# Harish Chand & Ors. (In Jail) v. State of U.P. Opp. Party

- **Citation:** (2020) 12 ILRA 734
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2018-07-31
- **Case number:** Criminal Appeal No. 781 of 1983
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/harish-chand-ors-in-jail-v-state-of-u-p-opp-party-45519
- **Pages:** 13

## Headnote

A.G.A.

(अ) फौजदारी कानून - दोष सिद्ध के खिलाफ - भारतीय
दंड िंसिता, 1860 - धारा 307 - ित्या करने का प्रयत्न,
धारा 34 - िामान्य आशय को अग्रिर करने में कई
व्यखियों द्वारा सकए गए कायय - आरोपी व्यखियों का
अपराध करने का िामान्य आशय था या निीं इिका
सनष्कषय , पररखथथसतयों की िमग्रता को ध्यान में रिकर िी
सकया जा िकता िै - अपराध की गंभीरता को भी िी
सिसभन्न कारकों की किौटी पर िुसनसित सकया जाना
चासिए । ( पैरा - 22,26)

वतयमान आपराजधक अपील तीनोां अपीलाथी/अपराधी ,
अपीलाथी सां० 1(मृत्यु) को धारा 307 िा० दां० सां० व
अपीलाथी सां० 2 (िीवांत) व अपीलाथी सां० 3 (मृत्यु) को
धारा 307/ 34 िा० दां० सां० के अांतगयत दोर् जसद्ध घोजर्त
जकया था - सिी अपीलाथी को 4 वर्य का सश्रम कारावास
- व्यजथत होकर आपराजधक अपील इस न्यायालय में
दाक्तखल की ।

जनणय : तीनोां अजियुक्तोां ने पीजड़त की हत्या का प्रयत्न
काररत करने के सामान्य आशय के अग्रसर में कायय
जकया, अतः धारा 307 अपजठत धारा 34 िारतीय दांड्
सांजहता के अांतगयत दोर् जसद्ध जकए गए हैं , जिसमें कोई
जवजधक त्रुजट नहीां है । िीवांत अपीलाथी पर प्रबोजधत करने
का आरोप है ।उसने कोई आपराजधक बल का प्रयोग नहीां
जकया और न ही उसका कोई जघनौना चररत्र प्रकट होता है
। अन्य दो अपीलाथी, जिसमें से एक पर गोली चलाने का
आरोप जसद्ध हुआ था, जक मृत्यु हो चुकी है। अपीलाथी का
कोई और आपराजधक इजतहास नहीां बताया गया है ।
इसके अजतररक्त जक अपराध 1981 में गजठत हुआ था
वतयमान में अपीलाथी की उम्र करीब 60 वर्य को िी
मद्देनिर रखना चाजहए । दांड् की सिा की अवजध िो 4
वर्य है उसको अब तक व्यतीत सिा की अवजध में
पररवजतयत जकया िाए वह प्रजतकर के रूप में एक लाख
पीजड़ता साक्षी को जदलवाया िाए तथा अपीलाथी सांख्या 2
की सिा िो अब तक करीब 36 जदन तक व्यतीत की है ,
की अवजध में पररवजतयत की िाती है । (पैरा - 22,26,27)

आपराजधक अपील आांजशक रूप से स्वीकायय। (E-7)

उि्धृत मामल िं की ूची :-

## Text

734 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
25.07.2016. The impugned order, therefore,
proceeds on a reckoning of quota reserved
for Seasonal Collection Amins far short of
the prescribed 85%. The impugned order,
therefore, is seriously flawed on this score
as well.

15. In this view of the matter, this
Court is of opinion that the impugned order
passed by the District Magistrate, Deoria
dated 08.10.2016, cannot be sustained and
is liable to be quashed.

16. In the result, this writ petition
succeeds and is allowed. The impugned
order dated 08.10.2016 passed by the
District Magistrate, Deoria is hereby
quashed. It is ordered that the petitioner
shall be treated to be regularized on the
post of Collection Amin, under the 3rd
Amendment Rules, 2001, which shall be
done notwithstanding his superannuation
on 31.07.2018. Moreover, the petitioner
will also be entitled to his post-retiral
benefits in accordance with the Rules of
1974.

17. There shall be no order as to costs.
----------
(2020)12ILR A734
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 01.12.2020

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM SHAMSHERY, J.

Criminal Appeal No. 781 of 1983

Harish Chand & Ors. ...Appellants (In Jail)
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Appellants:
Sri Sanjiv Rohit, Sri Abhai Saxena, Sri Sandeep
Kumar Srivastava, Sri D.P.S. Chauhan
Counsel for the Opp. Party:
A.G.A.

(अ) फौजदारी कानून - दोष सिद्ध के खिलाफ - भारतीय
दंड िंसिता, 1860 - धारा 307 - ित्या करने का प्रयत्न,
धारा 34 - िामान्य आशय को अग्रिर करने में कई
व्यखियों द्वारा सकए गए कायय - आरोपी व्यखियों का
अपराध करने का िामान्य आशय था या निीं इिका
सनष्कषय , पररखथथसतयों की िमग्रता को ध्यान में रिकर िी
सकया जा िकता िै - अपराध की गंभीरता को भी िी
सिसभन्न कारकों की किौटी पर िुसनसित सकया जाना
चासिए । ( पैरा - 22,26)

वतयमान आपराजधक अपील तीनोां अपीलाथी/अपराधी ,
अपीलाथी सां० 1(मृत्यु) को धारा 307 िा० दां० सां० व
अपीलाथी सां० 2 (िीवांत) व अपीलाथी सां० 3 (मृत्यु) को
धारा 307/ 34 िा० दां० सां० के अांतगयत दोर् जसद्ध घोजर्त
जकया था - सिी अपीलाथी को 4 वर्य का सश्रम कारावास
- व्यजथत होकर आपराजधक अपील इस न्यायालय में
दाक्तखल की ।

जनणय : तीनोां अजियुक्तोां ने पीजड़त की हत्या का प्रयत्न
काररत करने के सामान्य आशय के अग्रसर में कायय
जकया, अतः धारा 307 अपजठत धारा 34 िारतीय दांड्
सांजहता के अांतगयत दोर् जसद्ध जकए गए हैं , जिसमें कोई
जवजधक त्रुजट नहीां है । िीवांत अपीलाथी पर प्रबोजधत करने
का आरोप है ।उसने कोई आपराजधक बल का प्रयोग नहीां
जकया और न ही उसका कोई जघनौना चररत्र प्रकट होता है
। अन्य दो अपीलाथी, जिसमें से एक पर गोली चलाने का
आरोप जसद्ध हुआ था, जक मृत्यु हो चुकी है। अपीलाथी का
कोई और आपराजधक इजतहास नहीां बताया गया है ।
इसके अजतररक्त जक अपराध 1981 में गजठत हुआ था
वतयमान में अपीलाथी की उम्र करीब 60 वर्य को िी
मद्देनिर रखना चाजहए । दांड् की सिा की अवजध िो 4
वर्य है उसको अब तक व्यतीत सिा की अवजध में
पररवजतयत जकया िाए वह प्रजतकर के रूप में एक लाख
पीजड़ता साक्षी को जदलवाया िाए तथा अपीलाथी सांख्या 2
की सिा िो अब तक करीब 36 जदन तक व्यतीत की है ,
की अवजध में पररवजतयत की िाती है । (पैरा - 22,26,27)

आपराजधक अपील आांजशक रूप से स्वीकायय। (E-7)

उि्धृत मामल िं की ूची :-

1. मनु दत्त एवां एक अन्य बनाम उत्तर प्रदेश शासन
(2012)4 एि िी िी 79

2. िीरेंद्र बनाम िररयाणा राज्य, (2020) 2 एििीिी 700)
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
735
3. मध्यप्रदेश शािन बनाम ऊधम और अन्य : (2019)
10 एिईिी 300

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

आक्षेसपत आिेश

1. वतयमान आपराजधक अपील तीनो
अपीलाथी/अपराधी
द्वारा
अजतररक्त
सत्र
न्यायालय (र्िम), मुरादाबाद द्वारा सत्र पररक्षण
सांख्या 440 सन् 1981 में पाररत आदेश जदनाांक
24.03.1983 जिससे द्वारा अपीलाथी सां0 1
(हररशचन्द्र) को धारा 307 िा0दां0सां0 व
अपीलाथी सां0 2 (लाल जसांह) व अपीलाथी सां0 3
(ताराचन्द्र) को धारा 307/34 िा0दां0सां0 के
अन्तगयत दोर् जसद्ध घोजर्त जकया था तथा सिी
अपीलााजथयोां को 4 वर्य का सश्रम कारावास की
सिा सुनाई थी से व्यजथत होकर इस न्यायालय में
दाक्तखल की थी।

