# Kameshwar Prasad v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2020) 2 ILRA 1657
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2020-01-10
- **Case number:** Writ A No. 11764 of 2017
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/kameshwar-prasad-v-state-of-u-p-ors-45556
- **Pages:** 9

## Headnote

A. Service Law - regularization - Section
33F (1) (a) and (d) - U.P. Secondary
Education
Services
Commission
and
Selection Board (Amendment) Act, 2016 -
lays two requirement for regularization
i.e.,
appointment
should
be
made
between 07.08.1993 to 25.03.1999 and
he
should
continuously
work
till
22.03.2016 ( date on which amendment
of 2016 to the Act came into effect) -
petitioner
fail
to
fulfill
the
abovementioned requirements
B. Interpretation - the order of the Court
will
be
interpreted
strictly
-
"reinstatement in service" as ordered by
the Court shall not be interpreted to
include "continuous in service"

Court's
order
for
"reinstatement",
"reinstatement with continuous service" and
"reinstatement with continuous service along
with all the consequential benefits" are three
different orders. The words used in the order
will be strictly construed and effect shall follow
as ordered. (para 24)

## Text

2 All. Kameshwar Prasad Vs. State of U.P. & Ors.
1657
competent authority and beyond the scope
of judicial scrutiny.

19. In view of the above
discussion we find that the competent
authority
retired
the
petitioner
compulsorily following the procedure laid
down in law after due examination of
service record of the petitioner. We thus
find no merit in the petition which
deserves to be dismissed."

(11) In view of the guidelines
framed by the Apex Court, the limited
scope for review of the order of
compulsory retirement is that if the
evidence or arbitrariness and mala fide
is attached to it. Here in the case, the
petitioner has admitted that during his
service
period,
nine
departmental
proceedings have been initiated by the
department. Out of nine, in five
matters, favourable decision has been
taken. From perusal of Screening
Committee's
order
and
from
the
pleadings of petition, it is abundantly
clear that the evidence relied upon by
the petitioner has been placed before
the Committee. Therefore, it cannot be
said that the evidence has not been
placed
before
the
Screening
Committee.

(12) Next, learned Counsel for the
petitioner has submitted that the action
of the respondents is mala fide and
arbitrariness. By saying this, strings
cannot be attached to the impugned
order of compulsory retirement. Even
otherwise, the appeal preferred against
this order has been rejected which also
ends in dismissal of claim petition.

(13) A bare perusal of paragraphs
16 to 19 of the impugned order, dated
5.11.2019 it is evidently clear that the
Tribunal has conspicuously touched all
points
raised
by
the
petitioner
including entires of last ten years from
the date of passing of the compulsory
retirement order and gave its verdict
which need not be reviewed in the
appellate jurisdiction. Furthermore, the
guidelines framed by the Apex Court in
the case of Baikuntha Nath Das
(supra) have been followed and the
impugned
order
of
compulsory
retirement
has
been
passed
in
accordance with law.

(14) In view of above, the case
laws cited by the petitioner are not at
all
attracted
on
the
facts
and
circumstances of the instant case.
Since the petitioner's counsel is unable
to establish his claim or point out any
illegality or infirmity in the impugned
order, we are not inclined to entertain
this petition.

(15) For all the aforementioned
reasons, the writ petition filed by the
petitioner
has
no
force
and
is
accordingly dismissed.
----------
(2020)02ILR A1657

ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 10.01.2020

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ A No. 11764 of 2017

Kameshwar Prasad ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
1658 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Sri Ram Krishna

Counsel for the Respondents:
C.S.C., Sri D.K. Ojha

A. Service Law - regularization - Section
33F (1) (a) and (d) - U.P. Secondary
Education
Services
Commission
and
Selection Board (Amendment) Act, 2016 -
lays two requirement for regularization
i.e.,
appointment
should
be
made
between 07.08.1993 to 25.03.1999 and
he
should
continuously
work
till
22.03.2016 ( date on which amendment
of 2016 to the Act came into effect) -
petitioner
fail
to
fulfill
the
abovementioned requirements
B. Interpretation - the order of the Court
will
be
interpreted
strictly
-
"reinstatement in service" as ordered by
the Court shall not be interpreted to
include "continuous in service"

Court's
order
for
"reinstatement",
"reinstatement with continuous service" and
"reinstatement with continuous service along
with all the consequential benefits" are three
different orders. The words used in the order
will be strictly construed and effect shall follow
as ordered. (para 24)

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. प्रस्तुत प्रकरण के प्रमुि तथ्य कनम्न है:-

2. सवोिय किक्षा सिन इण्ट्र कालेज
म रपुर, इलाहाबाि एक मान्यता प्राि एवों
सहायता प्राि इण्ट्र कालेज है। इस कवद्यालय में
कायमरत किक्षा एवों किक्षणोत्तर कममचाररयो पर
माध्यकमक किक्षा (सोंिोकधत) अकधकनयम 1921,
वेतन कवतरण अकधकनयम-1971 तिा माध्यकमक
सेवा आयोग/चयन बोडम कनयमावल 1982 एवों
1968 पूर तरफ प्रभाव है।

