# Mohd. Israr Khan v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2025) 7 ILRA 890
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-07-14
- **Case number:** Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/S 438 CR.P.C. No. 9797 of 2024
- **Bench:** Dr. Gautam Chowdhary
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/mohd-israr-khan-v-state-of-u-p-anr-53670
- **Pages:** 4

## Headnote

G.A., Ram Kumar Dubey

पवचारणीय मुद्दा
क्या आिेिक को िारा 379, 419, 420, 406 िा.ििं.सिं.
के अिंतगगत ििग आपराधिक प्रकरण में, िब उसके
विरुद्ि कोई ठोस साक्ष्य, बलपूिगक प्रकिया नहीिं अपनाई
गई है अथिा आपराधिक इततहास नहीिं है और उसने िााँच
में सहयोग करने का आश्िासन दिया है, तो उसे अधग्रम
िमानत का लाि दिया िा सकता है या नहीिं |

हेडनोट्स
दण्ड सिंहहता, 1860 - धारा 379, 419, 420, 406 -
असभयोग में आरोि है कक आवेदक ने धोखाधडी एविं
पवश्वासघात करते हुए धनरासश का अनुगचत उियोग
ककया - आवेदक की ओर से यह तका हदया गया कक वह
ननदोष है, उसके पवरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीिं है और
बलिूवाक प्रकिया नहीिं अिनाई गई है और इस मामले में
अिंतररम आदेश प्राप्त है तथा उसका कोई आिरागधक
इनतहास नहीिं है - यह भी प्रनतिाहदत ककया गया कक वह
7 All. Mohd. Israr Khan Vs. State of U.P. & Anr.
891
जािंच
में
सहयोग
करने
को
तैयार
है,
जािंच
एजेंसी/िुसलस/न्यायालय द्वारा अिेक्षक्षत होने िर
उिस्स्थत रहेगा और गगरफ्तारी की स्स्थनत में उसे
अिूरणीय क्षनत होगी - राज्य की ओर से अगिम जमानत
आवेदन का पवरोध ककया गया, यह कहते हुए कक आरोि
गिंभीर प्रकृनत के हैं और अगिम जमानत प्रदान ककए जाने
का कोई औगचत्य नहीिं है |

धाररत ककया गया
ितगमान आिेिन में ककए गए कथनों पर विचारोपरािंत,
न्यायालय का मत है कक अधग्रम िमानत प्रिान करने
हेतु कोई उपयुक्त या पयागप्त आिार प्रस्तुत नहीिं ककया
गया है - अतः आिेिक का अधग्रम िमानत आिेिन
अस्िीकृत ककया िाता है - यदि कोई अिंतररम आिेश
विद्यमान हो, तो उसे तनरस्त माना िाएगा - तथावप,
आिेिक को सिंबिंधित विचारण न्यायालय के समक्ष
तनयभमत िमानत आिेिन प्रस्तुत करने की स्ितिंत्रता
होगी, जिसे न्यायालय सतेंद्र कुमार अिंततल बनाम केंद्रीय
अन्िेर्षण ब्यूरो और अन्य में प्रततपादित दिशा-तनिेशों के
आलोक में, विधि अनुसार विचार करेगा। [पैरा 6 से 9]
(E-13)

उद्धृत केस लॉ
भसद्िराम सतभलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्र राज्य,
(2011) 1 एससीसी 694; सतेंद्र कुमार अिंततल बनाम
केंद्रीय अन्िेर्षण ब्यूरो और अन्य (विशेर्ष अनुमतत अपील
(आपराधिक) सिंख्या 5191/2021, 07.10.2021 को
ननणीत) - सिंदसभात |

अगधननयमों की सूची
िण्ड सिंदहता, 1860

कीवडा की सूची

अधग्रम िमानत; िारा 438 ििंड प्रकिया सिंदहता; चोरी के
भलए िण्ड; आपराधिक न्यासििंग के भलए िण्ड;
प्रततरूपण द्िारा छल के भलए िण्ड; धगरफ्तारी की
आशिंका; अिंतररम आिेश; वििेचना में सहयोग;
विश्िसनीय साक्ष्य का अिाि; िािंच में सहयोग का
आश्िासन; आपराधिक कायगिाही; आपराधिक इततहास
नहीिं हैं; कोई बलपूिगक प्रकिया नहीिं अपनाई गई हैं |

