# Navin Chandra Dwivedi & Ors v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 3 ILRA 881
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-03-01
- **Case number:** Application U/S 482. No. 1754 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/navin-chandra-dwivedi-ors-v-state-of-u-p-51691
- **Pages:** 6

## Headnote

G.A.

आपराकिि कवकि : दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 311 -
र्वाह िे रूप में परीकक्षत िरिे िे प्राथगिा - पत्र िे किरस्ट्त िरिे िे
कवरूद्ध - वैिता - प्रिरण में आरोप है कि सहिारी आवास सकमकत िे
सकचव पद से कशिायतिताग िो हटाए िािे एवं सकमकत िे कववाद िे
िारण कशिायतिताग तथा उसिे पुत्र िो किरन्तर प्राणघाति िमकियााँ
कमलती रहीं - पूवग में कदिांि 08.07.2016 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा
िी र्ई फायररंर् में कशिायतिताग िा पुत्र घायल हुआ था - कदिांि
17.08.2016 िो अकर्युक्त प्रेम शंिर कद्ववेदी िे प्राथकमिी वापस
लेिे हेतु कशिायतिताग पर दबाव िाला - तत्पश्चात् कदिांि
21.08.2016 िो राकत्र में अकर्युक्तर्ण द्वारा पुिः फायररंर् िी र्ई,
किससे कशिायतिताग िा पुत्र र्ंर्ीर रूप से घायल हुआ और उपचार िे
दौराि उसिी मृत्यु हो र्ई - घटिा िे संबंि में प्राथकमिी सात िामिद
अकर्युक्तर्ण तथा एि अज्ञात व्यकक्त िे कवरुद्ध पंिीिृत िी र्ई -
08.12.2023 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा दं.प्र.सं िी िारा 311 िे
अंतर्गत प्राथगिा-पत्र प्रस्ट्तुत किया र्या, किसमें िहा किया र्या कि घटिा
र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे माकलि वसीउद्दीि िे सामिे घकटत हुई हैं,
िो घायल िो अपिे वाहि से अस्ट्पताल ले र्ए थे तथा घटिा िे
प्रत्यक्षदशी है और उििो अब ति र्वाह िे रूप में प्रस्ट्तुत िहीं किया र्या
है - अतः वसीउद्दीि िो न्यायालय में तलब िरािा न्यायकहत में आवश्यि
है - 22.12.2023 िे आदेश द्वारा कवचारण न्यायालय िे पाया कि
ििल तहरीर एवं िेस िायरी में वसीउद्दीि िे घटिा िा प्रत्यक्षदशी अथवा
किसी ताकववि तथ्य िा साक्षी होिे िा उल्लेख िहीं है - तहरीर िे
अिुसार घटिा स्ट्थल र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे पीछे वाली सड़ि पर
है, ि कि दुिाि िे सामिे - अकर्योिि साक्ष्यों में र्ी वसीउद्दीि िी
उपकस्ट्थकत िा िोई उल्लेख िहीं पाया र्या - अकर्कििागररत, प्रिरण िी
समीक्षा से स्ट्पष्ट हुआ कि अकर्योिि िे किसी र्ी स्ट्तर पर घटिा वसीउद्दीि
िी दुिाि िे सामिे अथवा उसिी उपकस्ट्थकत में घकटत होिे िा उल्लेख
िहीं किया - ि तो प्राथकमिी में और ि ही किसी साक्षी िे बयाि में ऐसा
िथि है। किस अिुि कद्ववेदी िे बयाि पर अकर्युक्तर्ण किर्गर हैं, उसिे
स्ट्वयं स्ट्वीिार किया कि घटिा िे समय वह उपकस्ट्थत िहीं था और उसिे
र्ी वसीउद्दीि िी उपकस्ट्थकत िा उल्लेख िहीं किया। फलस्ट्वरूप,
वसीउद्दीि िो र्वाह िे रूप में तलब िरिे हेतु कदया र्या प्राथगिा-पत्र
असत्य एवं किरािार पाया र्या। (पैरा 3, 5, 7, 19)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

