# M/s Sunray Auto Glass Pvt. Ltd., Gautam Budh Nagar v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2022) 11 ILRA 96
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2021-09-24
- **Case number:** Writ C No. 8089 of 2021
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/m-s-sunray-auto-glass-pvt-ltd-gautam-budh-nagar-v-state-of-u-p-ors-47630
- **Pages:** 6

## Headnote

C.S.C., Shekhar Srivastava

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## Text

96 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Court and the fact that judgment dated
11.7.1990 was passed on merit after
hearing both the parties, the review
jurisdiction exercised by the Board of
Revenue after 22 years from the date of the
judgment passed by the Board of Revenue
on merit is wholly without jurisdiction and
cannot be sustained in the eye of law. The
impugned judgment and order dated
15.7.2015 passed by Board of Revenue,
Allahabad in Review Application Nos. 1
and 2 of 2012-13 is liable to be set aside
and is hereby set aside. The original order
of Board of Revenue dated 11.7.1990 shall
stand restored.

12. The writ petition is allowed.

13. No order as to costs.
----------
(2022) 11 ILRA 96
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 24.09.2021

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ C No. 8089 of 2021

M/s Sunray Auto Glass Pvt. Ltd., Gautam
Budh Nagar ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Chandra Bhan Gupta

Counsel for the Respondents:
C.S.C., Shekhar Srivastava

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1. पी.वी.के. क्षिडस्टीलरी क्षललक्षिमटेड बिाम
महेन्द्र राम, (2009) 5 एस.सी.सी.705

2- महक क्षसिंह बिाम प्रसाईक्षडिंडग आक्षि.सर
इिंडस्टरीयल
क्षिटरव्यूिल,
2005
(5)
ए.
डब्लू.सी.5147;

3- प्रेम बहादुर दलेला बिाम उमेशराS बाली
2019(11) ए.डी.Sेे. 697;

4- उत्तर प्रदेश शासि बिाम लेबर कोट_ यू.पी.
इलाहाबाद 2002 (4) ए. डब्लू.सी.3295;
11 All. M/s Sunray Auto Glass Pvt. Ltd., Gautam Budh Nagar Vs. State of U.P.& Ors.
97
5- अरक्षिवन्द कुमार क्षिमश्रा बिाम उत्तर प्रदेश
शासि 2005 (5) ए. डब्लू.सी.4230;

6- वासू इन्फ्रास्टरक्चर प्राइवेट क्षलक्षिमटेड बिाम
उत्तर प्रदेश शासि 2019 (10) ए.डी.Sे . 305

7-
क्षिडक्षिवSि
.ेोरेस्ट
आक्षि.सर
.ेोरेस्ट
क्षिडपाट_मेंट बिाम क्षिडप्टी लेबर कक्षिमश्नर
कािपुर
रररSि
व
अन्य
(ररट
सी.
िम्बर
12954/2018 आदेश क्षिदिािंक 10.4.2018

8- रर्णवीर क्षसिंह बिाम एक्सीक्यूक्षिटव इिंSेीक्षिियर
पी०डब्लू०डी०, 2021 एस०सी०सी० अे िलाइि
एस०सी० 670

9- उत्तराखिंड शासि व अन्य बिाम राSकुमार
(2019) 14 एस.सी.सी. 353

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. प्रकरण का तथ्यात्मक प्रारूपः

(क) उप श्रमायुक्त, न एडा, उत्तर प्रिेश ने
आिेश
विनांक
31.12.2003
के
द्वारा,
अविवनर्णय
हेतु,
श्रम
न्यायािय
वद्वतीय,
गावियाबाि, क वनम्न औद्य वगक वििाि प्रेवित
वकया, ि शासनािेश विनांक 25.10.2007 के
द्वारा श्रम न्यायािय, उत्तर प्रिेश, न एडा, गौतम
बुद्ध नगर क थिानान्तररत वकया गया:

"क्या सेिाय िक द्वारा अपने श्रवमक
श्री मनीराम पाि पुत्र श्री सुखपाि पि चौकीिार
कम हेल्पर की सेिायें विनांक 16-03-98 से
समाप्त वकया िाना उवचत तिा/अििा िैधावनक
है यवि हॉ अििा नहीं त श्रवमक अपने
सेिाय िक से क्या अनुत ि प्राप्त करने का
अवधकारी है और वकस सीमा तक एिं अन्य
वकस वििरर् सवहत।"

