# Neeraj v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 11 ILRA 238
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-11-14
- **Case number:** Criminal Appeal No. 337 of 2020
- **Bench:** Ashwani Kumar Mishra, Dr. Gautam Chowdhary
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/neeraj-v-state-of-u-p-51002
- **Pages:** 14

## Headnote

G.A.

आपराधिक धिधि - भारतीय दंड संधिता, 1860 - िारा 376
- लैंधिगक अपरािों से बालकों का संरक्षर्ण अधतिधियम -
2012 - िारा 6, 3⁄4 - आजीि कारािास - अर्णदंड - दंड
प्रधिया संधिता, 1973 - िारा 161, 164, 313 - 8
िर्ण से अधिक समय से कारागार में सजा भुगत चुका िैं -
अधभयोजि पक्ष के अिुसार िादी मुकदमा िे एक धलधित तिरीर
दी धक धदिांक 27.09.2017 को प्रार्ी की लड़की पीधड़ता
(प्रर्म) आयु 5 िर्ण ि पीधड़ता (धितीय) आयु 4 साल दोिों
बधचचयों गली में िेल रिी र्ी, तभी अधभयुक्त गली में आया और
दोिों बधचचयों के सार् असलील िरकत करिे लगा - बाद में
अधभयुक्त िे बड़ी लडकी का मुुँि दबाकर िजदीक के िाली प्लाट
में ले गया - छोटी बचची धचल्लाते िुए घर पर गई और घर िालों
को पूरी घटिा के बारे में बताया, घर िाले तर्ा पड़ोस में रििे
िाले कुछ व्यधक्तयों िे प्लाट में जाकर देिा तो अधभयुक्त पीधड़ता
के सार् अश्लील िरकत कर रिा र्ा - धििेचक िारा धििेचिा की
गयी एिं अधभयुक्त के धिरुद्ध पयाणप्त साक्ष्य पाए जािे पर धिचरर्
िेतु आरोप पत्र दाधिल धकया गया| (प्रस्तर 2, 4)

अपीलार्ी िे तकण धदया धक उसे रंधजशि ितणमाि मामले में असत्य
ि कपोल-कधल्पत तथ्यों के आिार पर झूठा फसाया गया िै -
उन्िोंिे आगे किा धक कुछ अधभयोजि साधक्षयों के पक्षद्रोिी िो
जािे का कोई धिपरीत प्रभाि अधभयोजि के धिरुद्ध ििीं पड़ता िै,
क्योंधक पक्षद्रोिी साक्षीयों िे भी अपिे साक्ष्य में तर्ाकधर्त
घटिास्र्ल पर घटिा के घधटत िोिे की बात मािी िै, परंतु
घटिास्र्ल पर स्ियं को उपधस्र्त ि िोिे संबंिी अधभकर्ि करते
िुए अधभयोजि के धिरुद्ध अधभकर्ि धकया िै। (प्रस्तर 41)

अधभधििाणररत, पीधड़ता के सार् बलात्कार की घटिा अधभयुक्त के
िारा िी काररत की गई िै, यि अधभयोजि साधक्षयों िारा धदए गए
बयाि से साधबत िै, इसके अलािा मेधडकल साक्ष्य ि अन्य
दस्तािेजीय साक्ष्य से भी युधक्त-युक्त संदेि से परे प्रमाधर्त िै।
(प्रस्तर 46, 47)

दाधडडक अपील आंधशक रूप से स्िीकार (E-13)

प्रोद्धृत मामलों की सूची:
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
239

## Text

_Characters 0–38,781 of 49,852. This is a partial read: ask again with offset=38781 for what follows._

238 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
adverse impact on protection of rights and
interest of the informant/victim.

51. The nature and gravity of
offence and the role play by applicants
disentitle the applicants to grant of
anticipatory bail. Applicants have failed to
show that there is harassment, humiliation
and unjustified detention of applicants. It is
also not shown that there is over
implication of the applicants or the
applicants have been falsely implicated or
there is frivolity in prosecution. A person
who has committed an offence is not
entitled
to
grant
of
discretionary
jurisdiction of anticipatory bail unless it is
shown that the accused is falsely implicated
or is entitled for protection of liberty. A
person who has violated the law and has
not shown exceptional circumstances is not
entitled to the benefit of extraordinary
jurisdiction.
No
extraordinary
circumstances
have
been
shown
by
applicants that refusal to grant anticipatory
bail
would
lead
to
injustice.
Even
otherwise, the applicants have failed to
demonstrate factors which would entitle the
applicants for anticipatory bail.

52. In view of the above, the
present anticipatory bail applications lacks
merit and are accordingly dismissed.
----------
(2024) 11 ILRA 238
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.11.2024

BEFORE

THE HON'BLE ASHWANI KUMAR MISHRA, J.
THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Appeal No. 337 of 2020

Neeraj ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Appellant:
Deepak Kaushaik

Counsel for the Respondent:
G.A.

आपराधिक धिधि - भारतीय दंड संधिता, 1860 - िारा 376
- लैंधिगक अपरािों से बालकों का संरक्षर्ण अधतिधियम -
2012 - िारा 6, 3⁄4 - आजीि कारािास - अर्णदंड - दंड
प्रधिया संधिता, 1973 - िारा 161, 164, 313 - 8
िर्ण से अधिक समय से कारागार में सजा भुगत चुका िैं -
अधभयोजि पक्ष के अिुसार िादी मुकदमा िे एक धलधित तिरीर
दी धक धदिांक 27.09.2017 को प्रार्ी की लड़की पीधड़ता
(प्रर्म) आयु 5 िर्ण ि पीधड़ता (धितीय) आयु 4 साल दोिों
बधचचयों गली में िेल रिी र्ी, तभी अधभयुक्त गली में आया और
दोिों बधचचयों के सार् असलील िरकत करिे लगा - बाद में
अधभयुक्त िे बड़ी लडकी का मुुँि दबाकर िजदीक के िाली प्लाट
में ले गया - छोटी बचची धचल्लाते िुए घर पर गई और घर िालों
को पूरी घटिा के बारे में बताया, घर िाले तर्ा पड़ोस में रििे
िाले कुछ व्यधक्तयों िे प्लाट में जाकर देिा तो अधभयुक्त पीधड़ता
के सार् अश्लील िरकत कर रिा र्ा - धििेचक िारा धििेचिा की
गयी एिं अधभयुक्त के धिरुद्ध पयाणप्त साक्ष्य पाए जािे पर धिचरर्
िेतु आरोप पत्र दाधिल धकया गया| (प्रस्तर 2, 4)

अपीलार्ी िे तकण धदया धक उसे रंधजशि ितणमाि मामले में असत्य
ि कपोल-कधल्पत तथ्यों के आिार पर झूठा फसाया गया िै -
उन्िोंिे आगे किा धक कुछ अधभयोजि साधक्षयों के पक्षद्रोिी िो
जािे का कोई धिपरीत प्रभाि अधभयोजि के धिरुद्ध ििीं पड़ता िै,
क्योंधक पक्षद्रोिी साक्षीयों िे भी अपिे साक्ष्य में तर्ाकधर्त
घटिास्र्ल पर घटिा के घधटत िोिे की बात मािी िै, परंतु
घटिास्र्ल पर स्ियं को उपधस्र्त ि िोिे संबंिी अधभकर्ि करते
िुए अधभयोजि के धिरुद्ध अधभकर्ि धकया िै। (प्रस्तर 41)

अधभधििाणररत, पीधड़ता के सार् बलात्कार की घटिा अधभयुक्त के
िारा िी काररत की गई िै, यि अधभयोजि साधक्षयों िारा धदए गए
बयाि से साधबत िै, इसके अलािा मेधडकल साक्ष्य ि अन्य
दस्तािेजीय साक्ष्य से भी युधक्त-युक्त संदेि से परे प्रमाधर्त िै।
(प्रस्तर 46, 47)

दाधडडक अपील आंधशक रूप से स्िीकार (E-13)

