# Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi v. State of U.P. Opp. Party

- **Citation:** (2021) 6 ILRA 396
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2021-06-07
- **Case number:** Crl. Misc. Bail Appl. No. 20591 of 2021
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/ravindra-pratap-singh-pappu-shahi-v-state-of-u-p-opp-party-47115
- **Pages:** 18

## Headnote

Law-
Code
of
Criminal
Procedure,1973-Section 439, 151/107/11
- Indian Penal Code, 1860 - Section 306 -
जिलाधिकारी ने कार्यवाही करते हुए सावयिननक भूमि
पर कई वर्य पूराने कृषर् पट्टों को ननरस्त कर दिर्ा
था, जिनसे िृतक के षपता (मिकार्तकताय) व अन्र्
ग्रािवासी प्रभाषवत हुए थे कधथत रूप से सरकारी
कार्यिें अड़चन पहुुँचाने के कारण व सहअमभर्ुक्त पर
हिला करने के कारण कुछग्रा िवामसर्ों के षवरूद्ि
प्रथि सूचना ररपोटय पंिीकृत हुई थी जिस पर
अन्वेर्ण के बाि आरोप पत्र प्रेषर्त भी ककर्े िा चुके
है, जिनिे िृतक व मिकार्तकताय भी िामिल
है।आवेिक ने अपनी सुरक्षा के मलए पुमलस अिीक्षक
के पास गुहार लगाई थी व कधथत रूप से आवेिक व
िृतक की कई वाताय भी हुई थी जिसिें उसने क्षिा
र्ाचना करी थी।इसी क्रि िें कधथत रूप से िृतक व
जिलाधिकारी की भी वाताय हुई थी जिसिें िृतक ने
अपनी परेिाननर्ाुँ साझा करी थी परन्तु उसकी प्राथयना
पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। आवेिक वतयिान िें
सभासि है तथा सिाि िें उसकी प्रनतष्ठा और प्रभाव
भी है तथा उसका आपराधिक इनतहास भी है, िो वर्य
2004 से अब तक 6 आपराधिक िुकििों का है
न्र्ार्ालर् के सिक्ष सिस्त िानकारी न िेना एक
गंभीर षवर्र् है परन्तु वतयिान प्रकरण िें आवेिक ने
अपने 6 आपराधिक िुकििों की घोर्णा की है, अतः
एक अपराि का षववरण न िेने की भूल िुभायवनापूणय
नहीं िानी िा सकती है। अमभर्ोिन का साक्ष्र्
प्रिुख्तर्ः आत्िहत्र्ा पत्र व श्रव्र् अंि पर आिाररत
है जिसिें आवेिक व सह अमभर्ुक्त पर िृतक को
परेिान करने का कधथत साक्ष्र् है तथा जिसके
कारण िृतक ने आत्िहत्र्ा की थी, परन्तु िैसा पूवय
िें उल्लेखित ककर्ा गर्ा है कक आत्िहत्र्ा के
िुष्प्रेरण के मलए अपरािी को िुष्प्रेरण का कृत ककसी
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
397
व्र्जक्त को इस कृत का काररत करने के मलए
उकसाने के मलए, आपराधिक िनोवृषि के साथ कक
गर्ी कोई अत्र्ुजक्त होनी चादहर्े और इन कारणों की
अनुपजस्थनत की जस्थनत िें अपराि काररत होना नहीं
िाना िार्ेगा िृतक का आत्िहत्र्ा पत्र िें र्ह मलिा
गर्ा है कक वो आवेिक व सह अमभर्ुक्त द्वारा
उसको आपराधिक िुकििें िे कधथत रूप से झूुँठा
फंसाने के कारण, िानमसक तनाव से ग्रस्त
था।श्रव्र्अंि िें भी िृतक अपने आपको इस
आपराधिक प्रकरण से िुक्त होने की र्ाचना करता
हुआ प्रतीत होता है। परन्तु आवेिक का लहिा सख्त
रहता है तथा अभद्र भार्ा का प्रर्ोग भी करता है।
ऐसा प्रतीत होता है कक िृतक भूमि पट्टा के ननरस्त
होने के आिेि से ज्र्ािा अपने ऊपर लगार्े गर्े
आपराधिक िुकििें से परेिान था जिसके कारण
उसकी नौकरी पर प्रनतकूल प्रभाव पड़ सकता था।
परन्तु वतयिान स्तर पर र्ह नहीं कहा िा सकता है
िृतक के ऊपर लगार्ा गर्ा आपराधिक िुकििा झूठा
था िबकक उसकी िृत्र्ु से पहले ही उसिें आरोप पत्र
भी िाखिल ककर्ा िा चुका था। िृतक ने अपने
िीवनकाल िें उपरोक्त आपराधिक िुकििों के
ननिान हेतु कोई भी षवधिक प्रकक्रर्ा का उपर्ोग नहीं
ककर्ा गर्ा था। इसके अनतररक्त "सिािान दिवस"
पर अिांनत फैलाने व संज्ञेर् अपराि काररत होने की
आिंका को िेिते हुए िृतक व अन्र् के षवरूद्ि
िारा 151/107/114 िं०प्र०सं० के अंतगयत की गर्ी
कार्यवाही को भी प्रथि दृष्टवा िुभायवनापूणय र्ा
आवेिक के प्रभाव के कारण ककर्ा िाना प्रतीत नहीं
होता है।िैसा पूवय िे उल्लेखित ककर्ा गर्ा है, िुष्प्रेरण
का अथय उकसाना, प्रवृि करना, उिेजित करना,
भड़काना र्ा कोई कार्य करने के मलए बढावा िेना है
और इन सब के पीछे अमभर्ुक्त की आपराधिक
िनोवृषि का होना भीअननवार्य है तब ही आत्िहत्र्ा
के िुष्प्रेरण का अपराि काररत होना िाना िार्ेगा।
वतयिान प्रकरण िें प्रथि दृष्टर्ा पट्टा ननरस्तीकरण
की कार्यवाही षवधिकी उधचत प्रकक्रर्ा के अन्तगयत हुई
है,जिसके षवरूद्ि पीडड़त व्र्जक्त को उधचत षवधि
प्रकक्रर्ा के अंतगयत उपचार भी प्रिान ककर्ा गर्ा
है।र्हाुँ र्ह भी स्पष्ट करना आवश्र्क है कक
आवेिक ने िृतक के षवरूद्ि कोई भी मिकार्त
पुमलस के सिक्ष नहीं करी है।िो भी आपराधिक
िुकििा िृतक के षवरूद्ि पंिीकृत हुआ है,उसका
मिकार्तकताय सह अमभर्ुक्त जितेन्द्र कन्नौजिर्ा
जिसको इस न्र्ार्ालर् ने अंतररि अधग्रि ििानत
िे रिी है र्ा षवभाग के कियचारी गण हैं, केवल
इस कारण से कक आवेिक का नाि आत्िहत्र्ा
पत्र िे उल्लेखित है तथाकधथत श्रव्र् अंि िें
िृतक व आवेिक के बीच वाताय िें िृतक,र्ाचना
कर रहा है व आवेिक सख्त लहिे िे बोल रहा
है,प्रथि दृष्टर्ा र्ह नहीं िाना िा सकता कक
आवेिक के ऊपर लगार्ा गर्ा आत्िहत्र्ा के
िुष्प्रेरण का आरोप पूणय रूप से सत्र् है, इसके
प्रनतकूल प्रथि दृष्टर्ा पूवय के षवश्लेर्ण के आिार
पर तथा िारा 306 भा०ि०सं० के अवर्वों को
ध्र्ान िें रिा िार्े तो प्रथि सूचना

## Text

_Characters 0–39,631 of 45,743. This is a partial read: ask again with offset=39631 for what follows._

396 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
cause, the trial court may proceed against
him under Section 229-A of the Indian
Penal Code.

(iii) In case, the applicant misuses the
liberty of bail during trial and in order to
secure his presence, proclamation under
Section 82 Cr.P.C. is issued and the
applicant fails to appear before the court on
the date fixed in such proclamation, then,
the trial court shall initiate proceedings
against him, in accordance with law, under
Section 174-A of the Indian Penal Code.

(iv)
The
applicant
shall
remain
present, in person, before the trial court on
the dates fixed for (i) opening of the case,
(ii) framing of charge and (iii) recording of
statement under Section 313 Cr.P.C. If in
the opinion of the trial court absence of the
applicant is deliberate or without sufficient
cause, then it shall be open for the trial
court to treat such default as abuse of
liberty of bail and proceed against him in
accordance with law.

30. Office is directed to send the trial
Court, the direction given in the order with
regard to expeditious disposal forthwith.
----------
(2021)06ILR A396
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 07.06.2021

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Crl. Misc. Bail Appl. No. 20591 of 2021

Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi
 ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Opp. Party

Counsel for the Applicant:
Sri Harinarayan Singh, Sri Rakesh Kumar
Srivastava, Sri Mithilesh Kumar Tiwari, Sri Anoop
Tiwari

Counsel for the Opp. Party:
G.A.

