# Kajal v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2023) 4 ILRA 736
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-01-25
- **Case number:** Application U/S 482. No. 15253 of 2022
- **Bench:** Umesh Chandra Sharma
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/kajal-v-state-of-u-p-ors-50012
- **Pages:** 5

## Headnote

Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-Applicant
accused of aiding the prime accused of rapecriminal conspiracy-to provide due opportunity
to prime accuse to conduct rape-being women
will not exonerate her of criminal conspiracy-her
role duly St.d in the St.ment of victim u/s 161
Cr.P.C. and u/s 164 Cr.P.C.-also evidence
sufficient to file charge sheet.

Application dismissed. (E-9)

List of Cases cited:

## Text

736 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
corruption cases and the cases where
there
is
abnormal
delay/laches
in
initiating criminal prosecution, are being
filed. Consequently, in an appropriate
case, the truth and veracity of the
allegations made can be verified by the
Magistrate, regard being had to the nature
thereof."

26. Thus taking into account the
totality of the circumstances and the
observation made by the Hon'ble Apex
Court in this regard, I have got no
hesitation
to
quash
the
impugned
summoning
order
dated
19.11.2022
passed by Additional District & Sessions
Judge, Court No.2/Special Judge, SC/ST
Act,
Kanpur
Dehat.
Since
parallel
proceeding by way of FIR is already
progressing and the present controversy
is nothing but an arm twisting of the
applicants by levelling more serious and
grim allegation in it and therefore, it
cannot be sustained and the present
application stands ALLOWED.
----------
(2023) 4 ILRA 736
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 25.01.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Application U/S 482. No. 15253 of 2022

Kajal ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Sri Rohit Nandan Pandey

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

Criminal
Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 482-Applicant
accused of aiding the prime accused of rapecriminal conspiracy-to provide due opportunity
to prime accuse to conduct rape-being women
will not exonerate her of criminal conspiracy-her
role duly St.d in the St.ment of victim u/s 161
Cr.P.C. and u/s 164 Cr.P.C.-also evidence
sufficient to file charge sheet.

Application dismissed. (E-9)

List of Cases cited:

1. Bable Vs St. of Chattisgarh A.I.R. 2012 SC
2621

2. Mukesh Vs NCT of Delhi & anr, AIR 2017 SC
2161

3. Mrityunjai Vishwas Vs Pranav @ Kutti Vishwas
& anr. AIR 2013 SC 3334

4. St. of U.P. Vs Manoj Kr Pandey AIR 2009, SC
711

5. Santosh Mulya Vs St. of Karn., 2010 5 SCC
445

6. Priya patel Vs St. of M.P. (2006) 6 SCC 263

7. Criminal Appeal no. 64/2006 -Sarla Vs St.
order date 06.02.2014

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J.)

१. प्रार्थिनी की तरफ से र्िद्वान अर्ििक्ता श्री रोर्ित नन्दन
पाण्डेय तथा उत्तर प्रदेश राज्य की तरफ से र्िद्वान अपर शासकीय
अर्ििक्ता पंकज कुमार र्िपाठी को सुना एिं पिािली का
अिलोकन र्कया।

२. यि प्राथिना पि िाद संख्या 211 िर्ि 2017 अपराि
संख्या 290/2017 अन्तर्ित िारा 376, 120-बी एिं 3/4
पॉक्सो अर्िर्नयम थाना र्सिानी र्ेट जनपद र्ार्जयाबाद द्वारा र्िशेर्
न्यायािीश (पॉक्सो अर्िर्नयम) में प्रस्तुत आरोप पि र्दनााँर्कत
17.09.2017 तथा संज्ञान आदेश र्दनााँर्कत 06.10.2017
एिं र्िशेर् न्यायािीश पाक्सो अर्िर्नयम, र्ार्जयाबाद द्वारा पाररत
4 All. Kajal Vs. State of U.P. & Ors.
737
आदेश र्दनााँर्कत 12.05.2022 को र्नरस्त करने िेतु प्रस्तुत
र्कया र्या िै।

