# Jagdish v. State of U.P

- **Citation:** (2023) 5 ILRA 845
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-05-19
- **Case number:** Crl. Misc. Bail Application No. 31499 of 2022
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/jagdish-v-state-of-u-p-50305
- **Pages:** 5

## Headnote

Sri Rishi Chaddha, A.G.A., Sri Lalit Kumar Shukla

A. भा०दं०सं०- धारा 302, 307 एवं धारा 27/30
आयुध अधधनियम-सूचिाकर्ाा का चचेरा भाई जब खेर्
जोर्कर अपिा ट्रैक्टर लेकर गााँव आ रहा था, र्ो गााँव के
ही आठ िाममर् अमभयुक्र् अंधाधुंध फायररंग शुरू कर दी,
जजसमें आठ लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये जजसमें
उसका एक पडोसी रूप मसंह भी था, जजसकी उपचार के
दौराि मृत्यु हो गई-अपराध में वर्ामाि आवेदक के पुत्र िे
उसकी लाईसेंसी बंदूक लाकर दी और जजससे उसिे
अंधाधुन्ध गोमलयााँ बरसायीं और चोटटल गवाहों को भी
गोली लगी एवं मृर्क की भी गोली लगिे से ही मृत्यु हुई।
शेष िाममर् अपराधधयों के ववरूद्ध आरोपपत्र िहीं
दाखखला ककया गया है व आरोप पत्र केवल वर्ामाि
आवेदक और उसके पुत्र के ववरुद्ध ही दाखखल ककया गया
है-मृर्क का सूचिाकर्ाा से कोई भी सम्बन्ध िहीं है,
जबकक वह आवेदक का जािकार है। वास्र्व में
सूचिाकर्ाा के लोग आवेदक के लोगों के साथ मारपीट
करिे आए और फायररंग की, जजससे मृर्क की मृत्यु हो
गई जो बीच बचाव करिे आया था और इस सम्बन्ध में
मृर्क के भाई िे प्रथम सूचिा ररपोटा भी दजा करायी थी,
परन्र्ु उसमें अंनर्म ररपोटा प्रेवषर् कर दी गई और
वर्ामाि में एक ववरोध याधचका दाखखल की गई है,
जजसपर अभी निर्ाय आिा शेष है-प्रथम सूचिा ररपोटा
एक कधथर् चक्षुदशी िे दजा करायी थी, जजसमें आठ लोगों
को अपराधी के रूप में िाममर् ककया गया था और शस्त्र
भी िाममर् ककये गये थे, परन्र्ु मात्र आवेदक और उसके
पुत्र को छोडकर बाकी सभी के ववरुद्ध कोई साक्ष्य ि
ममलिे के कारर् कोई कायावाही िहीं की गई अर्ः
सूचिाकर्ाा द्वारा अमभयोग पक्ष में अनर्श्योजक्र् की गई
है, जजसका अथा यह है कक अमभयोजि कथािक पूर्ा रूप
से ममथ्या है- प्रारम्भ में आवेदक और उसके पुत्र के
अनर्ररक्र् और लोग भी अपराधी के रूप में िाममर् ककये
गये थे, परन्र्ु अन्वेषर् के दौराि साक्ष्य के बयािों के
आधार पर आरोपपत्र केवल वर्ामाि आवेदक और उसके
पुत्र के ववरूद्ध दाखखल ककया गया और ववमशष्ट रूप से
यह आरोप लगाया गया कक आवेदक के पुत्र िे आवेदक
को उसकी लाईसेंसी बंदूक लाकर दी, जजससे आवेदक िे
अंधाधुंध फायररंग की, जजसके कारर् एक व्यजक्र् की
मृत्यु हो गई और छह अन्य घायल हो गए। सभी को
आग्िेयास्त्र की चोटें लगीं- केवल इस कारर् कक प्रथम
सूचिा ररपोटा में ज्यादा व्यजक्र् अपराधी के रूप में
िाममर् ककये गये हैं, सम्पूर्ा अमभयोजि कथािक को
झूठा िहीं करार टदया जा सकर्ा। आवेदक के ववद्वाि
अधधवक्र्ा का यह कथि कक वास्र्ववकर्ा कुछ और
अलग है, इस आधार पर ववश्वसिीय िहीं मािी जा
सकर्ी क्योंकक मृर्क के भाई द्वारा मलखायी गई प्रथम
सूचिा ररपोटा पर अन्वेषर् के बाद अंनर्म ररपोटा लगा दी
गई है-अर्ः आवेदक का घटिा स्थल पर उपजस्थर् होिा
846 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
व उसके द्वारा अंधाधुन्ध गोली चलािा व जजसके कारर्
एक व्यजक्र् की मृत्यु हो जािा एवं छह अन्य लोगों का
घायल हो जािा को प्रथम दृष्टया असत्य माििे का कोई
कारर् िहीं है और यह देखर्े हुए कक यह एक संगीि
अपराध है, अर्ः वाद के गुर्-दोष को प्रभाववर् ककये बगैर
इस जमािर् याधचका को निरस्र् ककया जार्ा है। ( 1 ls
12)

