# Rajiv @ Raju Kumar v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** WRIT-C No. 11448 of 2017
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2019-11-15
- **Case number:** WRIT-C No. 11448 of 2017
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/rajiv-raju-kumar-v-state-of-u-p-ors-45197
- **Pages:** 8

## Headnote

C.S.C., Sri Sher Bahadur Yadav, Sri Shiv
Shankar Gupta

d- mrj izns"k vko";d oLrq 1⁄4foØ; ,oa forj.k fu;U«k.k
dk fofu;eu1⁄2 vkns"k] 2016 & mfpr ewY; dh nqdku &
vuqcU/k i«k dk fujLrhdj.k & uSlfxZd U;k; dk fl)kUr
& tkap fjiksV dh izfr miYkC/k u djkus dk izHkko &
dk;Zokgh pkgs U;kf;d gks ;k iz"kklfud ;k v/kZ&U;kf;d]
uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk ikYku gksuk vko";d gS &
fu.kZ; Yksus dh izfØ;k esa fu'i{krk lqfuf"pr djuk fu'i{k
fu.kZ; ds vf/kdkj dk ,d egÙoiw.kZ LrEHk gS & leLr
dk;Zokgh dk ,dek«k vk/kkj tkap vk[;k gS] ftldh izfr
miYkC/k u djkuk uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk mYYka?ku gS
& fu/kkZfjr fd;k x;k fd uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk
vuqikYku u djus ds vk/kkj ij leLr dk;Zokgh fujLr
fd;k tk ldrk gSA 1⁄4iSjk 13] 14 ,oa 151⁄2
A.
Civil
Law-Uttar
Pradesh
Essential
Commodities (Regulation of Sale and
Distribution Control) Order, 2016 - Fair
Price Shop - Cancellation of Licence -
Principle of Natural Justice - Effect of not
providing the copy of Enquiry Report -
The principle of natural justice is required
to be followed in every proceeding, it is
either judicial or administrative or quasijudicial - Ensuring the fairness during
adjudicating process is significant for right
to get fair justice - Not providing the copy
of the enquiry report, which is the sole
basis of the entire process, is violation of
principle of natural justice - Held, noncompliance of principle of natural justice
may result into quashing of entire process.
(Para 13, 14 and 15)
fjV ;kfpdk fuLrkfjr 1⁄4 E-11⁄2
Writ Petition disposed off (E-1)
mYysf[kr iwoZ&fu.kZ;
1- fjV ;kfpdk la[;k 4011 lu~ 2010 jked`ikYk
;kno cuke m0 iz0 ljdkj ,oa vU; dk fu.kZ;
fnukafdr 05-05-2011
2- ,l0 ,Yk0 diwj cuke txeksgu ,.M lUl
1980 1⁄441⁄2 ,l-lh-lh- 379
3- ,l ,l fxYk cuke phQ bYksD"ku dfe"kuj
1978 1⁄411⁄2 ,l-lh-lh- 405

## Text

3-5 All. Rajiv @ Raju Kumar Vs. State of U.P. & Ors.
1829
pending before Revenue Courts/Revenue
Authorities?

(v) Whether the Chairman and
the Members of the Board of Revenue are
appointed in consultation with Hon'ble The
Chief Justice?

The required affidavit would be filed
by the Additional Chief Secretary of
Revenue Department of the State of Uttar
Pradesh, within four weeks.

20. Since the issues noticed in this
order are predominantly found to be in
public interest, as such, the Registry is
directed to treat this matter alongwith
connected petitions as a Public Interest
Litigation and to place it on 6th April, 2020
before a bench to be nominated by Hon'ble
the Chief Justice.
----------
(2020)03-05ILR A1829
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 15.11.2019

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

WRIT-C No. 11448 of 2017

Rajiv @ Raju Kumar ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Sudeep Dwivedi

Counsel for the Respondents:
C.S.C., Sri Sher Bahadur Yadav, Sri Shiv
Shankar Gupta

