# Irfan & Anr v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2022) 11 ILRA 413
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2022-09-14
- **Case number:** Application U/S 482 No. 10328 of 2022
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/irfan-anr-v-state-of-u-p-anr-47833
- **Pages:** 14

## Headnote

A.G.A., Sri Paritosh Malviya
(अ) फौजदारी कानून - दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ -
धारा १५४, ४८२ - अन्तर्निहित शक्ततयां - भारतीय
दंड संहिता, १८६० - धारा ३७६ डी /५०६,३५४ - उत्तर
प्रदेश गिरोिबन्द और समाज विरोधी क्रियाकलाप
(र्निारण) अगधर्नयम, १९८६ - धारा 3(१) -
अन्तर्निहित शक्ततयों का उपयोि दुलिभ प्रकरणों में
िी क्रकया जाना चाहिये, िो भी जब अभभयुतत के
414 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
विरूद्ध प्रथम दृष्टिा कोई अपराध निीं बनता िो -
आरोप सत्य िै, या असत्य िै यि र्नधािररत करने का
कतिव्य विचारण न्यायालय को िै न क्रक इस
न्यायालय को - धारा 482 दं.प्र.सं. मे अन्तर्निहित
शक्ततयों का उपयोि करते िुए आरोप की सत्यता को
निीं परखा जा सकता िै - अिर प्रकरण के तथ्य ि
पत्रािली पर साक्ष्य से प्रथम दृष्टिा धारा 3(1)
गिरोिबन्द अगधर्नयम में िर्णित अपराध काररत िोने
के साक्ष्य उपलब्ध िैं तो अन्तर्निहित शक्तत का
उपयोि निीं क्रकया जा सकता िै। (पैरा - २९)
आव दकगण क ववरूद्ध दो आपराधधक मामल दर्ज -
आरोप पत्र, गंभीर अपराध काररत होन क साक्ष्य -
संज्ञान ललया - आव दकगण न पीडित का सामूहहक
बलात्कार ककया - उसक द्वारा प्रथम सूचना ररपोर्ज
दर्ज करान पर उसको धमकाना व उसकी लज्र्ा भंग
करना - र्ााँच अधधकारी द्वारा आस-पास क माहौल
का अध्ययन कर साक्ष्य ल खबद्ध ककया - क्ष त्र में
आतंक, भय व रोष व्याप्त - उनक ववरूद्ध
प्राथलमकी दर्ज करान का साहस कोई नहीं कर पाता
है।(पैरा - ३१)
र्नणिय : आव दकगण न बलात्कार व छ ड़छाड़ र्ैस
कृत्य करक , लोक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करन व
अपन धगरोह क ललए अनुधचत दुननयावी व भौनतक
लाभ प्राप्त करन
क उद्द श्य स
समार् ववरोधी
कियाकलाप ककय हैं, र्ो भारतीय दण्ि संहहता क
अध्याय-16 क अधीन दण्िनीय है तथा इस
कृत्य/किया कलाप क कारण र्नता में भय, दहशत
या संत्रास भी फैला, र्ो धारा 2(ख)(ग्यारह) सपहित
धारा 3(1) क अधीन दण्िनीय भी है, इन
पररस्स्थनतयों में अन्तननजहहत शस्ततयों का उपयोग
करना आपराधधक कायजवाही को अचानक मृत्यु
पहुचान र्ैसा होगा र्ो साधारणतया नहीं ककया र्ा
सकता है। (पैरा- ३१) (पैरा- ३२)
आिेदन अंतिित धारा ४८२ र्नरस्त क्रकया जाता िै।
(E-7)
उद्धृत मामलों की सूची :

## Text

_Characters 0–39,501 of 47,323. This is a partial read: ask again with offset=39501 for what follows._

11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
413
imaginary or inferential one, it would be
travesty of justice to ask the applicants to
face the trial. Bearing in mind, the factual
aspect of the case delineated herein above
and the legal principles enunciated by
Hon'ble Apex Court cited above and on the
basis of aforesaid discussion, this Court is
of the considered opinion that the learned
Magistrate was not justified in summoning
the
applicants
namely,
Shubhashish
Chaudhary and Sanjay Kumar Gupta to
face the trial for the aforesaid offences
because no such offence is made out
against them and to put them on trial and
permitting the trial to continue against both
the applicants would be an abuse of process
of law. Even uncontroverted allegations of
the prosecution do not constitute any
offence against the applicants, who were
bank officers, in which Sanjay Kumar
Gupta had joined the particular branch of
the bank after four and half years of the
disbursal of loan amount to opposite party
no.2 and his wife. Applicant-Subhashish
Chaudhary had no role in sanctioning of
loan and it was not required or supposed to
verify the liability, if any, on the project
because that project was already approved
by the bank. There is nothing on record to
show that applicant-Subhashish Chaudhary
was in any way played any role in approval
of the said project.

41. In the aforesaid circumstances of
the case, it is deemed proper that in order to
meet the ends of justice and avert the abuse
of
court's
process
the
impugned
summoning order dated 16.03.2021 cannot
be sustained against the applicants and the
proceedings of the aforesaid case be
quashed
forthwith
against
both
the
applicants and are hereby quashed.

42. Both the applications u/s 482
Cr.P.C. are allowed.

43. It is made clear that impugned
summoning order dated 16.03.2021 and the
entire proceedings of the aforesaid case
thereof are quashed only against the
applicants namely, Subhashish Chaudhary
and Sanjay Kumar Gupta @ Sanjay Gupta.
The observations made in this order are
strictly
confined
to
the disposal
of
applications u/s 482 Cr.P.C. with regard to
above applicants only. Rest of the accused
persons cannot take recourse of the
observations made in this order in any
proceedings.

44. A copy of this order be certified to
the lower court forthwith.
----------
(2022) 11 ILRA 413
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.09.2022

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Application U/S 482 No. 10328 of 2022

Irfan & Anr. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicants:
Sri Amit Daga, Sri Krishna Kant Yadav

Counsel for the Opposite Parties:
A.G.A., Sri Paritosh Malviya
(अ) फौजदारी कानून - दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ -
धारा १५४, ४८२ - अन्तर्निहित शक्ततयां - भारतीय
दंड संहिता, १८६० - धारा ३७६ डी /५०६,३५४ - उत्तर
प्रदेश गिरोिबन्द और समाज विरोधी क्रियाकलाप
(र्निारण) अगधर्नयम, १९८६ - धारा 3(१) -
अन्तर्निहित शक्ततयों का उपयोि दुलिभ प्रकरणों में
िी क्रकया जाना चाहिये, िो भी जब अभभयुतत के
414 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
विरूद्ध प्रथम दृष्टिा कोई अपराध निीं बनता िो -
आरोप सत्य िै, या असत्य िै यि र्नधािररत करने का
कतिव्य विचारण न्यायालय को िै न क्रक इस
न्यायालय को - धारा 482 दं.प्र.सं. मे अन्तर्निहित
शक्ततयों का उपयोि करते िुए आरोप की सत्यता को
निीं परखा जा सकता िै - अिर प्रकरण के तथ्य ि
पत्रािली पर साक्ष्य से प्रथम दृष्टिा धारा 3(1)
गिरोिबन्द अगधर्नयम में िर्णित अपराध काररत िोने
के साक्ष्य उपलब्ध िैं तो अन्तर्निहित शक्तत का
उपयोि निीं क्रकया जा सकता िै। (पैरा - २९)
आव दकगण क ववरूद्ध दो आपराधधक मामल दर्ज -
आरोप पत्र, गंभीर अपराध काररत होन क साक्ष्य -
संज्ञान ललया - आव दकगण न पीडित का सामूहहक
बलात्कार ककया - उसक द्वारा प्रथम सूचना ररपोर्ज
दर्ज करान पर उसको धमकाना व उसकी लज्र्ा भंग
करना - र्ााँच अधधकारी द्वारा आस-पास क माहौल
का अध्ययन कर साक्ष्य ल खबद्ध ककया - क्ष त्र में
आतंक, भय व रोष व्याप्त - उनक ववरूद्ध
प्राथलमकी दर्ज करान का साहस कोई नहीं कर पाता
है।(पैरा - ३१)
र्नणिय : आव दकगण न बलात्कार व छ ड़छाड़ र्ैस
कृत्य करक , लोक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करन व
अपन धगरोह क ललए अनुधचत दुननयावी व भौनतक
लाभ प्राप्त करन
क उद्द श्य स
समार् ववरोधी
कियाकलाप ककय हैं, र्ो भारतीय दण्ि संहहता क
अध्याय-16 क अधीन दण्िनीय है तथा इस
कृत्य/किया कलाप क कारण र्नता में भय, दहशत
या संत्रास भी फैला, र्ो धारा 2(ख)(ग्यारह) सपहित
धारा 3(1) क अधीन दण्िनीय भी है, इन
पररस्स्थनतयों में अन्तननजहहत शस्ततयों का उपयोग
करना आपराधधक कायजवाही को अचानक मृत्यु
पहुचान र्ैसा होगा र्ो साधारणतया नहीं ककया र्ा
सकता है। (पैरा- ३१) (पैरा- ३२)
आिेदन अंतिित धारा ४८२ र्नरस्त क्रकया जाता िै।
(E-7)
उद्धृत मामलों की सूची :
1. त र् लसंह प्रनत उत्तर प्रद श राज्य व एक अन्यः 2019
एससीसी आनलाईन एएलएल 5083