## Text

3 All. Navin Chandra Dwivedi & Ors. Vs. State of U.P.
881

11. तदनुसार, प्रार्थगना पत्र इस तनदेश
के सार्थ ननस्ताररत ककया जाता है कक यहद
प्रार्थी
विचारण
न्यायालय
के
समक्ष
उपजस्र्थत होकर जमानत हेतु प्रार्थगना पत्र
प्रस्तुत करें तो उसे इस आदेश से प्रिावित
हुए बिना शीघ्रतापूिगक विधिनुसार, तेंद्र
कुमार अंनतल बनाम ी.बी.आई., (2021) 10
ए ी ी 773 के प्रकरण में माननीय
उच्चतम न्यायालय द्िरा प्रततपाहदत विधि
व्यिस्र्था के आलोक में ननस्ताररत ककया
जाए।
----------
(2024) 3 ILRA 881
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 01.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 1754 of 2024

Navin Chandra Dwivedi & Ors....Applicants
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Applicants:
Purnendu Chakravarty, Shivanshu Goswami

Counsel for the Respondent:
G.A.

आपराकिि कवकि : दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 311 -
र्वाह िे रूप में परीकक्षत िरिे िे प्राथगिा - पत्र िे किरस्ट्त िरिे िे
कवरूद्ध - वैिता - प्रिरण में आरोप है कि सहिारी आवास सकमकत िे
सकचव पद से कशिायतिताग िो हटाए िािे एवं सकमकत िे कववाद िे
िारण कशिायतिताग तथा उसिे पुत्र िो किरन्तर प्राणघाति िमकियााँ
कमलती रहीं - पूवग में कदिांि 08.07.2016 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा
िी र्ई फायररंर् में कशिायतिताग िा पुत्र घायल हुआ था - कदिांि
17.08.2016 िो अकर्युक्त प्रेम शंिर कद्ववेदी िे प्राथकमिी वापस
लेिे हेतु कशिायतिताग पर दबाव िाला - तत्पश्चात् कदिांि
21.08.2016 िो राकत्र में अकर्युक्तर्ण द्वारा पुिः फायररंर् िी र्ई,
किससे कशिायतिताग िा पुत्र र्ंर्ीर रूप से घायल हुआ और उपचार िे
दौराि उसिी मृत्यु हो र्ई - घटिा िे संबंि में प्राथकमिी सात िामिद
अकर्युक्तर्ण तथा एि अज्ञात व्यकक्त िे कवरुद्ध पंिीिृत िी र्ई -
08.12.2023 िो अकर्युक्तर्ण द्वारा दं.प्र.सं िी िारा 311 िे
अंतर्गत प्राथगिा-पत्र प्रस्ट्तुत किया र्या, किसमें िहा किया र्या कि घटिा
र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे माकलि वसीउद्दीि िे सामिे घकटत हुई हैं,
िो घायल िो अपिे वाहि से अस्ट्पताल ले र्ए थे तथा घटिा िे
प्रत्यक्षदशी है और उििो अब ति र्वाह िे रूप में प्रस्ट्तुत िहीं किया र्या
है - अतः वसीउद्दीि िो न्यायालय में तलब िरािा न्यायकहत में आवश्यि
है - 22.12.2023 िे आदेश द्वारा कवचारण न्यायालय िे पाया कि
ििल तहरीर एवं िेस िायरी में वसीउद्दीि िे घटिा िा प्रत्यक्षदशी अथवा
किसी ताकववि तथ्य िा साक्षी होिे िा उल्लेख िहीं है - तहरीर िे
अिुसार घटिा स्ट्थल र्र्ोले िबाब पराठा दुिाि िे पीछे वाली सड़ि पर
है, ि कि दुिाि िे सामिे - अकर्योिि साक्ष्यों में र्ी वसीउद्दीि िी
उपकस्ट्थकत िा िोई उल्लेख िहीं पाया र्या - अकर्कििागररत, प्रिरण िी
समीक्षा से स्ट्पष्ट हुआ कि अकर्योिि िे किसी र्ी स्ट्तर पर घटिा वसीउद्दीि
िी दुिाि िे सामिे अथवा उसिी उपकस्ट्थकत में घकटत होिे िा उल्लेख
िहीं किया - ि तो प्राथकमिी में और ि ही किसी साक्षी िे बयाि में ऐसा
िथि है। किस अिुि कद्ववेदी िे बयाि पर अकर्युक्तर्ण किर्गर हैं, उसिे
स्ट्वयं स्ट्वीिार किया कि घटिा िे समय वह उपकस्ट्थत िहीं था और उसिे
र्ी वसीउद्दीि िी उपकस्ट्थकत िा उल्लेख िहीं किया। फलस्ट्वरूप,
वसीउद्दीि िो र्वाह िे रूप में तलब िरिे हेतु कदया र्या प्राथगिा-पत्र
असत्य एवं किरािार पाया र्या। (पैरा 3, 5, 7, 19)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. पी. सांजीव राव बनाम आांध्र प्रिेर्श राज्य 2012 (7) SCC 56