वाद उद्भूत
आरिंभिक क्षेत्राधिकार से उत्पन्न मामला: ििं.प्र.सिं की
िारा 438 के अिंतगगत आपराधिक विविि अधग्रम िमानत
आिेिन सिंख्या - 9797 / 2024)
मु.अ.सिं 113 सन् 2024, थाना फतेहपुर, जिला
सहारनपुर में हुए तनणगय और आिेश से उद्िूत

िक्षकारों की ओर से उिस्स्थनत
आिेिक की ओर से अधििक्ता:
अिंककत श्रीिास्ति, चौिरी दिल तनसार

विरोिी पक्षकार की ओर से अधििक्ता:
शासकीय अधििक्ता, राम कुमार िूबे

## Text

890 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
एििं पररजस्थततयों को ध्यान में रखते हुए, मामले
के गुण-िोर्ष पर बबना कोई विचार व्यक्त ककए
अधग्रम िमानत की प्राथगना स्िीकार ककए िाने
योग्य है। तद्नुसार अधग्रम िमानत आिेिन पत्र
स्िीकार ककया िाता है।

7. उपरोक्त मुकिमा अपराि सिंख्या में
सजम्मभलत आिेिक की धगरफ्तारी की िशा में,
उसे सिंबिंधित थाने के िारसािक अधिकारी की
सिंतुजष्र् पर रू० 50,000/- का व्यजक्तगत बिंि पत्र
एििं उसी िनराभश के िो प्रततिू प्रस्तुत करने
पर, (पुभलस आरोप पत्र िाखखल ककए िाने तक)
तनम्न शतों के अिीन अधग्रम िमानत पर ररहा
ककया िाएगा :-

1- आिेिक, यदि आिश्यक होगा तो
पुभलस अधिकारी द्िारा िॉच हेतु अपेक्षक्षत समय
पर उपजस्थत रहेगा।

2- आिेिक मामले के तथ्यों से
पररधचत ककसी व्यजक्त या पुभलस अधिकाररयों
को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई िमकी, िािा
या प्रलोिन नहीिं िेगा जिससे कक िह ऐसे तथ्य
को न्यायालय के समक्ष या ककसी पुभलस
अधिकारी के समक्ष प्रकर् न करने पर मान
िाए।

3- आिेिक वििेचना एििं विचारण के
िौरान सहयोग करेंगे और िमानत की स्ितिंत्रता
का िुरूपयोग नहीिं करेगा।

उपरोक्त शतों के उल्लिंघन की जस्थतत में
वििेचनाधिकारी / अभियोिन पक्ष को, आिेिक
को प्रित्त अधग्रम िमानत के तनरस्तीकरण हेतु
उपयुक्त आिेिन प्रस्तुत करने की स्ितिंत्रता
होगा।

8. तद्नुसार यह अधग्रम िमानत आिेिन
पत्र उपरोक्त दर्प्पखणयों के साथ अिंततम रूप से
तनस्ताररत ककया िाता है।
----------
(2025) 7 ILRA 890
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.07.2025

BEFORE

THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/S
438 CR.P.C. No. 9797 of 2024

Mohd. Israr Khan ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Ankit Srivastava, Ch. Dil Nisar

Counsel for the Opposite Party:
G.A., Ram Kumar Dubey

पवचारणीय मुद्दा
क्या आिेिक को िारा 379, 419, 420, 406 िा.ििं.सिं.
के अिंतगगत ििग आपराधिक प्रकरण में, िब उसके
विरुद्ि कोई ठोस साक्ष्य, बलपूिगक प्रकिया नहीिं अपनाई
गई है अथिा आपराधिक इततहास नहीिं है और उसने िााँच
में सहयोग करने का आश्िासन दिया है, तो उसे अधग्रम
िमानत का लाि दिया िा सकता है या नहीिं |

