# Gulab Chauhan v. State of U.P

- **Citation:** (2025) 7 ILRA 888
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-07-01
- **Case number:** Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/S 482 BNSS No. 4679 of 2025
- **Bench:** Dr. Gautam Chowdhary
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/gulab-chauhan-v-state-of-u-p-53668
- **Pages:** 3

## Headnote

G.A.

पवचारणीय मुद्दा
क्या िारा 108 िारतीय न्याय सिंदहता के तहत ऐसे
अभियुक्त को अधग्रम िमानत का सिंरक्षण दिया िा
सकता है, जिसके विरुद्ि गिंिीर अपराि का आरोप तो है
परिंतु विश्िसनीय साक्ष्य अनुपजस्थत हैं और उसके
विरुद्ि अिी तक कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं अपनाई
गई है तथा िह िािंच में सहयोग का आश्िासन िेता है|

हेडनोट्स
भारतीय न्याय सिंहहता, 2023 - धारा 108 - आवेदक के
पवरुद्ध धारा 108 भारतीय न्याय सिंहहता के तहत
असभयोग ििंजीकृत ककया गया - आवेदक ने आशिंका
व्यक्त की कक उसे इस प्रकरण में द्वेषवश फिंसाया गया है
और गगरफ्तारी की सिंभावना मात्र है - उसने कहा कक
उसके पवरुद्ध कोई प्रत्यक्ष या पवश्वसनीय साक्ष्य
उिलब्ध नहीिं है, कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं अिनाई गई
हैं तथा वह जािंच एजेंसी और न्यायालय के प्रनत िूणा
सहयोग करने को तैयार है - राज्य की ओर से आिपत्त
जताई गई कक अिराध गिंभीर प्रकृनत का है और आवेदक
को अगिम जमानत नहीिं दी जानी चाहहए। (E-13)

धाररत ककया गया
ितगमान प्रकरण में अधग्रम िमानत सिंबिंिी स्थावपत
भसद्िािंतों, आरोपों की प्रकृतत, आिेिक की िूभमका तथा
मामले के समस्त तथ्यों और पररजस्थततयों पर विचार
करते हुए, गुण-िोर्ष पर मत व्यक्त ककए बबना, आिेिन
स्िीकार ककया िाता है - इसके अलािा आिेिक की
धगरफ्तारी की जस्थतत में, ₹50,000/- के व्यजक्तगत बिंि
पत्र एििं समान राभश के िो प्रततिू प्रस्तुत करने पर
(पुभलस ररपोर्ग िाखखल होने तक), उसे कुछ अन्य शतों के
साथ अधग्रम िमानत पर ररहा ककया गया | [पैरा 6, 7]

उद्धृत केस लॉ
भसद्िराम सतभलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्र राज्य,
(2011) 1 एससीसी 694 - सिंदसभात |

अगधननयमों की सूची
िारतीय न्याय सिंदहता, 2023

कीवडा की सूची
अधग्रम िमानत; िारा 108 बी.एन.एस; धगरफ्तारी की
आशिंका; द्िेर्षिश फिंसाए िाने का आरोप; विश्िसनीय
साक्ष्य का अिाि; न्यातयक वििेक; िािंच में सहयोग का
आश्िासन; िमानत की शतें; आपराधिक कायगिाही;
आपराधिक इततहास नहीिं हैं; कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं
अपनाई गई हैं |

वाद उद्भूत
आरिंभिक क्षेत्राधिकार से उत्पन्न मामला: बी.एन.एस.एस
की िारा 482 के अिंतगगत आपराधिक विविि अधग्रम
िमानत आिेिन सिंख्या - 4679 /2025)
मु.अ.सिं 92 सन् 2025, थाना नगरा, जिला बभलया में हुए
तनणगय और आिेश से उद्िूत

िक्षकारों की ओर से उिस्स्थनत
आिेिक की ओर से अधििक्ता:
आकाश चौहान, िरत िूर्षण िूबे, िािनी भसिंह
7 All. Gulab Chauhan Vs. State of U.P.
889
विरोिी पक्षकार की ओर से अधििक्ता:
शासकीय अधििक्ता

## Text

888 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
liberty to pro ceed to can cel her
bail.
----------
(2025) 7 ILRA 888
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 01.07.2025

BEFORE

THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/S
482 BNSS No. 4679 of 2025

Gulab Chauhan ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Opposite Party

Counsel for the Applicant:
Aakash Chauhan, Bharat Bhushan Dubey,
Bhavni Singh

Counsel for the Opposite Party:
G.A.