A.
Criminal
Law-
Code
of
Criminal
Procedure,1973-Section 439, 151/107/11
- Indian Penal Code, 1860 - Section 306 -
जिलाधिकारी ने कार्यवाही करते हुए सावयिननक भूमि
पर कई वर्य पूराने कृषर् पट्टों को ननरस्त कर दिर्ा
था, जिनसे िृतक के षपता (मिकार्तकताय) व अन्र्
ग्रािवासी प्रभाषवत हुए थे कधथत रूप से सरकारी
कार्यिें अड़चन पहुुँचाने के कारण व सहअमभर्ुक्त पर
हिला करने के कारण कुछग्रा िवामसर्ों के षवरूद्ि
प्रथि सूचना ररपोटय पंिीकृत हुई थी जिस पर
अन्वेर्ण के बाि आरोप पत्र प्रेषर्त भी ककर्े िा चुके
है, जिनिे िृतक व मिकार्तकताय भी िामिल
है।आवेिक ने अपनी सुरक्षा के मलए पुमलस अिीक्षक
के पास गुहार लगाई थी व कधथत रूप से आवेिक व
िृतक की कई वाताय भी हुई थी जिसिें उसने क्षिा
र्ाचना करी थी।इसी क्रि िें कधथत रूप से िृतक व
जिलाधिकारी की भी वाताय हुई थी जिसिें िृतक ने
अपनी परेिाननर्ाुँ साझा करी थी परन्तु उसकी प्राथयना
पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। आवेिक वतयिान िें
सभासि है तथा सिाि िें उसकी प्रनतष्ठा और प्रभाव
भी है तथा उसका आपराधिक इनतहास भी है, िो वर्य
2004 से अब तक 6 आपराधिक िुकििों का है
न्र्ार्ालर् के सिक्ष सिस्त िानकारी न िेना एक
गंभीर षवर्र् है परन्तु वतयिान प्रकरण िें आवेिक ने
अपने 6 आपराधिक िुकििों की घोर्णा की है, अतः
एक अपराि का षववरण न िेने की भूल िुभायवनापूणय
नहीं िानी िा सकती है। अमभर्ोिन का साक्ष्र्
प्रिुख्तर्ः आत्िहत्र्ा पत्र व श्रव्र् अंि पर आिाररत
है जिसिें आवेिक व सह अमभर्ुक्त पर िृतक को
परेिान करने का कधथत साक्ष्र् है तथा जिसके
कारण िृतक ने आत्िहत्र्ा की थी, परन्तु िैसा पूवय
िें उल्लेखित ककर्ा गर्ा है कक आत्िहत्र्ा के
िुष्प्रेरण के मलए अपरािी को िुष्प्रेरण का कृत ककसी
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
397
व्र्जक्त को इस कृत का काररत करने के मलए
उकसाने के मलए, आपराधिक िनोवृषि के साथ कक
गर्ी कोई अत्र्ुजक्त होनी चादहर्े और इन कारणों की
अनुपजस्थनत की जस्थनत िें अपराि काररत होना नहीं
िाना िार्ेगा िृतक का आत्िहत्र्ा पत्र िें र्ह मलिा
गर्ा है कक वो आवेिक व सह अमभर्ुक्त द्वारा
उसको आपराधिक िुकििें िे कधथत रूप से झूुँठा
फंसाने के कारण, िानमसक तनाव से ग्रस्त
था।श्रव्र्अंि िें भी िृतक अपने आपको इस
आपराधिक प्रकरण से िुक्त होने की र्ाचना करता
हुआ प्रतीत होता है। परन्तु आवेिक का लहिा सख्त
रहता है तथा अभद्र भार्ा का प्रर्ोग भी करता है।
ऐसा प्रतीत होता है कक िृतक भूमि पट्टा के ननरस्त
होने के आिेि से ज्र्ािा अपने ऊपर लगार्े गर्े
आपराधिक िुकििें से परेिान था जिसके कारण
उसकी नौकरी पर प्रनतकूल प्रभाव पड़ सकता था।
परन्तु वतयिान स्तर पर र्ह नहीं कहा िा सकता है
िृतक के ऊपर लगार्ा गर्ा आपराधिक िुकििा झूठा
था िबकक उसकी िृत्र्ु से पहले ही उसिें आरोप पत्र
भी िाखिल ककर्ा िा चुका था। िृतक ने अपने
िीवनकाल िें उपरोक्त आपराधिक िुकििों के
ननिान हेतु कोई भी षवधिक प्रकक्रर्ा का उपर्ोग नहीं
ककर्ा गर्ा था। इसके अनतररक्त "सिािान दिवस"
पर अिांनत फैलाने व संज्ञेर् अपराि काररत होने की
आिंका को िेिते हुए िृतक व अन्र् के षवरूद्ि
िारा 151/107/114 िं०प्र०सं० के अंतगयत की गर्ी
कार्यवाही को भी प्रथि दृष्टवा िुभायवनापूणय र्ा
आवेिक के प्रभाव के कारण ककर्ा िाना प्रतीत नहीं
होता है।िैसा पूवय िे उल्लेखित ककर्ा गर्ा है, िुष्प्रेरण
का अथय उकसाना, प्रवृि करना, उिेजित करना,
भड़काना र्ा कोई कार्य करने के मलए बढावा िेना है
और इन सब के पीछे अमभर्ुक्त की आपराधिक
िनोवृषि का होना भीअननवार्य है तब ही आत्िहत्र्ा
के िुष्प्रेरण का अपराि काररत होना िाना िार्ेगा।
वतयिान प्रकरण िें प्रथि दृष्टर्ा पट्टा ननरस्तीकरण
की कार्यवाही षवधिकी उधचत प्रकक्रर्ा के अन्तगयत हुई
है,जिसके षवरूद्ि पीडड़त व्र्जक्त को उधचत षवधि
प्रकक्रर्ा के अंतगयत उपचार भी प्रिान ककर्ा गर्ा
है।र्हाुँ र्ह भी स्पष्ट करना आवश्र्क है कक
आवेिक ने िृतक के षवरूद्ि कोई भी मिकार्त
पुमलस के सिक्ष नहीं करी है।िो भी आपराधिक
िुकििा िृतक के षवरूद्ि पंिीकृत हुआ है,उसका
मिकार्तकताय सह अमभर्ुक्त जितेन्द्र कन्नौजिर्ा
जिसको इस न्र्ार्ालर् ने अंतररि अधग्रि ििानत
िे रिी है र्ा षवभाग के कियचारी गण हैं, केवल
इस कारण से कक आवेिक का नाि आत्िहत्र्ा
पत्र िे उल्लेखित है तथाकधथत श्रव्र् अंि िें
िृतक व आवेिक के बीच वाताय िें िृतक,र्ाचना
कर रहा है व आवेिक सख्त लहिे िे बोल रहा
है,प्रथि दृष्टर्ा र्ह नहीं िाना िा सकता कक
आवेिक के ऊपर लगार्ा गर्ा आत्िहत्र्ा के
िुष्प्रेरण का आरोप पूणय रूप से सत्र् है, इसके
प्रनतकूल प्रथि दृष्टर्ा पूवय के षवश्लेर्ण के आिार
पर तथा िारा 306 भा०ि०सं० के अवर्वों को
ध्र्ान िें रिा िार्े तो प्रथि सूचना ररपोटय व
उपलब्ि प्रपत्रों तथा िारा 306 के अवर्वों के बीच
संबंि स्थाषपत हुआ प्रतीत नहीं होता है, बजल्क
इसके षवपररत षवर्ोजित प्रतीत होता है। ििानत
का प्राथयना पत्र स्वीकार ककर्े िाने र्ोग्र् है। अतः
स्वीकार ककर्ा िाता है। (E-5)

List of Cases cited:

1. अरनव िनोरंिन गोस्वािी बनाि िहाराष्र राज्र्
व अन्र्ः (2021) 2एससीसी427

2.
कािनकॉि
बनाि
भारत
सरकार
(2018)
5एससीसी1

3.
रािेि
बनाि
हररर्ाणा
राज्र्
(2020)
15एससीसी359

4. गुरुचरन मसंह बनाि पंिाब राज्र् (2020)
10एससीसी200)

5. भारत के िुख्र् ननवायचन आर्ुक्त बनाि
एस०आर०षविर्ाभाष्कर
व
अन्र्
(2021)एस०सी०सीऑनलाइनएस०सी०364
398 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
6. हुसैन आरािातून (iv) बनाि गृह सधचव, बबहार
राज्र्ः (1980) 1एससीसी81,

7. अब्िुल रहिान अंतुल्र् बनाि आर०एस०नार्कः
(1992) 1एससीसी225

8. करतार मसंह बनाि पंिाव राज्र्ः (1994)
3एससीसी569

9.
कॉिनकॉि
बनाि
भारतीर्
संघः(1996)
4एससीसी33

10. िहेन्द्र चावला व अन्र् बनाि भारत संघ
(2019) 14एस०सी०सी०615

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. वर्तमान में, कोववड-19 वैश्ववक
महामारी के कारण उत्पन्न ववषम पररश्थितर्यों
के कारणवश, इस अवकाश पीठ ने अप्रत्यक्ष
प्रणाली (वर्चतअल मोड) के माध्यम से, वर्तमान
जमानर् प्राितना पत्र की सचनवाई सम्पन्न करी।

