# Rahul Kumar Pandey v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2024) 3 ILRA 867
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-02-28
- **Case number:** Application U/S 482. No. 1684 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/rahul-kumar-pandey-v-state-of-u-p-ors-51687
- **Pages:** 6

## Headnote

G.A., Pankaj Kumar Shukla

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 419,
420, 467, 468, 471 - पुिः कववेचिा िे आदेश िे कवरुद्ध -
वैिता - प्रस्ट्तुत प्रिरण में आरोप है कि प्राथी िे कशिायतिताग लेखपाल
िी कमलीर्र्त से र्ाटा संख्या 2411 िी र्ूकम िे अंश िो िूट-रचिा
िर रािस्ट्व अकर्लेखों में र्ाटा संख्या 2412 में कमला कलया - कवपक्षी
संख्या 2 स्ट्वयं िो र्ाटा संख्या 2411 िा सहखातेदार बताता है, किसे
प्राथी द्वारा कववाकदत किया र्या, किन्तु न्यायालय िे यह मािा कि िकथत
आरोप किकश्चत रूप से कवपक्षी संख्या 2 िे अकििारों पर कवपरीत प्रर्ाव
िालते हैं और वह पीकड़त व्यकक्त है - अतः प्राथी िी आपकत्त किरस्ट्त िी
र्ई - प्राथी िा यह तिग कि रािस्ट्व किरीक्षि िी आख्या से आरोप
असत्य कसद्ध होते हैं तथा घटिा वषग 2020 िी िही र्ई है िबकि
एफ.आई.आर. वषग 2021 में दिग हुई है, न्यायालय िे अस्ट्वीिार
किया, क्योंकि अकर्लेखों से यह स्ट्पष्ट िहीं होता कि िूट-रचिा िी घटिा
वषग 2020 में ही घकटत हुई थी - न्यायालय िे यह र्ी उल्लेख किया
कि कववेचिा में िई पहलुओं िी उपेक्षा िी र्ई है - िक्शे में िाट-पीट
िे संबंि में िोई आदेश पाररत िहीं हुआ, र्ाटा संख्या 2411 िे अन्य
खातेदारों, िािूिर्ो, तहसीलदार व परर्िाकििारी िे बयाि दिग िहीं हुए
और अकर्लेखार्ार िे अकर्लेखों िा मूल्यांिि िहीं हुआ - ऐसी
पररकस्ट्थकत में कवचारण न्यायालय द्वारा पुिः कववेचिा िे आदेश में िोई
वैिाकिि त्रुकट प्रतीत िहीं होती हैं। (पैरा 14 से 19)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

## Text

3 All. Rahul Kumar Pandey Vs. State of U.P. & Ors.
867
----------
(2024) 3 ILRA 867
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 28.02.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 1684 of 2024

Rahul Kumar Pandey ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Applicant:
P.K. Singh Bisen

Counsel for the Respondents:
G.A., Pankaj Kumar Shukla

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 419,
420, 467, 468, 471 - पुिः कववेचिा िे आदेश िे कवरुद्ध -
वैिता - प्रस्ट्तुत प्रिरण में आरोप है कि प्राथी िे कशिायतिताग लेखपाल
िी कमलीर्र्त से र्ाटा संख्या 2411 िी र्ूकम िे अंश िो िूट-रचिा
िर रािस्ट्व अकर्लेखों में र्ाटा संख्या 2412 में कमला कलया - कवपक्षी
संख्या 2 स्ट्वयं िो र्ाटा संख्या 2411 िा सहखातेदार बताता है, किसे
प्राथी द्वारा कववाकदत किया र्या, किन्तु न्यायालय िे यह मािा कि िकथत
आरोप किकश्चत रूप से कवपक्षी संख्या 2 िे अकििारों पर कवपरीत प्रर्ाव
िालते हैं और वह पीकड़त व्यकक्त है - अतः प्राथी िी आपकत्त किरस्ट्त िी
र्ई - प्राथी िा यह तिग कि रािस्ट्व किरीक्षि िी आख्या से आरोप
असत्य कसद्ध होते हैं तथा घटिा वषग 2020 िी िही र्ई है िबकि
एफ.आई.आर. वषग 2021 में दिग हुई है, न्यायालय िे अस्ट्वीिार
किया, क्योंकि अकर्लेखों से यह स्ट्पष्ट िहीं होता कि िूट-रचिा िी घटिा
वषग 2020 में ही घकटत हुई थी - न्यायालय िे यह र्ी उल्लेख किया
कि कववेचिा में िई पहलुओं िी उपेक्षा िी र्ई है - िक्शे में िाट-पीट
िे संबंि में िोई आदेश पाररत िहीं हुआ, र्ाटा संख्या 2411 िे अन्य
खातेदारों, िािूिर्ो, तहसीलदार व परर्िाकििारी िे बयाि दिग िहीं हुए
और अकर्लेखार्ार िे अकर्लेखों िा मूल्यांिि िहीं हुआ - ऐसी
पररकस्ट्थकत में कवचारण न्यायालय द्वारा पुिः कववेचिा िे आदेश में िोई
वैिाकिि त्रुकट प्रतीत िहीं होती हैं। (पैरा 14 से 19)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. अयूब खान नूरखान पठान बनाम महाराष्ट्र राज्य, एआईआर 2013 एससी
पृष्ठ 58