प्रोद्धृत मामलों की सूची:
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
239
1. राजा और अन्य बनाम कनायटक राज्य (2016) 10 एससीसी
506, (प्रस्तर 32)
2. गंगा भवानी बनाम रामपकत वेकटरेडी व अन्य, किकमनल अपील
86/11 तथा
3. किकमनल अपील 84/11, किनांक 04-09-2013, (प्रस्तर
9)
4. ित्तुराव सजारे बनाम स्टेट आफ महाराष्ट्र (1997) 5.
एस०सी०सी० 341
5. मोतीलाल बनाम स्टेट आफ मध्य प्रिेश (2008) 11.
एस०सी०सी० 20
6. स्टेट आफ कहमांचल प्रिेश बनाम संजय कुमार (2017) 2,
एस०सी०सी० 51, (प्रस्तर 31)
7. कवजय बनाम स्टेट आफ मध्य प्रिेश (2010) 8, एस.सी.सी.
191
8. लोकेश बनाम स्टेट, किकमनल अपील 487/ 2016 कनणय
किनांककत 07 जून 2019
9. स्टेट आफ उडीसा बनाम ठकारा बेसरा (2002) 9
एस०सी०सी० 86
10. टी.के. गोपाल बनाम कनायटक राज्य 2000 (6) एससीसी
168
11. भग्गी उफय भागीरथ उफय नारन बनाम मध्य प्रिेश राज्य (2024)
5 एससीसी 782
12. गुरमुख कसंह बनाम हररयाणा राज्य (2009) 15 एससीसी
635
13. राज बाला बनाम हररयाणा राज्य और अन्य (2016) 1
एससीसी 463
14. बाबू बनाम उत्तर प्रिेश राज्य, िाकडडक अपील संख्या
2878/2013, कनणय किनांक 15.07.2022, (प्रस्तर 14 से
20)
15. श्यामवीर बनाम उत्तर प्रिेश राज्य और अन्य, िाकडडक अपील
संख्या 4378/2019, कनणय किनांक 1.5.2024

(माननीय डा० न्यायमूकतय गौतम चौधरी द्वारा पाररत न्याय-पत्र)

1. वतयमान िाकडडक अपील सं. 337 सन् 2020
अपीलाथी नीरज की ओर से, मु.अ.सं. 1030/2017 अंतगयत धारा
376 भा.िं.सं. व 3⁄4 पॉक्सो अकधकनयम, थाना बडौत, जनपि बागपत
से उद्भूत सत्र परीक्षण संख्या 84/2017 में सत्र न्यायाधीश, बागपत
द्वारा पाररत कनणय व आिेश किनांक 11.12.2019 के कवरूद्ध िायर
की गयी हैं, कजसके द्वारा अपीलाथी को धारा 6 लैंकगक अपराधों से
बालकों का संरक्षण अकधकनयम के अंतगयत िोषकसद्ध पाते हुए आजीवन
कारावास तथा रु. 100000/- अथयिडड से िकडडत ककया गया है, के
कवरूद्ध िायर की गयी है।

2. संक्षेप में अकभयोजन कथानक यह है कक वािी
मुकिमा अकमत कुमार पुत्र बीरकसंह, कनवासी गली नम्बर 14
आजािनगर, बडौत, कजला बागपत की ओर से एक कलकखत तहरीर इस
आशय का थानाप्रभारी बडौत, कजला बागपत को किया गया है कक
धदिांक 27/09/2017 को तकरीबि 4 बजे प्राथी की लडकी
पीकडता प्रथम आयु 5 साल व पीकडता कद्वतीय आयु 4 साल िोनों
बकच्चयां गली में खेल रहीं थीं तभी गली नम्बर 9 का नीरज पुत्र
राजकुमार कनवासी आजािनगर बडौत गली में आया और िोनों
बकच्चयों के साथ अश्लील हरकत करने लगा। जब िोनों बकच्चयां डर
कर कचल्लायी तो नीरज ने बडी लडकी का मुुँह िबाकर नजिीक के
खाली प्लाट में ले गया। छोटी बच्ची कचल्लाती हुयी घर गयी और घर
वालों को बताया। घर वाले िौडकर गये साथ में पडोस में रहने वाला
जगवीर, सुभाष, कुलवीर व बाबा बीर कसंह, चाचा सुकमत ने प्लाट में
जाकर िेखा तो नीरज, पीकडता प्रथम का कच्छा कनकाल रहा था और
अश्लील हरकत कर रहा था। नीरज लोगों को िेखकर पीकडता प्रथम को
उसी हालत में छोडकर भागने लगा। बहुत मुकश्कल से पकडा। लोगों ने
आिोश में आकर मारने लगे। कुछ संभ्रान्त लोगों ने नीरज को छुडाया
और सभी थाने पर लेकर आये। वह घर से बाहर था। घर आया तो
लोगों ने बताया। कनवेिन ककया कक नीरज के कखलाफ कडी से कडी
काययवाही की जाये।

3. वािी मुकिमा की तहरीर के आधार पर अकभयुक्त के
कवरुद्ध प्रथम सूचना ररपोटय धारा 376 भा०ि०सं० व धारा 7/ 8
लैंकगक अपराधों से बालकों का संरक्षण अकधकनयम में िजय की गयी एवं
कववेचना प्रारम्भ हुयी।

4. कववेचक द्वारा कववेचना की गयी एवं आवश्यक साक्ष्य
संककलत ककये गये। नक्शा नजरी तैयार ककया गया एवं बाि कववेचना
अकभयुक्त के कवरूद्ध पयायप्त साक्ष्य पाये जाने पर कवचारण हेतु आरोपपत्र
धारा 376 भा०ि०स० एवं धारा 3/4 लैंकगक अपराधों से बालकों का
संरक्षण अकधकनयम में प्रस्तुत कर किया गया। आरोपपत्र आने पर
न्यायालय द्वारा उस पर संज्ञान कलया गया।

5. कवचारण न्यायालय द्वारा किनांक 12/03/2018
को अकभयुक्त के कवरूद्ध आरोप अन्तगयत धारा 376 भा०ि०सं० व
धारा 3/4 लैंकगक अपराधों से बालकों का संरक्षण अकधकनयम में
240 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
कवरकचत ककया गया। आरोपों से इन्कार कर अकभयुक्त ने कवचारण की
मांग की।

6. प्रस्तुत मामले में पीकडत बकच्चयां 12 साल से कम
आयु की िमशिः 4 व 5 साल की थी इसकलये किनांक
23/09/2019 को धारा 5/6 लैकगक अपराधों से बालकों का
संरक्षण अकधकनयम में आरोप कवरकचत ककया गया। आरोप पढ़कर
अकभयुक्त को सुनाया व समझाया गया कजससे इन्कार करते हुये
अकभयुक्त द्वारा कवचारण चाहा गया। तिोपरान्त अकभयोजन पक्ष को
साक्ष्य का अवसर प्रिान ककया गया।

7. अकभयोजन की ओर से अपने कथानक को साकबत
करने के कलये अकभयोजन साक्षी सं. 01 अकमत कुमार, अकभयोजन
साक्षी सं. 02 कमथलेश, अकभयोजन साक्षी सं. 03 वीरकसंह,
अकभयोजन साक्षी सं. 04 ककपल, अकभयोजन साक्षी सं. 05
सुकमत, अकभयोजन साक्षी सं. 06 प्रथम पीकडता, अकभयोजन साक्षी
सं. 07 कद्वतीय पीकडता. अकभयोजन साक्षी सं. 08 जगवीर कसंह,
अकभयोजन साक्षी सं. 09 सुभाषचन्ि, अकभयोजन साक्षी सं. 10
सरला िेवी, अकभयोजन साक्षी सं. 11 डॉ० शाहजहों, अकभयोजन
साक्षी सं. 12 एस०आई० सत्यवीर कसंह, अकभयोजन साक्षी सं. 13
लेडीज कॉ० तनु सैनी, अकभयोजन साक्षी सं. 14 कॉ० लोकेन्र कसंह
को परीकक्षत कराया गया।

8. प्रलेखीय साक्ष्य में अकभयोजन की ओर से तहरीर
प्रिशय क01, फिय लेने कब्जा पीकडता. बयान प्रथम पीकडता प्रिशय क
4, बयान कद्वतीय पीकडता प्रिशय कउ, पीकडता प्रथम व कद्वतीय का
कचककत्सीय प्रपन्न प्रिशय क 5 एवं प्रिशय क 6. नक्शा नजरी प्रिशय
क 7. आरोपपत्र प्रिशय क 8. फिय पीकडता कद्वतीय प्रिशय 9, प्रथम
सूचना ररपोटय प्रिशय क 10, जी०डी० प्रिशय क 11 के रूप में प्रस्तुत
ककया गया है।