d- mrj izns"k vko";d oLrq 1⁄4foØ; ,oa forj.k fu;U«k.k
dk fofu;eu1⁄2 vkns"k] 2016 & mfpr ewY; dh nqdku &
vuqcU/k i«k dk fujLrhdj.k & uSlfxZd U;k; dk fl)kUr
& tkap fjiksV dh izfr miYkC/k u djkus dk izHkko &
dk;Zokgh pkgs U;kf;d gks ;k iz"kklfud ;k v/kZ&U;kf;d]
uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk ikYku gksuk vko";d gS &
fu.kZ; Yksus dh izfØ;k esa fu'i{krk lqfuf"pr djuk fu'i{k
fu.kZ; ds vf/kdkj dk ,d egÙoiw.kZ LrEHk gS & leLr
dk;Zokgh dk ,dek«k vk/kkj tkap vk[;k gS] ftldh izfr
miYkC/k u djkuk uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk mYYka?ku gS
& fu/kkZfjr fd;k x;k fd uSlfxZd U;k; ds fl)kUr dk
vuqikYku u djus ds vk/kkj ij leLr dk;Zokgh fujLr
fd;k tk ldrk gSA 1⁄4iSjk 13] 14 ,oa 151⁄2
A.
Civil
Law-Uttar
Pradesh
Essential
Commodities (Regulation of Sale and
Distribution Control) Order, 2016 - Fair
Price Shop - Cancellation of Licence -
Principle of Natural Justice - Effect of not
providing the copy of Enquiry Report -
The principle of natural justice is required
to be followed in every proceeding, it is
either judicial or administrative or quasijudicial - Ensuring the fairness during
adjudicating process is significant for right
to get fair justice - Not providing the copy
of the enquiry report, which is the sole
basis of the entire process, is violation of
principle of natural justice - Held, noncompliance of principle of natural justice
may result into quashing of entire process.
(Para 13, 14 and 15)
fjV ;kfpdk fuLrkfjr 1⁄4 E-11⁄2
Writ Petition disposed off (E-1)
mYysf[kr iwoZ&fu.kZ;
1- fjV ;kfpdk la[;k 4011 lu~ 2010 jked`ikYk
;kno cuke m0 iz0 ljdkj ,oa vU; dk fu.kZ;
fnukafdr 05-05-2011
2- ,l0 ,Yk0 diwj cuke txeksgu ,.M lUl
1980 1⁄441⁄2 ,l-lh-lh- 379
3- ,l ,l fxYk cuke phQ bYksD"ku dfe"kuj
1978 1⁄411⁄2 ,l-lh-lh- 405

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. वतुमान व्यवहार प्रकीणु यालचका
के माध्यम से याची ने प्राथुना की है लक,
आयुक्, आजमगढ मण्डल, आजमगढ
1830 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
द्वारा पाररत लनणुय लदनाुंक 25.01.2017,
लजससे याची के द्वारा दायर की गई अपील
सुंख्या 256/F (अन्तगुत 13 (3) उत्तर प्रदेश
अनुसूलचत वस्तु लवतरण आदेश 2016
(सुंक्षेप में 'आदेश 2016') बलहीन होने के
कारण लनरस्त की गयी है तथा उप
लजलालिकारी लनजामाबाद, आजमगढ द्वारा
पाररत
आदेश
लदनाुंक
06.09.2016,
लजससे द्वारा याची के उलचत दर दुकान का
अनुबन्ध पत्र लनरस्त लकया गया था, उक्
आदेश की पुिी की गई है, को लनरस्त लकया
जाये।

2. याची सरकारी सस्ते गल्ले, लमट्टी
तेल का लवक्रेता है एवुं उसे उलचत दर
दुकान (ग्राम पुंचायत खानपुर लचतरलवल,
लवकासखण्ड लमजाुपुर) का अनुबन्ध पत्र
जारी लकया गया था तथा याची सन् 1992 से
उलचत दर दुकान कॊ लगातार चला रहा था।
लदनाुंक 24.06.2016 को दूरभाष पर की
गयी लशकायत के क्रम में याची की उलचत
दर दुकान पर आकास्स्मक स्थलीय लनरीक्षण
क्षेत्रीय पूलतु लनररक्षक, लनजामाबाद द्वारा
लकया गया। लनरीक्षण के दौरान मौके पर
उपस्स्थत ग्रहस्स्थयोुं/ अुंत्योदय काडु िारको
व उनके पररवार से खाद्यान लवतरण सम्बिी
पूि-ताि भी करी गई। दुकान पर पात्र
गृहस्स्थयोुं/ अुंत्योदय काडु िारकोुं की सूची,
सामान की दर ाेे का पट्ट, सामाग्री पट्ट,
सूचना पट्ट आलद प्रदलशुत नहीुं लकया गया
था। पूिताि के दौरान यह भी लवलदत हआ
लक याची का व्यवहार ग्राहको के प्रलत अच्छा
नहीुं रहता था। याची ने अुंत्योदय काडु
िारको कॊ शासन द्वारा लनिाुररत मात्रा से
कम एवुं अलिक मूल्य पर खाद्यान का
लवतरण लकया एवुं अन्य लशकायतें भी पायी
गई। अतः यह माना गया लक याची ने आदेश
2004 व अनुबन्ध पत्र की शतो का उल्लुंगन
लकया है। तदानुसार उप लजलालिकारी,
लनजामाबाद आजमगढ ने क्षेलत्रय पूलतु
लनरीक्षक, लनजामाबाद की जााँच आख्या
लदनाुंक 26.06.2016 पर सुंज्ञान लेते हए,
अपने आदेश लदनाुंक 29.06.2016 के द्वारा
याची का अनुबन्ध पत्र तत्काल प्रभाव से
लनलस्म्बत कर लदया तथा याची को एक
सप्ताह के अन्दर अपना पक्ष रखने का
समय लदया। साथ ही साथ याची के उलचत
दर दुकान का समस्त कोटा दूसरी दुकान से
सम्बन्ध कर लदया गया।

