# Laxmi Narayan Soni @ Pintoo & Ors v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 3 ILRA 922
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-03-13
- **Case number:** Application U/S 482. No. 2066 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/laxmi-narayan-soni-pintoo-ors-v-state-of-u-p-51707
- **Pages:** 4

## Headnote

G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 323,
504, 506, 452 - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा
202(4) - आपराकिि िायगवाही िे कवरुद्ध - वैिता - प्राथी पक्ष
िा तिग है कि पररवाद िे साथ र्वाहों िी सूची प्रस्ट्तुत ि होिे से िारा
202(4) दं.प्र.सं. िा उल्लंघि हुआ, किससे संज्ञाि एवं अकर्युक्तों िो
आहूत िरिे िा आदेश अवैि हो िाता है - साथ ही, िारा 204(2)
दं.प्र.सं. िे अिुसार अकर्योिि साक्ष्यों िी सूची कदए कबिा समि या वारंट
िारी िहीं िर सिता - िारा 204(2) दं.प्र.सं. िा उद्देश्य अकर्युक्त
िो र्वाहों िी प्रकत-परीक्षा हेतु तैयारी िा अवसर देिा है - यह प्राविाि
बाध्यिारी िहीं है तथा र्वाहों िी सूची समि िारी िरिे से पूवग प्रस्ट्तुत ि
होिे पर र्ी बाद में प्रस्ट्तुत िी िा सिती है। िेवल उल्लंघि मात्र से
आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं होती, िब ति अकर्युक्त िो िोई
वास्ट्तकवि पूवाग्रह ि हुआ हो - लक्ष्मी शंिर पाण्िेय व अन्य बिाम उत्तर
प्रदेश राज्य (िीचे) में यही कसद्धांत प्रकतपाकदत किया र्या है - िारा
204(2) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत र्वाहों िी सूची ि प्रस्ट्तुत किया िािा
िेवल अकियकमतता है, िो सुिार योग्य है और इससे आदेश िी वैिता
प्रर्ाकवत िहीं होती, अतः प्राथी िा प्रथम तिग अस्ट्वीिार किया िाता है
- प्राथी िा अर्ला तिग कि चूाँकि वह मकिस्ट्रेट िे क्षेत्राकििार से बाहर
किवास िरते हैं, इसकलए कवचारण न्यायालय िो उन्हें आहूत िरिे से पूवग
िारा 202(1) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत अकिवायगतः िााँच िरिी चाकहए थी
- अकर्कििागररत - पत्रावली से स्ट्पष्ट है कि कवचारण न्यायालय िे िारा
202 दं.प्र.सं. िे अंतर्गत दो र्वाहों िे बयाि दिग िर प्राथीर्ण िो
आहूत िरिे िा आदेश कदया है - र्वाहों िे बयाि दिग िरिा िारा
202 िी िााँच िी श्रेणी में आता है, अतः यह िहिा कि न्यायालय िे
िारा 202 िे अंतर्गत िााँच िहीं िी, किरािार है - िेवल आरोप असत्य
होिे िे आिार पर आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं िी िा सिती -
प्राथी द्वारा कवचारण न्यायालय में प्रस्ट्तुत िमाित आवेदि पर सतेंर िुमार
अंकतल (िीचे) िे आलोि में शीघ्र किणगय िा किदेश। (पैरा 3 से 7,
10, 13, 14)

आवेदि किस्ट्ताररत I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

## Text

922 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

16. जि उपरोक्त विधि व्यिस्र्था के
आलोक में प्रस्तुत प्रकरण के तथ्यों को
देखा जाए तो यह प्रतीत होता है कक
पररिाद में विपक्षी सिं. 2 ने असियुक्तगण
द्िारा उसको मारने पीटने, गाली देने और
िमकी देने का आरोप लगाया तर्था यह िी
कहा कक प्रार्थी सिं. 3 ने उसकी जेि से रु०
1220/- जिरन तनकाल सलए। पररिादी ने
िारा 200 दिं०प्र०सिं. के अन्तगगत अपना
ियान अिंककत कराके घटना का समर्थगन
ककया है। दो साक्षक्षयों ने िारा 202
दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत अपना ियान अिंककत
करके घटना का समर्थगन ककया है। पररिाद
में कहे गए कर्थन तर्था इसके समर्थगन में
प्रस्तुत साक्ष्य के आिार पर प्रार्थीगण के
विचारण का मामला िन रहा है तर्था बिना
विचारण के प्रार्थीगण के विरुद्ि आपराधिक
कायगिाही को तनरस्त ककए जाने का कोई
आिार प्रतीत नहीिं होता है।

17.