३. प्राथिना पि में यि आिार र्लया र्या िै र्क प्रथम सूचना
ररपोटि र्िलर्बबत एिं अस्पष्ट िै र्जसमें प्रार्थिनी नार्मत निीं िै। िि
पूर्ितया र्नदोर् एिं झूंठी फंसायी र्यी िै। घटना के सबबन्ि में
पीऱ्िता की आयु र्चर्कत्सक ने 21 िर्ि िोना पाया परन्तु र्ििेचक
ने शैर्िक प्रमार् पि के अनुसार 17 िर्ि 2 माि िोना माना िै।
िारा 161 एिं िारा 164 दं०प्र०सं० के बयानों में र्िन्नता िै।
र्ििेचना सरसरी तौर पर की र्यी िै। आरोप पि मनमाना, अिैि एिं
र्िर्ितः पोर्र्ीय निीं िै। आरोर्पत अपराि निीं बनते िैं। संज्ञान लेते
समय र्िर्िक मर्स्तष्क का प्रयोर् निीं र्कया र्या िै। संज्ञान आदेश
अप्रकट एिं मौन िै। प्रर्िया का पालन र्कये र्बना अजमानतीय
अर्िपि र्नर्ित र्कया र्या िै। प्रथम सूचना ररपोटि दुिािनापूर्ि तथा
दूरस्थ आशय से प्रपीऱ्ित करने तथा ब्लैकमेल करने के र्लए दजि
कराया र्या िै र्जसकी जानकारी मुख्य

४ . संिेप में िाद के तथ्य यि िैं र्क प्रार्थिनी मुकदमा
अपराि संख्या 290/2017 थाना र्सिानी र्ेट, जनपद र्ार्जयबाद
के अपराि संख्या 376, 120-बी िा0दं0सं0 तथा 3⁄4 एिं
16/17 पाक्सो अर्िर्नयम का िाद जो सी0जे0एम0 र्ार्जयाबाद
के न्यायालय में लर्बबत िै, िााँर्ित िै। प्रथम सूचना ररपोटि के तथ्य
यि िैं र्क िादी की पुिी आयु लर्िर् 15 िर्ि अपनी ब़िी बिन के
ननद के र्ििाि में सर्बमर्लत िोने िेतु र्दनांक 18.02.2017 ग्राम
अटोर आई थी। ब़िी पुिी की सास श्रीमती कृष्र्ा देिी पत्नी स्िर्ीय
कृष्र्पाल जो ब़िी पुिी की सास िै, बिाने से उसे ग्राम अटोर में
रोक र्लया तथा र्दनांक 22.02.2017 को रार्ि में उसके पुिी को
र्जतेन्र ऊफि राघि र्निासी अटोर के घर सोने के बिाने ले र्ई जिााँ
रार्ि में उसकी पुिी के साथ र्जतेन्र ऊफि राघि ने दुष्कमि र्कया िै।
जब िि अपनी पुिी को लेने ग्राम अटोर आया तो उसकी पुिी ने
आपबीती बताई तो िि अपनी पुिी को लेकर ररपोटि करने थाना
आया िै, ररपोटि र्लखकर कानूनी कायिािी करें।

