# Rishipal v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2023) 4 ILRA 130
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-02-28
- **Case number:** Application U/S 482. No. 39133 of 2022
- **Bench:** Umesh Chandra Sharma
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/rishipal-v-state-of-u-p-anr-49873
- **Pages:** 5

## Headnote

(A) Criminal Law - Indian Penal Code,
1860 - Sections 147, 148, 307, 323, 504,
506 & 452 - Code of Criminal Procedure,
1973 - Section 156 (3) - For offense under
Section 307 IPC - Not necessary for the
accused to have injuries - criminal state of
mind, motive and attempt of accused must
be seen - to determine if the accused has
an intention to commit murder - Injury
caused by which weapon and on which
part of the body can also be used to
determine - whether the accused has an
intention to commit murder.(Para -7)

Charge sheet and cognizance order under
challenge - Injuries not of a serious nature -
applicant had no intention of killing his own
brother - applicant/accused filed a civil suit -
pre-existing enmity between two parties -
applicant also filed a F.I.R. against complainant
under Section 156 (3) of Cr.P.C. - allegation -
accused kept committing crimes against him - to
grab his land - just because he is old and has
only daughters. (Para -2,7,17)

HELD:-Facts recorded in F.I.R. corroborated by
oral , documentary and medical records. Even if
the complainant and his relatives wanted to
4 All. Rishipal Vs. State of U.P. & Anr.
131
grab the property of the applicant/accused, such
intention does not give the applicant/accused
the right to cause the incident. (Para - 14)

Application u/s 482 Cr.P.C. dismissed. (E7)

## Text

130 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Court, the permanent Lok Adalat travelled
beyond the conditions of agreement dated
14.09.2016 in granting interest while
ignoring the fact that a steep penalty of
Rs.1,000/- per week has already been
imposed and is payable by the Insurance
Company in terms of the agreement.

18. As has been indicated herein above
that when claim is made in terms of mutually
agreed and binding contract, it is only the
conditions of contract which are adhered to
without
imposition
of
extraneous
considerations. As such, once a penalty is
clearly indicated under the contract for a
party to fulfill in case of breach of contract, it
is only that penalty which can be imposed
and in the considered opinion of this Court,
no further penalty or costs can be imposed
which is beyond the terms and conditions of
such contract.

19. In the present case, it is apparent
that neither any statutory provision has been
indicated for grant of interest nor does
agreement dated 14.09.2016 stipulate grant of
any interest. As such, grant of interest over
and above the penalty clearly amounts not
only
to
Double
Jeopardy
but
unjust
enrichment and is unsustainable.

20. In view of aforesaid, Question
no.(ii) is answered in favour of petitionerInsurance Company.

21. In terms of aforesaid, order dated
27.12.2019 passed in PLA Case No.15 of
2018(Shameena Khatoon & others v. The
Oriental Insurance Co. Ltd. & others) is set
aside only to the extent of grant of interest on
the claimed amount.

22. The petition as such is partly
allowed in terms of aforesaid. Parties shall
bear their own costs.
----------
(2023) 4 ILRA 130
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 28.02.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Application U/S 482. No. 39133 of 2022

Rishipal ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Sri Vinod Kumar Pandey, Sri Piyush Kumar
Shukla

Counsel for the Opposite Parties:
G.A., Sri Sanjeet Kumar Mishra

(A) Criminal Law - Indian Penal Code,
1860 - Sections 147, 148, 307, 323, 504,
506 & 452 - Code of Criminal Procedure,
1973 - Section 156 (3) - For offense under
Section 307 IPC - Not necessary for the
accused to have injuries - criminal state of
mind, motive and attempt of accused must
be seen - to determine if the accused has
an intention to commit murder - Injury
caused by which weapon and on which
part of the body can also be used to
determine - whether the accused has an
intention to commit murder.(Para -7)

Charge sheet and cognizance order under
challenge - Injuries not of a serious nature -
applicant had no intention of killing his own
brother - applicant/accused filed a civil suit -
pre-existing enmity between two parties -
applicant also filed a F.I.R. against complainant
under Section 156 (3) of Cr.P.C. - allegation -
accused kept committing crimes against him - to
grab his land - just because he is old and has
only daughters. (Para -2,7,17)

HELD:-Facts recorded in F.I.R. corroborated by
oral , documentary and medical records. Even if
the complainant and his relatives wanted to
4 All. Rishipal Vs. State of U.P. & Anr.
131
grab the property of the applicant/accused, such
intention does not give the applicant/accused
the right to cause the incident. (Para - 14)

Application u/s 482 Cr.P.C. dismissed. (E7)

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J.)