2. िािरा एवां नागर हवेली का सांघ राज्य क्षेत्र एवां अन्य बनाम फिेहवसांह
मोहनवसांह चौहान, 2006 (7) एससीसी. 529

3. स्वपन कुमार चटजी बनाम केन्रीय अन्वेर्ण ब्यूरो (2019) 14
एस.सी.सी. 328

4. वी एन पावटल बनाम के वनरांजन कुमार (2021) 3 एस.सी.सी. 661

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थीगण के विद्िान अधििक्ता श्री
पूणेन्दु चििती तर्था विद्िान अततररक्त
शासकीय अधििक्ता श्री अनिंत प्रताप ससिंह
882 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
को सुना तर्था पत्रािली का अिलोकन
ककया।

2. िारा 482 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अिंतगगत प्रस्तुत इस प्रार्थगना पत्र द्िारा
प्रार्थीगण ने विद्िान अपर जजला एििं सत्र
न्यायािीश कक्ष सिंख्या 15, लखनऊ द्िारा
सत्र परीक्षण सिंख्या 479 सन 2017 में
पाररत आदेश हदनािंक 22.12.2023 की िैिता
को चुनौती दी है, जजसके द्िारा सत्र
न्यायालय ने असियुक्तगण की तरफ से
िारा 311 दिं०प्र०सिं० के अिंतगगत एक व्यजक्त
िसीउद्दीन को गिाह के रूप में परीक्षक्षत
करने के प्रार्थगना-पत्र को तनरस्त कर हदया।

3. मामले के सिंक्षक्षप्त तथ्य इस प्रकार
हैं कक हदनािंक 21.08.2016 को समय 23:50
िजे प्रर्थम सूचना ररपोटग सिंख्या 0416 सन
2018 सात नासमत व्यजक्तयों तर्था एक
अज्ञात व्यजक्त के विरुद्ि सलखाते हुए यह
कहा गया कक एक सहकारी आिास ससमतत,
जजसका सधचि एििं पत्नी अध्यक्ष है, द्िारा
औरिंगािाद खालसा, लखनऊ में लगिग 12
िीघे जमीन खरीदी गयी र्थी। सशकायतकताग
को ससमतत के सधचि पद से हटाते हुए एक
अन्य व्यजक्त को सधचि िना हदया गया।
उक्त ससमतत के वििाद के सिंििंि में
सशकायतकताग और उसके पुत्र को जान से
मारने की िमककयािं समल रही र्थी। हदनािंक
08.07.20216 को अन्नू द्वििेदी उफग सशिम,
मन्नू द्वििेदी उफग अक्षय एििं सुजल ससिंह
ने फायररिंग करके सशकायतकताग के पुत्र
सधचन शुक्ला एििं एक अन्य व्यजक्त अनुज
द्वििेदी को घायल कर हदया र्था, जजसकी
प्रर्थम सूचना ररपोटग सिंख्या 339 सन 2014
र्थाना आसशयाना में हदनािंक 09.07.2016 को
अिंककत की गयी र्थी। उपरोक्त तीनों
अपरािी फरार र्थे तर्था उनकी धगरफ्तारी के
सलए सशकायतकताग तर्था उसके पुत्र द्िारा
उच्चाधिकाररयों से अनुरोि िी ककया गया
र्था। हदनािंक 17.08.2026 को प्रार्थी सिंख्या 5
प्रेम शिंकर द्वििेदी ने सशकायतकताग के घर
आकर प्रर्थम सूचना ररपोटग की िापसी हेतु
दिाि िनाया तर्था िमकी देकर चले गये।
हदनािंक 21.08.2016 को राबत्र 9 िजे
असियुक्तगण ने असलहे से फायर ककया
जजससे सशकायतकताग के पुत्र को चोटें
आयीिं। यहााँ मौजूद लोग उसे ससविल
अस्पताल ले गये, जहााँ से रामा सेण्टर,
के.जी.एम.यू.
िेजा
गया
तर्था
िहााँ
सशकायतकताग के पुत्र की मृत्यु हो गयी।
प्रर्थम सूचना ररपोटग में कहा गया है कक
घटना िगोले किाि पराठा िाले की दुकान
के पीछे िाली रोड पर िदरुख क्षेत्र की है।