3. उपरोक्त इण्ट्र कालेज के प्रबितोंत्र ने
त न सहायक अध्यापकोों क कनयुन्धक्त के कलये
एक कवज्ञापन 6.10.93 को प्रकाकित करवाया
गया िा तिा 29.10.93 तक आवेिन पत्र
आमोंकत्रत ककये गए िे।

4. उपरोक्त प्रकिया के आधार पर उपरोक्त
इण्ट्र कालेज के प्रबितोंत्र ने अपने प्रस्ताव
किनााँक 31.10.1993 द्वारा प्रािी व अन्य िो (श्र
कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय, श्र फूलचन्द्र व श्र
ियानाि पाण्डेय) का चयन ककया और
31.10.1993 को इन त नोों को कनयुन्धक्त पत्र भ
कनगमत कर किये । त नोों ने कायमभार ग्रहण किनााँक
1.11.1993 को कर कलया तिा प्रबिकतोंत्र ने
अपने पत्राोंक प्रबिक म मो 93-94 किनाोंक
2.11.93 द्वारा कनयुन्धक्त के अनुमोिन हेतु
पत्राजात, कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि
को प्रेकित ककये गये।

5. उपरोक्त इण्ट्र कालेज के प्रबि तोंत्र
द्वारा कनगमत अध्यापक सूच ताकलका 1993 के
अनुसार याच क कनयुन्धक्त श्र िोभानाि सों0अ0
के प्रवक्ता वेतन िम में किनाोंक 21.10.91 से
प्रवक्ता (अहमत) में पिोन्नकत के कारण हुए पि पर
हुई होना ििामया गया है। यह ताकलका याकचका
के सोंलग्न सों. 2 के रुप में सोंग्लन को लगाई गई है।
यह fjfDr तििम (अल्प) ििामय गय है।

6. याच को कनयुन्धक्त के बाि वेतन व
भुगतान न होने के कारण इस उच्च न्यायालय
में वेतन भुगतान हेतु व्यवहार प्रक णम आज्ञा पत्र
याकचका सोंख्या 8001 विम 1994 योकजत क
गय ।
उक्त
याकचका
आिेि
किनाोंक
4.12.2003 के द्वारा कनस्ताररत क गई तिा
कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि को
कनिेकित ककया गया कक प्रकरण में उभय पक्षोों
को सुनकर सकारण/ आख्यापक आिेि द्वारा
यह कनकणमत करे कक क्या याच क कनयुन्धक्त
कनयमानुसार हुई है या नह ों? अगर कनयुन्धक्त
कनयमानुसार है तो कजला कवद्यालय कनर क्षक यह
सुकनकश्चत करे कक याच को वेतन कमल जाये।
2 All. Kameshwar Prasad Vs. State of U.P. & Ors.
1659

7. याच ने उपरोक्त वकणमत आिेि के
अनुपालन
में
एक
प्रकतवेिन
किनाोंक
23.12.2003,
कजला
कवद्यालय
कनर क्षक
इलाहाबाि के समक्ष पेि ककया व 1.11.1993
से वेतन भुगतान का कनवेिन ककया।

8. कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि
ने ऊभय पक्षोों को सुनकर आख्यापक आिेि
किनाोंक 27.4.2006 द्वारा याच के प्रकतवेिन
को अस्व कार कर किया और उिेि ककया
कक "सम क्षा के आधार पर पाया गया कक याच
क कनयुन्धक्त कबना कनयमोों के पालन ककये हुए,
मौकलक ररक्त पि पर प्रबितोंत्र को कनयुन्धक्त
करने का अकधकार नह ों िा। अतः याच क
कनयुन्धक्त आमान्य कक जात है।" इस आिेि के
अनुसार प्रबिनतोंत्र द्वारा मौकलक ररक्त पि के
प्रकत तििम (अल्प) पि पर कनयुन्धक्त के कलए जो
कवज्ञापन प्रकाकित ककया उसमें कनम्न त्रुकटयाों भ
पाई गई।

1.कवज्ञापन में कोई न्यूनतम िैकक्षक
योग्यता अोंककत नह ों क गय ि ।

2. कवद्यालय द्वारा यह भ प्रस्तुत नह ों
ककया गया िा कक कुल ककतने आवेिन पत्र
प्राि हुए इसमें ककतने साक्षात्कार में उपन्धथित
हुए।