B. जमािर् देिे के मलये ववचारात्मक कारक है, अपराध
होिे की पररजस्थनर्यों की प्रकृनर् और गंभीरर्ा ; पीडडर्
और गवाहों के संदभा में आरोपी की जस्थनर् और हैमसयर् ;
आरोपी के न्याय प्रकिया से भागिे की संभाविा ; अपराध
दोहरािे की संभाविा ; मामले में संभाववर् सजा की
कठोर संभाविा के साथ अपिे स्वयं के जीवि को खर्रे
में डालिा ; गवाहों के साथ छेडछाड ; मामले का इनर्हास
और साथ ही इसकी जांच और अन्य प्रासंधगर् आधार, जो
अन्य महत्वपूर्ा कारकों पर ध्याि करर्े हुए, व्यापक रूप
से निधााररर् िहीं ककये जा सकर्े हैं। प्रासंधगक कारक
कौि से हो सकर्े हैं, इसका कोई निधााररर् नियम (स्ट्रेट
जैकेट फॉमूाला) कभी भी नियर् िहीं ककया जा सकर्ा है,
हालांकक, कुछ महत्वपूर्ा कारक जजन्हें अन्य कारकों के
साथ हमेशा ववचारर्ीय मािा जार्ा है, वो हैं, प्रथम
दृष्टया अमभयुक्र् की संमलप्र्र्ा, आरोप की प्रकृनर् और
गंभीरर्ा, सजा की कठोरर्ा, आरोपी का चररत्र, जस्थनर्
और उसकी अवजस्थनर् से संबंधधर् है। (10, 12) (E-6)

उद्धृर् मामलों की सूची:

## Text

5 All. Jagdish Vs. State of U.P.
845
immediately to the concerned police station
or NGO or any other appropriate place as
well as we have to discourage child labour,
child beggars to create a movement in the
society so that nexus between web of child
trafficking maybe cracked and innocent
children may not be trapped in their web as
well as we have to take care as the society
to help the rescued child/children.

23. Accordingly, the outcome of
above discussion is that bail application of
applicant
is
rejected
with
above
observations.
----------
(2023) 5 ILRA 845
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 19.05.2023

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Crl. Misc. Bail Application No. 31499 of 2022

Jagdish ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Applicant:
Sri Pawan Kumar Shukla, Sri Ram Kumar