3. याची के अपना स्पिीकरण एक
लनवेदन के रूप में लदया लजसमें कहा गया
लक सूची सम्रागी दर पट्ट व समाग्री पट्ट
प्रदलशुत लकया गया था। यह भी कहा लक
कुि काडु िारक दुबारा बयान देना चाहते
है, क्ोुंलक पहले उन्होने लकसी दबाव में
आकर याची के लवरूद्ध ब्यान लदया था।
याची के लवरूद्ध लशकायत मात्र चुनावी
रुंलजश के कारण की गई है। अन्तः प्राथुना
की गई लक लनलस्म्बत दुकान बहाल करी
जायॆ। याची ने माह अप्रैल, मई, जून सन्
2016 की लवतरण पुंलजका व स्टाक पुंलजका
की िाया प्रलत व समस्त योजनाओ के काडु
िारको का सामूलहक हस्ताक्षर लकया गया
प्राथुना पत्र भी प्रस्तुत लकया।

4. याची के स्पिीकरण देने के
उपरान्त उपलजलाअलिकारी, लनजामाबादा,
आजमगढ ने प्रकरण की सुनवाई करी तथा
क्षेत्रीय पूलतु लनररक्षक की जााँच आख्या
लदनाुंक 26.06.2016, याची द्वारा लदया गया
ललस्खत स्पिीकरण एवुं सुंलग्न प्रदशों का
3-5 All. Rajiv @ Raju Kumar Vs. State of U.P. & Ors.
1831
ध्यान पूवुक पररशीलन करने के उपरान्त
प्रालिकारी इस लनष्कषु पर पहचे की याची
(उलचत दर लवक्रेता) ने आवश्यक वस्तुओ के
लवतरण में गम्भीर अलनयमतायें काररत की
है। िलस्वरूप याची का अनुबन्ध पत्र
लनरस्त करने योग्य है। तदनानुसार अनुबन्ध
पत्र लनरस्त करने का आदेश लदनाुंक
16.09.2016 पाररत लकया। उक् आदेश
के प्रमुख अुंश लनम्न है।

" इस प्रकार उलचत दर लवक्रेता
ग्रामपुंचायत खानपुर लचतरावल द्वारा लदनाुंक
12.07.2016 को प्रस्तुत स्पिीकरण व
साक्ष्योुं का क्षेत्रीय पूलतु लनरीक्षक द्वारा
परीक्षणोपरान्त
आख्या
लदनाुंक
14.09.2016 प्रस्तुत लकया गया लक लवक्रेता
द्वारा अन्तयोदय काडुिारको में शासन द्वारा
लनदाुररत मात्रा से कम मात्रा एवुं लनिाुररत
मूल्य से अलिक मूल्य 95 रू० के स्थान पर
100रू० लेकर खाद्यान का लवतरण लकया
गया है लवक्रेता द्वारा प्रस्तुत की गयी
स्पिीकरण में अलिक मूल्य ललया जाना
स्वीकार लकया गया है तथा चीनी का लवतरण
लनिाुररत मात्रा 02 लकग्रा० के स्थान पर 01
लकग्रा० शासन द्वारा लनिाुररत मूल्य 13.50
रू० प्रलत लकग्रा० न लेकर 15.00 रू० ललया
जाना लवक्रेता द्वारा स्वाीकार लकया गया है।
पात्र गृहस्थी के अलिकाुंश काडुिारकोुं में
राशन लवतरण नहीुं लकया गया है। पात्र
गृहस्थी के अलिकुंश काडु िारकोुं में राशन
लवतरण नहीुं लकयागया है। कुि पात्र गृहस्थी
काडो पर लवतरण लकया गया है तो दजु
यूलनट के अनुसार लवतरण न करके मनमाने
ढुंग से कम मात्रा व अलिक मूल्य पर
लवतरण लकया गया है। समस्त योजना के
काडु िारकोुं में लमट्टी तेल शासन द्वारा
लनिाुररत मात्रा पर लवतरण लकया गया है
लकन्तु अलिक मूल्य ललया गया है। लवक्रेता
द्वारा प्रस्तुत लवतरण पुंलजका में काडुिारकोुं
के नामोुं के सम्मुख मात्रा व मूल्य अुंलकत है
लकन्तु प्राप्तकताु के हस्ताक्षर वाले कालम में
अलिकतर अुंगूठा लनशानी लगा है , ऐसा
प्रतीत होता है लक बाद में लनशानी अुंगूठा
लगा लदया गया है तथा लवतरण पुंलजका
लकसी भी सक्षम अलिकारी द्वारा प्रमालणत
नहीुं है। समस्त पात्र गृहस्थी योजनाओुं के
काडुिारकोुं एक ही मात्रा में खाद्यान्न का
लवतरण करना अुंलकत है जबलक यूलनट के
अनुसार खाद्यान लवतरण लकया जाना था
लजससे स्पि है लक लवक्रेता द्वारा कपटपूणु
नीलत से लवतरण पुंलजका तैयार की गयी है।
लवक्रेता द्वारा प्रस्तुत स्पिीकरण के पुि भाग
पर सुंयुक् रूप से लोगो का हस्ताक्षर व
लनशानी अुंगूठा लगवाया गया है इन लोगो
का न तो काडु सुंख्या अुंलकत है और न तो
लकस योजना के काडुिारक है, इसका भी
उल्लेख नहीुं है। लवक्रेता द्वारा काडुिारको
से दुव्युवहार का दोषी पाया गया है। लवक्रेता
द्वारा अन्तयोदय काडुिारकोुं में शासन द्वारा
लनिाुररत मात्रा से कम एवुं अलिक मूल्य पर
खाद्यान्न का लवतरण लकया जाना, चीनी
लनिाुररत मात्रा/मूल्य पर लवतरण न करना,
लमट्टी तेल का लवतरण लनिाुररत मूल्य पर न
करना, काडुिारको से दुव्युवहार करना
उलचत
दर
दुकान
पर
पात्र
गृहस्थीयोुं/अन्त्योदय काडुिारको की सूची,
रेट व स्टाक बोडु, साइन बोडु, टोलफ्री नुं०
प्रदलशुत न करना जो उ०प्र० अनूसूलचत वस्तु
लवतरण आदेश 2004 व अनुबन्ध पत्र की
शतो का उल्लघुंन है। उलचत दर लवक्रेता श्री
राजू कुमार द्वारा लनलम्बन के क्रम में प्रस्तुत
स्पिीकरण व साक्ष्य बलहीन व तथ्यहीन
1832 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
पाये जाने के िलस्वरूप उलचत दर की
दुकान का अनुबन्ध-पत्र बनाये रखना
जनलहत व अनुसुलचत वस्तु लवतरण आदेश
2004 के प्रालविानो के क्रम में उलचत नहीुं
है, लजसके िलस्वरूप क्षेत्रीय पूलतु लनरीक्षक
द्वाारा लनलस्म्बत लवक्रेता श्री राजू कुमार के
उलचत मूल्य की दुकान का अनुबन्ध- पत्र
लनरस्त लकये जाने की सुंस्तुलत की गयी है।"

