# Master Shantul @ Shiv Prasad & Anr v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2024) 4 ILRA 1580
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-04-01
- **Case number:** Writ -C No. 3000116 of 2002
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/master-shantul-shiv-prasad-anr-v-state-of-u-p-ors-51751
- **Pages:** 6

## Headnote

C.S.C.

U.P.
Imposition
of
Ceiling
on
Land
Holdings Act, 1960 - Sections 5(6) & 13
- Transfer after appointed date (24.01.1971) -
Land purchased by petitioners' predecessor in
1973 - Ceiling proceedings initiated against
original tenure-holder - Land included in
surplus-
Appeal
and
remand
-Prescribed
Authority reconsidered entire record and earlier
orders -No evidence led by transferee to prove
bona fide transfer for adequate consideration or
absence of benami nature - Burden under S.
5(6) lies on transferee -No alternative land of
original tenure-holder available for adjustment -
Mere drafting error in confirming earlier order
does not vitiate decision -Concurrent findings of
authorities -No perversity or illegality - Article
226 jurisdiction not to be exercised on technical
errors .

Writ Petition dismissed. (E-9)

## Text

1580 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
(2024) 4 ILRA 1580
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: LUCKNOW 01.04.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Writ -C No. 3000116 of 2002

Master Shantul @ Shiv Prasad & Anr.
 ...Petitioners
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioners:
P.L. Misra, Madan Gopal Misra

Counsel for the Respondents:
C.S.C.

U.P.
Imposition
of
Ceiling
on
Land
Holdings Act, 1960 - Sections 5(6) & 13
- Transfer after appointed date (24.01.1971) -
Land purchased by petitioners' predecessor in
1973 - Ceiling proceedings initiated against
original tenure-holder - Land included in
surplus-
Appeal
and
remand
-Prescribed
Authority reconsidered entire record and earlier
orders -No evidence led by transferee to prove
bona fide transfer for adequate consideration or
absence of benami nature - Burden under S.
5(6) lies on transferee -No alternative land of
original tenure-holder available for adjustment -
Mere drafting error in confirming earlier order
does not vitiate decision -Concurrent findings of
authorities -No perversity or illegality - Article
226 jurisdiction not to be exercised on technical
errors .

Writ Petition dismissed. (E-9)

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi J.)

1.

याधचकाकताजगण
के
विद्वान
अधिििा श्री मदन गोपाि धमश्रा तर्था
विद्वान स्र्थायी अधिििा श्री िक्ष्मी मोिन
खरे को सुना तर्था पर्त्राििी का अििोकन
हकया।

2. भारतीय संवििान के अनुच्िेद
226 के अन्तगजत प्रस्तुत इस ररर् याधचका
द्वारा याधचकाकताजगण ने अपर म्जिाधिकारी
(वित्त/राजस्ि)/धनहित प्राधिकारी सीधिंग,
उन्नाि द्वारा िाद संख्या 5/8/5 अन्तगजत
िारा 2 उत्तर प्रदेि भूधम जोत सीमा
अधिरोपण अधिधनयम, 1960 (म्जसे इसके
उपरान्त
इस
धनणजय
में
'सीमारोपण
अधिधनयम' किा जाएगा) में पाररत धनणजय
तर्था आदेि हदनांक 13.12.2001 तर्था उि
आदेि के विरुद्ध पाररत अपीि संख्या
11/2001-2002
में
अपर
आयुि
(न्याधयक), िखनऊ मंडि िखनऊ द्वारा
पाररत
धनणजय
तर्था
आदेि
हदनांक
05.10.2002 की िैिता को चुनौती दी िै।

