# Shiv Gopal Gupta v. Additional Collector Finance & Revenue, Kanpur Nagar & Ors

- **Citation:** (2023) 3 ILRA 1172
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2023-02-10
- **Case number:** Writ-C No.46905 of 2000
- **Bench:** Umesh Chandra Sharma
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/shiv-gopal-gupta-v-additional-collector-finance-revenue-kanpur-nagar-ors-49898
- **Pages:** 5

## Headnote

Civil Law - Illegal Occupation of Gaon
Sabha Property - U.P. Zamindari Abolition
and Land Reforms Act, 1950 - Section
122-B-
there
cannot
be
adverse
possession of any Gaon Sabaha land - no
one can be allowed to take illegal
possession of the Gaon Sabha land and if
any one makes such an attempt, the State
should stop - recovery of the amount of
compensation - U.P. Zamindari Abolition
and Land Reforms Rules, 1952, 115F - All
damages ordered to be recovered and
expenses incurred in the execution of the
orders of the Collector shall be realised as
arrears of land revenue and credited to
the Consolidated Gaon Fund - If the
damage
or
loss
caused
through
misappropriation is of such a nature as is
not capable of being repaired or made
good, the Collector shall assess the
amount of damage or loss in terms of
money at the prevailing market rate in the
locality - In case of wrongful occupation
of land, the damage caused to the Gaon
Sabha, shall be assessed for each year of
such wrongful occupation or any part
thereof at 100 times the amount of rent
computed at the sanctioned hereditary
rates applicable to the plots concerned -
In case the occupant of land continued to
remain in such wrongful occupation, he
shall be further liable to pay one-eighth of
the damages so assessed for every month
of the continued occupation after the date
of the order - In the instant petitioner
illegally occupied 0.019 hectare of Chak
road and merged it with his plot number
461 - Revenue Authorties directed to
impose the amount of compensation as
per Rule 115 (E) and (F) of Uttar Pradesh
Zamindari Abolition and Land Reforms
Rules, 1952, and the petitioner directed to
pay it within thirty days

Dismissed. (E-5)

List of Cases cited:

## Text

1172 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

36. It is clarified that no other point or
ground was pressed by the learned counsel
for the respective parties.

37. This order, however, shall not
preclude the respondent bank from taking
recourse before the appropriate forum/court
for recovery of its loss as per law, if so
advised.
----------
(2023) 3 ILRA 1172
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 10.02.2023

BEFORE

THE HON'BLE UMESH CHANDRA SHARMA, J.

Writ-C No.46905 of 2000

Shiv Gopal Gupta ...Petitioner
Versus
Additional Collector Finance & Revenue,
Kanpur Nagar & Ors. ...Respondent

Counsel for the Petitioner:
Sri A.K. Sachan

Counsel for the Respondent:
C.S.C.

Civil Law - Illegal Occupation of Gaon
Sabha Property - U.P. Zamindari Abolition
and Land Reforms Act, 1950 - Section
122-B-
there
cannot
be
adverse
possession of any Gaon Sabaha land - no
one can be allowed to take illegal
possession of the Gaon Sabha land and if
any one makes such an attempt, the State
should stop - recovery of the amount of
compensation - U.P. Zamindari Abolition
and Land Reforms Rules, 1952, 115F - All
damages ordered to be recovered and
expenses incurred in the execution of the
orders of the Collector shall be realised as
arrears of land revenue and credited to
the Consolidated Gaon Fund - If the
damage
or
loss
caused
through
misappropriation is of such a nature as is
not capable of being repaired or made
good, the Collector shall assess the
amount of damage or loss in terms of
money at the prevailing market rate in the
locality - In case of wrongful occupation
of land, the damage caused to the Gaon
Sabha, shall be assessed for each year of
such wrongful occupation or any part
thereof at 100 times the amount of rent
computed at the sanctioned hereditary
rates applicable to the plots concerned -
In case the occupant of land continued to
remain in such wrongful occupation, he
shall be further liable to pay one-eighth of
the damages so assessed for every month
of the continued occupation after the date
of the order - In the instant petitioner
illegally occupied 0.019 hectare of Chak
road and merged it with his plot number
461 - Revenue Authorties directed to
impose the amount of compensation as
per Rule 115 (E) and (F) of Uttar Pradesh
Zamindari Abolition and Land Reforms
Rules, 1952, and the petitioner directed to
pay it within thirty days