पवचारणीय मुद्दा
क्या िारा 108 िारतीय न्याय सिंदहता के तहत ऐसे
अभियुक्त को अधग्रम िमानत का सिंरक्षण दिया िा
सकता है, जिसके विरुद्ि गिंिीर अपराि का आरोप तो है
परिंतु विश्िसनीय साक्ष्य अनुपजस्थत हैं और उसके
विरुद्ि अिी तक कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं अपनाई
गई है तथा िह िािंच में सहयोग का आश्िासन िेता है|

हेडनोट्स
भारतीय न्याय सिंहहता, 2023 - धारा 108 - आवेदक के
पवरुद्ध धारा 108 भारतीय न्याय सिंहहता के तहत
असभयोग ििंजीकृत ककया गया - आवेदक ने आशिंका
व्यक्त की कक उसे इस प्रकरण में द्वेषवश फिंसाया गया है
और गगरफ्तारी की सिंभावना मात्र है - उसने कहा कक
उसके पवरुद्ध कोई प्रत्यक्ष या पवश्वसनीय साक्ष्य
उिलब्ध नहीिं है, कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं अिनाई गई
हैं तथा वह जािंच एजेंसी और न्यायालय के प्रनत िूणा
सहयोग करने को तैयार है - राज्य की ओर से आिपत्त
जताई गई कक अिराध गिंभीर प्रकृनत का है और आवेदक
को अगिम जमानत नहीिं दी जानी चाहहए। (E-13)

धाररत ककया गया
ितगमान प्रकरण में अधग्रम िमानत सिंबिंिी स्थावपत
भसद्िािंतों, आरोपों की प्रकृतत, आिेिक की िूभमका तथा
मामले के समस्त तथ्यों और पररजस्थततयों पर विचार
करते हुए, गुण-िोर्ष पर मत व्यक्त ककए बबना, आिेिन
स्िीकार ककया िाता है - इसके अलािा आिेिक की
धगरफ्तारी की जस्थतत में, ₹50,000/- के व्यजक्तगत बिंि
पत्र एििं समान राभश के िो प्रततिू प्रस्तुत करने पर
(पुभलस ररपोर्ग िाखखल होने तक), उसे कुछ अन्य शतों के
साथ अधग्रम िमानत पर ररहा ककया गया | [पैरा 6, 7]

उद्धृत केस लॉ
भसद्िराम सतभलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्र राज्य,
(2011) 1 एससीसी 694 - सिंदसभात |

अगधननयमों की सूची
िारतीय न्याय सिंदहता, 2023

कीवडा की सूची
अधग्रम िमानत; िारा 108 बी.एन.एस; धगरफ्तारी की
आशिंका; द्िेर्षिश फिंसाए िाने का आरोप; विश्िसनीय
साक्ष्य का अिाि; न्यातयक वििेक; िािंच में सहयोग का
आश्िासन; िमानत की शतें; आपराधिक कायगिाही;
आपराधिक इततहास नहीिं हैं; कोई बाध्यकारी प्रकिया नहीिं
अपनाई गई हैं |

वाद उद्भूत
आरिंभिक क्षेत्राधिकार से उत्पन्न मामला: बी.एन.एस.एस
की िारा 482 के अिंतगगत आपराधिक विविि अधग्रम
िमानत आिेिन सिंख्या - 4679 /2025)
मु.अ.सिं 92 सन् 2025, थाना नगरा, जिला बभलया में हुए
तनणगय और आिेश से उद्िूत

िक्षकारों की ओर से उिस्स्थनत
आिेिक की ओर से अधििक्ता:
आकाश चौहान, िरत िूर्षण िूबे, िािनी भसिंह
7 All. Gulab Chauhan Vs. State of U.P.
889
विरोिी पक्षकार की ओर से अधििक्ता:
शासकीय अधििक्ता
(Delivered by Hon'ble Dr. Gautam
Chowdhary, J.)