अभियोजन कथानक

2. वादी श्री रामवर्न (शशकायर्कर्ात) ने
एक प्रिम सूर्ना ररपोर्त (मचकदमा अपराध
संख्या - 0085 वषत 2021), धारा 154 दंड
प्रक्रिया संहहर्ा के र्हर्, श्जर्ेन्र कन्नौश्जया,
वर्तमान अध्यक्ष व रवीन्र प्रर्ाप शाही उर्त पप्पू
शाही, वर्तमान सभासद (यहााँ आवेदक) के
ववरूद्ध भारर्ीय दंड संहहर्ा की धारा 306 के
अपराध काररर् होने की सूर्ना, िाना-महचली,
श्जला-
संर्
कबीर
नगर
में
हदनांक
15.03.2021 समय 02.28 बजे को इस आशय
से पंजीकृर् कराई क्रक "प्रािी रामबर्न पचत्र
दशरि साक्रकन नगर पंर्ायर् हररहरपचर वाडत नं०
06 जवाहर नगर िाना महचली का थिायी
तनवासी है। प्रािी के नाम जगदीशपचर गौरा में
भूशम आवंर्न क्रकया गया िा श्जसे वर्तमान
अध्यक्ष श्जर्ेन्र कन्नौश्जया व पूवत अध्यक्ष व
वर्तमान सभासद पप्पू शाही द्वारा थिानीय
अधधकाररयों को अपने साश्जश में लेकर पट्र्ा
तनरथर् करा हदया गया श्जससे आहर् होकर
अन्य क्रकसानो के साि मेरा लड़का रघचवीर उम्र
22 वषत भी जनपद व र्हसील पर पहचंर्कर
ववरोध प्रदशतन कर रहा िा श्जससे खार खाकर
नगर पंर्ायर् के रवीन्र प्रर्ाप शाही उर्त पप्पू
शाही श्जर्ेन्र कन्नौश्जया व अन्य सहयोधगयों
द्वारा मानशसक र्नाव व यार्ना र्रह र्रह से
दे रहे िे। श्जससे र्ंग आकर मेरे लड़के रघचवीर ने
जो वर्तमान समय में उन्नाव जनपद के र्कीया
थर्ेशन गेर् मैने के रूप में कायतरर् िा जहर
खाकर अपनी जीवन लीला समाप्र् कर शलया
जहर खाने से पूवत रघचवीर ने अपना सचसाईड नोर्
भी शलखा है जो उन्नाव जनपद के सम्बश्न्धर्
िाने पर पोथर्मार्तम ररपोर्त के साि जमा है।
अर्ः आप से सादर अनचरोध है क्रक रवीन्र प्रर्ाप
शाही, श्जर्ेन्र कन्नौश्जया व अन्य प्रर्ाड़ना से
समशलप्र् के खखलार् अशभयोग पंजीकृर् कर
दण्डात्मक कायतवाही करने की कृपा करे।"

प्रकरण का संक्षेप में तथ्यात्मक प्रारूप-

3. प्रकरण के र्थ्यों, पररश्थितर्यों व
पत्रावली पर प्रथर्चर् दथर्ावेजों के दृश्टर्गर्
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
399
प्रकरण के र्थ्यात्मक प्रारूप को वर्तमान
जमानर् प्राितना पत्र के उधर्र् तनथर्ारण के
शलए वखणतर् करना आववयक है, जो संक्षेप में
तनम्न हैः-

(क) आवेदक, रववन्र प्रर्ाप शाही उर्त
पप्पू शाही घर्ना के समय नगर पंर्ायर्
हररहरपचर के राजथव ग्राम सवापार के वाडत नं० 7
से तनवातधर्र् सभासद िा र्िा सह अशभयचक्र्
श्जर्ेन्र कन्नौश्जया घर्ना के समय अध्यक्ष,
नगर पंर्ायर्, हररहरपचर िा।

(ख) मृर्क (रघचवीर) उम्र 22 वषत, घर्ना के
समय उन्नाव जनपद के र्क्रकया रेलवे थर्ेशन
पर गेर्मैन के रूप में कायतरर् िा व अपने
सरकारी आवास, रेलवे थर्ेशन र्क्रकया, श्जला
उन्नाव में रहर्ा िा। जहााँ उसने घर्ना के हदन
जहर खा शलया िा र्िा उपर्ार के दौरान उसकी
मृत्यच हो गयी।

(ग) श्जलाधधकारी, संर्कबीर नगर ने
उभयपक्ष को सचनकर एक सकारण आदेश
हदनॉक 27.11.2019 के माध्यम से ग्राम
जगदीशपचर गौरार्प्पा माडर, परगना महचली
पूरब, र्हसील घनघर्ा, श्थिर् गार्ा संख्या
337 शम०, 788, 433क एवं 467 के भूखण्डों पर
पूवत (वषत 1976 व 1993) में आवंहर्र् कृवष
पट्र्ों को सावतजतनक भूशम होने के कारण व
मात्र राजथव अशभलेखों में जंगल की भूशम दजत
होने कारण पट्र्ा देने के आदेश को जमीदारी
ववनाश अधधतनयम की धारा 132 के अंर्गतर्
प्रारम्भ से शून्य प्रभावी होने के कारण तनरथर्
करने का आदेश पाररर् क्रकया िा। यह प्रक्रिया
उच्र् न्यायालय के द्वारा एक जनहहर् याधर्का
में पाररर् कतर्पय आदेश के र्लथवरूप हचई िी,
श्जसमें सहअशभयचक्र् श्जर्ेन्र कन्नौश्जया ने
गााँव सभा की ओर से गााँव सभा को भी एक
पक्षकार बनाने के शलए आवेदन दाखखल क्रकया
िा।

(घ) पत्रावली से ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है, पीडड़र्
रघचवीर, अपने गााँववाशसयों व अपने वपर्ा
(शशकायर्कर्ात) के बहचर् पचराने कृवष पट्र्ों के
तनरथर् होने के कारण गांववाशसयों के साि
हमददी रखर्ा िा, इसशलए गााँववाशसयों/
क्रकसानों के साि इस आदेश का ववरोध करर्ा
िा, इसी कारण उसने जनपद व र्हसील के
थर्र पर गांववाशसयों के साि धरना, ववरोध
प्रदशतन में भागीदारी भी की िी। इन सबको यह
संदेह िा क्रक इस पट्र्ा तनरथर्ीकरण की
कायतवाही के पीछे वर्तमान आवेदक व सह
अशभयचक्र् की ही साश्जश िी। इस आदेश को
अधधतनयम के अंर्गतर् र्चनौर्ी दी गई है या
नहीं, ऐसा बहस या पत्रावली से थपटर् नहीं है।
इसी संबध में 23.1.2021 को पीडड़र् व अन्य के
ववरूद्ध, समाधान हदवस पर अशाश्न्र् र्ैलाने
व संज्ञेय अपराध की आशंका उत्पन्न होने के
कारण िानाध्यक्ष महचली ने ररपोर्त र्लानी
अन्र्गतर् धारा 151/107/116 दं० प्र०सं० बनाई
र्िा उन्हें धगरफ्र्ार भी क्रकया गया र्िा उन्हें
जमानर् मचर्लके पर पाबन्द क्रकया गया।

(ड़) पत्रावली से यह भी ववहदर् होर्ा है क्रक,
जब पंर्ायर् हररहरपचर के कमतर्ारी व राजथव
ववभाग के कमतर्ाररयों द्वारा वववाहदर् पट्र्ा
भूशम का कब्जा लेने की कायतवाही हो रही िी र्ब
400 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
गााँववाशसयों ने कमतर्ाररयों पर लाठी डण्डा लेकर
हमला कर हदया र्िा इस घर्ना पर कमतर्ाररयों
द्वारा गांववाशसयों के ववरूद्ध प्रिम सूर्ना
ररपोर्त, हदनॉक 19.11.2020 को (सं० 0364
वषत 2020) पंजीकृर् कराई गयी व अन्वेषण के
उपरान्र् अन्वेषण अधधकारी ने द०प्र०सं० की
धारा
173
के
अंर्गतर्
धारा
147,323,504,506,354,353 भा०दं०सं० के
अंर्गतर् आरोप पत्र हद० 19.11.2020 भी प्रेवषर्
क्रकया
जा
र्चका
है।
श्जसमें
पीडड़र्
व
शशकायर्कर्ात (वपडड़र् के वपर्ा) भी आरोवपर्
है।

(र्) पत्रावली से सम्यक अध्ययन से यह
भी ववहदर् होर्ा है, क्रक वर्तमान प्रकरण में सह
अशभयचक्र् श्जर्ेन्र कन्नौश्जया ने एक प्रिम
सूर्ना ररपोर्त (सं० 0005 वषत 2021) हदनॉक
03/01/2021
को
िाना-महचली,
श्जला-
संर्कबीर नगर में मृर्क व अन्य के ववरूद्ध
धारा 143,323,504,506 भा०दं०सं० व धारा
3(1)4, 3(1)(घ) अनचसूधर्र् जातर् व अनचसूधर्र्
जनजातर् (नृशंसर्ा तनवारण) अधधतनयम
1989 के अन्र्गतर् अपराध घहर्र् होने की
सूर्ना पंजीकृर् करायी क्रक कधिर् रूप से
इन्होंने 29.12.2020 को सायं 6 बजे शशकायर्
कर्ात श्जर्ेन्र कन्नौश्जया पर डंडो, लार् मचक्कों
से मार पीर् करी व जार्ी सूर्क शब्दों का
इथर्ेमाल करा। अन्वेषण अधधकारी नें अन्वेषण
के उपरान्र् इस प्रकरण में भी पीडड़र् व अन्य के
ववरूद्ध आरोप पत्र संख्या 01 हदनांक
21.02.2021 को सक्षम न्यायालय को प्रेवषर्
कर हदया गया, श्जस पर सक्षम न्यायालय ने
08.03.21 को अपराध का प्रसंज्ञान भी ले शलया
गया है। श्जसमें मृर्क भी एक आरोपी िा।

(छ) अन्वेषण के दौरान अशभयोजन ने
कचछ श्रव्य अंश (आडडयो क्रकल्प) बरामद की है,
श्जसका उल्लेख सत्र न्यायालय ने आवेदक के
जमानर् प्राितना पत्र को तनरथर् करर्े हचए
ववथर्ृर् रूप से क्रकया है। इसमें कधिर् रूप से
मृर्क, आवेदक/अशभयचक्र् से बार् करर्ा हचआ
सचना जा सकर्ा है। श्जसमे मृर्क आवेदक से
क्षमा यार्ना कर रहा है, परन्र्च आवेदक धमकी
भरे लहजे में बार् कर रहा है। एक श्रव्य अंश
(आडडयो क्रकल्प) में मृर्क का कधिर् रूप से
वर्तमान श्जलाधधकारी से वार्ात का भी है।
श्जसमें भी मृर्क यार्ना करर्ा हचआ सचनाई देर्ा
है। इन कधिर् श्रव्य अंशों की न्यायालतयक
प्रयोगशाला की कोई जााँर् आख्या अभी पत्रावली
पर उपलब्ध नहीं हैं।

