# Nidhi Sharma v. State Of U.P. & Ors

- **Citation:** (2025) 9 ILRA 348
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-09-09
- **Case number:** Writ A No. 7782 of 2025
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/nidhi-sharma-v-state-of-u-p-ors-53923
- **Pages:** 9

## Headnote

Anadi Krishna Narayan, C.S.C., Sunil Kumar
Mishra

विचारणीय मुद्दा

विविय संकट में नियोक्ता द्िारा अिुकम्पा नियोजि िह ं
करिे की, और तत्पश्चात ऐसे संकट से उबरिे के बाद
एकसाथ की जािे िाल कई नियुक्क्तयों की िैधानिकता।

सार-टिप्पणी (हेडनोट्स)

क. सेिा कानून- अनुकम्पा ननयोजन अहहता चालक /
पररचालक पद 1165 मृतक आश्रितों की ननयुक्तत -
शासनादेश टदनाांक 11.07.2003 द्िारा अलाभप्रद क्थिनत िाले
ननगमों में अनुकम्पा ननयुक्तत की व्यिथिा समाप्त कर
टदया गया िा ककन्तु 2008, 2016, 2018 एिां 2024 में
शशश्रिलता प्रदान कर अनुकम्पा ननयुक्तत की व्यिथिा को
आरम्भ करने का आदेश टदया गया, क्जसके अनुक्रम में
शासनादेश टदनाांक 01.05.2025 एिां 05.05.2025 जारी की
गई िैधाननकता को चुनाती बडी सांख्या में एकसाि
अनुकम्पा ननयोजन की अनुमन्यता :

अशभननधाहररत : ककसी भी नियोक्ता को ऐसी विविय संकट
में नियोजि के ललए बाध्य करिा ि केिल निगम के ललए
अिुचचत होगा, िरि् नियुक्त होिे िाले कममचार के ललए भी
अिुचचत रहेगा, क्योंकक उस पर भी इस संकट का प्रनतकूल
प्रभाि होगा। विविय दशा सुधारिे पर ऐसे निगम को समयसमय पर अिुकम्पा नियोजि की अिुमनत देिे के ललए,
उक्त शासिादेश में लशचथलता प्रदाि तो की परन्तु 'नियम,
1974" के प्रािधािों में कोई भी लशचथलता प्रदाि करिे का
आदेश िह ं ददया, िरि् उसके प्रािधािों का कठोरता से
अिुपालि करिे का आदेश भी ददया। इस कारण से भी
शासिादेश ददिांक 01.05.2025 ि 05.05.2025 विचधक
शासिादेश है और उिको अलभखक्डित करिे का कोई
िैधानिक कारण िह ं है। (पैरा 15)

पुनः अशभननधाहररत : शासि द्िारा 1165 पदों पर अिुकम्पा
नियोजि की अिुमनत द गयी और यदद प्रत्येक िर्म
9 All. Nidhi Sharma Vs. State of U.P. & Ors.
349
सामान्य रूप से ऐसे अिुकम्पा नियोजि होते रहते तो हर
िर्म पूरे उिर प्रदेश में औसति 100-150 अिुकम्पा नियोजि
के प्रकरणों पर ह विचार ककया जाता परन्तु ऐसा िह ं हुआ
और इतिे िर्ों तक अिुकम्पा नियोजि ि करिे के पीछे
कोई अिुचचत आधार या पूिामग्रहयुक्त कारण प्रदलशमत करिे
में याचचकाकताम असफल रहे हैं। अतः इतिी बडी संख्या में
नियोजि की प्रकिया, जब तक नियूम, 1974 के प्रािधािों के
अिुरूप हैं, उपरोक्त तथ्यों के दृक्टटगत न्यायसंगत मािी जा
सकती है। (पैरा 17)

आिश्यक टदशाननदेश : उ. प्र. राज्य सडक पररिहि निगम
को यह निदेलशत ककया जाता है कक अगर चालक ि
पररचालक के पद की मौललक ररक्क्तयां हैं, तो सीधी भती की
प्रकिया को आरम्भ करिे की ददशा में उचचत कदम लें और
यह भी प्रयास करें कक अिुकम्पा नियोजि भी िर्ामिुिर्म
नियमािुसार हो सके, क्जससे एक साथ अचधक संख्या में
अिुकम्पा नियोजि के द्िारा पद भरिे की आिश्यकता ि
हो। इसके ललए प्रदेश सरकार को निदेश ददया जाता है कक
शासिादेश ददिांक 11.07.2003 में उ. प्र. रा. स. प. नि. के
संदभम में स्थायी लशचथलता प्रदाि करिे के ललए भी विचार
करें और इस सम्बन्ध में उचचत निणमय शीघ्र लें। (पैरा 19)

उद्धृत ननणहयविश्रध (केस लॉ)

विजय शमाम एिं अन्य बिाम् उिर प्रदेश सरकार एिं अन्य,
2005 (15) एस. सी. ट . 261; िेशिल इंस्ट ट्यूट ऑफ
टेक्िालॉजी एिं अन्य बिाम् िीरज कुमार लसंह, (2007) 2
एस. सी. सी. 481: लशि कुमार दुबे एिं अन्य बिाम् उिर
प्रदेश सरकार एिं अन्य, (2014) 2 ए. िी. जे. 312 (एफ.
बी.); िसीम बािो (श्रीमती) बिाम् उिर प्रदेश सरकार एिं
अन्य, 1993 सप. (4) एस. सी. सी. 46; लोम्बािी
इंजीनियररंग लललमटेि बिाम् उिराखंि जल विद्युत निगम
लललमटेि, (2024) 4 एस. सी. सी. 341; उिर प्रदेश स्टेट रोि
कापोरेशि एिं अन्य बिाम् मो० इस्माइल एिं अन्य, (1991)
3 एस. सी. सी. 239; स्पेशल अपील डिफेक्क्टि िं0
942/2018, उिर प्रदेश सरकार एिं अन्य बिाम् अंतररक्ष लसंह
निणमय ददिांक 14.05.2019; स्टेट ऑफ िेस्ट बंगाल बिाम्
देबिृता नतिार एिं अन्य, 2023 आई. एि. एस. सी. 202;
कैिरा बैंक बिाम् अजीथकुमार जी. के., 2025 आई. एि.
एस. सी. 184; जागेश्िर लसंह एिं अन्य बिाम् उिर प्रदेश
सरकार एिं अन्य, 2016 ए. एच. सी. 105105; स्पेशल अपील
िं0 175/2016, सुधीर कुमार लमश्रा बिाम् उिर प्रदेश सरकार
एिं अन्य, निणमय ददिांक 19.08.2016; दटंकू बिाम् हररयाणा
सरकार, 2045 आई. एि. एस. सी. 867; अितार लसंह बिाम्
भारत सरकार, (2016) 8 एस. सी. सी. 2016 - सांदशभहत ।

अन्तननहटहत कानून

उिर प्रदेश सेिाकाल में मृत सरकार सेिकों के आचश्रतों की
भती नियम, 1974

मूल-शब्द (कीिडह) की सूची

मृतक आचश्रत नियोजि; अंतररम आदेशः अिुकम्पा नियुक्क्त;
अिुस्मारक पत्र; प्राथमिा पत्र; नियलमत चयिः मृतक का
पररिारः वििीय संकटः चयि प्रकियाः याचचकाकताम; जिदहत
याचचकाः व्यक्क्तगत लाभः शत प्रनतशत आरक्षण; सेिाकाल
में मृत्युः बबलम्बः अिुकम्पा सेिायोजिः िैधा

## Text

348 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
services of petitioners shall be governed by
Regulations, 1998 once it was framed
under the powers conferred by clause (c) of
sub-section (2) of Section 45 of Act, 1950.

(F)
The
nature
of
communications of State Government has
no statutory back up, therefore, they were
not binding on the UPSRTC as well as only
on ground of nomenclature of post or
earlier also some similar post was created,
would not negate the facts that 135 posts of
Assistant Regional Manager were created
in furtherance of recommendation of
Pallavan Transport Consultancy Services
and that petitioners' appointments were
subject
to
any
subsequent
service
regulations, which were framed in the year
1998, which is now hold the field so far as
service conditions of employment of
petitioners is concerned.

64.
In
aforesaid
circumstances,
discussions, analysis and it's outcome as
well as in absence of any specific provision
of service regulation to grant pension to
petitioners, the relief sought cannot be
granted. The issue framed in para 46 of this
judgment is answered accordingly.