2. रवव यर्शवांि भ्योर (Bhoir) बनाम वजला कलेक्टर रायगढ िथा अन्य
(2012) 4 एससीसी 407

3. भगवांि वसांह बनाम कवमर्शनर ऑफ पुवलस (1985) 2 एससीसी 587

4. जगजीि वसांह बनाम आर्शीर् वमश्रा (2022) 9 एससीसी 321

5. मवजलकाजुान कोडावगल बनाम कनााटका राज्य (2019) 2 एससीसी
752

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता श्री
प्रदीप कुमार ससिंह बिसेन, विद्िान अततररक्त
शासकीय अधििक्ता श्री अनिंत प्रताप ससिंह
एििं विपक्षी सिंख्या 3 के विद्िान अधििक्ता
श्री पिंकज कुमार ससिंह को सुना तर्था
पत्रािली का अिलोकन ककया।

2. प्रार्थी की तरफ से एक पूरक शपर्थपत्र प्रस्तुत ककया गया, जजसे असिलेख पर
सलया जाय।

3. िारा 482 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अिंतगगत प्रस्तुत इस प्रार्थगना पत्र द्िारा प्रार्थी
ने विद्िान अपर मुख्य न्यातयक मजजस्रेट,
कुण्डा, प्रतापगढ़ द्िारा पाररत आदेश हदनािंक
21.06.2023 जजसके द्िारा मुकदमा अपराि
सिंख्या 407 सन 2021 अिंतगगत िारा 419,
420, 467, 468, 471 िा०दिं०सिं० र्थाना कुण्डा
जनपद प्रतापगढ़ के सिंििंि में प्रस्तुत अिंततम
आख्या सिंख्या 210 सन 2022 तनरस्त करते
868 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
हुए पुनः वििेचना का आदेश हदया, की
िैिता को चुनौती दी है।

4. सशकायतकताग एक लेखपाल है और
हदनािंक 07.12.2021 को सलखाई गई प्रर्थम
सूचना ररपोटग सिंख्या 407 सन 2021 में
उसने कहा है कक जजलाधिकारी, प्रतापगढ़ ने
अपने आदेश द्िारा प्रार्थी के विरुद्ि
राजस्ि असिलेखों में काट-पीट ि छेड़खानी
करते हुए िोखािड़ी करने के सिंििंि में
तनयमसिंगत कायगिाही हेतु तनदेसशत ककया
गया है। लेखपाल ने प्रर्थम सूचना ररपोटग में
कहा कक प्रार्थी ने गाटा सिंख्या 2412 ग्राम
जमेठी में पेरोल पिंप खोलने हेतु हदनािंक
14.02.2020 को िय ककया र्था। प्रार्थी ने
सशकायतकताग से लेखपाल कक्ष में समलकर
नक्शा लेकर देखने के िहाने सशकायतकताग
की व्यिस्ता के कारण गाटा सिंख्या 2411
में लाइन खीिंचकर अपने खुद के गाटा
सिंख्या 2412 में समला सलया, जजसकी
जानकारी काश्तकारों की िीड़ के कारण
नहीिं हुई।

