rural), २०२४) की ओर आकवर्ार् यह कहर्े हुए
कराया कक र्र् िर्ों में ए.आर.पी. के सफल
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
179
कायों के कारर् अच्छे पररर्ाम आयें हैं, एिां
छार-छाराओां के मूलिूर् भशक्षर् स्र्र में
सांर्ोर्िनक सुधार आया है। अर्ः अर्र िह
मुक्र् प्रनर्योचर्र्ा में िार् लेकर पुनः सफल
होर्े हैं र्ो िह अपने पूिा अनुििों के कारर्
और अचधक अच्छे पररर्ाम लाने में सफल होंर्े।

(ञ) अचधिक्र्ाओां ने अपर मुख्य
सचिि द्िारा पाररर् कायाालय ज्ञाप ददनाांक
०६.०२.२०२५ पर िी ध्यान यह कहर्े हुए
आकवर्ार् कराया कक यह आदेश इस न्यायालय
के द्िारा पाररर् आदेश ददनाांक २३.०१.२०२५ के
अनुपालन में पाररर् ककया र्या था जिसमें
उपरोक्र् िर्ीकरर् के उद्देश्य को िणर्ार् ककया
र्या है, जिसे ननम्न उद्धीणर्ार् ककया िा रहा
हैः-

"उपयुाक्र् सांदभिार् शासनादेश ददनाांक
१० अक्िूबर, २०२४ में उजललणखर् ननदेशानुसार
कायािाह सुननजश्िर् कराये िाने के भलये राज्य
पररयोिना
कायाालय
के
पराांकर्ुर्०वि०/ए०आर०पी०/ ६७७८/२०२४-२५ ददनाांक
१८ अक्िूबर, २०२४ द्िारा िनपदों को ददशा
ननदेश ननर्ार् ककये र्ये।

(४)
शासनादेश
सांख्या-६८५०९९/१४३/२०२४-अनुिार्-५ ददनाांक १० अक्िूबर,
२०२४
में
प्रदत्त
ननदेशों
एिां
उजललणखर्
प्रकियानुसार आर्ामी शैक्षक्षक सर (२०२५-२६) के
पूिा िनपद में अकादभमक ररसॉसा पसान्स के
ियन सांबांधी कायािाह ननयमानुसार ददनाांक १५
मािा, २०२५ र्क पूर्ा कराये िाने के भलये राज्य
पररयोिना
कायाालय
के
पराांकर्ुर्०वि०/ए०आर०पी०/९३३३ /२०२४-२५ ददनाांक १५
िनिर , २०२५ द्िारा िनपदों को ददशा-ननदेश
ननर्ार् ककये र्ये हैं।

(५) "राटट्र य भशक्षा नीनर्-२०२०" एिां
नेशनल
कॅर कुलम
फ्रेमिका
(NCF-FS)
के
पररप्रेक्ष्य में भशक्षा मांरालय, िारर् सरकार द्िारा
ननपुर् िारर् भमशन प्री-प्राइमर (बालिादिका) से
कक्षा-२ (अथाार् ०८ िर्ा की आयु) र्क लार्ू
ककये िाने का ननर्ाय भलया र्या है। र्त्िम में
शासनादेश सख्या-३६/२०२४/१/७९७९६२/ २०२४-६८५०९९/४९७/२०२४,
बेभसक
भशक्षा
अनुिार्-५,
ददनाांक १८ निम्बर, २०२४ द्िारा 'ननपुर् िारर्
भमशन' के प्रिािी कियान्ियन हेर्ु सांशोचधर्
ननपुर् लक्ष्य एिां र्नर्विचधयों के कियान्ियन
हेर्ु ननदेश ननर्ार् ककये र्ये हैं।

ननपुर् िारर् भमशन के अन्र्र्ार्
भशक्षा की र्ुर्ित्ता पर विशेर् बल देर्े हये बच्िों
में बुननयाद िार्ायी एिां र्णर्र्ीय दक्षर्ाओां को
प्राप्र् कराने के भलये 'सांदभशाका' के माध्यम से
सुननयोजिर् भशक्षर् कायािम का कियान्ियन
ककया िा रहा है र्था विभिन्न शैक्षणर्क सामग्री
यथा-सदभशाका, वप्रांिररि सामग्री, ि ०एल०एम०,
र्णर्र् ककि, लाइब्रेर बुक्स, भशक्षक हैण्डआउट्स
र्था 'र्ाभलका' समस्र् पररर्द य प्राथभमक
विद्यालयों को उपलब्ध करायी र्यी हैं। इसके
साथ ह पररर्द य प्राथभमक विद्यालयों के
भशक्षकों को प्रभशक्षर् िी प्रदान ककया र्या है।
ननपुर् िारर् भमशन के अन्र्र्ार् ननधााररर्
लक्ष्यों को प्राप्र् ककये िाने हेर्ु समस्र् भशक्षकों
एिां सिी दहर्धारकों के ननरन्र्र, समजन्िर् एिां
समवपार् प्रयास की आिश्यकर्ा है, जिसके भलये
विभिन्न शैक्षणर्र् र्नर्विचधयाां कियाजन्िर् की
िा रह है।