1. प्रार्थी के विद्वान अवििक्ता श्री विनोद कुमार
पाण्डेय, विपक्षी संख्या-2 के विद्वान अवििक्ता श्री
संजीत कुमार वमश्रा तर्था विद्वान अपर शासकीय
अवििक्ता श्री पंकज कुमार विपाठी को ध्यानपूिवक
सुना गया तर्था पिािली का अिलोकन वकया गया।

2. प्रार्थी अवियुक्त ऋविपाल ने िारा 482
दं०प्र०सं० के अंतगवत सि िाद संख्या 1149 ििव
2021, अपराि संख्या 117 ििव 2021, अंतगवत िारा
307 एिं 452 िा०दं०सं०, र्थाना नागल, जनपद
सहारनपुर के बाद में प्रस्तुत चाजवशीट एिं संज्ञान
आदेश वदनांवकत 07.09.2021 को खण्डण्डत करने के
वलए यह प्रार्थवनापि प्रस्तुत वकया है। उक्त सि बाद
अपर सि न्यायािीश देिबंद जनपद सहारनपुर के
न्यायालय में लंवबत है।

1. संक्षेप में प्रार्थी ने यह आिार वलया है
वक वदनांक 06.06.2021 को कवर्थत घवटत घटना के
संबंि में एक वदन विलंब से वदनांक 07.06.2021 को
प्रर्थम सूचना ररपोटव वबलंब का स्पष्टीकरण वदये बगैर
पंजीकृत कराया गया है।

2. चोटें िमवस्र्थल पर पायी गई, परन्तु िह
गम्भीर प्रकृवत की नहीं है।

3. प्रार्थी का अपने सगे िाई को जान से
मारने का कोई आशय नहीं र्था।

4. वििेचक ने पयावप्त साक्ष्य एकवित वकये
बगैर तर्था साक्षीगण के बयान पर विचार वकये बगैर
अनुवचत वििेचना करते हुए अिैि आरोपपि प्रस्तुत
वकया है।

5. प्रार्थी 77 ििीय िृद्ध व्यण्डक्त है, जो
िृद्धािस्र्था की बीमाररयों से ग्रस्त है तर्था उसकी
वचवकत्सा चल रही है।

6. प्रार्थी ने िी वशकायतकताव के विरुद्ध
प्रर्थम सूचना ररपोटव िारा 156 (3) दं०प्र०सं० के
अंतगवत अपराि संख्या 92 ििव 2022, अंतगवत िारा
147, 148, 504, 506, 307 एिं 323 िा०दं०स० के
अंतगवत संबंवित र्थाने में दजव कराया है वक िृद्धािस्र्था
एिं माि लड़वकयााँ होने के कारण उसकी जमीन को
हड़पने के वलए अवियुक्तगण उसके प्रवत ऐसा
अपराि करते रहते हैं।

7. प्रार्थी को प्रश्नगत अपराि करने की
कोई िूवमका प्रदान नहीं की गई है।

8. प्रार्थी की कोई पूिव आपराविक
इवतहास नहीं है।

9. सम्पूणव साक्ष्य के आिार पर िारा 307
एिं 452 िा०दं०सं० का अपराि उसके विरुद्ध नहीं
बनता।

3. यह वनिेदन वकया गया वक उपरोक्त
आिारों पर यह प्रार्थवनापि स्वीकार कर प्रश्नगत
आरोपपि वदनांवकत 12.08.2021 खण्डण्डत वकया
जाए।

4. पिािली पर उपलब्ध साक्ष्य से यह वनष्किव
वनकलता है वक घटना वदनांक 06.06.2021 के 3.50
बजे अपराह्न की कही जाती है। वजसके संबंि में दूसरे
वदन अर्थावत् वदनांक 07.06.2021 को 03.37 बजे
अपराह्न प्रर्थम सूचना ररपोटव नावमत अवियुक्त के
विरुद्ध लाठी में जड़े हुए गड़ासे से अपने िाई चुटैल
िादी के वपता राजपाल त्यागी के शरीर के ममवस्र्थल
पर हत्या करने के आशय से चोटें काररत करने के
संबंि में पंजीकृत कराया गया।