Counsel for the Respondent:
Sri Rishi Chaddha, A.G.A., Sri Lalit Kumar Shukla

A. भा०दं०सं०- धारा 302, 307 एवं धारा 27/30
आयुध अधधनियम-सूचिाकर्ाा का चचेरा भाई जब खेर्
जोर्कर अपिा ट्रैक्टर लेकर गााँव आ रहा था, र्ो गााँव के
ही आठ िाममर् अमभयुक्र् अंधाधुंध फायररंग शुरू कर दी,
जजसमें आठ लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये जजसमें
उसका एक पडोसी रूप मसंह भी था, जजसकी उपचार के
दौराि मृत्यु हो गई-अपराध में वर्ामाि आवेदक के पुत्र िे
उसकी लाईसेंसी बंदूक लाकर दी और जजससे उसिे
अंधाधुन्ध गोमलयााँ बरसायीं और चोटटल गवाहों को भी
गोली लगी एवं मृर्क की भी गोली लगिे से ही मृत्यु हुई।
शेष िाममर् अपराधधयों के ववरूद्ध आरोपपत्र िहीं
दाखखला ककया गया है व आरोप पत्र केवल वर्ामाि
आवेदक और उसके पुत्र के ववरुद्ध ही दाखखल ककया गया
है-मृर्क का सूचिाकर्ाा से कोई भी सम्बन्ध िहीं है,
जबकक वह आवेदक का जािकार है। वास्र्व में
सूचिाकर्ाा के लोग आवेदक के लोगों के साथ मारपीट
करिे आए और फायररंग की, जजससे मृर्क की मृत्यु हो
गई जो बीच बचाव करिे आया था और इस सम्बन्ध में
मृर्क के भाई िे प्रथम सूचिा ररपोटा भी दजा करायी थी,
परन्र्ु उसमें अंनर्म ररपोटा प्रेवषर् कर दी गई और
वर्ामाि में एक ववरोध याधचका दाखखल की गई है,
जजसपर अभी निर्ाय आिा शेष है-प्रथम सूचिा ररपोटा
एक कधथर् चक्षुदशी िे दजा करायी थी, जजसमें आठ लोगों
को अपराधी के रूप में िाममर् ककया गया था और शस्त्र
भी िाममर् ककये गये थे, परन्र्ु मात्र आवेदक और उसके
पुत्र को छोडकर बाकी सभी के ववरुद्ध कोई साक्ष्य ि
ममलिे के कारर् कोई कायावाही िहीं की गई अर्ः
सूचिाकर्ाा द्वारा अमभयोग पक्ष में अनर्श्योजक्र् की गई
है, जजसका अथा यह है कक अमभयोजि कथािक पूर्ा रूप
से ममथ्या है- प्रारम्भ में आवेदक और उसके पुत्र के
अनर्ररक्र् और लोग भी अपराधी के रूप में िाममर् ककये
गये थे, परन्र्ु अन्वेषर् के दौराि साक्ष्य के बयािों के
आधार पर आरोपपत्र केवल वर्ामाि आवेदक और उसके
पुत्र के ववरूद्ध दाखखल ककया गया और ववमशष्ट रूप से
यह आरोप लगाया गया कक आवेदक के पुत्र िे आवेदक
को उसकी लाईसेंसी बंदूक लाकर दी, जजससे आवेदक िे
अंधाधुंध फायररंग की, जजसके कारर् एक व्यजक्र् की
मृत्यु हो गई और छह अन्य घायल हो गए। सभी को
आग्िेयास्त्र की चोटें लगीं- केवल इस कारर् कक प्रथम
सूचिा ररपोटा में ज्यादा व्यजक्र् अपराधी के रूप में
िाममर् ककये गये हैं, सम्पूर्ा अमभयोजि कथािक को
झूठा िहीं करार टदया जा सकर्ा। आवेदक के ववद्वाि
अधधवक्र्ा का यह कथि कक वास्र्ववकर्ा कुछ और
अलग है, इस आधार पर ववश्वसिीय िहीं मािी जा
सकर्ी क्योंकक मृर्क के भाई द्वारा मलखायी गई प्रथम
सूचिा ररपोटा पर अन्वेषर् के बाद अंनर्म ररपोटा लगा दी
गई है-अर्ः आवेदक का घटिा स्थल पर उपजस्थर् होिा
846 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
व उसके द्वारा अंधाधुन्ध गोली चलािा व जजसके कारर्
एक व्यजक्र् की मृत्यु हो जािा एवं छह अन्य लोगों का
घायल हो जािा को प्रथम दृष्टया असत्य माििे का कोई
कारर् िहीं है और यह देखर्े हुए कक यह एक संगीि
अपराध है, अर्ः वाद के गुर्-दोष को प्रभाववर् ककये बगैर
इस जमािर् याधचका को निरस्र् ककया जार्ा है। ( 1 ls
12)