9. अधभयोजि साक्षी सं. 1 अधमत ने अपनी मुख्य
परीक्षा में कथन ककया कक किनांक 27/09/2017 को वह अपने
घर पर नहीं था। वह घर से बाहर गया हुआ था। लोगों के कििे से
उसिे र्ािा बड़़ौत पर तिरीर दे दी र्ी। तिरीर उसिे लोगों के
कििे से धलिायी र्ी। उसके सामिे कोई घटिा घधटत ििीं
िुयी र्ी। उस समय जो पडोस के लोगों ने बताया था। उसी के
अनुसार तहरीर िे िी थी। तहरीर को गवाह ने प्रिशय क 01 के रूप में
प्रमाकणत ककया है तथा उस पर अपने हस्ताक्षर की पुकि की है। इस
साक्षी को अधभयोजि पक्ष िे पक्षद्रोिी घोधर्त कराया है और
प्रकतपरीक्षा की है कजसमें यह आया है कक यह कहना सही है कक
प्रथम पीकडता उसकी पुत्री है कजसकी उम्र 08 वषय की है। यह कहना
सही है कक इस घटना की तहरीर उसके द्वारा िी गयी थी। आगे
कहता है कक िरोगा जी को उसने कोई बयान नहीं किया था। धारा
161 िं०प्र०सं० में उसने िरोगा जी को कोई बयान नहीं किया था
और यकि िरोगा जी ने पीकडताओं के बलात्कार सम्बन्धी बात कलख
ली हो तो इसका यह कारण नहीं बता सकता। उसने समझौता करने
की बात सुझाने पर इन्कार ककया।

10. अधभयोजि साक्षी सं. 02 धमर्लेश ने अपनी
मुख्य परीक्षा में बयान किया है कक वह पीकडता की िािी लगती है।
इस घटना को उसने नहीं िेखा था। नीरज पुत्र राजकुमार उसकी पोती
पीकडता को उसके सामने नहीं लेकर गया था। पीकडता के साथ कोई
गलत हरकत करते नहीं िेखा। उसने अपने घर पर ही सुना था। नीरज
को कोई घटना काररत करते नहीं िेखा था। उसके सामने ना ही नीरज
को िोनों बकच्चयों के साथ छेडछाड करने के आरोप में पकडा गया,
ना ही पुकलस ने पीकडता को उसकी सुपुियगी में किया था। सुपुियगीनामा
पर उसके हस्ताक्षर हैं जो प्रिशय क 2 है। इस साक्षी को भी
अधभयोजि पक्ष िे पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर जब प्रकतपरीक्षा की
तो इस साक्षी ने भी कहा है कक वह घटना की कतकथ को 4 बजे
बाजार में सामान लेने गयी थी। उसने कोई घटना नहीं िेखी। प्रथम
पीडता ने उसे कोई घटना नहीं बतायी। इस साक्षी ने यह माना है कक
अकमत कुमार ने थाने पर ररपोटय कलखायी थी और यह भी कहा है कक
उसे िो किन बाि पता चला था। इस साक्षी ने पुकलस को धारा 161
िं०प्र०सं० में किये गये बयान से इन्कार ककया है और जब सुझाव
किया गया कक समझौता करने के कारण उसके द्वारा झूठा अकभकथन
ककया जा रहा है तो उसने सुझाव से इन्कार ककया है।

11. अधभयोजि साक्षी सं. -03 बीरधसंि ने अपनी
मुख्य परीक्षा में बयान किये हैं कक किनांक 27/09/2017 को वह
अपने घर पर था। शाम के लगभग चार बज रहे थे। वह अपने घर से
कहीं नहीं गया था। पीकडता कद्वतीय व पीकडता प्रथम उसकी पोती
लगती है। पीकडता प्रथम पडोसी की लडकी है। उसने कोई घटना नहीं
िेखी। उसने नीरज हाकजर अिालत अकभयुक्त को लडकी के साथ
कोई हरकत करते हुये नहीं िेखा। उसका घर नीरज के घर से 1/2
कक०मी० िूर है। इस साक्षी को भी अधभयोजि पक्ष िे पक्षद्रोिी
घोधर्त कराकर जब प्रकतपरीक्षा की गयी तो इस साक्षी ने यह कहा है
कक उसे लोगों ने बताया था कक नीरज ने पीकडता प्रथम व पीकडता
कद्वतीय के साथ अश्लील हरकत की है।

12. अधभयोजि साक्षी सं. 04 कधपल ने अपनी
मुख्य परीक्षा में बयान किये हैं कक पीकडता की उम्र 5 साल है। वह
मजिूरी (हलवाई) पर गया हुआ था। शाम को उसे अकमत ने बताया
था कक बच्चों के साथ नीरज ने छेडखानी की है। उसने नीरज को
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
241
बच्चों के साथ हरकत करते नहीं िेखा। नीरज के कपता का नाम उसे
नहीं पता। अकमत ने उसकी मम्मी पापा को बताया था लेककन उसे
नहीं बताया था। यह थाने नहीं गया था। यह खाना खाकर सो गया
था। लडकी के साथ उसकी मम्मी थाने गयी थी। उसकी मम्मी ने उसे
कुछ नहीं बताया था न वह घटना स्थल पर था। इस साक्षी को भी
अधभयोजि पक्ष िारा पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर जब प्रकतपरीक्षा की
गयी तो इस साक्षी ने धारा 161 ि०प्र०सं० के बयान से इन्कार
ककया है। इस साक्षी को किनांक 28/11/2019 को पुनिः परीकक्षत
कराया गया तो इस साक्षी ने यह बयान किया कक पीकडता कद्वतीय
उसकी पुत्री है। उसके घर का नाम व स्कूल का नाम अलग अलग
है। यह साक्षी घटना के समय मौके पर नहीं था। उसको शाम को पता
चला था। पीकडता कद्वतीय के साथ घटना घकटत हुई और उसे यह भी
पता चला था कक अकभयुक्त नीरज को लोगों ने पकड कलया था तथा
थाने ले गये थे। पीकडता प्रथम के साथ भी घटना होना सुना था। उसे
ध्यान नहीं कक बच्चे सूसू की जगह ििय बता रहे थे।

13. अधभयोजि साक्षी सं. 05 सुधमत ने अपनी
मुख्य परीक्षा में कथन ककये है कक अकमत पुत्र वीर कसंह उसके पडोस
का रहने वाला है तथा उसका भाई है। उसके भाई अकमत कुमार की
पुत्री आयु 5 साल, िूसरी पीकडता के साथ किनांक
27/09/2017 को नीरज पुत्र राजकुमार ने उसके सामने
पीकडताओं को मुुँह िबाकर खाली प्लाट में ले जाकर अश्लील
हरकत नहीं की थी तथा न ही उसके सामने पीकडताओं के साथ
बलात्कार ककया था। इस साक्षी को भी अधभयोजि पक्ष िारा
पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर जब प्रकतपरीक्षा की गयी तो इस साक्षी ने
भी कहा है कक उसने िरोगा जी को कोई बयान नहीं किया था। इस
साक्षी ने यह स्वीकार ककया है कक पीकडता प्रथम की उम्र बयान के
किन 05 वषय की है तथा पीकडता कद्वतीय की उम्र 04 वषय है।
फैसला की बात इस साक्षी ने भी मना ककया है।

14. अधभयोजि साक्षी सं. 06 पीधड़ता प्रर्म ने
न्यायालय द्वारा बयान िेने की सक्षमता का परीक्षण करने के कलए
कनम्नकलकखत प्रश्न पूंछेिः-