Dismissed. (E-5)

List of Cases cited:

1. St. of U.P. Vs Rajaram 1983 Revenue
Decision 351

2. Chob Singh & anr. Vs St. Of U.P & ors. (2000)
REVDEC 233

3. Suraj Bali Vs Gaon Sabha 1982 AWC (R) 149

4. Sripati Vs Gaon Sabha 1004(24) ALR

(Delivered by Hon'ble Umesh Chandra
Sharma, J. )

1. याचिकाकर्ाा के चिद्वान अचििक्ता श्री ए. के. सिान
एिम् राज्य की र्रफ से चिद्वान अचर्ररक्त मुख्य स्थायी अचििक्ता श्री
चिर्ेंद्र नारायण राय को ध्यानपूिाक सुना गया र्था पत्रािली का
पररशीलन चकया गया।

2. यह दीिानी ररट याचिका उत्तरदार्ा सं० 2 अपर
र्हसीलदार कानपुर नगर के पास चदनांकः 10.1.2000 र्था
3 All. Shiv Gopal Gupta Vs. Additional Collector Finance & Revenue, Kanpur Nagar & Ors.
1173
चनगरानी न्यायालय अपर चिलाचिकारी चित्त एिं रािस्ि कानपुर नगर
उत्तरदार्ा सं० 1 के द्वारा पाररर् आदेश चदनांक 31 िुलाई 2000
के चिरुद्ध प्रस्र्ुर् की गयी है।

3. संक्षेप में प्रकरण के र्थ्य यह है चक याचिकाकर्ाा को
नोचटस संलग्नक 1 फामा 49 के चदनांक 6.4.1993 को यह
आरोप लगार्े हुए प्रेचिर् चकया चक उसने गाटा सं0 461/1390
क्षेत्रफल 0.031 हेक्टेयर गांि सभा सोना की भूचम पर अचर्क्रमण
कर चलया है। याचिकाकर्ाा ने उक्त नोचटस के चिरुद्ध आपचत्त संलग्नक
2 प्रस्र्ुर् चकया चक अचर्क्रमण उसने नहीं चकया िरन् श्रीमर्ी मुन्नी
देिी पत्नी प्रर्ाप चसंह ने चकया है। र्दुपरान्र् याचिकाकर्ाा द्वारा साक्ष्य
प्रस्र्ुर् चकया गया चक चििारण न्यायालय ने एकपक्षीय सिे आख्या
चदनांचकर् 3 िनिरी 1993 पर चिश्वास चकया चिसमें चिना
चनिााररर् चिन्दु चलए ही यह अििाररर् चकया गया चक चििाचदर् भूचम
गाटा सं0 461/1390 में पड़र्ी है। र्हसीलदार ने याचिकाकर्ाा
के चिरुद्ध िेदखली एिं 50 रुपये हिााने का आदेश पाररर् चकया िो
संलग्नक 3 है।