4. वििेचना के उपरान्त प्रस्तुत आरोपपत्र की प्रतत प्रार्थगना-पत्र के सार्थ सिंलग्न
नहीिं की गयी है।

5.

हदनािंक
08.12.2023
को
असियुक्तगण की तरफ से िारा 311
दिं०प्र०सिं० के अिंतगगत प्रार्थगना-पत्र प्रस्तुत
करके कहा गया ककः-
3 All. Navin Chandra Dwivedi & Ors. Vs. State of U.P.
883

"उपरोक्त प्रकरण से सिंििंधित
घटना जजस िगोले किाि पराठे िाले की
दुकान के सामने घहटत हुई उस िगोले
किाि पराठे की दुकान के मासलक
िसीउद्दीन पुत्र ननकू तनिासी 108 िखौरी
माफी तहसील कैसरगिंज जजला िहराइच
(उ०प्र०) को जो कक उक्त घटना का अहम
गिाह है उसको न्यायालय के समक्ष गिाही
हेतु प्रस्तुत नहीिं ककया गया है तर्था उक्त
मुख्य गिाह के िैन से चोटहहल को
अस्पताल िेजा गया र्था। उक्त प्रकरण में
"िसीउद्दीन पुत्र ननकू तनिासी उपरोक्त को
िारा 311 दिं०प्र०सिं० के तहत तलि कर
उक्त प्रकरण में गिाही हेतु तलि ककया
जाना न्यायहहत में आिश्यक है।"

6. इसी प्रार्थगना-पत्र पर विद्िान
अततररक्त शासकीय अधििक्ता ने अपनी
आपवि अिंककत की "उपरोक्त पत्रािली में
असियोजन की िहस हो चुकी है, पत्रािली
िचाि पक्ष की शेष िहस पर लगी है। इस
स्तर पर 311 दिं०प्र०सिं० का प्रार्थगना-पत्र
िचाि पक्ष द्िारा मुकदमें को विलिंबित
करने के सलए हदया जा रहा है। प्रार्थगना पत्र
का घोर विरोि ककया जाता है।"

7. हदनािंक 22.12.2023 के आलोच्य
आदेश द्िारा विद्िान विचारण न्यायालय
ने अिंककत ककया कक नकल तहरीर में कहीिं
िी िसीउद्दीन के घटना के ककसी ताजत्िक
तथ्य का साक्षी होने का उललेख नहीिं है।
तहरीर के अनुसार घटना िगोले किाि
पराठा िाले की दुकान के पीछे िाली रोड,
िदरुख क्षेत्र की है, न कक उसके दुकान के
सामने की है। विद्िान विचारण न्यायालय
ने सिंपूणग केस डायरी तर्था असियोजन
साक्षक्षयों के साक्ष्य का अिलोकन करके यह
पाया कक यह कहीिं िी उजललखखत नहीिं है
कक िगोले किाि पराठा के दुकान के
मासलक
िसीउद्दीन
घटना
के
समय
उपजस्र्थत र्थे।