5. वििेचक ने राजस्ि तनरीक्षक की
आख्या के आिार पर कधर्थत आरोपों को
गलत पाते हुए अिंततम ररपोटग हदनािंक
10.04.2022 को प्रस्तुत कर दी जजसमें यह
कहा गया कक काट-छााँट के समयािधि से
काफी पूिग ही राजस्ि तनरीक्षक ि लेखपाल
द्िारा नक्शा नजरी ि ररपोटग प्रार्थी के पक्ष
में जारी ककया जा चुका है।

6. अिंततम आख्या के विरुद्ि आपवि
विपक्षी सिंख्या 2 कृपाशिंकर समश्र ने प्रस्तुत
की, जजनका कर्थन है कक िह गाटा सिंख्या
2411 के सह-खातेदार हैं तर्था उन्होंने यह
आरोप लगाया कक िन्दोिस्ती नक्शा
लेखपाल की असिरक्षा में र्था और नक्शे में
छेड़छाड़ लेखपाल की समलीिगत से की
गयी है। तत्कालीन मुख्य राजस्ि अधिकारी,
प्रतापगढ़ ने प्रकरण की जािंच कर आिश्यक
कायगिाही हेतु तनदेसशत ककया र्था तर्था जािंच
के उपरान्त राजस्ि असिलेखपाल कलेक्रेट
ि सहायक प्रिारी अधिकारी असिलेखागार,
प्रतापगढ़
ने
जािंच
आख्या
हदनािंक
26.07.2021 में कहा कक नक्शे में की गयी
कूट रचना के सिंििंि में प्रार्थसमकी दजग
करायी
जाय।
इसके
उपरान्त
हदनािंक
13.8.2021 को जजलाधिकारी, प्रतापगढ़ ने
प्रर्थम सूचना ररपोटग दजग कराने के आदेश
हदये हैं। लेखपाल ने प्रर्थम सूचना ररपोटग
जजलाधिकारी के आदेश के अनुसार प्रस्तुत
की, जिकक जजन असिलेखों में छेड़खानी हुई,
िह स्ियिं लेखपाल की असिरक्षा में र्थे तर्था
बिना उनकी समलीिगत के असिलेखों में
कूट-रचना होना सिंिि नहीिं र्था।

7. आलोच्य आदेश हदनािंक 21.6.2023
में विद्िान अततररक्त मुख्य न्यातयक
मजजस्रेट, कुण्डा, प्रतापगढ़ ने उक्त तथ्यों
को ध्यान में रखते हुए यह पाया कक
वििेचना के दौरान वििेचक ने गाटा सिंख्या
2411 के अन्य खातेदारान, कानूनगो हदलीप
3 All. Rahul Kumar Pandey Vs. State of U.P. & Ors.
869
कुमार, तहसीलदार कुण्डा ि परगनाधिकारी,
कुण्डा के ियान अिंककत नहीिं ककये हैं तर्था
असिलेखागार के असिलेखों का मूलयािंकन
नहीिं ककया है। वििेचक ने सशकायतकताग
कृपा शिंकर समश्र ि राजस्ि तनरीक्षक की
प्रकरण में िूसमका की वििेचना िी सम्यक
रूप से नहीिं की है। वििेचना में िहुत सी
ररजक्तयािं छोड़ दी गयी हैं जजस कारण
मामले की सिंपूणग पररजस्र्थततयािं न्यायालय
के समक्ष प्रस्तुत नहीिं की गयी। ऐसे में
अिंततम ररपोटग तनरस्त ककये जाने योग्य है।