63. The writ petition is dismissed.

64. No order as to costs.
----------
(2025) 9 ILRA 348
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 09.09.2025

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ A No. 7782 of 2025

Nidhi Sharma ...Petitioner
Versus
State Of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Himanshu Agarwal, Sameer Sharma

Counsel for the Respondents:
Anadi Krishna Narayan, C.S.C., Sunil Kumar
Mishra

विचारणीय मुद्दा

विविय संकट में नियोक्ता द्िारा अिुकम्पा नियोजि िह ं
करिे की, और तत्पश्चात ऐसे संकट से उबरिे के बाद
एकसाथ की जािे िाल कई नियुक्क्तयों की िैधानिकता।

सार-टिप्पणी (हेडनोट्स)

क. सेिा कानून- अनुकम्पा ननयोजन अहहता चालक /
पररचालक पद 1165 मृतक आश्रितों की ननयुक्तत -
शासनादेश टदनाांक 11.07.2003 द्िारा अलाभप्रद क्थिनत िाले
ननगमों में अनुकम्पा ननयुक्तत की व्यिथिा समाप्त कर
टदया गया िा ककन्तु 2008, 2016, 2018 एिां 2024 में
शशश्रिलता प्रदान कर अनुकम्पा ननयुक्तत की व्यिथिा को
आरम्भ करने का आदेश टदया गया, क्जसके अनुक्रम में
शासनादेश टदनाांक 01.05.2025 एिां 05.05.2025 जारी की
गई िैधाननकता को चुनाती बडी सांख्या में एकसाि
अनुकम्पा ननयोजन की अनुमन्यता :

अशभननधाहररत : ककसी भी नियोक्ता को ऐसी विविय संकट
में नियोजि के ललए बाध्य करिा ि केिल निगम के ललए
अिुचचत होगा, िरि् नियुक्त होिे िाले कममचार के ललए भी
अिुचचत रहेगा, क्योंकक उस पर भी इस संकट का प्रनतकूल
प्रभाि होगा। विविय दशा सुधारिे पर ऐसे निगम को समयसमय पर अिुकम्पा नियोजि की अिुमनत देिे के ललए,
उक्त शासिादेश में लशचथलता प्रदाि तो की परन्तु 'नियम,
1974" के प्रािधािों में कोई भी लशचथलता प्रदाि करिे का
आदेश िह ं ददया, िरि् उसके प्रािधािों का कठोरता से
अिुपालि करिे का आदेश भी ददया। इस कारण से भी
शासिादेश ददिांक 01.05.2025 ि 05.05.2025 विचधक
शासिादेश है और उिको अलभखक्डित करिे का कोई
िैधानिक कारण िह ं है। (पैरा 15)

पुनः अशभननधाहररत : शासि द्िारा 1165 पदों पर अिुकम्पा
नियोजि की अिुमनत द गयी और यदद प्रत्येक िर्म
9 All. Nidhi Sharma Vs. State of U.P. & Ors.
349
सामान्य रूप से ऐसे अिुकम्पा नियोजि होते रहते तो हर
िर्म पूरे उिर प्रदेश में औसति 100-150 अिुकम्पा नियोजि
के प्रकरणों पर ह विचार ककया जाता परन्तु ऐसा िह ं हुआ
और इतिे िर्ों तक अिुकम्पा नियोजि ि करिे के पीछे
कोई अिुचचत आधार या पूिामग्रहयुक्त कारण प्रदलशमत करिे
में याचचकाकताम असफल रहे हैं। अतः इतिी बडी संख्या में
नियोजि की प्रकिया, जब तक नियूम, 1974 के प्रािधािों के
अिुरूप हैं, उपरोक्त तथ्यों के दृक्टटगत न्यायसंगत मािी जा
सकती है। (पैरा 17)

आिश्यक टदशाननदेश : उ. प्र. राज्य सडक पररिहि निगम
को यह निदेलशत ककया जाता है कक अगर चालक ि
पररचालक के पद की मौललक ररक्क्तयां हैं, तो सीधी भती की
प्रकिया को आरम्भ करिे की ददशा में उचचत कदम लें और
यह भी प्रयास करें कक अिुकम्पा नियोजि भी िर्ामिुिर्म
नियमािुसार हो सके, क्जससे एक साथ अचधक संख्या में
अिुकम्पा नियोजि के द्िारा पद भरिे की आिश्यकता ि
हो। इसके ललए प्रदेश सरकार को निदेश ददया जाता है कक
शासिादेश ददिांक 11.07.2003 में उ. प्र. रा. स. प. नि. के
संदभम में स्थायी लशचथलता प्रदाि करिे के ललए भी विचार
करें और इस सम्बन्ध में उचचत निणमय शीघ्र लें। (पैरा 19)

उद्धृत ननणहयविश्रध (केस लॉ)

विजय शमाम एिं अन्य बिाम् उिर प्रदेश सरकार एिं अन्य,
2005 (15) एस. सी. ट . 261; िेशिल इंस्ट ट्यूट ऑफ
टेक्िालॉजी एिं अन्य बिाम् िीरज कुमार लसंह, (2007) 2
एस. सी. सी. 481: लशि कुमार दुबे एिं अन्य बिाम् उिर
प्रदेश सरकार एिं अन्य, (2014) 2 ए. िी. जे. 312 (एफ.
बी.); िसीम बािो (श्रीमती) बिाम् उिर प्रदेश सरकार एिं
अन्य, 1993 सप. (4) एस. सी. सी. 46; लोम्बािी
इंजीनियररंग लललमटेि बिाम् उिराखंि जल विद्युत निगम
लललमटेि, (2024) 4 एस. सी. सी. 341; उिर प्रदेश स्टेट रोि
कापोरेशि एिं अन्य बिाम् मो० इस्माइल एिं अन्य, (1991)
3 एस. सी. सी. 239; स्पेशल अपील डिफेक्क्टि िं0
942/2018, उिर प्रदेश सरकार एिं अन्य बिाम् अंतररक्ष लसंह
निणमय ददिांक 14.05.2019; स्टेट ऑफ िेस्ट बंगाल बिाम्
देबिृता नतिार एिं अन्य, 2023 आई. एि. एस. सी. 202;
कैिरा बैंक बिाम् अजीथकुमार जी. के., 2025 आई. एि.
एस. सी. 184; जागेश्िर लसंह एिं अन्य बिाम् उिर प्रदेश
सरकार एिं अन्य, 2016 ए. एच. सी. 105105; स्पेशल अपील
िं0 175/2016, सुधीर कुमार लमश्रा बिाम् उिर प्रदेश सरकार
एिं अन्य, निणमय ददिांक 19.08.2016; दटंकू बिाम् हररयाणा
सरकार, 2045 आई. एि. एस. सी. 867; अितार लसंह बिाम्
भारत सरकार, (2016) 8 एस. सी. सी. 2016 - सांदशभहत ।

अन्तननहटहत कानून

उिर प्रदेश सेिाकाल में मृत सरकार सेिकों के आचश्रतों की
भती नियम, 1974

मूल-शब्द (कीिडह) की सूची

मृतक आचश्रत नियोजि; अंतररम आदेशः अिुकम्पा नियुक्क्त;
अिुस्मारक पत्र; प्राथमिा पत्र; नियलमत चयिः मृतक का
पररिारः वििीय संकटः चयि प्रकियाः याचचकाकताम; जिदहत
याचचकाः व्यक्क्तगत लाभः शत प्रनतशत आरक्षण; सेिाकाल
में मृत्युः बबलम्बः अिुकम्पा सेिायोजिः िैधानिक बाधाः
िैधानिक आधारः लशचथललताः सरप्लास कममचार ः क्षेत्रािुसार
सूची: िैधानिक दूवर्ताः तथ्यात्मक अिैधानिकता; आचथमक
तंगीः अभािग्रस्त पररिारः ियस्कताः आत्मघातीः आक्षेवपत
शासिादेशः बबलक्म्बत अिुस्मारक पत्रः शैक्षणणक योग्यताः
विविय संकट; लाभप्रद क्स्थनतः प्रनतकूल प्रभािः विविय दशाः
न्यायसंगतः मौललक ररक्क्त; िांनछत राहत; श्रलमकः विचधक
उपचार; आरोपी।