(ख) श्रवमक पक्ष ने अपने विस्खत किन,
विनांक 18.02.2006, के द्वारा मुख्य रूप से
किन वकया, वक िह विपक्षी के मौस्खक
आिेशाधीन विनांक 02.05.1989, क ि
चौकीिार-कम-हेल्पर के पि पर थिायी रूप से
वनय वित
हुआ
िा
परन्तु
उसे
विनांक
16.03.1998 क मौस्खक आिेशाधीन, उ०प्र०
औद्य वगक अवधवनयम 1947 की धारा 6-एन के
अनुपािन वकये वबना कायण से पृिक/िंवचत कर
विया गया। ि विपक्षी की एक ििण से अवधक की
वनरन्तर सेिा में 240 वििस से अवधक की
वनरन्तर सेिा, "स्वच्छ सेिा ररकाडण" के साि पूर्ण
कर चुका िा तिा सेिा समास्प्त के बाि ि
बेर िगारी के कारर् घ र आविणक संकट में रह
रहा है।

(ग) सेिाय िक की ओर से विस्खत किन,
विनांक 11.02.2008 के द्वारा कवित वकया गया
वक, श्रवमक 02.05.1989 क हेल्पर कम
चौकीिार के पि पर रू० 1794/- प्रवतमास िेतन
पर वनय वित हुआ िा, परन्तु उसका कायण
संत ििनक नहीं रहा तिा इस संबंध में उसे
चेतािनी िी िी गई िी। श्रवमक विनांक
16.03.1998 से वबना वकसी अनुमवत ि अपनी
इच्छा से कायण से विरत रहा। उसने सेिाय िक
के पंिीकृत पत्र विनांक 10.04.1998 का क ई
उत्तर िी नहीं विया, तिउपरांत रू० 1272/- का
एक चैक, विसका नम्बर 583690 िा उसक
एक पत्र विनांक 12.06.1998 के संिग्न िेिा
गया, परन्तु उसने उसक िेने से इंकार कर
विया। श्रवमक वकसी बेहतर र िगार वमिने के
कारर् अपनी इच्छा से सेिाय िक का र िगार
छ ड़ कर चिा गया िा।

(घ) श्रवमक ने अपने प्रत्युत्तर में सेिाय िक
के विस्खत किन क अस्वीकार वकया ि अपने
विस्खत किन क ि हराया। इसी तरह से
सेिाय िक ने अपने प्रत्युत्तर में श्रवमक के
98 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
विस्खत किन क अस्वीकार करते हुए अपने
विस्खत किन क ि हराया।

(ड़) श्रम न्यायािय ने श्रवमक पक्ष द्वारा
प्रस्तुत डाक घर की स्थिवत आख्या क मानते हुए
सेिाय िक क न वटस तामीि ह ना मान विया
गया तिा सेिाय िक पक्ष की अनुुुपस्थिवत के
कारर्
11.12.2018
क
सेिाय िक
का
अवििेख िास्खि करने का अिसर समाप्त कर
विया। विनांक 01.07.2019 क सेिाय िक का
श्रवमक साक्षी से विरह करने का तिा विनांक
14.10.2019 क सेिाय िक का साक्ष्य का
अवधकार िी समाप्त कर विया गया।

(च) इन पररस्थितय ं में आक्षेवपत अिाडण
विनांक 02.12.2019 पाररत वकया गया विसके
मुख्य अंश वनम्न ह ैंः

"श्रवमक िािी का तकण सुना गया उन्ह ने
अपने तकण में कहा वक िािी श्रवमक ने अपने
किन क अपने बयान एिं अवििेख ं से वसद्ध
वकया है। सेिाय िक ने पयाणप्त अिसर विये
िाने के बाि िी अपना क ई अवििेखीय साक्ष्य
प्रस्तुत नहीं वकया है। श्रवमक ने अपने विस्खत
किन एिं अवििेखीय साक्ष्य में कहा है वक िह
विपक्षी प्रवतष्ठान में विनांक 02-05-1989 से
चौकीिार कम हेल्पर के पि पर थिायी रूप से
वनय वित हुआ िा और प्रवतिािी सेिाय िक ने
विनांक 16.03.1998 क नौकरी से वनकाि विया
विससे वसद्ध है वक उसने एक किेन्डर ििण में
240 विन से अवधक कायण वकया है। इस प्रकार
मौस्खक
रूप
से
सेिाये
समाप्त
करना
यू०पी०आई०डी०एक्ट की धारा 6 एन का
उल्लंघन है। श्रवमक सेिा समास्प्त की वतवि से
बेर िगार रहा है। अतैंः उसे पूिण पूर्ण िेतन ि
अन्य समस्त वहत िाि ं सवहत सेिा में बहाि
कराया िाये।