आलोच्य
आदेश
हदनािंककत
01.02.2023 में कोई त्रुहट नहीिं है। प्रार्थगना
पत्र िलहीन है, तदनुसार, ननरस्त ककया
जाता है।
----------
(2024) 3 ILRA 922
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 13.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 2066 of 2024
Laxmi Narayan Soni @ Pintoo & Ors.
 ...Applicants
Versus
State of U.P. ...Opposite Party

Counsel for the Applicants:
Jai Narayan Pandey, Aprajita Tiwari

Counsel for the Opposite Party:
G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 323,
504, 506, 452 - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा
202(4) - आपराकिि िायगवाही िे कवरुद्ध - वैिता - प्राथी पक्ष
िा तिग है कि पररवाद िे साथ र्वाहों िी सूची प्रस्ट्तुत ि होिे से िारा
202(4) दं.प्र.सं. िा उल्लंघि हुआ, किससे संज्ञाि एवं अकर्युक्तों िो
आहूत िरिे िा आदेश अवैि हो िाता है - साथ ही, िारा 204(2)
दं.प्र.सं. िे अिुसार अकर्योिि साक्ष्यों िी सूची कदए कबिा समि या वारंट
िारी िहीं िर सिता - िारा 204(2) दं.प्र.सं. िा उद्देश्य अकर्युक्त
िो र्वाहों िी प्रकत-परीक्षा हेतु तैयारी िा अवसर देिा है - यह प्राविाि
बाध्यिारी िहीं है तथा र्वाहों िी सूची समि िारी िरिे से पूवग प्रस्ट्तुत ि
होिे पर र्ी बाद में प्रस्ट्तुत िी िा सिती है। िेवल उल्लंघि मात्र से
आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं होती, िब ति अकर्युक्त िो िोई
वास्ट्तकवि पूवाग्रह ि हुआ हो - लक्ष्मी शंिर पाण्िेय व अन्य बिाम उत्तर
प्रदेश राज्य (िीचे) में यही कसद्धांत प्रकतपाकदत किया र्या है - िारा
204(2) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत र्वाहों िी सूची ि प्रस्ट्तुत किया िािा
िेवल अकियकमतता है, िो सुिार योग्य है और इससे आदेश िी वैिता
प्रर्ाकवत िहीं होती, अतः प्राथी िा प्रथम तिग अस्ट्वीिार किया िाता है
- प्राथी िा अर्ला तिग कि चूाँकि वह मकिस्ट्रेट िे क्षेत्राकििार से बाहर
किवास िरते हैं, इसकलए कवचारण न्यायालय िो उन्हें आहूत िरिे से पूवग
िारा 202(1) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत अकिवायगतः िााँच िरिी चाकहए थी
- अकर्कििागररत - पत्रावली से स्ट्पष्ट है कि कवचारण न्यायालय िे िारा
202 दं.प्र.सं. िे अंतर्गत दो र्वाहों िे बयाि दिग िर प्राथीर्ण िो
आहूत िरिे िा आदेश कदया है - र्वाहों िे बयाि दिग िरिा िारा
202 िी िााँच िी श्रेणी में आता है, अतः यह िहिा कि न्यायालय िे
िारा 202 िे अंतर्गत िााँच िहीं िी, किरािार है - िेवल आरोप असत्य
होिे िे आिार पर आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं िी िा सिती -
प्राथी द्वारा कवचारण न्यायालय में प्रस्ट्तुत िमाित आवेदि पर सतेंर िुमार
अंकतल (िीचे) िे आलोि में शीघ्र किणगय िा किदेश। (पैरा 3 से 7,
10, 13, 14)

आवेदि किस्ट्ताररत I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. लक्ष्मी र्शांकर पाण्डेय िथा अन्य बनाम उिर प्रिेर्श राज्य िथा अन्य,
2023
(123
ए.सी.सी.
579)
3 All. Laxmi Narayan Soni @ Pintoo & Ors. Vs. State of U.P.
923
2. ववजय िानुका आवि बनाम नजीमा मोहिाज (2014) 14 एस.सी.सी.
638

3. केन्रीय जाांच ब्यरों बनाम आयान वसांह आवि, 2023 एसएससी ऑनलाइन
एससी 379

4. सिेंिर कुमार अांविल बनाम सी.बी.आई., (2021) 10 एससीसी
773

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थीगण के विद्िान अधििक्ता श्री
जय नारायन पाण्डेय की तरफ से उपजस्र्थतत
विद्िान अधििक्ता सुश्री शीतल शमाग तर्था
राज्य सरकार के विद्िान अधििक्ता श्री
पुनीत कुमार यादि को सुना तर्था पत्रािली
का अिलोकन ककया।

