# Raju Singh (In Jail) v. State of U.P. Opp. Party

- **Citation:** (2020) 12 ILRA 260
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2020-11-18
- **Case number:** Crl. Misc. Ist Bail Application No. 38874 of 2020
- **Bench:** Shamim Ahmed
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/raju-singh-in-jail-v-state-of-u-p-opp-party-45468
- **Pages:** 4

## Headnote

Gangster Act-claim that never worked
against public peace -Bail is a rule and Jail
is exception-it appears that Applicant is
not a member or head of any gang-no any
offence committed under chapter 16, 17
and 22.

List of Cases cited: -

## Text

260 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
(2020)12ILR A260
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 18.11.2020

BEFORE
THE HON'BLE SHAMIM AHMED, J.

Crl. Misc. Ist Bail Application No. 38874 of 2020

Raju Singh ...Applicant (In Jail)
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Applicant:
Sri Ashutosh Kumar Pandey

Counsel for the Opp. Party:
A.G.A.

Gangster Act-claim that never worked
against public peace -Bail is a rule and Jail
is exception-it appears that Applicant is
not a member or head of any gang-no any
offence committed under chapter 16, 17
and 22.

List of Cases cited: -

1. Dataram Singh Vs St. of U.P. & anr., reported
in (2018)3 SCC 22

(Delivered by Hon'ble Shamim Ahmed, J.)

1. पूरक शपथ पत्र आि दाक्तखल जकया
गया है, उसे पत्रावली पर रखा िाये।

2. वतयमान दाक्तिक प्रकीणय िमानत प्राथयना
पत्र, आवेदक राजू स िंह की ओर से मु०अ०सां० 631
सन् 2020, अन्तगयत धारा 3(1) उत्तर प्रदेश जगरोहबांद
समाि जवरोधी जिया कलाप(जनवारण) अजधजनयम
1986, थाना सराय लखन्सी, िनपद मउ में िमानत
पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत जकया गया है।

3. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता एवां
जवद्वान अपर शासकीय अजधवक्ता को सुना तथा
पत्रावली का पररशीलन जकया।

4. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता ने तकय
प्रस्तुत जकया जक आवेदक को इस प्रकरण में
रांजिशन झूठा फूँसाया गया है, आवेदक
आरोजपत अपराध सांख्या 631 वर्य 2020,
अन्तगयत धारा 3(1) उत्तर प्रदेश जगरोहबांद एवां
समाि
जवरोधी
जिया
कलाप
(जनवारण)
अजधजनयम थाना सराय लखन्सी, िनपद मऊ में
पूणयतया जनदोर् है, उसकी उक्त आरोजपत
अपराध में जकसी प्रकार की सहिाजगता अथवा
सांजलप्तता नहीां रही है, उसने आरोजपत अपराध
काररत नहीां जकया है, उसे आरोजपत अपराध में
झूांठा
शत्रुतावश,
रांजिशन
फांसाया
आरोजपत/नाजमत जकया व कराया गया है।
आवेदक जगरोहबांद नहीां है वह जकसी जगरोह का
सदस्य सरगना अथवा मुक्तखया िी नहीां है।
आवेदक द्वारा किी कोई सांज्ञेय अथवा असांज्ञेय
अपराध काररत नहीां जकया गया है, उसके द्वारा
जगरोहबांद के रूप में िी किी कोई अपराध
काररत नहीां जकया गया है। आवेदक को दक्तित,
कजित, प्रताजड्त, अपमाजनत, ब्लैकमेल करने के
उद्देश्य से थाना सराय लखन्सी, िनपद मऊ में
आरोजपत अपराध पुजलस के द्वारा जलखवाई गई
है।

5. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता ने पुनः
अपना तकय प्रस्तुत करते हुऐ कहा। आवेदक पर
आरोजपत अपराध की प्राजथजमकी स्वतांत्र व
सारवान आरोप एवां तथाकजथत अपराध के
आधार पर नहीां जलखाई गई है अजपतु पुजलस
अजिलेख व पूवय में पांिीकृत आरोजपत अपराध
के आधार पर आधाररत करते हुए जलखी/जलखाई
गई है िो जवजध जवरूद्ध, स्वेच्छाचारी, अवैधाजनक
है। आवेदक पर आरोजपत अपराध के गैंग चाटय
में 4 वाद दजशयत है जिसमें आवेदक की िमानत
गुणागुण के आधार पर स्वीकार की िा चुकी है।
आवेदक पर आरोजपत अपराध के समथयन व
पुजि में आवेदक के जवरूद्ध अजियोिन के पास
कोई रांच मात्र जवजधक, ग्राह्य व जवश्वसनीय साक्षय
उपलब्ध नहीां है। आवेदक द्वारा लोक व्यवथथा
12 All. Raju Singh Vs. State of U.P.
261
अथवा सावयिजनक शाांजत व्यवथथा के प्रजतकूल
किी िी कोई काययवाही नहीां की गयी है न तो
किी जहांसा ही की गई है। उसनें िारतीय दि
सांजहता के अध्याय 16,17 एवां 22 में वजणयत
दिनीय अपराध काररत नहीां जकया है। उसने
आजथयक दुजनयाबी िौजतक लािाथय किी कोई
अपराध नहीां जकया है न तो जकसी तथाकजथत
अपराध के माध्यम से अनुजचत लाि अथवा
धनाियन ही जकया है। एवां आवेदक जदनाांक
30.07.2020 से काराजिरक्षा में जनरूद्ध चला आ
रहा है।, इसजलए आवेदक को िमानत पर छोड़
जदया िाय, िमानत पर मुक्त होने के पश्चात
आवेदक फरार नहीां होगा और न ही अजियोिन
साजक्षयोां को प्रिाजवत करेगा।

6. जवद्वान अपर शासकीय अजधवक्ता ने
आवेदक के िमानत प्राथयना पत्र का जवरोध
जकया। तथा समथयन मे कहा गया जक आवेदक
िमानत पर ररहा होने पर पुनः अपराजधक
गजतजवजधयोां मे जलप्त हो िाएगा। िो समाि के
जलये हाजनकारक जसद्ध होगा। तथा प्रथम सूचना
मे कही गई बातोां का समथयन करते हुऐ कहा जक
आवेदक एक शाजतर जकस्म का अपराधी है। िो
गैंग बनाकर मारपीट आगिनी धमकी और हत्या
का प्रयास आजद िैसे सांगीन अपराध काररत
करके आजथयक एवां िौजतक दुजनयाबी लाि
अजियत करता है। तथा इसके गैंग मे कई सजिय
सदस्य है, िो अपराध काररत करते रहते है।

7. उिय पक्षो को सुना व पत्रावली का
अवलोकन जकया। िमानत प्राथयना पत्र को
जनजणयत करने से पहले िमानत की जवजध क्या है
इसका उल्लेख करना आवश्यक है।

8. जवजध का जसद्धान्त है जक "िमानत
जनयम और िेल अपवाद है"। िमानत न तो
जकसी याांजत्रक आदेश से स्वीकार या अस्वीकार
ही की िा सकती है, क्योांजक यह न केवल उस
व्यक्तक्त की स्वतांत्रता सांबांजधत है जिसके जवरूद्ध
आपराजधक काययवाही चल रही है, परन्तु यह
दि न्याय प्रणाली के जहत से िी सांबांजधत है और
यह िी सुजनजश्चत करना है, जक अपराध करने
वालोां को न्याय में बाधा ड्ालने का अवसर न
जदया िाये।

9. िमानत के जलए आवेदन पर जवचार
करते समय, न्यायालय को कुछ कारकोां को
ध्यान में रखना चाजहए, िैसे जक अजियुक्त के
क्तखलाफ प्रथम दृिया मामला का होना, आरोप
की गांिीरता और प्रकृजत, आरोप जसद्ध होने की
क्तथथजत में सिा की कठोरता, अनुपूरक साक्ष्य की
प्रकृजत, न्यायालय की आरोप के जलये प्रथम
दृिया सांतुजि, आरोपी की हैजसयत व पद,
अजियुक्त की न्याय से िागने और अपराध को
दोहराने की सांिावना, साक्ष्य के साथ छेड्छाड्
की सांिावना, जशकायतकताय और गवाह को
धमकी
की
आशांका
और
अपराधी
का
आपराजधक इजतहास, िमानत के जलए आवेदन
पर जवचार करते समय, न्यायालय को मामले के
अजियोिन पक्ष के गवाहोां की जवश्वसनीयता व
क्तथथरता की गुण, दोर् की िाांच सघनता से नहीां
करनी चाजहए। क्योां जक यह केवल परीक्षण के
दौरान ही िाांचा िा सकता है समता िमानत का
एकमात्र आधार तो नही है, परन्तु यह उपरोक्त
पहलुओां में से एक हो सकता है, िो अजनवायय
रूप से हैं। िमानत के आवेदन पर जवचार करते
समय आवश्यक है।