(६) राटट्र य भशक्षा नीनर्- २०२० में
भशक्षकों
के
Continuous
Professional
Development पर विशेर् बल ददया र्या है।
अिर्र् कराना है कक उ०प्र० बेभसक भशक्षा
180 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
पररर्द के अधीन पररर्द य विद्यालयों में ४.३४
लाख से अचधक भशक्षक कायारर् हैं, जिन्हें
ऑनसाइि शैक्षक्षक सपोिा र्था सहयोर्ात्मक
पयािेक्षर् हेर्ु प्रत्येक विकासखण्ड में ०५
अकादभमक ररसोसा पसान की व्यिस्था की र्यी
है। वििार् िरर्बद्ध रूप से अचधक सांख्या में
भशक्षकों को ए०आर०पी० के रूप में काया करने
का अिसर प्रदान करना िाहर्ा है, जिससे कक
अचधक से अचधक भशक्षकों का िरर्बद्ध रूप से
विशेर् क्षमर्ा सिद्ाधन करर्े हये सकारात्मक
शैक्षणर्क िार्ािरर् का सृिन ककया िा सके।
वििार् में भशक्षकों की सांख्या के दृजटिर्र् उनके
सर्र्् क्षमर्ा सांिद्ाधन हेर्ु विशेर् प्रयास
आिश्यक हैं र्ाकक वपयर लननिंर् करर्े हुये
लक्षक्षर् हस्र्क्षेप सुननजश्िर् ककये िा सकें।

(७) ववद्यालयों में मेण्टररंर्ग के दो
पक्ष हैं-ए०आर०पी० के माध्यम से ववद्यालयों का
सहयोर्गात्मक पययवेक्षि क्रकया जािा िथा शिक्षक
सकुल बैठकों के माध्यम से वपयर लनििंर्ग को
बढावा ददया जािा। सुनियोक्जि कक्षा-शिक्षि,
िैक्षणिक चुिौनियों पर चचाय, शिक्षकों को प्रभावी
फीडबैक प्रदाि करिे एवं उत्कृष्ट िथा िवाचारी
िैक्षक्षक प्रथाओं को साझा क्रकये जािे के साथ ही
अकादशमक र्गनिववधधयों के संबंध में ववचारववमिय करिे के शलये शिक्षक संकुल की एजेण्डा
आधाररि माशसक बैठकें आयोक्जि की जािी हैं।
उति बैठकों में अकादशमक ररसोसय पसयि
(ए०आर०पी०) मेण्टररंर्ग के समय के प्राप्ि
अिुभवों को शिक्षकों के साथ साझा कर सकिे
हैं। इसके अनिररति अक्जयि अिुभव, वविेषज्ञिा
एवं समवपयि भाव से अपिे मूल ववद्यालय को
आदिय ववद्यालय के रूप में ववकशसि कर
उदाहरि प्रस्िुि कर सकिे हैं।
 (८) यह िासिादेि एक समाि सभी
शिक्षकों पर लार्गू है। इस संबंध में यह बबन्दु
ववशिष्ट रूप से उल्लेखिीय है क्रक दीघय अवधध
िक मूल ववद्यालय एवं मूल शिक्षि कायों से
पृथक रहिे से शिक्षकों का बच्चों एवं स्थािीय
समुदाय के साथ आत्मीय ररश्िा प्रनिकूल रूप से
प्रभाववि होिा है। अिाः एक निक्श्चि अवधध के
उपरान्ि मेण्टररंर्ग का कायय कर रहे शिक्षकों को
ववद्यालय में सामान्य शिक्षि कायय हेिु
नियोक्जि रखा जािा आवश्यक है, क्जससे क्रक
वास्िववक कक्षा शिक्षि, पाठ्यिम की योजिा
और क्रियान्वयि, सब्जेतट िॉलेज, कक्षा प्रबन्धि,
ववद्यालय प्रबन्धि आदद महत्वपूिय एवं मुख्य
िैक्षणिक
िथा
ववद्यालयीय
पहलुओं
से
अद्यावधधक रह सकें।