3. साक्षात्कार सूच कनयमानुसार
प्रस्तुत नह ों क गय ि ।

4. चयन सम्बि कोई कायमवाह
नह ों क गय ि ।

5. चयन का क्या आधार कलया गया
है यह भ स्पष्ट नह ों िा।

6. मौकलक कनयुन्धक्तयोों पर तत्समय
रोक ि ।

9. उपरोक्त वकणमत आिेि किनााँक
27.4.2006 जो कजला कवद्यालय कनर क्षक,
इलाहाबाि द्वारा पाररत ककया गया िा से क्षुब्द
होने के कारण, प्रािी ने एक व्यवहार प्रक णम
आज्ञापत्र याकचका सोंख्या 45941 विम 2006
इस उच्च न्यायालय में योकजत क । उच्च
न्यायालय क एकल प ि ने आिेि किनाोंक
15.5.2007 के माध्यम से आिेि किनाोंक
27.4.2006 को अपास्त कर किया तिा कनणमय
किया कक याच क कनयुन्धक्त करने में वैधाकनक
प्रकिया का पूणमतः पालन ककया गया िा। याच
क कनयुन्धक्त तििम (अल्प) पि पर सवमिा उकचत
ि । न्यायालय ने परमािेि जार ककया क
कजला कवद्यालय कनर क्षक याच द्वारा ककये गये
किवस कजन पर उसने कायम ककया है उसके
अनुसार याच को वेतन का 50% भुगतान
करना सुकनकश्चत करे तिा तत्पश्चात याच को
पूणम वेतन िेने के कलये उकचत किम उिाये।

10. कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि
द्वारा उच्च न्यायालय के आिेि किनाोंक
15.5.2007, के अनुपालन में आिेि पाररत न
करने क ििा में, याच ने अवमानना याकचका
3693/07 भ पेि क कजस पर किनााँक
9.9.2009 को इस उच्च न्यायालय से कजला
कवद्यालय कनर क्षक को ि घ्र आिेि पाररत
करने का कनिेि किया गया।

11. उपरोक्त उिेन्धित आिेि किनाोंक
15.5.2007 व 9.9.2009 के अनुिम में,
कजला कवद्यालय कनर क्षक ने अपने आिेि
किनाोंक 12.10.2009 द्वारा कनम्न कनणमय कलयेः-

"1. मानन य उच्च न्यायालय के
आिेि किनाोंक 15.5.2007 के अनुपालन में
याच क कवद्यालय में उपन्धथित स्टाफ रकजस्टर
से प्रामाकणत करने हेतु किनाोंक 20.7.2007 में
मेरे द्वारा थिल य कनर क्षण ककया गया।
उपन्धथित पोंकजका के अवलोकन से स्पष्ट हुआ
कक याच श्र कामलेश्वर प्रसाि पाण्डेय के
हस्ताक्षर कवद्यालय क उपन्धथिकत पोंकजका में
किनाोंक 10.5.2006 के बाि से नह ों है तिा
उक्त कवद्यालय में कायमरत नह ों है। कनर क्षण के
1660 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
समय में भ याच कवद्यालय से अनुपन्धथित िा।
चूकक याच किनाोंक 11.5.2006 से 15.5.2007
तक कवद्यालय में कायमरत नह ों रहे है और इस
अवकध में याच क उपन्धथित कवद्यालय में
प्रमाकणत नह ों हो रह है। अतः 11.5.06 से
15.5.2007 तक एररयर में 50 प्रकतित का
भुगतान क िेयता नह ों बनत है। अतः याच
क यह माोंग अस्व कार ककया जाता है।

2. याच के प्रत्यावेिन के कबन्िू के
सोंबोंध में स्पष्ट करना है कक प्रबिक द्वारा याच
का ग्राम ण भत्ता रु0 225 माह नवम्बर 98 से
मई 99 तक लगाया गया िा जब कक इस
अवकध में ग्राम ण भत्ता के रुप में रुप 40
प्रकतमाह िेय िा। कजसे कनिेिालय स्तर पर
जाोंच में सह कर किया गया है। अतः 581254
रुपया के थिान पर 580606 भुगतान होना
सह पाया गया। इस कबन्िु पर याच को कोई
िेयता नह ों बनत है।

3. मानन य उच्च न्यायालय ने अपने
आिेि किनाोंक 15.5.2007 में याच के
तत्काल कनयकमत वेतन भुगतान के आिेि किए
िे
अतः
याच
के
16.05.2007
से
31.10.2007 तक के वेतन भुगतान क
सहमकत प्रिान क जात है।

4. याच क कनयुन्धक्त 1.11.93 से
मानते हुए वेतन कनधामरण कराने एवों अविेि
िेयक के भुगतान क सहमकत प्रिान क जात
है।"

12. उक्त आिेि का अनुपालन ककया
गया तिा याच को वेतन किया जाने लगा।
परन्तु याच को यह किकायत रह कक जब
कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि ने यह
मान कलया िा कक याच 1.11.1993 से काम
कर रहा है तो इसके फलस्वरुप अन्य लाभ
जैसे, ज्येष्ठता, चयन ग्रेड, पिोन्नकत ग्रेड इत्याकि
का लाभ भ याच को कमलना चाकहये। इसके
कलए याच ने बहुत से प्रािमना पत्र भ कलिे
परन्तु जब कोई उत्तर नह ों कमला तो याच ने
एक बार कफर न्याय के िरवाजे को िटिटाया
और याकचका सों 4914 विम 2016 इस उच्च
न्यायालय में पेि क । इस न्यायालय के एकल
प ि ने आिेि किनााँक 4.2.2016 के द्वारा
उक्त याकचका को कनस्ताररत ककया एवों कजला
कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि को कनिेकित
ककया कक वो अकति घ्र याच क प ड़ा पर
सकारण उकचत आिेि पाररत करे।