अपील की वततमान स्थिसत

2. वतयमान अपील के जवचाराधीन होने के
दौरान अपीलाथी सां0 1, हररशचन्द्र व अपीलाथी
सां0 2, तारा चन्द की मृत्यु हो गयी तथा इस
न्यायालय के आदेश जदनाांक 17.07.2020 के
द्वारा वतयमान अपील इन दोनोां अपीलाथी के
सापेक्ष उपशजमत की िा चुकी है तथा वतयमान में
यह अपील केवल अपीलाथी सां0 2, लाल जसांह के
सापेक्ष िीवांत रह िाती है।

तथ्यात्मक प्रारुप

3. अजियोिन साक्षी सां0 2 (ियराम) ने
थाना हायत, सम्भल, मुरादाबाद में एक जलक्तखत
तहरीर जदनाांक 28.02.1981, को 5:20 सुबह दी
जक:

" हररश्चनद पुत्र कन्हया िो मेरे ही
ग्राम का बदमाश जकशम का आदीमी है। और
िो चोरी वगेरा करता है। जिसको मेरे ताउ श्री
जवहारी पुत्र रुपराम ने चोरी वेगरा को मने जकया
था। जिसके कारण हररश्चनद व लाल जसांह व तारा
चन्द्र पुत्र कन्हया ग्राम मूसापुर रजनजिस मानने
लगे थे। इसी विह से आि कररब दो बिे के
हररश्चनद तमांनचा हाथ में जलये व ताराचन्द लाल
जसांह लाठीया जलये हुए मेरे ताउ को पुरानी
रनजिस रखते हुए िान से मारने के जलये जवहारी
की झोपड़ी पर आये झोपड़ी पर रोिाना जक
तरह लालटेन िल रही थी जिनको देखकर
जवहारी ने शोर मचाया जिसके शोर पर रामशह
पुत्र रुपराम नन्हे पुत्र गुलिारी व मैं अपने अपने
मकानोां से लाजठयाां वेटरी िलाते शोर माचाते हुए
और जक लाल जसांह ने कहा जक मार साले को
जफर क्या करेंगे जिस पर हररश्चन्द्र मेरे ताउ
जवहारी को िान से मारने की जनयत से तमनचा
से गोली मारी िो जवहारी के बाये ओर कनपटी
पर गोली लगी है गोली मार कर अपने घर को
िागे तथा? हम लोगोां ने जपछा जकया तो हररश्चनद
ने तमन्चे में गोली िर कर कहा अगर कोई आगे
बढा तो गोली मार दूांगा हम ड्र की विह से रुक
गये जवहारी की हालत खराब है। रपट जलखकर
कानुनी कारवाई जक िावे।"

जिसको प्रथम सूचना ररपोटय (जचक
सांख्या 80) के रुप में अजियुक्त,हररश्चन्द्र, लाल
जसांह और तारा चन्द के जवरुद्ध धारा 307
िा0दां0सां0 के अन्तगयत अांजकत की गई।

4. घायल जबहारी लाल को जिला
अस्पताल, मुरादाबाद में िती कराया गया िहाूँ
उसका मेजड्कल पररक्षण ड्ा0 आर0पी0
िारद्वाि द्वारा जकया गया व उसके शरीर पर
जनम्न चोटे पायी गयी।

"1. Gun shot wound of entry 6 cm x
3.5 cm x depth not proved just on the left
eye. Margins are inverted. Blackening and
charing present around the wound in the
area of face left side forehead around the
wound. Gun powder is also present.

2. Wounds of existence four in
number in the area of 8cm x 6cm on the left
side of head close to the ear. 3 wounds are
736 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
anterior to the left ear and one at the lower
end and ear. Margins are inverted. Fresh
bleeding present.

--Injuries
caused
by
some
firearm.

--Fresh in duration.

--Kept
under
observation,
Advised X-Ray."

एक जदन के उपरान्त घायल जबहारी
लाल को सफदरगांि अस्पताल जदल्ली में ले
िाया गया तथा 17.04.1981 को इलाि के बाद
उसे छुट्टी दे दी गयी।

5. अन्वेर्ण अजधकारी ने प्रथम सूचना
ररपोटय दिय होने के बाद अन्वेर्ण प्रारम्भ जकया
तथा घटना थथल का जनररक्षण जकया व वहाूँ से
खाट जिस पर घायल लेटा था, लालटेन, सादी
जमट्टी बैटरी 2सेल िब्त करी व फदय कब्जा
बनाया। अन्वेर्ण अजधकारी ने घटना थथल का
नक्शा निरी िी बनाया।

6. अन्वेर्ण अजधकारी ने जववेचना के
उपरान्त तीनोां अजियुक्तोां के क्तखलाफ आरोप पत्र
धारा 307 िा0दां0सां0 के अन्तगयत दाक्तखल जकया।

7. आरोप पत्र पर अपराध का सांज्ञान लेने
के बाद अजतररक्त सत्र न्यायाधीश, मुरादाबाद ने
अजियुक्त हररश्चन्द्र के जवरुद्ध धारा 307
िा0दां0सां0 व अजियुक्त लाल जसांह व ताराचन्द्र
के जवरुद्ध धारा 307/34 दां0प्र0सां0 के अन्तगयत
आरोप, जदनाांक 25.10.1982को जवचररत जकये।

8. अजियोिन ने अजियुक्तोां के जवरुद्ध
आरोप जसद्ध करने के जलये कुल 4 अजियोिन
साक्षीयोां को पेश जकया जिसमें अजियोिन साक्षी
सां0 1 जबहारी, अजियोिन साक्षी सां0 2 ियराम,
अजियोिन साक्षी सां0 3 चन्द्र जकरन तथा
अजियोिन साक्षी सां0 4 नन्हे शाजमल थे।

9. अजियोिन साक्षी 1, जबहारी, घटना में
घायल हुआ था। उसने अपने साक्ष्य के मुख्य
परीक्षा में कहा जक, "तीनोां अजियुक्त सगे िाई हैं
और उसकी जबरादरी से है। उम्र में बड़ा होने के
कारण उसने अजियुक्तोां से चोरी चकोरी का
काम छोड़ने व मेहनत मिदूरी करके खाओ
ऐसा कहा था। इस बात से अजियुक्त उससे
रांजिश रखते थे व देख लेने की धमकी िी देते थे।
साक्षी ने आगे कहा जक करीब 2 साल की बात है
रात के करीब 2 बिे का वक्त था। मैं अपने घर
में अपनी खाट पर बैठा हुआ था वहाूँ पर लालटेन
(प्रदशय I) िल रही थी जिस की रोशनी में मैंने
देखा जक मुक्तिमान हररश्चनद, लाल जसांह व तारा
चन्द वहाूँ पर आये। इनमें से हररश्चनद के पास
तमन्चा था और बाकी दोनोां के पास लाजठयाूँ थी।
तो उस समय मुक्तिम लाल जसांह ने हरर चन्द से
कहा और तारा चन्द ने िी कहा जक देखते क्या
हो साले को गोली मार दो यह अपने को बहुत
कुछ समझता है। इस पर हररश्चनद ने मेरे गोली
मार दी िो मेरी बाई कनपटी पर लगी और मेरे
चोट आई। मैंने शोर मचाया था तो घटना के
समय ियराम, राम सहाय व नन्हे लाजठयाां लेकर
टाचय िलाते हुए वहाूँ आये। इनके आने पर और
उनके द्वारा ललकारने पर मुक्तिमान पहाड़ी की
तरफ को िाग गये। मेरा ड्ाक्टरी मुआयना
अस्पताल में हुआ था और जफर यहाूँ से मुझे
देहली इलाि के जलये िेि जदया गया था। वहाूँ
मेरा इलाि हुआ था। मेरी बाई आांख जबल्कुल
खत्म हो गई है और मुझे बाएां कान से िी
जबल्कुल सुनाई नहीां देता। मेरा ितीिा ियराम
मुझे थाने ले गया था िहाूँ उसने मुकदमा कायम
कराया था।"