प्रश्न- आपके कपताजी का नाम क्या है ?
उत्तर- वीर कसंह।
प्रश्न- कौन से स्कूल में पढ़ती हो ?
उत्तर- जे०बी० पकब्लक स्कूल।
प्रश्न- सच बोलना चाकहये या झूठ ?
उत्तर- सच।
प्रश्न- सच क्यों बोलना चाकहये ?
उत्तर- जो झूठ बोलता है उसके गले में सॉप होता है।
तत्कालीन पीठासीन कवशेष न्यायाधीश ने पीकडता प्रथम
को शपथ किलाकर अधोकलकखत प्रश्न ककये -
प्रश्न- आपके साथ घटना वाले किन कौन कौन था ?
उत्तर- भूल गये।
प्रश्न- अकभयुक्त क्या करता है ?
उत्तर- अकभयुक्त हमारे घर में पुताई कर रहा था।
प्रश्न- अकभयुक्त ककस ककस को साथ लेकर गया था ?
उत्तर- मुझे और पीकडता कद्वतीय को।
प्रश्न- क्या कहकर लेकर गया था ?
उत्तर- 10 रूपये िेने की कह रहा था।
प्रश्न- उसने आपके व पीकडता कद्वतीय के साथ क्या
ककया था ?
उत्तर- मुझे पता नहीं. पीकडता कद्वतीय का भी पता नहीं।
प्रश्न- कफर उस लडके को पकड कलया था ?
उत्तर- नहीं वह भाग गया था।
प्रश्न- पुकलस कब आयी थी ?
उत्तर- मैं, मेरी मम्मी, पीकडता कद्वतीय और उसकी मम्मी
गये थे, पुकलस के पास।
प्रश्न- पुकलस को क्या बताया था ?
उत्तर- पता नहीं।
प्रश्न- मकहला पुकलस ने कुछ पूुँछा था ?
उत्तर- हॉ जी मैनें बताया था कफर उसके बाि मैं भूल
गयी थी।
प्रश्न- आप रोये थे जब लडके / अकभयुक्त ने छेड़‌छाड
की थी ?
उत्तर- जी हॉ।
प्रश्न- कफर सारी बात ककसको बतायी ?
उत्तर- पीकडता कद्वतीय ने अपनी मम्मी को बतायी, कफर
उसकी मम्मी ने मुझसे पूछा कफर मैनें अपने पापा-मम्मी को बतायी।
प्रश्न- जज मैडम ने आपसे पूछताछ की थी ?
उत्तर- जी हाुँ मैनें बता किया था।
तत्कालीन पीठासीन कवशेष न्यायाधीश ने यह भी
उल्लेख ककया है कक इस साक्षी ने अकभयुक्त को पहचाना और जब
इस साक्षी से यह पूुँछा गया कक अकभयुक्त अच्छा व्यकक्त है या बुरा
तो इस साक्षी ने अकभयुक्त को बुरा व्यकक्त बताया। जब इस साक्षी से
प्रकतपरीक्षा में इस आशय का प्रश्न पूुँछा गया कक कजस व्यकक्त को
पुकलस लेकर आयी थी, उस व्यकक्त ने उसके व पीकडता कद्वतीय के
साथ कोई गलत काम तो नहीं ककया तो इस साक्षी ने न में कसर
कहलाया।
242 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
15. अधभयोजि साक्षी सं. 07 पीधडता धितीय ने
न्यायालय द्वारा उसकी सक्षमता का परीक्षण करने के कलये
कनम्नकलकखत प्रश्न पूुँछे-

प्रश्न- आप कौन सी कक्षा में पढ़ते हो ?
उत्तर- यू० के०जी०।
प्रश्न- कौन से स्कूल में पढ़ते हो ?
उत्तर- जे०बी० पकब्लक स्कूल।
प्रश्न- सच बोलना चाकहये कक झूठ ?
उत्तर- सच।
प्रश्न- झूठ बोलने से क्या होता है ?
उत्तर- कपटाई।
इस साक्षी को सक्षम पाते हुये पूवय पीठासीन अकधकारी ने
शपथ पर कनम्नकलकखत बयान कलया
प्रश्न- क्या हुआ था ?
उत्तर- उस किन रात को हम थाने गये थे। उस लोन्डे
(लडके) को पकड कलया था, पूछा था बुला कलया था। मुझसे जो
पुकलस ने पूछा था, बता किया था।
प्रश्न- उस लडके ने कुछ ककया था ?
उत्तर- नहीं।
प्रश्न- यह लडका (लौन्डा) कहीं लेकर गया था ?
उत्तर- पीकडता प्रथम के घर में लेकर गया था। मुझे उन
लोगों का नाम नहीं पता।
प्रश्न- वह घर में ककस ककस को लेकर गया था ?
उत्तर- एक अन्य नाबाकलग लडकी, पीकडता प्रथम और
मुझे ।

प्रश्न- क्या कहकर लेकर गया था लौन्डा (लडका)?
उत्तर- साईककल ठीक कर रहा था यह पीकडता प्रथम
वगैरह के पुताई कर रहा था।
प्रश्न- कफर आपके साथ क्या ककया ?
उत्तर- कई साल की बात हो गयी याि नहीं।
प्रश्न- उसने आपके साथ कोई गलत हरकत की थी ?
उत्तर- नहीं. मुझे पता नहीं क्यो पकडा उसे। मेरे एक जज
मैडम ने बयान कलये थे। अकभयुक्त को किखाने पर अकभयुक्त की
कशनाख्त की गयी।

16. अधभयोजि साक्षी- 08 जगिीर धसंि ने
अपनी मुख्य परीक्षा में बयान किया है कक किनांक 27/09/2017
को चार बजे उसके पडोस की लडकी पीकडता प्रथम, पीकडता कद्वतीय
(पोती) जो उसकी सगी है, गली में खेल रही थी। उसके सामने नीरज
पुत्र राजकुमार जो आजािनगर बडौत का रहने वाला है उसके सामने
पीकडता प्रथम व पीकडता कद्वतीय के साथ कोई अश्लील हरकत नहीं
की थी और न ही नीरज, पीकडता प्रथम को मुुँह िबाकर नजिीक के
जगल में ले जाकर उसके सामने बलात्कार नहीं ककया था। इस साक्षी
को भी अधभयोजि पक्ष िारा पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर जब
प्रकतपरीक्षा की गयी तो इस साक्षी ने धारा 161 िं०प्र०सं० के बयान
से इन्कार ककया और समझौते की बात से भी इन्कार ककया।

17. अधभयोजि साक्षी- 09 सुभार्चन्द ने अपनी
मुख्य परीक्षा में बयान किये हैं कक किनांक 27/09/2017 को वह
अपनी ससुराल गाुँव कततरौिा गया हुआ था। यह वहाुँ से
28/09/2017 को वापस आया था। उसने कोई घटना नहीं िेखी।
पीकडता प्रथम व पीकडता कद्वतीय के साथ अकभयुक्त नीरज ने क्या
ककया या नहीं ककया उसे जानकारी नहीं है, न ही उसने कुछ िेखा है।
इस साक्षी को भी अधभयोजि पक्ष िारा पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर
जब प्रकतपरीक्षा की गयी तो धारा 161 िं.प्र.सं. के बयान से इस
साक्षी ने इन्कार ककया और उस साक्षी ने भी समझौते की बात से
इन्कार ककया है।

18. अधभयोजि साक्षी सं. 10 सरला ने अपनी
मुख्य परीक्षा में बयान किये हैं कक किनांक 17/09/2017 को शाम
के समय वह अपने घर पर नहीं थी। पीकडता प्रथम व पीकडता कद्वतीय
के साथ क्या घटना घकटत हुई उसने नहीं िेखी थी। हाकजर अिालत
अकभयुक्त नीरज ने पीकडता प्रथम व पीकडता कद्वतीय से क्या हरकत
की, उसे जानकारी नहीं है। इस साक्षी को भी अधभयोजि पक्ष िारा
पक्षद्रोिी घोधर्त कराकर जब प्रकतपरीक्षा की गयी तो इस साक्षी ने
धारा 161 िं०प्र०सं० के बयान से इन्कार ककया है परन्तु इस तथ्य
को सही बताया है कक जब वह घर आयी तो पता चला कक पीकडता
प्रथम व कद्वतीय के साथ नीरज ने कोई बितमीजी की थी। नीरज
उसकी कॉलोनी का रहने वाला है।

19. अधभयोजि साक्षी सं. 11 डॉ० शािजिाुँ ने
अपनी मुख्य परीक्षा में बयान किया है कक किनांक 27/09/2017
को वह बतौर मेकडकल अफसर पी०एच०सी० बावली पर तैनात थी।
पीकडता कद्वतीय के बाह्य परीक्षण करने पर शरीर पर चोट के कनशान
नहीं थे। पीकडता कद्वतीय के आन्तररक परीक्षण में सूजन (हाईमन) थी
तथा उसके द्वारा स्लाईड तथा जॉच हेतु खून का सैम्पल कलया गया
था। एक्सरे हेतु कलखा गया था। पीकडता प्रथम के बाह्य जाुँच में शरीर
पर कोई चोट नहीं पायी गयी थी। लेककन आन्तररक जाुँच करने पर
हायमन पर थोडी सी सूजन पायी गयी थी तथा खून की जाुँच हेतु
एक्सरे ररपोटय तथा एक स्लाईड तैयार कर भेजी गयी थी। कचककत्सक
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
243
की राय में हायमन पर सूजन हायमन पर ककसी हाडय चीज से छेडछाड
करने पर आना सम्भव है। मेकडकल ररपोटय को गवाह ने प्रिशय के 6
एवं प्रिशय क 5 के रूप में साकबत ककया है।

