# Murari Kumar @ Murari Kumar Yadav v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2024) 3 ILRA 878
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-02-27
- **Case number:** Application U/S 482. No. 1712 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/murari-kumar-murari-kumar-yadav-v-state-of-u-p-anr-51689
- **Pages:** 4

## Headnote

G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 419,
420, 120ख - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 204 - र्ैर
िमािती वारंट िे कवरुद्ध - वैिता - प्रस्ट्तुत प्रिरण कवपक्षी सं. 2 िी
प्राथकमिी पर संकस्ट्थत हुआ, किसमें संज्ञेय अपराि िा आरोप था -
कववेचिा उपरांत अपराि कसद्ध पाए िािे पर कववेचि िे आरोप पत्र प्रस्ट्तुत
किया - कवचारण न्यायालय िे आरोप पत्र एवं संिकलत सामग्री िा
अवलोिि िर अपराि िा संज्ञाि लेिे हेतु पयागप्त आिार पािर संज्ञाि
कलया - माििीय उच्चतम न्यायालय िे स्ट्टेट ऑफ र्ुिरात बिाम अफरोि
मोहम्मद हसिफत्ता (िीचे) में प्रकतपाकदत किया कि समि िारी िरते समय
मकिस्ट्रेट िो िेवल कशिायत एवं सहायि साक्ष्यों िे आिार पर यह
संतोष िरिा होता है कि अकर्युक्त िे कवरुद्ध िायगवाही हेतु आिार है,
आदेश में िारण अंकित िरिा आवश्यि िहीं है - इसिे अलावा िहााँ
पुकलस कववेचिा िे उपरांत आरोप पत्र प्रस्ट्तुत िरती है, वहााँ न्यायालय िो
आरोप पत्र, र्वाहों िे बयाि एवं संिकलत साक्ष्यों िा पररशीलि िरिे िा
अवसर प्राप्त होता है। अतः पुकलस ररपोटग पर आिाररत मामलों में
आदेकशिा िारी िरते समय न्यायालय िो िारण दशागिे िी आवश्यिता
िहीं होती - अकर्कििागररत, इस पररप्रेक्ष्य में, आलोच्य आदेश कदिांि
07.09.2016 कवकिसम्मत है तथा अकर्युक्त िी अिुपकस्ट्थकत में र्ैर-
िमािती वारंट िारी िरिे में र्ी िोई अवैिाकििता िहीं है - अतः प्राथगिा
पत्र बलहीि है। (पैरा 3, 5, 8, 9)

आवेदि किस्ट्ताररत I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

## Text

878 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
is absolutely no requirement of obtaining a
prior
sanction
for
prosecuting
the
applicants for such offences and Section
197 Cr.P.C. would not apply in such a
situation.

18. In view of the aforesaid
discussion, there appears to be no illegality
in the order dated 10.05.2022 taking
cognizance
of
the
offence
and
the
summoning the accused to face the trial and
in the judgment and order dated 25.01.2024
passed by the Sessions Judge, Balrampur in
Criminal revision
No.
67
of
2022,
affirming
the
aforesaid
order
dated
10.05.2022.

19. The revision lacks merit and the
same is accordingly dismissed.
----------
(2024) 3 ILRA 878
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 27.02.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 1712 of 2024

Murari Kumar @ Murari Kumar Yadav
 ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Respondents