2. पी. कालसललंगम व अन्य़ बनाम पी.एस.र्ी. काल र्
ऑफ र् तनोलॉर्ी 1995 सप्ली (2) एस.सी.सी. 348

3. शारदा गुप्ता प्रनत उत्तर प्रद श शासन व अन्य, 2022
एससीसी ऑनलाइन एससी 514

4. हररयाणा राज्य बनाम भर्नलाल: (1992 ) सप्ली 1
एससीसी 335

5. झंिू फामाजस्युहर्कल वतसज लललमर् ि बनाम मोहम्मद
शारफुल हक़: (2005)1 एससीसी 122

6. अहमद अली तवारशी और अन्य बनाम उत्तर प्रद श
शासन : 2020 एससीसी ऑनलाइन एससी 107

7. र्ोस फ सालवारार्ा ए बनाम गुर्रात राज्य : (2011)
7 एससीसी 59

8. सुशील स िी और एक अन्य बनाम अरुणाचल प्रद श
शासन और अन्य: (2020) 3 एससीसी 240

9. प्रीनत सराफ और अन्य बनाम हदल्ली व एनसीआर
राज्य: 2021 एससीसी ऑनलाइन एससी 206

10. म ससज ननहाररका इन्रास्रतचर प्राइव र् लललमर् ि बनाम
महाराष्ट्र शासन व अन्य: (2020)10 एस सी सी 118

11. लसद्धाथज मुक श भंिारी प्रनत गुर्रात राज्य सरकार:
(दास्ण्िक अपील सं०. 1044, 1045 और 1046 of
2022)

12. रामबीर उपाध्याय व अन्य प्रनत उत्तर प्रद श राज्य व
अन्य : 2022 एस सी सी ऑनलाइन एस सी 484
11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
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(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

(क) पार्श्व भूश िः-

1. आवेदक, इरफाि व फहीम उफण फईम के
क्षवरूद्ध रक्षवन्द्र कुमार, थािा प्रभारी, अजीम िगर,
रामपुर, उत्तर प्रदेश द्वारा धारा 154 दण्ड प्रक्षक्रया
सिंक्षहता के अिंतगणत एक प्रथम सूचिा ररपोटण सिंख्या
0350 वषण 2020, क्षदिािंक 27.11.2020 को उत्तर प्रदेश
क्षगरोहबन्द
और
समाज
क्षवरोधी
क्षक्रयाकलाप
(क्षिवारर्) अक्षधक्षियम, 1986 (सिंिेप मे क्षगरोहबन्द
अक्षधक्षियम) की धारा 3(1) के अिंतगणत दजण कराई
क्षजसका पुिरूत्पादि क्षिम्न हैः-

"तहरीर जुबािी वादी बयाि क्षकया मैं
एसओ रक्षवन्द्र कुमार मय एक जरब क्षपस्टल मय 10
कार० मय हमराह का० 147 पुिीत कुमार मय एक
जरब इिंसास राय० मय 20 कार० मय का० 14 धमेन्द्र
कुमार मय एक जरब इिंसास राय० मय 20 कार० मय
जीप सरकारी ििं० यूपी 22 जी 0396 के मय चालक
का० अरुर् कुमार के बाद देख रेख शािंक्षत व्यवस्था,
गस्त व चैक्षकिंग पैटरोल पम्प, बस स्टेण्ड,टेक्सी स्टेण्ड
चैक्षकिंग, वाहि चैक्षकिंग, ढावे चैक्षकिंग, चैक्षकिंग सिंक्षदग्ध
वाहि/व्यन्धक्त व भ्रमर् से थािा हाजा मय अिुमोदि
शुदा गैंग चाटण गैंगलीडर इरफाि पुि स्व० इमराि
क्षि० गर् ग्राम खेड़ा टािंडा थािा अजीमिगर रामपुर के
उपन्धस्थत थािा आकर दान्धखल क्षकया जािंच से अक्षभ०
गर् 1. इरफाि पुि स्व० इमराि उम्र 46 वषण 2.फहीम
उफण फईम पुि मुमताज उफण कलुआ उम्र 36 वषण क्षि०
गर् ग्राम खेड़ा टािंडा थािा अजीमिगर रामपुर द्वारा
अपने क्षेत्र व आसपास ें अपने कृत्यं से आतंक
व भय व रयष व्याप्त कर रखा है जनता इनके
शवरुद्ध ररपयर्व शिखाने का साहस नही कर पाती
है
इस
शिरयह
के
िैंि
िीडर
द्वारा
बिात्कार/छेड़छाड़ जैसे कृत् करके अपने व
अपने सदस्यय का भौशतक िाभ क ाना है यह िैंि
स ाज शवरयधी शिया किाप करना इनका पेिा
बन िया है इनका आपराशधक इशतहास 1.
 ु०अ०सं० 623/2019 धारा 376डी/506 भादशव
चािानी थाना कयतवािी जनपद रा पुर 2.
964/2019 धारा 354/506 भादशव चािानी थाना
शसशवि िाइंस जनपद रा पुर है। इनकी
िशतशवशधयय पर अंकुि ििाया जाना अशत
आवश्यक है इिके क्षवरुद्ध उत्तर प्रदेश क्षगरोहबिंद एविं
समाज क्षवरोधी क्षक्रया कलाप क्षिवारर् अक्षध० का
अक्षभयोग पिंजीकृत क्षकया जा रहा है। जो बोला वही
क्षलखा है। रवािा शुदा अस्लाहा व कारतूस अन्दर
मालग्रह रखवाकर ताला बन्द ठीक मालग्रह सिंतरी
पहरा को क्षदखाया गया चावी पूवणवत रही चाजण थािा
स्वयिं ग्रहर् क्षकया।"

(महत्ता प्रदाि की गई)

2. आवेदकगर् के क्षवरूद्ध क्षगरोह सारर्ी (गैंग
चाटण) व उसके अिुमोदि की कायणवाही क्षिम्न हैः-

"गैंग चाटण गैंग लीडर इरफाि पुि स्व०
इमराि क्षिवासी खेड़ा टाण्डा अजीमिगर जिपद
रामपुर

अक्षभयुक्त
का िाम व
पता
वतणमाि
न्धस्थक्षत
उम्र
मु०अ०
सिं०623
/2019
धारा
376डी/
506
भादक्षव
चाला
िी
थािा
कोतवा
ली
जिपद
रामपुर
आरोप
पि
सिं०05/
2020
क्षदिािंक
15.01.
2020
मु०
अ०
सिं०
964
/20
19
धारा
354
/50
6
भाद
क्षव
चा
ला
िी
था
िा
क्षस
क्षवल
लाई
ि
जि
पद
राम
पुर
आ
रोप
पि
416 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
सिं०8
2/
202
0
क्षदिािं
क1
4.03
.202
0

P
J

1
इरफाि
पुि
स्व०
इमराि
क्षि०
ग्राम
खेडा
टाण्डा
थािा
अजीमिगर
जिपद
रामपुर
P

46
✓
✓
2
फहीम
उफण फईम
पुि
मुमताज
उफण
कलुआ
क्षि०
ग्राम
खेडा
टाण्डा
थािा
अजीमिगर
जिपद
रामपुर
P

36
✓
✓

श्रीमाि जी,

क्षिवेदि है क्षक इरफाि पुि स्व० इमराि
क्षि० ग्राम खेडा टाण्डा थािा अजीमिगर जिपद
रामपुर िे अपिा सिंगक्षठत क्षगरोह बिा रखा है।
क्षजसका गैंग लीडर इरफाि स्वयिं है इस गैंग के सदस्य
फहीम उफण फईम उपरोक्त िे अपिे क्षगरोह के
सदस्यो
के
साथ
क्षमलकर
मक्षहला
के
बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे अपराध काररत क्षकये है।
इस क्षगरोह का िेि में इतिा आतिंक व भय व्याप्त है
क्षक इिके क्षवरुद्ध कोई भी जिता का व्यन्धक्त ि तो
गवाही देिे का और ि ही प्रथम सूचिा ररपोटण दजण
करािे का साहस कर पा रहा है इस गैंग से जिता मे
रोष व भय व्याप्त है। इस क्षगरोह द्वारा मक्षहला के
बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे जघन्य अपराध काररत
करके अपिे व अपिे गैंग के सदस्य के क्षलये भौक्षतक
लाभ प्राप्त करिे हेतु बलात्कार करिा है इसका िेि
में स्वतन्त्र क्षवचरर् करिा जिक्षहत में उक्षचत िही है।
अक्षभ० गर् की अपराध न्धस्थक्षत गैंग चाटण में अिंक्षकत है
अक्षभ०गर् का उक्त कृत्य उ०प्र० क्षगरोहबन्ध एविं
समाज क्षवरोधी क्षक्रया कलाप क्षिवारर् अक्षध०1986 की
धारा 3(1) के अन्तगणत दण्डिीय अपराध है जिक्षहत में
इि अक्षभयुक्तो के क्षवरुद्ध कायणवाही क्षकया जािा
आवश्यक है।