10. अजियोिन साक्षी सां0- 2 ने मुख्य
परीक्षा में कहा "करीब 2 साल की बात है। मैं
अपने गाूँव में जबहारी के घेर के पहाड़ में मक्तन्दर
के पास आलुओां के ढेर के पास आलूओां की
रखवाली के जलये सो रहा था। रात को करीब 2
बिे मैंने अपने ताऊ जबहारी का शोर सुना तो मैं
िाग कर उनकी झोपड़ी के पास गया। वहाूँ पर
उस समय नन्हे व राम सहाय िी पहुूँच गये थे।
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
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हम लोग लाजठयाूँ लेकर बैटरी िलाते हुए वहाूँ
पहुूँचे थे। वहाूँ पर छप्पर में लालटेन िल रही थी
उसकी काफी रोशनी थी। िब हम वहाूँ पहुूँचे तो
हमने देखा जक मुक्तिमान हररश्चनद, लाल जसांह व
तारा चन्द वहाूँ खड़े थे। उस समय हररश्चनद के
पास तमन्चा था और बाकी दोनोां मुक्तिमान के
पास लाजठयाूँ थी। यह तीनोां मुक्तिमान आि
अदालत में हाजिर है। उस समय मुक्तिम लाल
जसांह ने हररश्चनद से कहा जक मार दे गोली देखता
क्या है। इस पर हररश्चनद ने जबहारी की चारपाई
के पास िा कर गोली मार दी िो जबहारी की बाई
कनपटी पर लगी है। हमने मुक्तिमान को
ललकारा तो यह पहाड़ी की तरफ को िागे। हम
लोगोां ने इनका पीछा करके इन्हे पकड़ने की
कोजशश की तो हररश्चनद ने तमन्चे में दोबारा
गोली िर कर कहा जक अगर आगे बढोगे तो
तुम्हे िी इसी तरह गोली मार दूांगा। हम लोग ड्र
की विह से रुक गये। हमने तीनोां मुक्तिमान को
लालटेन व टाचो की रोशनी में अच्छी तरह से
पहचान जलया था।

मुक्तिमान के चले िाने के बाद मैंने
इस घटना की तहरीरी ररपोटय प्रदशय क 1 बोल
कर जलखाई थी। िो कुछ मैंने बोला था वही
मोहन लाल ने जलखा था पढवा कर सुनने के बाद
मैंने इस पर अपने हस्ताक्षर शनाख्त जकये।
इसके बाद मैं अपने ताऊ को चुटैल अवथथा में
लेकर थाना हयात नगर पहुूँचा था। और वहाूँ
पहुांच कर मैंने उपरोक्त तहरीरी ररपोटय दीवान
िी को दे दी थी। दारोगा िी ने मेरी बैटरी देखी
थी और जफर वह मेरी ही सुपुदयगी में दे दी थी।"

11. अजियोिन साक्षी सां0 3 ने मुख्य
परीक्षा में कहा जक, "जद0 28.02.1981 को मैं
थाना हयात नगर में हेड् मोहररयर के पद पर
तैनात था। उस जदन 5:20 AM पर वादी ियराम
ने तहरीरी ररपोटय (इक्ज क 1) मुझे लाकर दी थी
जिसके आधार पर मैंने जचक ररपोटय (इक्ज क 2)
तैय्यार की थी िो मेरे हाथ की जलखी व दस्तखती
है। इसका इन्द्राि िी0ड्ी0 में रपट नां0 4 पर
मुकदमा कायमी का मैंने उसी समय जकया था।
असल िी0ड्ी0 मेरे सामने है उसकी सही नकल
िो जक काबयन कापी है और मूल के साथ उसी
प्रोसेस में तय्यार की गई थी दाक्तखल करता हूँ।
असल मेरे हाथ की जलखी व दस्तखती है। यह
प्रदशय क 3 है। इसके बाद मैंने मिरुब को
हररराम जत्रपाठी सी 280 के साथ ड्ाक्टरी
मुआयने के जलये अस्पताल िेि जदया था।" इस
स्तर पर अजियोिन द्वारा इस साक्षी को पक्षद्रोही
घोजर्त कर जदया गया।

12. सुरिीत जसांह एस0आई0 अन्वेर्ण
अजधकारी Court Witness सी0ड्ब्लू0-1 के रुप
में अपना साक्ष्य जदया। उसने कहा जक, "जद0
28.02.1981 को मैं थाना हयात नगर में
एस0आई0 के पद पर तैनात था। इसी जदन 5:00
ए0एम0 पर ियराम एस/ओ गांगाराम ने एक
तहरीरी रपट इक्ज क 1 थाने पर दी। जिसके
आधार पर धारा 307 आई0पी0सी0 के अन्तगयत
मुकदमा कायम जकया गया। यह रपट हररश्चनद
वगैरह मुक्तिमान के क्तखलाफ थी। मुकदमा
दस्तअन्दािी कायम हुआ जिसकी जववेचना मेरे
सुपुदय की गई। वादी के साथ मिरुब जबहारी िी
थाने पर आया हुआ था। सबसे पहले मैंने मिरुब
जबहारी का ब्यान तहरीर जकया और मिरुब की
जचट्ठी मिदरुबी देकर सी0 हररराम के साथ
अस्पताल रवाना कर जदया था। जफर एच0एम0
चन्द्र जकरण का ब्यान जलया। और उसके बाद
घटना थथल के जलये रवाना हो गये। वहाूँ पर मैंने
वादी ियराम का बयान तहरीर जलया, जफर
गवाहान राम सहाय, नन्हे, ओम प्रकाश व
मकबूल के ब्यान तहरीर जकये।

जफर मुआयना घटना थथल जकया।
घटना थथल पर से नान बाबर चारपाई, मक्का
की पत्ती व फूस सादे व खून आलूदा कब्जे में
जलये। दोनोां की अलग 2 फदय बनाई। गवाहान
की गवाही कराई। फदे मेरे हाथ की जलखी व
738 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
दस्तखती है जिन पर इक्ज क 5 व इक्ज क 6
ड्ाला गया। इसके बाद मैंने एक अदद लालटैन
चालू हालत में ली जिसकी रोशनी में वाका
देखना बताया गया था। लालटेन सूरि माकाय थी
और इस पर लटकाने के जलये तार लगा था। यह
लालटेन अपने कब्जे में लेकर सुपुदयगी में दे दी
जिसकी फदय लेने कब्जा व सुपुदयगी मौके पर
तय्यार की गवाहान की गवाही कराई गई। यह
फदय मेरे हाथ की जलखी व दस्तखती है। इस पर
इक्ज क 7 ड्ाला गया। एक टाचय वादी ियराम
एस/ओ गांगाराम के कब्जे से बरामद की अपने
कब्जे में लेकर ियराम की सुपुदयगी में दे दी गई।
यह फदय बाबत लेने कब्जे टाचय व सुपुदयगीनामा
मौके पर तय्यार की गई। मेरे हाथ की जलखी व
दस्तखती है। गवाहान की गवाही कराई थी। इस
पर इक्ज क 8 ड्ाला गया। यह टाचय चालू हालत
में थी। एक और टाचय गवाह राम सहाय के कब्जे
से ली गई। मौके पर देखी गई चालू हालत में थी
व बाद लेने कब्जे राम सहाय की सुपुदयगी में दे
दी गई। जिसकी फदय बाबत लेने कब्जे टाचय व
सुपुदयगी नामा मेरे हाथ का जलखा व दस्तखती है।
मौके पर तय्यार शुदा है मौके पर गवाहान की
गवाही कराई गई। यह इक्ज क 9 है। एक अन्य
टाचय गवाह नन्हे पुत्र गुलिारी के कब्जे से ली
गई। मौके पर देखी गई। चालू हालत में ली गई।
मौके पर देखी गई। चालू हालत में पाई गई। व
कब्जे में लेने के बाद नन्हे की सुपुदयगी में दे दी
गई। जिसकी फदय बाबत लेने कब्जे टाचय व देने
सुपुदयगी में मौके पर तय्यार की गई। गवाहान की
गवाही कराई गई िो मेरी जलखी व दस्तखती है।
इस पर इक्ज क 10 ड्ाला गया।

घटना थथल का जनरीक्षण जकया तथा
नक्शा मौका बनाया गया िो मेरे हाथ का जलखा
व दस्तखती है। खसरा दिय है वजलहाि मौका
सही है। इस पर इक्ज क 11 ड्ाला गया। वाद
तय्यार करने नक्शा निरी गवाहान फदय के ब्यान
जलये गये और लोगोां से तहकीकात की गई।