हेडनोट्स
दण्ड सिंहहता, 1860 - धारा 379, 419, 420, 406 -
असभयोग में आरोि है कक आवेदक ने धोखाधडी एविं
पवश्वासघात करते हुए धनरासश का अनुगचत उियोग
ककया - आवेदक की ओर से यह तका हदया गया कक वह
ननदोष है, उसके पवरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीिं है और
बलिूवाक प्रकिया नहीिं अिनाई गई है और इस मामले में
अिंतररम आदेश प्राप्त है तथा उसका कोई आिरागधक
इनतहास नहीिं है - यह भी प्रनतिाहदत ककया गया कक वह
7 All. Mohd. Israr Khan Vs. State of U.P. & Anr.
891
जािंच
में
सहयोग
करने
को
तैयार
है,
जािंच
एजेंसी/िुसलस/न्यायालय द्वारा अिेक्षक्षत होने िर
उिस्स्थत रहेगा और गगरफ्तारी की स्स्थनत में उसे
अिूरणीय क्षनत होगी - राज्य की ओर से अगिम जमानत
आवेदन का पवरोध ककया गया, यह कहते हुए कक आरोि
गिंभीर प्रकृनत के हैं और अगिम जमानत प्रदान ककए जाने
का कोई औगचत्य नहीिं है |

धाररत ककया गया
ितगमान आिेिन में ककए गए कथनों पर विचारोपरािंत,
न्यायालय का मत है कक अधग्रम िमानत प्रिान करने
हेतु कोई उपयुक्त या पयागप्त आिार प्रस्तुत नहीिं ककया
गया है - अतः आिेिक का अधग्रम िमानत आिेिन
अस्िीकृत ककया िाता है - यदि कोई अिंतररम आिेश
विद्यमान हो, तो उसे तनरस्त माना िाएगा - तथावप,
आिेिक को सिंबिंधित विचारण न्यायालय के समक्ष
तनयभमत िमानत आिेिन प्रस्तुत करने की स्ितिंत्रता
होगी, जिसे न्यायालय सतेंद्र कुमार अिंततल बनाम केंद्रीय
अन्िेर्षण ब्यूरो और अन्य में प्रततपादित दिशा-तनिेशों के
आलोक में, विधि अनुसार विचार करेगा। [पैरा 6 से 9]
(E-13)

उद्धृत केस लॉ
भसद्िराम सतभलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्र राज्य,
(2011) 1 एससीसी 694; सतेंद्र कुमार अिंततल बनाम
केंद्रीय अन्िेर्षण ब्यूरो और अन्य (विशेर्ष अनुमतत अपील
(आपराधिक) सिंख्या 5191/2021, 07.10.2021 को
ननणीत) - सिंदसभात |

अगधननयमों की सूची
िण्ड सिंदहता, 1860

कीवडा की सूची

अधग्रम िमानत; िारा 438 ििंड प्रकिया सिंदहता; चोरी के
भलए िण्ड; आपराधिक न्यासििंग के भलए िण्ड;
प्रततरूपण द्िारा छल के भलए िण्ड; धगरफ्तारी की
आशिंका; अिंतररम आिेश; वििेचना में सहयोग;
विश्िसनीय साक्ष्य का अिाि; िािंच में सहयोग का
आश्िासन; आपराधिक कायगिाही; आपराधिक इततहास
नहीिं हैं; कोई बलपूिगक प्रकिया नहीिं अपनाई गई हैं |

वाद उद्भूत
आरिंभिक क्षेत्राधिकार से उत्पन्न मामला: ििं.प्र.सिं की
िारा 438 के अिंतगगत आपराधिक विविि अधग्रम िमानत
आिेिन सिंख्या - 9797 / 2024)
मु.अ.सिं 113 सन् 2024, थाना फतेहपुर, जिला
सहारनपुर में हुए तनणगय और आिेश से उद्िूत

िक्षकारों की ओर से उिस्स्थनत
आिेिक की ओर से अधििक्ता:
अिंककत श्रीिास्ति, चौिरी दिल तनसार

विरोिी पक्षकार की ओर से अधििक्ता:
शासकीय अधििक्ता, राम कुमार िूबे
(Delivered by Hon'ble Dr. Gautam
Chowdhary, J.)