िोटः- श्रीमाि जी उपरोक्त अक्षभयुक्तो के
क्षवरुद्ध उपरोक्त मुकदमोिं में थािा हाजा पर पूवण में
कोई गैंगस्टर का मुकदमा पिंजीकृत िही है।

अतः अिुरोध है क्षक गैंग चाटण अिुमोक्षदत
करिे की कृपा करें।

ह०
अप०
क्षजलाक्षध
कारी
ह०
अप०
पुक्षल
स
अधी
िक
ह०
अप०
वररष्ठ
पुक्षल
स
अधी
िक
ह०
अप०
उप
क्षजलाक्षध
कारी
ह०
अप०
िेिाक्षध
कारी
ह०
अप०
थािा
ध्यि

3. उपरोक्त वक्षर्णत प्रथम सूचिा ररपोटण के
अन्वेषर् के दौराि थािाध्यि रक्षवन्द्र कुमार सिंबिंक्षधत
ब्याि गवाह िईमा पत्नी मौ. तलहा व सिंबिंक्षधत ब्याि
गवाह हसीबा पुिी अतउहणमाि लेखबद्ध क्षकये गये जो
क्षिम्न वक्षर्णत क्षकये जा रहे हैं:-

"बयाि वादी- थािाध्यि रक्षवन्द्र कुमार पुि
स्व० हाक्षकम क्षसिंह क्षिवासी ििंगला थािा सादाबाद
क्षजला हाथरस वतणमाि तैिाती थािाध्यि थािा
अजीमिगर रामपुर पीएिओ 962282269 मो० ििं०
8218358692 िे पूछिे पर बताया क्षक मै क्षदिािंक 2010-2020 से थािाध्यि अजीमिगर जिपद रामपुर के
पद पर तैिात हूँ। दौरािे िेि भ्रमर् ज्ञात हुआ क्षक
गैंगलीडर इरफाि पुि स्व० इमराि क्षि०गर् ग्राम
खेड़ा टािंडा थािा अजीमिगर रामपुर िे अपने नेतृत्व
 ें एक सुसंिशित सशिय शिरयह बना रखा है।
क्षजसका वह स्वयिं गैंग लीडर है तथा अक्षभयुक्तगर् 1-
11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
417
इरफाि पुि स्व० इमराि उम्र 46 वषण, 2- फहीम उफण
फईम पुि मुमताज उफण कलुआ उम्र 36 वषण क्षि० गर्
ग्राम खेड़ा टािंडा थािा अजीमिगर रामपुर सक्षक्रय
सदस्य है। इन दयनय के द्वारा अपने क्षेत्र व आस
पास से अपने कृत्यं से आतंक व भय व रयष
व्याप्त कर रखा है जनता इनके शवरुद्ध ररपयर्व
शिखाने का साहस नही कर पाती है इस शिरयह
के िैंि िीडर द्वारा बिात्कार/छेड़छाड़ जैसे कृत्
करके अपने व अपने सदस्ययं का भौशतक िाभ
क ाना है यह िैंि स ाज शवरयधी शिया किाप
करना इनका पेिा बन िया है इिका आपराक्षधक
इक्षतहास 1- मु०अ०सिं०623/2019 धारा 376डी/506
भादक्षव चालािी थािा कोतवाली जिपद रामपुर, 2-
964/2019 धारा 354/506 भादक्षव चालािी थािा
क्षसक्षवल लाइिंस जिपद रामपुर है। इिकी गक्षतक्षवक्षधयो
पर अिंकुश लगाया जािा अक्षत आवश्यक है इिके
क्षवरुद्ध श्रीमाि् क्षजलाक्षधकारी महोदय रामपुर व
उच्चाक्षधकारीगर्ोिं द्वारा अिुमोक्षदत गैंग चाटण प्राप्त कर
इिके क्षवरुद्ध उ०प्र०क्षगरोहबन्द समाज क्षवरोधी क्षक्रया
कलाप (क्षिवारर्) अक्षध० 1986 की धारा 3(1) के
अन्तगणत अक्षभयोग पिंजीकृत कराया गया था
अक्षभयुक्तगर् उपरोक्त अक्षजणत धि को अपिे ऐशो
अराम में खचण करते है। इिका जिता में इतिा भय व
आतिंक व्याप्त है क्षक जिता का कोई भी व्यन्धक्त इिके
क्षवरुद्ध थािे में ररपोटण क्षलखािे व गवाही देिे का साहस
िही कर पाता है। इि अक्षभयुक्तो का समाज में स्वतिंि
रहिा समाज के क्षहत में सही िही है। यही मेरा बयाि
है।"

"बयाि
गवाह
सम्बन्धन्धत
मु०अ०सिं०
623/19 धारा 376डी/506 भादक्षव चालािी थािा
कोतवाली रामपुर व मु०अ०सिं० 964/19 धारा
354/506 भादक्षव चालािी थािा क्षसक्षवल लाईि रामपुर
श्रीमती िईमा पत्नी मौ० तलहा क्षि० ग्राम दौकपुरी
टािंडा थािा अजीमिगर जिपद रामपुर िे पूछिे पर
बताया क्षक मेरा िाम िईमा है मेरे पक्षत का िाम
मौलवी तलहा तथा मै ग्राम दोकपुरी टािंडा थािा
अजीमिगर जिपद रामपुर की रहिे वाली हूँ। मै
क्षदिािंक 16-11-2019 को क्षदि में समय करीब 02.00
बजे दोपहर दवा लेकर क्षजला अस्पताल रामपुर से
अपिे घर आिे के क्षलये सड़क पर सवारी का इिंतजार
कर रही थी तभी मेरे गािंव के इरफाि पुि स्व० इमराि
क्षिवासी ग्राम खेडा टािंडा थािा अजीमिगर जिपद
रामपुर व फहीम उफण फईम पुि मुमताज उफण
कलुआ
क्षिवासीगर्
ग्राम
खेडा
टािंडा
थािा
अजीमिगर जिपद रामपुर एक कार मेेेे
िं क्षजसको
एक व्यन्धक्त क्षजसे मै पहचािती िही थी चला रहा था
मेरे पास आकर रुके और इरफाि िे मुझसे पूछा कैसे
खडी हो मैिे घर जािे की बात उन्े बताई तो उन्ोिे
कहा क्षक हम भी घर जा रहे है चलो तुम्हे भी घर छोड़
देगे, मैिे क्षवश्वास करके उिकी गाडी में बैठ गयी
उन्ोिे मुझे कोल्ड्रीक क्षपलायी क्षजसमें कुछ िशीला
पदाथण था और मुझे जिंगल की तरफ ले गये जहाूँ ईख
के खेत में ले जाकर तीिो िे बारी बारी मेरे साथ
बलात्कार क्षकया तथा जाि से मारिे की धमकी दी मैिे
अपिी बहि हसीबा को उस बावत फोि से सूचिा दी
वो भी घरवालो को लेकर मौके पर आ गये थे क्षजिको
मैिे सारी बात बतायी उक्त घटिा के सम्बन्ध में मैिे
18.11.2019 को थािा कोतवाली रामपुर में रपट
क्षलखायी थी यही मेरे बयाि है। इस तरह वाक्षदिी/
पीक्षड़ता एफ०आई०आर० को तस्दीक कर बयाि दे
रही है इसके उपरान्त बताया क्षक मै क्षदिािंक 27.11.19
को कप्ताि साहब से क्षमलकर कचहरी में 164
द०प्र०सिं० के बयाि िकल लेिे के क्षलये गयी थी वहाूँ
मुझे कचहरी में इरफाि उफण इमराि, फईम पुि
मुमताज इिके साथ2 व्यन्धक्त और थे क्षजन्े मैं िही
जािती थी यह लोग मुझे देखकर मेरे पीछे पीछे चल
क्षदये िूरमहल के पास आकर इन्ोिे मुझे पकड़ क्षलया
और मेरे साथ बदतमीजी क्षक तथा मेरी छाती पकड़
ली और मुझसे मेरे द्वारा पूवण में क्षलखाये बलात्कार के
मुकदमे को वापस करिे को कहिे लगे ि करिे पर
जाि से मारिे की धमकी दी मेरे शोर मचलािे पर वे
लोग भाग गये। मैिे 112 िम्बर पर काल की तो वहािं
पुक्षलस आ गयी व मुझे थािा क्षसक्षवल लाईि जािे को
कहा क्षफर मै अपिी दूसरी बहि के साथ क्षसक्षवल
लाईि थािे गये उस क्षदि वहा मेरी ररपोटण िही क्षलखी
गयी। क्षदिािंक 30.11.2019 को मेरी रपट क्षलखी गयी
दोिो मुकदमें मैिे ही क्षलखाये है इस तरह
वाक्षदिी/पीक्षड़ता दोिो एफ०आई०आर को तस्दीक
करते हुये बयाि दे रही है बयाि लेखबद्ध सीडी क्षकये
जाते है।"

"बयाि गवाह- मु०अ०सिं० 623/19 धारा
376डी/506 भादक्षव चालािी थािा कोतवाली रामपुर
से सिंबिंक्षधत गवाह हसीबा पक्षत अतख रहमाि क्षि०
ग्राम दौकपुरी टािंडा थािा अजीमिगर जिपद रामपुर
िे पूछिे पर बताया क्षक क्षदिािंक 16.11.2019 को मेरी
बहि िईमा िे मुझे फोि से बताया था क्षक रामलीला
418 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
ग्राउन्ड से पास ईख के खेत में मेरे साथ बलात्कार की
घटिा इमराि व फईम व 01 अन्य व्यन्धक्त िे की है
क्षजसकी
ररपोटण
थािा
कोतवाली
में
क्षदिािंक
18.11.2019 को िईमा द्वारा क्षलखायी गयी तथा
क्षदिािंक 27.11.2021 को िूरमहल के पास इरफाि िे
िईमा की बलात्कार का मुकदमा वापस लेिे की
धमकी दी थी और बुरी क्षियत से उसके पकड़ क्षलया
था क्षजसकी सूचिा 112 िम्बर को दी थी इसका
मुकदमा क्षदिािंक 30.11.2019 को थािा क्षसक्षवल लाईि
रामपुर में क्षलखाया था जो मैिे देखा व सुिा आपको
बता क्षदया है। यही मेरी बयाि है। इस तरह गवाहाि
एफआईआर का समथणि करते हुये बयाि दे रही है
क्षजसे लेखबद्ध सीडी क्षकया गया।" (महत्ता
प्रदाि
की गई)

4.