जद0
01.03.1981
को
ड्ाक्टरी
मुआयना प्राप्त हुआ। ता 03.03.1981 को
मुक्तिमान को तालाश जकया नहीां जमले।
14.04.1981 को मालूम हुआ जक मुक्तिमान लाल
जसांह व तारा चन्द जगरफ्तार करके िेल िेि जदये
गये है। जद0 13.05.1981 को मुक्तिम हररश्चन्द
का रोबकार हाजिर अदालत प्राप्त हुआ। उसी
तारीख को थाने से रवाना होकर न्यायालय
श्रीमान एम0एम0 4 मुरादाबाद के आदेशानुसार
मुक्तिमान के िेल में िा कर ब्यान जलये। बाद
तफ्तीश चािय शीट प्रेजर्त की िो मेरे हाथ की
जलखी व दस्तखती है। इस पर इक्ज क 12 ड्ाला
गया।"

13. अजियोिन साक्ष्य के उपरान्त
अजियुक्तोां के ब्यान धारा 313 दां0प्र0सां0 के
अन्तगयत
अजिजलक्तखत
जकये
गये
जिसमें
अजियोिन के साक्ष्योां को गलत बताया।
अजियुक्त हररश्चन्द ने प्रश्न सां0 9, 10, 11के जनम्न
उत्तर जदये:

"प्रश्न-9- आप के क्तखलाफ मुकदमा
क्योां चला?

उत्तर- वादी जबहारी के लाख में एक
बार आग लगी थी तब उसने मेरे क्तखलाफ ररपोटय
जलखायी थी। इसी रांजिश से यह मुकदमा झूठा
चलाया।

प्रश्न-10- क्या आपको कुछ और
कहना है?

उत्तर- कुछ नहीां।

प्रश्न-11-
आपने
सरिीत
जसांह
एस0आई0 सी0ड्ब्लू 1 बयान सुना आपको क्या
कहना है?

उत्तर- मुद्दई के असर से गवाही दी।"

14. अजियुक्त तारा चन्द ने प्रश्न सां 9, 10,
11 के जनम्न उत्तर जदये

"प्रश्न-9- आप के क्तखलाफ मुकदमा
क्योां चला?

उत्तर- जबहारी के लाख में आग लगी
थी तिी से यह रांजिश मानता क्योां जक उसका
खयाल था जक हररश्चन्द ने आग लगाई थी।
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
739

प्रश्न-10- क्या आपको कुछ और
कहना है?

उत्तर- कुछ नहीां।

प्रश्न-11- आपने सी0ड्ब्लू 1 सरिीत
जसांह एस0आई0 का बयान सुना। आपको क्या
कहना है?

उत्तर- मुद्दई के असर से गवाही दी।"

15. अजियुक्त लाल जसांह ने प्रश्न सां0 9, 10,
11 के जनम्न उत्तर जदये

"प्रश्न-9- आप के क्तखलाफ मुकदमा
क्योां चला?

उत्तर- एक बार जबहारी के लाख में
आग लग गयी थी तो उसने मेरे िाई हररश्चन्द के
नाम ररपोटय जलखायी थी तिी से रांजिश मानता
है।

प्रश्न-10- क्या आपको कुछ और
कहना है?

उत्तर- कुछ नहीां।

प्रश्न-11- आपने सी0ड्ब्लू 1 सरिीत
जसांह एस0आई0 का बयान सुना। आपको क्या
कहना है?

उत्तर- वादी की असर से गवाही दी।"

16. अजियुक्तोां ने बचाव पक्ष के साक्षी
गोपाल की गवाही कराई जिसने मुख्य परीक्षा में
कहा जक, "जबहारी चुटैल, ियराम वादी व
मुक्तिमा मेरे ही गाूँव के रहने वाले है। मुक्तिमान
के सगे बड़े िाई का नाम खुशहाली है और
इनके जपता िी का नाम कन्हई है और िय
जकशन इनके दादा थे। खुशहाली कई साल से
बीमार रहता है।

मैंने अब से करीब 3 साल पहले
अपना दादालाही मकान ररयासत धोबी के हाथ
बेचा था। िब बेचा था तो वह खाली प्लाट था।
अब इसमें करीब साल पहले ररयासत में अपनी
आबादी कर ली। हम तीन िाई हैं। मेरा नाम
गोपाली, छोटे िाई का नाम नन्हे और तीसरे का
नाम होरी लाल है। हम तीनो ने दादालाही मकान
बेच कर अलग 2 तीन मकान बना जलये। जबहारी
को िब गोली लगी तो इस बात को करीब 2
साल हो गये। जबहारी के गोली उसके घेर में लगी
थी। इस घेर के बराबर में हमारा दादालाही
मकान था जिस हम गोली लगने से एक साल
पहले बेच चुके थे। घटना वाले जदनोां इसकी
मकाजनयत टूट चुकी थी और सब खाली थी।

मेरा िाई नन्हे जबहारी के यहाूँ काम
करता है और किी 2 कहीां और िी कर लेता है।
घटना वाले जदनोां हम जिस मकान में रहते थे
उसी में अब िी रहते हैं। यह मकान जबहारी के
घेर से करीब 100 कदम पच्छम को है और
ियराम का मकान मेरे मकान से करीब 50
कदम और पच्छम को है नन्हे घटना के समय
जिस मकान में रहता था उसमें अब िी रहता है।
नन्हे का मकान जबहारी के घेर से 200 कदम
पहाड़ की तरफ है। घटना वाली रात मैं अपने
घर पर सो रहा था। फायर से मेरी आांख खुली तो
मैं बैठा हुआ जक उसके बाद रोवा पीटी पड़ गई
तो मैं जबहारी के घर पर पहुूँचा। मेरे जबहारी से
बड़े अच्छे ताल्लुकात है। िब मैं वहाूँ पहुूँचा तो
वहाूँ जवजसयोां आदमी थे। ियराम मेरे पीछे 2
पहुूँचा। नन्हे मुझसे कुछ देर बाद पहुूँचा। मैंने
जबहारी से पूछा तो जबहारी ने बताया जक िाने
कौन गोली मार गया। मैंने वहाूँ पर कोई लालटैन
नहीां देखी। घटना के जदनोां जबहारी की अतीक से
दुश्मनी चल रही थी। जबहारी की लड़की रामवती
है वह बोला दुआवर के लाल जसांह को ब्याही थी
अब वह लड़की शहिादी सराय में है। जबहारी ने
रामवती को लाल जसांह की मरिी के क्तखलाफ
उसके यहाूँ से हटा कर दूसरी िगह बैठा जदया।
लाल जसांह व जबहारी के बीच दुश्मनी है। करीब 8
साल हुए जबहारी के लाख में आग लगी थी।
जबहारी ने इसकी ररपोटय हररश्चन्द मुक्तिम के
क्तखलाफ लगाई थी। इस केस में हररश्चन्द छूट
गया। ियराम िब जबहारी को थाने लेकर गया
था तो मैं उसके साथ गया था।
740 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

हररश्चन्द वगैरह मुक्तिमान से मेरा
झगड़ ा हो चुका है। इन्होने मेरे क्तखलाफ रपट िी
जलखाई थी और दरखास्त िी दी थी।"

17. जवचरण न्यायालय ने सिी तथ्य,
पररक्तथथजतयोां, पत्रावली व साक्ष्योां की गवाही को
ध्यान में रखते हुए यह पाया जक अजियोिन,
अजियुक्तोां के जवरुद्ध आरोपोां को यथोजचत सांदेह
के परे साजबत करने में सफल रहा। अवर
न्यायालय के जनष्कर्य जनम्न है-

17.01 घटना के पीछे का कारण
चोजटल जपजड़ता ने अजियुक्तोां को चोरी न करने व
अच्छा काम करके खाने पीने के जलए कह कर
उनकी बेइज्जती करना था िो वतयमान अपराध
करने के जलए पयायप्त कारण था।

17.02 बचाव पक्ष यह जसद्ध करने में
असफल रहा जक अजियुक्त के दुश्मन और लोग
थे तथा घटना उन्होने ही काररत करी थी।

17.03 अजियुक्त व पीजड़त एक ही
गाूँव के रहने वाले थे। साक्ष्य में यह आया है जक
जबहारी िहाूँ लेटा था वहाूँ लालटेन थी। मेजड्कल
ररपोटय से यह साजबत होता है जक गोली 3-4 फीट
की दूरी से चलाई गयी थी अतः जबहारी द्वारा
अपने गाूँव के जनवाजसयोां से 3-4 फीट की दूरी पर
आवाि से िी पहचाना िा सकता है।