1.
ितगमान
िाजण्डक
प्रकीणग
अधग्रम
िमानत प्राथगना पत्र, आिेिक गुलाब चौहान की
ओर से मु०अ०सिं० 92 सन् 2025, अन्तगगत िारा
108 बी०एन०एस०, थाना नगरा, जिला बभलया में
अधग्रम िमानत की मााँग करते हुए इस प्राथगना
के साथ िायर ककया गया है कक धगरफ्तारी की
जस्थतत में आिेिक को िमानत पर ररहा ककया
िा सके।

2. आिेिक के विद्िान अधििक्ता
िािनी भसिंह एििं विद्िान अपर शासकीय
अधििक्ता को सुना तथा पत्रािली का पररशीलन
ककया।

3. आिेिक के विद्िान अधििक्ता ने
तकग प्रस्तुत ककया कक आिेिक तनिोर्ष है, उसे
उपरोक्त िाराओिं में द्िेर्षिश तिंग ि परेशान
करने की तनयत से आभलप्त ककया गया है, उसे
आशिंका है कक उसे उपरोक्त िखणगत मामले में
धगरफ्तार ककया िा सकता है िबकक उसके
विरूद्ि कोई विश्िसनीय साक्ष्य नहीिं है। उनका
यह िी कथन है कक आिेिक का कोई
आपराधिक इततहास नहीिं रहा है और आिेिक के
विरूद्ि अिी तक कोई िी बाध्यकारी प्रकिया
नहीिं अपनाई गयी है। पुनः उनका कथन है कक
आिेिक विचारण और िॉच के िौरान सहयोग
करने का िचन िेता है कक िह िॉच एिेंसी या
न्यायालय द्िारा अपेक्षक्षत समय पर उपजस्थत
रहेगा एििं आिेिक की ओर से यह आश्िासन
दिया गया है कक िह कानून की प्रकिया में
सहयोग करने के भलए तैयार है और िब िी
आिश्यकता होगी िह ईमानिारी से न्यायालय
के समक्ष खुि को उपलब्ि कराएगा और उन
सिी शतों को स्िीकार करने के भलए िी तैयार
है िो

4. विद्िान अपर शासकीय अधििक्ता
द्िारा अभियुक्त के अधग्रम िमानत के विरोि
में यह तकग प्रस्तुत ककया गया कक आिेिक
द्िारा काररत अपराि गिंिीर प्रकृतत का है।
मामले के तथ्य एििं पररजस्थततयों को दृजष्र्गत
रखते हुये अभियुक्त को अधग्रम िमानत पर
ररहा ककये िाने का पयागप्त अिार नहीिं है। अतः
अभियुक्त को अधग्रम िमानत पर न छो़िा
िाये।

5. यह कहा िा सकता है कक
Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of
Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में
माननीय
उच्बतम
न्यायालय
द्िारा
यह
अििाररत ककया गया है कक अधग्रम िमानत
याधचका पर न्याय तनणगयन करते समय
न्यायालय को आरोपों की प्रकृतत और गिंिीरता,
आरोपी की न्यातयक प्रकिया से िागने की
सिंिािना पर विचार करना चादहए और यह कक
न्यायालय को आरोपी के विरूद्ि उपलब्ि सिी
सामग्री का साििानी से मूल्यािंकन करना चादहए
और आरोपी की िास्तविक िूभमका पर िी
विचार करना चादहए।