Counsel for the Applicant:
Dr. Pooja Singh, Digvijay Singh

Counsel for the Respondents:
G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 419,
420, 120ख - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 204 - र्ैर
िमािती वारंट िे कवरुद्ध - वैिता - प्रस्ट्तुत प्रिरण कवपक्षी सं. 2 िी
प्राथकमिी पर संकस्ट्थत हुआ, किसमें संज्ञेय अपराि िा आरोप था -
कववेचिा उपरांत अपराि कसद्ध पाए िािे पर कववेचि िे आरोप पत्र प्रस्ट्तुत
किया - कवचारण न्यायालय िे आरोप पत्र एवं संिकलत सामग्री िा
अवलोिि िर अपराि िा संज्ञाि लेिे हेतु पयागप्त आिार पािर संज्ञाि
कलया - माििीय उच्चतम न्यायालय िे स्ट्टेट ऑफ र्ुिरात बिाम अफरोि
मोहम्मद हसिफत्ता (िीचे) में प्रकतपाकदत किया कि समि िारी िरते समय
मकिस्ट्रेट िो िेवल कशिायत एवं सहायि साक्ष्यों िे आिार पर यह
संतोष िरिा होता है कि अकर्युक्त िे कवरुद्ध िायगवाही हेतु आिार है,
आदेश में िारण अंकित िरिा आवश्यि िहीं है - इसिे अलावा िहााँ
पुकलस कववेचिा िे उपरांत आरोप पत्र प्रस्ट्तुत िरती है, वहााँ न्यायालय िो
आरोप पत्र, र्वाहों िे बयाि एवं संिकलत साक्ष्यों िा पररशीलि िरिे िा
अवसर प्राप्त होता है। अतः पुकलस ररपोटग पर आिाररत मामलों में
आदेकशिा िारी िरते समय न्यायालय िो िारण दशागिे िी आवश्यिता
िहीं होती - अकर्कििागररत, इस पररप्रेक्ष्य में, आलोच्य आदेश कदिांि
07.09.2016 कवकिसम्मत है तथा अकर्युक्त िी अिुपकस्ट्थकत में र्ैर-
िमािती वारंट िारी िरिे में र्ी िोई अवैिाकििता िहीं है - अतः प्राथगिा
पत्र बलहीि है। (पैरा 3, 5, 8, 9)

आवेदि किस्ट्ताररत I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. स्टेट ऑफ गुजराि राज्य बनाम अफरोज मोहम्मि हसनफिा 2019 20
एससीसी. 539

2. सिेन्र कुमार अांविल बनाम सी.बी.आई. (2021) 10 एस.सी.सी.
773

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता डा.
पूजा ससिंह तर्था राज्य सरकार के विद्िान
अधििक्ता श्री पुनीत कुमार यादि को सुना
तर्था पत्रािली का अिलोकन ककया।

2. िारा 482 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अन्तगगत प्रस्तुत इस प्रार्थगना पत्र द्िारा
प्रार्थी ने प्रर्थम सूचना ररपोटग सिंख्या 559
सन 2015 अन्तगगत िारा 420 िा०दिं०सिं०
एििं आरोप पत्र के अन्तगगत िारा 419,
120B िा०दिं० सिं०, र्थाना मडडयाि जनपद
लखनऊ के अनुिम में प्रस्तुत आरोप पत्र
3 All. Murari Kumar @ Murari Kumar Yadav Vs. State of U.P. & Anr.
879
हदनािंककत 30.05.2016 तर्था विद्िान रायल
कोटग, लखनऊ द्िारा पाररत आदेश हदनािंक
07.09.2016 जजसके द्िारा उपरोक्त अपराि
का सिंज्ञान सलया तर्था प्रार्थी को विचारण
हेतु तलि ककया गया एििं गैर जमानती
िारिंट हदनािंककत 26.10.2018, की िैिता को
इस आिार पर चुनौती दी है कक आदेश के
पररशीलन से न्यायालय द्िारा प्रकरण के
तथ्यों की समीक्षा ककया जाना प्रतीत नहीिं
होता है।

3. प्रस्तुत प्रकरण विपक्षी सिं. 2 द्िारा
सलखाई गई प्रर्थम सूचना ररपोटग के आिार
पर सिंजस्र्थत हुआ, जजसमें उसने सिंज्ञेय
अपराि होने का आरोप लगाया। वििेचना
में अपरािों का होना पाया गया तर्था
तदनुसार वििेचक ने आरोप पत्र प्रस्तुत
ककया। विद्िान विचारण न्यायालय ने
आरोप पत्र पर अिंककत ककया है कक आरोप
पत्र का अिलोकन ककया गया जजससे यह
प्रतीत होता है कक वििेचक द्िारा सिंकसलत
सामग्री का अिलोकन करने के िाद
न्यायालय ने यह सिंतोष व्यजक्त ककया है
कक अपराि का सिंज्ञान सलये जाने का
पयागप्त आिार हैं।