8. असियुक्त की तरफ से पी. ंिीि
राि बनाम आंध्र प्रदेश राज्य 2012 (7) SCC
56 के तनणगय का आश्रय सलया गया जजसमें
विद्िान सत्र न्यायालय ने पाया कक उक्त
प्रकरण के तथ्य प्रस्तुत प्रकरण के तथ्यों
से सिन्न होने के कारण उक्त तनणगय
प्रस्तुत प्रकरण पर लागू नहीिं होते हैं। इस
न्यायालय के समक्ष प्रार्थीगण के विद्िान
अधििक्ता ने िी यह स्िीकार ककया कक पी.
 ंिीि राि प्रकरण का तनणगय प्रस्तुत
मामले के सलए सिंगत नहीिं है।

9. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने तकग
हदया कक असियोजन साक्षी सिंख्या 2 अनुज
द्वििेदी ने अपने ियान में कहा है कक
घटना के हदन लगिग राबत्र 9 िजे िह
सधचन के सार्थ खड़ा र्था, उसने एक लड़के
से बियर मिंगाई ति तक सधचन का फोन
आ गया और िह फोन पर िात करते हुए
िगोले किाि पराठा की दुकान के पीछे
884 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
चला गया। गिाह अनुज द्वििेदी मोिाइल
पर गेम खेलते हुए फुरकान की दुकान
(िािंग की) पर चला गया, िहााँ मेरे दोस्त
िैठे र्थे उनसे िाते करने लगा तिी गोली
चलने की आिाज आयी कुछ सेकण्ड तक
कुछ समझ में नहीिं आया कक क्या हुआ
कफर कई लोगों की आिाज आयी "गोली
मार दी" "गोली मार दी" िह दौड़कर गया
तो देखा सधचन सलिंक रोड पर घायल पड़ा
र्था कई लोग खड़े र्थे ति उसने िगेलू
किाि पराठा की िैन में लेटा कर सधचन
को लेकर तुरन्त ससविल अस्पताल पहुिंचा
सार्थ में उसके िगेलू किाि पराठा िाला
और एक लड़का प्रिीन शुक्ला मौजूद र्थे।
ससविल अस्पताल से रामा सेण्टर मेडडकल
कालेज रेफर कर हदया गया। िह िहााँ िी
सार्थ गया। जहााँ सधचन को मृत घोवषत कर
हदया गया। इससे पूिग िी उसके ि सधचन
के सार्थ 307 की घटना हुई र्थी जजसमें
उसकी अिंगुली घायल हो गयी र्थी। घटना के
िाद दरोगा जी ने उससे पूछताछ की र्थी।"

10. गिाह अनुज द्वििेदी ने अपने
ियान में न तो स्ियिं को घटना का
चक्षुदशी साक्षी होना कहा है और न उसने
यह कहा है कक कधर्थत गिाह िसीउद्दीन
घटना का चक्षुदशी साक्षी र्था। गिाह ने यह
िी नहीिं कहा है कक घटना िसीउद्दीन की
दुकान के सामने घहटत हुई।

11. विद्िान विचारण न्यायालय ने
आलोच्य आदेश में यह सही ही अिंककत
ककया है कक सिंपूणग केस डायरी का
अिलोकन एििं असियोजन साक्षक्षयों के
साक्ष्य का अिलोकन करने पर यह पाया
गया कक यह कहीिं िी उजललखखत नहीिं है
कक िगोले किाि पराठा के दुकान के
मासलक
िसीउद्दीन
घटना
के
समय
उपजस्र्थत र्थे।

12. िसीउद्दीन का नाम आरोप-पत्र में
असियोजन साक्षी के रूप में अिंककत नहीिं है।
असियोजन साक्ष्य पूणग होने के उपरान्त
असियुक्तगण ने िी िसीउद्दीन को अपने
साक्षी के रूप में परीक्षक्षत करना उधचत नहीिं
समझा। जि प्रकरण में सम्पूणग साक्ष्य
अिंककत होने के उपरान्त असियोजन पक्ष की
िहस पूणग हो चुकी तर्था असियुक्त की
िहस िी आिंसशक रूप से सुनी जा चुकी र्थी,
उस स्तर पर असियुक्तगण ने िारा 311
िा०दिं०सिं० के अिंतगगत िसीउद्दीन को साक्षी
के रूप में िुलाने की इस आिार पर प्रस्तुत
की कक घटना िगोले किाि पराठे िाले के
सामने घहटत हुई र्थी तर्था दुकान का
मासलक िसीउद्दीन घटना का अहम गिाह
है।