8. उपरोक्त आदेश की िैिता को
चुनौती देते हुए प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता
ने पहला तकग यह ककया कक अिंततम ररपोटग
के विरुद्ि आपवि कृपा शिंकर समश्र ने की
है, जो मामले के सशकायतकताग नहीिं र्थे तर्था
उनको अिंततम आख्या के विरुद्ि आपवि
प्रस्तुत करने का कोई अधिकार नहीिं र्था।
इस तकग के समर्थगन में प्रार्थी के विद्िान
अधििक्ता ने अयूब खान नूरखान पठान
बनाम महाराष्ट्र राज्य, AIR 2013 SC Page
58 के तनणगय का आश्रय सलया जजसमें
माननीय उच्चतम न्यायालय ने अििाररत
ककया
है
कक
एक
अजनिी
व्यजक्त
आपराधिक कायगिाही में हस्तक्षेप नहीिं कर
सकता है, जि तक िह न्यायालय को यह
सिंतुष्ट न कर दे कक िह एक व्यधर्थत
व्यजक्त है। उक्त तनणगय में माननीय
उच्चतम न्यायालय ने रवि यशिंत भ्योर
(Bhoir) बनाम जिला कलेक्टर रायगढ़ तथा
अन्य (2012) 4 SCC 407 के एक तनणगय
पर आश्रय सलया, जजसमें यह ससद्िान्त
प्रततपाहदत
ककया
गया
कक
एक
सशकायतकताग को यह ससद्ि करना होगा
कक उसके ककसी विधिक अधिकार का हनन
हुआ है अर्थिा उसको कोई विधिक उपहतत
काररत हुई है।

9. िारा 2 (िक) दिं०प्र०सिं० में पीडड़त
की पररिाषा तनम्न प्रकार से दी गयी है;-
""पीडड़त' से िह व्यजक्त असिप्रेत है, जजसे
कायग या लोप के कारण काररत कोई हातन
या क्षतत हुयी है, जजसके सलये असियुक्त
व्यजक्त आरोवपत ककया गया है और पद
'पीडडत' में उसका सिंरक्षक या विधिक
उिराधिकारी शासमल है।

10. भगिंत स ंह बनाम कसमश्नर ऑफ
पुसल 1985 2 SCC 587 में माननीय
उच्चतम न्यायालय ने यह ससद्िान्त
प्रततपाहदत ककया कक पीडड़त व्यजक्त को
मजजस्रेट द्िारा पुसलस ररपोटग पर विचार
ककये जाने के समय उपजस्र्थत होकर अपना
पक्ष रखने का अधिकार है तर्था यहद िह
अपना पक्ष रखना चाहे तो मजजस्रेट उनको
सुनने के सलए िाध्य हैं।

11. िगिीत स ंह बनाम आशीष समश्रा
(2022) 9 SCC 321 के तनणगय में माननीय
उच्चतम न्यायालय ने कहा कक कुछ समय
पूिग तक आपराधिक विधि व्यिस्र्था में
न्यायालय मात्र असियुक्त तर्था राज्य के
870 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
िीच तनणगय करते र्थे। पीडड़त व्यजक्त,
जजसने अपराि के दुष्प्रिाि को सहन ककया
है, को तनणगय प्रकिया में सहिाधगता करने
का कोई अधिकार नहीिं र्था। ककन्तु अि
पीडड़त व्यजक्त के सुनिाई के अधिकार तर्था
आपराधिक प्रकिया में सहिाधगता के
अधिकार के सिंििंि में न्यायशास्त्र के
ससद्िान्तों में सुिार हो रहा है। वििातयका
ने
िहुत
सोच-समझकर
"पीडड़त
की
पररिाषा व्यापक और िृहद िनायी है,
जजसके अनुसार पीडड़त से तात्पयग ऐसे
व्यजक्त से है जजसने असियुक्त द्िारा
काररत अपकृत्य के कारण कोई हातन या
क्षतत सहन की है।"

12. आशीष समश्रा के उपरोक्त तनणगय
में
माननीय
उच्चतम
न्यायालय
ने
मजललकािुुन कोडागगल बनाम कनाुटक
राज्य (2019) 2 SCC 752 के तनणगय को
उद्िृत ककया, जजसमें कहा गया कक
न्यायपासलका पीडड़त के अधिकारों की रक्षा
करने के सलए एक सकिया िूसमका तनिा
रही है ककन्तु अिी िी िहुत कुछ ककया
जाना िाकी है। ितगमान में एक असियुक्त
के अधिकार कई मायनों में अपराि के
पीडड़त के अधिकारों से कहीिं अधिक
प्रिािशाली हैं। उनके अधिकारों में सिंतुलन
स्र्थावपत करने की आिश्यकता है जजससे
कक आपराधिक प्रकिया दोनों की तरफ
न्यायोधचत हो सके। पीडड़त व्यजक्त के
अधिकार अर्थिा पीडड़त शास्त्र का एक
उिरता हुआ क्षेत्र है तर्था इस क्षेत्र में सुिार
के सलए आगे िढ़ना अत्यन्त आिश्यक है।
पीडड़त व्यजक्त को अपराि होने के पश्चात
इस स्तर पर सुनिाई के तनहहत अधिकार
प्राप्त हैं तर्था उसके अधिकारो पर कोई
अिंकुश नहीिं लगाया जा सकता। माननीय
उच्चतम न्यायालय यह स्पष्ट ककया कक
"पीडड़त" तर्था "सशकायतकताग" आपराधिक
न्यायशास्त्र में दो अलग-अलग अर्थग रखते
हैं। यह अतनिायग नहीिं है कक सशकायतकताग
स्ियिं पीडड़त ही हो क्योंकक एक अजनिी
व्यजक्त िी अपराि की सशकायत कर
सकता है। इसी प्रकार पीडड़त को अपराि
का सशकायतकताग होना अतनिायग नहीिं है।