17.04 यह सांजदग्ध है जक अ0सां0 िय
जसांह ने घटना को शुरुआत से अन्त तक देखा हो
क्योांजक वो घटना थथल से 25-30 कदम दूर पर
सो रहा था और चोजटल जबहारी के साक्ष्य के
अनुसार पूरी घटना बहुत कम समय में घजटत हो
गयी परन्तु इस साक्ष्य िी उपक्तथथजत को नकारा
नहीां िा सकता और उसने अवश्य रुप से
अजियुक्तोां को घटना के बाद िागते हुए देखा
था।

17.05 अ0सां0 नन्हे अजियोिन द्वारा
पक्षद्रोही घोजर्त जकया गया है उसने केवल इतना
कहा जक वो गोली चलने की आवाि सुनकर
घटना थथल पर आया िहाूँ तीन लोग जबहारी पर
गोली चला रहे थे, परन्तु उसने जकसी का चेहरा
नहीां देखा।

17.06 जपजड़ता जबहारी का मौक्तखक
साक्ष्य, जचजकत्सा साक्ष्य को पररपुि करता हैं तथा
यह साक्ष्य िी अजियुक्तोां को धारा 307
िा0दां0सां0 के अन्तगयत दोर् जसद्ध करने के जलए
पयायप्त है।

17.07 बचाव पक्ष के साक्षी गोपाली ने
िी अजियोिन पक्ष को उस स्तर तक समथयन
जकया है जक घटना थथल पर गोली चली थी परन्तु
उसका यह कहना जक चोजटल जबहारी गोली
चलाने वाले की पहचान नहीां पाया था,जवश्वसनीय
नहीां है।

17.08 पत्रावली पर उपक्तथथत साक्ष्य से
यह जसद्ध होता है जक अजियुक्तोां ने जबहारी पर
िानलेवा हमला जकया जिसमें उसकी एक आांख
की रोशनी चली गयी।

18. यह अपील वतयमान में केवल
अपीलाथी सां0 2, लाल जसांह के सापेक्ष ही िीवांत
रह िाती है। उसके जवद्वान अजधवक्ता ने जनम्न
दलीले दी है:

18.01 अजियोिन पक्ष की कहानी
अगर पूणय रुप से सत्य मान िी ली िाये तो िीवांत
अपीलाथी पर केवल दूसरे दो अजियुक्तोां के साथ
घटनाथथल पर िाने का आरोप है। गोली चलाने
का आरोप केवल एक अपीलाथी (हररशचन्द्र)
पर था जिसकी मृत्यु हो चुकी है। अपीलाथी को
केवल धारा 34 िा0दां0सां0 की मदद से दोर्
जसद्ध जकया गया है।

18.02 घटना का समय िाड़े की रात
के 2 बिे का बताया गया है। यह िी कहा गया
जक घटना बहुत कम समय में काररत की गयी थी
अतः इस बात की बहुत सांिावना है जक चोजटल,
तीनोां अजियुक्तोां को न पहचान पाया हो या
केवल गोली चलाने वाले को ही पहचान पाया हो
तथा िीवांत अपीलाथी को केवल गोली चलाने
वाले का िाई होने के नाते इस मामले में झूठा
फांसाया गया हो।
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
741

18.03 अपीलाथी पर केवल उकसाने
का आरोप लगाया गया है। अतः उसका 307/34
िा0दां0सां0के अन्तगयत दोर् जसद्ध करना गलत
है।

18.04 अजियोिन का पक्ष केवल
चोजटल जबहारी की गवाही पर आधाररत है। अन्य
दो गवाहोां के घटनाथथल पर उपक्तथथती या उनके
द्वारा पूरी घटना को देखना सांजदग्ध है। अतः झूठे
फांसाने की सांिावना से इांकार नहीां जकया िा
सकता है।

18.05 अजियोिन ने कोई िी साक्ष्य
मेजड्कल ररपोटय के पक्ष में पररजक्षत नहीां कराया
है। अतः यह जसद्ध नहीां होता है जक गोली के
कारण ही चोजटल की आांख की रोशनी चली गई
हो।

18.06 बचाव पक्ष की ओर की गवाही
को अवर न्यायालय ने सही रुप से जवश्लेर्ण नहीां
जकया है। झूांठे फांसाने के कारण िो साक्ष्य में
आये हैं, स्वयां में यह जसद्ध करने के जलये पयायप्त
है जक अपीलाथी को झूठा फांसाया गया है तथा
वास्तव में घटना चोजटल के जकसी अन्य दुश्मन ने
काररत जक थी।

18.07 वैकक्तल्पक रुप में अजधवक्ता से
जनवेदन जकया जक घटना वर्य 1981 की है,
अपीलाथी वतयमान में करीब 60 वर्य का है तथा
उसका कोई और आपराजधक इजतहास नहीां है।
अतः उसकी सिा अब तक की व्यतीत सिा की
अवजध में पररवजतयत कर जदया िाये व चोजटल को
उजचत प्रजतकर िी जदलावाया िाये।

19. उ0प्र0 शासन की ओर से जवद्वान
शासकीय अजधवक्ता, आई0पी0 श्रीवास्तव ने
अपीलाथी की बहस का जवरोध जकया और
जनवेदन जकया जक-

19.01 चोजटल जबहारी के साक्ष्य से यह
पूणयतः जसद्ध होता है जक िीवांत अपीलाथी व दो
अन्य ने सामान्य आशय से चोजटल की मृत्यु
काररत करने के आशय से उनमें से एक ने गोली
चला कर चोजटल को गांिीर रुप से घायल जकया
जिससे उसकी एक आांख की रोशनी चली गयी।
अपीलाथी पर उस सामान्य आशय के अग्रसर
गोली चलाने के जलए उकसाने का आरोप है अतः
उसका धारा 307 सपजठत 34 िा0दां0सां0 के
अन्तगयत दोर् जसद्ध होना, न्याय सांगत है।

19.02 झूठे फांसाने की बचाव पक्ष का
तकय बलहीन है तथा बचाव पक्ष कोई िी ऐसा
साक्ष्य नहीां ला पाया है, जिसको झूठे फांसाने के
तकय को माना िा सके।

19.03 वैकक्तल्पक जनवेदन दांड्ादेश के
जसद्धाांत के जवपररत है, क्योां जक अिी िी 4 वर्य
के कारावास का दांड्ादेश कम ही है।

20. उियपक्ष को सुना व पत्रावली का
ध्यान पूवयक पररशीलन जकया।

सवश्लेषण:-

21. न्दर्त :- घायल ाक्षी की गवाही व
झूठा फँ ाने का तकत :-

21.01 घायल साक्षी की गवाही को
अपराजधक जवजध शास्त्र में एक जवशेर् दिाय जदया
गया है, जिसका कारण है जक गवाह को चोट
लगना, अपराध के थथान पर उसकी उपक्तथथजत
की
एक
अन्तजनयजहत
प्रत्यािूजत
है।
यह
स्वािाजवक नहीां है जक कोई घायल साक्षी अपने
वास्तजवक हमलावर को जबना सिा जदलवाये
छोड़कर जकसी और को झूठे आरोप मे फूँसाये।
अत: घायल साक्षी के बयान पर तब तक िरोसा
जकया िाना चाजहए, िब तक जक उसमें
जवरोधािासोां और जवसांगजतयोां इतनी प्रमुख न होां,
जक उनके आधार पर उसके साक्ष्य को खाररि
करने के जलए मिबूत आधार बन िायें।(देखें :-
मनु ित्त एविं एक अन्य बनाम उत्तर प्रिेश
शा न (2012)4 ए ी ी 79)।