20. अधभयोजि साक्षी सं. 12 एस.आई. सतिीर
धसंि ने अपनी मुख्य परीक्षा में बयान किया है कक किनांक
27/09/2017 को वह बतौर उपकनरीक्षक बडौत में तैनात था।
गवाह ने स्वयं द्वारा कृत कववेचना के तथ्यों का उल्लेख करते हुये
घटना स्थल का नक्शा नजरी तैयार करना बताया कजसे प्रिशय क 7
के रूप में साकबत ककया है। गवाह ने बाि कववेचना अकभयुक्त के
कवरूद्ध प्रेकषत आरोपपत्र को प्रिशय क 8 के रूप में साकबत ककया है।

21. अधभयोजि साक्षी सं. 13 लेडीज
कॉस्टेधबल तिु सैिी ने अपनी मुख्य परीक्षा में बयान किया है कक
किनांक 28/09/2017 को वह थाना बडौत पर बतौर लेडीज
कॉस्टेकबल तैनात थी। वह एस आई सतवीर कसंह के साथ मो०
आजािनगर में गयी थी। गली नम्बर 14 में खाली प्लाट से
पीकडता की िािी महेन्री ने पीकडता कद्वतीय की आसमानी रंग की
कच्छी बरामि करायी थी कजसे िरोगा जी द्वारा मौके पर सील सवय
मोहर ककया गया तथा फिय तैयार की गयी। फिय पर उसके भी
हस्ताक्षर है। गवाह ने सम्बकन्धत फिय को प्रिशय क 9 के रूप में
पुि ककया है।

22. अधभयोजि साक्षी सं. 14 कॉ० लोकेन्द्र
धसंि ने अपनी मुख्य परीक्षा में कथन ककये है कक किनांक
27/09/2017 को वह थाना बडौत पर बतौर कॉ० तैनात था।
उस किन अकमत कुमार पुत्र वीर कसंह की तहरीर के आधार पर इस
मामलें में मुकिमा पंजीकृत ककया कजसकी कचक कम्प्यूटर आपरेटर
से बोल बोलकर ककता करायी तथा इसका खुलासा जी०डी० में
ककया। गवाह ने कचक एफ०आई०आर० को प्रिशय के 10 एवं
जी०डी० को प्रिशय क 11 के रूप में साकबत ककया है।

23. साक्ष्य समाकप्त के पश्चात अकभयुक्त का बयान
अन्तगयत धारा 313 िं०प्र०सं० अंककत ककया गया। अकभयुक्त ने
अकभयोजन कथानक को गलत बताया तथा मुकिमा रंकजशन
चलना कहा। यह भी कहा कक उसे झूठा फसाया गया है। वह
कनिोष है। वह गरीब व मन्ि बुकद्ध है। सफाई साक्ष्य पेश करने से
इन्कार ककया है। अकभयुक्त का अकतररक्त बयान धारा 313
िं०प्र०सं० अंककत ककया गया कजसमें अकभयुक्त ने यह कहा है कक
उसे लोगों ने पकड कलया था। उससे एक बार गलती हो गयी है।
अब नहीं होगी। उसका मेन्टल इलाज चल रहा है, उसे चक्कर
आता है।
24. सत्र न्यायाधीश ने मामले में उभयपक्ष के कवद्वान
अकधवक्ताओं के तकों को सुनने तथा किये गये तथ्यों एवं साक्ष्यों के
आधार पर यह अकभमत व्यक्त ककया है ककिः- उपरोक्त अकभयोजन
पररसाक्ष्यों की समीक्षा से स्पि है कक अकभयोजन पक्ष द्वारा परीकक्षत
कराये गये तथ्य के साक्षीगण िमशिः अकभयोजन साक्षी सं. 01
अकमत अकभयोजन साक्षी सं. 02 कमथलेश, अकभयोजन साक्षी सं.
03 बीरकसंह, अकभयोजन साक्षी सं. 04 ककपल, अकभयोजन साक्षी
सं. 05 सुकमत, अकभयोजन साक्षी सं.08 जगवीर, अकभयोजन
साक्षी सं. 09 सुभाषचंि, अकभयोजन साक्षी सं. 10 सरला यद्यकप
कक अकभयोजन पक्ष का मुख्य परीक्षा में समथयन नहीं ककया हैं और वे
पक्षरोही हो गये हैं तथाकप प्रकतपरीक्षा में इस आशय का साक्ष्य
अकभयोजन साक्षी सं. 01 अकमत कुमार ने किया है कक घटना की
तहरीर उसने िी थी। साक्षी अकभयोजन साक्षी सं. 02 कमथलेश ने
यह माना है कक उसे पता चला था कक अकमत ने ररपोटय कलखायी थी।
साक्षी पी०डब्लू 03 बीर कसंह ने भी प्रकतपरीक्षा में यह माना है कक
उसे लोगों ने बताया था कक नीरज ने पीकडता प्रथम व पीकडता कद्वतीय
के साथ अश्लील हरकत की है। अकभयोजन साक्षी सं. 04 ककपल के
प्रकतपरीक्षा में यह आया है कक उसे शाम को पता चला कक
पीकडताओं के साथ घटना हुई थी और नीरज को लोग पकडकर थाने
ले गये थे। अकभयोजन साक्षी सं. 05 सुकमत के बयान में यह आया
है कक पीकडताओं की उम्र 12 वषय से कम है। अकभयोजन साक्षी सं.
10 सरला िेवी के भी बयान में यह आया है कक जब वह घर आयी
तो उसे पता चला कक नीरज ने पीकडताओं के साथ बितमीजी की है।

25. इसप्रकार यह स्पि है कक पक्षरोही हो जाने के
पश्चात भी घटना घकटत हो जाने की जानकारी व ररपोटय कलखाना
पक्षरोही साकक्षयों ने भी माना है। ऐसी कस्थकत में जैसा कक स्थाकपत
कवकध है कक पक्षरोही साक्षी के सम्पूणय बयान को िरककनार नहीं
ककया जा सकता और कजतना वह घटना को समकथयत कर रहा है उसे
अन्य साक्ष्यों के मद्देनजर कवश्वास में कलया जा सकता है। माननीय
सवोच्च न्यायालय द्वारा Raja and others Vs. State
of Karnataka (2016) 10 SCC 506 में जो कवकध
व्यवस्था प्रकतपाकित की है, उसका संगत प्रस्तर कनम्नवत उद्धृत है:-

"32. That the evidence of a
hostile witness in all eventualities
ought not stand effaced altogether
and that the same can be accepted
to the extent found dependable on a
careful scrutiny was reiterated by
this Court in Himanshu @ Chintu
(supra) by drawing sustenance of
244 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
the proposition amongst others
from Khujii vs. State of M.P.
(1991) 3 SCC 627 and Koli
Lakhman Bhai Chanabhai vs. State
of Gujarat (1999) B SCC 624.It
was enounced that the evidence of
a
hosule
witness
remains
admissible and is open for a Court
to rely on the dependable part
thereof as found acceptable and
duly corroborated by other reliable
evidence available on record"