B. जमािर् देिे के मलये ववचारात्मक कारक है, अपराध
होिे की पररजस्थनर्यों की प्रकृनर् और गंभीरर्ा ; पीडडर्
और गवाहों के संदभा में आरोपी की जस्थनर् और हैमसयर् ;
आरोपी के न्याय प्रकिया से भागिे की संभाविा ; अपराध
दोहरािे की संभाविा ; मामले में संभाववर् सजा की
कठोर संभाविा के साथ अपिे स्वयं के जीवि को खर्रे
में डालिा ; गवाहों के साथ छेडछाड ; मामले का इनर्हास
और साथ ही इसकी जांच और अन्य प्रासंधगर् आधार, जो
अन्य महत्वपूर्ा कारकों पर ध्याि करर्े हुए, व्यापक रूप
से निधााररर् िहीं ककये जा सकर्े हैं। प्रासंधगक कारक
कौि से हो सकर्े हैं, इसका कोई निधााररर् नियम (स्ट्रेट
जैकेट फॉमूाला) कभी भी नियर् िहीं ककया जा सकर्ा है,
हालांकक, कुछ महत्वपूर्ा कारक जजन्हें अन्य कारकों के
साथ हमेशा ववचारर्ीय मािा जार्ा है, वो हैं, प्रथम
दृष्टया अमभयुक्र् की संमलप्र्र्ा, आरोप की प्रकृनर् और
गंभीरर्ा, सजा की कठोरर्ा, आरोपी का चररत्र, जस्थनर्
और उसकी अवजस्थनर् से संबंधधर् है। (10, 12) (E-6)

उद्धृर् मामलों की सूची:

1. राजस्र्ान राज्य, जयपुर बनाम बलचंद @ बललया
(1977 एआईआर 2447, 1978 एससीआर (1) 535)।

2. राम र्ोववंद उपाध्याय बनाम सुदशतन लसंहिः (2002) 3
एससीसी 598 और नीरू यादव बनाम उत्तर प्रदेश शासन
(2013)15 एससीसी 422)।

3. उत्तर प्रदेश शासन प्रयर् अमरमखर् ब्रत्रपाठी, (2005) 8
एससीसी 21)।

4. र्ुरचरर् लसंह बनाम राज्य (ददल्ली प्रशासन),
(1978) 1 एससीसी 118)।
5. मन्नो लाल जायसवाल बनाम उत्तर प्रदेश शासन और
अन्यिः 2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 89 आलशम
बनाम राष्रीय जांच एजेंसी : (2022) 1 एससीसी 695

6. ईश्वरजी नार्ाजी माली बनाम र्ुजरार् राज्य और
अन्य, 2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 55)।

7. प्रहलाद लसंह भाटी बनाम एनसीटी आर् ददल्ली और
अन्यिः(2001) 4 एससीसी 280)।

8. मदहपाल बनाम राजेश कुमार, (2020) 2 एससीसी
118 और सुिी वाई बनाम राजस्र्ान राज्य और अन्यिः
2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 458)।

9. मनोज कुमार खोखर बनाम राजस्र्ान राज्य और
अन्य (2022)3 एनसीसी 501, दीपक यादव प्रयर् उत्तर
प्रदेश राज्य व एक अन्य (2022)8 एससीसी 559)।

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. आवेदक के ववद्वान अधधवक्र्ा िी पवन
कुमार शुक्ला, िीर् होल्िर िी राम कुमार,
सूचनाकर्ात की र्रर् से ववद्वान अधधवक्र्ा िी
लललर् कुमार शुक्ला एवं राज्य की र्रर् से ववद्वान
अपर शासकीय अधधवक्र्ा िी ऋवष चड्ढा को
ध्यानपूवतक सुना र्या र्र्ा पत्रावली का अवलोकन
ककया र्या।