13. उपरोक्त आिेि के अनुपालन में
कजला
कवद्यालय
कनर क्षक
इलाहाबाि
ने
सकारण/आख्यापक
आिेि
किनााँक
28.5.2016/30.5.2016 को पाररत ककया व
कनम्न उि्धृत कनणमय पाररत ककया ।

"श्र कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय का
कवकनयकमत करण का प्रकारण सोंयुक्त किक्षा
कनिेिक, इलाहाबाि मण्डल इलाहाबाि को
प्रेकित करने क कायमवाह क जाये तिा श्र
पाण्डेय के कवकनयकमत के सम्बि में मण्डल य
सकमकत से कनणमय होने के पश्चात तिनुसार याच
को कनयकमत कममचाररयोों क वररष्ठता सूच में
सन्धिकलत करने, इनके नाम के सिुि अोंककत
तििम िब्द हटाने, कनयमानुसार चयन वेतनमान
एवों प्रोन्नत वेतनमान िेने तिा पेंिन, सामान्य
भकवष्य कनकध में सन्धिकलत ककये जाने सोंबोंध
कायमवाह ककये जाने का कनणमय लेते हुये याच
का प्रत्यावेिन कनस्ताररत ककया जाता है।"

अपने आिेि में कजला कवद्यालय
कनर क्षक ने कनम्न कारणोों का उिेि ककया है।

"1. श्र पाण्डेय के तििम कनयुक्त के
कारण इनको वररष्ठता सूच में अोंककत नह ों
ककया गया, कवकनयकमत करण के पश्चात ह
कनयकमते कममचाररयोों के साि वररष्ठता सूच में
सन्धिकलत ककया जा सकता है।

2. श्र कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय क
कनयुन्धक्त तििम सहायक अध्यापक के रुप में हुई
है कजसका कवकनयकमत करण नहोने के कारण
तििम िब्द नह ों हटाया जा सकता।
2 All. Kameshwar Prasad Vs. State of U.P. & Ors.
1661

3. श्र कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय क
कनयुन्धक्त तििम सहायक अध्यापक के रुप में हुई
है कजसका कवकनयकमत करण नहोने के कारण
चयन वेतनमान एवों प्रोन्नत वेतनमान का लाभ
नह ों किया जा सकता।

4. श्र कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय क
कनयुन्धक्त तििम सहायक अध्यापक के रुप में हुई
है कजसका कवकनयकमत करण न होने के कारण
पेंिन एवों सामान्य भकवष्य कनकध योजना में
सन्धिकलकत नह ों ककया जा सकता है।"

14. ऐसा प्रत त होता है, कक याच ने इस
उच्च न्यायालय के आिेि किनााँक 4.2.2006
के अनुपालन न होने के कारण अवमानना
प्रािमनापत्र (कसकवल) 432 विम 2017 इस उच्च
न्यायालय में पेि ककया, जो 31.1.2017 को
कनस्ताररत इस आिेि के साि क गय कक इस
आिेि क प्रकत कमलने के एक सिाह के
भ तर कजला कवद्यालय कनर क्षक, इलाहाबाि
कवकधवत् आिेि पाररत करे।

15. उपरोक्त आिेिोों के अनुपालन व
अनुिम
में
3
सोंसि य
मण्डल य
कवकनयकमकतकरण सकमकत ने सभ पररन्धथिकतयोों
के अनुि लन के उपरान्त कनम्नकलन्धित आिेि
किनाोंक 27.2.2017 पाररत ककया। कजसके
अनुसार यह कनधामररत ककया गया कक याच
कवकनयकमकतकरण क पररकध में नह ों आते है।

कनणमय

"मण्डल य
सकमकत
द्वारा
उपरोक्त न्धथिकतयोों

के अनुि लन के उपरान्त
कनणमय लेत है कक-

1- श्र कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय
स0अ0 क कनयुन्धक्त किनाोंक 01.11.1993 को
अल्पकाकलक ररक्त पि पर क गई ि । श्र
पाण्डेय को मानन य उच्च न्यायालय में योकजत
याकचका सोंख्या 45941/2006 में पाररत
अन्धन्तम कनणमय किनाोंक 15.05.2007 के
अनुपालन
में
किनाोंक
01.11.1993
से
10.05.2006 तक का 50 प्रकतित भुगतान
ककया गया है।

2- श्र कामेिवर प्रसाि पाण्डेय को
किनाोंक 11.05.2006 से 15.05.2007 क
अवकध में कवद्यालय में कायमरत न रहने के
कारण कवभाग द्वारा वेतन भुगतान अस्व कार
कर किया गया है कजससे स्पष्ट है कक कामेश्वर
प्रसाि पाण्डेय सोंथिा में कनयुक्त कतकि से
कनरन्तर कायमरते नह ों रहे। िासनािेि सोंख्या
588/79-कि-1-16-1(क) 13-2016 किनाोंक 22
माचम 2016 से आचिाोंकित न होने के कारण श्र
कामेश्वर प्रसाि पाण्डेय कवकनयकमत करण क
पररकध में नह ों आते हैं।