3. संक्षेप में प्रकरण के तथ्य इस
प्रकार िैं हक याधचकाकताजगण के वपता
स्िगीय विनय कुमार िुक्िा ने गार्ा संख्या
236 क्षेर्त्रफि 4 बीघा 14 वबस्िा 13
वबस्िांसी तर्था गार्ा संख्या 302 क्षेर्त्रफि 5
बीघा 6 वबस्िा म्स्र्थत िाम कलयाणपुर,
परगना पार्न, तिसीि पुरिा, जनपद उन्नाि
की भूधम रानी रघुिंि दुिारी से वििय-पर्त्र
हदनांक 07.11.1973 के माध्यम से िय की
र्थी तर्था भूधम का अध्यासन भी प्राप्त कर
धिया र्था। िाम कलयाणपुर में चकबंदी की
प्रहिया चि रिी र्थी, म्जस कारण से
4 All. Master Shantul @ Shiv Prasad & Anr. Vs. State of U.P. & Ors.
1581
याधचकाकताजगण के वपता के पक्ष में
नामान्तरण
आदेि
सिायक
बंदोबस्त
अधिकारी चकबंदी ने िाद संख्या 711 में
हदनांक 07.11.1974 को पाररत हकया र्था।
इसके उपरांत भी धिवपकीय र्त्रुहर् के कारण
रानी रघुिंि दुिारी का नाम खाता संख्या
184 के संबंि में 1389 और 1394 फसिी
िषों में अंहकत रिा। याधचकाकताजगण के
वपता विनय कुमार िुक्िा ने अधभिेखों की
दुरुस्ती के धिए िारा 33 उत्तर प्रदेि भू-
राजस्ि अधिधनयम सपहठत िारा 9 (क)
उत्तर प्रदेि जोत चकबंदी अधिधनयम के
अन्तगजत
प्रार्थजना
पर्त्र
हदया।
उप
म्जिाधिकारी पुरिा, जनपद उन्नाि ने
हदनांक 14.11.1983 को श्री विनय कुमार
िुक्िा का नाम अंहकत करने का आदेि
हदया।

4. रानी रघुिंि दुिारी के विरुद्ध
सीमारोपण
अधिधनयम
के
अन्तगजत
कायजिािी चािू िुई तर्था चुके उनका नाम
राजस्ि अधभिेखों में अहकत चिा आ रिा
र्था, भू-खण्ड संख्या 236 तर्था 302 भूधम
भी उनकी भूधम में सम्ममधित करते िुए
अधतररि भूधम घोवषत कर दी गई।

5. विहित प्राधिकारी के उपरोि
आदेि के विरुद्ध अधिधनयम की िारा 13 के
अन्तगजत जनपद न्यायािीि उन्नाि के
समक्ष अपीि प्रस्तुत की गई, जो हदनांक
06.09.1976 के धनणजय तर्था आदेि से
स्िीकार की गई तर्था विहित प्राधिकारी का
आदेि अपास्त करते िुए प्रकरण को पुनः
धनणीत हकए जाने िेतु प्रधतप्रेवषत हकया
गया। विहित प्राधिकारी ने प्रकरण को पुनः
धनणीत हकया तर्था उसके धनणजय के विरुद्ध
पुनः एक अपीि प्रस्तुत िुई जो हदनांक
07.04.1980 को स्िीकार करते िुए प्रकरण
को पुनः विहित प्राधिकारी को प्रधतप्रेवषत
हकया गया।

6. विहित प्राधिकारी ने प्रकरण को
पुनः हदनांक 21.03.1986 को धनणीत करते
िुए प्रश्नगत भूधम को रानी रघुिंि दुिारी
की अधतररि भूधम घोवषत हकया। उि
आदेि के विरुद्ध रानी रघुिंि दुिारी ने पुनः
एक अपीि संख्या 2 सन 1985-1986
प्रस्तुत की तर्था इसी आदेि के विरुद्ध
याधचकाकताजगण के वपता श्री विनय कुमार
िुक्िा ने भी एक अपीि संख्या 3 सन
1985-1986 प्रस्तुत की।