5. याची अपने अनुबन्ध पत्र के लनरस्त
करने के आदेश लदनाुंक 16.09.2016 के
क्षुब्द होकर कस्ण्डका सुं 28(3) , उत्तर
प्रदेश आवश्यक वस्तु (लवक्रय एवुं लवतरण
लनयुंत्रण का अलिलनयम) आदेश 2016
(सुंिेप में 'आदेश 2016') के अुंतगुत
आयुक् आजमगढ मण्डल, आजमगढ के
समक्ष अपील दायर की। अपील के मुख्य
आिार लनम्न ललस्खत है :-

"10- यह लक क्षेत्रीय पूलतुलनरीक्षक
की जॉच आख्या 14.09.2016 की भी
कापी अपीलकताु को नहीुं दी गयी जो
नैसलगुक न्याय के लसद्धान्त के लवपरीत है।

11- यह लक उपरोक् से यह भी
स्पि होता है लक क्षेत्रीय पूलतु लनरीक्षक ने
लदनाुंक 24.06.2016 की लशकायत पर
लदनाुंक 26.6.2016 को जॉच ररपोटु लदया
और लिर प्राथी के स्पिीकरण एवुं समस्त
अलभलेखोुं का परीक्षण भी पूलतु लनरीक्षक
द्वारा लकया गया बताया गया और पुनः जॉच
आख्या लदनाुंक 24.09.2016 को दी गई।
इस
प्रकार
लशकायतकताु
ही
जॉच
अलिकारी के रूप में अनुबन्ध पत्र लनरस्त
करने का लनणुय भी ललया जो कानूनन गलत
है। क्ोुंलक उपलजलालिकारी द्वारा स्वयुं
स्वतुंत्र रूप से कोई लनणुय नहीुं ललया गया।

12- यह लक उपलजलालिकारी
द्वारा जॉच आख्या लदनाुंक 14.09.2016 के
आिार पर आदेश पाररत लकया गया है जॉच
आख्या से सुंतुि होने का कोई लनष्कषु
आदेश में नहीुं लदया है लक लकस आिार पर
अनुबन्ध पत्र लनरस्त लकया गया है।"

6. आयुक्, आजमगढ मण्डल,
आजमगढ
ने
अपने
आदेश
लदनाुंक
2.1.2017 के माध्यम से याची की अपील
सुंख्या 256/ए को बलहीन मानते हए लनरस्त
कर लदया। आदेश कॆ प्रमुख अुंश लनम्न है।