2. िारा 482 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अन्तगगत प्रस्तुत इस प्रार्थगना पत्र द्िारा
प्रार्थीगण ने अपर मुख्य न्यातयक मजजस्रेट,
कुण्डा, प्रतापगढ़ द्िारा आपराधिक िाद सिं.
4335/2022
में
पाररत
आदेश
हदनािंक
12.07.2023 की िैिता को चुनौती दी है,
जजसके द्िारा प्रार्थीगण को िारा 323, 504,
506, 452 िा०दिं०सिं० के अपराि के विचारण
हेतु आहूत ककया गया।

3. प्रार्थीगण की विद्िान अधििक्ता ने
तकग हदया कक पररिाद के सार्थ गिाहों की
सूची प्रस्तुत नहीिं की गई र्थी, जैसा िारा
202(4) दिं०प्र०सिं० में प्रावििातनत है और इस
आिार पर सिंज्ञान तर्था असियुक्तगण को
आहूत करने का आदेश अिैि हो जाता है।

4. िारा 204 (2) दिं०प्र०सिं० यह
प्रावििातनत करता है कक सिी असियुक्त के
विरुद्ि िारा (1) के अन्तगगत ति तक कोई
समन या िारिंट जारी नहीिं ककया जाएगा,
जि तक असियोजन के साक्ष्यों की सूची
जारी नहीिं कर दी जाती।

5. िारा 204(2) दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत
असियुक्त को विचारण हेतु आहूत करने से
पहले गिाहों की सूची प्रस्तुत करने का
उद्देश्य यह है कक असियुक्त उन गिाहों
की प्रतत परीक्षा के सलए तैयारी कर सके।
िारा 204 दिं०प्र०सिं० यह नहीिं कहता है कक
यहद गिाहों की सूची समन जारी करने के
पूिग प्रस्तुत नहीिं की गई तो इसे िाद में
प्रस्तुत नहीिं ककया जा सकेगा। िारा 204(2)
दिं०प्र०सिं० का उद्देश्य मात्र असियुक्त को
दुराशय से असियोजन प्रस्तुत करने िाले
िादकाररयों द्िारा उत्पीड़न से िचाना है।
िारा 204(2) का उललिंघन आपराधिक
कायगिाही के तनरस्तीकरण करने का िैि
आिार प्रदान नहीिं करता है। लक्ष्मी शंकर
पाण्डेय तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
तथा अन्य, 2023 (123) ए. ी. ी. 579 में
यह अििाररत ककया गया है कक िारा
204(2) दण्ड प्रकिया सिंहहता के प्रावििान
िाध्यकारी नहीिं है तर्था जि तक इस तनयम
के अन्तगगत गिाहों की सूची प्रस्तुत न ककए
जाने तर्था गिाहों की सूची प्रस्तुत करने में
हुई देरी के कारण से उसे कोई पूिाग्रह
काररत न हुआ हो, असियुक्त को विचारण
924 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
हेतु आहूत करने का आदेश इस आिार पर
तनरस्त नहीिं ककया जा सकता है।

6. अतः यह स्पष्ट है कक िारा 204(2)
के अन्तगगत गिाहों की सूची न प्रस्तुत
करना मात्र एक अतनयसमतता है, जजसको
ठीक ककया जा सकता है तर्था यह ऐसी
अिैिातनकता नहीिं है जो आदेश की िैिता
को विपरीत रूप से प्रिावित करे। प्रार्थी के
विद्िान
अधििक्ता
का
प्रर्थम
तकग
तदनुसार, तनरस्त ककया जाता है।

7. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
अगला तकग यह हदया कक प्रार्थीगण
मजजस्रेट के न्यायालय के क्षेत्राधिकार से
परे तनिास करते हैं और ऐसी पररजस्र्थतत में
मजजस्रेट को िारा 202 दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत जााँच करना अतनिायग र्था, ऐसे में
विचारण न्यायालय को प्रार्थीगण को आहूत
करने से पहले िारा 202(1) दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत जााँच की कायगिाही करनी चाहहए
र्थी।

8. दण्ड प्रकिया सिंहहता की िारा 2 (छ)
के प्रावििान तनम्न प्रकार हैं:-

'जााँच' से, असिप्रेत है विचारण से
सिन्न, ऐसी प्रत्येक जााँच जो इस सिंहहता के
अिीन मजजस्रेट या न्यायालय द्िारा की
जाए।