इसके अनिररति यह भी उद्देश्य है
क्रक ववद्यालयों में अध्यापि कायय कर रहे अन्य
योग्य शिक्षकों को भी ए०आर०पी० के पद पर
मेण्टररंर्ग कायय एवं सहयोर्गात्मक पययवेक्षि
संबंधी कायय करिे के अवसर उपलब्ध हो सकें।
यह िभी संभव है जब चरिबद्ध रूप से अधधक
से अधधक शिक्षकों को मेण्टसय के रूप में कायय
करिे का अवसर प्रदाि क्रकया जा सके, क्जससे
क्रक बेहिर शिक्षि संस्कृनि को बढावा ददया जा
सके।"

(ि) अचधिक्र्ाओां ने उपरोक्र् िणर्ार्
कारर्ों को ननराधार बर्ाया कक ५-६ िर्ा की
अिचध को द घा अिचध नह ां माना िा सकर्ा।
यह प्रकिया स्थाई नह ां है र्था कुछ िर्ों के
उपराांर् सिी ए.आर.पी. को िापस भशक्षर् काया
पर ह िाना होर्ा। मार याचिकाकर्ााओां को
ियन प्रकिया से अनहा करने से, अन्य योग्य
भशक्षकों को ए.आर.पी. के पद मेंिररांर् काया एिां
सहयोर्ात्मक पयािेक्षर् सांबांधी काया करने के
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
181
अिसर उपलब्ध नह ां होंर्े, यह ननधााररर् करने
के पीछे कोई युजक्र्युक्र् कारर् नह ां है। यह
स्िस्थ प्रनर्स्पधाा के उद्देश्य के िी विपर र्
है।विद्िान अचधिक्र्ाओां नें उच्िर्म न्यायालय
द्िारा आंध्र प्रदेि राज्य प्रनि डा० राव वी. बी.
जे. चेलीकिी, २०२४ आई.एि.एस.सी. ८९४, का
उद्धरर् ककया कक ककसी िी वििेद का उद्देश्य
विसांर्र्, अनुचिर् एिां अन्यायपूर्ा नह ां होना
िादहए। विद्िान अचधिक्र्ाओां नें ननम्न विचध
दृटिाांर्ो पर िी बल ददयाः दयाराम सरोज एवं
अन्य प्रनि उत्तर प्रदेि राज्य एवं अन्य : २००६
एस.सी.सी.
आिलाइि
ए.एल.एल.
२२८८;
ए.एच.व्हीलर एण्ड को०.प्रा०.शल०. एवं अन्य प्रनि
यूनियि आफ इक्ण्डया एवं अन्य: २००५
एस.सी.सी. आिलाइि ए.एल.एल २०६;

१३. प्रनर्िाद र्र्ों की ओर से श्रीमर्ी
अिाना भसांह; श्री सांिय कुमार भसांह; श्री िी.पी.भसांह
कछिाह; श्री िय प्रकाश भसांह; श्री शभश प्रकाश
राय; श्री अर्ुल कुमार शाह , अचधिक्र्ार्र् एिां
श्री अभिर्ेक श्रीिास्र्ि, मुख्य स्थायी अचधिक्र्ा;
ए.के.भसांह नार्िांशी, अनर्ररक्र् मुख्य स्थायी
अचधिक्र्ा; एिां, श्रीमर्ी श्रुर्ी मालिीया, ब्रीफ
होलडर, नें पक्ष रखा और भलणखर् बहस िी
दाणखल की। उनके द्िारा ददए र्ए र्का सांक्षेप
में ननम्न हैंः-

क. "राटट्र य भशक्षा नीनर्-२०२०" एिां
राटट्र य पाठयिम की रूपरेखा (एनसीएफएफएस) के पररपेक्ष में भशक्षा मांरालय, िारर्
सरकार द्िारा प्री-प्राइमर (बालिादिका) से कक्षा-
२ र्क (अथाार् ०८ िर्ा की आयु र्क) ननपुर्
िारर् भमशन को कियाजन्िर् ककये िाने का
ननर्ाय भलया र्या है। इस सम्बन्ध में
शासनादेश सांख्या-३६/२०२४/१/७९७९६२/ २०२४-
६८-५०९९/४९७/२०२४, बेभसक भशक्षा अनुिार्-५,
ददनाांककर् १८ निम्बर, २०२४ द्िारा 'ननपुर्
िारर् भमशन' के प्रिािी कियान्ियन हेर्ु
पुनर क्षक्षर् ननपुर् िारर् भमशन के लक्ष्यों एिां
कियाकलापों के कियान्ियन हेर्ु ननदेश िार
ककये र्ये हैं।