५. र्ििेचक द्वारा र्ििेचना की र्ई तथा पीऱ्िता ियस्का
का िारा 161 एिं 164 दं0प्र0सं0 के अन्तर्ित बयान अंर्कत
र्कया र्या तथा उसका र्चर्कत्सीय परीिर् र्कया र्या।
र्चर्कत्सीय परीिर् आख्या के अनुसार उसकी आयु लर्िर् 21
िर्ि मानी र्ई। उसके लर्िर् सिी जो़ि फ्यूज पाये र्ए र्जसके
आिार पर पीऱ्िता को प्राथी के र्िद्वान अर्ििक्ता द्वारा ियस्क
िोना किा र्या। मिानन्द इंटर कॉलेज बुलन्दशिर की
प्रिानाचायि की आख्या र्दनााँक 04.03.2017 के अनुसार
पीऱ्िता की जन्मर्तर्थ 15.12.2000 अंर्कत िै तथा घटना
र्दनांर्कत 22.02.2017 की िै अतः पीऱ्िता को 18 िर्ि से
कम आयु का िोने के कारर् र्ििेचक द्वारा र्ििेचनोपरान्त िारा
376/120-बी िा0दं0सं0 तथा िारा 3⁄4 पाक्सो अर्िर्नयम
के अन्तर्ित आरोप पि प्रस्तुत र्कया र्या।

६. प्रार्थिनी तथा श्रीमती कृष्र्ा देिी के र्िरुद्ध कायिािी
दण्ड प्रकरर् िाद संख्या 4438/2017 में पाररत आदेश
र्दनााँर्कत 28.03.2017 के अनुपालन में र्ििेचना पूर्ि िोने
तक उनके र्िरुद्ध दार्ण्डक कायिािी स्थर्र्त की र्ई। आरोप पि
प्रस्तुत करने के उपरान्त उनके र्िरुद्ध िी समन जारी र्कया र्या
तथा अर्ियुक्त को कारार्ार से आिूत कर िारा 309
दं0प्र0सं0 का आरोप र्िरर्चत करने के र्लए आदेश पाररत
र्कया र्या।

७. र्िपिीर्र् पर समन का तामीला पयािप्त रिा परन्तु
माि उत्तर प्रदेश राज्य की तरफ से प्रर्त शपथ पि र्दनााँक
15.07.2022 को प्रस्तुत र्कया र्या र्जसमें र्िपिी ने यि
कथन र्कया र्क र्दनााँक 06.10.2017 को इस मामले में
संज्ञान र्लया जा चुका िै तथा समन आदेश पाररत र्कया र्या िै,
अतएि प्रार्थिनी को र्िचारर् न्यायालय में उपर्स्थत िोकर तकि
प्रस्तुत करना चार्िए एिं उपलब्ि उपचार प्राप्त करना चार्िए। यि
प्राथिना पि संिायि निीं िै। पीऱ्िता ने अपने िारा 164
दं0प्र0सं0 के बयान में स्पष्ट रूप से प्रथम सूचना ररपोटि में
िर्र्ित घटना का समथिन र्कया िै तथा यि कथन र्कया िै र्क
र्ििेचनोपरान्त घटना के पूिि मौसी की पुिी काजल आई तथा
उसे र्सर ददि का एक टेबलेट दी, र्जसके लेने पर िि बेिोश िो
र्ई तथा उसे चक्कर आने लर्े और इसी बीच र्जतेन्र ने उसके
साथ दुष्कमि र्कया। पीऱ्िता ने अपने िारा 161 दं0प्र0सं0 के
कथन में िी अर्ियोजन कथानक का समथिन र्कया िै। उक्त के
अर्तररक्त र्ििेचक ने प्रार्थिनी के अपराथ में संर्लप्त िोने सबबन्िी
अन्य र्िश्वसनीय साक्ष्य एकर्ित कर आरोप पि प्रस्तुत र्कया िै।
र्ििेचक ने उर्चत एिं र्नष्पि र्ििेचना र्कया िै। आरोप पि
प्रस्तुत िो चुका िै। प्रार्थिनी अपना पि आरोप र्िरचन करते
समय रख सकती िै। यि प्राथिना पि र्ुर्िीन िै तथा र्लत तथ्यों
पर प्रस्तुत की र्ई िै। अतः खाररज र्कया जाए।

८. प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने र्नबन तकि प्रस्तुत र्कया-