13. पत्रािली ऐसी कोई िी सामग्री
उपलब्ि नहीिं है जजससे िारा 311 दिं०प्र०सिं०
में ककये गये उपरोक्त कर्थन कक घटना
िसीउद्दीन की दुकान के सामने हुई और
िसीउद्दीन घटना का अहम गिाह है,
समधर्थगत हो सके।

14. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
तकग हदया कक िारा 311 दिं०प्र०सिं० के
3 All. Navin Chandra Dwivedi & Ors. Vs. State of U.P.
885
अिंतगगत न्यायालय ककसी िी साक्षी को
ककसी िी स्तर पर िुला सकता है और तकग
के समर्थगन में उन्होंने U. T. of Dadra &
Haveli & Anr Vs. Fatehsinh Mohansinh
Chauhan 2006 (7) SCC 529 के तनणगय का
आश्रय सलया, जजसमें कई पूिग न्यातयक
तनणगयों का सिंदिग देते हुए माननीय
उच्चतम न्यायालय ने अििाररत ककया कक
िारा 311 दिं०प्र०सिं० के अिंतगगत न्यायालय
वििेचना अर्थिा विचारण के ककसी िी स्तर
पर ककसी व्यजक्त को गिाह के रूप में
तलि कर सकती है तर्था न्यायालय ककसी
िी ऐसे व्यजक्त को साक्ष्य के सलए अिश्य
ही तलि करेगी जजसका साक्ष्य एक
न्यायपूणग तनणगय के सलए अपररहायग हो।

15. उपरोक्त विधि व्यिस्र्था के सिंदिग
में कोई सिंशय नहीिं है तर्था तनश्चय ही िारा
311 दिं०प्र०सिं० न्यायालय को इस सिंििंि में
न्यायहहत में ककसी िी साक्षी को ककसी िी
स्तर पर तलि करने की असीसमत शजक्त
प्राप्त है ककन्तु ऐसी असीसमत शजक्त का
प्रयोग साििानीपूिगक करना चाहहए तर्था
न्यायालय को यह सुतनजश्चत करना चाहहए
कक इन शजक्तयों का दुरुपयोग असियुक्त
विचारण में देरी काररत करने के सलए न
कर पाये।

16. स्िपन कुमार चैटिी बनाम केंद्रीय
अन्िेषण ब्यूरो (2019) 14 ए ी ी 328,
के तनणगय में माननीय उच्चतम न्यायालय
ने यह अििारणा ककया कक यह विधि का
एक सुस्र्थावपत ससद्िान्त है कक िारा 311
दिंड प्रकिया सिंहहता की शजक्तयािं न्यायालय
द्िारा मात्र न्याय के उद्देश्यों की पूततग के
सलए ही प्रयोग की जानी चाहहए। इन
शजक्तयों का प्रयोग अत्यिंत साििानीपूिगक,
मात्र प्रिल और िैि कारणों से ही ककया
जाना चाहहए। इस िारा के अिंतगगत
न्यायालय को न्याय हहत में साक्षी को
िुलाए जाने की व्यापक शजक्तयािं प्राप्त है
ककन्तु इनका प्रयोग प्रकरण के समस्त
तथ्यों एििं पररजस्र्थततयों को ध्यान में रखते
हुए ही करना चाहहए। यहद न्यायालय का
मत है कक िारा 311 के अिंतगगत प्रार्थगना पत्र
विधिक प्रकिया का दुरुपयोग करने के सलए
हदया गया है तो न्यायालय को इन
शजक्तयों का प्रयोग नहीिं करना चाहहए ।

17. स्िपन कुमार चैटिी के तनणगय में
माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह िी
कहा कक हर न्यायालय का उद्देश्य सत्य
की खोज करना है। िारा 311 दिंड प्रकिया
सिंहहता ऐसे अनेक प्राििानों में से एक है,
जो विधि द्िारा स्र्थावपत प्रकिया के अनुसार
सत्य की खोज के न्यायालय के प्रयासों में
उसको िल प्रदान करते हैं, ककिंतु न्यायालय
को िारा 311 दन्ड प्रकिया सिंहहता के
अिंतगगत प्राप्त वििेकािीन शजक्तयों का
प्रयोग
प्रिल
और
िैि
कारणों
से
साििानीपूिगक न्याय के उद्देश्यों की पूततग
के सलए ही करना चाहहए।