उक्त तकण के पररप्रेक्ष्य में पत्राििी का
अिि कन वकया गया विससे स्पष्ट है वक श्रवमक
ने अपने बयान एिं अवििेख ं से यह वसद्ध वकया
है वक िह विनांक 02.05.1989 से विनांक
16.03.1998 तक सेिाय िक ं के यहां कायणरत
रहा है ि एक किेन्डर ििण में 240 विन से
ज्यािा की अिवध है। िािी श्रवमक की विनांक
16.03.1998 क प्रवतिािी सेिाय िक द्वारा वबना
घरेिू िॉच वकये ि आर प पत्र विये सेिाये
समाप्त की गई है ि अिैधावनक है।
सेिाय िक क पयाणप्त अिसर विये िाने के
बाििूि िी श्रवमक के किन के विपरीत ऐसा
क ई साक्ष्य नहीं विया है विससे वक श्रवमक के
किन पर अविश्वास वकया िाये। श्रवमक ने सेिा
समास्प्त की वतवि से िगातार बेर िगार रहा है
का किन वकया है ि अन्यिा साक्ष्य के अिाि
में सही माना िायेगा वक श्रवमक सेिा समास्प्त
की वतवि से बेर िगार है।

उपर क्त वििेचना के आधार पर
स्पष्टतैंः संबंवधत श्रवमक की सेिाये विनांक
16.03.1998 क अिैधावनक रूप से समाप्त की
गयी है। श्रवमक िािी उक्त वतवि के बाि कही
िी िािकारी वनय िन में नहीं है। इस पररप्रेक्ष्य
में श्रवमक िािी उक्त वतवि से पूिण सेिा शतों/
िाि ं के साि पूर्ण बैकिेिेि ि अन्य समस्त वहत
िाि ं सवहत सेिा में बहाि ह ने का अवधकारी
है। तिनुसार संििण श्रवमक के पक्ष में
अविवनर्ीत
वकया
िाता
है।"
(रेखांकन
न्यायािय द्वारा)

(छ) सेिाय िक द्वारा एक प्रािणना पत्र
विनांक 06.03.2020 क एकपक्षीय आिेश
विनांक 11.12.2018, 01.07.2019, 14.10.2019
ि अिाडण विनांक 02.12.2019 क अपास्त करने
के विए िास्खि वकया गया, वक न वटस
सेिाय िक के अवधकृत व्यस्क्त क प्राप्त नहीं
हुआ िा। श्रवमक द्वारा इस प्रािणना पत्र पर
आपवत्त िी िास्खि की गयी वक डाक वििाग के
स्थिवत आख्या द्वारा न वटस के तामीि ह ने की
पुवष्ट ह ती है। श्रम न्यायािय ने आिेश विनांक
15.01.2021 द्वारा उक्त प्रािणना पत्र क वनरस्त
11 All. M/s Sunray Auto Glass Pvt. Ltd., Gautam Budh Nagar Vs. State of U.P.& Ors.
99
कर विया वक, अिाडण विनांक 02.12.2019 क
पाररत ह ने के उपरान्त प्रकावशत िी ह गया,
तिउपरान्त 06.03.2020 क उक्त प्रािणना पत्र
िास्खि वकया गया तिा विनांक 08.03.2018 क
ि न वटस िेिा गया िा उसकी प्रास्प्त क , डाक
वििाग द्वारा पुवष्ट वकया गया वक, ि 09.03.2018
क सेिा य िक क प्राप्त िी ह गया िा तिा
प्राप्त करने िािे का नाम ि उसका चि िूरिाि
का नम्बर िी अंवकत िा। अतैंः प्रािणना पत्र
स्वीकार करने का क ई आधार नहीं रहा।