मामले का उद्भि

याचचकाकताम को अिुकम्पा नियुक्क्त हेतु अिहम घोवर्त करिे
एिं प्रकालशत सूची में सक्म्मललत ि ककए जािे के, और
शासिादेश ददिांक 19.04.2025 के विरूद्ध ।

पक्षकारों की ओर से उपक्थिनत

याचचकाकताम के अचधिक्ता: समीर शमाम, िररटठ अचधिक्ता,
दहमांशु अग्रिाल, मो० शरिर खाि, आर. यू. अंसार , कुलद प
।

विपक्षीगण के अचधिक्ताः अिादद कृटणा िारायण, सुिील
कुमार लमश्रा, राहुल अग्रिाल, धमेन्र धर दुबे, मृत्युंजय मोहि
सहाय।

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

१. सभी यामचकाकताट के मपता/माता उत्तर प्रदेश राज्य सडक
पररवहन मनगम (संक्षेप में उ.प्र.रा.स.प.मन.) के कमटचारी थे, मजनकी
मत्यु उनके सेवाकाल में हुई। इन सबने 'उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत
350 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
सरकारी सेवकों के आमश्रतों की भती 'मनयम, १९७४' (संक्षेप में
'मनयम, १९७४') के प्रावधानों के अंतगटत उ.प्र.रा.स.प.मन. में
उपयुि मनयोजन की मांग की, परन्तु कमथत रूप से उनके िमशैः
दावे 'मनयम, १९७४' के प्रावधानों के अंतगटत अहट न होने के कारण
या तो मलमखत रूप से अटवीकार कर मदये गये या उनके नाम
उ.प्र.रा.स.प.मन. द्वारा क्षेत्रानुसार प्रकामशत अभ्यामथटयों की सूची में
समम्ममलत नहीं मकये गये। इस कारण उन्होंने इस न्यायालय में
व्यमिगत यामचकायें दायर की है; मक उनके नाम भी सूची में
समम्ममलत मकये जाये।

२. उपरोि प्राथटना के अमतररि सभी यामचकागणों ने
शासनादेश संख्या ४१०/तीस-२-२०२५ मदनांक २९ अप्रैल, २०२५
को मनरटत करने की प्राथटना, संशोधन आवेदन द्वारा की है, मजसके
द्वारा उत्तर प्रदेश के प्रमुख समचव ने प्रबन्ध मनदेशक,
उ.प्र.रा.स.प.मन. को पूवट में जारी शासनादेश मदनांक २२.०७.२००३
के द्वारा मृतक आमश्रतों के सेवा योजन पर लगे प्रमतबंध को अपवाद
टवरूप मशमथल करते हुए उ.प्र.रा.स.प.मन. में चालकों/पररचालकों
के उत्पादक पदों पर अहट ११६५ मृतक आमश्रतों की मनयुमि मकये
जाने का मनणटय मलया है।

३. यहां यह उमकलमखत करना आवमयक है, मक पूवट में विट
२००२, २०१६ व २०१८ में भी ऐसे ही मशमथलता प्रदान करते हुए
िमशैः ६५०, १२०० व ५८७ चालकों/पररचालकों की पदों पर
मृतक आमश्रतों की मनयुमि करी थी व इसके उपरान्त छैः विों तक
मृतक आमश्रतों को चालक/पररचालक पदों पर मनयुि करने की कोई
भी कायटवाही नहीं हुई है और अब २६.०२.२०१८ से
३१.१२.२०२४ तक 'मनयम, १९७४' के अऩ्तगटत अहट आवेदकों की
सूची प्रकामशत करी है। शासनादेश ०१ मई, २०२५ व ५ मई,
२०२५ के द्वारा अहट आवेदकों के आवेदन को कुछ शतों के साथ
पूणट होने पर अमग्रम कायटवाही के मनदेश मदये हैं। सभी याचीकताटओं
ने उपरोि दोनों शासनादेशों को मनरटत करने की प्राथटना यामचका में
प्रारम्भ में ही कर दी थी।

४. इस न्यायालय के एक अंतररम आदेश मदनांक
३०.०५.२०२५
के
द्वारा
शासनादेश
०१.०५.२०२५,
०५.०५.२०२५ व २९.०४.२०२५ व ११६५ पदों की अमग्रम
कायटवाही पर रोक लगा दी थी और यामचकाकताट की प्राथटना मक,
सूची में से कुछ अभ्यामथटयों को वतटमान यामचका में भी प्रमतवादी
बनाने की अनुममत दी जाये, भी टवीकार कर ली थी। परन्तु न ही
उनको कोई नोमटस मनगटत करने का आदेश मदया गया और न ही
ऐसी कोई प्राथटना यामचकाकताट द्वारा की गयी।

५. प्रमतवादी उ.प्र.रा.स.प.मन. ने एक प्रमतशपथ पत्र दामखल
मकया व यामचकाकताट ने उसका प्रत्युत्तर शपथपत्र दामखल भी मकया,
मजसके उपरान्त दोनों पक्षों के मवद्वान अमधविागणों को श्रवण करके
मनणटय सुरमक्षत मकया गया।

६. यामचकाकताटओं की तरफ से उनके मवद्वान वररष्ठ
अमधविा श्री समीर शमाट ने अपने सहयोगी श्री महमांशु अग्रवाल व
सवटश्री मो० शरवर खान, आर.यू. अंसारी व कुलदीप कुमार गुप्ता ने
मनम्न तकट इस न्यायालय के समक्ष रखे:

(क) ररट ए संख्या-७७८२/२०२५ में प्राथी के मपता
की मृत्यु उनके सेवाकाल में १३.०८.२००६ को हुई थी। उसकी
माता का प्राथटना पत्र अनुकम्पा मनयुमि के मलए लम्बे समय तक
मवचाराधीन रहा, परन्तु कोई मनणटय नहीं मलया गया। विट २०११
में यामचकाकताट की माता ने उसकी अनुकम्पा मनयुमि के मलए एक
प्राथटना पत्र दामखल मकया जो आदेश मदनांक १५.११.२०११ द्वारा
अटवीकार मकया गया, मक वो अवयटक (१८ विट से छोटी) थी।
यामचकाकताट ने वयटक होने के उपरान्त एक प्राथटना पत्र
२१.११.२०१२ को दामखल मकया और अनुटमारक पत्र
२७.०४.२०१६ व २२.०७.२०१६ को दामखल मकये, परन्तु उस
पर कोई मनणटय नहीं मलया गया। प्राथी ने लगातार प्रयास मकया
और अंततैः उसका प्राथटना पत्र इस आधार पर अटवीकार मकया
गया मक वो प्राथटना पत्र उसने उसके मपता की मृत्यु के ५ विों के
बाद मदया, वो भी उसके पररवार के मवत्तीय संकट पर मबना ध्यान
मदये।

(ख) ११६५ पदों पर केवल मृतक आमश्रतों का
मनयोजन करना एक तरह से उनको १०० प्रमतशत आरक्षण देना है,
जो भारत के संमवधान के अनुच्छेद १४ व १६ के मवरूद्ध है, क्योंमक
इसके कारण मनयममत चयन की प्रमिया गत कई विों से नहीं हुई है।
मात्र मृतक आमश्रतों का ही चयन करना, उ.प्र.रा.स.प.मन. का एक
मानक बन गया है और यह प्रमिया, चयन का वंशानुगत स्रोत बन
गया है। सूची में उन अभ्यमथटयों के नाम भी शाममल मकये गये हैं,
मजनके प्राथटना पत्र कमटचारी के मृत्यु के पांच विट के बाद प्रेमित मकये
गये हैं।

(ग) मृतक आमश्रतों के द्वारा मनयोजन के प्राथटना पत्रों
पर मनणटय लेने में बहुत मवलम्ब होने के कारण व मृतक के पररवार के
मवत्तीय संकट के मनधाटरण के मापदण्डों का सही अनुपालन,
उ.प्र.रा.स.प.मन. द्वारा नहीं मकया जा रहा है। इस कारण चयन
प्रमिया में मनमानी हो रही है।
9 All. Nidhi Sharma Vs. State of U.P. & Ors.
351