(ज) थर्ेशन अधीक्षक, उ०रे० र्क्रकया ने
14.03.2021 को िानाध्यक्ष ववहार, श्जला
उन्नाव को पत्र शलखकर सूधर्र् क्रकया क्रक
पीडड़र् जब 13.3.2021 को अपनी ड्यूर्ी पर
नहीं आया र्ब उसके सरकारी आवास पर थर्ार्
को करीब 7.30 सायं बजे भेजा र्ो जानकारी
शमली क्रक वपडड़र् घर पर िा और उसने बोला क्रक
उसने जहर खा शलया हैं, उसे अथपर्ाल ले र्लो।
वपडड़र् को र्चरन्र् सी०एर्०सी०, पार्न भेजा
गया व 100 नं० पर सूर्ना भी दी गयी व
प्रािशमक उपर्ार क्रकया और श्जला अथपर्ाल
उन्नाव को रैर्र क्रकया गया, जहााँ उपर्ार के
दौरान उसकी मृत्यच हो गयी। अर्ः उधर्र्
कायतवाही करने की प्राितना की गयी। र्दनचसार
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
401
पचशलस ने सामान्य दैतनक में 14.03.2021 को
10.26 पर इस सूर्ना को िाना ववहार, श्जला
उन्नाव
की
रोजनामर्ा
सं०
019
पर
अशभलेखखर् क्रकया ।

(झ) इसके उपरान्र् वपडड़र् के शव की
मृत्य समीक्षा, धारा 174 दं०प्र०सं० के प्रावधानों
के अंर्गतर् 14/03/2020 को पंर्ानों (एक पंर्ान
वपडड़र् के वपर्ा/शशकायर्कर्ात व अन्य उसके
ररवर्ेदार िे) के उपश्थितर् में क्रकया गया। राय
पंर्ान के अनचसार मृर्क रघचवीर की मृत्यच जहर
खाने से हचयी प्रर्ीर् हचई मानी गई क्रर्र भी सही
कारण जानने के शलए शव का शव परीक्षण
कराने की राय दी गयी। इस समय आत्महत्या
के दचटप्रेरण का कोई श्जि नहीं हचआ।

(ञ) शशकायर्कर्ात (वपडड़र् के वपर्ा) ने
इसके उपरान्र् अपने मूल तनवास थिान के
िाना महचली पर 15.03.2021 को 02.08 बजे,
आवेदक व सह अशभयचक्र् के ववरूद्ध एक प्रिम
सूर्ना ररपोर्त पंजीकृर् करायी, श्जसका ववथर्ृर्
उल्लेख इस आदेश के प्रथर्र 2 में क्रकया गया
है।

(र्)
प्रिम
सूर्ना
ररपोर्त
मे
श्जस
आत्महत्या पत्र (सचसाइड नोर्) का श्जि क्रकया है
और जो अशभयोजन ने 16.03.2021 को मृर्क
के कमरे से बरामद भी क्रकया है, उसकी प्रतर्
शलवप आवेदन के, अनचलग्नक सं० 11 के रूप में
संलग्न है, श्जसको संदभत के शलए तनम्न
पचनरूत्पाहदर् क्रकया जा रहा हैः-

"मै रघचवीर गचप्र्ा पचत्र राम बर्न
गचप्र्ा आज आत्म हत्या कर रहा हूाँ। क्योंक्रक संर्
कबीर नगर के नगर पंर्ायर् हररहरपचर के पूवत
र्ेयरमैन पप्पू शाही एवं वर्तमान र्ेयरमैन
द्वारा मचझे बेवजह र्ंसाया गया और श्जसमें
र्त्कालीन पचशलस ववभाग के उच्र्ाधधकाररयों ने
पूणत समितन क्रकया। क्योंक्रक हम सभी अपने
जमीनों के शलए लड़ रहे िे। लेक्रकन कचछ हदनों
बाद यह भी पर्ा र्ला क्रक 12 नवम्बर 2020
धनर्ेरस के हदन श्जस हदन मै ड्यूर्ी पर िा उस
हदन भी मेरे ऊपर एर्०आई०आर० दजत कर
शलये। इन्हीं सभी र्ीजो की वजह से मै अत्यन्र्
ही मानशसक र्नाव से जचझ रहा हूाँ और आज
अपने आपको इस श्जन्दगी से मचक्र् करर्ा हूाँ।

क्योंक्रक न र्ो अब मचझे बेहर्र
श्जन्दगी और न ही मै क्रकसी से मचंह लगाने के
काबबल रहा मैने कई बार नाम हर्वाने के शलए
शसर्ाररश क्रकया और आत्म समपतण भी क्रकया
लेक्रकन कोई भी नर्ीजा नहीं आया।

अर्ः मै इस श्जल्लर् भरी श्जन्दगी से
अपने आपको मचक्र् करने जा रहा हूाँ।

मै अपने इस जीवन काल में जब एक
बचजचगत मााँ बाप के औलाद का सहारा शमलना
र्ाहहए। उस वक्र् मै उन्हें बेसहारा छोड़कर जा
रहा हूाँ एक जवान बहन श्जसे भाई से कचछ
उम्मीदे रहर्ी है वह मै पूरा नहीं कर सका।

इसका मचझे अर्सोस रहेगा लेक्रकन मै
मानशसक रूप से अत्यन्र् ही पीडड़र् हूाँ और मै
इस जाशलम दचतनया का सर्र और नहीं र्य कर
सकर्ा इसशलए मै इस दचतनया को अलववदा
कहना र्ाहर्ा हूाँ।

मेरे ररवर्ेदारो एवं पररवार वाले हर
एक ने मेरा बखूबी साि हदया इसशलए मै आप
402 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
सभी से मार्ी र्ाहर्ा हूाँ क्योंक्रक मै आप में से
क्रकसी के भी उम्मीद पर खरा नहीं उर्र सका।"

(ठ) आवेदक ने प्रिम पूरक शपि पत्र के
माध्यम से सह अशभयचक्र् श्जर्ेन्र कन्नोश्जया
को इस न्यायालय द्वारा दी गयी अंर्ररम
अधग्रम जमानर् आदेश हदनांक 8.4.2021
(आपराधधक ववववध अधग्रम जमानर् याधर्का
धारा
438
दं०प्र०सं०
के
अंर्गतर्
सं-
8507/2021)की प्रतर् पत्रावली पर प्रथर्चर् करी
है। जो आदेश हदनॉक 6.5.2021 के द्वारा
अगामी तर्धि र्क बढा दी गयी है।

(ड) आवेदक/अशभयचक्र् जो 16.03.2021
से न्यातयक अशभरक्षा में श्जला करागार बथर्ी
में तनरूद्ध है, ने एक जमानर् प्राितना पत्र सं०
334/2021 सत्र न्यायालय, संर् कबीर नगर, के
समक्ष प्रथर्चर् क्रकया, परन्र्च वो एक सकारण व
ववथर्ृर् आदेश हदनांक 05.04.2021 द्वारा
तनरथर् कर हदया गया, श्जसके उपरान्र्
वर्तमान प्राितना पत्र, इस न्यायालय के समक्ष
दाखखल क्रकया गया है।

(ढ) पत्रावली पर आवेदक ने जमानर्
प्राितना पत्र व द्ववर्ीय पूरक शपि पत्र के
माध्यम से अपना 6 अन्य आपराधधक मचकदमों
का आपराधधक इतर्हास की घोषणा की है,
श्जसका वववरण व वर्तमान श्थितर् तनम्न
उल्लेखखर् हैः-

(i) मचकदमा अपराध संख्या 440/2004,
अंर्गतर् धारा 147,148, 149, 452,323,506
भा०दं०सं० िाना महचली, श्जला बथर्ी (अब संर्
कबीर नगर) श्जसमें अन्वेषण अधधकारी ने
5.12.2004 को अंतर्म ररपोर्त संख्या 21/04
सक्षम न्यायालय में प्रथर्चर् की जा र्चकी है।

(ii) मचकदमा अपराध संख्या 799/2006
अंर्गतर्
धारा
147,148,149,307,323,
327,395,435,436,440 भा०दं०सं०, िाना
महचली, श्जला संर् कबीर नगर, श्जसमें सक्षम
न्यायालय द्वारा इस अन्वेषण अधधकारी द्वारा
प्रेवषर् अश्न्र्म ररपोर्त को आदेश हदनांक
12.06.2007 द्वारा थवीकार क्रकया जा र्चका है।

(iii) मचकदमा अपराध संख्या 303/2012
अंर्गतर् धारा 323,342,504,302 भा०दं०सं० व
3(2)5 अनचसचधर्र् जातर्/ अनचसचधर्र् जनजातर्
अधधतनयम िाना महचली, श्जला संर् कबीर
नगर। श्जसमें अश्न्र्म ररपोर्त प्रेवषर् करने के
बाद, प्रतर्वाद याधर्का दाखखल की गयी श्जसको
पररवाद के रूप में पररवतर्तर् कर शलया गया और
आवेदक को सम्मन का आदेश हदनांक
16.07.2016 को पाररर् क्रकया गया, श्जसको
आवेदक ने इस न्यायालय में र्चनौर्ी दी है, श्जस
पर अधग्रम कायतवाही पर रोक लगाने का आदेश
पाररर् क्रकया गया है।