4. उक्त आदेश के चिरुद्ध याचिकाकर्ाा ने चनगरानी सं०
31/1994 प्रस्र्ुर् चकया चिसमें उभय पक्षों की उपचस्थचर् में पुनः
सिे करने का आदेश चदनांक 31 िनिरी 1995 को पाररर् चकया
गया। उक्त आदेश संलग्नक 4 है। यािी के अनुसार उप-र्हसीलदार
ने 4 ििा के उपरान्र् चिना सिे चकये हुए चदनांक 9.12.1999 को
आख्या प्रस्र्ुर् चकया। ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है चक उक्त आख्या कमरे में
िैठकर चिना नाप-िोख चकये र्था चनिााररर् चिन्दुओं को अििाररर्
चकये िगैर र्ैयार चकया गया है िो संलग्नक 5 है। चनगरानी पत्र
संलग्रक 8 में यह आिार चलये गये है चक संपूणा भूचम का क्षेत्रफल
लगभग 3 चिस्िा है र्था र्हसीलदार की आख्या झूठी है। उत्तरदार्ा
सं० 1 ने अिैि एिं मनमाने र्ौर पर यह चििार में चलये िगैर चक
आख्या चदनांचकर् 9.12.1999 प्रस्र्ुर् द्वारा उप-र्हसीलदार चिना
पैमाइश चकये र्था चनिााररर् चिन्दुओं को अििाररर् चकये िगैर चदया
है र्था यह अिैि है, चनगरानी को चनरस्र् कर चदया। उत्तरदार्ा सं०
1 ि 2 ने एक र्रफ अचर्क्रचमर् भूचम का क्षेत्रफल 0.031 हे० से
घटाकर 0.019 हे० कर चदया, दूसरी र्रफ क्षचर्पूचर्ा की िनराचश
10 गुना िढाकर 500 रुपये िाचिाक कर चदया। अर्ः उनके द्वारा
पाररर् आदेश अिैि मनमाना एिं गलर् है। यािी ने चििाचदर् संपचत्त
पर अपने कब्िे को इनकार चकया है र्था यािी के अनुसार सिे से
यह स्थाचपर् नहीं हुआ है चक यािी ने चििाचदर् भूचम पर अचर्क्रमण
चकया है। प्रचर्कर की िनराचश भी मनमाने र्था िािार दर के चिपरीर्
है िैसा चक चनयम 115 द (II) के अंर्गार् आकचलर् चकया िाना
िाचहए। प्रश्नगर् आदेश प्राकृचर्क न्याय के चसद्धान्र्ों के चिरुद्ध है।
िारा 122-B में उपिारा 4 (ङ) के संयोिन के उपरान्र् यािी
घोिणात्मक िाद प्रस्र्ुर् करने से प्रचर्िंचिर् है िो अचिकारार्ीर् है।
अर्ः प्रश्नगर् आदेश चनरस्र् चकया िाये।

5. यािी ने याचिका में िचणार् अचभलेखों को संलग्रको के
रूप में प्रस्र्ुर् चकया है।

6. चिपक्षी की र्रफ से प्रचर् शपथ पत्र चदनांचकर् 10
िुलाई 2001 प्रस्र्ुर् चकया गया र्था यह कथन चकया गया चक
संिंचिर् लेखपाल ने चदनांक 6.1.1993 को यह आख्या प्रस्र्ुर्
चकया चक चशि गोपाल गुप्ता पुत्र रामलाल गुप्ता चनिासी ग्राम सोना
र्हसील एिं चिला कानपुर नगर ने गांिसभा की िकरोड की भूचम
गाटा सं0 461/1390 क्षेत्रफल 0.031 है० भूचम पर कब्िा कर
चलया है र्था उसे अपने गाटा सं0-461 में सन् 1400 फसली में
चमला चलया है, अर्ः 3000 रुपये की क्षचर् हुई है। लेखपाल ने
अपनी आख्या के साथ मानचित्र खर्ौनी 1396 फसली र्ा
1401 फसली का खसरा 1400 फसली प्रस्र्ुर् चकया। उक्त ररपोटा
पर िारा 122 िी० उत्तर प्रदेश िमींदारी उन्मूलन एिं भूचम सुिार
अचिचनयम के अंर्गार् कायािाही प्रारंभ करर्े हुए याचिकाकर्ाा के
चिरुद्ध 49 क की सूिना िारी की गयी चिसमें उसने आपचत्त में यह
कथन चकया चक चििाचदर् भूचम नाली एिं रास्र्े की भूचम है र्था
उसका उक्त भूचम से कोई संिंि सरोकार नहीं है न ही िह उसके
कब्िे में है। चििाचदर् भूचम के उत्तर में भूचम सं0 462 श्रीमर्ी मुन्नी
देिी हैं चिन्होंने नाली एिं रास्र्े को क्षचर्ग्रस्र् करर्े हुए अचर्क्रमण
चकया है।