7. ररर् याधचका में यि भी किा
गया िै हक याधचकाकताजगण के वपता ने
विहित प्राधिकारी के समक्ष धसविि जज
उन्नाि
द्वारा
पाररत
आदेि
हदनांक
07.04.1980 के हियान्ियन के धिए भी
एक प्रार्थजना पर्त्र हदया र्था, जो विहित
प्राधिकारी ने हदनांक 16.01.1989 को इस
आिार पर धनरस्त कर हदया हक विहित
प्राधिकारी के आदेि हदनांक 31.03.1986 के
विरुद्ध एक अपीि िम्मबत र्थी। उि आदेि
1582 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
से व्यधर्थत िोकर याधचकाकताजगण के वपता
ने अपीि संख्या 8 सन 1988-1989 प्रस्तुत
की, जो हक अपीि संख्या 2 तर्था 3 सन
1985-1986 के सार्थ िी धनणजय हदनांक
30.01.1991 द्वारा धनणीत की गई, म्जसके
द्वारा विद्वान अपर आयुि (न्याधयक)
िखनऊ मण्डि ने अपीि आंधिक रूप से
स्िीकार करते िुए धनयत प्राधिकारी का
आदेि हदनांक 31.03.1986 इस सीमा तक
धनरस्त कर हदया हक याधचकाकताजगण द्वारा
िय हकए गए भू-खण्ड को सीधिंग एररया
से मुि करते िुए रानी रघुिंि दुिारी की
अन्य भूधम से समान क्षेर्त्रफि धनयमानुसार
अधतररि भूधम घोवषत हकया जाए।

8. अपर आयुि द्वारा पाररत
उपरोि
धनणजय
तर्था
आदेि
हदनांक
30.1.1991 से पूिज पाररत हकसी भी आदेि
की प्रधतधिवप इस ररर् याधचका के सार्थ
संिग्न निीं की गई िै।
9. प्रार्थीगण ने अपनी माता एिं
संरम्क्षका श्रीमती अरुणा िुक्िा के माध्यम
से हदनांक 12.06.1997 को एक प्रार्थजना पर्त्र
धनयत प्राधिकारी को इस आिय से हदया
हक उपरोि आदेि हदनांक 30.01.1991 का
हियान्ियन कराया जाए।

10.

इसके
उपरांत
अपर
म्जिाधिकारी वित्त/राजस्ि/धनयत प्राधिकारी
सीधिंग उन्नाि ने हदनांक 17.06.1999 को
आदेि पाररत करके यि किा हक अपीिीय
न्यायािय के आदेि हदनांक 30.01.1991
तर्था याधचकाकताजगण के प्रार्थजना पर्त्र के
आिोक में तिसीिदार बीघापुर से आख्या
प्राप्त की गई तर्था तिसीििार बीघापुर ने
अपनी आख्या हदनांक 17.09.1998 में यि
किा हक रानी रघुिंि दुिारी के नाम िाम
कलयाणपुर
में
मार्त्र
गार्ा
संख्या
847/0.439 ि 849/0.482 में 1/5 भाग
िै जो मार्त्र 0.184 िेक्र्ेयर िै तर्था यि
याधचकाकताजगण के वपता द्वारा िर्थ की गई
भूधम संख्या 236 क्षेर्त्रफि 4 बीघा 14
वबस्िा 13 वबस्िांसी तर्था गार्ा संख्या 302
क्षेर्त्रफि 5 बीघा 6 वबस्िां के स्र्थान पर
अधतररि घोवषत हकए जाने िेतु अपयाजप्त िै।
उि आदेि में यि भी किा गया िै हक
याधचकाकताजगण द्वारा यि प्रार्थजना पर्त्र उि
आदेि पाररत िोने के िगभग 8 िषज बाद
वबना वििमब क्षमा िेतु प्रार्थजना पर्त्र हदए िुए
प्रस्तुत हकया गया र्था, जबहक सीमारोपण
अधिधनयम में अधतररि घोवषत भूधम पर
तत्काि अध्यासन िेने का प्रावििान िै।
तदनुसार, याधचकाकताजगण का प्रार्थजना पर्त्र
धनरस्त करते िुए तिसीिदार बीघापुर को
अधतररि
घोवषत
भूधम
पर
तत्काि
अध्यासन प्राप्त करने का धनदेि हदया गया।