2. वर्तमान आपराधधक प्रकीर्त प्रर्म जमानर्
याधचका
आवेदक/अलभयुक्र्
जर्दीश
द्वारा
मु०अ०सं० 328, वषत 2021, अंर्र्तर् धारा 302, 307
भा०दं०सं० एवं धारा 27/30 आयुध अधधयनयम, र्ाना
बलदेव, ण्जला मर्ुरा के अंर्र्तर् न्यायालय सत्र
न्यायाधीश, मर्ुरा द्वारा उसके जमानर् प्रार्तनापत्र
संख्या- 370, वषत 2022 को आदेश ददनांक
17.02.2022 के द्वारा यनरस्र् करने के उपरान्र् इस
न्यायालय के समक्ष दाखखल ककया र्या है।
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3. प्रर्म सूचना के र्थ्य से ववददर् होर्ा है
कक सूचनाकर्ात का चचेरा भाई ददनांक 25.10.2021
को जब खेर् जोर्कर अपना रैक्टर लेकर र्ााँव आ
रहा र्ा, र्ो र्ााँव के ही आठ नालमर् अलभयुक्र् जो
अपने हार् में लाईसेंसी बंदूक, देशी अवैध बंदूक,
अवैध पौना, देशी र्मन्चा, देशी बंदूक ललये हुए र्े,
ण्जनमें से चार पुरुष और चार मदहलाएं र्ीं, सभी
उसके चचेरे भाई के पीछे दौड़ कर आए और जैसे ही
वह रैक्टर से उर्र कर घऱ की र्रर् भार्ा, उन्होंने
अंधाधुंध र्ायररंर् शुरू कर दी, ण्जसमें आठ लोर्
र्म्भीर रूप से घायल हो र्ये ण्जसमें उसका एक
पड़ोसी रूप लसंह भी र्ा, ण्जसकी उपचार के दौरान
मृत्यु हो र्ई।

4. आवेदक के ववद्वान अधधवक्र्ा िी पवन
कुमार शुक्ला ने प्रबलर्ापूवतक आवेदन ककया कक
मजरूब र्वाह के बयानों में भी केवल इर्ना बर्ाया
र्या है कक अपराध में वर्तमान आवेदक के पुत्र ने
उसकी लाईसेंसी बंदूक लाकर दी और ण्जससे उसने
अंधाधुन्ध र्ोललयााँ बरसायीं और चोदटल र्वाहों को
भी र्ोली लर्ी एवं मृर्क की भी र्ोली लर्ने से ही
मृत्यु हुई। शेष नालमर् अपराधधयों के ववरूद्ध
आरोपपत्र नहीं दाखखला ककया र्या है व आरोप पत्र
केवल वर्तमान आवेदक और उसके पुत्र के ववरुद्ध
ही दाखखल ककया र्या है।

5. आवेदक के ववद्वान अधधवक्र्ा ने आर्े
कहा कक मृर्क का सूचनाकर्ात से कोई भी सम्बन्ध
नहीं है, जबकक वह आवेदक का जानकार है। वास्र्व
में सूचनाकर्ात के लोर् आवेदक के लोर्ों के सार्
मारपीट करने आए और र्ायररंर् की, ण्जससे मृर्क
की मृत्यु हो र्ई जो बीच बचाव करने आया र्ा और
इस सम्बन्ध में मृर्क के भाई ने प्रर्म सूचना
ररपोटत भी दजत करायी र्ी, परन्र्ु उसमें अंयर्म
ररपोटत प्रेवषर् कर दी र्ई और वर्तमान में एक ववरोध
याधचका दाखखल की र्ई है, ण्जसपर अभी यनर्तय
आना शेष है।

6. प्रर्म सूचना ररपोटत एक कधर्र् चक्षुदशी
ने दजत करायी र्ी, ण्जसमें आठ लोर्ों को अपराधी के
रूप में नालमर् ककया र्या र्ा और शस्त्र भी नालमर्
ककये र्ये र्े, परन्र्ु मात्र आवेदक और उसके पुत्र को
छोड़कर बाकी सभी के ववरुद्ध कोई साक्ष्य न लमलने
के कारर् कोई कायतवाही नहीं की र्ई। अर्िः
सूचनाकर्ात द्वारा अलभयोर् पक्ष में अयर्श्योण्क्र् की
र्ई है, ण्जसका अर्त यह है कक अलभयोजन कर्ानक
पूर्त रूप से लमथ्या है।