9. वििय धानुका आटद बनाम निीमा
मोहताि (2014) 14 ए . ी. ी. 638 आहद
में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह
ससद्िािंत प्रततपाहदत ककया कक उपरोक्त
प्राििानों से यह स्पष्ट है कक विचारण के
अततररक्त
मजजस्रेट
अर्थिा
न्यायालय
द्िारा की गई कोई िी जााँच िारा 2 (छ) के
अन्तगगत जािंच मानी जाएगी। िारा 202
दिं०प्र०सिं० जााँच का कोई विसशष्ट तरीका
प्रावििातनत नहीिं करती है। िारा 202
दिं०प्र०सिं० की जााँच के अन्तगगत गिाहों का
परीक्षण सजम्मसलत है, जिकक िारा 200
दिं०प्र०सिं० में मात्र पररिादी का साक्ष्य
अिंककत ककया जाना अतनिायग है तर्था िारा
200 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत यहद कोई साक्षी
उपजस्र्थत है तो उसका ियान िी अिंककत
ककया जा सकता है। मजजस्रेट द्िारा यह
सुतनजश्चत करने के सलए, कक असियुक्त के
विरुद्ि कायगिाही आगे चलाने के सलए
पयागप्त आिार है, की गई उपरोक्त कायगिाही
िारा 202 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत की गई
जााँच ही मानी जाएगी।

10. पत्रािली के अिलोकन से स्पष्ट है
कक विचारण न्यायालय ने िारा 202
दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत दो गिाहों के ियान
अिंककत करके प्रार्थीगण को विचारण हेतु
आहूत करने का तनणगय सलया है। गिाहों के
ियान अिंककत करना िारा 202 दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत की गई जााँच की कायगिाही ही है
और आलोच्य आदेश में इस आिार पर
कोई त्रुहट नहीिं है कक विचारण न्यायालय ने
िारा 202 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत जााँच नहीिं
की
है।
3 All. Harbhajan Singh Vs. State of U.P. & Anr.
925

11. उपरोक्त आदेश की िैिता को
चुनौती इस आिार पर िी दी गयी है कक
प्रार्थी के विरुद्ि लगाये गये आरोप असत्य
हैं।

12. माननीय सिोच्च न्यायालय के
तनणगय केंद्रीय िांच ब्यूरो बनाम आयुन
स ंह आटद, 2023 ए ी ी ऑनलाइन
ए ी 379 में अििाररत है कक िारा 482
दिं०प्र०सिं० के अिंतगगत शजक्तयों का उपयोग
करते हुए न्यायालय को लघु विचारण
(समनी रायल) करने की आिश्यकता नहीिं
है। इसमें असियोजन / जािंच एजेंसी को
आरोपों को साबित करने की आिश्यकता
नहीिं है। दिं०प्र०सिं० की िारा 482 के अिंतगगत
शजक्तयों का उपयोग करते समय न्यायालय
के पास िहुत सीसमत अधिकार क्षेत्र है और
मात्र यह विचार करने की आिश्यकता है
कक "क्या आरोपी के विरुद्ि आगे िढ़ने के
सलए कोई पयागप्त सामग्री उपलब्ि है,
जजसके सलए आरोपी पर मुकदमा चलाने की
आिश्यकता है या नहीिं"।

13. अतः प्रार्थी के विरुद्ि आपराधिक
कायगिाही बिना विचारण के इस स्तर पर
इस आिार पर अपास्त नहीिं की जा सकती
है कक प्रार्थी के कर्थनानुसार उसके विरुद्ि
लगाए गए आरोप असत्य हैं।

14. प्रार्थी के विरुद्ि आपराधिक
कायगिाही तनरस्त करने का कोई आिार
नहीिं है और प्रार्थगना पत्र िलहीन है, तदनुसार
यह प्रार्थगना-पत्र इस तनदेश के सार्थ
तनस्ताररत ककया जाता है कक यहद प्रार्थी
विचारण न्यायलय के समक्ष उपजस्र्थत
होकर जमानत पर ररहाई हेतु प्रार्थगना पत्र
देता है तो उसे माननीय उच्चतम न्यायालय
द्िारा
 तेंदर
कुमार
अंनतल
बनाम
 ी.बी.आई. (2021) 10 ए ी ी 773 में
अििाररत विधिक ससद्िािंतों के आलोक में
शीघ्रतापूिगक तनणीत ककया जायेगा।
----------
(2024) 3 ILRA 925
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 14.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 2138 of 2024

Harbhajan Singh ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Amit Kumar Singh, Brijendra Pratap Singh

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

Criminal Law - Indian Penal Code, 1860 -
Sections 147, 148, 149, 504, 506, 307 &
302 - Code of Criminal Procedure, 1973 -
Sections 311 & 319 - Recall of witness -
Validity of - Application u/s 311, Cr.P.C.
was moved by accused on ground that,
upon summoning of accused Deependra
Singh u/s 319 Cr.P.C., trial commenced de
novo, entitling all accused to re-crossexamine PW-1 - Trial court without taking
into consideration that PW-1 had already
been examined by prosecution, further
counsel for applicant and other coaccused Ram Nath Singh had also cross-