2- सेवायोजक का पक्ष

(क) श्री चन्द्र िान गुप्ता, प्रािी (सेिाय िक)
के विद्वान अवधिक्ता ने किन वकया वक सेिाय िक
क किी िी न वटस तावमि नहीं हुआ िा और न हीं
उस संििण में क ई िी आिेश पत्राििी पर उपस्थित
है। अगर विनांक 08.03.2018 क िेिा गया न वटस
तामीि ह गया ह ता, त विनांक 10.08.2018 या
आगे वकसी िी वतवि पर न वटस तामीि ह ने का
आिेश पत्राििी पर अंवकत ह ता। श्रवमक का पक्ष
मात्र, उसके विस्खत किन पर मान विया गया, ि
गित है। श्रवमक ने अपने पक्ष में क ई िी िस्तािेि,
श्रम न्यायािय, के समक्ष उपिब्ध नहीं कराया। अतैंः
श्रम न्यायािय का यह वनष्किण वक श्रवमक ने 240
विन से अवधक कायण एक किेन्डर ििण में वकया िा,
का आधार काल्पवनक ि केिि अनुमान पर
आधाररत है।

(ख) श्रवमक के किनानुसार उसक विनांक
16.03.1998 क कायण विरत करने का मौस्खक
आिेश पाररत वकया गया परन्तु श्रम न्यायािय क
औद्य वगक वििाि 31.12.2003 क िेिा गया,
अिाणत 5 ििण बाि, अतैंः इतने अवधक वििम्ब के
कारर् उस पर अविवनर्णय नहीं विया िाना चावहये
िा।

(ग) ितणमान में श्रवमक की आयु करीब 64
ििण है तिा उसका 1998 के उपरान्त वनरन्तर
बेर गिार ह ने का क ई यि वचत कारर्
पत्राििी पर उपस्थित नहीं है। सेिा में पुनैंः
वनयुस्क्त करने का आिेश पूर्ण रूप से गित ि
अिैधावनक है तिा, पूर्ण बकाया िेतन िेने का
आिेश िी आधारहीन ह ने के कारर् अपास्त
ह ने य ग्य है।

(घ) अवधिक्ता ने यह िी किन वकया वक
पूर्ण बकाया िेतन न िे कर, उवचत एक मूश्त
प्रवतकर िी विया िा सकता िा। सेिाय िक के
विद्वान अवधिक्ता ने न्यायािय का ध्यान उच्चतम
न्यायािय के वनर्णय पी.वी.के. डिस्टीलरी
डलडिटेि बनाि िहेन्द्र राि, (2009) 5
एस.सी.सी.705 की ओर आकविणत करिाया,
विसके अनुसार अगर श्रम न्यायािय इस
वनष्किण पर पहुंचता है वक सेिा वनय िक ने
श्रवमक की सेिायें वनरस्त नहीं करी है त वििाि
की वनस्तारर् की प्रविया िहीं र क िेनी चावहए।
इसके अवतररक्त पुनैंः वनयुस्क्त ि पूर्ण बकाया
िेतन का आिेश स्वतैंः नहीं ह सकता है।

3- श्रडिक का पक्ष

(क) श्री शेखर श्रीिास्ति, विद्वान
अवधिक्ता ने श्रवमक का पक्ष रखा तिा किन
वकया वक डाक वििाग द्वारा िारी वकये गये
प्रमार् पत्र से पूर्णतैंः विवित है वक, सेिाय िक
क न वटस तामीि ह गया िा तिा ि अपनी
इच्छानुसार अपना पक्ष न रखने के विए
विम्मेिार है। श्रम न्यायािय ने श्रवमक के किन
ि प्रकरर् के तथ् ं क ध्यान में रखते हुए
विवधक रूप से अिाडण पाररत वकया है, अतैंः
उसमें वकसी िी तरह से हस्तक्षेप करने का न त
क ई आधार है न ही क ई आिश्यक्ता है।
अवधिक्ता ने अपने किन क बि िेने के विए
वनम्न विवधक दृष्टांत क न्यायािय के समक्ष
प्रस्तुत वकया; िहक डसिंह बनाि प्रसाईडििंग
आडिसर इिंिस्टरीयल डटरव्यूनल, 2005 (5) ए.
िब्लू.सी.5147; प्रेि बहादुर दलेला बनाि
100 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
उिेशराज बाली 2019(11) ए.िी.जे. 697;
उत्तर प्रदेश शासन बनाि लेबर कोटट यू.पी.
इलाहाबाद 2002 (4) ए. िब्लू.सी.3295;
अरडवन्द कुिार डिश्रा बनाि उत्तर प्रदेश
शासन 2005 (5) ए. िब्लू.सी.4230; वासू
इन्फ्रास्टरक्चर प्राइवेट डलडिटेि बनाि उत्तर
प्रदेश शासन 2019 (10) ए.िी.जे. 305;
डिडवजन
िोरेस्ट
आडिसर
िोरेस्ट
डिपाटटिेंट बनाि डिप्टी लेबर कडिश्नर
कानपुर ररजन व अन्य (ररट सी. नम्बर
12954/2018 आदेश डदनािंक 10.4.2018) और
किन वकया वक न वटस तामीि ह ने के उपरान्त
िी अपना पक्ष न रखने की िशा में श्रवमक के
पक्ष क ध्यान में रखते हुए वनर्णय िेने में क ई
विवधक त्रुवट नहीं है। श्रम वििाि, श्रवमक के वहत ं
क ध्यान में रखते हुए वनधाणररत करना चावहए।
मौस्खक रूप से कायण से पृिक करना विवध
विरूद्ध है। डाक वििाग द्वारा िी गई स्थिवत
आख्या, न वटस तावमि ह ने का मान्य साक्ष्य है।
अगर सेिाय िक अपना पक्ष या िस्तािेि प्रस्तुत
नहीं करता है त उसके प्रवतकूि वनर्णय विया
िा सकता है।