21.02 वतयमान प्रकरण में अजियोिन
साक्षी सांख्या 1, जबहारी एक घायल साक्षी है,
जिसको अग्नेस्त्र से ऑांख पर चोट लगी थी।
742 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
घटना का रात 2 बिे होना बताया गया है तथा
खाट िहाां यह साक्षी लेटा था, वहाूँ समीप ही
लालटेन िल रही थी, जिसका चालू हालत में
फ़दय क़ब्जा बनाया गया है। साक्षी ने कहा है जक
घटना के पहले वो जपशाब करके आया था और
खाट पर बैठा था तब ही तीनोां अजियुक्त वहाूँ
आये और घटना काररत की। साक्षी ने तीनोां
अजियुक्त द्वारा सामान्य आशय के अग्रसर में
जकये गये अपराजधक कायय को िी जवशेर् रुप से
बताया है। अजियुक्त ताराचांद (अब मृतक) व
लालजसह (िीवन्त अपीलाथी) िो लाठी ले कर
आये थे ने अजियुक्त हररश्चांद्र (अब मृतक)
जिसके पास तमन्चा था, एक साथ घटनाथथल पर
पहुूँच कर कहा "देखते क्या हो साले को गोली
मार दो यह अपने को बहुत कुछ समझता है"।
इस पर अजियुक्त हररश्चांद्र ने घायल साक्षी को 34 फ़ीट की दूरी से गोली मार दी, िो उसके बायीां
आूँख के पास लगी, जिससे उसकी ऑांख की
रोशनी चली गयी। जचजकत्सकीय प्रजतवेदन िी
इस चोट का समथयन करता है।

21.03 इस साक्षी ने प्रजतपररक्षा में िी
तीनोां अजियुक्त द्वारा सामान्य आशय के अग्रसर में
जकये गये अपराजधक कायय के बारे में अपना साक्ष्य
क्तथथर व सांगत रखा है। प्रजतपररक्षा मुख्य रुप से
अजियुक्त को झूठा फ़साने के सम्बि में रही परन्तु
केवल इस कारण से जक प्रजतपरीक्षा में यह कहा गया
है जक अजियुक्तोां के जवरुद्ध कोई चोरी की सूचना
या मुक़दमा नहीां दिय हुआ है इसजलए अजियुक्तोां
के पास कोई घटना काररत करने का कोई उद्देश्य
नहीां था या साक्षी की दुश्मनी अतीक व लाल जसांह
नाम के व्यक्तक्त से िमश पूवय में मुक़दमे व बेटी के
जववाह के कारण थी, जिसको साक्षी ने ग़लत िी नहीां
बताया है, यह घटना उनमें से जकसी ने काररत करी
होगी ऐसा नहीां माना िा सकता है। िैसा पूवय में
कहा है, घायल साक्षी सही अजियुक्त को छोड़कर
जकसी बेक़सूर को झूठा फूँसायेगा ऐसा स्वािाजवक
नहीां है तथा बचाव पक्ष न तो अजियोिन पक्ष को
सांजधघ्य बना पाया न ही इस साक्षी के बयान में कोई
जवरोधािास जदखा पाया।

21.04 िीवन्त अपीलाथी के जवद्वान
अजधवक्ता का कथन है जक घटना सदी की रात
क़रीब 2 बिे की बतायी गयी है िो बहुत ही कम
समय में घजटत हो गयी थी, ऐसी पररक्तथथजतयोां में
केवल लालटेन की रोशनी में,घायल साक्षी द्वारा
तीनोां अजियुक्तोां को पहचान लेना व उनका
जवजनजदयि कृत िी देख लेना, सम्भव नहीां है तथा
घायल साक्षी का घटना से थोड़ा से पहले जपशाब
करके आना व घटना के समय खाट पर बैठा
होना िी असामान्य है तथा िीवन्त अपीलाथी को
केवल मुख्य अजियुक्त का िाई है इस नाते से
झूठा फूँसाया गया है तथा उसने सामान्य आशय
के अग्रसर में कोई िी अपराजधक कायय नहीां
जकया है।

21.05 मैंने घायल साक्षी का सम्पूणय
साक्ष्य का गहनता से पररशीलन जकया व बारीकी
से िाूँच की है। सम्पूणय साक्ष्य में साक्षी सांगत रहा
और अजियोिन पक्ष का सम्पूणय रुप से समथयन
जकया है। लालटेन की रोशनी में इस साक्षी ने
उस पर बहुत क़रीब से हमला करने वाले, िो
उसके गाूँव के रहने वाले एक ही पररवार से थे,
स्वािाजवक रुप से पहचान जलया था तथा तीनोां
अजियुक्तोां का व्यक्तक्तगत कृत को स्पि रूप से
बताना, िी अस्वािाजवक नहीां है, अपीलाथी इस
साक्षी के साक्ष्य में कोई िी ऐसा जवरोधािास
जदखाने में पूणयतः असफल रहा जिसकी प्रवृजत
वस्तुगत हो।

21.06 अब यह जवचार करना है जक
क्या झूठा फूँसाने का कोई मामला बनता है?
सवयप्रथम यह जवचार करना है जक क्या वतयमान
प्रकरण में प्रथम सूचना ररपोटय तुरांत दिय करायी
गयी है या इसमें देरी हुई है, जिसका उपयोग
अजियुक्तोां को झूठा फूँसाने में जकया गया है।
अजियोिन के अनुसार घटना रात में क़रीब दो
बिे घटी थी तथा प्रथम सूचना ररपोटय ियराम
(अजियोिन साक्षी 2), िो घटनाथथल पर मौिूद
था, ने सुबह 5.20 पर थाने पर तीनोां नाजमत
अजियुक्तोां के ज़ि
लाफ़ दिय करवाई िो
घटनाथथल सेजकमी दूर था। उसके बाद घायल
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
743
जबहारी को अस्पताल पहुूँचाया गया। इससे यह
स्पि है जक प्रथम सूचना ररपोटय तुरांत दिय कराई
गयी थी तथा इन पररक्तथथजतयोां में क़रीब 3 घटें का
समय लगना अस्वािाजवक नहीां है और इस
समय का उपयोग झूठा मामला बनाने में नहीां
हुआ है।

21.07 िीवन्त अपीलाथी के जवद्वान
अजधवक्ता ने पुरज़ोर बहस की है जक घायल
साक्षी के और िी कई दुश्मन थे, जिनमें से जकसी
ने रात के अांधेरे में उस पर हमला जकया, जिसको
वो पहचान न पाया और अजियुक्तोां को केवल
सांदेह के आधार पर नाजमत कर जदया।
अजियुक्तोां की घायल साक्षी से कोई दुश्मनी नहीां
थी क्योांजक उनपर किी िी चोरी का कोई
मामला नहीां रहा, इसजलये घायल साक्षी के
उनको समझाने से उनकी कोई रांजिश नहीां होती
है। िबजक घायल साक्षी ने इस तथ्य से इांकार
नहीां जकया है जक अतीक व लाल जसांह से उसकी
जवजिन्न कारणोां से रांजिश थी। परन्तु इस साक्षी
की प्रजतपररक्षा में ऐसा कोई तथ्य नहीां आया है,
जिससे यह तकय माना िा सके बक्तल्क साक्षी
अपने बयान पर अजड्ग रहा और घटना का स्पि
जववरण जदया। ऐसा कोई िी तथ्य/साक्ष्य पत्रावली
पर नहीां आया िो झूठा फूँसाने के तकय को थोड़ा
िी बल दे सके, अत: मैं इस जनष्कर्य पर पहुूँचता
हूँ जक वतयमान प्रकरण में घायल साक्षी का साक्ष्य
जवश्वसनीय व िरोसेमांद है तथा झूठा फूँसाने का
तकय बलहीन होने के कारण जनरस्त जकये िाने
योग्य है, अत: जनरस्त जकया िाता है ।

22. िंिर्त:- ामान्य आशय, जीवन्त
अपीलािी का कृत व ििंडािेश :-

22.01 िीवन्त अपीलाथी के जवद्वान
अजधवक्ता ने वैकक्तल्पक रुप से जनवेदन जकया जक
वतयमान अपीलाथी को धारा 34 िा0दां0सां0 की
मदद से धारा 307 िा0दां0सां0 के अन्तगयत दोर्
जसद्ध जकया गया है तथा सामान्य आशय के
अग्रसर में आपराजधक कृत के कारण दूसरे
अजियुक्त जिसने गोली मारी थी के समान ही
दि जदया है, िबजक वतयमान अपीलाथी ने ना तो
कोई बल का उपयोग जकया है न ही कोई
अत्युक्तक्त ही करी है, केवल उसने अन्य दो सह
अजियुक्तोां के साथ घटना थथल पर िाकर गोली
चलाने को बोला था, अत: उसने सामान्य आशय
के अग्रसर कोई अपराजधक कायय नहीां जकया है
और न ही ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर है िो
घटना से पूवय जकसी सलाह मशजवरा के बारे में
बताता हो। अत: िीवन्त अपीलाथी को केवल
उसके द्वारा जकये गये अपराजधक कायय के जलए
सिा दी िाये तथा इस दृजिकोांण से चार वर्य की
सिा बहुत अजधक है तथा अपीलाथी द्वारा अब
तक सिा की व्यतीत अवजध िो करीब ३६ जदन
है में पररवजतयत कर दी िाये ।