4. िारा 190 आपराधिक प्रकिया
सिंहहता के प्रावििान तनम्नित है:-

(1) इस अध्याय के उपिन्िों के
अिीन रहते हुए, कोई प्रर्थम िगग मजजस्रेट
और उपिारा (2) के अिीन विशेषतया
सशक्त ककया गया कोई द्वितीय िगग
मजजस्रेट, ककसी िी अपराि का सिंज्ञान
तनम्नसलखखत दशाओिं में कर सकता है:-

(क) उन तथ्यों का, जजनसे ऐसा
अपराि िनता है, पररिाद प्राप्त होने पर,

(ख) ऐसे तथ्यों के िारे में पुसलस
ररपोटग पर;

(ग) पुसलस अधिकारी से सिन्न
ककसी व्यजक्त से प्राप्त इस इविला पर या
स्ियिं अपनी इस जानकारी पर कक ऐसा
अपराि ककया गया है।

(2) मुख्य न्यातयक मजजस्रेट
ककसी द्वितीय िगग मजजस्रेट को ऐसे
अपरािों का, जजनकी जािंच या विचारण
करना उसकी क्षमता के अन्दर है, उपिारा
(1) के अिीन सिंज्ञान करने के सलए सशक्त
कर सकता है।

5. स्टेट ऑफ गुिरात राज्य बनाम
अफरोि मोहम्मद ह नफत्ता 2019 20 SCC
539 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह
अििाररत ककया कक यह विधि का एक
सुस्र्थावपत ससद्िािंत है कक असियुक्त को
विचारण के सलए आहूत करते समय
न्यायालय को मात्र सशकायत में कहे गए
तथ्यों और उसके समर्थगन में हदए गए
साक्ष्यों पर विचार करके यह सिंतोष करना
होता है कक असियुक्त के विरुद्ि कायगिाही
चलाने के सलए समुधचत आिार हैं। समन
जारी करते समय मजजस्रेट को इस सिंतोष
के आिारों को स्पष्ट रूप से िखणगत करना
अतनिायग नहीिं है।
880 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

6. माननीय उच्चतम न्यायालय ने
उपरोक्त तनणगय में यह िी अििाररत ककया
कक असियुक्त को विचारण हेतु आहूत करते
समय न्यायालय को मामले के गुण-दोष पर
विचार करना आिश्यक नहीिं है तर्था यह
तनजश्चत करना िी आिश्यक नहीिं है कक
सिंकसलत सामग्री असियुक्त को दोषी ससद्ि
करने के सलए पयागप्त है अर्थिा नहीिं।

7. िारा 204 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अन्तगगत आदेसशका जारी करते समय
न्यायालय को मात्र इतनी राय िनानी होती
है कक 'कायगिाही करने के सलए पयागप्त
आिार हैं। यह सिंतोष िारतीय दण्ड सिंहहता
की िारा 240 के अन्तगगत आरोप विरधचत
करते समय ऐसी उपिारणा करने का
आिार कक असियुक्त ने कोई ऐसा अपराि
ककया है, जजसका विचारण करने के सलए
मजजस्रेट सक्षम है और जो उसके द्िारा
पयागप्त रूप से दजण्डत ककया जा सकता है,
के स्तर का सिंतोष नहीिं है। अवपतु उससे
काफी तनम्न स्तर का ही सिंतोष होगा।