7. बहस का ववरोध शासन की र्रर् से
ववद्वान अपर शासकीय अधधवक्र्ा िी ऋवष चड्ढा
एवं िी लललर् कुमार शुक्ला ने ककया कक सभी
मजरूब साक्ष्यों ने पूर्त रूप से अलभयोजन कर्ानक
का समर्तन ककया है कक वर्तमान आवेदक
घटनास्र्ल पर मौजूद र्ा, उसी के बेटे ने घर से
बंदूक लाकर उसको दी और बाद में उसके द्वारा
अंधाधुन्ध र्ायररंर् की र्ई, ण्जसके कारर् एक
व्यण्क्र् की मृत्यु हो र्ई और छह अन्य लोर् र्ोली
लर्ने के कारर् घायल हो र्ए। मृत्यु पश्चार् शव
ववच्छेदन प्रपत्र व चोट प्रपत्र से प्रर्म-दृष्टया यह
ववददर् होर्ा है कक सभी को आग्नेयास्त्र की चोट
लर्ी र्ी। अर्िः आरोप की र्म्भीरर्ा व आवेदक का
कृत्य देखर्े हुए यह याधचका यनरस्र् की जाए।

जमािर् की ववधध

8.(क) सारर्लभतर् धारर्ा से संभवर्िः मूल
यनयम, जमानर् है न कक कारार्ार (देखें : राजस्थाि
राज्य, जयपुर बिाम बलचंद @ बमलया (1977
एआईआर 2447, 1978 एससीआर (1) 535)।
848 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
भा.दं.सं. की धारा 439 के र्हर् जमानर् देने की
शण्क्र् के व्यापक आयाम हैं र्र्ा न्यायालय को
असीलमर् र्ो नहीं परन्र्ु पयातप्र् वववेकाधधकार
प्रदान ककये र्ये हैं, ण्जसका उपयोर् न र्ो सामान्य
रूप से और न ही मनमाने रूप से, परन्र्ु न्यायसंर्र्
रूप से करने के ललए प्रस्र्ाववर् ककया र्या है। (देखेंिः
राम गोववंद उपाध्याय बिाम सुदशाि मसंहः (2002)
3 एससीसी 598 और िीरू यादव बिाम उत्तर प्रदेश
शासि (2013)15 एससीसी 422)।

(ख) जमानर् देने के ललये ववचारात्मक कारक
है, अपराध होने की पररण्स्र्यर्यों की प्रकृयर् और
र्ंभीरर्ा ; पीडड़र् और र्वाहों के संदभत में आरोपी
की ण्स्र्यर् और हैलसयर् ; आरोपी के न्याय प्रकक्रया
से भार्ने की संभावना ; अपराध दोहराने की
संभावना ; मामले में संभाववर् सजा की कठोर
संभावना के सार् अपने स्वयं के जीवन को खर्रे में
िालना ; र्वाहों के सार् छेड़छाड़ ; मामले का
इयर्हास और सार् ही इसकी जांच और अन्य
प्रासंधर्र् आधार, जो अन्य महत्वपूर्त कारकों पर
ध्यान करर्े हुए, व्यापक रूप से यनधातररर् नहीं ककये
जा सकर्े हैं। (देखें : गुरचरर् मसंह बिाम राज्य
(टदल्ली प्रशासि), (1978) 1 एससीसी 118)।

(र्) प्रासंधर्क कारक कौन से हो सकर्े हैं,
इसका कोई यनधातररर् यनयम (स्रेट जैकेट र्ॉमूतला)
कभी भी यनयर् नहीं ककया जा सकर्ा है, हालांकक,
कुछ महत्वपूर्त कारक ण्जन्हें अन्य कारकों के सार्
हमेशा ववचारर्ीय माना जार्ा है, वो हैं, प्रर्म
दृष्टया अलभयुक्र् की संललप्र्र्ा, आरोप की प्रकृयर्
और र्ंभीरर्ा, सजा की कठोरर्ा, आरोपी का चररत्र,
ण्स्र्यर् और उसकी अवण्स्र्यर् से संबंधधर् है। (देखें:
उत्तर प्रदेश शासि प्रनर् अमरमखर् त्रत्रपाठी, (2005)
8 एससीसी 21)।

