# Rohit v. State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2026) 2 ILRA 891
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2026-02-20
- **Case number:** Criminal Misc. Bail Application No. 1754 of 2026
- **Bench:** Dr. Gautam Chowdhary
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/rohit-v-state-of-u-p-ors-54216
- **Pages:** 4

## Text

2 All. Rohit Vs. State of U.P. & Ors.
891
(2026) 2 ILRA 891
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 20.02.2026

BEFORE

THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Misc. Bail Application No. 1754 of 2026

Rohit ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ....Opposite Parties

विचारणीय प्रश्न
(i) क्या प्रकरण के िथ्यों एवं पररदस्थदियों में आवेिक को जमानि पर मुक्त दकया जाना उपयुक्त है;
(ii) क्या उपलब्ध साक्ष्यों एवं आरोपों की प्रकृदि के आधार पर जमानि िेने में कोई बाधा है।

हेडनोट्स
दावडडक विवि - जमानत - आरोपों का मूलयाांकन - भूवमका का अभाि:

वनणीत: जहााँ प्रथम सूचना ररपोटव िथा पीद़ििा के बयानों में आवेिक पर बलात्कार अथवा शारीररक संबंध स्थादपि करने का कोई आरोप नहीं
लगाया गया, वहााँ अदभलेख पर उपलब्ध सामग्री से आवेिक की कदथि घटना में भूदमका पर संिेह उत्पन्न होिा है, जो जमानि प्रिान दकए
जाने के पक्ष में दवचारणीय है। [Para 3]

दावडडक विवि - जमानत - विरोि - अवभयोजन का प्रवतिाद:

वनणीत: यद्यदप अदभयोजन द्वारा यह िकव प्रस्िुि दकया गया दक अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृदि का है, िथादप केवल अपराध की गंभीरिा,
अन्य प्रासंदगक पररदस्थदियों के अभाव में, जमानि अस्वीकार करने का एकमात्र आधार नहीं है। [Para 4-5]

दावडडक विवि - जमानत - साक्ष्य से छेड़छाड़ की सांभािना - अभाि:

वनणीत: जहााँ उपलब्ध सामग्री के आधार पर दकसी ठोस दवरोधात्मक सामग्री का अभाव हो िथा साक्ष्यों के साथ छे़िछा़ि की संभावना नहीं
पाई जािी हो, वहााँ आवेिक को जमानि पर मुक्त दकया जाना उपयुक्त है। [Para 5]

दावडडक विवि - जमानत - विचारण के गुण-दोष पर वटप्पणी - वनषेि:

वनणीत: जमानि प्राथवना पत्र का दनणवय करिे समय वाि के गुण-िोष पर कोई दटप्पणी दकए दबना, पररदस्थदियों के आधार पर जमानि प्रिान
की जा सकिी है। [Para 6]
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दावडडक विवि - जमानत - शतें - अनुपालन:

वनणीत: आवेिक को जमानि पर मुक्त करिे समय यह शिें आरोदपि की गईं दक वह साक्ष्यों से छे़िछा़ि नहीं करेगा, अदभयोजन सादक्षयों एवं
पीद़ििा को प्रभादवि नहीं करेगा, न्यायालय के आिेशों का पालन करेगा, परीक्षण में सहयोग करेगा िथा जमानि की स्विंत्रिा का िुरुपयोग
नहीं करेगा। [Para 6-7]

जमानि मंजूर। (E-14)

उद्धृत वनणणय (Case Law Cited)
- कोई नहीं -

अविवनयम / विवियााँ (List of Acts / Statutes)
भारिीय न्याय संदहिा, 2023; लैंदगक अपराधों से बालकों का संरक्षण अदधदनयम, 2012; भारिीय नागररक सुरक्षा संदहिा, 2023 ।

प्रमुख शब्द (List of Keywords)
जमानि; गंभीर अपराध; पीद़ििा का बयान; भूदमका का अभाव; साक्ष्य से छे़िछा़ि; जमानि की शिें।

उत्पवि (Case Arising From)
मु०अ०सं० 539/2025, धारा 137(2), 65(1) भारिीय न्याय संदहिा एवं धारा 3/4(2) पॉक्सो एक्ट, थाना जलालाबाि, दजला
शाहजहांपुर।

पक्षकारों के अवििक्ता (Appearance for Parties)
आवेिक की ओर से: श्री अजय कुमार कश्यप
दवपक्ष की ओर से: श्री शोभनाथ पाल, शासकीय अदधवक्ता (G.A.)