(घ) न्यायालय के द्वारा मकये गये प्रश्न मक, अगर
यामचकाकताटओं का नाम अहट अभ्यमथटयों की सूची में समम्ममलत न
करने के कारण को न्यायसंगत मान मलया जाये और इस कारण से
मक उनके या मकसी अन्य द्वारा मनयममत चयन की प्रमिया को
आरम्भ करने की कोई मांग नहीं की गई है, तो क्या यामचकाकताटगण
के आग्रह पर सूची, प्रमिया व संदमभटत शासनादेश को मनरटत करना
उमचत होगा, जबमक इस मनष्किट से यामचकाकताटओं को कोई भी
लाभ नहीं होगा और यह मक वतटमान यामचकायें जनमहत यामचकाएं
भी नहीं हैं? के उत्तर में मवद्वान वररष्ठ अमधविा ने कथन मकया मक
अगर कोई प्रमिया संमवधान के अनुरूप नहीं है और उसका प्रभाव
समाज के प्रमतकूल है तो यामचकाकताट इस न्यायालय के समक्ष आ
सकता है और अगर वो यह प्रदमशटत करने में समथट हो जाता है मक
प्रमिया संमवधान के अनुच्छेद १४ व १६ व 'मनयम, १९७४' के
प्रावधानों के मवपरीत है तो यह न्यायालय समटत प्रमिया मनरटत कर
सकता है, चाहे इससे यामचकाकताट का कोई व्यमिगत लाभ न भी
हो और वो मनयममत चयन प्रमिया में भाग लेना चाहता हो या नहीं;
इसका कोई प्रमतकूल प्रभाव नहीं होगा।

७. यामचकाकताट के मवद्वान अमधविाओं ने मनम्न मवमधक
दृष्ांगों पर बल प्रदान मकया- विजय शंकर शर्मा एिं अन्य बनमर्
उत्तर प्रदेश सरकमर एिं अन्य, २००५ (१५) एस.सी.टी. २६१;
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एिं अन्य बनमर् नीरज
कुर्मर वसंह (२००७) २ एस.सी.सी. ४८१; वशि कुर्मर दुबे एिं
अन्य बनमर् उत्तर प्रदेश सरकमर एिं अन्य (२०१४) २ ए.डी.जे.
३१२ (एफ.बी.); नसीर् बमनो (श्रीर्ती) बनमर् उत्तर प्रदेश
सरकमर एिं अन्य १९९३ सप. (४) एस.सी.सी. ४६; लोम्बमडी
इंजीवनयररंग वलवर्टेड बनमर् उत्तरमखण्ड जल विद्युत वनगर्
वलवर्टेड (२०२४) ४ एस.सी.सी. ३४१; उत्तर प्रदेश स्टेट रोड
कमपोरेशन एिं अन्य बनमर् र्ो० इस्र्मइल एिं अन्य (१९९१)
३ एस.सी.सी. २३९; उत्तर प्रदेश सरकमर एिं अन्य बनमर्
अंतररक्ष वसंह (स्पेशल अपील वडफेवक्टि नं० ९४२/२०१८)
आदेश वदनमंक १४.०५.२०१९; स्टेट ऑफ िेस्ट बंगमल बनमर्
देबिृतम वतिमरी एिं अन्य २०२३ आई.एन.एस.सी. २०२;
केनरम
बैंक
बनमर्
अजीथकुर्मर
जी.के.
२०२५
आई.एन.एस.सी. १८४; जमगेश्वर वसंह एिं अन्य बनमर् उत्तर
प्रदेश सरकमर एिं अन्य २०१६: ए.एच.सी: १०५९०५; सुधीर
कुर्मर वर्श्रम बनमर् उत्तर प्रदेश सरकमर एिं अन्य (स्पेशल
अपील नं० १७५/२०१६) आदेश वदनमंक १९.०८.२०१६, मक
मकसी भी चयन प्रमिया में मृतक आमश्रतों के मलए कोई भी पद
आरमक्षत नहीं मकया जा सकता जबमक वतटमान प्रमिया में उनका शत
प्रमतशत आरक्षण है। यह मक मृतक आमश्रत मनयोजन, एक मनयम की
मकसी भी मनयोजन प्रमिया में सबको समम्मलत होने का अमधकार है,
का अपवाद है व यह मनयोजन 'मनयम, १९७४' या कोई योजना के
प्रावधानों के अंतगटत ही मदया जा सकता है। यह मक कोई भी
शासनादेश, मकसी वैधामनक मनयमों का अमतिमण नहीं कर सकता
है। चयन प्रमिया में ऐसे अभ्यथीगण मजन्होंने सरकारी सेवक की
सेवाकाल में मृत्यु होने के ५ विट के बाद आवेदन करने का कोई
यथोमचत कारण दशाटया हो या वयटक होने के कारण ५ विट के बाद
आवेदन मकया हो, ऐसे, आवेदन को उनके मवत्तीय संकट के
मापदण्ड पर तय न करके और मबना मकसी सोच-मवचार के सूची में
समम्ममलत न करना 'मनयम, १९७४' के प्रावधानों का उकलंघन है।
यह मक ऐसे प्राथटना पत्र जो मवलम्ब से मदये गये हैं, उनके मलए मृतक
आमश्रत मनयोजन के मलए, मवत्तीय संकट या अनुमचत कष् ही एक
मात्र मानक है मफर भी प्रमतवादी ने इस पर मवचार नहीं मकया और न
ही ५ विट के उपरान्त प्रेमित आवेदनों को मनयम ५ के परन्तुक के
अन्तगटत शासन को प्रेमित भी नहीं मकया मक उि प्रावधान में
मशमथलता प्रदान की जा सके।

८. उपरोि के प्रमतपक्ष में मवद्वान अमधविागण सवटश्री सुनील
कुमार ममश्रा, राहुल अग्रवाल, धमेन्र धर दुबे व मृत्युंजय मोहन
सहाय ने कथन मकया मक:

(क) सभी मजन यामचकाकताट के अनुकम्पा
सेवायोजन के प्राथटना पत्र टवीकार नहीं मकये गये उनके प्रकरण में
कोई न कोई वैधामनक बाधा है और इस न्यायालय के समक्ष उस
वैधामनक बाधा को दूर करने के मलए कोई ठोस आधार नहीं बताये
गये हैं।

(ख) यामचकाकताटगण एक तरफ अनुकम्पा
सेवायोजन की सूची में अपना नाम समम्ममलत करवाना चाहते हैं और
दूसरी तरफ अगर उनका नाम नहीं समम्ममलत हो पाये, तो सम्पूणट
चयन प्रमिया को दूमित करार देना चाहते हैं। उनकी ये प्राथटनायें
आपस में आत्मघाती हैं। इस कारण से अगर उनकी प्राथटना मक उन्हें
सूची में समम्ममलत मकया जाये, इस न्यायालय द्वारा अटवीकार की
जाती है तो अन्य प्राथटना की समटत प्रमिया दूमित घोमित करी जाये
को यह न्यायालय मसरे से खाररज करे। प्रामथटयों के पास कोई
वैधामनक आधार नहीं है मक चयन प्रमिया को चुनौती दें सके।

(ग) चयन प्रमिया, प्रदेश शासन द्वारा मनगटत
शासनादेश मदनांक २९.०४.२०२५ द्वारा मृतक आमश्रतों को ऐसे
मनगम जो लाभप्रद मटथमत में नहीं है उसमें अनुकम्पा मनयोजन को
समाप्त करने वाले शासनादेश मदनांक २२.०७.२००३ की मवमधक
352 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
बाधा में मशमथलता प्रदान करते हुए, उ.प्र.रा.स.प.मन. को ऐसी सेवा
मनयोजन देने की अनुममत, जो सभी पहलुओं पर सम्यक
मवचारोपरान्त प्रदान की है, के अनुसार प्रारम्भ की गयी है।
शासनादेश मदनांक २२.०७.२००३ में यह आदेमशत मकया गया था
मक "प्रदेश के ऐसे सावभजचनक उपिम/चनगम जो लाभप्रद की चस्थचत
में नहीं है अथाभत चजनमें संचित हाचन है अथवा चजनमें सरप्लस
कमभिारी हैं, उन सावभजचनक उपिमों/चनगमों में उनके सेवाकाल में
मृत्यु हो जाने की दशा में उनके आचश्रतों की सेवायोजन के चलए
आने की सुचवधा को समाि करने का चनणभय चलया गया है।"