11. उपरोि आदेि के विरुद्ध
याधचकाकताजगण ने सीमारोपण अधिधनयम
की िारा 13 के अन्तगजत अपीि संख्या
5/1998-1999 प्रस्तुत की जो अपर आयुि
(न्याधयक), िखनऊ मंडि ने धनणजय तर्था
4 All. Master Shantul @ Shiv Prasad & Anr. Vs. State of U.P. & Ors.
1583
आदेि हदनांक 29.08.2000 से यि किते
िुए स्िीकार करी हक धनयत प्राधिकारी ने
मार्त्र तिसीि आख्या के आिार पर प्रश्नगत
आदेि पाररत हकया, जबहक उन्िें इसी प्रकरण
में पूिज पाररत आदेि एिं उससे संबंधित
पर्त्राििी का अध्ययन करना चाहिए र्था,
म्जससे यि ज्ञात िो सकता र्था हक धनयत
प्राधिकारी द्वारा मूि खातेदार की जोत में
कुि हकतनी भूधम सम्ममधित करते िुए
अधतररि घोवषत की गई र्थी और पूिज में
अधतररि घोवषत भूधम मौके पर एिं
अधभिेखों में अवििाहदत िै अर्थिा निीं तर्था
अपर आयुि ने पर्त्राििी इस धनदेि के सार्थ
प्रधतप्रेवषत की हक उि धनणजय में की गई
वििेचना के पररप्रेक्ष्य में प्रकरण का
धनस्तारण पुनः हकया जाए।

12. हदनांक 13.12.2001 को धनयत
प्राधिकारी ने पुनः धनणजय पाररत हकया,
म्जसमें यि अंहकत िै हक पक्षों को पुनः
साक्ष्य प्रस्तुत करने िेतु अिसर हदया गया
तर्था धनयत प्राधिकारी द्वारा पूिज में पाररत
आदेि हदनांक 30.11.1978 एिं 31.03.1986
तर्था पूणज पर्त्राििी का भी पररिीिन हकया
गया, म्जससे स्पष्ट िै हक रानी रघुिंि दुिारी
की कुि 99 बीघा 15 वबस्िा 13.5 वबस्िांसी
भूधम अधतररि घोवषत की गई र्थी और अब
उनके पास 0.184 िेक्र्ेयर के अधतररि कोई
भी अवििाहदत भूधम िेष निीं र्थी, म्जसे
याधचकाकताजगण के वपता द्वारा िय की गई
भूधम संख्या 236 क्षेर्त्रफि 4 बीघा 14 वबस्िा
13 वबस्िांसी तर्था गार्ा संख्या 302 क्षेर्त्रफि
5 बीघा 6 वबस्िा के बदिे अधतररि घोवषत
हकया जा सके तर्था इस संबंि में
याधचकाकताजगण की तरफ से कोई भी साक्ष्य
प्रस्तुत निीं हकया गया।

13. उि धनणजय में यि भी अंहकत
िै हक पर्त्राििी हदनांक 07.06.2001 से
धनस्तारण िेतु िम्मबत र्थी और प्रार्थीगण
तर्था
उनके
अधिििा
अनुपम्स्र्थत
र्थे।
29.11.2001 तक 11 धतधर्थयां व्यतीत िो जाने
के उपरांत उस हदन राज्य सरकार के
अधिििा के तकों को सुन धिया गया र्था
और पर्त्राििी हदनांक 06.12.2001 को आदेि
िेतु धनयत की गई र्थी, हकंतु तब भी
याधचकाकताजगण या उनके अधिििा उपम्स्र्थत
निीं िुए और कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत निीं
हकया गया। इन पररम्स्र्थधतयों में धनयत
प्राधिकारी ने पूिज पाररत आदेि हदनांक
17.06.1999 को िी पुष्ट करते िुए तिसीिदार
को
पुनः
अधतररि
घोवषत
भूधम
पर
धनयमानुसार कब्जे आिंर्न की कायजिािी िेतु
आदेधित हकया।

14.