I. यि र्क प्रार्थिनी प्रथम सूचना ररपोटि में नार्मत निीं िै।

II. यि र्क प्रार्थिनी पाररिाररक सदस्य िै।
738 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

III. यि र्क िारा 120-ख िा०दं०सं० सबबन्िी
अियि प्रथमतः िारा 164 दं0प्र0सं0 के बयान में प्रकाश में आए
िैं।

IV. यि र्क र्चर्कत्सीय परीिर् आख्या के अनुसार
पीऱ्िता की आयु लर्िर् 21 िर्ि िै, अतः पाक्सो अर्िर्नयम
प्रयुक्त निीं िोता िै क्योंर्क घटना र्दनांक 22.02.2017 की किी
जाती िै।

V. यि र्क प्रथम सूचना ररपोटि 10 र्दन र्िलबब से
दजि कराई र्यी िै और

VI. यि र्क प्रार्थिनी ितिमान में 23 िर्ि की युिती
िै तथा उसका िर्ि 2021 में र्ििाि िो चुका िै।

९. प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता द्वारा र्दये र्ए तकों के
आिार पर िमिार इस यार्चका का र्नस्तारर् र्कया जाता िै-

क- प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता का यि तकि िै र्क
प्रार्थिनी प्रथम सूचना ररपोटि में नार्मत निीं िै। र्िद्वान अपर शासकीय
अर्ििक्ता द्वारा यि तकि प्रस्तुत र्कया र्या र्क प्रथम सूचना ररपोटि
पीऱ्िता के र्पता द्वारा अंर्कत कराया र्या था। अतः यर्द उस समय
उसने प्रार्थिनी के रोल के सबबन्ि में संसूर्चत न र्कया िो अथिा
संसूर्चत र्कया िो परन्तु ध्यान न देने के कारर् अथिा अन्यथा उसे
प्रथम सूचना ररपोटि में अंर्कत न र्कया र्या िो तो यि कोई आिार
निीं िै र्क प्रार्थिनी को अर्ियुक्त न माना जाए यर्द र्ििेचनोपरान्त
अपराि काररत करने में उसका रोल िी प्रथम दृष्टया स्थार्पत िो रिा
िो।

प्रथम सूचना ररपोटि के सबबन्ि में बबले र्िरुद्ध
ित्तीसर्ढ़ राज्य ए०आई०आर० 2012 उच्चतम न्यायालय
2621 में यि अििाररत र्कया र्या र्क प्रथम सूचना ररपोटि
सारिान प्रकृर्त का साक्ष्य निीं िै तथा यि र्िश्वकोर् निीं िै र्क इसमें
घटना से सबबर्न्ित सिी तथ्य का समािेश र्कया जाए।

i. मुकेश बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य में
ए0आई0आर0 2017 उच्चतम न्यायालय 2161 (तीन
न्यायमूदतिगण) तथा

ii. मृतयुंजय दवश्वास दवरुद्ध प्रणव ऊर्ि कुट्टी
दवश्वास एवं एक अन्य ए0आई0आर0 2013 उच्चतम
न्यायालय 3334 में यि अििाररत र्कया जा चुका िै र्क यर्द
प्रथम सूचना ररपोटि में अर्ियुक्त का नाम अंर्कत निीं िै तो यि
अर्ियोजन के र्लए घातक निीं िै।

उपरोक्त र्ििेचना के आिार पर प्रार्थिनी की तरफ से
प्रस्तुत प्रथम तकि अस्िीकार र्कया जाता िै।