(घ) मुख्यालय पररवहन मनगम, द्वारा क्षेत्रानुसार सूची
प्रेमित की गयी (अलीगढ क्षेत्र की सूची मदनांक ०१.०५.२०२५ के
पत्रांक द्वारा प्रेमित की गयी है) और शासनादेश मदनांक
०१.०५.२०२५ व २९.०५.२०२५ द्वारा यह भी मनदेमशत मकया गया
मक 'मनयम, १९७४' के प्रावधानों के अनुसार ही अमग्रम प्रमिया की
जाये, अथाटत प्रत्येक अभ्यथी पद की योग्यता एवं आयु सम्बन्धी
अहटता पूणट करते हों और कमटचारी की मृत्यु के ०५ विट के अन्दर
आवेदन करने वाले अभ्यमथटयों को ही मनयुमि प्रदान की जाये।
चालक के पदों के मलए मोटरयान अमधमनयम, १९८८ के उमचत
प्रावधानों के अनुसार चालन अनुमप्त की भी सम्यक रूप से जांच कर
मलया जाये। अतैः प्रयोज्य प्रावधानों में कोई भी मशमथलता प्रदान
नहीं करी गयी है। अतैः चयन प्रमिया में कोई वैधामनक दूमिता नहीं
है। मजन यामचकाकताटगण के आवेदन, यमद कमटचारी की मृत्यु के ५
विों के बाद प्रेमित मकये गये हैं, इसमलए उन पर मवचार करना
अपेमक्षत नहीं है।

(ङ) यामचका संख्या ७७८२ विट २०२५ में
यामचकाकताट (मनमध शमाट) का आवेदन उसके कमटचारी मपता के
मृत्यु के ६ विट के बाद प्रेमित मकया गया और क्योंमक कमटचारी की
मत्यु के ५ विट के बाद आवेदन मकया गया था, इसमलए उस पर
मवचार नहीं मकया गया। 'मनयम, १९७४' में आवेदक के वयटक होने
तक के समय को अनदेखा करने का कोई प्रावधान नहीं है।

(च) इस यामचका के प्रटतर ४९ में एक अभ्यथी रेनू
मसंह मजसका नाम सूची में है, के मलए यह कथन मकया गया है, मक
उसका प्राथटना पत्र उसके मपता की मृत्यु (१०.०८.२०११) के ५ विट
बाद भी टवीकार मकया, परन्तु यह कथन अमभलेखों के मवपरीत है,
जैसा मक पररवहन मनगम मुख्यालय के पत्रांक मदनांक २३, जनवरी,
२०२३, जो प्रमतशपथ पत्र के साथ संलग्नक है, से टपष् है मक
अभ्यथी रेनू मसंह का पहला प्राथटना पत्र १२.०१.२०१२ अथाटत
उसके मपता की मृत्यु के ५ विट के अन्दर ही प्रेमित कर मदया गया
था, अतैः चयन प्रमिया में मनमानी का आरोप आधारहीन है।
यामचकाकताटओं ने मकसी और अभ्यथी के संबंध में कोई तथ्यात्मक
अवैधामनकता का उकलेख नहीं मकया है।

(छ) यामचकाकताट के मवद्वान अमधविा द्वारा विजय
कुर्मर दुबे (पूिा र्ें उवललवखत) के मनणटय का उकलेख मकया गया
है परन्तु वो तथ्यों के अंतर के कारण याची के प्रकरण के मलए
उपयुि नहीं हैं, क्योंमक विजय कुर्मर दुबे (पूिा र्ें उवललवखत) के
प्रकरण में उसके मपता का मनयोजन श्रम न्यायालय द्वारा उनकी मृत्यु
के २५ साल बाद वैध माना था। अतैः उि समय का लाभ उसको
मदया गया है और इतने विों के बाद भी अनुकम्पा मनयोजन प्रदान
करने का आदेश मदया गया।

अनुकम्पम वनयोजन की विवध

९.
वटंकू
बनमर्
हररयमणम
सरकमर:
२०२४
आई.एन.एस.सी. ८६७:

"१२- जहााँ तक अनुकंपा चनयुचि को, चनयुचि के
चनचहत अचधकार के रूप में दावा करने का चवषय है, तो इतना
उल्लेख करना पयाभि है, चक उि अचधकार सेवा काल में हुये मृत
कमभिारी की सेवा की शतभ नहीं है, चजसे चबना चकसी जााँि या
ियन प्रचिया के आचश्रत को चदया जाना ही िाचहए। यह
चनयुचि चवचभन्न मानदंडों के उचित और कठोर जााँि के बाद ही
दी जाती है, चजसका उद्देश्य चकसी पररवार को अिानक हुई
आचथभक तंगी से उबारना है, ताचक वह उस आपातकालीन
चस्थचत से उबर सके, जहााँ एकमात्र कमाने वाला व्ययचि मर गया
है और उन्हें असहाय और शायद दरररता में छोड़ चदया है।
इसचलए, अनुकंपा चनयुचि, मृतक कमभिारी के उस पररवार को
संकर् से उबारने के चलए प्रदान की जाती है, जो अत्यचधक
आचथभक कचठनाई का सामना कर रहा है और सेवायोजन के
चबना, पररवार इस संकर् का सामना करने में सक्षम नहीं होगा।
यह चकसी भी चस्थचत में, अनुकम्पा चनयुचि के चलए चनधाभररत
नीचत, चनदेशों या चनयमों की अपेक्षाओं को पूणभ करने के अधीन
होगी।

१३. यहां यह स्पष्ट रूप से उचल्लचखत कर देना
िाचहए चक ऐसे प्रकरण में जहां अनुकंपा के आधार पर चनयुचि के
चलए कोई नीचत, चनदेश या चनयम नहीं है, ऐसी चनयुचि प्रदान नहीं
की जा सकती।
9 All. Nidhi Sharma Vs. State of U.P. & Ors.
353

१४. जहााँ भी अनुकंपा चनयुचि के चलए ऐसी नीचतयााँ
बनाई जाती हैं, उनका मूल आधार और औचित्य, संकर्ग्रस्त और
अभावग्रस्त पररवार को राहत प्रदान करने का उद्देश्य होता है, और
इस प्रकार मृतक कमभिाभरी के पररवार के पक्ष में सामान्य चनयम का
एक अपवाद बन जाता है। ऐसा ऐसे कमभिारी द्वारा प्रदान की गई
सेवाओं और उसके पररणामस्वरूप उत्पन्न वैध चवचधक अपेक्षाओं
को ध्यान में रखने के अचतररि अप्रत्याचशत घर्नाओं अथाभत
एकमात्र कमाने वाले की मृत्यु के कारण पररवार की चस्थचत और
घर्नािम में अिानक आए बदलाव को भी ध्यान में रखा जाता है।

१५. अतः, ऐसी नीचतयों का उद्देश्य पररवार की
परेशाचनयों में तत्काल सहायता प्रदान करना है। इस पररप्रेक्ष्य में,
आचश्रत द्वारा दावा प्रस्तुत करने के चलए कमभिारी की मृत्यु की चतचथ
से तीन वषभ की अवचध चनधाभररत की गई है, चजसमें हररयाणा सरकार
द्वारा जारी 1999 की नीचत चनदेशों के अनुसार वयस्कता प्राि करना
भी शाचमल है, चजसे चकसी भी चस्थचत में अनुचित या अताचकभक नहीं
कहा जा सकता, खासकर जब अनुकम्पा चनयुचि एक चनचहत
अचधकार नहीं है।

१६. वतभमान मामले में, जैसा चक अचभलेखों से स्पष्ट
है, अपीलकताभ अपने चपता की दुभाभग्यपूणभ मृत्यु के ११ वषभ बाद
वयस्क हुआ। इस प्रकार, प्रचतवादी राज्य द्वारा दावे को उचित रूप से
अस्वीकार चकया गया है। इस प्रकार अपीलकताभ के दावे को
अस्वीकार करने वाले उच्ि न्यायालय के आक्षेचपत चनणभयों में कोई
त्रुचर् नहीं है।" (उपरोि चहन्दी अनुवाद न्यायालय द्वारा चकया गया है।
अतः चकसी भी अनुवाद सम्बन्धी चववाद की चस्थचत में मूल चनणभय
को संदचभभत चकया जाये।)