ख. ननपुर् िारर् भमशन के अांर्र्ार्
बच्िों को बुननयाद िार्ायी एिां र्णर्र्ीय कौशल
प्राप्र् कराने के भलए 'सांदभशाका' के माध्यम से
एक सांरचिर् भशक्षर् पद्धनर् लार्ू की िा रह
है, जिसमें भशक्षा की र्ुर्ित्ता पर विशेर् बल
ददया
र्या
है।
सिी
पररर्द य प्राथभमक
विद्यालयों में सांदभशाका, चिर बहुल सामग्री,
ि एलएम, र्णर्र् ककि, पुस्र्कालय की पुस्र्कें,
भशक्षक हैंडआउि और 'र्ाभलका' िैसी विभिन्न
शैक्षक्षक सामग्री उपलब्ध कराई र्ई है। ननपुर्
िारर् भमशन के र्हर् ननधााररर् लक्ष्यों को प्राप्र्
करने के भलए सिी भशक्षकों और सिी
दहर्धारकों के ननरांर्र, समजन्िर् और समवपार्
प्रयासों की आिश्यकर्ा है, जिसके भलए विभिन्न
शैक्षक्षक र्नर्विचधयों को लार्ू ककया िा रहा है।

र्. राटट्र य भशक्षा नीनर्-२०२० में
भशक्षकों के सर्र् िृवत्तक विकास पर विशेर् बल
ददया र्या है। उत्तर प्रदेश बेभसक भशक्षा पररर्द
के अन्र्र्ार् पररर्द य विद्यालयों में ०४ लाख से
अचधक भशक्षक कायारर् हैं,
जिनके भलए
यथास्थान
शैक्षक्षक
सहायर्ा
एिां
सहयोर्ी
पयािेक्षर् हेर्ु प्रत्येक विकास खण्ड में ०५
एकेडभमक ररसोसा पसान की व्यिस्था की र्ई है।
वििार् िरर्बद्ध र्र के से अचधकाचधक सांख्या
में भशक्षकों को ए.आर.पी. के रूप में काया करने
का अिसर प्रदान करना िाहर्ा है, जिससे
182 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
भशक्षकों की क्षमर्ा ननमाार् में अचधकाचधक
िृद्चध हो सके।

घ. विद्यालयों में मार्ादशान के दो
पहलू हैं- ए.आर.पी. के माध्यम से विद्यालयों
का सहायक पयािेक्षर् र्था भशक्षक सांकुल बैठकों
के माध्यम से सहकमी भशक्षर् को बढािा देना।
सुननयोजिर् कक्ष भशक्षर्, शैक्षक्षक िुनौनर्यों पर
ििाा, भशक्षकों को प्रिािी फीडबैक प्रदान करने
र्था शैक्षणर्क र्नर्विचधयों के सांबांध में ििाा के
साथ-साथ सिोत्तम एिां निीन शैक्षक्षक प्रथाओां
को साझा करने के भलए, भशक्षक सांकुल की
एिेंडा आधाररर् माभसक बैठकें आयोजिर् की
िार्ी हैं। उक्र् बैठकों में अकादभमक ररसोसा
पसान (ए.आर.पी.) भशक्षकों के साथ मार्ादशान के
दौरान प्राप्र् अनुििों को साझा कर सकर्े हैं।
इसके अनर्ररक्र्, अजिार् अनुिि, विशेर्ज्ञर्ा और
समपार् के साथ, कोई िी व्यजक्र् अपने मूल
विद्यालय को एक आदशा विद्यालय के रूप में
विकभसर् करके एक उदाहरर् प्रस्र्ुर् कर सकर्ा
है।