22.02 धारा 34 िा0दां0सां0 में जनजहत
सांयुक्त दाजयत्व के जसद्धाांत को जकसी आपराजधक
कायय के काररत होने में लागू करने के जलए
अजियोिन पक्ष को यह जदखाना पड़ेगा जक
जवचाराधीन आपराजधक कायय सिी अजियुक्त
व्यक्तक्तयोां में से एक ने सिी के सामान्य आशय
को अग्रसर करने के जलए जकया था। सामान्य
आशय पूवय-योजित योिना के माध्यम से हो
सकता है, या यह घटना से ठीक पहले िी
योजित जकया िा सकता है। सामान आशय से
तात्पयय है एक योजित होकर कायय करना, िो पूवय
मन्त्रणा को दशायता है। उनके कृत्य और चररत्र
जिन्न हो सकते हैं, लेजकन वे सिी सामान्य आशय
से कायय करते हैं। सामान्य आशय है या नहीां,
प्रत्येक मामले के साजबत तथ्योां और पररक्तथथजतयोां
के पररणाम पर जनियर करता है। आरोपी
व्यक्तक्तयोां का अपराध करने का सामान्य आशय
था या नहीां, इसका जनष्कर्य, पररक्तथथजतयोां की
समग्रता को ध्यान में रख कर ही जकया िा
सकता है। (देखे वीरेंद्र बनाम हररयाणा राज्य,
(2020) 2 ए ी ी 700)

22.03 वतयमान प्रकरण में घायल
साक्षी व अन्य साक्षी के साक्ष्य से यह जवजदत है
जक तीनोां अपराधी एक साथ घटना थथल पर
744 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
आये थे। अपराधी ताराचांद (अब मृतक) व
लालजसह (िीवन्त अपीलाथी ) ने लाठी व
अपराधी हररश्चांद्र (अब मृतक) ने तमन्चा ले रखा
था। अपराधी ताराचांद (अब मृतक) व लालजसह
(िीवन्त अपीलाथी) ने घटनाथथल पर पहुूँचते ही
अपराधी हररश्चांद्र (अब मृतक) से घायल साक्षी
जबहारी को गोली मारने के जलए प्रबोजधत जकया,
जिसपर अपराधी हररश्चांद्र (अब मृतक) ने घायल
साक्षी जबहारी को बहुत नज़दीक से गोली मार दी
िो उसके ऑांख के पास लगी , जिससे उसकी
एक ऑांख की रोशनी चली गयी। उसके बाद
अन्य साक्षीयोां के घटना थथल पर पहुूँचनें पर
तीनोां अजियुक्त एक साथ िाग गये।उपरोक्त
जवजध उद्धरण को उपरोक्त तथ्यात्मक प्रारूप में
अगर लागू जकया िाये तो केवल एकमात्र जनष्कर्य
जनकालता है जक तीनोां अजियुक्तोां ने पीजड़त
जबहारी की हत्या का प्रयत्न काररत करने के
सामान्य आशय के अग्रसर में कायय जकया, अत:
धारा 307 सपजठत धारा 34 िा0दां0सां0 के
अन्तगयत दोर् जसद्ध जकये गये, जिसमें कोई
जवजधक त्रुजट नहीां है।

23. अन्त में यह जनधायररत करना है,की
वतयमान मामले के तथ्य व पररक्तथथजतयोां में, यह
ध्यान में रखते हुए जक घटना वर्य 1981 की है
तथा वतयमान में लालजसह (िीवन्त अपीलाथी) की
उम्र क़रीब 60 वर्य है तथा उसका और कोई
अपराजधक इजतहास नहीां है, क्या लालजसह
(िीवन्त अपीलाथी) जिसका कतय प्रबोजघत करना
था, उसका 4 वर्य का दांड्ादेश, उसके द्वारा अब
तक व्यतीत सिा िो करीब ३६ जदन है में
पररवजतयत जकया िा सकता और जपजड़त को क्या
उजचत प्रजतकर जदया िा सकता है?

24. उपरोक्त के जनधायरण के जलये
सवयप्रथम दांड्ादेश के जसद्धाांत क्या है ? इसका
जवश्लेर्ण करना आवश्यक हैैै।

25. िंिर्त:-ििंडािेश के स द्ािंतः-

25.01 िारतीय जवधायी ने दांड्ादेश के
सम्बांध में कोई नीजत जनधायररत नहीां करी है, परांतु
मासलमि समसत (2003) व माधव मेनन
 समसत (2008) ने दांड्ादेश नीजत जनधायररत करने
की आवश्यकता पर िोर जदया है व नीजत बनाने
के जलए जसफाररश िी की है।

25.02 दांड्ादेश के जसद्धाांत या
दांड्ादेश की नीजत क्या हो, उच्चतम न्यायालय
यह जवर्य पर जचांजतत रहा है और समय-समय
पर अपने जवजिन्न जवजधक उद्धरण के द्वारा इस
जवर्य पर स्पिता लाने का प्रयास िी जकया है
तथा अवर न्यायालय व उच्च न्यायालय द्वारा
दांड्ादेश पाररत करते समय लापरवाही होने से
रोकने के जलये सचेत िी जकया है।

25.03 उच्चतम न्यायालय की तीन
सदस्यीय पीठ द्वारा हाल में ही पाररत अपने
जनणय (मध्यप्रिेश शा न बनाम ऊधम और
अन्य : (2019) 10 १० ए ी ी 300) में एक
बार जफर से दांड्ादेश के जसद्धाांत पर प्रकाश
ड्ाला है और अजिजनधायररत जकया कीः-

"8. आरांि में, यह ध्यान रखना उजचत
है जक प्रत्याथीगण-अजियुक्तगणोां की अपीलोां को
आांजशक रूप से स्वीकृत करने और आलोच्य
आदेश को पाररत के जलए उच्च न्यायालय का
यह तकय जक यह सिा तक सीजमत है। उच्च
न्यायालय अपने आदेश में कहते है जक अपराध
की प्रकृजत को देखते हुए, यह तथ्य जक यह
प्रत्याथीगण का प्रथम अपराध है और उनके द्वारा
पहले से ही सिा की अवजध व्यतीत कर ली है
तब यह आलोच्य आदेश पाररत जकया िाता है।

9. इस स्तर पर, इस न्यायालय के
अजियुक्त 'X' बनाम महारािर राज्य (2009) 7
एस. सी. सी. 1, जिसमें हम में से दो सदस्य पीठ
के िाग थे, की जटप्पणी िारत में सिा के सांबांध
में प्राांसांजगक है-

"49. आपराजधक प्रजतबांधो का उजचत
आबांटन, िो जक ज्यादातर न्याजयक शाखा द्वारा
जदया िाता है। {जनकोला पैड्फील्ड, रॉड् मॉगयन
और माइक मैगुइयर "न्यायालय से बाहर, दृजि से
12 All. Harish Chand & Ors. Vs. State of U.P.
745
बाहर" आपराजधक प्रजतबांधोां और कोई न्याजयक
जनणय नही", ओक्सफोड्य, अपराध शास्त्र की
पुक्तस्तका (5 वाां, सांस्करण)}। जवचारण के अांत में
होने वाली यह प्रजिया अिी िी एक आपराजधक
न्याय प्रणाली की प्रिावकाररता पर बड्ा प्रिाव
ड्ालती है। यह थिासपत है सक जा एक
 ामासजक-कानूनी प्रसिया है सज में एक
न्यायाधीश तथ्यात्मक, पररस्थितय िं और
ओसचत्य पर सवचार करते हुए असर्युक्त के
सलए उसचत िण्ड क ढूिंढता है। इ तथ्य के
प्रकाश में यह जरूरी ह जाता है सक
सवधासयका ने न्यायाधीश िं क जा िेने के
सलए सववेक प्रिान सकया, सक इ का उपय ग
एक ैद्ािंसतक तरीक े करे। हमें यह
प्रोत्साजहत करने की िरूरत है जक सिा देने में
एक सख्त जनधायररत दि की सोच को माना नही
िा सकता है िैसा जक न्यायाधीश को पयायप्त
स्वजववेक की िरूरत होती है।