अन्वेषर्
के
दौराि
आवेदकगर्/अपराधीगर् से भी कई बार पूछताछ
की गई जैसा की वतणमाि प्राथणिा पि के प्रस्तर ििं० 18
मे वक्षर्णत है।

5. जाूँच अक्षधकारी िे अन्वेषर् के उपरान्त,
आरोप पि सिंख्या 191/21 क्षदिािंक 29.07.2021, दोिो
आवेदक के द्वारा क्षगरोह बन्द अक्षधक्षियम के धारा
3(1) के अिंतगणत अपराध काररत होिे के पयाणप्त साक्ष्य
मौजूद होिे के कारर् न्यायालय को प्रेक्षषत की।
न्यायालय द्वारा अवलोकि कर क्षदिािंक 19.08.2021
को सिंज्ञाि क्षलया गया व आदेश क्षदिािंक 19.08.21 के
द्वारा अक्षभयुक्तगर् के क्षवरूद्ध सम्मि जारी क्षकया
गया, जो क्षिम्न उद्दररत क्षकया जा रहा हैः-

"19.08.21

आज यह आरोप पि अन्तगणत मु०अ०सिं०
350/2020 अिं०धारा 3(1) जी० एक्ट थािा अजीमिगर
क्षजला रामपुर की पुक्षलस द्वारा अक्षभ०गर् (1) इरफाि,
(2) फहीम उफण फईम के क्षवरूद्ध प्रस्तुत क्षकया गया।

केस डायरी व अन्य प्रपिो के अवलोकि
से क्षवक्षदत होता है क्षक अक्षभ० गर् के क्षवरूद्ध गैंग चाटण
में अक्षभ०गर् (1) इरफाि (2) फहीम उफण फईम के
क्षवरुद्ध मु०अ०सिं० 623/19 अिं०धारा 376डी/506
आई०पी०सी० व अ०सिं० 964/19 अिं०धारा 354/506
आई०पी०सी० में अपराध दजण है। अतः केस डायरी व
अन्य प्रपिो के अवलोकि से क्षवक्षदत है क्षक अक्षभ०गर्
(1) इरफाि (2) फहीम उफण फईम के क्षवरूद्ध धारा-
3(1) जी० एक्ट में सिंज्ञाि लेिे हेतु आधार पयाणप्त है।
अतः उक्त अक्षभयुक्तगर् के क्षवरूद्ध धारा- 3(1) जी०
एक्ट में सिंज्ञाि क्षलया जाता है। अक्षभ०गर् द्वारा मा०
उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आदेश क्षदिािंक्षकत
18.01.21 व 22.02.21 प्रस्तुत क्षकया गया है।
अक्षभ०गर् अद्यति आदेश प्रस्तुत करे। अक्षभ०गर् के
क्षवरूद्ध सम्मि क्षदिािंक 08.09.21 के क्षलए जारी हो।"

6. आवेदकगर् िे वतणमाि आवेदि दण्ड
प्रक्षक्रया सिंक्षहता की धारा 482 के अिंतगणत दायर क्षकया
गया है, क्षजसके द्वारा उपरोक्त वक्षर्णत आरोप पि
क्षदिािंक
29.07.2021
व एस.एस.टी.
46/2021
(सरकार बिाम इरफाि आक्षद), अपराध सिंख्या -
350/2020, अिंतगणत धारा 3(1) क्षगरोहबन्द अक्षधक्षियम,
थािा - अजीम िगर, क्षजला- रामपुर, में अपर सि
न्यायाधीश, न्यायालय -3 रामपुर द्वारा जारी सम्मि
आदेश पि क्षदिाूँक 19.08.21 व समस्त कायणवाही को
क्षिरस्त करिे की प्राथणिा की है।

(ख) आवेदकिण का पक्ष

7. आवेदकगर् का पि उिके क्षवद्वाि
अक्षधवक्ता श्री अक्षमत डागा िे प्रबलता से इस
न्यायालय के समि रखा क्षक यह एक क्षवद्वेषपूर्ण
कायणवाही है। आवेदक सिंख्या एक पूवण मे गाूँव का
प्रधाि रहा है, परन्तु हाल मे हुए चुिाव में उसको हार
क्षमली व आवेदक सिंख्या दो उसका ररश्तेदार है।
क्षगरोह सारर्ी में उल्लेन्धखत दोिो मामलो की
क्षशकायतकताण श्रीमती िईमा के पक्षत तल्हा एक
मदरसे मे मौलवी हैं जहािं और बच्चो के साथ आवेदक
सिंख्या 3 की भतीजी भी पढ़ती थी। वहािं उसके साथ
उक्त मौलवी िे छेड़छाड़ की व बलात्कार की
कोक्षशश की, क्षजस पर उसके क्षवरूद्ध एक प्रथम
सूचिा (अपराध सिं० 84 वषण 2019) धारा 354 ख
भा.दिं.सिं. व 7/8 पाक्सो अक्षधक्षियम के अन्तगणत दजण
हुई, क्षजस पर आरोप पि (अन्तगणत धारा 376 AB,
506 व 5एम/6 पाक्सो अक्षधक्षियम) प्रेक्षषत हुआ व
क्षवचारर् के बाद उक्त मौलवी के क्षवरुद्ध सि
न्यायालय द्वारा उक्त आरोपोिं के क्षसद्ध हो जािे के
फलस्वरूप क्षिर्णय व आदेश क्षदिािंक 14.12.2020
द्वारा 20 वषण का सश्रम कारावास हुआ, क्षजसकी
अपील इस न्यायालय में लन्धम्बत है। इस कारर्वश
क्षगरोह
सारर्ी
में
उल्लेन्धखत
मामलोिं
की
11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
419
क्षशकायताकताण क्षवद्वेष रखती है, इसक्षलए उिके
क्षवरूद्ध दो असत्य मुकदमे दजण कराये हैं। क्षवद्वाि
अक्षधवक्ता िे कथि क्षकया क्षक उि दो मामलो मे
आवेदकगर् को जमाित क्षमल गई है और आरोप पि
दान्धखल क्षकया जा चुका है।

8. श्री अक्षमत डागा, अक्षधवक्ता िे आगे क्षिवेदि
क्षकया क्षक वतणमाि प्रकरर् मे जाूँच अक्षधकारी िे दोिोिं
मामलोिं के क्षशकायताकताण का ब्याि दजण क्षकया व कई
क्षतक्षथयोिं पर आवेदकगर् से पूछताछ की और जब
उिको क्षहरासत में लेिे का भय हुआ तो उन्ोिे एक
ररट याक्षचका ििं० 17698/2020 इस न्यायालय के
समि दान्धखल की, क्षजसमें इिके क्षवरूद्ध उत्पीड़ि
कायणवाही ि करिे का अिंतररम आदेश पाररत हुआ
जो अभी भी प्रभावी है।

9. श्री अक्षमत डागा, अक्षधवक्ता िे यह भी कथि
क्षकया क्षक अन्वेषर् के दौराि आवेदकगर् के क्षवरूद्ध
कोई भी क्षवश्वसिीय और ठोस साक्ष्य सिंग्रक्षहत िहीिं
क्षकये गये हैं, क्षक आवेदकगर् िे कोई क्षगरोह का
क्षिमाणर् कर रखा है या धारा 3(1) क्षगरोहबन्द
अक्षधक्षियम के अन्तगणत अपराध काररत क्षकया है।
आरोप पि माि दो आपराक्षधक मामले के पीक्षडत व
क्षशकायतकताण के ही साक्ष्य के ब्याि पर आधाररत है।
कोई भी स्वतन्त्र साक्ष्य का ब्याि लेखबद्ध िही क्षकया
गया है। उक्त अपराध का सिंज्ञाि व आवेदकगर् को
सम्मि भी सि न्यायालय िे न्याक्षयक मािस से िहीिं
क्षकया है। पिावली पर कोई भी ऐसा साक्ष्य िहीिं है क्षक
आवेदकगर् िे लोक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त क्षकया
है या क्षकसी लाभ के उद्देश्य से समाज क्षवरोधी
क्षक्रयाकलाप क्षकया है या जिता में दहशत, सिंिास या
आतिंक फैलाया हो।