8. माननीय उच्चतम न्यायालय ने
अग्रेतर यह िी अििाररत ककया कक जहााँ
पर पुसलस ने वििेचना के उपरािंत एक
आरोप पत्र प्रस्तुत कर हदया है, न्यायालय
को पुसलस द्िारा आरोप पत्र, गिाहों के
ियान तर्था पुसलस द्िारा वििेचना के द्िारा
सिंकसलत अन्य साक्ष्य का पररशीलन करने
का िी लािप्रद अिसर उपलब्ि है। वििेचक
वििेचना के दौरान सिंकसलत ककए गए
सामग्री की छानिीन पहले ही कर चुका
होता है तर्था इसके िाद आरोप पत्र प्रस्तुत
होता है। अतः पुसलस ररपोटग के आिार पर
आरोप का सिंज्ञान लेते समय न्यायालय को
आदेसशका जारी करने के सलए कोई िी
कारण दशागने की आिश्यकता नहीिं है।
पुसलस ररपोटग के आिार पर सिंजस्र्थत िादों
में न्यायालय को मात्र असियुक्त को
आदेसशका जारी करने की आिश्यकता है।
असियुक्त को आदेसशका जारी करने का
ऐसा आदेश न्यायालय द्िारा पुसलस ररपोटग
तर्था उसके सार्थ प्रस्तुत अन्य असिलेखों के
आिार पर आिाररत सिंतोष कक असियुक्त
के विरुद्ि अग्रेतर कायगिाही चलाने का
समुधचत आिार है, पर आिाररत होता है।
अतः पुसलस ररपोटग पर सिंजस्र्थत प्रकरण में
आदेसशका
जारी
करने
के
स्तर
पर
न्यायालय को आदेश में कोई कारण अिंककत
करने की आिश्यकता नहीिं है।

9. तदनुसार आलोच्य आदेश हदनािंक
07.09.2016 में कोई विधिक त्रुहट प्रतीत
नहीिं होती है। प्रार्थी की अनुपजस्र्थतत के
कारण उसके विरुद्ि गैर जमानती िारिंट
जारी करने के आदेश में िी कोई
अिैिातनकता नहीिं है। तदनुसार, प्रार्थगना पत्र
िलहीन है।

10. इस स्तर पर प्रार्थी की विद्िान
अधििक्ता ने यह कर्थन ककया कक प्रार्थी
जमानत
कराने
को
तत्पर
है।
3 All. Navin Chandra Dwivedi & Ors. Vs. State of U.P.
881

11. तदनुसार, प्रार्थगना पत्र इस तनदेश
के सार्थ ननस्ताररत ककया जाता है कक यहद
प्रार्थी
विचारण
न्यायालय
के
समक्ष
उपजस्र्थत होकर जमानत हेतु प्रार्थगना पत्र
प्रस्तुत करें तो उसे इस आदेश से प्रिावित
हुए बिना शीघ्रतापूिगक विधिनुसार, तेंद्र
कुमार अंनतल बनाम ी.बी.आई., (2021) 10
ए ी ी 773 के प्रकरण में माननीय
उच्चतम न्यायालय द्िरा प्रततपाहदत विधि
व्यिस्र्था के आलोक में ननस्ताररत ककया
जाए।
----------
(2024) 3 ILRA 881
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 01.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 1754 of 2024

Navin Chandra Dwivedi & Ors....Applicants
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Applicants:
Purnendu Chakravarty, Shivanshu Goswami

Counsel for the Respondent:
G.A.