(घ) मन्िो लाल जायसवाल बिाम उत्तर प्रदेश
शासि और अन्यः 2022 एससीसी ऑिलाइि
एससी 89 में उच्चर्म न्यायालय ने कहा है कक, जब
अलभयुक्र्ों को भारर्ीय दंि संदहर्ा की धारा 149 के
र्हर् दंिनीय अपराधों के ललए आरोवपर् ककया र्या है
और जब उनकी उपण्स्र्यर् स्र्ावपर् हो जार्ी है और यह
कहा र्या हो कक वो ववधध ववरुद्ध जमाव के सदस्य र्े,
र्ो उनकी व्यण्क्र्र्र् भूलमका और/या व्यण्क्र्र्र्
आरोपी द्वारा ककया र्या अत्युण्क्र् महत्वपूर्त और/या
प्रासंधर्क नहीं होर्ी है।

(ड़) आमशम बिाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी : (2022)
1 एससीसी 695 में उच्चर्म न्यायालय ने कहा है कक
एक बार जब यह स्पष्ट हो जाये कक समयोधचर् ववचारर्
संभव नहीं हो पायेर्ा और आरोपी कारार्ार में एक दीघत
अवधध व्यर्ीर् कर चुका है, र्ो न्यायालय आम र्ौर पर
उसे जमानर् पर छोड़ने के ललए बाध्य हो जार्े हैं।

(च) आरोपी को जमानर् पर ररहा करने का आधार
मात्र
इसललए
कक
अलभयोजन
का
मामला,
पररण्स्र्यर्जन्य साक्ष्य पर आधाररर् है, नहीं हो सकर्ा
है, अर्र जांच के दौरान साक्ष्य/र्थ्य एकत्र ककये र्ये हों
और प्रर्म दृष्टया घटनाओं की पूरा िृंखला स्र्ावपर् हो
र्ई है। (देखें: ईश्वरजी िागाजी माली बिाम गुजरार्
राज्य और अन्य, 2022 एससीसी ऑिलाइि एससी
55)।

(छ) यह भी ध्यान रखा जाना चादहए कक जमानर्
देने के ललए ववधाययका ने "साक्ष्य" के स्र्ान पर
"ववश्वास करने के ललए उधचर् आधार" शब्दों का प्रयोर्
ककया है, ण्जसका अर्त है कक जमानर् देने से संबंधधर्
न्यायालय केवल इर्नी संर्ुण्ष्ट कर सकर्ा है कक क्या
आरोपी के खखलार् कोई वास्र्ववक मामला है और
अलभयोजन पक्ष आरोप के समर्तन में प्रर्म दृष्टया
साक्ष्य पेश करने में सक्षम होर्ा। (देखें: प्रहलाद मसंह
भाटी बिाम एिसीटी आफ टदल्ली और अन्यः(2001) 4
एससीसी 280)।

(ज) मुक्र् न्याय का एक मौललक आधार है, ण्जसके
ललए हमारी न्याययक प्रर्ाली प्रयर्बद्ध है, कक वो कारक
5 All. Ganga Ram Vs. State of U.P.
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जो न्यायाधीश के मानस में ज़मानर् को अस्वीकृर् या
स्वीकृर् करने के ललए मूल्यांककर् ककये र्ये, वो पाररर्
आदेश में उल्लेखखर् ककये जायें। मुक्र् न्याय इस धारर्ा
पर आधाररर् है कक न्याय न केवल ककया जाना चादहए,
बण्ल्क स्पष्ट और यनस्संदेह रूप से होर्ा हुआ ददखना भी
चादहए। न्यायसंर्र् यनर्तय देने का न्यायाधीशों का
कर्तव्य इस प्रयर्बद्धर्ा का हृदय है। (देखें: मटहपाल बिाम
राजेश कुमार, (2020) 2 एससीसी 118 और सुश्री वाई
बिाम राजस्थाि राज्य और अन्यः 2022 एससीसी
ऑिलाइि एससी 458)।