5. प्रर्थम सूचना ररपोटव से यह ज्ञात होता है वक
वशकायतकताव ने सिवप्रर्थम अपने वपता की जान
बचाना आिश्यक समझा यद्यवप उसकी ितीजी खुशी
ने घटना की सूचना घटना के तत्काल उपरान्त 112
नंबर पर पुवलस को दे वदया र्था तर्था वशकायतकताव
अपने दो अन्य वमिों के सार्थ चुटैल को गाड़ी में
डालकर र्थाने में ले गये तर्था िहााँ से प्रार्थवमक स्वास्थ्य
केंद्र नागल ले गये तर्था प्रार्थवमक उपचार करा कर
सहारनपुर सरकारी अस्पताल ले गये तर्था सहारनपुर
के सरकारी अस्पताल के वचवकत्सकों ने चुटैल की
गम्भीर हालत को देखते हुए उन्हें अन्य उच्चीकृत
वचवकत्सा केंद्र में ले जाने की सलाह दी, तब
वशकायतकताव चुटैल को मैक्स अस्पताल देहरादून ले
गया, िहााँ िी वचवकत्सकों ने चुटैल की गम्भीर ण्डस्र्थवत
132 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
को देखते हुए वडस्चाजव कर वदया तर्था वकसी अन्य
बड़े अस्पताल में ले जाने के वलए कहा तब िह चुटैल
को मेरठ कैलाशी अस्पताल मेरठ बाईपास पर ले गये
जहााँ चुटेल की वचवकत्सा चल रही है एिं तदुपरान्त
िह प्रर्थम सूचना ररपोटव दजव कराने र्थाने आ सका।

6. उक्त से यह स्पष्ट है वक घटना के उपरान्त
वजस प्रकार प्रार्थी अपने वपता चुटैल की वचवकत्सा में
व्यस्त रहा तर्था फुसवत पाते ही तत्काल प्रर्थम सूचना
ररपोटव दूसरे वदन पंजीकृत कराया तो इसमें कोई
अनुवचत विलंब नहीं है, जो िी विलंब हुआ है,
तत्संबंिी पररण्डस्र्थवतयों का समुवचत स्पष्टीकरण स्वयं
प्रर्थम सूचना ररपोटव में ही िवणवत है। उक्त के विरुद्ध
प्रार्थी द्वारा कोई अन्य तथ्य इंवगत अर्थिा प्रस्तुत नहीं
वकया जा सका।

7. प्रार्थी की तरफ से यह तकव प्रस्तुत वकया
गया वक यद्यवप चोटें शरीर के ममवस्र्थल पर हैं। परन्तु
िह गम्भीर प्रकृवत की नहीं हैं। इस न्यायालय के
मतानुसार िारा 307 िा०दं०सं० का अपराि काररत
करने के वलए चोटें िी होना आिश्यक नहीं हैं। माि
अवियुक्त की आपराविक मनःण्डस्र्थवत, हेतुक एिं
प्रयास देखा जाना चावहए तर्था यवद चोटें आयी हैं तो
िह वकस हवर्थयार से आयी हैं तर्था िह शरीर के वकस
िाग पर हैं, इसको देखते हुए िी यह अििाररत वकया
जा सकता है वक क्या अवियुक्त का हत्या करने का
आशय एिं ज्ञान र्था। अर्थिा नहीं।

8. इस संबंि में पिािली पर उपलब्ध
वचवकत्सकीय साक्ष्य से यह स्पष्ट होता है वक चुटैल के
शरीर के ममवस्र्थल पर जैसे दावहनी ि ंह पर दावहने
कान के वपना पर तर्था गदवन पर िारदार हवर्थयार से
कटे हुए घाि (Incised Wound) पाये गए।
वचवकत्सक के अनुसार ऐसी चोटें िारदार हवर्थयार से
काररत की गई र्थी तर्था अवियोजन के अनुसार प्रार्थी
/अवियुक्त ने लाठी में लगे हुए गड़ासे जैसे िारदार
हवर्थयार से चुटैल को चोटें पहुाँचाई र्थीं। यह िी अंवकत
है वक सिी चोटें ताजा तर्था गम्भीर प्रकृवत की र्थी। इस
प्रकार यह वसद्ध होता है वक प्रार्थवनापि के सार्थ संलग्न
शपर्थपि में प्रार्थी द्वारा यह झूठा तथ्य िवणवत है वक
चोटें गम्भीर प्रकृवत की नहीं हैं। उस दशा में और िी
महत्वपूणव हैं, जबवक अत्यािुवनक वचवकत्सा प्रदान
वकये जाने के उपरान्त िी चुटैल 16 तारीख को 9 वदन
के उपरान्त अस्पताल से वडस्चाजव हो सका। इससे
प्रर्थमदृष्टया यह वनष्किव वनकलता है वक यवद चुटैल
को तत्काल अच्छी वचवकत्सा न दी गई होती तो
उसकी मृत्यु संिावित र्थी।