एतद्द्वारा मानन य उच्च न्यायालय में
योकजत याकचका सोंख्या 4914/2016 एवों
अवमानना याकचका सोंख्या 432/2017 में
पाररत कनणमय िमिः किनाोंक 04.02.2016 एवों
31.01.2017 के अनुपालन प्रकरण कनस्ताररत
ककया जाता है। "

16. उपरोक्त कनणमय किनााँक27.2.2017
से क्षुब्द्द्ध होने के कारण याच ने वतमान
व्यावहार प्रक णम आज्ञापत्र याकचका पेि क
कजसके द्वारा कनणमय किनााँक 27.2.2017 को
अपास्त करने व याच को 10.11.1993 से
कवकनयकमत करने का आिेि पाररत करने क
प्रािमना क गय है।

17. प्रत्यािी सों0 2 व 3 (मण्डल य
कवकनयकमत करण सकमकत व कजला कवद्यालय
कनर क्षक, इलाहाबाि) के ओर से प्रकत उत्तर
िपि पत्र िान्धिल ककया गया है। याच क ओर
इस प्रकत उत्तर िपि पत्र का कोई उत्तर िेने से
इोंकार ककया गया है। प्रत्यािी 4 व 5 (प्राइवेट
प्रत्यािी) क ओर से श्र व के ओझा अकधवक्ता
पेि हो रहे िे परन्तु 29.11.2019 जब इस
याकचका पर कनणमय सुरकक्षत ककया गया, उस
1662 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
किन याच अकधवक्ता द्वारा उनको कलन्धित
सूचना िेने के उपराोंत भ श्र व के ओझा या
कोई अकधवक्ता प्रत्यािी 4 व 5 क ओर से
उपन्धथित नह ों हुआ। अतः याच के अकधवक्ता
एवों प्रत्याि 2 व 3 के अकधवक्ता को कवस्तार से
सुनकर याकचका पर कनणमय सुरकक्षत रिा गया।

18. राम कृष्णा, याच के कवद्वान
अकधवक्ता ने किन ककया ककः-

क- याच को कवद्यालय के प्रबोंधक
तोंत्र ने कजला कवद्यालय कनर क्षक के आिेि
किनाोंक 27.4.2006 (याच को 10.5.2006
को कमला) के कारण याच को अपने पि पर
कायम नह ों करने किया गया, परन्तु उक्त आिेि
को उच्च न्यायालय के आिेि किनाोंक
15.5.2007 द्वारा अपास्त कर किया गया िा।
याच द्वारा 10.5.2006 से 15.5.2007 तक
काम न करने कारण केवल वो आिेि ह िा,
जो बाि में अपास्त भ हो गया, अतः याच को
इस समय अोंतराल में भ कायमरत मानना
चाकहये तिा याच को कनरन्तरता का लाभ भ
िेना चाकहये।

ि-
याच
िासनािेि
किनाोंक
22.3.2016 से पूणमतः आच्छाकित है। उक्त
िासनािेि के अनुसार कवकनयकमत होने के कलए
अध्यापक को 7.8.1993 से या उसके पश्चात्
ककन्तु 2.1.1999 के पश्चात् कनयुक्त नह ों होना
चाकहए है। याच 1.11.1993 को कनयुक्त हुआ
िा अतः वो इस ितम को पूणमतः पूणम करता है।
इस िासनािेि क अन्य ितम है कक
अध्यापक/य़ाच उत्तर प्रिेि माध्यकमक किक्षा
सेवा चयन बोडम (सोंिोधन) अकधकनयम 2016
के प्रारम्भ क कतकि तक सोंथिा में कनरन्तर कायम
करता हो। याच इस ितम को भ पूणम करता है,
क्योों कक 10.5.2006 से 15.5.2007 तक कायम
न करने का एकमात्र कारण, उच्च न्यायालय के
आिेि किनाोंक 15.5.2007 कजसके द्वारा
आिेि किनाोंक 27.4.2006 (जो याच को
10.5.2006को कमला) अपास्त करने के कारण
प्रत्याहार हो गया तिा फलस्वरुप याच को
10.5.2006 से 15.5.2007 तक भ सेवारत
मानना चाकहये। उसके बाि याच कनरोंतर काम
करता रहा।

ग- याच कवकनयकमकतकरण के कलए
आवश्यक सभ अहमताओ को पूणम करता है,
अतः उसक सेवाओों को कवकनयकमत करना
चाकहये तिा इसके फलस्वरुप होने वाले सभ
लाभोों को याच को प्रिान करना चाकहये।