(झ) जमानर् के आवेदन पर आदेश पाररर् करर्े
समय ववस्र्ृर् वववरर् का उल्लेख, इस धारर्ा के नार्े
नहीं ककया जा सकर्ा है कक मामला ऐसा है, ण्जसके
पररर्ामस्वरूप दोषलसद्धध हो सकर्ी है या इसके ववपरीर्,
दोषमुण्क्र् हो सकर्ी है। हालांकक, जमानर् के आवेदन पर
यनर्तय लेने वाला न्यायालय मामले के भौयर्क पहलुओं
से अपने यनर्तय को पूरी र्रह से अलर् नहीं कर सकर्ा,
जैसे आरोपी के खखलार् लर्ाए र्ए आरोप ; अर्र आरोप
यर्ोधचर् संदेह से परे साब्रबर् होर्े हैं और इसके
पररर्ामस्वरूप दोषलसद्धध होर्ी है र्ो सजा की कठोरर्ा ;
अलभयुक्र् द्वारा र्वाहों को प्रभाववर् करने की उधचर्
आशंका ; साक्ष्यों से छेड़छाड़ ; अलभयोजन के मामले में
यनराधारर्ा ; आरोपी का आपराधधक पूवतवृत्त ; और आरोपी
के ववरुद्ध आरोप के समधतन में न्यायालय की प्रर्म
दृष्टया संर्ुण्ष्ट। (देखेंिः मिोज कुमार खोखर बिाम
राजस्थाि राज्य और अन्य (2022)3 एिसीसी 501, दीपक
यादव प्रनर् उत्तर प्रदेश राज्य व एक अन्य (2022)8
एससीसी 559)।

9. उपरोक्र् र्थ्यों की पृष्ठभूलम में यह ववददर् होर्ा
है कक प्रारम्भ में आवेदक और उसके पुत्र के अयर्ररक्र्
और लोर् भी अपराधी के रूप में नालमर् ककये र्ये र्े,
परन्र्ु अन्वेषर् के दौरान साक्ष्य के बयानों के आधार पर
आरोपपत्र केवल वर्तमान आवेदक और उसके पुत्र के
ववरूद्ध दाखखल ककया र्या और ववलशष्ट रूप से यह आरोप
लर्ाया र्या कक आवेदक के पुत्र ने आवेदक को उसकी
लाईसेंसी बंदूक लाकर दी, ण्जससे आवेदक ने अंधाधुंध
र्ायररंर् की, ण्जसके कारर् एक व्यण्क्र् की मृत्यु हो र्ई
और छह अन्य घायल हो र्ए। सभी को आग्नेयास्त्र की
चोटें लर्ीं।

10. केवल इस कारर् कक प्रर्म सूचना ररपोटत में
ज्यादा व्यण्क्र् अपराधी के रूप में नालमर् ककये र्ये हैं,
सम्पूर्त अलभयोजन कर्ानक को झूठा नहीं करार ददया जा
सकर्ा। आवेदक के ववद्वान अधधवक्र्ा का यह कर्न कक
वास्र्ववकर्ा कुछ और अलर् है, इस आधार पर
ववश्वसनीय नहीं मानी जा सकर्ी क्योंकक मृर्क के भाई
द्वारा ललखायी र्ई प्रर्म सूचना ररपोटत पर अन्वेषर् के
बाद अंयर्म ररपोटत लर्ा दी र्ई है।

11. अर्िः आवेदक का घटना स्र्ल पर उपण्स्र्र्
होना व उसके द्वारा अंधाधुन्ध र्ोली चलाना व ण्जसके
कारर् एक व्यण्क्र् की मृत्यु हो जाना एवं छह अन्य लोर्ों
का घायल हो जाना को प्रर्म दृष्टया असत्य मानने का
कोई कारर् नहीं है और यह देखर्े हुए कक यह एक संर्ीन
अपराध है, अर्िः वाद के र्ुर्-दोष को प्रभाववर् ककये बर्ैर
इस जमानर् याधचका को निरस्र् ककया जार्ा है।
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(2023) 5 ILRA 849
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 22.05.2023

BEFORE

THE HON'BLE DR. KAUSHAL JAYENDRA
THAKER, J.
THE HON'BLE SHIV SHANKER PRASAD, J.

Criminal Appeal No. 3 of 1991

Ganga Ram ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent