# Kallu @ Dinesh Rajput (In Jail) v. State of U.P. Opp. Party

- **Citation:** (2020) 12 ILRA 263
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2020-11-18
- **Case number:** Crl. Misc. Bail Application No. 38911 of 2020
- **Bench:** Shamim Ahmed, Shamim Ahmed
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/kallu-dinesh-rajput-in-jail-v-state-of-u-p-opp-party-45469
- **Pages:** 4

## Headnote

NDPS Act-section 42 and 52 not compliedseized Ganja is lesser in quantity-no
independent witness.

Bail Granted. (E-9)

List of Cases cited:-

## Text

12 All. Kallu @ Dinesh Rajput Vs. State of U.P.
263
इलाहाबाद की आजधकाररक वेबसाइट से आदेश
की ऐसी कम्पयूटरीकृत प्रजत की सत्यता की पुजि
करेगा और जलक्तखत रूप से इस तरह के
सत्यापन की घोर्णा करेगा।

14. उपरोक्त शतों में से जकसी के उल्लांघन
के मामले मे, यह िमानत रद्द करने का आधार
होगा।
----------
(2020)12ILR A263
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 18.11.2020

BEFORE
THE HON'BLE SHAMIM AHMED, J.

Crl. Misc. Bail Application No. 38911 of 2020

Kallu @ Dinesh Rajput ...Applicant (In Jail)
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Applicant:
Sri Bhaskar Bhadra

Counsel for the Opp. Party:
A.G.A.

NDPS Act-section 42 and 52 not compliedseized Ganja is lesser in quantity-no
independent witness.

Bail Granted. (E-9)

List of Cases cited:-

1. U.O.I. Vs Shiv Shankar Keshari, (2007) 7 SCC
798

2. Dataram Singh Vs St. of U.P. & anr., reported
in (2018)3 SCC 22

(Delivered by Hon'ble Shamim Ahmed, J.)

1. वतयमान दाक्तिक प्रकीणय िमानत
प्राथयना पत्र, आवेदक कल्लू@सिनेश राजपूत
की ओर से मु०अ०सां० 695 सन् 2020, अन्तगयत
धारा 8/20/29 स्वापक और्जध और मन:प्रिावी
अजधजनयम,
1985(एन०ड्ी०पी०एस०
ऐक्ट),
थाना बारादरी, जिला बरेली में िमानत पर मुक्त
करने हेतु प्रस्तुत जकया गया है।

2. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता एवां
जवद्वान अपर शासकीय अजधवक्ता को सुना तथा
पत्रावली का पररशीलन जकया।

3. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता द्वारा
िमानत प्राथयना पत्र प्रस्तुत कर कहा गया है, जक
आवेदक को झूठा फांसाया गया है। एवां आवेदक
आरोजपत अपराध सांख्या 695 सन् 2020,
अन्तगयत धारा 8/20/29 एन०ड्ी०पी०एस० ऐक्ट,
थाना बारादरी जिला बरेली मे पूणयतया जनदोर् है,
उसकी उक्त आरोजपत अपराध मे जकसी प्रकार
की सांजलप्तता नही रही है। उसने आरोजपत
अपराध काररत नही जकया है, उसे आरोजपत
अपराध मे झूठा, शत्रुतावश, रांजिशन फांसाया एवां
आरोजपत/नाजमत जकया व करवाया गया है।

4. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता द्वारा यह
िी कहा गया है जक प्रथम सूचना ररपोटय जवलम्ब
से जलखायी गयी है। प्रथम सूचना ररपोटय में
अजियुक्त का कोई कृत्य नहीां दशाया गया है
घटना का कोई स्वतांत्र साक्षी नही है। थाना
पुजलस द्वारा धारा 42 व 52 एनड्ीपीएस, एक्ट का
अनुपालन नहीां जकया गया है। अजियुक्त पर
दशायी गयी गाांिे की मात्रा अल्प मात्रा है।
जिससे स्पि है जक पुजलस द्वारा सारी काययवाही
फिी रूप से की गयी है। पुजलस द्वारा धूपबती
को चरस बताकर उक्त मुकदमा दिय जकया गया
है। अजियुक्त एक ररक्शा चालक है मेहनत
मिदूरी द्वारा पररवार का पालन पोर्ण व घर का
काम चला रहा था और मेहनत मिदूरी के कायय
हेतु घऱ से बाहर जनकला तो पुजलस द्वारा जगरफतार
कर जलया गया तथा इस मुकदमें में झूांठा चालान
कर जदया गया। अजियुक्त अपने घर में अकेला
264 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
कमाने वाला व्यक्तक्त है पररवार की सारी जिम्मेदारी
प्राथी के उपर है। प्रथम सूचना ररपोटय में यह िी
स्पि नहीां है जक प्राथी से बरामद माल पुजलस को
जकस तरह ज्ञात हुआ जक उपरोक्त माल चरस है।
तथा िमानत पर ररहा होने के पश्चात िमानत का
गलत प्रयोग नहीां करेगा। अन्त में प्राथयना की गयी है
जक प्राथी को िमानत पर ररहा करने के आदेश
पाररत करने की कृपा करें।

5. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता ने पुनः
तकय प्रस्तुत जकया जक आवेदक को इस प्रकरण
में झूठा फूँसाया गया है, उसने कजथत अपराध
काररत नहीां जकया है, आवेदक के पास से 1435
ग्राम चरस एवां 1815 ग्राम गाांिा की िो
बरामदगी जदखायी गयी है वह फिी है, उसके
पास से कोई बरामदगी नहीां हुयी है , कजथत
बरामदगी का कोई स्वतांत्र िनसाक्षी नहीां है, धारा
50 एन०ड्ी०पी०एस० ऐक्ट के प्राजवधानोां का
अनुपालन नहीां जकया गया है, आवेदक का
एन०ड्ी०पी०एस० ऐक्ट का कोई पूवय आपराजधक
इजतहास नहीां है, आवेदक जनदोर् है तथा वह इस
प्रकरण में जद० 25-7-2020 से कारागार मे
जनरूद्ध है, इसजलए आवेदक को िमानत पर
छोड़ जदया िाय।

6. सह अजियुक्त जशवा की िमानत समान
अपराध सांख्या 695 सन् 2020 मे इस न्यायालय
की अन्य पीठ द्वारा आपराजधक िमानत अिी
सांख्या-37100 सन् 2020 मे आदेश जदनाांक
11.11.2020 को दी िा चुकी है अतः आवेदक
को िी इसी आधार पर िमानत दी िाय। क्योजक
आवेदक का कजथत अपराध सह अजियुक्त के
अपराध से अजधक गांिीर प्रकृजत का नहीां है। एवां
दोनो को उक्त अपराध मे झूठा एवां फिी ढांग से
फांसाया गया है।

7. जवद्वान अपर शासकीय अजधवक्ता ने
आवेदक के िमानत प्राथयना पत्र का जवरोध
जकया। तथा समथयन मे कहा जक आवेदक
िमानत पर ररहा होने पर पुनः आपराजधक
गजतजवजधयोां मे जलप्त हो िाएगा। िो समाि के
जलए हाजनकारक जसद्ध होगा। तथा प्रथम सूचना
मे कही गई बातोां का समथयन जकया।

8. उिय पक्षोां को सुना व पत्रावली का
अवलोकन जकया। िमानत प्राथयना पत्र को
जनजणयत करने से पहले िमानत की जवजध क्या है
इसका उल्लेख करना आवश्यक है।

9. जवजध का जसद्धान्त है जक "िमानत
जनयम और िेल अपवाद है"। िमानत न तो
जकसी याांजत्रक आदेश से स्वीकार या अस्वीकार
ही की िा सकती है, क्योांजक यह न केवल उस
व्यक्तक्त की स्वतांत्रता सांबांजधत है जिसके जवरूद्ध
आपराजधक काययवाही चल रही है, परन्तु यह
दि न्याय प्रणाली के जहत से िी सांबांजधत है और
यह िी सुजनजश्चत करना है, जक अपराध करने
वालोां को न्याय में बाधा ड्ालने का अवसर न
जदया िाये।