ङ. सांदभिार् शासनादेश सिी भशक्षकों
पर समान रूप से लार्ू हैं। इस सांबांध में यह
विशेर् रूप से उललेखनीय है कक मुख्य
विद्यालय एिां मुख्य भशक्षर् काया से लम्बे
समय र्क दूर रहने से भशक्षकों का बच्िों एिां
स्थानीय समुदाय के साथ आत्मीय सम्बन्ध
प्रनर्कूल रूप से प्रिाविर् होर्ा है। अर्ः एक
ननजश्िर् अिचध के पश्िार्् विद्यालय में ह
मार्ादशान काया करने िाले भशक्षकों को मूल
भशक्षर् काया हेर्ु ननयोजिर् रखना आिश्यक है,
र्ाकक िे महत्िपूर्ा एिां प्रमुख शैक्षक्षक एिां
विद्यालयी
पहलुओां
िैसे
िास्र्विक
कक्षा
भशक्षर्, पाठयिम की योिना एिां कियान्ियन,
विर्य ज्ञान, कक्षा प्रबन्धन, विद्यालय प्रबन्धन
आदद से अद्यर्न रह सकें।

ि. उपरोक्र् का उद्देश्य स्कूलों में
पढाने िाले अन्य योग्य भशक्षकों को ए.आर.पी.
के रूप में मार्ादशान काया और सहायक
पयािेक्षर् काया करने के अिसर प्रदान करना िी
है। यह र्िी सांिि है, िब अचधक से अचधक
भशक्षकों को िरर्बद्ध र्र के से मार्ादशान काया
करने के अिसर प्रदान ककए िाएां, र्ाकक बेहर्र
भशक्षर् सांस्कृनर् को बढािा ददया िा सके।

छ. ए.आर.पी के पास ए.आर.पी के
रूप में काम करने का कोई ननदहर् अचधकार
नह ां है क्योंकक मूल ननयुजक्र् बेभसक स्कूल में
सहायक भशक्षक के रूप में है। नीनर्र्र् ननर्ाय
के र्हर् ए.आर.पी की ननयुजक्र् उपरोक्र् िणर्ार्
कारर्ों के भलए की र्ई थी और अन्य भशक्षकों
को िी यह लाि और अनुिि ददया िाना है,
इसभलए उन ए.आर.पी पर प्रनर्बांध लर्ाया र्या
है िो पहले से ह र्ीन साल र्क काम कर िुके
हैं। ऐसी शर्ा न र्ो मनमानी है और न ह
र्काह न है, बजलक िैध कारर्ों पर आधाररर् है।
४ लाख से अचधक भशक्षकों में से केिल ४४००
को हमेशा के भलए ए.आर.पी के रूप में काम
करने की अनुमनर् नह ां द िा सकर्ी है। यह
एक क्लास मॉननिर की िूभमका से बढकर है,
इसभलए दूसरों को नेर्ृत्ि की िूभमका ननिाने का
अिसर देने के भलए इसे ननयभमर् रूप से
बदलना
होर्ा।
ि. यािीर्र् बेभसक भशक्षा पररर्द द्िारा
सांिाभलर् बेभसक प्राइमर स्कूलों में ननयुक्र्
सहायक अध्यापक हैं और उनकी सेिाएां उत्तर
प्रदेश बेभसक भशक्षा (अध्यापक) सेिा ननयमािल
१९८१ के प्रािधानों द्िारा शाभसर् होर्ी हैं,
जिसके ननयम २७ में यह प्रािधान है कक भशक्षक
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
183
को अपने विद्यालय में िहाां िे ननयुक्र् हैं
अननिाया रूप से भशक्षर् काया करना होर्ा,
इसभलए यािीर्र् द्िारा ए.आर.पी. के रूप में
अपने कायाकाल के र्ीन िर्ा पूरे करने के बाद
िी ए.आर.पी. के भलए कफर से आिेदन करने की
अनुमनर् देने के भलए ककया र्या कोई िी
अनुरोध ननयम २७, १९८१ ननयमािल का
उललांघन होर्ा, क्योंकक उन्हें स्ियां को उन
विद्यालयों से, िहाां उन्हें अध्यापन के भलए
ननयुक्र् ककया र्या था, दूर रखने की अनुमनर्
नह ां द िा सकर्ी है, इसभलए राज्य सरकार
द्िारा शासनादेश ददनाांककर् १०.१०.२०२४ में िो
प्रनर्बांध लर्ाया र्या है, िह ननयम २७, १९८१
ननयमािल के र्हर् उजललणखर् कर्ाव्यों के
उद्देश्य को प्राप्र् करने और भशक्षर् काया की
र्ुर्ित्ता बनाए रखने के भलए है, र्ाकक एक
भशक्षक को बहुर् लांबे समय र्क अपने मूल
भशक्षर् काया से दूर न रखा िा सके।