उि
आदेि
के
विरुद्ध
याधचकाकताजगण
ने
अपीि
संख्या
11/2001-2002 प्रस्तुत की जो अपर
आयुि
(न्याधयक)
ने
आदेि
हदनांक
05.10.2002 द्वारा धनरस्त कर दी। उि
धनणजय तर्था आदेि हदनांक 05.10.2002
में अपीिीय न्यायािय ने अन्य तथ्यों के
1584 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
सार्थ यि भी अंहकत हकया िै हक
अपीिकताजगण के वपता द्वारा वििय-पर्त्र
िषज 1973 में धनष्पाहदत कराया गया, जो
सीमारोपण अधिधनयम में अंहकत संदभज
धतधर्थ 24.01.1971 के बाद का िै और ऐसा
िस्तांतरण जब तक नेक धनयती से तर्था
सद्भािनापूिजक
पयाजप्त
प्रधतफि
देकर
धनष्पाहदत हकया जाना धसद्ध न हकया जाए,
तब तक िेतागण को ऐसे वििय-पर्त्र के
आिार पर कोई अनुतोष निीं हदया जा
सकता िै।

15. उपरोि धनणजयों की िैिता को
चुनौती देते िुए याधचकाकताजगण के विद्वान
अधिििा ने तकज हदया हक धनयत प्राधिकारी
द्वारा पाररत आदेि हदनांक 17.06.1999 अपीिीय
न्यायािय के आदेि हदनांक 29.08.2000 द्वारा
अपास्त हकया जा चुका र्था तर्था ऐसी
पररम्स्र्थधत में धनयत प्राधिकारी ने आिोच्य
आदेि हदनांक 13.12.2001 द्वारा आदेि हदनांक
17.06.1999 को पुष्ट करने में िैिाधनक र्त्रुहर्
काररत की िै तर्था धनयत प्राधिकारी ने अपीिीय
आदेि हदनांक 29.08.2000 में हदए गए धनदेिों
का अनुपािन निीं हकया िै।

16.

अपीिीय
आदेि
हदनांक
29.08.2000 द्वारा धनयत प्राधिकारी को यि
धनदेि हदया गया र्था हक धनयत प्राधिकारी
प्रकरण के पूिज पाररत धनणजय तर्था उससे
संबंधित पर्त्राििी का अध्ययन करके में यि देखें
हक मूि खातेदार की जोत में कुि हकतनी भूधम
सम्ममधित करते िुए अधतररि घोवषत की गई
र्थी।

17. धनयत प्राधिकारी ने उि आदेि
का अनुपािन करते िुए पूिज पाररत आदेि
हदनांक 30.11.1978 एिं 31.03.1986 तर्था
पूणज पर्त्राििी का पररिीिन हकया और यि
पाया हक पूिज खातेदार रानी रघुिंि दुिारी की
कुि 99 बीिा 15 वबस्िा 13.5 वबस्िांसी
भूधम अधतररि घोवषत की गई र्थी और अब
उनके पास 0.184 िेक्र्ेयर के अधतररि कोई
अवििाहदत भूधम उपिब्ि निीं िै, म्जसे हक
याधचकाकताजगण के वपता द्वारा िय की गई
भूधम संख्या 236 क्षेर्त्रफि 4 बीघा 14 वबस्िा
13 वबस्िांसी तर्था गार्ा संख्या 302 क्षेर्त्रफि
5 बीघा 6 वबस्िा के बदिे पूिज खातेदार की
अन्य भूधम अधतररि घोवषत की जा सके
और इस संबंि में याधचकाकताजगण की तरफ
से भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत निीं हकया
गया।