19. प्रकतउत्तर में उत्तर प्रिेि सरकार के
थिाई अकधवक्ता ने किन ककया कक यह कनकववाि
है कक याच 10.5.2006 से 15.5.2007 तक
सेवारत नह ों रहा। उच्च न्यायालय ने अपने आिेि
किनााँक 15.5.2007 (याकचका सों 4941 विम
2006) में कजला कवद्यालय कनर क्षक के आिेि
किनाोंक 27.4.2006 को अपास्त तो ककया परन्तु
10.5.2006 से 15.5.2007 तक क याच क
सेवा के कविय पर कोई कटप्पण नह ों कर । अतः
इस अोंतराल में याच को सेवारत नह ों माना जा
सकता। अतः याच के अपन कनयुन्धक्त से
22.3.2016 तक जब उ0प्र0 माध्यकमक किक्षा
सेवा चयन बोडम (सोंिोधन) अकधकनयम 2016
प्रारम्भ हुआ, तक कनरन्तर कायम नह ों ककया है तिा
कनकवमवाि रुप से 10.5.2006 से 15.5.2007 तक
याच सेवारत नह ों रहा, अतः उक्त अकधकनयम
द्वारा धारा 33 (छ) में ि गई ितो का पालन न
करने के कारण याच कवकनयकमकतकरण क
पररकध के अोंतगमत नह ों आता है।

20. याच व प्रत्यािी के कवद्वान
अकधवक्ताओों को ध्यान पूवमक सुना व याकचका पर
उपबल्ध समस्त अकभलेिोों का ध्यान पूवमक
पररि लन ककया।

21. इस प्रकरण में यह कनरधाररत ककया
जाना है कक याच कवकनयकमकतकरण के कलये
धारा 33 छ जो उ0प्र0 माध्यकमक किक्षा सेवा
2 All. Kameshwar Prasad Vs. State of U.P. & Ors.
1663
चयन बोडम (सोंिोधन) अकधकनयम 2016 द्वारा
ब ढ़ा ि गई है, में वकणमत ितो को पूणम करता है
कक नह ों। प्रस्तुत प्रकरण के सोंिभम के कलए
'धारा 33छ' कनम्न उि्धृत क गई है।

"33-छ
(1)
प्रधानाचायम
या
प्रधानाध्यापक से कभन्न ऐसे ककस अध्यापक को
प्रबिक द्वारा मौकलक कनयुन्धक्त ि जायेंग जो,-

(क) समय -समय पर यिासोंिोकधत
उत्तर प्रेिि माध्यकमक किक्षा सेवा आयोग
(ककिनाइयोों को िूर करना) (कद्वत य) आिेि
1981 के पैरा-2 के अनुसार अल्पकाकलक
ररन्धक्त के सापेक्ष प्रवक्ता श्रेण या प्रकिकक्षत
स्नातक श्रेण में 07 अगस्त 1993 को या उसके
पश्चात ककन्तु 25 जनवर , 1999 के पश्चात नह ों
पिोन्नकत द्वारा या स ध भती द्वारा कनयुन्धक्त
ककया गया िा और ऐस ररन्धक्त को बाि में
मौकलक ररन्धक्त में पररवकतमत कर किया गया िा,
(अल्पकाकलक ररन्धक्तयोों के सापेक्ष ककतपय और
कनयुन्धक्तयोों का कवकनयकमत करण)

(ि) प्रवक्ता श्रेण या प्रकिकक्षत
स्नातक श्रेण में धारा 18 के अनुसार मौकलक
ररक्त के सापेक्ष पिोन्नकत द्वारा अिवा स ध
भती द्वारा 07 अगस्त 1993 को या उसके
पश्चात ककन्तु 30 किसम्बर 2000 के पश्चात नह ों
तििम आधार पर कनयुक्त ककया गया िा,

(ग) इण्ट्रम कडएट किक्षा अकधकनयम
1921 के उपबिोों के अध न कचन्धन्हत अहमताएों
रिता हो या उनके अनुसार ऐस अहमताओों से
छूट प्राि हो,

(घ) ऐस कनयुन्धक्त के किनाोंक से
उत्तर प्रिेि माध्यकमक किक्षा सेवा चयन बोडम
(सोंिोधन) अकधकनयम, 2016 के प्रारम्भ होने
के किनाोंक तक सोंथिा में कनरन्तर कायम कर रहा
हो,

(ङ) उक्त उपधारा के िण्ड (ि) के
अध न कवकहत प्रकियानुसार धारा 33-ग क
उपधारा (2) के िण्ड (क) में कनकिमष्ट चयन
सकमकत द्वारा मौकलक रुप से कनयुन्धक्त के कलए
उपयुक्त पाया गया हो।

(2) (क) मौकलक कनयुन्धक्त के कलए
अध्यापकोों के नामोों क सोंस्तुकत उनक कनयुन्धक्त
के किनाोंक से यिा अवधाररत ज्येष्ठता िम में
क जायेग ,

(ि) यकि िो या अकधक ऐसे
अध्यापक एक ह किनाोंक को कनयुक्त ककये गये
हो तो आयु में ज्येष्ठ अध्यापक क सोंस्तुकत पहले
क जायेग ।