ख- प्रार्थिनी की तरफ से उसके र्िद्वान अर्ििक्ता ने
दूसरा तकि यि प्रस्तुत र्कया र्क प्रार्थिनी िी पीऱ्िता के िी पररिार
की सदस्य िै। श्रीमती कृष्र्ा देिी पीऱ्िता के बिन की सास िै तथा
प्रार्थिनी काजल उसके मौसी की ल़िकी िै तथा िि अर्ियुक्त
र्जतेन्र ऊफि राघि की बिन िै। काजल के र्पता का नाम कृष्र्पाल
िै तथा श्रीमती कृष्र्ा देिी स्िर्ीय कृष्र्पाल की पत्नी िै तथा
अर्ियुक्त र्जतेन्र ऊफि राघि के र्पता र्बजेन्र िैं र्जसके यिााँ सुलाने
के र्लए पीऱ्िता ले जाई र्ई थी।

ऐसा कोई प्रमार् प्रस्तुत निीं र्कया र्या र्क
पाररिाररक सदस्य िोने के कारर् िादी अथिा पीऱ्िता प्रार्थिनी
अथिा अन्य अर्ियुक्तों को झूठा फंसा रिे िों। अतएि यर्द िादी
पीऱ्िता एिं अर्ियुक्तर्र् एक िी पररिार के सदस्य िैं तो िी यि
र्नष्कर्ि निीं र्दया जा सकता र्क ऐसे में कर्थत अपराि काररत निीं
र्कया जा सकता, िैसे िी िार्दनी एिं पीऱ्िता अर्ियुक्तर्र् के
पररिार के सदस्य निीं िै िरन् ररश्तेदार िैं, ररश्तेदारी में र्ई िुई
ल़िर्कयों के साथ ऐसी घटना काररत करने की सूचना करने के
समाचार र्मलते रिते िैं।

र्- प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने दूसरा तकि यि
प्रस्तुत र्कया र्क सििप्रथम पीऱ्िता के िारा 164 दं०प्र०सं० के
बयान के उपरान्त िारा 120-बी िा०दं०सं० की िृर्द्ध की र्ई। इस
सबबन्ि में पिािली के अिलोकन से ज्ञात िोता िै र्क पीऱ्िता ने
िारा 161 दं०प्र०सं० के बयान में िी यि कथन र्कया िै र्क
र्जतेन्र ऊफि राघि(अर्ियुक्त) की बिन ने नींद की र्ोली र्खला दी
र्जससे िि नींद में सो र्ई थी। यद्यर्प िारा 161 दं०प्र०सं० के
बयान में पीऱ्िता ने प्रार्थिनी काजल का नाम निीं र्लया िै परन्तु ऐसा
निीं िै र्क उसके सबबन्ि में कथन निीं र्कया िो तथा सोची-समझी
सार्जश के अन्तर्ित िारा 164 दं०प्र०सं० के कथन में सििप्रथम
प्रार्थिनी का नाम र्लया िो। अतः प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता द्वारा
प्रस्तुत यि तकि िी खाररज र्कया जाता िै।