26. इसप्रकार यह स्पि है कक प्रस्तुत प्रकरण में यद्यकप
कक अकभयोजन िमशिः अकभयोजन साक्षी सं. 01अकमत,
अकभयोजन साक्षी सं. 02 कमथलेश, अकभयोजन साक्षी सं. 03
बीरकसंह, अकभयोजन साक्षी सं. 04 ककपल, अकभयोजन साक्षी सं.
05 सुकमत, अकभयोजन साक्षी सं. 08 जगवीर, अकभयोजन साक्षी
सं. 09 सुभाषचंि, अकभयोजन साक्षी सं. 10 सरला, पक्षरोही हो
चुके है परन्तु अकभयुक्त द्वारा घटना घकटत करने सम्बन्धी बात सुने
जाने तथा ररपोटय कलखाये जाने के तथ्यों के सम्बन्ध में उन्होनें भी
अपना बयान किया है। जहाुँ तक अन्य अकभयोजन साकक्षयों के बयानों
में ककतपय अन्तकवयरोधों का प्रश्न है। इसके सम्बन्ध में इस न्यायालय
का मत है कक अकभयोजन साक्ष्य में आये ककतपय स्वाभाकवक
अन्तकवयरोधों का लाभ अकभयुक्त को नहीं प्राप्त हो सकता क्योंकक
अकभयोजन साकक्षयों के बयान में स्वाभाकवक अन्तकवयरोध जो नगडय
प्रकृकत का है वह आना अत्यन्त स्वाभाकवक है। माननीय सवोच्च
न्यायालय ने गंगा भिािी बिाम रामपधत िेकटरेडी ि अन्य,
धिधमिल अपील 86/11 तथा किकमनल अपील 84/11 को
किनांक 04-09-2013 को कनणीत करते हुये कनणय के प्रस्तर 9
में इस आशय की कवकध व्यवस्था िी है कक साकक्षयों के बयान में
सामान्य ककस्म के अन्तकवयरोध आना स्वाभाकवक है। जब तक कक वे
अन्तकवयरोध इतना सारवान न हो जो कक अकभयोजन साक्ष्य के कवरूद्ध
कवपरीत प्रभाव डालता हो, उनको कवश्वास में लेकर महत्वपूणय साक्ष्यों
को िरककनार नहीं ककया जा सकता है। माननीय सवोच्च न्यायालय
की उक्त कवकध व्यवस्था के प्रस्तर 9 को शब्िशिः उद्धृत ककया जाना
समीचीन होगा-

"9. In State of U.P. v.
Naresh, (2011) 4 SCC 324, this
Court
afterconsidering
a
large
number of its earlier judgments
held: "In all criminal cases, normal
discrepancies are bound to occur in
the depositions of witnesses due to
normal
errors
of
observation,
namely, errors of memory due to
lapse of time or due to mental
disposition such as shock and
horror at the time of occurrence.
Where the omissions amount to a
contradiction, creating a serious
doubt about the truthfulness of the
witness and other witnesses also
make material improvement while
deposing
in
the
court,
such
evidence cannot be safe to rely
upon.
However,
minor
contradictions,
inconsistencies,
embellishments or improvements
on trivial matters which do not
affect the core of the prosecution
case, should not be made a ground
on which the evidence can be
rejected in its entirety. The court
has to form its opinion about the
credibility of the witness and
record a finding as to whether his
deposition
inspires
confidence.
Exaggerations per se do not render
the evidence brittle. But it can be
one of the factors to test credibility
of the prosecution version, when
the entire evidence is put in a
crucible for being tested on the
touchstone of credibility.
Therefore, mere marginal
variations in the statements of a
witness cannot be dubbed as
improvements as the same may be
elaborations of the statement made
by
the
witness
earlier.
The
omissions
which
amount
to
contradictions
in
material
particulars i.e. go to the root of the
case/materially affect the trial or
core of the prosecution's case,
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
245
render the testimony of the witness
liable to be discredited." A similar
view has been re-iterated by this
Court in Tehsildar Singh & Anr. v.
State of U.P., AIR 1959 SC 1012;
Pudhu Raja & Anr. v. State, Rep.
by Inspector of Police, JT 2012 (9)
SC 252; and Lal Bahadur v State
(NCT of Delhi), (2013) 4 SCC
557).

27. पीकडता प्रथम के साक्ष्य में यह स्पि आया है
कक अकभयुक्त द्वारा उसे 10 रूपया िेने की लालच के कारण ले
जाया गया। पीकडता प्रथम ने यह भी कहा है कक उसने पहले भी
जज मैडम को बयान किया था। पीकडता प्रथम द्वारा धारा 164
िं०प्र०सं० का जो बयान किया गया है उसमे कनम्नवत अकभकथन
ककया गया है " मैं खेल रही थी। एक अंकल आये उनका नाम
नहीं जानती ह ुँ। िेखकर पहचान जाऊुँगी। अंकल ने कहा कक घेर में
चलो। पैिल लेकर घेर में गया। मेरी कच्छी कनकालकर सुसु
कनकाल रहा था। मेरा होंठ भींच कलया। उसने अपनी भी कच्छी
उतार रखी थी। तभी कोई आ गया तो उसने अपनी कच्छी पहन
ली। उसने पीकडता के भाई को बहकाने के कलये िो रू० किये थे।
वह रोने लगी थी और भागकर कछप गयी थी। तब वो चली गयी।
एक लडका उसे बचाने आया तो उसे भी मारा।"

28. पीकडता कद्वतीय ने न्यायालय के समक्ष किये गये
बयान में रात को थाने पर ले जाने की बात मानी है और उस
लडके को पकडे जाने की बात कही है और यह भी कहा है कक
उससे जो पुकलस ने पूुँछा उसने बयान िे किया था। उसने यह भी
कहा है कक वह लडका उन्हें पीकडता प्रथम के घेर में ले गया था।
इस साक्षी ने यह भी सम्पोकषत ककया कक अकभयुक्त पीकडता प्रथम
व उसे तथा एक िूसरे नाबाकलग लडके को ले गया था। इस साक्षी
ने यह भी कहा है कक अकभयुक्त पुताई का काम कर रहा था। कई
साल हो जाने के कारण वह कहती है कक उसे याि नहीं है कक
उसके साथ क्या हुआ। परन्तु यह साक्षी एक जज मैडम द्वारा धारा
164 िं०प्र०सं० के बयान को िेने की बात मानती है। धारा
164 िं०प्र०सं० का बयान पीकडता कद्वतीय ने प्रिशय क 03 के
रूप में कनम्नवत किया है। उसने कहा है कक " मेरा नाम पीकडता
कद्वतीय है। एक अंकल पहले पीकडता प्रथम को लेकर उसके प्लाट
में गया था। मैं भी वहाुँ पहुुँच गयी थी। उसने मेरी कच्छी ने अपना
सुसु करने वाला िेने लगा था। मेरे सुसु करने वाले में अपना सुसु
करने वाला डाल रहा था। उसके बाि चला गया। पीकडता प्रथम के
भी होंठ भींच कलये थे। "
29. धारा 164 ि०प्र०सं० के अन्तगयत पीकडताओं के
बयानों के साथ जब न्यायालय में किये गये उनके बयानों की समीक्षा
करते हैं तो यह साकबत होता है कक घटना के किन और समय पर
अकभयुक्त नीरज उक्त पीकडताओं को बहला फुसलाकर घेर में ले गया
जहाुँ उसने पीकडताओं के साथ बलात्संग ककया। पीकडताओं के
साक्ष्यों की पुकि डॉक्टर शाहजहाुँ लेडी मेकडकल ऑकफसर के बयानों
से भी होती है जो उन्होनें अकभयोजन साक्षी अकभयोजन साक्षी सं.
11 के रूप में न्यायालय में किये हैं। इस साक्षी ने यद्यधप धक
पीधड़ताओं के शरीर पर कोई बाह्य चोटों का िोिा ििीं पाया
तर्ाधप दोिों पीधड़ताओं के िायमि में लाधलमा ि सूजि पाया।
इस साक्षी के प्रधतपरीक्षा के बयाि के धजस अंश में यि आया
िै धक पीधड़ताओं को धगरिे से चोट आ सकती िै ऐसा कोई
साक्ष्य अधभयुक्त िारा प्रस्तुत ििीं धकया गया िै और न ही ककसी
अकभयोजन साक्षी जो कक पक्षरोही हो गये हैं, उन्होंने भी अपने
बयानों में यह कहा है कक पीकडताओं को कगरने से चोटें आयीं हो।

30. अकभयुक्त कजसे घटना काररत करते समय ही मौके
से पकडा गया था और इस सम्बन्ध में प्रिशय क11 जी०डी० की
नकल जो कॉ० लोकेन्र कुमार अकभयोजन साक्षी सं. 14 द्वारा
साकबत ककया गया है, कक उसे घटना स्थल से कगरफ़्‌तार ककया गया
था और कहरासत में कलया गया, उसी अकभयुक्त नीरज द्वारा जैसा कक
पीकडताओं ने साकबत ककया है कक उनके साथ बलात्संग ककया गया,
आरोकपत आरोप काररत ककया गया।

31. दत्तुराि सजारे बिाम स्टेट आफ मिाराष्ट्र
(1997) 5. एस०सी०सी० 341 में माननीय सवोच्च न्यायालय
द्वारा इस आशय की कवकध व्यवस्था प्रकतपाकित की गयी है कक- "A
child witness if found competent to depose
to the facts and reliable one such evidence
could be the basis of conviction. In other
words even in the absence of oath the
evidence of a child witness can be
considered under Section 118 of the
Evidence Act provided that such witness is
able to understand the questions and able to
give rational answers thereof. The evidence
of a child witness and credibility thereof
would depend upon the circumstances of
each case. The only precaution which the
court should bear in mind while assessing
the evidence of a child witness is that the
witness must be a reliable one and his/her
demeanour
must
be
like
any other
246 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
competent
witness
and
there
is
no
likelihood of being tutored."