(3) उपधारा (1) के अध न मौकलक
रुप से कनयुन्धक्त प्रत्येक अध्यापक को ऐस
मौकलक कनयुन्धक्त के किनाोंक से पररव क्षा पर
समझा जायेगा।

(4) ऐसा अध्यापक, जो उपधारा (1)
के अध न उपयुक्त न पाया जाय और ऐसा
अध्यापक जो उक्त उपधारा के अध न मौकलक
कनयुन्धक्त पाने के कलए पात्र न हो, ऐसे किनाोंक
को, जैसा राज्य सरकार आिेि द्वारा कवकनकिमष्ट
करे, कनयुन्धक्त पर नह ों रह जायेगा।

(5) इस धारा क ककस बात से यह
नह ों समझा जायेगा कक कोई अध्यापक मौकलक
कनयुन्धक्त के कलए हकिार है, यकि उत्तर प्रिेि
माध्यकमक किक्षा सेवा चयन बोडम (सोंिोधन)
अकधकनयम 2016 के प्रारम्भ के किनाोंक को
ऐस ररन्धक्त पहले से ह भर हुय ि या ऐस
ररन्धक्त के कलए चयन इस अकधकनयम के
अनुसार पहले से ह कर कलया गया है।

(6)
तििम
अध्यापकोों
और
अल्पकाकलक ररन्धक्त के सापेक्ष कनयुन्धक्त
अध्यापकोों क सेवा उत्तर प्रिेि माध्यकमक
किक्षा सेवा चयन बोडम (सोंिोधन) अकधकनयम
2016 के प्रारम्भ होने के किनाोंक से कवकनयकमत
क जायेग ।

(7) तििम एवों अल्पकाकलक ररन्धक्तयोों
के
सापेक्ष
कनयुक्त
अध्यापकोों
के
कवकनयकमत करण में आरक्षण कनयमोों का पालन
ककया जाएगा।
1664 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(8) ऐसे तििम किक्षक जो उत्तर
प्रिेि
माध्यकमक
किक्षा
सेवा
आयोग
(ककिनाईयोों) का कनवारण आिेि 1981 के
अनुसार या उत्तर प्रिेि माध्यकमक किक्षा सेवा
चयन बोडम अकधकनयम, 1982 क धारा 18क
के अनुसार कनयुक्त नह ों ककये गये हैं और
अन्यिा
जो
केवल
मा0
न्यायालय
के
अन्तररम/आिेि के आधार पर वेतन प्राि कर
रहे हैं, कवकनयकमत करण के हकिार नह ों है। "

22. उपरोक्त वकणमत धारा 33 (छ) (1)
(क) व (घ), स्पष्ट रुप से वकणमत करते है कक
कवकनयकमकतकरण के कलये अध्यापक क
कनयुन्धक्त 7.8.1993 से 25.3.1999 के मध्य
होन चाकहये व कनयुन्धक्त क कतकि से
22.3.2016 (जब सोंिोकधत अकधकनयम 2016
प्रारम्भ हुआ) तक सोंथिा में कनरन्तर कायम करना
चाकहए।

23. प्रस्तुत प्रकरण में याच क कनयुन्धक्त
1.11.1993 को सोंथिा में हुई अिामत उसक
कनयुन्धक्त 7.8.1993 से 25.1.1999 में मध्य
हुई। अन्य ितम जैसे याच क कनयुन्धक्त
1.11.1993 को अल्पकाकलक ररक्त पि पर
क गई ि तिा कनयुन्धक्त प्रकिया को उच्च
न्यायालय द्वारा भ उकचत माना गया है को पूणम
करता है। तिाकप याच द्वारा उसक कनयुन्धक्त से
सोंिोकधत अकधकनयम 2016 में प्रारम्भ होने क
कतकि तक कनरन्तर कायम करने क ितम पूणम नह ों
करता है क्योोंकक उसक सेवा में 10.5.2006 से
15.5.2007 तक क सेवा क कनरोंतरता भोंग हो
गई ि अतः याच तथ्यात्मक रुप से सेवा क
कनरन्तरता क ितम कॊ पूणम नह ों करता है।
याच को कवद्वान अकधवक्ता भ इस तथ्य को
नकार नह ों पाये है।

23. एक कबन्िू और जो इस प्रकरण में
ऊभर कर आता है कक क्या न्यायालय के द्वारा
सेवा में आये अोंतराल को कनरोंतर मानने के
सम्बि में कनकश्चत आिेि क अनुपन्धथिकत में भ
इस अोंतराल को भ सेवा के सोंिभम में कनरोंतर
माना जा सकता है या नह ों।