18. उि से यि स्पष्ट िै हक धनयत
प्राधिकारी अपीिीय आदेि के धनदेि का
अनुपािन हकया िै। धनयत प्राधिकारी द्वारा
मार्त्र यि धिख देना हक पूिज पाररत आदेि
हदनांक 17.06.1999 विधि सममत ढंग से
पाररत हकया िै, उधचत निीं प्रतीत िोता िै,
हकन्तु यि मार्त्र एक भाषा की र्त्रुहर् प्रतीत
िोती िै, क्योंहक धनयत प्राधिकारी ने अपीिीय
न्यायािय के धनदेि के अनुपािन में प्रकरण
के समस्त तथ्यों की वििेचना करने के
4 All. Gauri Shankar Prajapati Vs. Ravikul Bansal
1585
उपरांत यि पाया हक याधचकाकताजगण की
भूधम के बदिे पूिज खातेदार की कोई भूधम
को अधतररि घोवषत हकया जाना संभि निीं
िै, हकंतु उपरोि आदेि का पररणाम ििी िुआ
जो हक पूिज आदेि हदनांक 17.06.1999 का
र्था। उपरोि पररम्स्र्थधतयों में, यद्यवप धनयत
प्राधिकारी ने यि किने में भाषा की र्त्रुहर् की
िै हक पूिज आदेि हदनांक 17.06.1999 पुष्ट
हकया जाता िै, तर्थावप आदेि गित अर्थिा
अिैिाधनक निीं िै। अतः मार्त्र भाषा की र्त्रुहर्
के कारण आदेि में कोई िस्तक्षेप करना
उधचत निीं िोगा।

19.

अपीिीय
आदेि
हदनांक
05.10.2002 में अपर आयुि ने यि पाया िै
हक अपीिकताजगण के वपता के पक्ष में
वििय-पर्त्र िषज 1973 में िुआ र्था, जो हक
सीमारोपण अधिधनयम के संदभज धतधर्थ
24.01.1971 के बाद का िै। सीमारोपण
अधिधनयम की िारा 5(6) के अनुसार हदनांक
24.01.1971 के उपरांत हकया गया अधतररि
भूधम का कोई भी अन्तरण तब तक िैि निीं
िोगा, जब तक धनयत प्राधिकारी को यि
संतोष न िो जाए हक अन्तरण सदािय से
उधचत प्रधतफि देकर हकया गया िो तर्था यि
अन्तरण एक बेनामी अन्तरण न िो एिं
उपरोि ितों को धसद्ध करने का भार ऐसे
व्यवि पर िै जो इस अन्तरण से िाभ का
दािा कर रिा िो। याधचकाकताज ने उपरोि
ितों को धसद्ध करने के धिए कोई भी साक्ष्य
प्रस्तुत निीं हकया तर्था ऐसी पररम्स्र्थधत में
संदभज धतधर्थ हदनांक 24.01.1971 के पश्चात
िुए वििय-पर्त्र के आिार पर कोई भी िाभ
का दािा निीं कर सकते िैं।

20. भारतीय संवििान के अनुच्िेद 226 के
अन्तगजत यि न्यायािय अपनी िवियों का
प्रयोग न्यायहित में तब करती िै, जब ऐसा न
करने से न्याय के उद्देश्यों की पूधतज न िो
पाए तर्था मार्त्र तकनीकी आिारों पर
न्यायािय अनुच्िेद 226 के अन्तगजत अपनी
वििेकािीन िवियों का प्रयोग निीं करती िै।

21. जब हक उपरोि वििेचना से यि
स्पष्ट िै हक आिोच्य आदेिों में कोई ऐसी
र्त्रुहर् निीं िै, म्जससे याधचकाकताजगण के सार्थ
अन्याय िुआ िो, मार्त्र भाषा की र्त्रुहर् अनुच्िेद
226 की िवियों को प्रयोग करने का उधचत
आिार निीं प्रदान करती िैं।

22. तदनुसार, ररर् याधचका बििीन
िै और धनरस्त की जाती िै।
----------
(2024) 4 ILRA 1585
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 21.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE ASHUTOSH SRIVASTAVA, J.

Writ-A No. 1597 of 2024
Along With
Writ-A No. 1674 of 2024 and 1747 of 2024

Gauri Shankar Prajapati ...Petitioner
Versus
Ravikul Bansal ...Respondent