9. प्रार्थी की तरफ से यह तकव प्रस्तुत वकया
गया वक चुटैल उसका सगा छोटा िाई है तर्था प्रार्थी
अवियुक्त का उसकी हत्या काररत करने का कोई
आशय नहीं र्था। इस संबंि में पिािली पर उपलब्ध
साक्ष्य से यह वनष्किव वनकलता है वक चूंवक गड़ासे
जैसे िारदार हवर्थयार से चुटैल के ममवस्र्थल पर चोटें
पहुंचाई गई र्थीं, अतः यह वनष्किव वनकाला जा सकता
है वक प्रार्थी / अवियुक्त का चुटैल की हत्या करने का
आपराविक आशय विद्यमानः र्था।

10. प्रार्थी/ अवियुक्त ने वििेचक पर यह
आरोप लगाया है वक उसने पयावप्त साक्ष्य एकवित
वकये बगैर तर्था साक्षीगण के बंिान का उवचत
विश्लेिण वकये बगैर अिैि तरीके से वििेचना करते
हुए गलत आरोपपि प्रस्तुत वकया है। इस संबंि में
विपक्षी की तरफ से यह तकव प्रस्तुत वकया गया वक
प्रर्थम सूचना ररपोटव में प्रार्थी /अवियुक्त नावमत व्यण्डक्त
है, िह िादी का सगा बड़ा ताऊ तर्था चुटैल का सगा
बड़ा िाई है तर्था घटना वदन की है। अतः उसके न
पहचानने का कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। यह िी तकव
प्रस्तुत वकया गया वक अवियोजन केस एिं कर्थानक
तर्था प्रर्थम सूचना ररपोटव के तथ्यों का समर्थवन
साक्षीगण ने अपने बयान में वकया है तर्था उनका
समर्थवन वचवकत्सकीय साक्ष्य से िी होता है, अतः यह
नहीं कहा जा सकता वक वििेचक ने वबना पयावप्त
साक्ष्य एकवित वकये तर्था साक्षीगण के बयान को
ध्यान में रखे बगैर गलत तरीके से वििेचना कर गलत
आरोपपि प्रस्तुत वकया है। यह न्यायालय विपक्षी के
उक्त तकव से पूणवतया सहमत है।

11. प्रार्थी/ अवियुक्त की तरफ से यह तकव
वलया गया वक िह 77 ििीय िृद्ध व्यण्डक्त है तर्था
िृद्धािस्र्थाजवनत रोगों से ग्रस्त है तर्था उसकी
वचवकत्सा चल रही है। इस न्यायालय के मतानुसार
वकसी अवियुक्त का िृद्ध होना तर्था िृद्धािस्र्थाजवनत
रोगों से ग्रस्त होना िारा 482] दं०प्र०सं० का
प्रार्थवनापि स्वीकार कर वकसी आरोपपि एिं संज्ञान
आदेश को वनरस्त करने का कोई आिार नहीं है।
4 All. Rishipal Vs. State of U.P. & Anr.
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12. प्रार्थी/अवियुक्त ने यह कर्थन वकया वक
उसने िी वशकायतकताव एिं उसके पररजनों के
विरुद्ध िारा 152 (3) दं०प्र०सं० के अंतगवत अपराि
संख्या 92 ििव 2022 में संबंवित र्थाने में िारा 147,
148, 504, 506, 307 एिं 323 िा०दं०सं० का प्रर्थम
सूचना ररपोटव दजव कराया है। पिािली पर उक्त प्रर्थम
सूचना ररपोटव के वचक एफ. आई. आर. की प्रवतवलवप
को प्रस्तुत वकया गया है, वजसके अनुसार घटना
वदनांक 19.03.2022 के प्रातः 08.30 बजे की है तर्था
उसके संबंि में वदनांक 02.05.2022 को प्रर्थम सूचना
ररपोटव दजव करायी गई है। प्रार्थी जहााँ 1 वदन विलंब से
दजव प्रश्नगत बाद के प्रर्थम सूचना ररपोटव को विलंवबत
होना। कहता है िहीं इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं
देता वक क्योंकर वदनांक 19.03.2022 की घटना के
संबंि में पुवलस द्वारा प्रर्थम सूचना ररपोटव दजव नहीं
वकया गया तर्था क्यों उसे वदनांक 02.05.2022 को
िारा 156 (3) दं०प्र०सं० के अंतगवत प्रर्थम सूचना
ररपोटव दजव करना पड़ा। यह िी महत्वपूणव है वक
उसके प्रर्थम सूचना ररपोटव के घटना की वतवर्थ वदनांक
19.03.2022 की कही जाती है जबवक प्रश्नगत मामले
की घटना वदनांक 06.05.2021 की है, अतः इस
कवर्थत पश्चातिती घटना के आिार पर ितवमान मामले
के आरोपपि एिं संज्ञान वलये जाने के आदेश को
खण्डण्डत करने का कोई आिार एिं औवचत्य उत्पन्न
नहीं होला।