10. क्षवद्वाि अक्षधवक्ता िे समकि न्यायालय
द्वारा तेज शसंह प्रशत उत्तर प्रदेि राज्य व एक अन्यिः
2019 एससीसी आनिाईन एएिएि 5083 के
मामले में पाररत क्षिर्णय पर भरोसा जताया जहाूँ, यह
क्षिधाणररत क्षकया गया है क्षकः-

"XXX यह आकलि करिा महत्वपूर्ण है
क्षक अपराधी द्वारा काररत अपराध क्या अिुक्षचत
दुक्षियाबी, आक्षथणक या भौक्षतक लाभ के उद्देश्य से
प्रेररत और अिुबिंक्षधत है या िही। अपराध का उद्देश्य
या उसका प्रयोजि क्षिर्ाणयक होगा, क्षक क्षगरोहबन्द
अक्षधक्षियम के प्रावधाि क्या क्षकसी वस्तुतः मामले मे
अिुप्रयोग क्षकये जाये या िही।"

"XXX जब कभी भी कोई गिंभीर अपराध
काररत होता है तो पररर्ाम स्वरूप हमेशा समाज मे
क्षकसी ि क्षकसी प्रकार का व्यवधाि होता ही है वो
समाज मे सामान्य व्यवधाि और लोक व्यवस्था का
अस्त व्यस्त होिा या सिंिास अथवा आतिंक का उत्पन्न
होिा अलग-अलग भ्रािंक्षत है। क्षवक्षध एविं व्यवस्था की
सामान्य समस्या को लोक व्यवस्था के व्यवधाि की
सिंवृक्षत्त से सिंयोक्षजत िही क्षकया जा सकता है। XXX"

(उपरोक्त अिुवाद न्यायालय द्वारा क्षकया
गया है।)

11. अन्त मे क्षवद्वाि अक्षधवक्ता िे कथि क्षकया
क्षक ऐसा कोई साक्ष्य सिंग्रक्षहत िहीिं क्षकया गया है, जो
आवेदकगर् के क्षवरूद्ध धारा 3(1) क्षगरोहबन्द
अक्षधक्षियम मे वक्षर्णत अपराध के अवयव को दशाणता
हो। अतः यह न्यायालय अपिी अन्तक्षिणक्षहत शन्धक्तयोिं
का उपयोग करते हुए आवेदकगर् के क्षवरूद्ध
दिंण्डिीय कायणवाही को क्षिरस्त करे।

(ि) राज्य सरकार का पक्षिः-

12. उपरोक्त के क्षवपरीत, राज्य शासि का
पि, श्री पररतोष मालवीय क्षवद्वाि अक्षतररक्त शासकीय
अक्षधवक्ता, िे पुरजोर रखा, क्षक आवेदकगर्ो द्वारा
अपिे िेि व आसपास में अपिे कृत्यो से आतिंक व
रोष व्याप्त कर रखा है क्षक जिता इिके क्षवरूद्ध
ररपोटण क्षलखािे का साहस िहीिं कर पा रही है। ये
बलात्कार, छेड़छाड़ जैसे कृत्य करके अपिा व क्षगरोह
के सदस्योिं को भौक्षतक लाभ कमाते हैं। इिकी
गक्षतक्षवक्षधयोिं पर अिंकुश लगाया जािा अक्षत आवश्यक
है, इसक्षलए क्षगरोहबन्द अक्षधक्षियम के अिंतगणत प्रथम
दृष्टवा अपराध दृक्षष्टगोचर होता है। इिके क्षवरूद्ध दो
मुकदमा अपराध पिंजीकृत हुए हैं क्षजिमें आरोप पि
सामूक्षहक बलात्कार (धारा 376 घ) व स्त्री की लज्जा
भिंग (धारा 354 व 506) जैसे गिंभीर अपराध में प्रेक्षषत
क्षकया जा चुका है।

13. पररतोष मालवीय, अक्षतररक्त शासकीय
अक्षधवक्ता िे यह भी कथि क्षकया क्षक क्षगरोह सारर्ी
मे उपरोक्त दो आपराक्षधक मामलोिं को सूचीबद्ध
420 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
क्षकया गया है, व जाूँच के दौराि उि मामलोिं की
पीक्षडता का साक्ष्य भी लेख बद्ध क्षकया गया है, क्षक
आवेदकगर् िे उसके साथ बलात्कार क्षकया व प्रथम
सूचिा ररपोटण को वापस लेिे के क्षलए दबाव भी डाला
व लज्जा भिंग भी करी और यह भी कथि क्षकया क्षक
इिके भय के कारर् इिके क्षवरूद्ध कोई प्रथम सूचिा
ररपोटण दजण करािे का साहस िहीिं कर पाता है और
उसिे क्षगरोहबन्द के अन्तगणत प्रथम सूचिा ररपोटण के
तथ्ोिं की पुक्षष्ट भी की। अतः धारा 3(1) क्षगरोह बन्द के
अवयव प्रथम दृष्टवा क्षवद्यमाि हैं तथा इस स्तर पर
आपराक्षधक कायणवाही को अचािक मृत्यु िही दी जा
सकती है, तथा वतणमाि प्रकरर् के तथ् तेज शसंह
(पूवव े उल्लिल्लखत) से क्षभन्न है। जैसा क्षक वतणमाि
प्रकरर् में यह साक्ष्य सिंग्रक्षहत है, क्षक आवेदकगर् के
कृत्योिं के कारर् जिता में दहशत है और उिके
क्षवरूद्ध प्रथम सूचिा ररपोटण क्षलखािे से घबराते हैं और
अगर कोई दजण कराता भी है तो उस पर उसको
वापस लेिे के क्षलए दबाव भी डालते हैं।

14. अतः इिके द्वारा बलात्कार व छेड़छाड़
के अपराध काररत करिे के कारर् लोक व्यवस्था
का अस्त-व्यस्त करिे के क्षलए समाज क्षवरोधी क्षक्रया
कलाप करते है जो भारतीय दिंड सिंक्षहता के अध्याय
16 के अिंतगणत दण्डिीय अपराध है।

(घ) प्रासंशिक शवशध प्रावधानिः-

15. वतणमाि प्रकरर् के क्षलये क्षगरोहबन्द की
अक्षधक्षियम व भारतीय दण्डड़ सिंक्षहता की क्षिम्न
धाराओिं का उल्लेख करिा समीचीि रहेगाः-

शिरयहबन्द अशधशनय

"2. पररभाषा - इस अक्षधक्षियम में, -

(क) ''सिंक्षहता'' का तात्पयण दिंड प्रक्षक्रया
सिंक्षहता, 1973 से है;

(ख) ''क्षगरोह'' का तात्पयण ऐसे व्यन्धक्तयोिं
के समूह से है जो लोक-व्यवस्था को अस्त-व्यस्त
करिे या अपिे या क्षकसी अन्य व्यन्धक्त के क्षलए कोई
अिुक्षचत दुक्षियावी (टेम्पोरल), आक्षथणक, भौक्षतक या
अन्य लाभ प्राप्त करिे के उद्देश्य से या तो अकेले
या समूक्षहक रूप से क्षहिंसा, या क्षहिंसा की धमकी या
प्रदशणि, या अक्षभिास, या प्रपीड़ि द्वारा, या अन्य
प्रकार से क्षिम्नक्षलन्धखत समाज क्षवरोधी क्षक्रयाकलाप
करते हैं, अथाणत्--

(एक) भारतीय दण्ड सिंक्षहता के अध्याय
16, या अध्याय 17, या अध्याय 22 के अधीि
दण्डिीय अपराध; या

(दो)
सिंयुक्त
प्रान्त
आबकारी
अक्षधक्षियम, 1910 या िारकोक्षटक डरग्स एण्ड
साइक्रोटराक्षपक सब्सटैन्सेज एक्ट, 1985 या तत्समय
प्रवृत्त क्षकसी अन्य क्षवक्षध के क्षकन्ीिं उपबन्धो का
उल्लिंघि क्षकसी शराब या मादक या अक्षिष्टकर
मादक द्रव्य या अन्य मादकोिं या स्वापकोिं का
अवसाि या क्षिमाणर् या सिंग्रह या पररवहि या
आयात या क्षियाणत, या क्षवक्रय या क्षवतरर् या क्षकन्ीिं
पौधोिं की खेती करिा; या

(तीि) क्षवक्षध सम्मत प्रक्षक्रया से क्षभन्न
प्रक्षक्रया द्वारा स्थावर सम्पक्षत्त पर अध्यासि करिा या
कब्जा लेिा, या स्थावर सम्पक्षत्त पर चाहें स्वयिं या
अन्य क्षकसी व्यन्धक्त के पि में हक या कब्जा के क्षलए
क्षमथ्ा दावा करिा; या