10. िमानत के जलए आवेदन पर जवचार
करते समय, न्यायालय को कुछ कारकोां को
ध्यान में रखना चाजहए, िैसे जक अजियुक्त के
क्तखलाफ प्रथम दृिया मामला का होना, आरोप
की गांिीरता और प्रकृजत, आरोप जसद्ध होने की
क्तथथजत में सिा की कठोरता, अनुपूरक साक्ष्य की
प्रकृजत, न्यायालय की आरोप के जलये प्रथम
दृिया सांतुजि, आरोपी की हैजसयत व पद,
अजियुक्त की न्याय से िागने और अपराध को
दोहराने की सांिावना, साक्ष्य के साथ छेड्छाड्
की सांिावना, जशकायतकताय और गवाह को
धमकी
की
आशांका
और
अपराधी
का
आपराजधक इजतहास, िमानत के जलए आवेदन
पर जवचार करते समय, न्यायालय को मामले के
अजियोिन पक्ष के गवाहोां की जवश्वसनीयता व
क्तथथरता की गुण, दोर् की िाांच सघनता से नहीां
करनी चाजहए। क्योांजक यह केवल परीक्षण के
दौरान ही िाांचा िा सकता है समता िमानत का
12 All. Kallu @ Dinesh Rajput Vs. State of U.P.
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एकमात्र आधार तो नही है, परन्तु यह उपरोक्त
पहलुओां में से एक हो सकता है, िो अजनवायय
रूप से हैं। िमानत के आवेदन पर जवचार करते
समय आवश्यक है।

11. यह अजववाजदत है, जक िमानत देना या
न देना, ये उस न्यायालय का जववेकाजधकार है, िो
इस मामले की सुनवाई कर रहा है। हालाांजक यह
जववेकाजधकार जनबायध है। परन्तु इसका उपयोग
न्यायसांगत, मानवीय व सहानुिूजत पूवयक जकया
िाना चाजहए न जक मनमाने तरीके से। िमानत
स्वीकार या अस्वीकार करने के आदेश में कारणोां
को प्रथम दृिया इांजगत करना चाजहए, हालाांजक
गुण-दोर् पर साक्ष्य की जवस्तृत िाांच और जवस्तृत
दस्तावेिीयकरण को दशायने की आवश्यकता नहीां
है। िमानत की शतें इतनी िी सख्त नहीां होनी
चाजहए की उसका अनुपालन करना ही अक्षम हो
िाये, जिससे ज़मानत ही काल्पजनक न हो िाये।

12. उपरोक्त तथ्यात्मक व जवजधक जववरण
से यह जवजदत है जक आवेदक को दक्तित,
कजित, प्रताजड्त, हैरान व परेशान करने के
उद्देश्य से उसके जवरूद्ध आरोजपत अपराध मे
उक्त अपराध की प्राजथजमकी जलखायी गयी है।
आवेदक जकसी गैंग का मुक्तखया अथवा सदस्य
नहीां है, न तो उसका कोई जगरोह ही है। तथा
आवेदक द्वारा लोक व्यवथथा अथवा सावयिजनक
शाांजत व्यवथथा के प्रजतकूल किी िी कोई
काययवाही नहीां की गयी है न तो किी जहांसा ही
की गई है। उसनें िारतीय दि सांजहता के
अध्याय 16,17 एवां 22 में वजणयत दिनीय
अपराध काररत नही जकया है। उसने आजथयक
दुजनयाबी िौजतक लािाथय किी कोई अपराध
नहीां जकया है न तो जकसी तथाकजथत अपराध के
माध्यम से अनुजचत लाि अथवा धनाियन ही
जकया है।

13. मामले के तथ्योां को ध्यान में रखते हुए
Union of India vs. Shiv Shankar Keshari,
(2007) 7 SCC 798 के प्रकरण में माननीय
उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रजतपाजदत जकया गया है
जक िमानत के जलए आवेदन पर जवचार करते
समय अदालत को अजियुक्त के दोर्ी होने
अथवा उसके गुनाहगार होने के तथ्य पर जवचार
नहीां जकया िाता है। यह सजमजत उद्देश्य के जलए
अजनवायय रूप से अजियुक्त को िमानत के जलए
उजचत आधार है जक अजियुक्त दोर्ी नही है और
ऐसे आधार के अक्तस्तत्व के बारे में अदालत
अपनी सांतुजि दिय करती है। लेजकन अदालत को
इस मामले पर जवचार नही करना है िैसे जक वह
दोर्मुक्त होने का फैसला सुना रही हो और दोर्ी
नहीां होने का पता लगा रही हो।

14. पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्योां,
िारतीय सांजवधान के अनुच्छेद 21 एवां Dataram
Singh Vs State of U.P. and another, reported
in (2018)3 SCC 22 के प्रकरण में माननीय
उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रजतपाजदत अभ्युक्तक्त के
दृजिगत, आरोपोां की प्रकृजत, समथयन में सबूतोां की
प्रकृजत, सिा की गांिीरता, आरोजपत आवेदक का
चररत्र, पररक्तथथजतयोां का अवलोकन मुकदमे मे
अजियुक्त की उपक्तथथजत को सुरजक्षत करने की
उजचत सांिावना, गवाहो से छेड़छाड़ की उजचत
आशांका, िनता/राज्य और अन्य पररक्तथथजतयोां का
बड़ा जहत एवां परीक्षण मे देरी होना एवां जनकट समय
में इन पररक्तथथजतयोां को देखते हुए मेरा मानना है जक
यह िमानत देने के जलए एक उपयुक्त मामला है।