१४. याचिकाकर्ााओां ि प्रनर्िाद र्र्ों
के विद्िान अचधिक्र्ाओां को सुना एिां परािल
का अध्ययन ककया।

१५. ए.आर.पी. के काया ि दानयत्ि पूिा
के प्रस्र्रों में िणर्ार् ककए र्ए है कक उनको एक
सहायक
पयािेक्षक
(सपोदिाि
सुपरवििन)
सुननजश्िर् करना और अचधर्म प्रनर्फल (लननिंर्
आउिकम) पर विद्यालयों के बच्िों (८ िर्ा)
र्क अचधर्म स्र्र आकलन कर उनसे ि उनके
भशक्षक/प्रधानाध्यापक से िार्ाा कर ऐसी काया
योिना बनिानी है जिससे उन बच्िों को उनकी
कभमयों का एहसास ददलाए बबना, उनके अचधर्म
में सुधार करना है। उसके भलए उनको 'प्रेरर्ा' ि
'द क्षा' एैप का प्रयोर् करके ननरांर्र समीक्षा
करना है। और विभिन्न शैक्षणर्क र्नर्विचधयों
एिां महत्िपूर्ा सांिेदनशील मुद्दों पर अन्य
भशक्षकों को िी सांिेदनशील बनाना है।

१६. उपरोक्र् कायो ि अन्य दानयत्िो के
स्र्र के अध्ययन से यह ननधााररर् ककया िा
सकर्ा है कक ए.आर.पी. एक समग्र भशक्षक
बनाने में अपना योर्दान देर्ा है। और िास्र्ि
में इसका सबसे अचधक लाि स्ियां उसको होर्ा
एिां िब िह िापस अपने मूल भशक्षा क्षेर में
िाएर्ा, र्ो अजिार् अनुिि ि ननपुर्र्ा, अपने ि
बच्िों के स्र्र को ऊपर उठाने एिां ननपुर् बनाने
के भलए करेर्ा। और यह 'ननपुर् िारर् भमशन'
का उद्देश्य िी है, जिससे भशक्षा की र्ुर्ित्ता
उच्ि हो, अथाार् अर्र एक भशक्षक ने ए.आर.पी.
का दानयत्ि पूर्ा रूप से ननिाया है र्ो िह एक
ननपुर् भशक्षक बनेर्ा जिसका सबसे अचधक लाि
उन छार-छाराओां को होर्ा िो सुकुमार उम्र (८
िर्ा र्क) में उन भशक्षकों से भशक्षा प्राप्र् करेंर्े।
१७. यह विददर् है कक ए.आर.पी.
योिना एक बहुर् लांबे समय की योिना नह ां है
और २०२६-२७ र्क या कुछ और िर्ों र्क रहेर्ी
और र्ब र्क यह आशा है कक कक्षा ३ र्क
बुननयाद
साक्षरर्ा
और
सांख्यात्मकर्ा
(एफ.एल.एन)
का
सािािौभमक
अचधग्रह
सुननजश्िर् हो िाएर्ा िैसा 'ननपुर् िारर्
भमशन' का उद्देश्य है।

१८. उपरोक्र् से यह िी विददर् है कक
उक्र् ए.आर.पी. के पद के दानयत्ि ननिार्े
समय, अजिार् हुए अनुििों का उपयोर् िह
भशक्षक र्ब िी करेर्ा िब िह िापस अपना
भशक्षर् काया अपने विद्यालय में करेर्ा। यह
अनुिि उसके ह दहर् में है और िृहद रूप से
छार-छाराओां के िी दहर् में है।
184 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
१९. शासनादेश ददनाांक ०२.०२.२०१९
द्िारा शासन ने पूिा में समग्र भशक्षा अभियान
के अांर्र्ार् स्थावपर् न्याय पांिायर् सांसाधन
केंरों एिां ब्लाक सांसाधन केंरों का पुनर्ाठन करने
का ननर्ाय ककया, क्योंकक पूिा सांरिना से
अपेक्षक्षर् पररर्ाम प्राप्र् नह ां हुए थे, अर्ः
र्ुर्ित्ता बढाने के भलए नई प्रकिया का ियन
ककया र्था ए.आर.पी की अिधारर्ा कर और
यह िी ननधााररर् ककया कक ए.आर.पी का कोई
पद पृथक से सृिन नह ां ककया िाएर्ा िरन्
पूिा व्यिस्था में सह-समन्ियकों हेर्ु स्िीकृर्
पदों में ह समादहर् ककया िाएर्ा। एक
विस्र्ृर् पुनर्ाठन की व्यिस्था ि सांरिना का
ननमाार् ककया र्था ियन हेर्ु मानदण्ड
ननधााररर् ककये ि कायाकाल की अिचध को िी
ननधााररर्
ककया।
अथाार्
एक
युजक्र्युक्र्
नीनर्र्र् ननर्ाय भलया।