6. ितगमान मामले में अधग्रम िमानत
सिंबिंिी विधि के स्थावपत भसद्िािंतों को ध्यान में
रखते
हुए
और
पक्षकारों
के
विद्िान
अधििक्ताओिं के कथनों आरोपों की प्रकृतत,
आिेिक की िूभमका और मामले के सिी तथ्यों
890 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
एििं पररजस्थततयों को ध्यान में रखते हुए, मामले
के गुण-िोर्ष पर बबना कोई विचार व्यक्त ककए
अधग्रम िमानत की प्राथगना स्िीकार ककए िाने
योग्य है। तद्नुसार अधग्रम िमानत आिेिन पत्र
स्िीकार ककया िाता है।

7. उपरोक्त मुकिमा अपराि सिंख्या में
सजम्मभलत आिेिक की धगरफ्तारी की िशा में,
उसे सिंबिंधित थाने के िारसािक अधिकारी की
सिंतुजष्र् पर रू० 50,000/- का व्यजक्तगत बिंि पत्र
एििं उसी िनराभश के िो प्रततिू प्रस्तुत करने
पर, (पुभलस आरोप पत्र िाखखल ककए िाने तक)
तनम्न शतों के अिीन अधग्रम िमानत पर ररहा
ककया िाएगा :-

1- आिेिक, यदि आिश्यक होगा तो
पुभलस अधिकारी द्िारा िॉच हेतु अपेक्षक्षत समय
पर उपजस्थत रहेगा।

2- आिेिक मामले के तथ्यों से
पररधचत ककसी व्यजक्त या पुभलस अधिकाररयों
को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई िमकी, िािा
या प्रलोिन नहीिं िेगा जिससे कक िह ऐसे तथ्य
को न्यायालय के समक्ष या ककसी पुभलस
अधिकारी के समक्ष प्रकर् न करने पर मान
िाए।

3- आिेिक वििेचना एििं विचारण के
िौरान सहयोग करेंगे और िमानत की स्ितिंत्रता
का िुरूपयोग नहीिं करेगा।

उपरोक्त शतों के उल्लिंघन की जस्थतत में
वििेचनाधिकारी / अभियोिन पक्ष को, आिेिक
को प्रित्त अधग्रम िमानत के तनरस्तीकरण हेतु
उपयुक्त आिेिन प्रस्तुत करने की स्ितिंत्रता
होगा।

8. तद्नुसार यह अधग्रम िमानत आिेिन
पत्र उपरोक्त दर्प्पखणयों के साथ अिंततम रूप से
तनस्ताररत ककया िाता है।
----------
(2025) 7 ILRA 890
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.07.2025

BEFORE

THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/S
438 CR.P.C. No. 9797 of 2024

Mohd. Israr Khan ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Ankit Srivastava, Ch. Dil Nisar

Counsel for the Opposite Party:
G.A., Ram Kumar Dubey

पवचारणीय मुद्दा
क्या आिेिक को िारा 379, 419, 420, 406 िा.ििं.सिं.
के अिंतगगत ििग आपराधिक प्रकरण में, िब उसके
विरुद्ि कोई ठोस साक्ष्य, बलपूिगक प्रकिया नहीिं अपनाई
गई है अथिा आपराधिक इततहास नहीिं है और उसने िााँच
में सहयोग करने का आश्िासन दिया है, तो उसे अधग्रम
िमानत का लाि दिया िा सकता है या नहीिं |

हेडनोट्स
दण्ड सिंहहता, 1860 - धारा 379, 419, 420, 406 -
असभयोग में आरोि है कक आवेदक ने धोखाधडी एविं
पवश्वासघात करते हुए धनरासश का अनुगचत उियोग
ककया - आवेदक की ओर से यह तका हदया गया कक वह
ननदोष है, उसके पवरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीिं है और
बलिूवाक प्रकिया नहीिं अिनाई गई है और इस मामले में
अिंतररम आदेश प्राप्त है तथा उसका कोई आिरागधक
इनतहास नहीिं है - यह भी प्रनतिाहदत ककया गया कक वह