(Delivered by Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary, J.)

1. वतमादन दाक ण्ड क प्र कीणर् जमानत प्र ा थनाद पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं०539/2025, अन्त गतद धारा
137(2), 65(1) भारतीय न् या य संक हता एवं धारा 3/4(2)पाक्सो एक्ट , थाना जलालाबाद, क जला शाहजहांपुर में
जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस् तु कतकया गया है।

2. आवेदक के क वद्वा न कअधवक्ता , कपरवादी के क वद्व ा न कअधवक्ता एवं क वद्व ा न अपरशासकीय कअधवक्ता
को सुना तथा पत्रा वली का कपरशीलन क कया।

3. आवेदक के क वद्वा न कअधवक्ता ने तकर् प्रस् तु त क कया क क आवेदक को इस प्र करण में गलत एवं फजीर् ढंग से
झूठा फंसाया गया है, उसने ककथत अपराध काक रत नहीं क कया है।इस मामलें में प्र ा संक गक तथ्य यह है क क प्र थम
सूचना क रपोटर् एवं ककथत पीक ड ता द्व ा राअपने धारा 180 के बयान में आवेदक पर बलात् का र करने का कोई आक्षे प
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आरोक पतनहीं क कया गया है तथा ककथत पीक ड ता द्व ा रा अपने धारा 183 भारतीय नाकगरक सुरक्षासंक हता
के बयान में आवेदक द्व ा रा उसके साथ शारीक रक संबंध स् था क पत नहीं क कया गयाहै। इससे कपरकलक्ष त है
क क आवेदक का ककथत घटना में कोई भूक मका नहीं है। इकसलए,आवेदक जमानत पर मुक्त क कये जाने योग् य है।
पुनः उनका कथन है क क आवेदक की ओरसे यह आश्वा सन क दया गया है क क वह कानून की प्र क क्र या में
सहयोग करने के क लए तैयारहै और जब भी आवश्य कता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को
उपलब्धकराएगा और उन सभी शतोर्ं को स् वी कार करने के क लए भी तैयार है जो न् या यालय उसपर
कअधरोक पत करेगी। आवेदक क नदोर् र् है तथा वह इस प्र करण में क द० 09.11.2025 सेकारागार में क नरुद्ध है।
इकसलए आवेदक को जमानत पर छोड क दया जाय।

4. कपरवादी के क वद्वा न कअधवक्ता एवं क वद्व ा न अपर शासकीय कअधवक्ता ने कअभयुक्त के जमानत का प्र बल
क वरोध करते हु ए तकर् प्रस् तु त क कया क क कअभयुक्त द्व ा रा काक रत अपराध सं ंज्ञे य एवं गंभीर प्र कृक त का है,
इकसलए कअभयुक्त को जमानत पर न छोड ा जाय।

5. उभय पक्ष के क वद्वा न कअधवक्ता के तकोर्ं के कपरप्रेक्ष् य एवं पत्रा वली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं कपररस्थ
क तयों का समग्र रू प से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृक त और क कसी भी ठोस क वरोधात्प्म क सामग्री की
अनुकपस्थ क त एवं उपलब्ध सामग्री से छेड छाड की संभावना न होने के तथ्य को देखते हु ए मेरी राय में आवेदक को जमानत
परमुक्त करने का उपयुक्त आधार है।

6. अतः वाद के गुण-दोर् पर क बना कोई क टप्प णी क कए हु ए आवेदक को उपरोक्त कवणतअपराध में संबंक धत न्
या यालय की संतुक ष्ट पर व्य क क्त गत बंध-पत्र एवं कअधक धनराक श के दो स् था नीय प्र क तभू प्रस् तु त करने पर क नम्
न क कलखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड क दया जाय।