1. आिेिक के विद्िान अधििक्ता एििं
राज्य की ओर से उपजस्थत विद्िान अपर
शासकीय अधििक्ता को सुना तथा पत्रािली का
पररशीलन ककया।

2. ितगमान अधग्रम िमानत आिेिन
पत्र, मु०अ०सिं० 113/2024 अिंतगगत िारा 379, 419,
420, 406, थाना फतेहपुर, जिला सहारनपुर में
अधग्रम िमानत की मािंग करते हुए इस प्राथगना
के साथ प्रस्तुत ककया गया है कक धगरफ्तारी की
जस्थतत में आिेिक को िमानत पर ररहा ककया
िाए।

3. आिेिक के विद्िान अधििक्ता
द्िारा तकग दिया गया है कक आिेिक तनिोर्ष है
तथा उसे आशिंका है कक उसे उपयुगक्त मामले में
धगरफ्तार ककया िा सकता है, िबकक उसके
विरुद्ि कोई विश्िसनीय साक्ष्य नहीिं है। आगे
892 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
यह िी प्रस्तुत ककया गया है कक आिेिक को
इस मामल में अिंतररम आिेश प्राप्त है। का कोई
आपराधिक इततहास नहीिं है तथा आिेिक के
विरुद्ि अब तक कोई बलपूिगक प्रकिया िारी
नहीिं की गई है। यह िी प्रस्तुत ककया गया कक
आिेिक िािंच तथा परीक्षण के िौरान सहयोग
करने का िचन िेता है तथा िह िािंच
एिेंसी/पुभलस/न्यायालय द्िारा अपेक्षक्षत होने पर
उपजस्थत होगा। यह कहा गया है कक यदि
आिेिक को अधग्रम िमानत िी िाती है, तो िह
िमानत की स्ितिंत्रता का िुरुपयोग नहीिं करेगा
और िािंच में सहयोग करेगा और िमानत की
सिी शतों का पालन करेगा।

4. विद्िान अपर शासकीय अधििक्ता
द्िारा आिेिक के अधग्रम िमानत का विरोि
ककया ककया तथा आगे यह तकग प्रस्तुत ककया
गया कक आिेिक का
अधग्रम िमानत प्राथगना पत्र तनरस्त ककये िाने
योग्य है।

5. यह प्रासिंधगक तथ्य यह िी है कक
Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of
Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में
माननीय
उच्चतम
न्यायालय
द्िारा
यह
अििाररत ककया गया है कक अधग्रम िमानत
याधचका
पर
न्याय-तनणगयन
करते
समय
न्यायालय को आरोपों की प्रकृतत और गिंिीरता,
आरोपी की न्यातयक प्रकिया से िागने की
सिंिािना पर विचार करना चादहए और यह कक
न्यायालय को आरोपी के विरूद्ि उपलब्ि सिी
सामग्री का साििानी से मूल्यािंकन करना चादहए
और आरोपी की िास्तविक िूभमका पर िी
विचार करना चादहए।

6.
उिय
पक्षों
के
विद्िान
अधििक्तागण को सुनने और ितगमान आिेिन
में ककए गए कथनों पर विचार करने के उपरािंत,
यह न्यायालय इस राय पर है कक आिेिक के
विद्िान अधििक्ता द्िारा अधग्रम िमानत िेने
के भलए कोई उपयुक्त एििं पयागप्त आिार नहीिं
प्रस्तुत ककया गया है।

7. तिनुसार, आिेिक Mohd Israr Khan
का यह अधग्रम िमानत आिेिन पत्र अस्िीकार
ककया िाता है।

8. इस िाि में यदि कोई अिंतररम
आिेश हो तो, उसे तनरस्त समझा िाय।

9. हालािंकक, आिेिक के भलए सिंबिंधित
विचारण न्यायालय के समक्ष तनयभमत िमानत
आिेिन पत्र प्रस्तुत करने के भलए स्ितिंत्रता है,
यदि िमानत के भलए ऐसा कोई आिेिन
सिंबिंधित विचारण न्यायालय के समक्ष पेश
ककया िाता है, तो यह उम्मीि की िाती है कक
सिंबिंधित न्यायालय, न्यायालय के वििेक और
िमानत िेने में विचार को तनयिंबत्रत करने िाले
िैिातनक प्राििानों को बाधित ककये बबना, मा०
उच्चतम न्यायालय के द्िारा Satendra Kumar
Antil Vs. Central Bureau of Investigation and
another (Special Leave to Appeal (Crl.) No.
5191 of 2021, decided on 07.10.2021) में
प्रततपादित या तनिागररत िमानत िेने के भलए
आिश्यक दिशा-तनिेशों को ध्यान में रखते हुए
उस पर विचार करेगी और फैसला करेगी।