24. न्यायालय द्वारा सेवा में पुनकनमयुन्धक्त
का आिेि केवल पुनकनमयुन्धक्त का आिेि या
पुनकनमयुन्धक्त के साि सेवा क कनरन्तरता का भ
आिेि या पुनकनमयुन्धक्त के साि सेवा क
कनरन्तरता व साि ह साि सेवा भ कनरन्तरता
के फलस्वरुप होने वाले सभ लाभॊ का भ
आिेि हो सकता है। इन त नोों आिेिोों में
अोंतर है। आिेि में प्रयोग ककये गये िब्दो के
अनुसार ह उस आिेि का लाभ किया जा
सकता है मात्र 'पुनकनमयुन्धक्त' के आिेि में 'सेवा
क कनरन्तरता' का आिेि स्वतः िाकमल है यह
नह ों माना जा सकता है।

25. वतमान प्रकरण में इस उच्च
न्यायालय कक एकल प ि ने अपने आिेि
किनाोंक 15.5.2007 के द्वारा कजला कवद्यालय
कनर क्षक के आिेि किनाोंक 27.4.2006 को
अपास्त (जो याच को 11.5.2006 को प्राि
हुआ) तो कर किया, परन्तु याच क इस
अोंतराल (11.5.2006 से 15.5.2007) क सेवा
क कनरन्तरता के कविय में कोई कवकिष्ट आिेि
नह ों पाररत ककया। अतः इस अोंतराल में याच
सेवारत रहा यह नह ों माना जा सकता। अतः
याच धारा 33 (6) (1) (घ) में वकणमत 'कनयुन्धक्त
से 22 माचम 2006 तक सेवा क कनरन्तरता' क
ितम को पूणम नह ों करता है, क्योोंकक कनकवमवाि
रुप से 11.5.2006 से 15.5.2007 तक याच
सोंथिा में अध्यापक के रुप में सेवारत नह ों िा।

26. उपरोक्त कववेचना से यह पूणमतः
कवकित है कक याच कवकनयकमकतकरण क सभ
ितो
को
पूणम
न
करने
के
कारण
कवकनयकमकतकरण क पररकध में नह ों आता है।
अतः मण्डल य कवकनयकमकतकरण सकमकत द्वारा
पाररत आछेकपत आिेि किनााँक 27.2.2017 में
2 All. C/M Kisan Intermediate College Jaunpur & Anr. Vs. State of U.P. & Ors.
1665
कोई तथ्यात्मक या वैधानिक त्रुटि िह ीं है। अतः
यह याचिका बलह ि होिे के कारण निरस्त
होिे योग्य है अतः निरस्त की जाती है।

27. व्यय पर कोई आदेश पाररत िह ीं
ककया जा रहा है।
----------
(2020)02ILR A1665

ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 26.11.2019

BEFORE
THE HON'BLE PRAKASH PADIA, J.

Writ A No. 17980 of 2019

C/M Kisan Intermediate College Jaunpur
& Anr. ...Petitioners
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioners:
Sri Jitendra Kumar Srivastava

Counsel for the Respondents:
C.S.C., Sri Rakesh Kumar

A.

Service

Law
-
Promotion
-
Constitution of India - Article 226 -
Maintainability - U.P. Intermediate Act,
1921 - U.P. High School and Intermediate
Colleges (Payment of Salaries of Teachers
and other Employees) Act, 1972 - typing
test/speed
prescribed
under
the
Government Orders - specific findings
recorded by the respondent No.3/District
Inspector of Schools - respondent No.5 is
having 26.8 words per minute typing
speed in Hindi which is requisite typing
speed as per Government Orders -
respondent No.5 is also having a valid
"CCC" Certificate duly issued in his favour
- no illegality in the order passed by
respondent No.3.(Para 11)

The petitioner challenged the order passed by
respondent No.3/District Inspectorof Schools -
one post of Assistant Clerk and four posts of
Class IV employees were sanctioned by the
State Government - requisite qualification for
promotion from Class IV post to Class III posts
is mentioned in the Government Orders - first
requisite qualification for promotion - typing
test/speed between 25 to 30 words per minute
either in Hindi or in English and not in both the
languages - second requisite qualification for
promotion - having certificate of CCC certificate
issued by the DOEACC.(Para 2,3,10)

Held:- The order passed by the District
Inspectorof
Schools
dated
19.10.2019
is
absolutely just and proper and does not call for
any interference by this Court specially under
Article 226 of the Constitution of India. (Para
12)

Writ Petition dismissed. (E-7)

List of cases cited:-

Sudhanshu Tyagi Vs. State Of U.P. And 4
Others , Writ A No.23580 of 2018

(Delivered by Hon'ble Prakash Padia, J.)

1. Heard Sri J.K. Srivastava, learned
counsel for the petitioners. Learned
Standing Counsel accepted notice on
behalf of respondent Nos. 1 to 4 and Sri
Rakesh Kumar, learned counsel accepted
notice on behalf of respondent No. 5.

2. The petitioner has preferred the
present writ petition challenging the order
dated 19.10.2019 passed by respondent
No.3/District Inspectorof Schools Jaunpur,
copy of which is appended as Annexure
No.14 to the writ petition.

3. Facts in brief as contained in the
writ petition are that the Institution in
question
namely
Kisan
Intermediate
College, Ajosi, District Jaunpur is a
recognized and aided Institution up to
High School Level. The same is governed