10. यह अजववाजदत है, जक िमानत देना
या न देना, ये उस न्यायालय का जववेकाजधकार
है, िो इस मामले की सुनवाई कर रहा है।
हालाांजक यह जववेकाजधकार जनबायध है। परन्तु
इसका
उपयोग
न्यायसांगत,
मानवीय
व
सहानुिूजत पूवयक जकया िाना चाजहए न जक
मनमाने तरीके से। िमानत स्वीकार या
अस्वीकार करने के आदेश में कारणोां को प्रथम
दृिया इांजगत करना चाजहए, हालाांजक गुण-दोर्
पर साक्ष्य की जवस्तृत िाांच और जवस्तृत
262 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
दस्तावेिीयकरण को दशायने की आवश्यकता
नहीां है। िमानत की शतें इतनी िी सख्त नहीां
होनी चाजहए की उसका अनुपालन करना ही
अक्षम हो िाये, जिससे ज़मानत ही काल्पजनक न
हो िाये।

11. उपरोक्त तथ्यात्मक व जवजधक जववरण
से यह जवजदत है जक आवेदक को दक्तित,
कजित, प्रताजड्त, हैरान व परेशान करने के
उद्देश्य से उसके जवरूद्ध आरोजपत अपराध मे
उक्त अपराध की प्राजथजमकी जलखायी गयी है।
आवेदक जकसी गैंग का मुक्तखया अथवा सदस्य
नहीां है, न तो उसका कोई जगरोह ही है। तथा
आवेदक द्वारा लोक व्यवथथा अथवा सावयिजनक
शाांजत व्यवथथा के प्रजतकूल किी िी कोई
काययवाही नहीां की गयी है न तो किी जहांसा ही
की गई है। उसनें िारतीय दि सांजहता के
अध्याय 16,17 एवां 22 में वजणयत दिनीय
अपराध काररत नही जकया है। उसने आजथयक
दुजनयाबी िौजतक लािाथय किी कोई अपराध
नहीां जकया है न तो जकसी तथाकजथत अपराध के
माध्यम से अनुजचत लाि अथवा धनाियन ही
जकया है।

12. पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्योां,
िारतीय सांजवधान के अनुच्छेद 21 एवां Dataram
Singh Vs State of U.P. and another,
reported in (2018)3 SCC 22 के प्रकरण में
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रजतपाजदत
अभ्युक्तक्त के दृजिगत, आरोपोां की प्रकृजत, समथयन
में सबूतोां की प्रकृजत, सिा की गांिीरता,
आरोजपत आवेदक का चररत्र, पररक्तथथजतयोां का
अवलोकन मुकदमे मे अजियुक्त की उपक्तथथजत
को सुरजक्षत करने की उजचत सांिावना, गवाहो से
छेड़छाड़ की उजचत आशांका, िनता/राज्य और
अन्य पररक्तथथजतयोां का बड़ा जहत एवां परीक्षण मे
देरी होना एवां जनकट समय में इन पररक्तथथजतयोां
को देखते हुए मेरा मानना है जक यह िमानत देने
के जलए एक उपयुक्त मामला है।

13. तद्नुसार वाद के गुण दोर् पर जबना
कोई जटप्पणी जकए हुए आवेदक राजू स िंह को
उपरोक्त वजणयत अपराध मु०अ०सां० 631 सन्
2020, अन्तगयत धारा 3(1) उत्तर प्रदेश जगरोहबांद
समाि
जवरोधी
जिया
कलाप(जनवारण)
अजधजनयम 1986, थाना सराय लखन्सी, िनपद
मउ में सांबांजधत न्यायालय की सन्तुजि पर
व्यक्तक्तगत बांध-पत्र एवां उसी धनराजश के दो
प्रजतिू करने पर जनम्नजलक्तखत शतों के साथ
िमानत पर छोड़ जदया िायः-

1- आवेदक जववेचना या परीक्षण के
दौरान साजक्षयोां को ड्रायेगा/धमकायेगा नहीां एवां
अजियोिन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीां करेगा।

2- आवेदक परीक्षण के दौरान जबना
कोई थथगन जलए परीक्षण में ईमानदारी से
सहयोग करेगा।

3- आवेदक िमानत पर ररहा होने के
बाद जकसी िी अपराजधक गजतजवजध में जलप्त नहीां
होगा न कोई अपराजधक कृत्य करेगा।

4- आवेदक को यजद माननीय
उच्चतम न्यायालय के आदेशोां के तहत गजठत
सजमजत के आदेश के अनुसार अल्पकाजलक
िमानत पर बढाया गया है तो अल्पकाजलक
िमानत की अवजध समाप्त होने के बाद उसकी
िमानत प्रिावी होगी।