15. तद्नुसार वाद के गुण दोर् पर जबना कोई
जटप्पणी जकए हुए आवेदक कल्लू@सिनेश राजपूत
को उपरोक्त वजणयत अपराध मु०अ०सां० 695 सन्
2020, अन्तगयत धारा 8/20/29 स्वापक और्जध और
मन:प्रिावी
अजधजनयम,
1985(एन०ड्ी०पी०एस०
ऐक्ट), थाना बारादरी, जिला बरेली में सांबांजधत
न्यायालय की सन्तुजि पर व्यक्तक्तगत बांध-पत्र एवां
उसी धनराशी के दो प्रजतिू प्रस्तुत करने पर
जनम्नजलक्तखत शतो के साथ िमानत पर छोड़ जदया
िायः-
266 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

1- आवेदक जववेचना या परीक्षण के
दौरान साजक्षयोां को ड्रायेगा/धमकायेगा नहीां एवां
अजियोिन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीां करेगा।

2- आवेदक परीक्षण के दौरान जबना
कोई थथगन जलए परीक्षण में ईमानदारी से
सहयोग करेगा।

3- आवेदक िमानत पर ररहा होने के
बाद जकसी िी अपराजधक गजतजवजध में जलप्त नहीां
होगा न कोई अपराजधक कृत्य करेगा।

4- आवेदक को यजद माननीय
उच्चतम न्यायालय के आदेशोां के तहत गजठत
सजमजत के आदेश के अनुसार अल्पकाजलक
िमानत पर बढाया गया है तो अल्पकाजलक
िमानत की अवजध समाप्त होने के बाद उसकी
िमानत प्रिावी होगी।

5- अदालतोां के सामान्य कामकाि के
बहाल होने तक आवेदक को जबना जकसी
िमानत के जनिी मुचलके पर िमानत पर
बढाया िाएगा। अदालत के सामान्य कामकाि
बहाल होने के बाद आरोपी एक महीने के िीतर
अदालत की सांतुजि के प्रजतिुओां को प्रस्तुत
करेगा।

6- पाटी उच्च न्यायालय इलाहाबाद
की आजधकाररक वेबसाइट से ड्ाउनलोड् जकए
गए इस तरह के आदेश की कांप्यूटर िजनत
प्रजतजलजप दायर करेगी।

7-
सांबांजधत
न्यायालय/प्राजधकरण/अजधकारी,
उच्च
न्यायालय
इलाहाबाद की आजधकाररक वेबसाइट से आदेश की
ऐसी कम्पयूटरीकृत प्रजत की सत्यता की पुजि करेगा
और जलक्तखत रूप से इस तरह के सत्यापन की घोर्णा
करेगा।

16. उपरोक्त शतों में से जकसी के उल्लांघन
के मामले मे, यह िमानत रद्द करने का आधार
होगा।
----------
(2020)12ILR A266
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 02.12.2020

BEFORE
THE HON'BLE SHAMIM AHMED, J.

Crl. Misc. Bail Application No. 41152 of 2020

Junaid ...Applicant (In Jail)
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Applicant:
Sri Devendra Saini

Counsel for the Opp. Party:
A.G.A.

While considering application for bail-all
circumstances of case-nature of evidenceperiod of detention already undergoneunlikelihood of early conclusion of trial-no
material
for
possible
tampering
of
evidence.

Bail Granted. (E-9)

List of Cases cited:-

1. Dataram Singh Vs St. of U.P. & anr., (2018) 3 SCC 22

(Delivered by Hon'ble Shamim Ahmed, J.)

1. Supplementary affidavit filed today
is taken on record.

2. Heard Sri Devendra Saini, learned
counsel for the applicant as well as learned
A.G.A. appearing for the State and perused
the record.

3. Applicant has moved the present
bail application seeking bail in Case Crime
No.411 of 2020, under Section 363, 366,
376 IPC and Section 3/4 POCSO Act
Police Station Gangoh District Saharanpur.

4. It is submitted by the learned
counsel for the applicant that the entire