32. मोतीलाल बिाम स्टेट आफ मध्य प्रदेश
(2008) 11. एस०सी०सी० 20 में माननीय सवोच्च न्यायालय
द्वारा इस आशय की कवकध व्यवस्था िी गयी है कक यह एक स्थाकपत
कवकध है कक लैंकगक हमले को पीकडता सह अपराधी के रूप में नहीं
ली जानी चाकहये। ऐसी कस्थकत में उसके साक्ष्य की सम्पुकि की
आवश्यकता नहीं होती है।

33. स्टेट आफ धिमांचल प्रदेश बिाम संजय
कुमार (2017) 2, एस०सी०सी० 51 के प्रस्तर 31 में इस
आशय की कवकध व्यवस्था प्रकतपाकित की गयी है कक बलात्कार की
पीकडता का साक्ष्य ऐसे मामले में अत्यन्त ही महत्वपूणय होता है और
जब तक कक कोई ऐसा कवश्वास कर िेने वाला कारण नहीं हो कजसके
द्वारा बलात्कार पीकडता के अकभकथन की सम्पुकि की आवश्यकता
पडती हो तो न्यायालयों को ऐसे पररसाक्ष्य पर कवश्वास करते हुये यकि
वह साक्ष्य कवश्वसनीय है तो िोषकसकद्ध आधाररत करनी चाकहये।

34. इसी प्रकार धिजय बिाम स्टेट आफ मध्य
प्रदेश (2010) 8, एस.सी.सी. 191 में इस आशय की कवकध
व्यवस्था प्रकतपाकित की गयी है कक अकभयोक्त्री का अकभकथन यकि
कवश्वसनीय है तो उस आधार पर कबना संपोषक साक्ष्य के अकभयुक्त
को िोषकसद्ध ककया जा सकता है।

35. माननीय किल्ली उच्च न्यायालय ने लोकेश
बिाम स्टेट, धिधमिल अपील 487/ 2016 धिर्णय धदिांधकत
07 जूि 2019 में इस मामले के समान ही तथ्य वाले एक मामले
में जहाुँ पर 04 साल की बाकलका का बलात्कार हुआ था उसके
साक्ष्य पर आधाररत िोषकसकद्ध के कनणय की पुकि करते हुये इस
आशय की कवकध व्यवस्था िी है कक लैकगक अपराध करने वाले
अपराधी जो भोले भाले बच्चों के कलये मनोसामाकजक कवकृत व्यकक्त
होते हैं. उनके ऊपर कोई उिारता नहीं बरती जानी चाकहये। उपरोक्त
कवकध व्यवस्थाये प्रस्तुत प्रकरण में पूणयतिः लागू होती है।

36. इस न्यायालय की राय में अकभयोजन पक्ष
युकक्तयुक्त संिेह से परे यह साकबत करने में सफल रहा है कक किनांक
27/09/2017 को समय करीब 04 बजे स्थान मौहल्ला
आजािनगर खाली प्लाट, थाना बडीत, कजला बागपत में अकभयुक्त
नीरज द्वारा पीकडता प्रथम उम्र 05 साल व पीकडता कद्वतीय उम्र 04
साल के साथ बलात्कार एवं गुरुतर प्रवेशन लैंकगक हमला काररत
ककया गया।
37. स्टेट आफ उड़ीसा बिाम ठकारा बेसरा
(2002) 9 एस०सी०सी० 86 में इस आशय की कवकध व्यवस्था
प्रकतपाकित की गयी कक बलात्कार पीकडता पर केवल शारीररक
आिमण नहीं होता है बकल्क यह पीकडता के सम्पूणय व्यकक्त्तत्व को
नि कर िेता है। बलात्कारी पीकडता की आत्मा को भी झकझोर िेता
है।

38. उपरोक्त सम्पूणय कववेचना के पश्चात कवचारण
न्यायालय का मत है कक पत्रावली पर उपलब्ध सम्पूणय मौकखक व
प्रलेखीय साक्ष्य के कवश्लेषण से यह युकक्त्तयुक्त संिेह से परे साकबत
होता है कक किनांक 27/09/2017 को समय करीब 04 बजे
स्थान मौहल्ला आजािनगर खाली प्लाट, थाना बडौत, कजला
बागपत में अकभयुक्त नीरज द्वारा पीकडता प्रथम उम्र 05 साल पीकडता
कद्वतीय उम्र 04 साल के साथ बलात्कार एवं गुरूतर प्रवेशन लैंकगक
हमला काररत ककया गया जो धारा 376 भा०िं०सं० के अंतगयत
िडडनीय अपराध है एवम् धारा 5 (m) लैंकगक अपराधों से बालकों
का संरक्षण अकधकनयम 2012 के अन्तगयत गुरूतर प्रवेशन लैंकगक
हमला की श्रेणी में आता है।

39. तद्नुसार कवचारण न्यायालय द्वारा अकभयुक्त नीरज
को एस०टी० पॉक्सो नम्बर 84/2017, मु०अ०स० 1030/17.
अन्तगयत अन्तगयत धारा 376 भा०िं० सं० तथा धारा 6 लैकगक
अपराधों से बालकों का संरक्षण अकधकनयम, थाना बडौत, कजला
बागपत के अपराध में िोषकसद्ध ककया गया तथा चूंकक धारा 376
भा.ि.सं. के अंतगयत िडड का प्रावधान कठोर है तथा धारा 6 लैंकगक
अपराधों से बालकों का संरक्षण अकधकनयम में उसी अपराध के कलए
िडड गुरुतर है इसकलए अकभयुक्त नीरज को उपरोक्त िोनों धाराओं में
िोषकसद्ध पाते हुए धारा 6 लैकगक अपराधों से बालकों का संरक्षण
अकधकनयम के अंतगयत आजीवन कारावास एवं 1 लाख रुपया
अथयिडड से िकडडत ककया गया है तथा उन्होंने धारा 376 भा.िं.कव.
के अंतगयत प्रथक से िडडािेश सुनाए जाने की आवश्यकता नहीं
समझी।

40. िमिे अपीलार्ी के धििाि अधििक्ता दीपक
क़ौधशक एिं धििाि अपर शासकीय अधििक्तागर् को सुिा
तर्ा पत्रािली का पररशीलि धकया।

41. अपीलाथी के कवद्वान अकधवक्ता ने तकय प्रस्तुत
ककया कक अकभयुक्त/अपीलाथी को रंकजशन इस मामले में असत्य व
कपोल-ककल्पत तथ्यों के आधार पर झूठा फंसाया गया है उनका यह
भी कहना है कक अवर न्यायालय में सत्र परीक्षण के िौरान
11 All. Neeraj Vs. State of U.P.
247
अकभयोजन साक्षीगण िमशिः अकभयोजन साक्षी सं. 01 अकमत,
अकभयोजन साक्षी सं. 02 कमथलेश, अकभयोजन साक्षी सं.03
बीरकसंह, अकभयोजन साक्षी सं.04 ककपल, अकभयोजन साक्षी
सं.05 सुकमत, अकभयोजन साक्षी सं. 08 जगवीर, अकभयोजन
साक्षी सं. 09 सुभाषचंि, अकभयोजन साक्षी सं. 10 सरला के
पक्षरोही हो जाने का कोई कवपरीत प्रभाव अकभयोजन के कवरूद्ध नहीं
पडता है क्योंकक पक्षरोही साकक्षयों ने भी अपने साक्ष्य में तथाककथत
घटनास्थल पर घटना के घकटत होने की बात मानी है परन्तु घटना
स्थल पर स्वयं को उपकस्थत न होने सम्बन्धी अकभकथन करते हुये
अकभयोजन के कवरूद्ध अकभकथन ककया है। इसप्रकार
अकभयुक्त/अपीलाथी कनिोष है इसके बावजूि भी कवचारण न्यायालय
द्वारा अकभयुक्त/अपीलाथी को उपरोक्त धाराओं में िोषकसद्ध करते हुए
आजीवन कारावास की सजा एवं अथयिडड से िकडडत ककया है
इसकलए कवचारण न्यायालय द्वारा पाररत उपरोक्त प्रश्नगत कनणय
अपास्त ककये जाने योग्य है।