"पत्रावली के अवलोकन से स्पि है
लक अपीलकताु की ओर से लदनाुंक
12.07.2016 को स्पिीकरण लदया गया है,
लजसके साथ सादे पेपर पर कलतपय
ग्रामवालसयोुं के हस्ताक्षर है, एवुं अलभलेखोुं
की िायाप्रलत एवुं कुि अलभलेखोुं की मूल
प्रलत प्रस्तुत की गयी है। लवतरण रलजस्टर
लकसी भी अलिकारी द्वाार प्रमालणत नहीुं
लकया गया है, जबलक लवतरण रलजस्टर के
अस्न्तम पृष्ठ पर यह प्रमालणत नहीुं लकया
गया है, जबलक लवतरण रलजस्टर के अस्न्तम
पृष्ठ पर यह प्रमालणत लकया जाता है लक
रलजस्टर में क्रमाुंक इतने से इतने पन्ने हैं।
केवल माह अप्रैल 2016 के लमट्टी तेल का
रलजस्टर प्रमालणत लकया गया है। लवद्वान
उपलजलालिकारी द्वारा अपीलकताु की ओर
से प्रस्तुत स्पिीकरण व अलभलेखोुं का क्षेत्रीय
पूलतु लनरीक्षक से परीक्षण कराया गया है।
क्षेत्रीय
पूलतु
लनरीक्षक
द्वारा
लदनाुंक
14.09.2016 को प्रस्तुत लकया गया, लजसमें
उल्लेख लकया गया लक समस्त पात्र गृहस्थी
योजना के काडुिारकोुं को एक ही मात्रा में
खाद्यान्न लवतरण लकया जाना अुंलकत लकया
3-5 All. Rajiv @ Raju Kumar Vs. State of U.P. & Ors.
1833
गया है। जबलक यूलनट के आिार पर
खाद्यान्न लवतरण लकया जाना चालहए। लवक्रेता
द्वारा प्रस्तुत लवतरण पुंलजका में काडुिारकोुं
के नाम के सम्मुख मात्रा व मूल्य अुंलकत है,
लकन्तु प्राप्त कताु के हस्ताक्षर वाले कालम
में अलिकतर लनशानी अुंगूठा लगा है तथा
लवतरण रलजस्टर सक्षम अलिकारी द्वारा
प्रमालणत नहीुं है। समस्त योजनाओुं के
काडुिारकोुं के लमट्टी तेल शासन द्वारा
लनिाुररत मात्रा पर लवतरण लकया गया है,
लकन्तु लनिाुररत मूल्य से अलिक मूल्य ललया
गया है। लवक्रेता द्वारा अपने स्पिीकरण के
पुि भाग पर सुंयुक् रूप से लोगोुं का
हस्ताक्षर लनशानी अुंगूठा लगवाया गया है,
जबलक न तो उन लोगो काडु सुंख्या अुंलकत
लकया गया है और न तो लकस योजना के
काडुिारक हैं, इसका भी कोई उल्लेख नही
लकया गया है। अपने परीक्षण ररपोटु में यह
भी अुंलकत लकया है लक लवक्रेता द्वारा
काडुिारकोुं से दुव्युवहार का दोषी पाया
गया है। अन्त्योदय बी०पी०एल० एवुं पात्र
गृहस्थी योजना के खाद्यान्न, चीनी, लमट्टी तेल
आलद लनिाुररत मात्रा से कम व लनिाुररत
मूल्य से अलिक मूल्य पर लवतरण लकया गया
है। इस प्रकार स्पिीकरण व साक्ष्य बलहीन
व तथ्यहीन पाये जाने के कारण अनुबन्ध पत्र
बनाये रखने का कोई औलचत्य न पाते हए
दुकान लनरस्त लकये जाने की सुंस्तुलत की
गयी है।

इस
प्रकार
लवद्वान
उपलजलालिकारी
द्वारा
अपीलकताु
के
लवतरण के लवरूद्ध पूवु में भी की गयी
लशकायत तथा दूरभाष पर की गयी
लशकायत के आिार पर पूलतु लनरीक्षक से
आकस्स्मक
स्थलीय
लनरीक्षण
कराकर
काडुिारकोुं के बयान के आिार पर जाुंच में
पायी गयी गम्भीर अलनयलमतताओुं के
दृलिगत अपीलकताु की दुकान का अनुबन्ध
पत्र, स्पिीकरण प्राप्त कर पुनः स्पिीकरण
व अलभलेखोुं का परीक्षण कराकर जाुंच में
पायी गयी गम्भीर अलनयलमतताओुं के
दृलिगत अपीलकताु की दुकान को बनाये
रखने का कोई औलचत्य न पाते हए आलोच्य
आदेश
लदनाुंक
16.09.2016
द्वारा
अपीलकताु की दुकान का अनुबन्ध पत्र
लनरस्त लकया है। इस प्रकार लवद्वान
उपलजलालिकारी द्वारा पत्रावली उपलब्ध
अलभलेखोुं व साक्ष्योुं का लवलिवत परीक्षण
करने के उपरान्त ही आलोच्य आदेश
लदनाुंक 16.09.2016 पाररत लकया है,
लजसमें लकसी प्रकार के हस्तक्षेप का कोई
औलचत्य नहीुं पाया जाता है। अपील लनरस्त
होने योग्य है।