प्रमथानमओं कम विश्लेषणः -

१०. यामचकाकताटओं ने एक ओर अनुकम्पा मनयोजन के
मलये अपना-अपना दावा प्रटतुत मकया है मक उनका भी प्रकरण
'मनयम, १९७४' के प्रावधानों के अनुसार मवचार मकया जाय अथाटत्
उनके नाम भी उ.प्र.रा.स.प.मन. के द्वारा प्रकामशत अहट अभ्यमथटयों
की सूची में समम्मलत कर मलये जाये अथवा वो समटत शासनादेश
मजसके द्वारा मनयोजन की प्रमिया आरम्भ हुई है, मवमध मवरुद्ध घोमित
करके अमभखमण्डत मकये जायें। उपरोि दोनों प्राथटनाएं एक दूसरे के
मवरोधी हैं या दूसरे शब्दों में आत्मघाती हैं, क्योंमक अगर न्यायालय
व्यमिगत यामचकाकताट के तथ्यों के संदभट में यह मनणटय देता है, मक
उनका प्रकरण 'मनयम, १९७४' के प्रावधानों के अनुसार मवचार मकये जा
सकते हैं तो उनको अनुकम्पा मनयोजन उन्हीं शासनादेशों के कारण प्रदान
मकया जायेगा, मजनको वैकमकपक प्राथटना के द्वारा अमभखमण्डत करने की
मााँग करी गयी है। अतैः एक कथन के माध्यम से आक्षेमपत शासनादेश
वैधामनक और दूसरे कथन के माध्यम से वो ही शासनादेश अवैधामनक
घोमित करने की बहस करके, यामचकाकताटगण दो नावों में एक साथ
नौकायन करना चाहते हैं, वो भी जो एक दूसरे से मवपरीत मदशा में जा
रहीं हैं।

यमवचकमकतमा वनवध शर्मा के प्रकरण के तथ्य ि विवधक
पहलुओं कम विश्लेषणः-

११. अमववामदत रुप से उि यामचकाकताट के मपता की मृत्यु
उ.प्र.रा.स.प.मन. के सेवाकाल में मदनांक १३.०८.२००६ को हुई और
यामचकाकताट ने वयटक होने के उपरांत व मपता की मृत्यु के छैः विट बाद
प्राथटना पत्र प्रेमित करा और आगामी ४ विट तक कोई कायटवाही नहीं
करी और एक मवलमम्बत अनुटमारक पत्र २७.०४.२०१६ को प्रेमित करा।
'मनयम, १९७४' के प्रावधानों के अनुसार मृत्यु के ५ विट के उपरांत मदये
गये प्राथटना पत्र पर साधारणतैः मवचार नहीं मकया जाता है और मात्र इस
कारण से मक पूवट में एक प्राथटना पत्र यामचकाकताट के अवयटक होने के
कारण १५.११.२०११ को मनरटत हो गया था, यह नहीं माना जा सकता
मक आवेदन ५ विट के अंदर ही दे मदया था क्योंमक 'मनयम, १९७४' के
मनयम ५ के अनुसार आवेदक वांमछत पद के मलए मनधाटररत शैक्षमणक
योग्यताएं पूरी करता हो, अन्यथा सरकारी सेवा के मलए योग्य हो और
सरकारी कमटचारी की मृत्यु की तारीख से पांच विट के भीतर रोजगार के
मलए आवेदन करता है अथाटत् अगर उपरोि सभी मटथमतयों को संतुष्
करता हो, तो उन्हीं पररमटथमतयों में उसके आवेदन पर 'मनयम, १९७४' के
अन्तगटत मवचार मकया जा सकता है, परन्तु यामचकाकताट अमववामदत रुप
से उि सभी शतट पूणट नहीं करती है।

१२. 'मनयम, १९७४' का मनयम ५ मनम्न है:-

"(१) यचद चकसी सरकारी सेवक की इन चनयमों के
लागू होने के पश्चात सेवाकाल में मृत्यु हो जाती है और मृतक सरकारी
सेवक का पचत या पत्नी पहले से ही केन्रीय सरकार या राज्य सरकार या
केन्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वाचमत्व या चनयंत्रण वाले चनगम में
चनयोचजत नहीं है, तो उसके पररवार एक सदस्य को, जो पहले से ही
केन्रीय सरकार या राज्य सरकार या केन्रीय सरकार या राज्यसर के
स्वाचमत्व या चनयंत्रण वाले चनगम में चनयोचजत नहीं है, इस प्रयोजन के
चलए आवेदन करने पर, सामान्य भती चनयमों में छूर् देते हुए, उत्तर
प्रदेश लोक सेवा आयोग के क्षेत्राचधकार में आने वाले पद को
छोड़कर, चकसी पद पर सरकारी सेवा में उपयुि चनयोजन चदया
जाएगा, यचद ऐसा व्ययचि-
354 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(i) पद के चलए चनधाभररत शैक्षचणक योग्यताएं पूरी
करता हो,

(ii) अन्यथा सरकारी सेवा के चलए योग्य है, और

(iii) सरकारी कमभिारी की मृत्यु की तारीख से पांि
वषभ के भीतर रोजगार के चलए आवेदन करता है:

परन्तु जहां राज्य सरकार को यह समाधान हो जाता है
चक रोजगार के चलए आवेदन करने के चलए चनयत समय-सीमा चकसी
चवचशष्ट मामले में अनुचित कचठनाई उत्पन्न करती है, वहााँ वह मामले
को न्यायसंगत और साम्यपूणभ ढंग से चनपर्ाने के चलए, जैसा वह
आवश्यक समझे, आवश्यकता को समाि कर सकती है या उसमें
ढील दे सकती है।

(२) जहां तक संभव हो, ऐसा रोजगार उसी चवभाग
में चदया जाना िाचहए चजसमें मृतक सरकारी कमभिारी अपनी मृत्यु से
पहले कायभरत था।"

१३. उपरोि के पृष्ठभूमम में वररष्ठ अमधविा का यह कथन
की प्रकरण की पररमटथमतयों में ५ विट की सीमा में मशमललता देने के
मलए उ.प्र.रा.स.प.मन. को यामचकाकताट का प्रकरण टवत: राज्य
सरकार को भेज देना चामहए था। इस अन्तराल के बाद, जब
यामचकाकताट ने पूवट में टवयं कोई कायटवाही नहीं करी, टवीकार नहीं
मकया जा सकता व उपरोि 'परन्तुक' मनयोिा को बाध्य नहीं करता
की वो इस तरह के प्रकरण को टवतैः राज्य सरकार को भेज दें। अतैः
वतटमान यामचकाकताट का नाम अनुकम्पा मनयोजन के अहट अभ्यमथटयों
की सूची में समम्ममलत करने का कोई मवमधक औमचत्य नहीं है।

आक्षेवपत शमसनमदेश ि अनुकम्पम वनयोजन की प्रवियम
की विवधक िैधतम कम विश्लेषणः -

१४. शासनादेश मदनांक ११ जुलाई, २००३ द्वारा प्रदेश
सरकार ने ऐसे उपिम जो लाभप्रद की मटथमत में नहीं थे उनमें
अनुकम्पा मनयोजन की प्रमिया को समाप्त करने का मनणटय मलया था
और अमववामदत रूप से उ.प्र.रा.स.प.मन. उस समय लाभप्रद मटथमत
में नहीं था। कुछ विट उपरान्त सम्भवतैः मवत्तीय मटथमत में सुधार होने
के कारण, प्रदेश सरकार द्वारा विट २००८, २०१६, २०१८ व अब
६ विट बाद २०२४ में एक बार मफर से उि शासनादेश में मशमथलता
प्रदान करते हुए अनुकम्पा मनयोजन की प्रमिया को आरम्भ करने का
आदेश मदया, मजसके अनुिम में उ.प्र.रा.स.प.मन. ने अन्य
शासनादेश मदनांक ०१.०५.२०२५ व ०५.०५.२०२५ मुख्यालय
टतर व उसके उपरान्त क्षेत्रीय टतर पर अहट अभ्यमथटयों के नाम की
सूची के साथ जारी, इस मनदेश के साथ मकये मक 'मनयम, १९७४' के
प्रावधानों का कठोरता से पालन करने के उपरान्त ही मनयोजन का
आदेश पाररत करें। परन्तु इस न्यायालय के अंतररम आदेश के कारण
प्रमिया अभी पूणट नहीं हो पायी है।