42. कवद्वान अपर शासकीय अकधवक्ता द्वारा अकभयुक्त
के कवद्वान अकधवक्ता के तकों पर आपकत्त करते हुए कथन ककया गया
कक अकभयुक्त द्वारा लगभग पीकडता प्रथम उम्र 05 साल व पीकडता
कद्वतीय उम्र 04 साल मासूम पीकडताओं के साथ जबरिस्ती िुराचार
ककया गया, कजसके कारण अबोध/अवस्यक लडककयों को अपने
जीवन में िुव्ययवहार से अवसाि, बाध्यकारी कवकार, कम
आत्मसम्मान और मानकसक पक्षाघात का सामना करना पडता है
और समाज में मकहलाओं की पहुुँच को सीकमत करता है।
अकभयुक्त/अपीलाथी द्वारा एक जघन्य अपराध "पीधड़ताओं
िमशः 5 एिं 4 िर्ण" के साथ ककया गया है, अकभयुक्त द्वारा
काररत अपराध एक जघन्य एवं घृकणत ककस्म का अपराध है," यकि
इस तरह के अपराधी को वतयमान मे समाज में खुला छोडा जाना
न्यायकहत में व समाज के वतयमान पररवेश में उकचत नहीं होगा ताकक
इस उम्र के अबोध बालकों को अपना बचपन स्वछन्ि रूप से जी
सके।" इस प्रकार कवद्वान अपर शासकीय अकधवक्ता ने सत्र न्यायालय
के कनणय का समथयन ककया है, कजसके तहत एक अकभयुक्त को िोषी
ठहराया गया है और उपरोक्तानुसार सजा सुनायी गयी है। उन्होंने
अपने तकय के समथयन में न्यायालय का ध्यान कनम्नकलकखत नजीरों की
ओर आकृि ककयािः-

1) T.K. Gopal V/S State of
Karnataka 2000 (6) SCC 168
(2) Bhaggi Alias Bhagirath Alias
Naran V/S State of Madhya Pradesh
(2024) 5 SCC 782

43. िमिे उभय पक्ष के धििाि अधििक्ताओं के
तकों को सुिा तर्ा धिचारर् न्यायालय के मूल अधभलेि
सधित पत्रािली पर रिी गयी सामग्री का सम्यक रूप से
पररशीलि धकया एिं उि पर गिितापूिणक धिचार धकया।

44. प्रस्तुत मामले में घटना किनांक 04.10.2017
को सुबह के लगभग 04 बजे की बतायी गयी है कजसमें अकभयुक्त
द्वारा लगभग 5 एिं 4 िर्ण वषीय पीकडताओं के साथ बलात्कार
करना कहा गया, डाक्टर एवं पुकलस अकधकाररयों द्वारा समस्त प्रिशों
को साकबत ककया गया।

45. कववेचक द्वारा प्रथम सूचना ररपोटय िजय होने के
पश्चात समुकचत कववेचना की गयी तथा मौके पर जाकर घटना स्थल
का नक्शा नजरी आकि तैयार कर अकभयुक्त के कवरुद्ध आरोप पत्र
प्रेकषत ककया गया तथा उन्होंने नक्शा नजरी प्रिशय क-7 एवं 8 को
साकबत ककया है ।

46. इस प्रकार िस्तावेजीय व मौकखक साक्ष्यों से स्पि
है कक घटना किनांक 27.09.2017 को लगभग 04 बजे की
बतायी गयी है कजसमें अकभयुक्त द्वारा लगभग 5 एवं 4 वषय वषीय
पीकडताओं के साथ कनकश्चत रूप से बलात्कार ककया गया था। यह
तथ्य मेकडकल साक्ष्य व अन्य िस्तावेजीय साक्ष्यों से भी युकक्त-युक्त
संिेह से परे प्रमाकणत है।

47. पीकडता के साथ उक्त बलात्कार की घटना
अकभयुक्त नीरज के द्वारा ही काररत की गयी है यह सभी अकभयोजन
साकक्षयों द्वारा किये गये बयान से साकबत है।

48. अकभयोजन पक्ष के अनुसार तथा ककथत घटना
किनांक 27.09.2017 को लगभग 04 बजे घकटत हुई, वािी की
पुत्री के साथ अकभयुक्त द्वारा िुराचार ककया गया, कजसकी पुकि
कचककत्सीय परीक्षण ररपोटय व अन्य साक्ष्यों के होती है। कवचारण
न्यायालय के अकभलेख एवं इस न्यायालय की पत्रावली पर उपलब्ध
साक्ष्यों तथा सत्र न्यायाधीश के कनणय के पररशीलन से तथा उन पर
सम्यक रूप से कवचार करने के उपरान्त इस न्यायालय का अकभमत है
कक तथाककथत घटना को मौकखक एवं िस्तावेजी सबूतों की सहायता
से अकभयोजन पक्ष द्वारा साकबत ककया गया है, कजसका उल्लेख
उपयुयक्त ककया गया है तथा साकबत ककये गये साक्ष्यों के आधार पर
सत्र न्यायाधीश द्वारा अकभयुक्त/अपीलाथी को उपरोक्तानुसार िोषकसद्ध
ककया गया है, कजसमें उनके उक्त कनणय में कोई त्रुकट पररलकक्षत नहीं
होती है।
248 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
49. इस स्तर पर कवचारण न्यायालय द्वारा अकभयुक्त
को किये गये िडडािेश पर पुनकवयचार ककये जाने हेतु भारतीय िडड
कवधान की धारा 376 (1) & (2) पर कवचार ककया जाना
समीचीन प्रतीत होता है, जोकक कनम्नवत हैिः-

"[376. Punishment for rape- (1)
Whoever, except in the cases provided for
in sub-section (2), commits rape, shall be
punished with rigorous imprisonment of
either description for a term which shall not
be less than ten years, but which may
extend to imprisonment for life, and shall
also be liable to fine."

50. कवचारण न्यायालय द्वारा अकभयुक्त को किये गये
िडडािेश पर पुनकवयचार ककये जाने हेतु मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा
GURMUKH SINGH Vs. STATE OF
HARYANA (2009) 15 Supreme Court
Cases 635 एवं RAJ BALA Vs. STATE OF
HARYANA AND OTHERS (2016) 1
Supreme Court Cases 463 में प्रकतपाकित कवकधव्यवस्था एवं उच्च न्यायालय इलाहाबाि द्वारा CRIMINAL
APPEAL No. 2878 of 2013 (Babu Vs. State
of U.P.) तथा CRIMINAL APPEAL No. 4378
of 2019 (Shyamveer Vs. State of U.P. And
Another) का पररशीलन ककया गया।

51. अपीलाथी के कवद्वान अकधवक्ता ने न्यायालय का
ध्यान वररष्ठ कारागार अधीक्षक सेन्रल जेल आगरा की आख्या
किनांक 15.03.2024 की ओर आकृि ककया कजसके अनुसार
अकभयुक्त नीरज किनांक 15.03.2024 तक कुल 7 वषय 04माह
2 किन जेल में कनरूद्ध रहा है तथा उक्त कतकथ के पश्चात आज कनणय
किये जाने की कतकथ तक वह 01 वषय, 01 माह , 8 किन कारागाह
में कनरूद्ध रह चुका है। तथा इसके पश्चात से भी अब तक वह
कारागार में ही कनरूद्ध है। इसप्रकार आज की कतकथ तक वह लगभग
8 वषय से अकधक समय से कारागार में अपनी सजा भुगत चुका है।

52.