(चार) क्षकसी लोक सेवक या क्षकसी सािी
को अपिे क्षवक्षधपूर्ण कत्वणयोिं का पालि करिे से रोकिा
या रोकिे के क्षलए प्रयत्न करिा; या

(पाे च) स्त्री तथा लड़की अिैक्षतक
व्यापार दमि अक्षधक्षियम, 1956 के अधीि दण्डिीय
अपराध; या

(छः) सावणजक्षिक द्यूत अक्षधक्षियम, 1867
की धारा 3 के अधीि दण्डिीय अपराध; या

(सात) क्षकसी सरकारी क्षवभाग, स्थािीय
क्षिकाय या सावणजक्षिक या क्षिजी उपक्रम द्वारा या
उसकी ओर से क्षकसी पट्टे या अक्षधकार के क्षलए, या
माल के सिंभरर् या क्षकये जािे वाले कायण के क्षलए,
क्षवक्षधपूवणक सिंचाक्षलत क्षकसी िीलामी मे बोली लगािे या
क्षवक्षधपूवणक मािंगे गये टेण्डर देिे से क्षकसी व्यन्धक्त को
रोकिा; या

(आठ) क्षकसी व्यन्धक्त को अपिे क्षवक्षधपूर्ण
कारबार, वृक्षत्त, व्यापार या जीक्षवका या उससे सम्बद्ध
क्षकसी अन्य क्षवक्षधपूर्ण क्षक्रयाकलाप को सुचारू रूप से
करिे से रोकिा या उसमें क्षवघ्न डालिा; या

(िौ) भारतीय दण्ड सिंक्षहता की धारा 171ड के अधीि दण्डिीय अपराध, या मतदाता को अपिे
मताक्षधकार का प्रयोग करिे से शारीररक रूप से
रोककर
क्षकसी
क्षवक्षधपूवणक
होिे
वाले
क्षकसी
11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
421
सावणजक्षिक क्षिवाणचि को रोकिा या उसमे बाधा
डालिा; या

(दस) अन्य व्यन्धक्तयोिं को साम्प्रदाक्षयक
साम्जस्य मे क्षवघ्न डालिे के क्षलए क्षहिंसा करिे के क्षलए
उद्दीप्त करिा; या

(ग्यारह) जिता में दहशत, सिंिास या
आतिंक फैलािा; या

(बारह) सावणजक्षिक या क्षिजी उपक्रमो या
कारखािो के कमणचाररयो या स्वाक्षमयोिं या अध्याक्षसयोिं को
आतिंक्षकत करिा या उि पर हमला करिा और उिकी
सम्पक्षत्त को हाक्षि पहुिंचािा; या

(तेरह) क्षकसी व्यन्धक्त को इस क्षमथ्ा
व्यपदेशि पर क्षक उसे क्षवदेश में कोई सेवायोजि,
व्यापार या वृक्षत्त उपलब्ध करायी जायेगी, ऐसे क्षवदेश मे
जािे के क्षलए उत्प्रेररत करिा या उत्प्रेररत करिे का
प्रयास करिा; या

(चैदह) क्षफरौती उद्याक्षपत करिे के आशय
से क्षकसी व्यन्धक्त का व्यपहरर् या अपहरर् करिा; या

(पन्द्रह) क्षकसी वायुयाि या सावणजक्षिक
पररवहि यािो को उसके पूवणक्षिधाणररत मागण से जािे से
पथान्तररत करिा या अन्यथा रोकिा;

(सोलह)धि उधार देिे का क्षवक्षियमि
अक्षधक्षियम, 1976 के अधीि दण्डिीय अपराध;

(सिह) पशु का अवैध रूप से पररवहि
करिे और/या तस्करी करिे और गोवध क्षिवारर्
अक्षधक्षियम, 1955 और पशुओिं के प्रक्षत क्रूरता का
क्षिवारर् अक्षधक्षियम, 1960 में प्रावधािो के उल्लिंघि में
कायों मे सिंलग्न होिा;

(अठ्ठारह) वाक्षर्न्धज्यक शोषर्, बिंधुआ श्रम,
बालश्रम, यौि शोषर्, अिंग हटािे तथा दुव्यणपार, करिे,
क्षभिा और समाि क्षक्रया कलापो के प्रयोजिो के मािव
दुव्यणपार;

(उन्नीस)
क्षवक्षध
क्षवरूद्व
क्षक्रयाकलाप
(क्षिवारर्) अक्षधक्षियम ,1966 के अधीि दण्डिीय
अपराध;

(बीस) िकली भारतीय करेंसी िोटो का
मुद्रर्, पररवहि और पररचालि करिा;

(इक्कीस) अवैध औषन्धद्ध के उत्पादि ,
क्षवक्रय और क्षवतरर् मे सिंलग्न होिा;

(बाइस) आयुध अक्षधक्षियम, 1959 की धारा
5, 7 और 12 के उल्लिंघि मे आयुध एविं गोला, बारूद
के क्षवक्षिमाणर्, क्षवक्रय और पररवहि में सिंलग्न होिा;

(तेइस) भारतीय वि अक्षधक्षियम,1927 और
वन्य जीव सिंरिर् अक्षधक्षियम, 1972 के उल्लिंघि में
आक्षथणक लाभ के क्षलए पेड़ काटिा या मारिा या उत्पादो
की तस्करी करिा;

(चैबीस)
मिोरिंजि
और
पण्यम
कर
अक्षधक्षियम, 1979 के अधीि दण्डिीय अपराध;

(पच्चीस) उि अपराधो मे सिंलग्न होिा, जो
राज्य की सुरिा लोक व्यवस्था और जीवि के रफ्तार को
भी प्रभाक्षवत करते है।

(ग) ''क्षगरोहबन्द'' का तात्पयण क्षकसी क्षगरोह के
सदस्य या सरगिा या सिंगठक से है और इसके अन्तगणत
कोई ऐसा व्यन्धक्त भी है जो खण्ड (ख) में प्रमाक्षर्त क्षकसी
क्षगरोह के क्षक्रयाकलाप के क्षलए, चाहे ऐसे क्षक्रयाकलाप के
क्षकए जािे के पूवण या पिात, दुष्प्रेररत करता है या उसमे
सहायता देता है, या क्षकसी ऐसे व्यन्धक्त को क्षजसिे ऐसे
क्षक्रयाकलाप क्षकये होिं, सिंश्रय देता है;

(घ) ''लाके सेवक'' का तात्पयण भारतीय दण्ड
सिंक्षहता की धारा 21 मे या तत्समय प्रवृत्त क्षकसी अन्य क्षवक्षध
से यथापररभाक्षषत लोक सेवक से है और इसके अन्तगणत
कोई ऐसा व्यन्धक्त भी है जो राज्य की पुक्षलस या अन्य
प्राक्षधकाररयोिं को इस अक्षधक्षियम के अधीि दण्डिीय
क्षकसी अपराध के अन्वेषर् या अक्षभयोजि या दण्डड़ मे चाहे
ऐसे अपराध या अपराधी के सम्बन्ध मे सूचिा या साक्ष्य
देकर या क्षकसी अन्य रीक्षत से, क्षवक्षधपूवणक सहायता करता
है;

(ड) ''क्षकसी लाके सेवक के कुटुम्ब का
सदस्य'' का तात्पयण उसके माता-क्षपता या पक्षत या पत्नी,
और भाई, बक्षहि, पुि, पुिी, पौि, पौिी, या इिमें से क्षकसी
के पक्षत या पत्नी से है और इसके अन्तगणत लोक सेवक पर
आक्षश्रत या उसके साथ क्षिवास करिे वाला कोई व्यन्धक्त
और कोई ऐसा व्यन्धक्त भी है क्षजसके कल्यार् में लोक
सेवक क्षहत रखता हो।

(च) इस अक्षधक्षियम में प्रयुक्त क्षकन्तु
अपररभाक्षषत, और दण्ड प्रक्षक्रया सिंक्षहता, 1973 या
भारतीय दिंड सिंक्षहता मे पररभाक्षषत शब्दो और पदोिं के
क्रमशः वहीिं अथण होिंगे जो ऐसी सिंक्षहताओिं में उिके क्षलए
क्षदए गये हैं।

3-िाल्लि -(1) क्षकसी क्षगराहे बन्द को
दोिो मे से क्षकसी भािंक्षत के कारावास से ऐसी अवक्षध के
क्षलए जो दो वषण से कम ि होगी और जो दस वषण तक
हो सकेगी और जुमाणिे से भी, जो पािंच हजार रूपये से
कम िहीिं होगा, दन्धण्डत क्षकया जायगाः
422 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

परन्तु क्षकसी क्षगरोहबन्द को जो क्षकसी
लोक सेवक के शरीर के प्रक्षत या लोक सेवक के
कुटुम्ब के क्षकसी सदस्य के शरीर के प्रक्षत कोई
अपराध करता है, दोिो मे से क्षकसी भािंक्षत के
कारावास से ऐसी अवक्षध के क्षलये जो तीि वषण से कम
ि होगी और जुमाणिा से भी, जो पािंच हजार रूपये से
कम िहीिं होगा, दन्धण्डत क्षकया जायेगा।