10. उपयुगक्त दर्प्पखणयों/तनिेशों के साथ,
यह ितगमान आिेिन पत्र का तनस्ताररत ककया
िाता
है।
7 All. Faisal Siddiqui @ Mohd. Faisal Vs. State of U.P. & Ors.
893
11. कायागलय को तनिेभशत ककया िाता
है कक इस आिेश की प्रतत सिंबिंधित/ विचारण
न्यायालय को अविलिंब प्रेवर्षत करना सुतनजश्चत
करें।
----------
(2025) 7 ILRA 893
REVISIONAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 10.07.2025

BEFORE

THE HON'BLE RAJNISH KUMAR, J.

Criminal Revision Defective No. 250 of 2025

Faisal Siddiqui @ Mohd. Faisal
 ...Revisionist
Versus
State of U.P. & Ors. ...Opposite Parties

Counsel for the Revisionist:
Yogesh Kumar Mishra, Dharmendra Kumar
Yadav

Counsel for the Opposite Parties:
G.A., Ramakar Shukla

Issue for Consideration
Whether a revision filed with concealment of
material facts and suppression of earlier failed
mediation proceedings can be entertained, and
whether
obtaining
interim
relief
by
misrepresentation amounts to fraud on the
Court, vitiating the proceedings and inviting
exemplary costs.

Headnotes

Criminal Procedure Code, 1973 - ss.
397/401, 125, 126(2) - Concealment of
material facts - Fraud on Court -
Suppression of earlier failed mediation -
Interim relief obtained by deceit - Delay
in filing revision - Condonation refused -
Exemplary
costs
imposed
-
Ethical
obligation of advocate towards Court.

Held:
The revisionist- suppressed the material fact-
earlier, in proceedings under Section 482 Cr.P.C.-
relating to the same matrimonial dispute-matter
had been referred to mediation, which had
failed-concealing
this
fact
and
falsely
representing a "possibility of settlement'- interim
protection was obtained fraudulently. [Paras 25]

Suppression of material facts and misleading the
Court amount to fraud- vitiates all judicial actsfraus omnia corrumpit applies - fraud unravels
everything- judgment or order obtained by
playing fraud on the Court is non est in law
and a nullity- every Court, whether superior or
subordinate bound to treat such order as void
[Paras 5-7]

Every litigant approaching the Court-duty of full
and
fair
disclosure
of
material
factsAdvocates, being officers of the Court-equally
obliged to assist the Court fairly and truthfullylegal profession demands the highest standards
of probity, candour and integrity. [Para 8]

Application for condonation of delay dismissed
- Revision dismissed - Cost of ₹1,00,000
imposed; ₹90,000 to be paid to respondent no.
2 and ₹10,000 to be deposited in the Court. (E14)

Case Law Cited
Jeet Narain v. Govind Prasad, 2010 (110) RD
374 - relied on; Neeru Yadav v. State of
U.P., (2016) 15 SCC 422 - followed; S.P.
Chengalvaraya Naidu (Dead) by LRs v.
Jaganath (Dead) by LRs, (1994) 1 SCC 1 -
followed; Saumya Chaurasia v. Directorate
of Enforcement, (2024) 6 SCC 401 - relied
on; Kusha Duruka v. State of Odisha,
(2024) 4 SCC 432 - applied.

List of Acts / Statutes
Code of Criminal Procedure, 1973; Dowry
Prohibition Act, 1961; Indian Penal Code, 1860

List of Keywords
Fraud on Court; Suppression of material facts;
Concealment; Interim protection obtained by
deceit; Professional ethics; Duty of disclosure;
Advocates as officers of the Court; Matrimonial
proceedings; Misrepresentation; Nullity of order.