१५. शासनादेश मदनांक ११.०७.२००३ द्वारा ऐसे मनगम जो
लाभप्रद मटथमत नहीं थे, अनुकम्पा मनयोजन की प्रमिया को समाप्त
कर मदया था। मकसी भी मनयोिा को ऐसी मवत्तीय संकट में मनयोजन
के मलए बाध्य करना न केवल मनगम के मलए अनुमचत होगा वरन्
मनयुि होने वाले कमटचारी के मलए भी अनुमचत रहेगा, क्योंमक उस
पर भी इस संकट का प्रमतकूल प्रभाव होगा। मवत्तीय दशा सुधारने पर
ऐसे मनगम को समय-समय पर अनुकम्पा मनयोजन की अनुममत देने
के मलए, उि शासनादेश में मशमथलता प्रदान तो की परन्तु 'मनयम,
१९७४' के प्रावधानों में कोई भी मशमथलता प्रदान करने का आदेश
नहीं मदया वरन् उसके प्रावधानों का कठोरता से अनुपालन करने का
आदेश भी मदया। इस कारण से भी शासनादेश मदनांक
०१.०५.२०२५ व ०५.०५.२०२५ मवमधक शासनादेश है और
उनको अमभखमण्डत करने का कोई वैधामनक कारण नहीं है।

१६. अब न्यायालय यह मवचार करेगा मक क्या
उ.प्र.रा.स.प.मन. में अनुकम्पा मनयोजन ही गत एक दशक में
सेवायोजन का एकमात्र स्रोत बन गया है और क्या एक साथ बडी
संख्या में अनुकम्पा मनयोजन होने से उ.प्र.रा.स.प.मन. को
चालक/पररचालक पर मनयममत मनयुमियााँ, न करके संमवदा पर
क्षेत्रानुसार कभी रोज़गार मेलों के द्वारा तो कभी केवल ममहला भती
के नाते, सेवायोजन करने का कारण बन गया है और क्या इस कारण
से आक्षेमपत शासनादेश अवैधामनक करार मदये जा सकते हैं?

१७. जैसा मक पूवट में उकलेमखत मकया है विट २००७,
२०१६, २०१७ व अब ६ विट बाद २०२४ में पुनैः शासनादेश
मदनांक ११.०७.२००३ में मशमथलता प्रदान करते हुए अऩुकम्पा
मनयोजन की प्रमिया मफर से आरम्भ करने का आदेश मदया और ऐसे
अभ्यमथटयों की सूची बनाई जो अहट हैं और मजनके आवेदन कमटचारी
के मृत्यु के ५ विट के अंदर प्रेमित मकये गए थे। २०१७ से २०२४
तक कोई अनुकम्मा मनयोजन नहीं हुआ, इस कारण से क्षेत्रीय टतर
पर ऐसे आवेदन की संख्या अमधक हो गयी और वो प्रकरण भी सूची
में शाममल हुए, मजनमें कमटचारी की मृत्यु २०१७ से ५ विट पूवट
अथाटत २०१३ में हुई मजससे वाटतव में १०-११ विट पुराने प्रकरण से
संबंमधत अभ्यमथटयों के नाम भी समम्ममलत मकये गये। शासन द्वारा
9 All. Nidhi Sharma Vs. State of U.P. & Ors.
355
११६५ पदों पर अनुकम्पा मनयोजन की अऩुममत दी और यमद प्रत्येक
विट सामान्य रूप से ऐसे अनुकम्पा मनयोजन होते रहते तो हर विट पूरे
उत्तर प्रदेश में औसतन १००-१५० अऩुकम्पा मनयोजन के प्रकरणों
पर ही मवचार मकया जाता परन्तु ऐसा नहीं हुआ और इतने विों तक
अनुकम्पा मनयोजन न करने के पीछे कोई अनुमचत आधार या
पूवाटग्रहयुि कारण प्रदमशटत करने में यामचकाकताट असफल रहे हैं।
अतैः इतनी बडी संख्या में मनयोजन की प्रमिया, जब तक 'मनयम,
१९७४' के प्रावधानों के अनुरूप हैं, उपरोि तथ्यों के दृमष्गत न्याय
संगत मानी जा सकती है।

१८. यामचकाकताट यह प्रदमशटत करने में असफल रहे मक
प्रमिया में मनमानी हुई है और सीधी भती न होने के कारण उनका
कोई मवमधक अमधकार का हनन हुआ है और न ही यह यामचका एक
जनमहत यामचका ही है। अतैः वतटमान अऩुकम्पा मनयोजन की प्रमिया
को यामचकाकताट की प्राथटना पर खंमडत नहीं मकया जा सकता है।
अतैः इस कारण से भी उपरोि शासनादेश मवमधक रूप से न्याय
संगत है।

१९. उपरोि मवश्लेिण के उपरान्त भी, यह तथ्य की कई विों से
उ.प्र.रा.स.प.मन. में चालक व पररचालक की सीधी भती की प्रमिया नहीं
हुई और मनयोजन या तो संमवदा के माध्यम से या कई विों के बाद
अऩुकम्पा मनयोजन की प्रमिया से हुआ है और अब भी हो रहा है का यह
न्यायालय गंभीरता से संज्ञान लेता है। जैसा मक सूमचत मकया गया है मक
विट २००५ में चालक के पदों पर अंमतम सीधी भती क्षेत्रीय टतर पर हुई
थी एवं विट २०१६ में उत्तर प्रदेश अधीनटथ सेवा चयन आयोग द्वारा
पररचालक के १६९० पदों पर अंमतम सीधी भती हुई थी और उसके
उपरांत कोई भी सीधी भती की प्रमिया ना तो चालक और ना ही
पररचालक के पदों पर हुई है। इस कारण से उ.प्र.रा.स.प.मन. को यह
मनदेमशत मकया जाता है मक अगर चालक व पररचालक के पद की
मौमलक ररमियााँ हैं तो सीधी भती की प्रमिया को आरम्भ करने की मदशा
में उमचत कदम लें और यह भी प्रयास करें मक अनुकम्पा मनयोजन भी
विाटनुविट मनयमानुसार हो सके, मजससे एक साथ अमधक संख्या में
अनुकम्पा मनयोजन के द्वारा पद भरने की आवमयकता न हो। इसके मलए
प्रदेश सरकार को मनदेश मदया जाता है मक शासनादेश मदनांक
११.०७.२००३ में उ.प्र.रा.स.प.मन. के संदभट में टथायी मशमथलता प्रदान
करने के मलए भी मवचार करें और इस सम्बन्ध में उमचत मनणटय शीघ्र लें।

यमवचकमनुसमर वनष्कषा

२०. यमवचकम संख्यम ७७८२ िषा २०२५: उपरोि
मवश्लेिण के पररप्रेक्ष्य में यामचका की समटत प्राथाटनाएं अटवीकार की
जाती हैं। अंतररम आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ मनरटत मकया जाता
है। यामचका का उपरोि मनदेशों के साथ मनटतारण मकया जाता है।

२१. यमवचकम संख्यम ११५४८ िषा २०२५: वतटमान
प्रकरण में आक्षेमपत आदेश मदनांक २१.०६.२०२५ मजसके द्वारा
याचीकताट के पक्ष में अनुकम्पा मनयोजन को आदेश मदनांक
०२.०६.२०२५ और ०६.०६.२०२५ को इस न्यायालय के अंमतरम
आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ के अनुपालन में यामचका संख्या
७७८२/२०२५ के अमन्तम मनणटय तक टथमगत कर मदया था और
जैसा मक पूवट में उकलेमखत मकया गया है मक उि अंतररम आदेश
मदनांक ३०.०५.२०२५ मनरटत मकया जा चुका है, और आक्षेमपत
शासनादेश वैध घोमित मकये गये है। अतैः यामचकाकताट को अब
वांमछत राहत प्राप्त हो गयी है। अतैः यामचका का तद्दनुसार मनटतारण
मकया जाता है।

२२. यमवचकम संख्यम ११५४३ िषा २०२५: वतटमान
यामचका में आक्षेमपत आदेश मदनांक १९.०६.२०२५ द्वारा याचीगण
के पक्ष में अनुकम्पा मनयोजन का आदेश मदनांक ३१.०५.२०२५ को
इस न्यायालय के अंमतरम आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ के
अनुपालन में यामचका संख्या ७७८२/२०२५ के अंमतम मनणटय तक
टथमगत कर मदया था और जैसा मक पूवट में उकलेमखत मकया गया है
मक अंतररम आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ मनरटत मकया जा चुका
है व आक्षेमपत शासनादेश वैध घोमित मकये गये हैं, अतैः
यामचकाकताट को वांमछत राहत प्राप्त हो गयी है। अतैः यामचका का
तद्दनुसार मनटतारण मकया जाता है।