(iv) मचकदमा अपराध संख्या 136/2018
अंर्गतर्
धारा
147,392,447,427,506
भा०दं०सं०, िाना महचली , श्जला संर् कबीर
नगर। श्जसमें अन्वेषण उपरान्र् अंतर्म ररपोर्त
दाखखल की गयी, श्जसको सक्षम मश्जथरेर् ने
आदेश हदनांक 03.07.2019 द्वारा थवीकार कर
शलया है।

(v) मचकदमा अपराध संख्या 153/2020,
अंर्गतर् धारा 304ए भा०दं०सं०, िाना महचली,
श्जला संर् कबीर नगर। श्जसमें अन्वेषण के
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
403
उपरान्र् अंतर्म ररपोर्त दाखखल करी गयी है
,श्जस पर अभी कोई आदेश पाररर् नहीं हचआ है।

(vi) मचकदमा अपराध संख्या 64/2021,
अंर्गतर्
धारा
147,269,506
भा०दं०सं०,
हदनांक 25.02.2021 िाना महचली, श्जला संर्
कबीर नगर। श्जसमें आवेदक के अनचसार
वर्तमान में अन्वेषण प्रगतर्शील है।

आवेदक का पक्ष

4. न्यायालय के समक्ष आवेदक का पक्ष
उसके ववद्वान अधधवक्र्ा अनूप बत्रवेदी, वररटठ
अधधवक्र्ा ने अपने सहयोगी अधधवक्र्ागण
राकेश कचमार श्रीवाथर्व व शमिलेश कचमार
तर्वारी के साि प्रथर्चर् क्रकया। श्जसका सार
तनम्न है-

(i) आवेदक एक शाश्न्र्वप्रय व ववधध को
मानने वाला एक श्जम्मेदार नागररक है, जो
लोगों की सेवा वर्तमान में सभासद व पूवत में
अध्यक्ष, पंर्ायर् के रूप में करर्ा रहा है और
करना र्ाहर्ा है, उसका इस घर्ना से कोई
सम्बन्ध नहीं है और उसके आपराधधक इतर्हास
से ववहदर् है क्रक पूवत मे भी उसके ववरूद्ध झूठे
आपराधधक मचकदमें पंजीकृर् करे गये िे जो
अन्वेषण के दौरान झूठे पाये गये। वर्तमान
आपराधधक
प्रकरण,
आवेदक
को
मात्र
अपमातनर् करने व उसकी सामाश्जक प्रतर्टठा
को ठेस पहचर्ाने के उद्देवय से पंजीकृर् कराया
गया है।

(ii) सावतजतनक भूशम पर गांव वाशसयों
(श्जसमें शशकायर्कर्ात भी एक िा) के कृवष
पट्र्े न्याातयक प्रक्रिया के द्वारा ववधधनचसार,
श्जला अधधकारी द्वारा उभय पक्ष को सचनकर,
सकारण आदेश द्वारा तनरथर् क्रकये गये िे। उस
आदेश में आवेदक की न र्ो कोई भूशमका और न
ही कोई दचभातवना ही िी। उसको इस आदेश का
कोई लाभ भी नहीं िा। वपडड़र्, शशकायर्कर्ात व
ग्रामवाशसयो केवल संदेह के आधार पर उक्र्
आदेश की सारी श्जम्मेदारी आवेदक व सह
अशभयचक्र् पर डाल रहे हैं जो अनचधर्र् है।
आवेदक ने कभी भी थिानीय प्रशासन पर उक्र्
आदेश हेर्च कोई भी दवाब नहीं बनाया िा। उक्र्
आदेश को न्यातयक प्रक्रिया के अंर्गतर् र्चनौर्ी
भी दी जा सकर्ी है, परन्र्च जानकारी के
अनचसार अभी र्क ऐसा नहीं क्रकया गया है।

(iii) आत्महत्या से पूवत शलखा गया कधिर्
आत्महत्या पत्र (सचसाईड नोर्) में आवेदक व
सहअशभयचक्र् के ऊपर लगाये गये, मृर्क को
परेशान करने के सभी आरोप पूणत रूप से
तनराधार है और मात्र इस कारण से आत्महत्या
के दचषप्रेरण का आरोप प्रिमदृटर्या भी नहीं
बनर्ा है। आवेदक ने न र्ो कोई अत्यचश्क्र्
काररर् करी है और न ही उसकी कोई
आपराधधक मनोवृवि ही प्रकर् होर्ी है, जो इस
अपराध के आधारभूर् अवयव है। यह भी
महत्वपूणत है क्रक इस आत्महत्या पत्र का उल्लेख
शशकायर्कर्ात नें प्रिम सूर्ना ररपोर्त जो
15.03.2021 को पंजीकृर् कराई िी में कर
हदया िा क्रक वो पत्र पचशलस िाने में जमा है,
परन्र्च
अन्वेषण
अधधकारी
ने
कधिर्
आत्महत्या पत्र को 16.03.2021 को मृर्क के
कमरे से बरामद क्रकया जैसा क्रक सामान्य दैतनक
404 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
वववरण में उल्लेखखर् है। यह पररश्थितर्यां
उक्र् आत्महत्या पत्र को ही संहदग्ध बनार्ी है।
अपने इन र्को के समितन में, वररटठ
अधधवक्र्ा ने उच्र्र्म न्यायालय द्वारा अरनवत
मनोरंजन गोथवामी बनाम महाराटर राज्य
(2021) 2 एस०सी०सी०427, गचरर्रन शसंह
बनाम पंजाब राज्य (2000) 10 एस०सी०सी०
200 व पश्वर्म बंगाल राज्य बनाम इन्रजीर्
कचन्दच व अन्य (2019) 10एस०सी०सी०128 के
मामलों में पाररर् तनणतयों पर इस न्यायालय का
ध्यान आकवषतर् करवाया।

(iv) अशभयोजन द्वारा अन्वेषण के
उपरान्र् आवेदक व सहअशभयचक्र् के ववरूद्ध
आरोप पत्र सक्षम न्यायालय में प्रेवषर् क्रकया जा
र्चका है, अर्ः अब आवेदक को न्यातयक
अशभरक्षा में कारागार में रखने का कोई न्याय
संगर् औधर्त्य नहीं है। आवेदक समाज का
प्रतर्श्टठर् व्यश्क्र् है, जो न्याय प्रणाली का
सम्मान करर्ा है व उसके न्यातयक प्रक्रिया से
भागने की कोई भी सम्भावना नहीं है, साि ही
साि यह भी ध्यान रखने वाल र्थ्य है क्रक धारा
306 भा०दं०सं० के अंर्गतर् दोषी होने पर
अधधकर्म 10 वषत की सजा का प्रावधान है और
वर्तमान में कोववड-19 महामारी के कारण और
कारागार में क्षमर्ा से अधधक अशभयचक्र् बन्द
होने के कारण, इस महामारी के संिमण को
रोकने के शलए परीक्षणाधीन अशभयचक्र्ों की कचछ
श्रेखणयों को पेरोल भी न्यातयक आदेश से हदया
जा रहा है।

(v) अशभयोजन द्वारा जो श्रव्य अंश,
श्जसका ववथर्ृर् उल्लेख सत्र न्यायालय ने
अपने आदेश में क्रकया है, उसकी कोई वैज्ञातनक
जााँर् नहीं हचई है, अर्ः यह नहीं माना जा सकर्ा
क्रक वो वार्ात कधिर् रूप से मृर्क व आवेदक के
मध्य ही हचई िी। इसके अर्ररक्र् वार्ात से भी यह
साक्ष्य साबबर् नहीं होर्ा है, क्रक आवेदक ने
आत्महत्या के दचटप्रेरण का अपराध काररर् क्रकया
हो, क्योंक्रक वार्ात से न र्ो आवेदक की कोई
आपराधधक मनोवृवि ही प्रकर् होर्ी है और न ही
अपराध के शलए आवेदक के द्वारा कोई अत्यचश्क्र्
ही काररर् होर्ी प्रर्ीर् होर्ी है।

(vi) आवेदक जमानर् शमलने की दशा मे
क्रकसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करेगा व न ही
न्यातयक प्रक्रिया में क्रकसी भी र्रह की व्यवधान
डालने की कोशशश करेगा। न्यायालय से प्राितना है
क्रक आवेदक का जमानर् प्राितना पत्र थवीकार करें।

(Vii) आवेदक के पक्ष की ओर से शलखखर्
बहस भी दाखखल की गयी श्जसमें मचख्यर्ा
मौखखक बहस को ही शलखखर् रूप हदया गया है।

अभियोजन व भिकायतकताा का पक्ष-

5. आवेदक के पक्ष का ववरोध में अशभयोजन
का पक्ष उसके ववद्वान अधधवक्र्ा महेश र्न्र
र्र्चवेदी, वररटठ
अधधवक्र्ा
व
अतर्ररक्र्
महाधधवक्र्ा नें अपने सहयोगी अजीर् कचमार
शमात व सर्ेन्र नाि तर्वारी, अतर्ररक्र् शासक्रकय
अधधवक्र्ाओं के साि र्िा शशकायर्कर्ात की ओर
से उसके ववद्वान अधधवक्र्ा बृजराज शसंह, ने
रखा। जो संक्षेप मे तनम्न हैः-