(2) क्षकसी ऐसे व्यन्धक्त को जो लोक सेवक
होते हुये चाहे स्वयिं या अन्य के माध्यम से क्षकसी
क्षगरोहबन्द की क्षकसी रीक्षत से अवैध रूप से सहायता
या समथणि, चाहे क्षगरोहबन्द द्वारा कोई अपराध क्षकये
जािे के पूवण या पिात् करता है, या क्षवक्षधपूर्ण उपाय
करिे से क्षवरत रहता है या इस सिंबिंध मे क्षकसी
न्यायालय या अपिे वररष्ठ अक्षधकाररयोिं के क्षिदेशो को
कायाणन्धन्वत करिे से जािबूझकर करता है, दोिो मे से
क्षकसी भािंक्षत के कारावास से एेेसी अवक्षध के क्षलए जो
दस वषण तक की हो सकेगी, क्षकन्तु तीि वषण से कम ि
होगी और जुमाणिे से भी दिंक्षडत क्षकया जायगा।"

भारतीय दंड संशहता

"506. आपराशधक ध की के शिए
सजा- जो कोई भी आपराक्षधक धमकी का अपराध
करता है, तो उसे क्षकसी एक अवक्षध के क्षलए कारावास
क्षजसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या आक्षथणक
दिंड या दोिोिं के साथ दिंक्षडत क्षकया जा सकता है।

यशद ध की ृत्ु या िंभीर चयर्, आशद
के शिए है - और यक्षद धमकी मौत या गिंभीर चोट
पहुिंचािे, या आग से क्षकसी सिंपक्षत्त का क्षविाश काररत
करिे के क्षलए, या मृत्युदिंड या आजीवि कारावास से
दिंडिीय अपराध काररत करिे के क्षलए, या सात वषण
तक की अवक्षध के कारावास से दिंडिीय अपराध
काररत करिे के क्षलए, या क्षकसी मक्षहला पर
अपक्षविता का आरोप लगािे के क्षलए हो, तो अपराधी
को क्षकसी एक अवक्षध के क्षलए कारावास क्षजसे सात
साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आक्षथणक दिंड, या
दोिोिं के साथ दिंक्षडत क्षकया जा सकता है।"

"376D. सा ूशहक बिात्संि-जहाूँ समूह
को गक्षठत करिे वाले या सामान्य आशय के
अग्रसारर् में कायण करिे वाले एक या उससे अक्षधक
व्यन्धक्तयोिं द्वारा स्त्री से बलात्सिंग क्षकया जाएगा, वहाूँ
यह समझा जायेगा क्षक उि व्यन्धक्तयोिं में से प्रत्येक िे
बलात्सिंग का अपराध काररत क्षकया है और कठोर
कारावास से, क्षजसकी अवक्षध बीस वषण से कम िहीिं
होगी, क्षकन्तु जो आजीवि तक की हो सकेगी, क्षजसका
तात्पयण उस व्यन्धक्त के िैसक्षगणक जीवि के शेष के क्षलए
कारावास से होगा, और जुमाणिे से दन्धण्डत क्षकया
जाएगा :

परन्तु ऐसा जुमाणिा पीक्षड़ता के क्षचक्षकत्सीय
खचों और पुिवाणस को पूरा करिे के क्षलए न्यायोक्षचत
और युन्धक्तयुक्त होगा :

परन्तु यह और क्षक इस धारा के अधीि
अक्षधरोक्षपत क्षकसी जुमाणिे का भुगताि पीक्षड़ता को
क्षकया जाएगा।"

"354. स्त्री की िज्जा भंि करने के
आिय से उस पर ह िा या आपराशधक बि का
प्रययि-जो भी कोई क्षकसी स्त्री की लज्जा भिंग करिे या
यह जािते हुए क्षक ऐसा करिे से वह कदाक्षचत उसकी
लज्जा भिंग करेगा के आशय से उस स्त्री पर हमला या
आपराक्षधक बल का प्रयोग करता है, तो उसे क्षकसी
एक अवक्षध के क्षलए कारावास की सजा जो कम से
कम एक वषण होगी और क्षजसे 5 साल तक बढ़ाया जा
सकता है, और साथ ही वह आक्षथणक दिंड के क्षलए भी
उत्तरदायी होगा।"

(ङ) शिरयहबन्द अशधशनय की शवशधिः-

16. उत्तर प्रदेश क्षगरोहबन्द और समाज
क्षवरोधी क्षक्रयाकलाप (क्षिवारर्) अक्षधक्षियम, 1986,
एक क्षवक्षशष्ट अक्षधक्षियम है, क्षजसको क्षगरोहबन्द और
समाज क्षवरोधी क्षक्रयाकलाप को रोकिे और उिका
सामिा करिे के क्षलए और उिसे सम्बद्ध या
अिुषािंक्षगक क्षवषयोिं के क्षलये क्षवशेष उपबन्ध करिे के
क्षलए अक्षधक्षियक्षमत क्षकया गया है।

17. अक्षधक्षियम के शीषणक से क्षवक्षदत होता
है, क्षक यह अक्षधक्षियम क्षगरोहबन्द क्षिवारर् और
समाज क्षवरोधी क्षक्रया कलाप क्षिवारर् के क्षलए
अक्षधक्षियक्षमत क्षकया गया है। इसी िाते धारा
2(ख) (पररभाषा) में "क्षगरोह" की पररभाषा
महत्वपूर्ण हो जाती है, जो एक क्षवस्तृत पररभाषा
है, क्षजसमें ि केवल अपराध के उद्देश्य को
सन्धम्मक्षलत क्षकया गया वरि समाज क्षवरोधी क्षक्रया
कलाप के अिंतगणत पच्चीस क्षभन्न-क्षभन्न अक्षधक्षियम
और अपराध की प्रकृक्षत के आधार पर भी
अपराध या उसके कारर् होिे वाले पररर्ाम को
भी सन्धम्मक्षलत क्षकया है जो हो सकता है क्षकसी
अक्षधक्षियम मे क्षवक्षशष्ट रूप से अपराध की श्रेर्ी मे
11 All. Irfan & Anr. Vs. State of U.P. & Anr.
423
िही हो जैसे पूवण मे वक्षर्णत धारा 3(1) के (दसवें)
"अन्य व्यन्धक्तयोिं को साम्प्रदाक्षयक साम्जस्य मे क्षवघ्न
डालिे के क्षलए क्षहिंसा करिे के क्षलए उद्दीप्त
करिा;" (ग्यारहवें) "जिता में दहशत, सिंिास या
आतिंक फैलािा;" व (अठ्ठारहवें) "वाक्षर्न्धज्यक
शोषर्, बिंधुआ श्रम, बालश्रम, यौि शोषर्, अिंग
हटािे तथा दुव्यणपार, करिे, क्षभिा और समाि
क्षक्रया कलापो के प्रयोजिो के मािव दुव्यणपार।"
सिंभवतः उपरोक्त अपराध क्षकसी अक्षधक्षियम में
पररभाक्षषत ि होिं।

18. "क्षगरोह" को शान्धब्दक अथण के रूप मे
पररभाक्षषत िहीिं क्षकया है, परन्तु उस शब्द का
'तात्पयण' क्या है ऐसा वक्षर्णत क्षकया गया है। जैसा
पी. काशसशिंि व अन्य़ बना पी.एस.जी.
कािेज ऑफ र्ेक्नयिॉजी 1995 सप्ली (2)
एस.सी.सी. 348 में क्षिधाणररत क्षकया गया क्षक
तात्पयण (means) एक सख्त क्षियम की पररभाषा
है, क्षजसके कारर् पररभाषा में लेख बद्ध शब्दो
का अथण पररभाषा के द्वारा क्षदये गये अथण के
अलावा अन्य कोई अथण प्रदाि िहीिं क्षकया जा
सकता है, जबक्षक शब्द "क्षिक्षहत" (Include) एक
व्यापकता को दशाणता है क्षक और पररभाषा का
व्यापक अथण क्षदया जा सकता है।

19. उच्चतम न्यायालय िे िारदा िुप्ता
प्रशत उत्तर प्रदेि िासन व अन्य, 2022
एससीसी ऑनिाइन एससी 514 के क्षवक्षधक
दृष्टािंत में उल्लेख क्षकया है क्षक यह क्षवक्षध की
सुव्यवन्धस्थत व्यवस्था है क्षक अक्षधक्षियम के
प्रावधाि जैसे हैं, वैसे ही पढे व समझे जािे
चाक्षहये। अगर अपराधी क्षकसी क्षगरोह का सदस्य
है और क्षकसी समाज क्षवरोधी ऐसे क्षक्रयाकलापोिं में
सिंलग्न है जो धारा 2(ख), क्षगरोहबन्द अक्षधक्षियम में
वक्षर्णत है जैसे क्षहिंसा,धमकी या अक्षभिास या
प्रपीड़ि या प्रदशणि या अन्य प्रकार से लोक
व्यवस्था
अस्त-वयस्त
करता
है
या
क्षकसी
दुक्षियावी, भौक्षतक, आक्षथणक या अन्य लाभ हेतु के
उद्देश्य से समाज क्षवरोधी क्षक्रया कलाप जो एक से
पच्चीस तक वक्षर्णत है, करता है तो, वो धारा
2(ख) के अिंतगणत क्षगरोहबन्द की पररभाषा के
आधीि मािा जायेगा व उसके क्षवरूद्ध इस
अक्षधक्षियम के अिंतगणत अक्षभयोजि चलाया जा
सकेगा। एक प्रथम सूचिा ररपोटण/आपराक्षधक
मुकदमा के आधार पर भी अक्षभयोजि चलाया जा
सकता है।