आपराकिि कवकि : दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 311 -
र्वाह िे रूप में परीकक्षत िरिे िे प्राथगिा - पत्र िे किरस्ट्त िरिे िे
कवरूद्ध - वैिता - प्रिरण में आरोप है कि सहिारी आवास सकमकत िे
सकचव पद से कशिायतिताग िो हटाए िािे एवं सकमकत िे कववाद िे
िारण कशिायतिताग तथा उसिे पुत्र िो किरन्तर प्राणघाति िमकियााँ
कमलती रहीं - पूवग में कदिांि 08.07.2016 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा
िी र्ई फायररंर् में कशिायतिताग िा पुत्र घायल हुआ था - कदिांि
17.08.2016 िो अकर्युक्त प्रेम शंिर कद्ववेदी िे प्राथकमिी वापस
लेिे हेतु कशिायतिताग पर दबाव िाला - तत्पश्चात् कदिांि
21.08.2016 िो राकत्र में अकर्युक्तर्ण द्वारा पुिः फायररंर् िी र्ई,
किससे कशिायतिताग िा पुत्र र्ंर्ीर रूप से घायल हुआ और उपचार िे
दौराि उसिी मृत्यु हो र्ई - घटिा िे संबंि में प्राथकमिी सात िामिद
अकर्युक्तर्ण तथा एि अज्ञात व्यकक्त िे कवरुद्ध पंिीिृत िी र्ई -
08.12.2023 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा दं.प्र.सं िी िारा 311 िे
अंतर्गत प्राथगिा-पत्र प्रस्ट्तुत किया र्या, किसमें िहा किया र्या कि घटिा
र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे माकलि वसीउद्दीि िे सामिे घकटत हुई हैं,
िो घायल िो अपिे वाहि से अस्ट्पताल ले र्ए थे तथा घटिा िे
प्रत्यक्षदशी है और उििो अब ति र्वाह िे रूप में प्रस्ट्तुत िहीं किया र्या
है - अतः वसीउद्दीि िो न्यायालय में तलब िरािा न्यायकहत में आवश्यि
है - 22.12.2023 िे आदेश द्वारा कवचारण न्यायालय िे पाया कि
ििल तहरीर एवं िेस िायरी में वसीउद्दीि िे घटिा िा प्रत्यक्षदशी अथवा
किसी ताकववि तथ्य िा साक्षी होिे िा उल्लेख िहीं है - तहरीर िे
अिुसार घटिा स्ट्थल र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे पीछे वाली सड़ि पर
है, ि कि दुिाि िे सामिे - अकर्योिि साक्ष्यों में र्ी वसीउद्दीि िी
उपकस्ट्थकत िा िोई उल्लेख िहीं पाया र्या - अकर्कििागररत, प्रिरण िी
समीक्षा से स्ट्पष्ट हुआ कि अकर्योिि िे किसी र्ी स्ट्तर पर घटिा वसीउद्दीि
िी दुिाि िे सामिे अथवा उसिी उपकस्ट्थकत में घकटत होिे िा उल्लेख
िहीं किया - ि तो प्राथकमिी में और ि ही किसी साक्षी िे बयाि में ऐसा
िथि है। किस अिुि कद्ववेदी िे बयाि पर अकर्युक्तर्ण किर्गर हैं, उसिे
स्ट्वयं स्ट्वीिार किया कि घटिा िे समय वह उपकस्ट्थत िहीं था और उसिे
र्ी वसीउद्दीि िी उपकस्ट्थकत िा उल्लेख िहीं किया। फलस्ट्वरूप,
वसीउद्दीि िो र्वाह िे रूप में तलब िरिे हेतु कदया र्या प्राथगिा-पत्र
असत्य एवं किरािार पाया र्या। (पैरा 3, 5, 7, 19)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. पी. सांजीव राव बनाम आांध्र प्रिेर्श राज्य 2012 (7) SCC 56

2. िािरा एवां नागर हवेली का सांघ राज्य क्षेत्र एवां अन्य बनाम फिेहवसांह
मोहनवसांह चौहान, 2006 (7) एससीसी. 529

3. स्वपन कुमार चटजी बनाम केन्रीय अन्वेर्ण ब्यूरो (2019) 14
एस.सी.सी. 328

4. वी एन पावटल बनाम के वनरांजन कुमार (2021) 3 एस.सी.सी. 661

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थीगण के विद्िान अधििक्ता श्री
पूणेन्दु चििती तर्था विद्िान अततररक्त
शासकीय अधििक्ता श्री अनिंत प्रताप ससिंह