२०. सिी याचिकाकर्ााओां ने अपने
ए.आर.पी. का दानयत्ि का ननिाहन अपने ननधााररर्
कायाकाल ३ िर्ा से अचधक, सफलर्ापूिाक ककया
है। उनके कायाकाल के सांदिा में कोई भशकायर्
परािल पर उपलब्ध नह ां है। याचिकाकर्ाा ने
कुछ ररपोिा परािल पर प्रस्र्ुर् कर है कक वपछले
कुछ िर्ों में इस व्यिस्था के कारर् छार-छाराओां
के भशक्षर् के स्र्र में सुधार हुआ है अथाार्
नीनर्र्र् ननर्ाय के पररर्ाम अच्छे आए हैं।

२१. यह अवििाददर् है कक सिी
याचिकाकर्ााओां को िापस अपने-अपने विद्यालय
िाना है और भशक्षर् का काया करना है एिां
उनका ए.आर.पी. के कायाकाल के अनुिि से
उनके भशक्षर् के स्र्र में सुधार आएर्ा, जिससे
छार-छाराओां को लाि होर्ा।

२२. आक्षेवपर् प्रस्र्र द्िारा निीन ियन
प्रकिया से उन ए.आर.पी. को अनहा ककया र्या
है िो पूिा में ३ िर्ा र्क ए.आर.पी. रह िुके हैं।
नीनर्र्र् ननर्ाय का उद्देश्य यह बर्ाया र्या है
कक अर्र निीन भशक्षक ए.आर.पी. के पद पर
ियननर् होर्े हैं, र्ो िह िी कुछ िर्ा बाद िब
अपने विद्यालय िापस िाएांर्े र्ो उस अनुिि
का उपयोर् अपने भशक्षर् काया में करेंर्े और
कई महत्िपूर्ा कारक िैसे मेंिररांर्, सांिेदनशीलर्ा
ि भशक्षर् काया का उत्थान होर्ा और उनका
अपने विद्यालय के छार-छाराओां से सांपका िी
पुनः स्थावपर् होर्ा।

२३.
याचिकाकर्ााओां
के
विद्िान
अचधिक्र्ाओां का कथन है कक ियन प्रकिया एक
मुक्र् प्रकिया है जिसमें कोई िी भशक्षक अर्र
अहार्ा रखर्ा है, िार्ीदार बन सकर्ा है और
ियननर् हो सकर्ा है। याचिकाकर्ााओां को िी
ककसी सामान्य प्रनर्योर्ी की र्रह ह ियन
प्रकिया में सजम्मभलर् होने का अिसर देना
िादहए और क्योंकक उनके पूिा ए.आर.पी.
कायाकाल का कोई महत्ि नह ां ददया िा रहा है,
इसभलए उनकी िार्ीदार से ककसी िी अन्य
प्रनर्योर्ी को ककसी प्रकार की प्रनर्कूलर्ा का
सामना नह ां करना होर्ा। यह उद्देश्य कक, पूिा
ए.आर.पी. को पूर्ार्या निीन ियन प्रकिया से
अलर् करके नए ए.आर.पी का ियन पूर्ा रूप
से नये भशक्षकों से ह होना िादहए, एक
युजक्र्युक्र् ननर्ाय नह ां हो सकर्ा। यह कारर्
की िर्ामान ए.आर.पी. िापस अपने विद्यालय
िाकर अपने ए.आर.पी के अनुिि का उपयोर्
करके अपने विद्यालय में बच्िों से सांपका कफर
स्थावपर् कर भशक्षर् का स्र्र बढायें, वििेद का
युजक्र्युक्र् कारर् नह ां हो सकर्ा है।
3 All. Dilip Kumar Singh Rajpoot & Ors. Vs. State of U.P. & Ors.
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२४. याचिकाकर्ााओां का यह र्का कक
उनको ियन से अनहा करना िारर्ीय सांविधान
के अनुच्छेद १६ (लोक ननयोिन के विर्य में
अिसर की समानर्ा) का उललांघन है, एक
बलह न र्का है, क्योंकक ए.आर.पी. की ियन
प्रकिया ककसी अचधननयम या ननयमािल के
अांर्र्ार् ननधााररर् नह ां की र्ई है, और न ह
इसमें सिी भशक्षक िार्ीदार हो सकर्े हैं, क्योकक
यह माध्यभमक/पूिा माध्यभमक विद्यालयों के
भशक्षकों के भलए ह है। और न ह यह प्रकिया
लोक ननयोिन के अांर्र्ार् आर्ी है। परांर्ु इस
कथन को अस्िीकृर् नह ां ककया िा सकर्ा कक
ककसी िी प्रकृनर् की ियन प्रकिया में मनमाने
कारक नह ां हो सकर्े हैं।