अतः अपीलकताु द्वारा प्रस्तुत
अपील बलहीन होने के कारण लनरस्त की
जाती है। अवर न्यायालय की पत्रावली
आदेश की प्रलत सलहत वापस की जाती है।
बाद आवश्यक कायुवाही इस न्यायालय की
पत्रावली दास्खल दफ्तर हो।"

7. याची ने वतुमान यालचका के द्वारा
उपरोक् वलणुत आक्षेलपत आदेश लदनाुंक
25.1.2017 व 16.9.2016 को लनरस्त
करने की प्राथुना की है। याची नॆ यालचका के
प्रस्तर 20 व आिार प्रस्तर (I) व (II) में
उल्लेख लकया है, लक क्षेत्रीय पुलतु अलिकारी
द्वारा की गई जॉच आख्या लदनाुंक
26.06.2016 की प्रलत-याची को नहीुं दी
गयी थी। अतः याची के लवरुद्ध समस्त
कायुवाही नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तो के
लवरूद्ध की गई है, अतः ऐसी कायुवाही
लनरस्त लकये जाने योग्य है। याची ने अपने
1834 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
कथन के समथुन में कुि लवलि वयवस्थाओ
का भी उल्लेख लकया है।

8. प्रलत-पक्षी सुंख्या 3 ने प्रलत शपथ
पत्र दास्खल लकया है तथा यालचका के प्रस्तर
सुंख्या 20 के उत्तर में लनम्न ललखा है।

"यह लक यालचका के प्रस्तर
सुंख्या-20 में उस्ल्लस्खत लवलि व्यवस्थाओुं
पर लटप्पणी की आवश्यकता नहीुं है शेष
लजस प्रकार ललस्खत है, स्वीकर नहीुं है
क्ोुंलक याची द्वारा आवश्यक वस्तुओुं के
लवतरण में अलनयलमतता लकया जाना लसद्ध
पाये जाने के िलस्वरूप याची का अनुबन्धपत्र लनरस्त लकया गया। याची द्वारा
उस्ल्लस्खत लवलि व्यवस्थाए याची के प्रकरण
मे लागू नहीुं है।"

प्रलत पक्षी सुंख्या ३ ने आिार सुंख्या (I)
व (II) का कोई प्रलत उत्तर नहीुं लदया है।
याची द्वारा प्रलतशपथ का उत्तर भी दास्खल
लकया
लजसमे
जााँच
आख्या
लदनााँक
26.06.2016 को याची को न देने का तथ्य
लिर से उल्लेस्खत लकया है।

9. याची के लवद्वान अलिवक्ा हरीश
चन्द्र दूबे ने प्रबल प्रलतवेदन लकया और कहा
लक याची के लवरूद्ध समस्त कायुवाही
नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तोुं के लवरूद्ध की
गई है। याची को जााँच आख्या की प्रलत नहीुं
दी गई है। याची के द्वारा लदये गये दस्तावेजो
का पररशीलन ध्यान पूवुक नहीुं लकया गया
है। उप लजलालिकारी ने मात्र जााँच आख्या
पर ही केस्न्द्रत होकर अपना आदेश पाररत
लकया। उप लजलालिकारी ने अपना कोई
स्वतुंत्र लनष्कषु नहीुं लदया है। इसी क्रम में
आयुक् महोदय ने भी याची की अपील
सतही व अनौपचाररक रूप से लनरस्त कर
दी एवुं अपील में ललये गये लवलभन्न आिार
पर कोई ध्यान या लटप्पणी नहीुं करी है।

10. याची के लवद्वान अलिवक्ा ने इस
न्यायालय की एकल पीठ द्वारा पाररत लवलि
वयवस्था (रामकृपाल यादव बनाम उ०प्र०
सरकार एवुं अन्य ररट लपलटशन नुं० 4011
(एम०आई०एस) आि 2010 व अन्य
यालचकाओुं
का
लनणुय
लदनाुंक
05.05.2011) पर इस न्यायालय का ध्यान
आकृलषत कराया, लक उक् व्यवस्था में यह
प्रलतपालदत लकया है लक, लकसी अनुबन्ध पत्र
को लनरस्त करना एक गुंभीर लवषय है,
लजसपर अनौपचाररक रूप में लनणुय नही
ललया जा सकता। लनणुय लेने वाले
प्रालिकारी को लनष्पक्षता से लनणुय लेना
चालहये एवुं नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तो का
पालन करना चालहये। ऐसा दस्तावेज (जैसे
जााँच आख्या, लनरीक्षण आख्या आलद)
लजसका उपयोग पीलड़त के लवरूद्ध लकया
गया हैं, उसकी प्रलत उसको न देना, ऐसे
स्थालपत लनयमोुं के लवरूद्ध होगा तथा ऐसे
आदेश लनरस्त लकये जाने योग्य होगे।