२३. यमवचकम संख्यम ११५५५ िषा २०२५: वतटमान
यामचका में आक्षेमपत आदेश मदनांक २१.०६.२०२५ द्वारा याचीगण
के पक्ष में अनुकम्पा मनयोजन का आदेश मदनांक १४.०५.२०२५ को
इस न्यायालय के अंमतरम आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ के
अनुपालन में यामचका संख्या ७७८२/२०२५ के अमन्तम मनणटय तक
टथमगत कर मदया था और जैसा मक पूवट में उकलेमखत मकया गया है
मक अंतररम आदेश मदनांक ३०.०५.२०२५ मनरटत मकया जा चुका
है व आक्षेमपत शासनादेश वैध घोमित मकये गये हैं, अतैः
यामचकाकताट को वांमछत राहत प्राप्त हो गयी है। अतैः यामचका का
तद्दनुसार मनटतारण मकया जाता है।

२४. यमवचकम संख्यम ११५९४ िषा २०२५: यामचकाकताट
राजेन्र मसंह के मपता की मृत्यु उनके सेवाकाल में मदनांक
२३.०८.१९९० को हुई थी। उसके उपरान्त उसकी माता की मनयुमि
कमथत रूप से अनुकम्पा मनयोजन पर श्रममक के पद पर विट १९९२
में हुई व उनकी मृत्यु उनके कायटकाल के दौरान मदनांक
१९.०३.२०१६ को हुई। इसके उपरान्त यामचकाकताट ने अनुकम्पा
मनयोजन के मलए एक आवेदन मदनांक २१.०४.२०१६ को
356 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
पररचालक पद के मलए प्रेमित मकया। परन्तु क्षेत्रीय प्रबन्धक, मेरठ के
आदेशानुसार मदनांक ०९.०४.२०१९ के द्वारा यामचकाकताट के
शैमक्षक प्रमाण पत्रों की जााँच के उपरान्त जब वो फजी पाये गये तो
उसका मृतक आमश्रत मनयोजन का दावा मनरटत कर मदया गया।
यामचकाकताट ने उि आदेश मदनांक ०९.०४.२०१९ को आक्षेमपत
मकये मबना ही वतटमान यामचका के माध्यम से अनुकम्पा मनयोजन के
मलए अहट अभ्यमथटयों की सूची में अपना नाम समम्ममलत कराने की
प्राथटना की है, मजस पर उपरोि मवमधक बाधा के कारण मवचार नहीं
मकया जा सकता है। अतैः वतटमान यामचका का मनटतारण इस
मटप्पणी के साथ मकया जाता है मक यामचकाकताट उमचत मवमधक
उपचार के मलए टवतंत्र है।

२५. यमवचकम संख्यम ११३३७ िषा २०२५: वतटमान
प्रकरण में यामचकाकताट राजीव कुमार के मपता की मृत्यु सेवाकाल में
मदनांक १६.१०.२०१८ को हुई और भारी वाहन चलाने का चालन
अनुमप्त मदनांक २९.०७.२०१९ को मनगटत हुई। मनयमानुसार चालन
अनुमप्त के ५ विट बाद ही यामचकाकताट चालक पद के मलए अहट
होता है और क्योंमक जब अनुकम्पा मनयोजन का आवेदन पत्र
१२.१०.२०२३ को प्रेमित मकया तब चालक अनुमप्त की अहटता नहीं
रखता था इसमलए आक्षेमपत आदेश मदनांक १४.११.२०२३ द्वारा
उसका आवेदन पत्र पर पात्रता पूणट न करने के कारण उस पर अमग्रम
कायटवाही नहीं की गई मक संदमभटत पात्रता २८.०७.२०२४ को पूणट
होगी। अथाटत् यामचका के मपता की मृत्यु (१६.१०.२०१८) के ५
विट के बाद पात्रता पूणट होगी। अतैः न्यायालय का मत है मक
आक्षेमपत आदेश अनुकम्पा मनयोजन के मनयम के दृमष्गत ही पाररत
मकया गया है और जैसा पूवट में उकलेमखत मकया है मक चयन मनयमों
में कोई मशमथलता प्रदान नहीं की गयी है इसमलए आक्षेमपत आदेश
में हटतक्षेप नहीं मकया जा सकता। न्यायमहत में यामचका इस मटप्पणी
के साथ मनटताररत की जाती है मक उ.प्र.रा.स.प.मन. अगर चाहे तो
यामचकाकताट को पररचालक के पद के योजन के मलए पुनैः मवचार
कर ले, अगर वो पूणट पात्रता रखता हो। यामचकाकताट इस संदभट में
नवीन प्राथटना पत्र प्रेमित करने के मलए टवतंत्र है।

२६. यमवचकम संख्यम ९८२२ िषा २०२५: यामचकाकताट
रमवउकलाह अहमद का अनुकम्पा मनयोजन का आवेदन पररचालक
पद के मलए अपर प्रबन्धक मनदेशक के पत्रांक मदनांक
०१.०५.२०२५ द्वारा अहट पाया गया और उसका एक सप्ताह का
अवैतमनक प्रमशक्षण भी कराया गया परन्तु जब पुमलस सत्यापन के
दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई मक यामचकाकताट के मवरूद्ध एक प्रथम
सूचना ररपोटट सं० १९३ विट २०२०, थाना मसधारी, मजला
आजमगढ में भारतीय दण्ड संमहता १८६० की धारा ४१९, ४२० व
४०६ के अन्तगटत दायर की गयी है तो उि पत्रांक मदनांक
०१.०५.२०२५ के अनुिम में अमग्रम कायटवाही नहीं की गयी और
यह मक यामचकाकताट ने इस सम्बन्ध में एक आवेदन पत्र
०२.०६.२०२५ को टपीड पोटट के माध्यम से प्रेमित मकया जो अभी
लमम्बत है। अतैः वतटमान यामचका इस मनदेश के साथ मनटताररत की
जाती है मक प्राथी अगर ३ सप्ताह के अंदर एक नवीन आवेदन क्षेत्रीय
प्रबन्धक उ.प्र.रा.स.प.मन. के कायाटलय में व्यमिगत रूप से सौंपता है
तो उि अमधकारी आवेदन पत्र का मनटतारण उच्चतम न्यायालय
द्वारा अितमर वसंह बनमर् भमरत सरकमर (२०१६) ८
एस.एस.सी. २०१६ के प्रकरण में पाररत मनणटय के दृमष्गत शीघ्रता
से करेगा। यामचका तद्नुसार मनटताररत की जाती है।

२७. यमवचकम संख्यम १२८८८ िषा २०२५: वतटमान
यामचकाकताट के प्रकरण के तथ्य यामचका ९८२२ विट २०२५ के
यामचकाकताट के समान है मक अनुकम्पा मनयुमि के मलए अहट होने के
व प्रमशक्षण के उपरान्त एक आपरामधक प्रकरण (मु.अ.सं.
०१२९/२०२५ मदनांक ०५.०५.२०२५ धारा ११५(२), ३५२,
३५१(३), ३३३ बी.एन.एस.) में याची का नाम आरोपी के रूप में
दजट होने के कारण अमग्रम कायटवाही रोक दी गयी है। अतैः यह
यामचका भी इस मनदेश के साथ मनटताररत की जाती है मक प्राथी
अगर ३ सप्ताह के अंदर एक नवीन आवेदन क्षेत्रीय प्रबन्धक
उ.प्र.रा.स.प.मन. के कायाटलय में व्यमिगत रूप से सौंपता है तो उि
अमधकारी आवेदन पत्र का मनटतारण उच्चतम न्यायालय द्वारा
अितमर वसंह बनमर् भमरत सरकमर (पूिा र्ें उवललवखत) के
प्रकरण में पाररत मनणटय के दृमष्गत शीघ्रता से करेगा। यामचका
तद्नुसार मनटताररत की जाती है।
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(2025) 9 ILRA 356
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 25.09.2025

BEFORE

THE HON'BLE AJIT KUMAR, J.

Writ A No. 8788 of 2025
&
Connected With Other Cases

Rajat Maurya & Ors. ...Petitioners
Versus
State Of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioners:
Siddharth Khare, Sr. Advocate