(i) आत्महत्या पत्र (सचसाइड नोर्) व
आवेदक व मृर्क के मध्य हचई वार्ातओं के श्रव्य
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
405
अंश के आधार पर यह शीशे की र्रह थपटर् है
क्रक, आवेदक मृर्क को परेशान कर रहा िा।
मृर्क के द्वारा क्षमायार्ना मााँगने के बाद भी
वो एक माक्रर्या की र्रह एक मजलूम पर जचल्म
ठाये जाने वाले लहजे में बार् करर्ा सचनाई देर्ा
है। आत्महत्या पत्र में भी आवेदक व सह
अशभयचक्र् द्वारा थपटर् रूप से आत्महत्या के
दचटप्रेरण का अपराध पूणत रूप से काररर् क्रकया
जाना प्रिम दृटर्वा प्रकर् होर्ा है। इस नार्े
अधधवक्र्ाओं ने न्यायालय का ध्यान सत्र
न्यायालय के आदेश के आंर्ररक पृटठ सं० 5, 6
व 7 पर करवाया व उसको न्यायालय के समक्ष
पढा भी गया।

(ii) शशकायर्कर्ात के अधधवक्र्ा ने
तनवेदन क्रकया क्रक आवेदक एक आपराधधक
मानशसकर्ा रखने वाला अपराधी है, श्जसका
एक वृहर् आपराधधक इतर्हास भी है और उसका
पचशलस व प्रशासतनक ववभागों पर प्रभाव भी है,
श्जसके कारण उसके ववरूद्ध आरोप पत्र प्रेवषर्
न कर आपराधधक मामलों में अंतर्म ररपोर्त
दाखखल की जार्ी रही है। इस कारण अगर
आवेदक को जमानर् दी जार्ी है र्ो इसकी
संभावना अधधक होगी क्रक वो न्यातयक प्रक्रिया
में अड़र्न डाले व गवाहों को डरा धमका कर
ववर्ारण की प्रक्रिया को प्रभाववर् करे।

(iii) शशकायर्कर्ात के अधधवक्र्ा ने यह भी
किन क्रकया क्रक आवेदक व सह अशभयचक्र् ने
मृर्क व उसके वपर्ा व ग्राम वाशसयों को
परेशान करने के शलए उस पर झूठे आपराधधक
मचकदमें पंजीकृर् कराये व अपने प्रभाव से उन
मचकदमों में अतर्शीघ्र अन्वेषण पूणत कराके
सबके ववरूद्ध आरोप पत्र दाखखल भी करवा
हदया। इसके ववपरीर् वर्तमान प्रकरण में
अन्वेषण को रूकवाया व बहचर् देर से पूणत होने
हदया और बहचर् मचश्वकल उनके ववरूद्ध आरोप
पत्र दाखखल हो पाया है। इन सबसे यह थपटर् है
क्रक आवेदक बहचर् रसूख वाला व्यश्क्र् है,
श्जसका पचशलस व अन्य ववभाग पर अच्छा
खासा प्रभाव है। प्रकरण के गवाहान को उधर्र्
सचरक्षा भी प्रदान करायी जाये, जैसा क्रक सत्र
न्यायालय ने आदेशशर् क्रकया है।

(iv) सह अशभयचक्र् को अभी मात्र अंर्ररम
अधग्रम जमानर् का आदेश हदया गया है र्िा
उसकी याधर्का पर अभी अंतर्म तनणतय पाररर्
होना शेष है, इसके अतर्ररक्र् समर्ा जमानर् देने
का एक मात्र आधार नहीं हो सकर्ा है।

(v) शशकायर्कर्ात ने अपने संक्षक्षप्र् शलखखर्
नोर् के माध्यम से यह र्थ्य इस न्यायालय के
संज्ञान में लाया गया क्रक आवेदक ने अपना संपूणत
आपराधधक इतर्हास इस न्यायालय के समक्ष
घोवषर् नहीं क्रकया है। आवेदक अपराध मचकदमा
संख्या
510/2017
अंर्गतर्
धारा
147,148,504,506,427 भा०दं०सं० व धारा
3(1)(xiv) अनचसचधर्र् जातर्/ अनचसचधर्र् जनजातर्
(नृशंसर्ा तनवारण) अधधतनयम 1989, हदनॉक
28/6/2017 िाना महचली, श्जला- संर् कबीर नगर
में भी एक अपराधी है र्िा सक्षम न्यायालय के
समक्ष सम्मन र्लब होने के उपरान्र् भी उपश्थिर्
नहीं हो रहा है, र्िा वर्तमान में उसके ववरूद्ध बी
डब्लू जारी हो र्चका है।

(vi) अतर्ररक्र्
महा
अधधवक्र्ा
ने
उपरोक्र् बहस के अतर्ररक्र् एक और ववषय पर
406 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
इस न्यायालय का ध्यान आकवषतर् करवाया क्रक
सत्र न्यायालय ने आवेदक की जमानर् प्राितना
पत्र तनरथर् करर्े हचए श्जले की कानून व्यवथिा
व श्जला के श्जलाधधकारी व पचशलस अधीक्षक पर
हर्प्पणी की है, जो अनचधर्र् व अकारण है। यह
हर्प्पणी आदेश के आंर्ररक पृटठ 8 पर
उल्लेखखर् है जो तनम्न उल्लेखखर् हैः-

"आवेदक/अशभयचक्र्गण
द्वारा
वादी
मचकदमा रामवर्न गचप्र्ा र्िा जगदीशपचर
गौरा
गााँव
के
अन्य
लोगों
से
आवेदक/अशभयचक्र् रवीन्र प्रर्ाप उर्त पचप्पू
शाही के बीर् जमीन संबंधी वववाद र्ल रहा है
श्जसके कारण वादी मचकदमा का लड़का रघचबीर
गचप्र्ा (मृर्क) गााँव वालों के साि श्जला व
र्हसील पर प्रदशतन करने के कारण अशभयचक्र्
अपने साधियों के साि रघचवीर गचप्र्ा को
मानशसक रूप से प्रर्ाडड़र् करर्ा िा श्जसका
उल्लेख मृर्क द्वारा अपने सचसाइड नोर् में
क्रकया गया है और जो आडडयो क्लीप
न्यायालय के समक्ष प्रथर्चर् की गयी है उससे
भी थपटर् हो जार्ा है। यदद मृतक रघुबीर
गुप्ता को जजला सन्त कबीर नगर के प्रिासन
व उच्च अधिकाररयों द्वारा अथवा पुभलस
प्रिासन के उच्च अधिकाररयों द्वारा उसके
प्राथाना पत्र पर व उसके याचना पर समय रहते
ननयमानुसार कायावाही की गयी होती तो
मृतक रघुबीर गुप्ता अपना जीवन समाप्त
नहीं करता। ऐसा प्रतीत होता है कक जनपद
सन्तकबीर नगर में ला एण्ड आडार का अिाव
है। यह बहुत ही दुख का ववषय है। च ूँकक
अभियुक्त रवीन्र प्रताप उर्ा पप्प िाही द्वारा
जमीन के कब्जेदारी के वववाद को लेकर वादी
मुकदमा के लड़के रघुबीर गुप्ता को मानभसक
रूप से प्रताडड़त ककया गया तथा मोबाईल र्ोन
से प्रताडड़त ककया गया और जजलाधिकारी व
पुभलस अिीक्षक सन्तकबीर नगर को मृतक
द्वारा प्राथाना- पत्र ददये जाने पर उनके द्वारा
कोई कायावाही नहीं की गयी, इस कारण वादी
मुकदमा के लड़के रघुबीर गुप्ता ने आत्महत्या
कर अपना जीवन समाप्त कर भलया गया।
प्रिासन
व
पुभलस
वविाग
के
जजन
अधिकाररयों
द्वारा
उसकी
याचना
पर
कायावाही नहीं की गयी, उक्त अधिकारीगण
िी परोक्ष रूप से उत्तरदायी प्रतीत होते हैं।"
(रेखांकन न्यायालय द्वारा ककया गया है)

(vii) अतर्ररक्र् महाधधवक्र्ा ने तनवेदन
क्रकया क्रक उपरोक्र् हर्प्पणी, श्जलाधधकारी व
पचशलस अधीक्षक के पक्ष को सचनवाई का अवसर
न देर्े हचए की गई है और वो प्रकरण के र्थ्यों
के ववपरीर् भी है, पचशलस ववभाग ने वर्तमान
मामले में अतर्शीघ्र अन्वेषण पूणत करा कर
आवेदक व सह अशभयचक्र् के ववरूद्ध आरोप
पत्र प्रेवषर् भी करा जा र्चका है। अर्ः इस
अनचधर्र् हर्प्पणी को अपलोवपर् करने का
आदेश पाररर् करे।

(viii) राज्य के पक्ष की ओर से शलखखर्
बहस भी दाखखल की गई है श्जसमें मौखखक
बहस को शलखखर् रूप ही हदया गया है।
शशकायर्कर्ात ने भी एक शलखखर् नोर्
31.05.25021 को दाखखल क्रकया, श्जसको भी
न्यायालय ने ध्यान पूवतक अवलोकन क्रकया।
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
407

जमानत की ववधि

6 (i) ववधध का शसद्धान्र् है क्रक "जमानर् तनयम
और जेल अपवाद है"। जमानर् न र्ो क्रकसी यांबत्रक
आदेश से थवीकार या अथवीकार ही की जा सकर्ी है,
क्योंक्रक यह न केवल उस व्यश्क्र् की थवर्ंत्रर्ा से
संबंधधर् है, श्जसके ववरुद्ध आपराधधक कायतवाही र्ल
रही है, परन्र्च यह दण्ड न्याय प्रणाली के हहर् से भी
संबंधधर् है और यह भी सचतनश्वर्र् करना आववयक है,
क्रक अपराध करने वालों को न्याय में बाधा डालने का
अवसर न हदया जाये।