11. प्रलत उत्तर में उ०प्र० सरकार के
स्थाई अलिवक्ा ने कथन लकया की याची ने
वृहद स्तर पर आदेश 2004 व लनबन्धन पत्र
की शतो के लवरूद्ध कायु लकया एवुं गम्भीर
अलनयलमताये बरती है। क्षेत्रीय पूलतु लनरीक्षक
की जाुंच आख्या में उल्लेस्खत है लक याची ने
ग्राहको को अलिक मूल्य में कम सामग्री
प्रदान करी व दुकान पर सूचना पट्ट इत्यालद
भी नहीुं लगाये थॆ। याची का व्यवहार भी
ठीक नहीुं रहा। याची ने ऐसा कोई
स्पिीकरण
नहीुं
लदया
है
लजससे,
3-5 All. Rajiv @ Raju Kumar Vs. State of U.P. & Ors.
1835
लनरस्तीकरण आदेश में ललये गये आिार
असत्य माने जाये। याची को अपना पक्ष
रखने के ललए समय लदया गया तथा याची ने
ललस्खत स्पिीकरण के साथ आवश्यक
दस्तावेज भी लगाये थे, लजनका पररशीलन
लकया गया। अतः नैसलगुक न्याय के लनयमो
का पूणुतः पालन हआ है।

12. याची व प्रलतवादीगण के लवद्वान
अलिवक्ाओुं के कथनो का श्रवण लकया एवुं
उपलब्ध दस्तावेजो तथा लवलि व्यवस्थाओ
का पररशीलन ध्यान पूवुक लकया।

13. नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तो का
पालन लकसी भी कायुवाही चाहे वो न्यालयक,
प्रशासलनक, न्यालयकल्प ही क्ो न हो
आवश्यक है। यह लवलि सम्मत है लक सही,
लनष्पक्ष एवुं पारदशी लनणुय के ललए इन
लसद्धान्तो का पालन करना अलनवायु है।
लनणुय लेने की प्रलक्रया में लनष्पक्षता
सुलनलशलक्षत करना लनष्पक्ष लनणुय के
अलिकार का एक महत्वपूणु स्तम्भ है। ऐसी
प्रलक्रया लजसमें इन लसद्धान्तो का पररपालन
नहीुं लकया जाता है, तो ऐसा माना जायेगा
लक पीलड़त व्यस्क् के अलिकारो पर
प्रलतकूल प्रभाव हआ है।

14. सवोच् न्यायालय ने अपने कई
लनणुय मे लनरुंतर यह प्रलतपालदत लकया है लक
नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तो का पालन
अलनवायु रूप से लकया जाना चालहये। ऐसा
न करने से समस्त कायुवाही लनरस्त की जा
सकती है। लसद्धान्तो का पररपालन न करने
से यह माना जायेगा की कायुवाही मे
लनष्पक्षता नहीुं रखी गयी है। एस एल कपूर
बनाम जगमोहन एंड सन्स (1980 (4)
एस सी सी, 379) मामले में यह प्रश्न उठा
था लक क्ा नैसलगुक न्याय के लनयमो का
पालन तब भी लकया जाना चालहये जब कोई
ऐसे अलववालदत तथ्य जो लनणुय लेने के ललए
पयाुप्त हो और नोलटस देने के बाद भी अन्त
पररणाम वही होगा। इस पर सवोच्
न्यायालय नॆ प्रलतपालदत लकया लक केवल
इसललए क्ोुंलक तथ्य स्वीकार लकये जा
सकते है या लनलवुवाद है, नैसलगुक न्याय के
लसद्धान्तो का पालन न करने का कोई
कारण नहीुं हो सकता है। सवोच् न्यायालय
की पााँच न्यायमूलतु की सुंवैिालनक पीठ ने
एस एस गगल बनाम चीफ इलेक्शन
कगमशनर (1978 (1) एस सी सी 405),
में यह प्रलतपालदत लकया लक प्राशासलनक एवुं
अिुन्यालयक कायो में नैसलगुक न्याय के
लसद्धान्तो का पररपालन अलनवायु है।
नैसलगुक न्याय के लनयमोुं का उद्देश्य "न्याय
को लविल होने से रोकना" है। ये लनयम
न्यालयक तथा न्यालयक-कल्प कारुवाईयोुं में
तो लागू होते ही हैं, वरन प्रशासलनक
कारुवाईयोुं में भी लागू होते हैं। न्यालयककल्प जााँच तथा प्रशासलनक जााँच, दोनोुं, का
उद्देश्य यही होता है लक न्यायसुंगत लवलनश्चय
पर पहाँचे। प्रशासलनक कायुवालहयोुं मे भी
'लनष्पक्षता', एवुं 'मनमानेपन का बलहष्करण',
होना तथा उलचत एवुं न्यायसुंगत रूप से
कायु करना, अलनवायु है। यह सुप्रलतलष्ठत
लवलि है लक, ऐसी प्रशासलनक कायुवाही में,
जो लसलवल दुष्पररणाम उत्पन्न करती हो,
नैसलगुक न्याय के लसद्धान्त अलनवायु रूप से
लागू होते है। अथाुत् लकसी प्रशासलनक
आदेश से लसलवल दुष्पररणाम उत्पन्न होते होुं
तो ऐसा प्रशासलनक आदेश भी नैसलगुक
न्याय के लनयमोुं के अनुपालन के उपरान्त
ही पाररत लकयॆ जा साकतॆ है। "लवलिसम्मत
1836 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
शासन" का अुंतलनलहुत लसद्धान्त है लक
लसलवल दुष्पररणाम उत्पन्न करने वाला
आदेश, नैसलगुक न्याय के लसद्धान्तोुं का
अनुपालन करके ही पाररत लकया जायॆ।