घ- प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने यि तकि प्रस्तुत
र्कया र्क पीऱ्िता के र्चर्कत्सीय परीिर् आख्या के अनुसार िि
घटना के समय लर्िर् 21 िर्ि की थी। अतः पाक्सो अर्िर्नयम के
अन्तर्ित कोई कायिािी निीं की जा सकती जबर्क पूिि में
उर्ललर्खत पिािली पर र्िद्यमान अर्िलेख के अनुसार घटना के
4 All. Kajal Vs. State of U.P. & Ors.
739
समय पीऱ्िता मिानन्द इंटर कॉलेज सरायघासी, बुलन्द शिर में
किा 10-ए की िािा थी तथा र्िद्यालय के अर्िलेखों में उसकी
जन्मर्तर्थ 15.12.2000 अंर्कत िै र्जसके अनुसार घटना
र्दनााँर्कत 22.02.2017 को उसकी आयु 18 िर्ि से कम थी।
इस न्यायालय के मतानुसार र्कशोर न्याय अर्िर्नयम, के र्नयम के
अनुसार यर्द र्िद्यालय के अर्िलेखों में अंर्कत जन्मर्तर्थ तथा
र्चर्कत्सीय परीिर् के आिार पर र्निािररत जन्मर्तर्थ में अन्तर िै
तो र्िद्यालय अर्िलेखों में अंर्कत जन्मर्तर्थ को र्चर्कत्सीय परीिर्
के आिार पर र्निािररत आयु पर िरीयता प्राप्त िोर्ी तथा र्िद्यालय
में अर्िर्लर्खत जन्मर्तर्थ िी मान्य िोर्ी। यर्द जन्मर्तर्थ के सबबन्ि
में अन्य कोई प्रमार् उपलब्ि निीं िै तो अर्न्तम र्िकलप के रूप में
र्चर्कत्सीय परीिर् आख्या के आिार पर र्कसी व्यर्क्त की आयु
र्निािररत की जा सकती िै। अतः र्िद्यालय के अर्िलेखों में
उर्ललर्खत जन्मर्तर्थ के अनुसार पीऱ्िता घटना के समय अियस्क
थी। अतः र्ििेचक ने पाक्सो अर्िर्नयम के अन्तर्ित िी आरोप पि
प्रस्तुत र्कया िै। यि प्रश्न िारा 482 दं0प्र0सं0 के अन्तर्ित र्नर्ित
एिं र्नर्ीत निीं र्कया जा सकता। इस सबबन्ि में यर्द कोई तकि
प्रस्तुत करना िो तो र्िचारर् न्यायालय में यि तकि प्रस्तुत करने एिं
प्राथिना पि प्रस्तुत करने के र्लए प्रार्थिनी स्ितंि िै।

ङ- प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने पंचम तकि यि
प्रस्तुत र्कया र्क प्रथम सूचना ररपोटि 10 र्दन के र्िलबब से अंर्कत
कराई र्ई िै। इस सबबन्ि में पिािली के अिलोकन से ज्ञात िोता िै
र्क घटना र्दनााँक 22.02.2017 की िै तथा प्रथम सूचना ररपोटि
र्दनााँक 01.03.2017 को अंर्कत र्कया र्या िै। यि व्यििार में
प्रायः देखा जाता िै र्क नौजिान उम्र की ल़िर्कयों के सबबन्ि में
काररत र्कये र्ए लैंर्र्क अपरािों के सबबन्ि में प्रायः सोच-र्िचार
कर प्रथम सूचना ररपोटि दजि कराई जाती िै जबर्क अन्य कोई
र्िकलप शेर् न िो। प्रायः यि िी देखा जाता िै र्क िारा 376
िा०दं०सं० जैसे अपरािों में प्रथम सूचना ररपोटि दजि करने के
सबबन्ि में सबबर्न्ित पुर्लस थाने द्वारा िीला-ििाली र्कया जाता िै
क्योंर्क इससे उस थाने के प्रशासन व्यिस्था को कमजोर माना जाता
िै तथा पुर्लस के उच्च अर्िकाररयों द्वारा थानाध्यि एिं सबबर्न्ित
िलके िेि के उपर्नरीिक र्सपार्ियों के र्िरुद्ध प्रशासर्नक कायिािी
िी की जाती िै। अतः सबबर्न्ित पुर्लस िी सििप्रथम यि प्रयास
करती िै र्क र्कसी प्रकार से ऐसी िाराओं में प्रथम सूचना ररपोटि दजि
न िो।

प्रथम सूचना ररपोटि सििदा र्िलबब से दजि कराया
जाना अर्ियोजन के र्लए घातक निीं िोता न िी अर्ियोजन
कायिािी को र्नरस्त करने का आिार िो सकता िै। र्िशेर्कर
िारा 376 िा०दं०सं० के सबबन्ि में र्िलबब से प्रथम सूचना
ररपोटि का दजि र्कया जाना कदार्प घातक निीं िोता जैसा र्क
उत्तर प्रिेश राज्य बनाम मनोज कुमार पाण्डेय
ए०आई०आर० 2009 उच्चतम न्यायालय 711 (तीन
न्यायमूदतिगण) तथा संतोष मूल्या दवरुद्ध कनािटक राज्य,
(2010) 5 एस०सी०सी० 445 में अििाररत र्कया र्या िै।