13. उपरोक्त विधिक ससद्िान्तों से
यह स्पष्ट है कक कोई िी पीडड़त व्यजक्त
न्यातयक प्रकिया में ककसी िी स्तर पर
हस्तक्षेप कर सकता है।

14. प्रस्तुत प्रकरण में आरोप यह है
कक प्रार्थी ने सशकायतकताग लेखपाल की
समलीिगत से गाटा सिंख्या 2411 की िूसम
राजस्ि असिलेखों में छेड़छाड़ करते हुए
गलत तरह से गाटा सिंख्या 2412 में समला
सलया। आपविकताग- विपक्षी सिंख्या 2 स्ियिं
के गाटा सिंख्या 2411 का सहखातेदार होना
कहता है, जजस तथ्य को प्रार्थी के विद्िान
अधििक्ता द्िारा वििाहदत ककया जा रहा
है।

15. जिकक विपक्षी सिंख्या 2 अपने को
गाटा सिंख्या 2411 का सहखातेदार होना
3 All. Rahul Kumar Pandey Vs. State of U.P. & Ors.
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कहता है तर्था प्रर्थम सूचना ररपोटग का
कर्थन है कक गाटा सिंख्या 2411 की िूसम के
अिंश को राजस्ि असिलेखों में कूट-रचना
करके गाटा सिंख्या 2412 में समला हदया
गया, तनजश्चत रूप से कधर्थत आरोप विपक्षी
सिंख्या 2 के अधिकारों पर विपरीत प्रिाि
डालते हैं तर्था िह एक पीडड़त व्यजक्त है।
इस कारण से प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता
की उपरोक्त आपवि में िल नहीिं है और
आपवि तनरस्त की जाती है।

16. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
अगला तकग यह हदया कक राजस्ि तनरीक्षक
की आख्या से यह स्पष्ट है कक लगाये गये
आरोप असत्य हैं। अगला तकग यह हदया कक
प्रर्थम सूचना ररपोटग में घटना िषग 2020 में
होना कही गयी है, जिकक प्रर्थम सूचना
ररपोटग हदनािंक 07.12.2021 को सलखाई गई।
प्रर्थम सूचना ररपोटग में हदनािंक 14.02.2020
को प्रार्थी द्िारा गाटा सिंख्या 2412 की िूसम
िय ककया जाना कहा गया है ककन्तु
असिलेखों में कूट-रचना करके गाटा सिंख्या
2411 के अिंश को 2412 में समला देने के
कृत्य की कोई ततधर्थ का कर्थन प्रर्थम
सूचना ररपोटग में नहीिं ककया है। अतः प्रार्थी
के विद्िान अधििक्ता का यह कर्थन कक
कधर्थत आरोप िषग 2020 में घहटत हुआ,
असिलेखों से समधर्थगत नहीिं है और िलहीन
है।

17. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
इसके िाद यह तकग प्रस्तुत ककया कक प्रर्थम
सूचना ररपोटग में कहे गये कर्थन असत्य हैं
और इस कारण वििेचना के दौरान उनकी
पुजष्ट न होने पर वििेचक ने सही प्रकार से
अिंततम आख्या प्रस्तुत की र्थी और ऐसी
पररजस्र्थतत में पुनः वििेचना का कोई आिार
नहीिं है।