4- डवश्लेषण

(क) उपर क्त िवर्णत ि न ं पक्ष ं के किन
ि पत्राििी के सम्यक पररशीिन से यह विवित
है वक डाक वििाग की स्थिवत आख्या ि न वटस
प्राप्त करने िािे का नाम ि चि िूरिाि ििण
ह ने के साक्ष्य से यह अवििावित ह िाता है, वक
न वटस सेिाय िक क तामीि ह गया िा।
सेिाय िक ने न वटस प्राप्त करने िािे का
हस्ताक्षर वििावित नहीं वकया है। सेिाय िक ने
न वटस तामीि ह ने के बाि िी अपना पक्ष श्रम
न्यायािय के समक्ष नहीं प्रस्तुत वकया, अतैंः श्रम
न्यायािय द्वारा श्रवमक का पक्ष मान िेने में क ई
विवधक त्रुवट प्रतीत नहीं ह ती है। अतैंः ितणमान
प्रकरर् मेुेुं
 उ० प्र० औद्य वगक अवधवनयम
1947 की धारा 6 एन का उिंघन हुआ है।

(ख) उपर क्त तथ् ं में केिि एक वबन्िू है
ि अब विचारर्ीय रह िाता है, वक क्या श्रम
न्यायािय द्वारा श्रवमक की पुनैंः वनयुस्क्त ि पूर्ण
बकाया िेतन का आिेश, ितणमान प्रकरर् के
तथ् ि पररस्थिवतय ं में क्या उवचत है, िबवक
औद्य वगक वििाि 5 ििण बाि प्रेवित वकया गया,
श्रवमक प्रकरर् के िौरान ही 58 ििण की आयु
पार कर चुका है ि ऐसा क ई ठ स साक्ष्य
पत्राििी पर उपिब्ध नहीं है वक श्रवमक 1998
से 2019 ि अब तक वबना वकसी र िगार के
अपना िीिन यापन व्यतीत करता रहा है।

(ग) इस संििण में उच्चतम न्यायािय का
एक निीन वनर्णय ि रणवीर डसिंह बनाि
एक्सीक्यूडटव
इिंजीडनयर
पी०िब्लू०िी०,
2021 एस०सी०सी० अॉ नलाइन एस०सी०
670 के मामिे में पाररत वकया गया है, ि
ितणमान प्रकरर् के तथ् ं में पूर्णतैंः उपयुक्त है,
िहााँ उत्तराखिंि शासन व अन्य बनाि
राजकुिार (2019) 14 एस.सी.सी. 353 का
आधार िेते हुए पुनैंः यह वनधाणररत वकया गया
वक ऐसे प्रकरर् में िहां धारा 6 एन का उल्लघंन
ह तब िी पुनैंः वनय स्क्त ि पूर्ण बकाया िेतन
का आिेश स्वतैंः पाररत नहीं ह सकता है तिा
उसके थिान पर केिि एक मुश्त उवचत
प्रवतकर प्रिान करने का आिेश िी एक
न्यायसंगत वनिान ह सकता है। इस वनर्णय के
प्रस्तर 6 के प्रमुख अंश वनम्न ह :