उपरोक्त आिारों पर प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता
द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त तकि िी अस्िीकार र्कये जाते िैं।

च- प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने यि तकि
प्रस्तुत र्कया र्क ितिमान में प्रार्थिनी 23 िर्ीया िर्ि 2021 में
र्ििार्िता ल़िकी िै इस न्यायालय के मतानुसार यि कोई आिार
निीं िै र्क यर्द उसने कोई अपराि काररत र्कया िै तो उसके
र्िरुद्ध प्रस्तुत आरोप पि खर्ण्डत कर र्दया जाए। पीऱ्िता िी एक
अर्ििार्ित युिती िै तथा प्रार्थिनी का तो र्ििाि िी िो र्या िै
परन्तु पीऱ्िता के र्ििाि आर्द में अत्यन्त कर्ठनाइयों का सामना
करना प़िेर्ा तथा उसे सामार्जक तानों को िी सिना िोर्ा। उसने
अत्यन्त सािस र्दखाकर अपने प्रर्त काररत अपराि के सबबन्ि में
प्रथम सूचना ररपोटि दजि कराने तथा अर्ियुक्तों को दर्ण्डत कराने
का प्रयास र्कया िै। अतः प्रार्थिनी का युिती एिं र्ििार्िता िोना
िारा 482 दं०प्र०सं० के इस प्राथिना पि को स्िीकार करने का
कोई िी युर्क्तयुक्त आिार निीं िै।

१०. यि मान्य र्िर्ि र्सद्धान्त िै र्क कोई मर्िला र्कसी
मर्िला के बलात्कार की दोर्ी निीं िो सकती। प्रस्तुत मामले में
अर्ियुक्त र्जतेन्र ऊफि राघि िारा 376 िा०दं०सं० का मुख्य
अपरािी िै तथा श्रीमती कृष्र्ा देिी तथा प्रार्थिनी काजल को
अर्ियुक्त र्जतेन्र ऊफि राघि द्वारा बलात्कार का अपराि काररत
करने में सिायता देने, उसे सुकर बनाने तथा आपरार्िक ऱ्ियन्ि
कर रार्ि में सोने के बिाने अर्ियुकत के घर ले जाकर सुलाने
एिं अपराि की पृष्ठिूर्म तैयार करने तथा अर्ियुक्त र्जतेन्र ऊफि
राघि को सुअिसर प्रदान करने िेतु दोर्ी मानते िुए उन्िें माि
िारा 120-ख िा०दं०सं० का अपरािी माना र्या िै। यद्यर्प इस
सबबन्ि में प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता ने तकि प्रस्तुत निीं र्कया
र्क कोई प्रार्थिनी या कोई मर्िला िारा 376 का अपराि काररत
करने के सबबन्ि में िारा 120-ख िा०दं०सं० के अन्तर्ित दोर्ी
िो सकती िै अथिा निीं परन्तु इस पर र्िचार र्कया जाना
आिश्यक िै। ज्ञात िो र्क ऐसी पररर्स्थर्तयों में यर्द श्रीमती
कृष्र्ा देिी एिं प्रार्थिनी के स्थान पर पुरुर् िोते तो िि िी र्ैंर्रेप
के दोर्ी िोते िले िी उन्िोंने पीऱ्िता के साथ कोई यौनाचार न
र्कये िोते।