(ii) जमानर् के शलए आवेदन पर ववर्ार करर्े
समय, न्यायालय को कचछ कारकों को ध्यान में रखना
र्ाहहए, जैसे क्रक अशभयचक्र् के खखलार् प्रिम दृटर्या
मामला का होना, आरोप की गंभीरर्ा और प्रकृतर्,
आरोप शसद्ध होने की श्थितर् में सजा की कठोरर्ा,
अनचपूरक साक्ष्य की प्रकृतर्, न्यायालय की आरोप के
शलये प्रिम दृटर्या संर्चश्टर्, अशभयचक्र् की हैशसयर् व
पद, अशभयचक्र् की न्याय से भागने और अपराध को
दोहराने की संभावना, साक्ष्य के साि छेड़छाड़ की
संभावना, शशकायर्कर्ात और गवाह को धमकी की
आशंका और अपराधी का अपराधधक इतर्हास जमानर्
के शलए आवेदन पर ववर्ार करर्े समय, न्यायालय को
मामले के अशभयोजन पक्ष के गवाहों की
ववववसनीयर्ा व श्थिरर्ा की श्थितर् की गचण-दोष की
जांर् सघनर्ा से नहीं करनी र्ाहहए। क्योंक्रक यह केवल
परीक्षण के दौरान ही जांर्ा जा सकर्ा है। इसके
अर्ररक्र् समर्ा ज़मानर् का एकमात्र आधार र्ो नहीं
है, परन्र्च यह उपरोक्र् पहलचओं में से एक हो सकर्ा है,
जो अतनवायत रुप से जमानर् के आवेदन पर ववर्ार
करर्े समय ववर्ारणीय होने र्ाहहए।

(iii) यह अवववाहदर् है, क्रक जमानर् देना या न
देना, यह उस न्यायालय का वववेकाधधकार है, जो इस
मामले की सचनवाई कर रहा है। हालांक्रक यह
वववेकाधधकार तनबातध है। परन्र्च इसका उपयोग
न्यायसंगर्, मानवीय व सहानचभूतर् पूवतक ही क्रकया
जाना र्ाहहए न क्रक मनमाने र्रीके से। जमानर्
थवीकार या अथवीकार करने के आदेश में कारणों को
प्रिम दृटर्या इंधगर् करना र्ाहहए, हालांक्रक गचण-दोष
पर साक्ष्य की ववथर्ृर् जांर् और ववथर्ृर्
दथर्ावेजीकरण को दशातने की आववयकर्ा नहीं है।
जमानर् की शर्ें इर्नी भी सख्र् नहीं होनी र्ाहहए
की उसका अनचपालन करना ही अक्षम हो जाये,
श्जससे जमानर् ही काल्पतनक न हो जाये।

आत्म हत्या का दुष्प्प्रेरण की ववधि-

7(i) भा० दं० सं० की धारा 306,
"आत्महत्या का दचटप्रेरण" के अपराध व सजा के
प्रावधानों को वखणतर् करर्ा है, श्जसके अनचसार "
यहद कोई व्यश्क्र् आत्महत्या करे र्ो जो कोई
ऐसी आत्महत्या का दचटप्रेरण करेगा, वह दोनो मे
से क्रकसी भांतर् के कारावास से, श्जसकी अवधध
दस वषत र्क हो सकेगी, दश्ण्डर् क्रकया जाएगा
और जचमातने से भी दण्डनीय होगा" र्िा क्रकसी
बार् का 'दचटप्रेरण' क्या है यह भा०दं०सं० की
धारा 107 में पररभावषर् क्रकया गया है, श्जसके
अनचसार दचटप्रेरण का अपराध र्ीन रूप में काररर्
क्रकया जा सकर्ा है, पहला उस बार् को करने के
शलए क्रकसी व्यश्क्र् को उकसाकर, दूसरा उस
बार् को करने के शलए षड्यन्त्र करके या अन्य
व्यश्क्र् या व्यश्क्र्यों के साि सम्मशलर् होकर
408 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
षड्यन्त्र करके उसके अनचसरण या उद्देवय से
कोई कायत या अवैध लोप घहर्र् हो जाये अिवा
र्ीसरा उस बार् के क्रकये जाने में क्रकसी कायत या
अवैध लोप द्वारा साशय सहायर्ा करना।

(ii) दचटप्रेरण में एक मानशसक प्रक्रिया
शाशमल होर्ी है, श्जससे क्रकसी व्यश्क्र् को
उकसाने या अशभप्राय पूवतक उसके क्रकसी
कायत को सहायर्ा देना होर्ा है। आत्महत्या
करने के शलए उकसाने या सहायर्ा करने के
शलए अशभयचक्र् की ओर से कोई सकारात्मक
कायत होना र्ाहहये र्िा इन सबके पीछे
अशभयचक्र् का दोषपूणत आशय अववय होना
र्ाहहये।

(iii) दचटप्रेरण के अपराध को शसद्ध करने
के शलए उक्र् अपराध को काररर् करने के शलए
अशभयचक्र् की आपराधधक दोषपूणत मानशसक
श्थितर् थपटर् रूप से दृटर्गोर्र होनी र्ाहहए।
आशय को शसद्ध करने के शलए, ऐसा साक्ष्य
पत्रावली पर उपश्थिर् होना र्ाहहये क्रक
अशभयचक्र् ने अपने दोषपूणत मानस के
अनचसरण में क्रकसी व्यश्क्र् को आत्महत्या के
कृर् को करने के शलए उकसाने या उसका उस
कृर् को काररर् करने के शलए जान बूझकर
सहायर्ा प्रदान करी हो। (देखेः- अरनव
मनोरंजन गोस्वामी बनाम महाराष्प्र राज्य व
अन्यः (2021) 2 एस सी सी 427, कामन
कॉज बनाम िारत सरकार (2018) 5 एस सी
सी 1, राजेि बनाम हररयाणा राज्य (2020)
15 एस सी सी 359, गुरुचरन भसंह बनाम
पंजाब राज्य (2020) 10 एस सी सी 200)

ववश्लेषण

8(i) पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों, उभय
पक्ष की मौखखक व शलखखर् बहस से तनम्न वो
र्थ्य है श्जन पर प्रिम दृटर्वा कोई वववाद नहीं
हो सकर्ा हैः-

(a) मृर्क रेलवे ववभाग मे गेर् मैन के पद
पर कायत करर्ा िा र्िा मृत्यच के समय उसकी
तनयचश्क्र्, र्क्रकया रेलवे थर्ेशन पर िी व वो
थर्ेशन के पास सरकारी तनवास पर रहर्ा िा
र्िा वही उसने जहर खाया व बाद में अथपर्ाल
में उपर्ार के दौरान मृत्यच हो गयी।

(b) श्जलाधधकारी ने कायतवाही करर्े हचए
सावतजतनक भूशम पर कई वषत पूराने कृवष पट्र्ों
को तनरथर् कर हदया िा, श्जनसे मृर्क के वपर्ा
(शशकायर्कर्ात) व अन्य ग्रामवासी प्रभाववर् हचए
िे व आदेश के ववरूद्ध धरना प्रदशतन भी हचआ
िा, श्जसमें मृर्क ने भी भागीदारी की िी।

(c) कधिर् रूप से सरकारी कायत में अड़र्न
पहचाँर्ाने के कारण व सहअशभयचक्र् पर हमला
करने के कारण कचछ ग्रामवाशसयों के ववरूद्ध
प्रिम सूर्ना ररपोर्त पंजीकृर् हचई िी श्जस पर
अन्वेषण के बाद आरोप पत्र प्रेवषर् भी क्रकये जा
र्चके है, श्जनमे मृर्क व शशकायर्कर्ात भी
शाशमल है।

(d) आवेदक ने अपनी सचरक्षा के शलए
पचशलस अधीक्षक के पास गचहार लगाई िी व
कधिर् रूप से आवेदक व मृर्क की कई वार्ात
भी हचई िी श्जसमें उसने क्षमा यार्ना करी िी।
इसी िम में कधिर् रूप से मृर्क व
श्जलाधधकारी की भी वार्ात हचई िी श्जसमें मृर्क
ने अपनी परेशातनयााँ साझा करी िी परन्र्च
उसकी प्राितना पर कोई कायतवाही नहीं हचई िी।
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
409

(e) आवेदक वर्तमान में सभासद है र्िा
समाज में उसकी प्रतर्टठा और प्रभाव भी है र्िा
उसका आपराधधक इतर्हास भी है, जो वषत
2004 से अब र्क 6 आपराधधक मचकदमों का है
श्जनमें या र्ो अंतर्म ररपोर्त प्रेवषर् की जा र्चकी
या न्यायालय के आदेश के कारण अगामी
कायतवाही पर रोक है। आवेदक ने एक
आपराधधक मचकदमे की घोषणा नहीं करी है
श्जसका उल्लेख इस तनणतय में प्रथर्र 5(v) में
क्रकया गया है र्िा ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है क्रक उस
मचकदमें में आवेदक के ववरूद्ध बी० डब्लू० जारी
क्रकया गया है। न्यायालय के समक्ष समथर्
जानकारी न देना एक गंभीर ववषय है परन्र्च
वर्तमान प्रकरण में आवेदक ने अपने 6
आपराधधक मचकदमों की घोषणा की है, अर्ः
एक अपराध का वववरण न देने की भूल
दचभातवनापूणत नहीं मानी जा सकर्ी है।