1. आवेदक क ववेचना या परीक्ष ण के दौरान कअभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड छाड नहीं करेगा।

2.आवेदक कअभयोजन साक क्ष यों व पीक ड ता/ क शकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं ।

3.आवेदक न् या यालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्ष ण के दौरान क बना कोईअनावश्य क स् थ गन
क लए क नयत क कतथ पर न् या यालय में उकपस्थ त होगा तथा परीक्ष णमें ईमानदारी से सहयोग करेगा।

 4.आवेदक जमानत पर क रहा होने के बाद जमानत की स् व तंत्र ता का दुरू पयोग नहीकरेगा और क कसी भी
अपराक धक कगकतकवध में क लप् त नहीं होगा न कोई अपराक धककृत्प्य करेगा।

5.आवेदक प्रत् यक्ष या अप्रत् यक्ष रू प से मामले के तथ्यों से कपररचत क कसी भी व्य क क्तया पुक लस
कअधकाक रयों को कोई प्र लोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोईवायदा करेगा, क जसके कारण उन्हें न् या यालय में तथ्यों
को उजागर करने से क वरतरहना पडेे़।
.

7. उपरोक्त शतोर्ं में से क कसी के उल्लं घन के मामले में, क वचारण न् या यालय आवेदक की
जमानत क नयमानुसार रद्द करने को स् व तंत्र है।
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APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 20.02.2026

BEFORE

THE HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

Criminal Misc. Bail Application No. 5285 of 2026

Tahseen ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ....Opposite Parties

विचारणीय प्रश्न
(i) क्या प्रकरण के िथ्यों एवं पररदस्थदियों में आवेिक को जमानि पर मुक्त दकया जाना उपयुक्त है;
(ii) क्या उपलब्ध सामग्री के आधार पर जमानि िेने में कोई बाधा दवद्यमान है।

हेडनोट्स
दावडडक विवि - जमानत - सहमवत - विरोि का अभाि:

वनणीत: जहााँ सूचनाकिाव द्वारा शपथपत्र के माध्यम से यह अवगि कराया गया दक वह आवेिक से दववाह कर चुकी है और अब उसके दवरुद्ध कोई
कायवाही नहीं करना चाहिी, िथा अदभयोजन की ओर से भी जमानि का दवरोध नहीं दकया गया, वहााँ जमानि प्रिान दकए जाने का आधार दवद्यमान था।
[Para 3-4]

दावडडक विवि - जमानत - साक्ष्य से छेड़छाड़ की सांभािना - अभाि:

वनणीत: जहााँ उपलब्ध सामग्री के आधार पर साक्ष्यों के साथ छे़िछा़ि की कोई संभावना नहीं पाई गई और कोई ठोस दवरोधात्मक सामग्री भी अदभलेख पर
उपलब्ध नहीं थी, वहााँ आवेिक को जमानि पर मुक्त दकया जाना उपयुक्त पाया गया। [Para 5]

दावडडक विवि - जमानत - विचारण के गुण-दोष पर वटप्पणी - वनषेि:

वनणीत: जमानि प्राथवना पत्र पर दनणवय करिे समय वाि के गुण-िोष पर कोई दटप्पणी दकए दबना, उपलब्ध पररदस्थदियों के आधार पर जमानि प्रिान की
जा सकिी है। [Para 6]

दावडडक विवि - जमानत - शतें - अनुपालन:

वनणीत: आवेिक को जमानि पर मुक्त करिे समय यह शिें आरोदपि की गईं दक वह साक्ष्यों से छे़िछा़ि नहीं करेगा, अदभयोजन सादक्षयों को प्रभादवि नहीं
करेगा, न्यायालय के आिेशों का पालन करेगा, परीक्षण में सहयोग करेगा िथा जमानि की स्विंत्रिा का िुरुपयोग नहीं करेगा। [Para 6]

जमानि मंजूर। (E-14)