13. प्रार्थी यह तकव प्रस्तुत करता है वक उसका
कोई पुि नहीं है तर्था माि दो वििावहत पुवियााँ है, अतः
पररिादी एिं उसके पररजन उसकी संपवि को हड़पना
चाहते हैं, अतः उन्हें फजी मुकदमे में फंसा वदया है।

14. इस संबंि में पूिव की वििेचना से यह
पूणवतया स्पष्ट है वक ऐसा नहीं है। त्वररत प्रर्थम सूचना
ररपोटव में दजव तथ्यों की पुवष्ट म ण्डखक अविलेखीय एिं
वचवकत्सकीय प्रपिों से हुई है। घटना का जो िी कोई
कारण हो, यवद वशकायतकताव एिं उसके पररजन
प्रार्थी/ अवियुक्त की संपवि हड़पना चाह रहे र्थे तर्था
उनका यवद ऐसा आशय रहा िी हो तो ऐसा आशय
प्रार्थी/ अवियुक्त को आरोवपत घटना काररत करने
का अविकार प्रदान नहीं करता।

15. प्रार्थी ने यह तकव वलया है वक उसको घटना
काररत करने में िूवमका प्रदान नहीं की गई है। जो
सिवर्था गलत आिार है। प्रर्थम सूचना ररपोटव से लेकर
सिी म ण्डखक एिं अविलेखीय साक्ष्य में इस घटना को
काररत करने की एक माि िूवमका एिं उिरदायी
व्यण्डक्त प्रार्थी को माना गया है। ऐसी दशा में इस
प्रकार का वनरािार तकव लेने का कोई औवचत्य नहीं
है।

16. प्रार्थी/ अवियुक्त ने यह आिार वलया है वक
िह शांवतवप्रय एिं कानून का पालन करने िाला
व्यण्डक्त है, वजसका इस मामले के अवतररक्त अन्य
कोई आपराविक इवतहास नहीं है। इस संबंि में
विपक्षी की तरफ से स्वयं प्रार्थी / अवियुक्त दजव कराये
गये प्रर्थम सूचना ररपोटव वदनांवकत 02.05.2022 के
तथ्यों पर बल वदया गया, वजसमें प्रार्थी / अवियुक्त ने
स्वयं यह स्वीकार वकया है वक ििव 2012 में उसके
छोटे िाई राजपाल ि ितीजे मनोज वशकायतकताव ने
उसके हार्थ की हड्डी तोड़ वदया र्था तर्था उसे झूठे
मुकदमे में जेल विजिा वदया र्था। इससे स्पष्ट है वक
ििव 2012 में िी प्रार्थी/ अवियुक्त के विरुद्ध कोई
प्रर्थम सूचना ररपोटव दजव की गई। होगी अर्थिा
पररिाद दजव कराया गया होगा, वजसमें पाररत आदेश
के अनुपालन में उसे जेल िेजा गया र्था।