(ii) अशभयोजन का साक्ष्य प्रमचख्र्यः आत्म
हत्या पत्र व श्रव्य अंश पर आधाररर् है श्जसमें
आवेदक व सह अशभयचक्र् पर मृर्क को परेशान
करने का कधिर् साक्ष्य है र्िा श्जसके कारण
मृर्क ने आत्महत्या की िी, परन्र्च जैसा पूवत में
उल्लेखखर् क्रकया गया है क्रक आत्महत्या के
दचटप्रेरण के शलए अपराधी को दचटप्रेरण का कृर्
क्रकसी व्यश्क्र् को इस कृर् का काररर् करने के
शलए उकसाने के शलए, आपराधधक मनोवृवि के
साि क्रक गयी कोई अत्यचश्क्र् होनी र्ाहहये और
इन कारणों की अनचपश्थितर् की श्थितर् में
अपराध काररर् होना नहीं माना जायेगा।

(iii) मृर्क का आत्महत्या पत्र में यह शलखा
गया है क्रक वो आवेदक व सहअशभयचक्र् द्वारा
उसको आपराधधक मचकदमें मे कधिर् रूप से झूाँठा
र्ंसाने के कारण, मानशसक र्नाव से ग्रथर् िा।
श्रव्य अंश में भी मृर्क अपने आपको इस
आपराधधक प्रकरण से मचक्र् होने की यार्ना
करर्ा हचआ प्रर्ीर् होर्ा है। परन्र्च आवेदक का
लहजा सख्र् रहर्ा है र्िा अभर भाषा का प्रयोग
भी करर्ा है। ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है क्रक मृर्क भूशम
पट्र्ा के तनरथर् होने के आदेश से ज्यादा अपने
ऊपर लगाये गये आपराधधक मचकदमें से परेशान
िा श्जसके कारण उसकी नौकरी पर प्रतर्कूल
प्रभाव पड़ सकर्ा िा। परन्र्च वर्तमान थर्र पर
यह नहीं कहा जा सकर्ा है मृर्क के ऊपर लगाया
गया आपराधधक मचकदमा झूठा िा जबक्रक उसकी
मृत्यच से पहले ही उसमें आरोप पत्र भी दाखखल
क्रकया जा र्चका िा। मृर्क ने अपने जीवन काल
में उपरोक्र् आपराधधक मचकदमों के तनदान हेर्च
कोई भी ववधधक प्रक्रिया का उपयोग नहीं क्रकया
गया िा। इसके अतर्ररक्र् "समाधान हदवस" पर
अशांतर् र्ैलाने व संज्ञेय अपराध काररर् होने की
आशंका को देखर्े हचए मृर्क व अन्य के ववरूद्ध
धारा 151/107/114 दं०प्र०सं० के अंर्गतर् की
गयी कायतवाही को भी प्रिमदृटर्वा दचभातवना पूणत
या आवेदक के प्रभाव के कारण क्रकया जाना
प्रर्ीर् नहीं होर्ा है।

(iv) जैसा पूवत मे उल्लेखखर् क्रकया गया है,
दचटप्रेरण का अित उकसाना, प्रवृि करना,
उिेश्जर् करना, भड़काना या कोई कायत करने के
शलए बढावा देना है और इन सबके पीछे
अशभयचक्र् की आपराधधक मनोवृवि का होना भी
अतनवायत है र्ब ही आत्महत्या के दचटप्रेरण का
अपराध काररर् होना माना जायेगा।
410 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(v) वर्तमान प्रकरण में प्रिम दृटर्या पट्र्ा
तनरथर्ीकरण की कायतवाही ववधध की उधर्र्
प्रक्रिया के अन्र्गतर् हचई है, श्जसके ववरूद्ध पीडड़र्
व्यश्क्र् को उधर्र् ववधध प्रक्रिया के अंर्गतर्
उपर्ार भी प्रदान क्रकया गया है। यहााँ यह भी थपटर्
करना आववयक है क्रक आवेदक ने मृर्क के
ववरूद्ध कोई भी शशकायर् पचशलस के समक्ष नहीं
करी है। जो भी आपराधधक मचकदमा मृर्क के
ववरूद्ध पंजीकृर् हचआ है, उसका शशकायर्कर्ात
सह अशभयचक्र् श्जर्ेन्र कन्नौश्जया (श्जसको इस
न्यायालय ने अंर्ररम अधग्रम जमानर् दे रखी है)
या ववभाग के कमतर्ारीगण हैं, केवल इस कारण से
क्रक आवेदक का नाम आत्महत्या पत्र मे उल्लेखखर्
है र्िा कधिर् श्रव्य अंश में मृर्क व आवेदक के
बीर् वार्ात में मृर्क, यार्ना कर रहा है व आवेदक
सख्र् लहजे मे बोल रहा है, प्रिम दृटर्या यह नहीं
माना जा सकर्ा क्रक आवेदक के ऊपर लगाया गया
आत्महत्या के दचटप्रेरण का आरोप पूणत रूप से
सत्य है, इसके प्रतर्कूल प्रिमदृटर्या पूवत के
वववलेषण के आधार पर र्िा धारा 306 भा०द०सं०
के अवयवों को ध्यान में रखा जाये र्ो प्रिम सूर्ना
ररपोर्त व उपलब्ध प्रपत्रों र्िा धारा 306 के अवयवों
के बीर् संबंध थिावपर् हचआ प्रर्ीर् नहीं होर्ा है,
बश्ल्क इसके ववपररर् ववयोश्जर् प्रर्ीर् होर्ा है।

(vi) उपरोक्र् वववलेषण, जमानर् की ववधध
में वखणतर् अतनवायत कारकों को और कोववड-19 के
कारण उत्पन्न ववषम पररश्थियों को भी ध्यान में
रखर्े हचए, आवेदक, जो 16.03.2021 से कारावास
में है, उसकी जमानर् याधर्का को थवीकार करने
का मजबूर् पक्ष, इस न्यायालय के समक्ष प्रथर्चर्
करने में सर्ल हो पाया है।

9. "आर् द कर्" दिप्पणी

अतर्ररक्र् महाधधवक्र्ा ने इस न्यायालय
का ध्यान, सत्र न्यायालय द्वारा आवेदक की
जमानर् प्राितना पत्र को तनरथर् करर्े हचए संर्
कबीर नगर श्जले की कानून व्यवथिा व श्जले
के श्जलाधधकारी व पचशलस अधीक्षक पर की गयी
हर्प्पणी पर भी कराया है व प्राितना करी क्रक उस
हर्प्पणी को अपलोवपर् कर हदया जाये। यह
न्यायालय आवेदक की जमानर् याधर्का पर
जमानर् के समवर्ी अधधकार क्षेत्र के अंर्गतर्
सचनवाई कर रहा है र्िा उक्र् आदेश न्यायालय
के समक्ष आक्षेवपर् भी नही है, अर्ः यह
न्यायालय वर्तमान क्षेत्राधधकार में इस प्राितना
को थवीकर नही कर सकर्ा र्िा उसके उपर्ार
के शलए राज्य, उधर्र् व ववधध सम्मर् तनदान
की प्रक्रिया अपनाने के शलए थवर्ंत्र है, क्रर्र भी
यह कहना यिोधर्र् रहेगा क्रक अवर न्यायालय
को "आर् द कर्" (off the cuff) हर्प्पणी देने
से बर्ना र्ाहहये। ऐसी हर्प्पणी जब र्क अतर्
आववयक न हो उल्लेखखर् करनी नहीं र्ाहहये,
वो भी र्ब जब उस अधधकारी को अपने बर्ाव
या पररश्थितर्यों के थपटर् करने का कोई मौका
न हदया गया हो। यहााँ यह भी उल्लेखखर् करना
भी प्रासंधगक रहेगा क्रक क्रकसी भी श्जला के
श्जलाधधकारी व पचशलस अधीक्षक या और भी
अन्य अधधकारी को अपना कायत तनटठापूवतक व
संवेदनशील होकर करना र्ाहहये और क्रकसी
पीडड़र् की व्यिा की सचनवाई व उधर्र् कायतवाही
अतर् शीध्र करने का भरकस प्रयास करना
र्ाहहये। (देखें िारत के मुख्य ननवााचन आयुक्त
6 All. Ravindra Pratap Singh @ Pappu Shahi Vs. State of U.P.
411
बनाम एस० आर० ववजया िाष्प्कर व अन्य
(2021) एस०सी०सी ऑनलाइन एस०सी० 364)

10. त्वररत ववचारण

अवर न्यायालय से यह अपेक्षा रहेगी क्रक
वो वर्तमान प्रकरण का ववर्ारण शीघ्रर्ा से कर
मामले का तनपर्ारा करेगी र्िा ववर्ारण के
दौरान दं०प्र०सं० की धारा 309 में कायतवाही को
मचल्र्वी या थिधगर् करने की शश्क्र् के
प्रावधानों का ध्यान भी रखा जायेगा। त्वररर्
ववर्ारण (थपीडी रायल) श्जसका र्ात्पयत
"उधर्र् शीघ्रर्ा वाला ववर्ारण है" भारर्ीय
संववधान के अनच्छेद 21 में प्रतर्टठावपर् "प्राण
व दैहहक थवर्ंत्रर्ा" के मूल अधधकार का
अशभन्न एवं मूलभूर् अंश है। अवर न्यायालय
से अपेक्षा रहेगी की वर्तमान प्रकरण में ववर्ारण
आज से अधधकर्म 6 मास के भीर्र सम्पन्न
कर शलया जायेगा। (देखेः हुसैन आरा खात न
(iv) बनाम गृह सधचव, बबहार राज्यः (1980) 1
एस सी सी 81, अब्दुल रहमान अंतुल्य बनाम
आर० एस० नायकः (1992) 1एस सी सी 225,
करतार भसंह बनाम पंजाव राज्यः (1994) 3
एस सी सी 569, कॉमन कॉज बनाम िारतीय
संघः(1996) 4 एस सी सी 33)

साक्षी सुरक्षा योजना

11.