20. क्षगरोह की पररभाषा के अन्तगणत क्षकसी पूवण
में समाज क्षवरोधी क्षक्रया कलाप की घटिा की प्रथम
सूचिा ररपोटण की अक्षिवायणता िहीिं है ि ही क्षकसी
प्रकार के क्षगरोह सारर्ी की भी अक्षिवायणता है। इस
अक्षधक्षियम के अिंतगणत अभी तक कोई क्षियमावली
िही बिी है। तथ्ो के आधार पर माि यह क्षिधाणररत
करिा है क्षक क्या क्षक्रया कलाप या कृत पररभाषा के
आधीि है या िहीिं। अगर धारा 2(ख) के खण्ड
(ग्यारह) व (पच्चीस) को ध्याि से परखा जाये तो यह
उि घटिाओिं को भी आधीि करेगा जहाूँ भय के
कारर् अपराधी के क्षवरूद्ध कोई प्रथम सूचिा ररपोटण
दजण भी िहीिं करा पा रहा है। अतः यह मत गलत िहीिं
होगा क्षक कक्षतपय पररन्धस्थक्षतयोिं में पूवण में कोई अपराध
दजण ि भी हो तो भी क्षगरोहबन्द अक्षधक्षियम के आधीि
अक्षभयोजि की कायणवाही की जा सकती है।

(च) उच्च न्यायािय की अन्तशनवशहत िल्लियााँ
:-

21. भारतीय दिंड प्रक्षक्रया सिंक्षहता, की धारा
482, उच्च न्यायालय की अन्तक्षिणक्षहत शन्धक्तयोिं की
व्यावृक्षत्त के प्रावधाि के सम्बिंध में है जो क्षिम्न है ;-

"इस सिंक्षहता की कोई बात उच्च
न्यायालय की ऐसे आदेश देिे की अन्तक्षिणक्षहत शन्धक्त
को सीक्षमत या प्रभाक्षवत करिे वाली ि समझी जाएगी
जैसे इस सिंक्षहता के अधीि क्षकसी आदेश को प्रभावी
करिे के क्षलए या क्षकसी न्यायालय की कायणवाही का
दुरुपयोग क्षिवाररत करिे के क्षलए या क्षकसी अन्य
प्रकार से न्याय के उद्देश्योिं की प्रान्धप्त सुक्षिक्षित करिे
के क्षलए आवश्यक हो।"

22. उच्च न्यायालय की अिंतक्षिणक्षहत शन्धक्तयोिं
को इस सिंक्षहता के क्षकसी प्रावधाि से सीक्षमत िहीिं
क्षकया जा सकता है। यह वो अिंतक्षिणक्षहत शन्धक्तयािं हैं,
जो इस सिंक्षहता के तहत क्षकसी भी आदेश को प्रभावी
करिे के क्षलए, या क्षकसी भी न्यायालय की प्रक्षक्रया का
दुरुपयोग रोकिे के क्षलए या अन्यथा सुरक्षित करिे के
क्षलए या न्याय के उद्देश्योिं की प्रान्धप्त के क्षलए आवश्यक
होिं। यह शन्धक्तयािं इस सिंक्षहता के तहत उच्च न्यायालय
424 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
को प्राप्त िहीिं हुई हैं, बन्धल्क यह शन्धक्तयािं उच्च
न्यायालय में अन्तक्षिणक्षहत हैं, क्षजसे सिंक्षहता के एक
प्रावधाि द्वारा घोक्षषत माि क्षकया गया है।

23. उच्चतम न्यायालय िे कई क्षवक्षधक दृष्टािंतोिं
में यह प्रक्षतपाक्षदत क्षकया है, क्षक इस असाधारर्
शन्धक्तयोिं का दायरा तो व्यापक है, परिंतु इिका
उपयोग सिंयम एवम् सावधािीपूवणक व दुलणभ से भी
दुलणभ प्रकरर् में ही क्षकया जािा चाक्षहए। इसके
उपयोग से क्षकसी भी वैधाक्षिक अक्षभयोजि की
आकन्धस्मक मृत्यु काररत िहीिं की जा सकती है।

24. अन्तक्षिणक्षहत शन्धक्तयोिं का उपयोग करते
हुए ये जाूँचिे के क्षलये की कोई प्राथक्षमकी क्षकसी
प्रथमदृष्ट्या सिंज्ञेय अपराध को प्रकट करती है या िहीिं
, उच्च न्यायालय िा तो क्षकसी जाूँच सिंस्था और िा ही
अपीलीय न्यायालय की तरह कायण कर सकता है। इि
शन्धक्तयोिं के अन्तगणत क्षकसी साक्ष्य की प्रमाक्षर्ता की
जाूँच भी िहीिं की जा सकती है, क्योिंक्षक, इसका
िेिाक्षधकार उस न्यायालय का है, क्षजसके द्वारा
परीिर् क्षकया जा रहा है या क्षकया जायेगा। अन्वेषर्
के दौराि या आरोप पि दायर होिे पर उच्च
न्यायालय इस पहलू को भी िहीिं देख सकता है क्षक
आरोपी की ओर से मामले में अपेक्षित मािक्षसक तत्त्व
या आशय मौजूद था या उसका क्या बचाव है और ि
ही दिंड प्रक्षक्रया सिंक्षहता की धारा 161 के तहत
अक्षभलेन्धखत बयािोिं का गिंभीर आूँकलि कर,
आरन्धिक स्तर पर ही क्षकसी परीिर् को क्षवफल
क्षकया जा सकता है।

25. उच्चतम न्यायालय िे बहुधा कहा है क्षक वो
पररन्धस्थक्षतय क्षजिके होिे पर इि अन्तक्षिणक्षहत शन्धक्तयोिं
का उपयोग क्षकया जा सकता है, उसकी कोई सिंपूर्ण
सूची तो िहीिं बिायी जा सकती, परन्तु कुछ िेक्षर्य िं
उदाहरर्ाथण क्षिम्नक्षलन्धखत है:-

क) जहािं प्राथक्षमकी या क्षशकायत में लगाए
गए आरोप को अगर उिके प्रत्यि रुप में माि क्षलया
जाये और सिंपूर्णता में भी स्वीकार क्षकया जाये, तब भी,
अक्षभयुक्त के क्षवरुद्ध प्रथम दृष्टया कोई अपराध िहीिं
बिता हो,

ख) जहािं प्राथक्षमकी और सिंलग्न सामक्षग्रयोिं
(यक्षद कोई हो), एक सिंज्ञेय अपराध को उद्दााक्षटत िहीिं
करते हैं, तथा दिंड प्रक्षक्रया सिंक्षहता की धारा 156(1) के
तहत पुक्षलस अक्षधकाररयोिं द्वारा अन्वेषर् करिे का
कोई औक्षचत्य साक्षबत ि होता हो;

ग) जहािं प्राथक्षमकी या क्षशकायत में लगाए
गए अक्षववाक्षदत आरोप और उसके समथणि में एकि
क्षकए गए साक्ष्योिं से क्षकसी भी अपराध के कृत्य का
होिा प्रकट िहीिं होता है और आरोपी के क्षवरूद्ध कोई
भी प्रकरर् िहीिं बिता हो;

घ) जहािं प्राथक्षमकी के आरोप सिंज्ञेय
अपराध को उद्दााक्षटत ि होते होिं व केवल गैर-सिंज्ञेय
अपराध को उद्दााक्षटत करते होिं, जहािं पुक्षलस
अक्षधकारी द्वारा मक्षजस्टरेट के आदेश के क्षबिा क्षकसी
भी जािंच की अिुमक्षत िहीिं है, जैसा क्षक दिंड प्रक्षक्रया
सिंक्षहता की धारा 155(2) के तहत पररकन्धित है;

ङ)जहािं प्राथक्षमकी या क्षशकायत में लगाए
गए आरोप इतिे असिंगत और स्वाभाक्षवक रूप से
असिंभव हैं क्षजिके आधार पर कोई भी क्षववेकशील
व्यन्धक्त कभी भी न्यायसिंगत क्षिष्कषण पर िहीिं पहुिंच
सकता है क्षक अक्षभयुक्त के क्षवरुद्ध कायणवाही के क्षलए
पयाणप्त आधार मौजूद हैं;

च)जहािं क्षकसी सिंक्षहता या सिंबिंक्षधत
अक्षधक्षियम (क्षजसके तहत आपराक्षधक कायणवाही शुरू
की गई है) के क्षकसी भी प्रावधाि के तहत क्षवक्षधक
प्रक्षक्रया को प्रारि करिे या प्रचक्षलत रखिे पर
क्षवक्षधक क्षिषेध लगाया गया हो, और/या जहािं सिंक्षहता
या सिंबिंक्षधत अक्षधक्षियम के प्रावधाि, पीक्षड़त पि की
क्षशकायत के क्षलए प्रभावी प्रक्षतकार प्रदाि करते हो।