११. दप्रया पटेल बनाम मध्य प्रिेश राज्य, (2006) 6
एस०सी०सी० 263 के मामले में अििाररत र्कया र्या िै र्क एक
740 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
मर्िला िले िी बलात्कार की सुर्ििा प्रदान करती िो, िि र्ैंर्रेप
की अर्ियुक्ता निीं िो सकती जैसा र्क िारा 376(2)(1)
िा०दं०सं० से स्पष्ट िै र्क कोई मर्िला बलात्कार की अर्ियुक्त निीं
िो सकती िै। िारा 375/376 िा०दं०सं० से िी स्पष्ट िै र्क एक
मर्िला का बलात्कार माि पुरुर् द्वारा िी काररत र्कया जा सकता िै।
इस मामले में यि िी प्रश्न उठा र्क क्या र्कसी मर्िला को बलात्कार
काररत करने के र्लए उत्प्रेररत करने का दोर्ी माना जा सकता िै,
माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस पर कोई मत व्यक्त करने के
बजाय यि अििाररत र्कया र्क यर्द र्िर्ि में यि अनुमन्य िै
तथा तथ्यों के आिार पर ऐसी कायिािी की जा सकती िो तो
र्िचारर् न्यायालय को र्िर्ि अनुसार ऐसी दशा में कायि करना
चार्िए।

१२. र्दलली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने िण्ड
अपील संख्या 64/2006 सरला दवरुद्ध राज्य में दिनााँक
06.02.2014 के र्नर्िय में यि अििाररत र्कया िै र्क पीऱ्िता
के बलात्कार के आरोप की सियोर्ी मर्िला को िारा 120
िा०दं०सं० के अन्तर्ित दोर्र्सद्ध र्कया जा सकता िै।

१३. प्रार्थिनी के र्िद्वान अर्ििक्ता की तरफ से उक्त के
अर्तररक्त अन्य कोई तकि प्रस्तुत निीं र्कया र्या िै। उपरोक्त र्ििेचना
के आिार पर इस न्यायालय का यि र्नष्कर्ि िै र्क िारा 482
दं०प्र०सं० के अन्तर्ित प्रस्तुत यि यार्चका र्ुर्िीन िै तथा र्नरस्त
र्कये जाने योग्य िै।

आिेश

१४. यि यार्चका प्रस्तुत अन्तर्ित िारा 482दं०प्र०सं०
उपरोक्तानुसार खर्ण्डत की जाती िै।
----------
(2023) 4 ILRA 740
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 19.04.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Application U/S 482. No. 16831 of 2022

M/s Parsadi Lal Tulsiram Cold Agra Road,
Bisana, Hathras & Anr. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties
Counsel for the Applicants:
Sri Sanjay Kumar Dubey

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

Criminal
Law
-
Code
of
Criminal
Procedure, 1973 - Section 311-Alleged
meter taken from premise of the Applicant no.1sent for examination-examiner (private agency)
not examined as witness-during the St.ment of
PW-4-he admitted that report was not receivedbut complainant's counsel St.d in argument that
report was produced in the court-examiner of
the meter is necessary witness-application u/s
311 Cr.P.C. moved for calling the examiner for
recording
its
evidence-rejected-duty
of
prosecution to prove such report -u/s 311
Cr.P.C.- Application be allowed at any stage
before pronouncement of judgment-impugned
order set aside.

Application allowed. (E-9)

List of Cases cited:

V.N. Patil Vs Niranjan Kumar & ors., (2021) 3
SCC 661

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J.)

1. Heard Sri Sanjay Kumar Dubey,
learned counsel for the applicants, Sri
Pankaj Kumar Tripathi, learned Additional
Government Advocate, learned counsel for
opposite party no.2 and perused the record.

2. This application under Section 482
CrPC has been filed for quashing the order
dated 26.04.2022 passed by the Additional
Sessions Judge/Special Judge (Electricity
Act), Court No.2, Hathras passed in ST
No.109 of 2006 (H.S. Agrawal Vs. M/S
Parsadi Lal and others), under Section 135
Electricity Act, 2003, Police Station
Chandpa,
District
Hathras
by
which
Application No.218(D) under Section 311