50. इस प्रकरण का परीक्षण करने से
पूवय, हमें सिा देने की प्रजिया में ताांजकयकता के
प्रिाव के प्रश्न को सांबोजधत करने की िरूरत है।
जवचारण न्यायालय की ताांजकयकता काररत जकये
गये अपराध की सिा के जलए सामान्य स्तर और
तथ्योां और पररक्तथथजतयोां के बीच की कड़ी के िैसे
कायय करती है। जवचारण न्यायालय को सिा देने
के जलए तकों को देने के जलए बाध्य है, प्रिमता
जै े सक नै सगतक न्याय का मूलर्ूत स द्ािंत
है सक न्यायकतात क सनणतय तक पहुिंचने के
सलए कारण जरूर बताना चासहए, और िू रा
कारण असधक महत्व रखता है क् िंसक
असर्युक्त की स्वतिंत्रता उपर क्त वसणत तकत
के अधीन है। इसके आगे, अपीलीय न्यायालय
के पास चुनौती दी गयी सिा की मात्रा की
शुद्धता को िाूँचने के जलए उत्तम सुजवधा से
सुसक्तज्जत है, यजद जवचारण न्यायालय ने कारणोां
सजहत उजचत बताया है ......"
(िोर जदया गया)

11. हमारी यह राय है जक जनचले
न्यायालय द्वारा अपयायप्त या गलत सिा जदये
िाने के कारण इस न्यायालय के समक्ष बड़ी
सांख्या में प्रकरण दायर जकये िा रहे है। हमें
समय है और हम जफर से दोर्पूणय तरीके के
जवरूद्ध चेतावनी देते है जिसमें की कुछ प्रकरणोां
में सिा से जनपटते है। इसमें कोई दो राय नही है
जक सिा देने के पहलुओां को हल्के में नही लेना
चाजहए, िैसे आपराजधक न्याय व्यवथथा का यह
िाग समाि पर जनणायक प्रिाव ड्ालता है।
इसके प्रकाश में हमारी राय है जक हमें इसको
और स्पिता प्रदान करने की िरूरत है।

12. अपराध िं के सलए जा क तीन
परीक्षण
अिात
अपराध
परीक्षण,
आपरासधक
परीक्षण
और
तुलनात्मक
अनुपात परीक्षण के मापिण्ड पर परीक्षण
सकया जाना है। अपराध परीक्षण के कारक िं
में जै े अपराध की य जना की ीमा,
अपराध में इस्तेमाल हसियार का चुनना,
अपराध का तरीका, अपराध काररत करना
(यसि क ई ह ), असर्युक्त की र्ूसमका,
अपराधी की अ ामासजकता या सघनौना
चररत्र, पीसडत की िशा म्मसलत रहते है।
आपराजधक परीक्षण में कारकोां का मूल्याांकन
िैसे अपराधी की आयु, अपराधी की जलांग,
अपराधी की आजथयक क्तथथजत या सामाजिक
पृष्ठिूजम, अपराध के जलए प्रेरणा, प्रजतरक्षा की
उपलब्धता, मानजसक क्तथथजत, मृतक के समूह में
से जकसी के द्वारा उत्प्रेरण, जवचारण में पयायप्त
रूप से प्रजतजनजधत्व, न्यायाधीश द्वारा अपीलीय
प्रजिया में असहमजत, पछतावा, सुधार की
सांिावना, पूवयवती आपराजधक अजिलेख (लांजबत
प्रकरणोां को न लेना) और कोई अन्य सुसांगत
कारण (एक जवस्तृत सूची नहीां है) सम्मजलत रहते
है।

13. इसके अजतररक्त हमें यह ध्यान दे
सकते है जक अपराध परीक्षण के अांतगयत
गांिीरता को सुजनजश्चत जकये िाने की िरूरत है।
अपराध की गांिीरता को (I) पीजड़त की
शारीररक सम्पूणयता; (ii) िौजतक समथयन या
सुख-सुजवधा की हाजन; (iii) मानिांग की सीमा;
746 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
और (iv) जनिता के उल्लघांन के द्वारा सुजनजश्चत
की
िा
सकती
है।
"(उपरोक्त
https://main.sci.gov.in/
Supremecourt
vernacular/ 2013/ 10532_2013_3_1501_
17728 Judgement_22_Oct_ 2019_ HIN.
pdf से अधोिारण (download) जकया गया है,
जिसमें यह 'खांड्न' जलखा गया है जकः- "क्षेत्रीय
िार्ा में अनुवाजदत जनणय से आशय केवल
पक्षकारोां को उनकी अपनी िार्ा में समझने के
जलये है एवां इसका प्रयोग जकसी अन्य उद्देश्य के
जलये नहीां जकया िा सकेगा। सिी व्यवहाररक
एवां कायायलयीन उद्देश्य के जलये जनणय का
अांग्रेिी सांस्करण ही प्रमाजणत होगा और
जनष्पादन तथा जियान्वयन के उद्देश्य के जलये
प्रिावी माना िायेगा।")

26. अपराधोां के जलए सिा की अवजध
जनधायररत करने के तीन परीक्षण है, िो है-
अपराध परीक्षण, आपराजधक परीक्षण व
तुलनात्मक अनुपात परीक्षण, जिनमें जवजिन्न
कारण है तथा अपराध की गांिीरता को िी
जवजिन्न कारकोां की कसौटी पर सुजनजश्चत जकया
िाना चाजहये। पूवय में कुछ कारण उल्लेक्तखत िी
जकये गये हैं। अगर इन कारको से वतयमान
प्रकरण में यह जनधायररत करने के जलये जक सिा
की क्या उजचत अवजध व प्रजतकर की क्या उजचत
राशी होनी चाजहये के जलये लागू करे तो जवजदत
होता है जक िीवांत अपीलाथी पर प्रबोजधत करने
का आरोप है। उसने कोई आपराजधक बल का
प्रयोग नहीां जकया और न ही उसका कोई जघनौना
चररत्र प्रकट होता है। अन्य दो अपीलाथी, जिसमें
से एक पर गोली चलाने का आरोप जसद्ध हुआ
था, की मृत्यु हो चुकी है। अपीलाथी का कोई
और आपराजधक इजतहास नहीां बताया गया है।
इसके अजतररक्त जक अपराध 1981 में घजटत
हुआ था वतयमान में अपीलाथी की उम्र करीब 60
वर्य को िी मद्देनिर रखना चाजहये।

27. समस्त तथ्यात्मक व जवजधक, अपराध
व उजचत सिा तथा प्रजतकर अपराधी की क्तथथजत,
घायल साक्षी को हुआ शारीररक नुकसान का
अध्ययन करने पर यह न्यायालय इस जनष्कर्य पर
पहुूँचता है जक दांड् की सिा की अवजध िो 4 वर्य
है उसको अब तक व्यतीत सिा की अवजध में
पररवजतयत जकया िाये व प्रजतकर के रुप में रु0 1
लाख पीजड़त साक्षी को जदलावाया िाये। अतः
यह अपील आांजशक रुप से स्वीकार की िाती है
तथा अपीलाथी सां0 2, लाल जसांह की सिा िो
अब तक करीब 36 जदन तक व्यतीत की है, की
अवजध में पररवजतयत की िाती है व प्रजतकर के
रुप में रु0 1 लाख अपीलाथी सां0 2, लाल जसांह
द्वारा जपजड़त जबहारी को जदये िाने का िी आदेश
जदया
िाता
है।
इस
राजश
को
अजियुक्त/अपीलाथी सां0 2, लाल जसांह इस
आदेश की जतजथ से दो मास के अन्दर पीजड़त
साक्षी जबहारी को िुगतान करेगा अथवा अवर
न्यायालय में िमा करेगा तथा उसी अवजध में
उसका प्रमाण इस उच्च न्यायालय के कायायलय
में िमा िी करेगा। अवर न्यायालय में प्रजतकर
िमा होने की दशा में अवर न्यायालय, पीजड़त
जबहारी द्वारा दाक्तखल उजचत आवेदन पर िमा
की गयी राजश, उसके पक्ष में िारी करेगा।
तदनुसार आदेजशत जकया िाता है।

28.

उपरोक्त
आदेशानुसार
यह
आपराजधक अपील आांजशक रुप से स्वीकार की
िाती है।

29. इस आदेश की एक प्रजत व समस्त
पत्रावली अवर न्यायालय को अजवलम्ब िेिी
िाये।
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