5- अदालतोां के सामान्य कामकाि के
बहाल होने तक आवेदक को जबना जकसी
िमानत के जनिी मुचलके पर िमानत पर
बढाया िाएगा। अदालत के सामान्य कामकाि
बहाल होने के बाद आरोपी एक महीने के िीतर
अदालत की सांतुजि के प्रजतिुओां को प्रस्तुत
करेगा।

6- पाटी उच्च न्यायालय इलाहाबाद
की आजधकाररक वेबसाइट से ड्ाउनलोड् जकए
गए इस तरह के आदेश की कांप्यूटर िजनत
प्रजतजलजप दायर करेगी।

7-
सांबांजधत
न्यायालय/प्राजधकरण/अजधकारी, उच्च न्यायालय
12 All. Kallu @ Dinesh Rajput Vs. State of U.P.
263
इलाहाबाद की आजधकाररक वेबसाइट से आदेश
की ऐसी कम्पयूटरीकृत प्रजत की सत्यता की पुजि
करेगा और जलक्तखत रूप से इस तरह के
सत्यापन की घोर्णा करेगा।

14. उपरोक्त शतों में से जकसी के उल्लांघन
के मामले मे, यह िमानत रद्द करने का आधार
होगा।
----------
(2020)12ILR A263
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 18.11.2020

BEFORE
THE HON'BLE SHAMIM AHMED, J.

Crl. Misc. Bail Application No. 38911 of 2020

Kallu @ Dinesh Rajput ...Applicant (In Jail)
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Applicant:
Sri Bhaskar Bhadra

Counsel for the Opp. Party:
A.G.A.

NDPS Act-section 42 and 52 not compliedseized Ganja is lesser in quantity-no
independent witness.

Bail Granted. (E-9)

List of Cases cited:-

1. U.O.I. Vs Shiv Shankar Keshari, (2007) 7 SCC
798

2. Dataram Singh Vs St. of U.P. & anr., reported
in (2018)3 SCC 22

(Delivered by Hon'ble Shamim Ahmed, J.)

1. वतयमान दाक्तिक प्रकीणय िमानत
प्राथयना पत्र, आवेदक कल्लू@सिनेश राजपूत
की ओर से मु०अ०सां० 695 सन् 2020, अन्तगयत
धारा 8/20/29 स्वापक और्जध और मन:प्रिावी
अजधजनयम,
1985(एन०ड्ी०पी०एस०
ऐक्ट),
थाना बारादरी, जिला बरेली में िमानत पर मुक्त
करने हेतु प्रस्तुत जकया गया है।

2. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता एवां
जवद्वान अपर शासकीय अजधवक्ता को सुना तथा
पत्रावली का पररशीलन जकया।

3. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता द्वारा
िमानत प्राथयना पत्र प्रस्तुत कर कहा गया है, जक
आवेदक को झूठा फांसाया गया है। एवां आवेदक
आरोजपत अपराध सांख्या 695 सन् 2020,
अन्तगयत धारा 8/20/29 एन०ड्ी०पी०एस० ऐक्ट,
थाना बारादरी जिला बरेली मे पूणयतया जनदोर् है,
उसकी उक्त आरोजपत अपराध मे जकसी प्रकार
की सांजलप्तता नही रही है। उसने आरोजपत
अपराध काररत नही जकया है, उसे आरोजपत
अपराध मे झूठा, शत्रुतावश, रांजिशन फांसाया एवां
आरोजपत/नाजमत जकया व करवाया गया है।

4. आवेदक के जवद्वान अजधवक्ता द्वारा यह
िी कहा गया है जक प्रथम सूचना ररपोटय जवलम्ब
से जलखायी गयी है। प्रथम सूचना ररपोटय में
अजियुक्त का कोई कृत्य नहीां दशाया गया है
घटना का कोई स्वतांत्र साक्षी नही है। थाना
पुजलस द्वारा धारा 42 व 52 एनड्ीपीएस, एक्ट का
अनुपालन नहीां जकया गया है। अजियुक्त पर
दशायी गयी गाांिे की मात्रा अल्प मात्रा है।
जिससे स्पि है जक पुजलस द्वारा सारी काययवाही
फिी रूप से की गयी है। पुजलस द्वारा धूपबती
को चरस बताकर उक्त मुकदमा दिय जकया गया
है। अजियुक्त एक ररक्शा चालक है मेहनत
मिदूरी द्वारा पररवार का पालन पोर्ण व घर का
काम चला रहा था और मेहनत मिदूरी के कायय
हेतु घऱ से बाहर जनकला तो पुजलस द्वारा जगरफतार
कर जलया गया तथा इस मुकदमें में झूांठा चालान
कर जदया गया। अजियुक्त अपने घर में अकेला