18. िी एन पाटटल बनाम के ननरंिन
कुमार (2021) 3 ए ी ी 661, में
886 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
माननीय
उच्चतम
न्यायालय
ने
यह
ससद्िािंत प्रततपाहदत ककया कक िारा 311
दिंड प्रकिया सिंहहता का अिंततनगहहत उद्देश्य
यह है कक ककसी िी पक्षकार द्िारा
मूलयिान साक्ष्य को असिलेख पर लाने में
हुई त्रुहट अर्थिा ककसी गिाह के साक्ष्य में
अस्पष्टता न होने के कारण से न्याय का
उद्देश्य विफल न हो जाए। तनणागयक बििंदु
यह है कक क्या ऐसा करना प्रकरण के
न्यायपूणग तनणगय के सलए अपररहायग है। इस
िारा में असिव्यजक्त कक "ककसी जााँच
विचारण या अन्य कायगिाही के ककसी प्रिम
में" िी अत्यिंत महत्िपूणग है, ककन्तु यह
ध्यान में रखना चाहहए की िारा 311 दिंड
प्रकिया सिंहहता द्िारा प्रदि वििेकािीन
शजक्तयों का प्रयोग न्यायपूणग ढिंग से ककया
जाना चाहहए। जैसा कक सदा ही कहा जाता
है कक शजक्तयािं जजतनी व्यापक हों, उनके
इस सिंििंि में वििेक का प्रयोग न्याय पूिगक
करने में साििानी की अतनिायगता उतनी
अधिक िढ़ जाती है।

19. जि उपरोक्त विधि व्यिस्र्थाओिं के
आलोक में प्रस्तुत प्रकरण के तथ्यों की
समीक्षा की जाय तो यह स्पष्ट होता है कक
असियोजन ने किी िी ककसी िी स्तर पर
यह नहीिं कहा कक घटना िसीउद्दीन की
दुकान के सामने अर्थिा उसकी उपजस्र्थतत
में घहटत हुई। पत्रािली िचाि की िहस के
स्तर पर पहुिंचने पर असियुक्त गण ने
िसीउद्दीन को इस आिार पर साक्षी के
रूप में तलि करने का प्रार्थगना-पत्र हदया कक
घटना उसकी दुकान के सामने घहटत हुई
र्थी और िह घटना का अहम गिाह है,
जिकक ऐसा कर्थन न तो प्रर्थम सूचना
ररपोटग में और न ही ककसी िी साक्षी के
ियान में है तर्था जजस साक्षी अनुज
द्वििेदी के ियान का आश्रय असियुक्तगण
ले रहे हैं उसने स्ियिं यह कहा कक घटना के
समय िह स्ियिं िी उपजस्र्थत नहीिं र्था और
उसने िी िसीउद्दीन की दुकान के सामने
अर्थिा िसीउद्दीन की उपजस्र्थतत में घटना
होने का कर्थन नहीिं ककया है। अतः प्रार्थगना-
पत्र में िसीउद्दीन को गिाह के रूप में
तलि ककये जाने का दशागया गया कारण
असत्य एििं तनरािार है।

20. उपरोक्त समीक्षा के आलोक में
विद्िान विचारण न्यायालय द्िारा िारा
311 दिं०प्र०सिं० का प्रार्थगना-पत्र तनरस्त ककये
जाने में कोई अिैिातनकता अर्थिा त्रुहट
काररत नहीिं की गयी है। िारा 482 दण्ड
प्रकिया सिंहहता के अन्तगगत प्रस्तुत प्रार्थगना-
पत्र िलहीन है और तद्नुसार तनरस्त ककया
जाता है।
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(2024) 3 ILRA 886
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 19.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE RAJESH SINGH CHAUHAN, J.

Application U/S 482 No. 1872 of 2011

Ramesh Iyer ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Respondents