".....िैसा
वक
अनुवचत
व्यापार
व्यिहार के ह ने का क ई वनष्किण नहीं है। ऐसी
पररस्थिवतय ं में हम स चते है वक इस न्यायािय
द्वारा प्रवतपावित वसद्धांत, विसे राि कुमार
(उपर क्त) के वनर्णय में संिविणत वकया गया है,
विसका हमने उल्लेख िी वकया है, का पािन
करना अवधक उपयुक्त ह गा। िूसरे शब् ं में,
हमारा वनष्किण यह है वक पुनवनणयुस्क्त स्वतैंः नहीं
ह सकती है, धारा 25 एफ का उल्लंघन थिावपत
ह चुका है, अतैंः उपयुक्त प्रवतकर उवचत वनिान
रहेगा।"
11 All. Shakuntla Devi Vs. State of U.P.& Ors.
101

(वहन्दी अनुिाि ि रेखांकन न्यायािय द्वारा)

5- डनष्कषट

(क) उपर क्त विशिेिर् के संििण में यह
ध्यान में रखते हुए वक श्रवमक ने सेिाय िक के
साि केिि 9 ििण अथिाई सहायक के रूप में
कायण वकया ि 1998 से 2019, िब आिाडण पाररत
हुआ ि आि तक ऐसा नहीं माना िा सकता वक
इन 23 ििों तक श्रवमक ने क ई िी कायण या
र िगार अपने िीिन यापन के विए नहीं वकया
ह या इतने ज्यािा समय तक ि पुर्ण रूप से
बेर िगार रहा ह , तिा श्रवमक की आयु ितणमान
में 64 ििण का ह ना ि उपर क्त उल्लेस्खत विवध
का वसद्धांत वक ऐसी पररस्थिवत में पुनैंः वनयुस्क्त
ि पूर्ण बकाया िेतन का आिेश स्वतैंः नहीं ह
सकता है, अतैंः पुनैंः वनय स्क्त ि पूर्ण बकाया
िेतन के आिेश के थिान पर श्रवमक क
सेिाय िक द्वारा रूपये 3 िाख एक मुश्त
प्रवतकर के रूप में प्रिान करने का आिेश िेना
न्याय वचत ि न्यायसंगत रहेगा, ि प्रािी
(सेिाय िक) विपक्षी (श्रवमक) क इस वनर्णय की
वतवि से 8 सप्ताह के अन्दर उसके द्वारा सूवचत
ब क खाते में अन्तररत करेगा। अतैंः उक्त आिेश
ि वनिेश विया िाता है।

(ख) अतैंः ितणमान यावचका उपर क्त
वनिेश ं के साि आंवशक रूप से स्वीकार की
िाती है ि आक्षेवपत अिाडण विनांक 15.01.2021,
उपर क्त आिेश ि वनिेश ं के आधार पर
अनुत ि का आिेश संश वधत वकया िाता है।
----------
(2022) 11 ILRA 101
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 12.10.2022

BEFORE

THE HON'BLE MANOJ KUMAR GUPTA, J.
THE HON'BLE RAM MANOHAR NARAYAN
MISHRA, J.
Writ C No. 14031 of 2022

Shakuntla Devi ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Man Bahadur Singh, Sri Rakesh Pande
(Sr. Advocate)

Counsel for the Respondents:
C.S.C., Sri Ashok Kumar Giri, Sri Ashok
Kumar Tiwari, Sri Syed Ahmed Faizan, Sri
Ten Singh, Sri Zaheer Asghar, Sri S.F.A.
Naqvi (Sr. Advocate)

A. Constitution of India - Article 226 -
Writ - Maintainability - Plea that writ is
premature, how far permissible - By
determining
and
delimitation
of
the
wards, the impugned notification paved
way for holding fresh election alongwith
election of other Municipalities - Effect -
Held,
fresh
exercise
undertaken
in
pursuance of the impugned notification
will have the effect of curtailing the
duration of Municipality she is heading,
she definitely has an actionable right in
presenti to challenge the notification and
the consequential exercise, to protect her
constitutional and statutory rights - The
petitioner cannot be made to wait till the
notification for holding the election is
published,
when
the
stand
of
the
respondents is clear and unambiguous in
relation
to
the
proposed
election
scheduled to be held in December, 2022 -
High
Court
found
no
force
in
the
contention that the petition is premature,
or is based on mere apprehension. (Para
14)
B. Constitution of India - Article 243-Q,
243-R - UP Municipalities Act, 1916 - Ss.
3, 9, 10-A and 333 - Fresh election of the
municipality
-
Five
year
tenure
of
municipalities, how far relevant - Held,
duration of the Municipality, elected on
13.3.2022 would be five years from the
date of its first meeting in terms of Article
243-U r/w S. 10-A of the UP Municipalities