17. प्रार्थी/ अवियुक्त ने अपने स्वयं दजव कराये
गये प्रर्थम सूचना ररपोटव में यह स्वीकार वकया है। वक
उसने दीिानी का मुकदमा दजव कराया है, वजसके
कारण िादी पक्ष उससे तर्था उसकी लड़वकयों से
रंवजश रखते हैं। उक्त से इतना स्पष्ट है वक उियपक्षों
में पूिव से दुश्मनी विद्यमान है, जो घटना को काररत
करने का कारण िी हो सकता है तर्था झूठा फंसाये
जाने का िी, परन्तु इस संबंि में विचारण न्यायालय
ही वनष्किव दे सकता है।

18. इस प्रकार उपरोक्त वििेचना के आिार
पर यह वनष्किव वनकलता है वक इस प्रार्थवनापि
अंतगवत िारा 482 दं०प्र०सं० में वलये गये कोई िी
आिार स्र्थावपत नहीं होता तर्था अनायास एिं वनरािार
तरीके से यह प्रार्थवनापि प्रस्तुत वकया गया है वजसमें
िारा 482 दं०प्र०सं० के अंतगवत इस न्यायालय को
हस्तक्षेप करने का कोई युण्डक्तयुक्त कारण, आिार
एिं औवचत्य प्रतीत नहीं होता। यह प्रार्थवनापि अत्यंत
गुणहीन है तर्था उपरोक्तानुसार खण्डण्डत वकये जाने
योग्य है।
134 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
आदेश

19. यह प्रार्थवनापि अंतगवत िारा 482 दं०प्र०सं०
उपरोक्तानुसार खण्डण्डत वकया जाता है।
----------
(2023) 4 ILRA 134
REVISIONAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: LUCKNOW 14.03.2023

BEFORE

THE HON'BLE MANISH MATHUR, J.

Civil Revision No. 7 of 2023

C/M Waqf Masjid & Anr. ...Revisionists
Versus
Waqf Tribunal, U.P. & Ors.
 ...Opposite Parties

Counsel for the Revisionists:
Mohd. Shadab Khan

Counsel for the Opposite Parties:
Syed Aftab Ahmad

A. Civil Law - Waqf Act, 1995 - Sections
3(k), 67(6) & 83(9) - Proceeding before
the Waqf Tribunal - Who can sue -
Plaintiff was removed from the post of
Mutawalli - Effect - Person interested -
Defined - Held, a person interested in a
waqf is any person who is entitled to
receive any pecuniary or other benefits
from the waqf - Provision is inclusive of
any person who has a right to offer prayer
or perform any religious rite in a religious
place as defined thereunder
- Held
further, despite the fact that revisionist
was
removed
from
his
post
as
Mutawalli/Secretary
of
the
managing
committee of waqf, the application filed
by him under Section 83(2) of the Act,
1995 in his individual capacity was clearly
maintainable
not
only
as
a
person
interested in a waqf but also as a person
aggrieved by order. (Para 10 and 18)
Revision allowed. (E-1)
List of Cases cited:
1. P. Kasilingam & ors. Vs P.S.G. College of
Technology & ors.; 1995 Supp (2) SCC 348
2. N.D.P. Namboodripad Vs U.O.I.& ors.; (2007)
4 SCC 502
3. Ayaaubkhan Noorkhan Pathan Vs St. of Mah.
& ors.; (2013) 4 SCC 465

(Delivered by Hon'ble Manish Mathur, J.)

1. Heard Mr. Mohd Shadab Khan
learned counsel for revisionist and Mr.
Syed Aftab Aftab Ahmad learned counsel
for opposite parties 4 and 5. The opposite
parties 1,2 and 3 being merely proforma in
nature, notices are dispensed with.

2. Revision under Section 83(9) of the
Waqf Act 1995 has been filed against order
dated 26th December, 2022 passed in Case
No. 37 of 2022 whereby the suit
proceedings have been dismissed on the
ground that it has become infructuous.

3. Learned counsel for revisionist
submits that the aforesaid case had been
filed before the Waqf Tribunal under
Section 83(2) of the Act of 1995 against
order dated 16th February, 2022 whereby
the opposite party No.4 was inducted as a
Member of the Committee of Management.
It is submitted that the aforesaid suit was
filed by the revisionist in his capacity as
Mutawalli/Secretary
of
the
Managing
Committee of the Waqf as well as in his
individual capacity. It is submitted that by
means of impugned order, it has been
noticed that subsequent to filing of the suit,
the revisionist has been removed from the
post of Mutawalli/Secretary by means of
order dated 20th September, 2022 in terms
of Section 67(6) of the Act, 1995 and
therefore the cause of action having come