15. वतुमान यालचका के तथ्यो से यह
लवलदत 15होता है, लक याची के लवरूद्ध
समस्त कायुवाही का आिार क्षेलत्रय पूती
अलिकारी
की
जााँच
आख्या
लदनाुंक
26.06.2016 है। उप लजलालिकारी एवुं
आयुक् ने उक् जाुंच आख्या को ही आिार
मान कर अपने लनणुय पाररत लकये है। इस
तथ्य15 से लक उक् जाुंच आख्या के प्रलत
याची को नहीुं दी गई है, प्रलत वादी के
अलिवक्ा इुंकार नहीुं कर पाये है। अतः यह
लसद्ध होता है लक उक् जाुंच आख्या की
प्रलत याची को कभी भी नही दी गई है। मै
याची के लवद्वान अलिवक्ा के कथन से
पूणुत: सहमत हाँ की लनणुय लेने की प्रलक्रया
में लनष्पक्षता नहीुं रखी गयी है व नैसलगुक
न्याय कॆ लसद्धान्तोुं का पररपालन नहीुं लकया
गया है।

16. उपरोक् लववेचना के प्रकाश में
एवुं उपरोक् वलणुत न्यालयक प्रलतपादनोुं के
गहन अध्ययन के उपरान्त, मै इस लनष्कषु
पर पहाँचता हाँ लक वतुमान वाद मे नैसलगुक
न्याय के लसद्धान्तो का अनुपालन नहीुं हआ
है। इस कारण से लनणुय लेने की सम्पूणु
प्रलक्रया दूलषत हो गई है। अतः ऐसी प्रलक्रया
को न्यायपूणु व दोषरलहत नहीुं कहा जा
सकता है। अतः आक्षेलपत आदेश लदनाुंक
16.09.2011
(उपलजलालिकारी
लनजामाबाद, आजमगढ) एवुं 25.01.2017
(आयुक्, आजमगढ मण्डल, आजमगढ)
न्यायपूणु न होने के कारण लनरस्त लकये जाने
योग्य है, अतः लनरस्त लकये जाते है। यह
यालचका इस आदेश कॆ साथ अुंलतम रूप से
लनस्ताररत की जाती है, लक वत्तुमान प्रकरण
उप लजलालिकारी आजमगढ को प्रलतशरण
इन लनदेशोुं के साथ लकया जाता है, वॊ
वत्तुमान प्रकरण को नैसलगुक लसद्धान्तोुं का
पालन करते हए, इस आदेश की प्रमालणत
प्रलतलललप के लमलने के चार सप्ताह कॆ
अुंतगुत, गुण दोष के आिार पर गनस्ताररत
करेंगे। यहाुं यह उल्लेस्खत करना आवश्यक
है लक इस न्यायालय ने वतुमान प्रकरण के
गुण दोष पर कोई लटप्पणी नहीुं की है।
----------
(2020)03-05ILR A1836
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 02.12.2019

BEFORE

THE HON'BLE AJAY BHANOT, J.

WRIT - C No. 25122 of 2019

Satyam Rai ...Petitioner
Versus
Banaras Hindu University, Varanasi & Ors.
 ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Ashish Kumar Srivastava, Sri Ajay
Kumar Rai, Sri Ratnakar Upadhyay, Sri R.K.
Ojha

Counsel for the Respondents:
Sri Krishna Raj Sigh Jadaun, Sri Rijwan Ali
Akhtar,
Sri
V.D.
Chauhan,
Sri
V.K.
Upadhyay

A. Constitution of India - Fundamental
Rights - Nature - Exhaustive or Evolving - The
Constitutional law defines the substance of
fundamental
rights
-
The
text
of
the
Constitution, is a conceptual philosophy of
fundamental rights, and not an exhaustive guide