18. इस सिंििंि में विद्िान विचारण
न्यायालय ने आलोच्य आदेश हदनािंक
21.6.2023 में समस्त तथ्यों की समीक्षा
करते हुए आदेश पाररत ककया है जजसमें यह
तथ्य िी सजम्मसलत है कक नक्शे में काटपीट के सिंििंि में कोई आदेश पाररत नहीिं
ककया गया है। गाटा सिंख्या 2411 के अन्य
खातेदार,
कानूनगो,
तहसीलदार
ि
परगनाधिकारी के ियान अिंककत नहीिं ककये
गये हैं और असिलेखागार के असिलेखों का
मूलयािंकन िी नहीिं ककया गया है।

19. ऐसी पररजस्र्थतत में विद्िान
विचारण न्यायालय ने यह सिंतोष अिंककत
करने में कोई त्रुहट काररत नहीिं की है कक
वििेचना में कई चीजें छूट गीिं हैं और ऐसी
पररजस्र्थतत में पुनः वििेचना के आदेश में
कोई िैिातनक त्रुहट प्रतीत नहीिं होती है।

20. प्रार्थगना-पत्र िलहीन है और
तद्नुसार ननरस्त ककया जाता है।
872 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
----------
(2024) 3 ILRA 872
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 28.02.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 1687 of 2024

Executive Officer, Nagar Palika Parishad,
Balrampur Rakesh Kumar Jaiswal & Anr.
 ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Ankit Mishra, Mohd. Ali

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

Criminal Law - Criminal Procedure Code,
1973 - Sections 156(3), 197, 197(1), 200,
202 & 482 - Indian Penal Code, 1860 -
Sections 323, 504 & 506 - Application under
Section 482 Cr.P.C. - for quashing the Chief
Judicial Magistrate's order by which took
cognizance of offences under Sections 323, 504,
and 506 IPC - complaint case - alleging abuse
and threats during a dispute over property
mutation - St.ment recorded u/s 200 & 202 of
Cr.P.C. - trial court summoned the applicant to
face trial - Applicants contested the summoning
order by filing criminal revision - dismissed -
revision court upheld the summoning order -
hence the instant application u/s 482 Cr.P.C. -
applicants argued that the Magistrate failed to
comply with a 2007 circular requiring St.ments
under Section 200 Cr.P.C. to be recorded in the
Magistrate's
handwriting
and
that
prior
government sanction under Section 197 Cr.P.C.
was necessary - court observed that, prima
facie trial court's satisfaction were deemed
sufficient, and the revision was dismissed as
lacking merit - Court held that, the mere
violation of any executive instruction by a
Magistrate will not vitiate the validity of the
criminal proceedings, unless there is violation of
any provision of Cr.P.C. in conducting the
proceedings - and - there is absolutely no
requirement of obtaining a prior sanction for
prosecuting the applicants for such offences and
Section 197 Cr.P.C. would not apply in such a
situation - consequently, application under
section 482 Cr.P.C. is dismissed being found no
illegality in lower court orders.
(Para - 9, 13, 17, 18)

Application Dismissed. (E-11)

List of referred Cases: -

1. Hamid Ali Vs St. of U.P., 2020 SCC OnLine All
1567,

2.
St.
of
Gujarat
Vs
Afroz
Mohammed
Hasanfatta: (2019) 20 SCC 539,

3. Shambhu Nath Misra [(1997) 5 SCC 336,

4. St. of Orissa Vs Ganesh Chandra Jew, (2004)
8 SCC 40,

5. Shadakshari Vs St. of Karn., 2024 SCC OnLine
SC 48.

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. Heard Sri Mohd. Ali, the learned
counsel appearing for the applicants and Sri
Anant Pratap Singh, the learned AGA for
the State and perused the record.

2. By means of the instant application
filed under Section 482 Cr.P.C., the
applicants have challenged the validity of
the order dated 10.05.2022 passed by the
Chief Judicial Magistrate, Balrampur in
Complaint No. 678 of 2021, whereby the
Magistrate
has
taken
cognizance
of
offences under Sections 323, 504, 506 IPC
on the basis of a complaint filed by the
opposite party no. 2. The applicant has also
challenged the validity of the judgment and
order dated 25.01.2024 passed by the
Sessions Judge, Balrampur dismissing