२५.
प्रनर्िाददयों
के
विद्िान
अचधिक्र्ाओां नें, याचिकाकर्ााओां को अनहा
ननधााररर् करने का उद्देश्य उजललणखर् ककया
कक ऐसे ए.आर.पी. िो ३ िर्ा का कायाकाल पूर्ा
कर िुके हैं उनको एक ननजश्िर् अिचध मानर्े
हुए यह ननधााररर् ककया र्या है कक अब उनकी
उपयोचर्र्ा अपने-अपने विद्यालयों में िापस
िाकर िहाां के भशक्षाचथायों को अपने इस पद पर
अजिार् अनुिि का लाि देकर उनके भशक्षा का
स्र्र उच्ि करना है ि नए भशक्षकों को
ए.आर.पी बनने का मौका देना है जिससे िह िी
अनुिि अजिार् कर िापस विद्यालय आकर,
भशक्षर् का स्र्र और उच्ि कर सकें।

२६. िहाां र्क नीनर्र्र् ननर्ायों में
न्यायालय द्िारा हस्र्क्षेप करने की सीमा का
प्रश्न है, इस न्यायालय द्िारा श्रद्धा यादव एवं
६ अन्य प्रनि उत्तर प्रदेि राज्य एवं १०
अन्य;२०२४:ए.एच.सी.:४०८५ के िाद में पाररर्
ननर्ाय के प्रस्र्र १९ ि २० को ननम्न
उजललणखर् करना समीिीन रहेर्ा।

 "१९. मा० उच्चिम न्यायालय के एक
िवीि नििय जो देवेि िमाय प्रनि भारि संघ व
अन्याः २०२३ एस.सी.सी. ऑिलाइि एस.सी.
९८५, के प्रकरि में पाररि क्रकया र्गया है, में पुिाः
यह प्रनिपाददि क्रकया क्रकाः-
 " ७३. हमारे मक्स्िष्क में निक्श्चि
रूप से कोई संदेह िहीं है, क्रक साधारििाः राज्य
के िीनिर्गि निियों में संवैधानिक न्यायालयों
द्वारा उसके पुिाः निरीक्षि अधधकारो के अंिर्गयि
हस्िाक्षेप िहीं क्रकया जा सकिा है। इसी के साथ
अर्गर िीनिर्गि नििय स्वयं में ही ववधध के
ववरूद्ध और वो मिमािा व िकयहीि हो िो पुिाः
निरीक्षि के अधधकार का उपयोर्ग करिा ही
चादहये।"

२०. मा० उचिम न्यायालय द्वारा
एक अन्य प्रकरि सत्यदेव बार्गुर प्रनि राजस्थाि
िासि व अन्य (२०२२) ५ एस. सी.सी. ३२४, के
प्रकरि में पूवय मे पाररि कृष्िन्ि कतकिाथ
प्रनि केरल राज्याः (१९९७) ९ एस.सी.सी. ४९५ व
िेर शसंह प्रनि भारि संघाः (१९९५) ६ एस.सी.सी.
५१५ के निियों का संदभयलेिे हुए यह नििीि
क्रकया क्रकाः-

"१५.
यह
अनिसामान्य
है
क्रक
न्यायालय िीनिर्गि मामलो में हस्िक्षेप करिे में
मन्द रहेंर्गे. जब िक क्रक िीनि स्पष्ट रूप से
पक्षपािी और मिमािी ि स्थावपि हो जाये। यह
न्यायालय राज्य की िीनिर्गि नििय में
हस्िक्षेप िहीं करेर्गा.