7. गांिसभा की र्रफ से लेखपाल को परीचक्षर् चकया गया
चिसने अपने सशपथ साक्ष्य में अपनी आख्या को साचिर् चकया र्था
यह कथन चकया चक याचिकाकर्ाा ही चििाचदर् भूचम पर अनचिकृर्
कब्िे में है चिससे गांिसभा को 3000 रुपये की क्षचर् काररर् हुई है।
यािी ने भी स्ियं र्था 2 साक्षीगण चशििरन चसंह एिं मोर्ीलाल को
परीचक्षर् कराया।

8. एक कमीशन िारी चकया गया र्था नायि र्हसीलदार ने
स्थल चनरीक्षण चकया र्था सिे कायािाही यािी के चिद्वान अचििक्ता की
उपचस्थचर् में करर्े हुए आख्या प्रस्र्ुर् चकया चिसके चिरुद्ध याचिकाकर्ाा
ने आपचत्त प्रस्र्ुर् चकया र्था नायि र्हसीलदार की आख्या चनरस्र् करने
का चनिेदन चकया। खर्ौनी एिं खसरा में चििाचदर् भूचम रास्र्ा दिा है
र्था खसरा सं० 1400 फसली में एक चटप्पणी अंचकर् की गयी है चक
चशि गोपाल गुप्ता ने चििाचदर् भूचम पर अनचिकृर् कब्िा कर चलया है
िो नायि र्हसीलदार की आख्या से भी स्पष्ट है।

9. अिीनस्थ न्यायालय ने समस्र् मौचखक एिं अचभलेखीय
साक्ष्यों का अिलोकन करने के उपरान्र् यह अििाररर् चकया चक
1174 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
यािी ने गांिसभा की भूचम सं० 461/1390 क्षेत्रफल 0.0310
हे० पर अिैि अचर्क्रमण चकया है र्था गांिसभा को क्षचर् काररर्
चकया है। अर्ः 100 रुपये हिाा र्था 3 रुपये िेदखली व्यय का
आदेश चदनांक 10.01.2000 को पाररर् चकया गया।
याचिकाकर्ाा द्वारा प्रस्र्ुर् चनगरानी भी र्दनुसार चदनांक 31 िुलाई
2000 को खाररि की गयी र्था चििारण न्यायालय के आदेश को
पुष्ट चकया गया।

10. नोचटस िारी होने के उपरान्र् भी याचिकाकर्ाा अनुपचस्थर्
रहा चिस पर चदनांक 27.9.1997 को एकपक्षीय आदेश पाररर् चकया
गया, र्दुपरान्र् उसे उक्त आदेश को चनरस्र् करने के चलए चनगरानीकर्ाा
ने प्राथाना पत्र प्रस्र्ुर् चकया िो चदनांक 18.10.1997 को चनरस्र्
चकया गया। पुनः नायि र्हसीलदार से आख्या मंगाई गयी, िो अंर्र्ः
चदनांक 9.12.1999 को प्रस्र्ुर् की गयी। उक्त कायािाही में यािी भी
उपचस्थर् था र्था िि पत्रािली 10 िनिरी 2000 को प्रस्र्ुर् हुई र्ो
भी यािी उपचस्थर् नहीं था। अर्ः पत्रािली के अनुशीलन एिं पररशीलन
करने के उपरान्र् नायि र्हसीलदार ने चदनांक 10 िनिरी 2000 को
आदेश पाररर् चकया। चििाचदर् गाटे का संपूणा क्षेत्रफल 0.031 हे० है
परन्र्ु संपूणा नाप-िोख करने के उपरान्र् यह पाया गया चक यािी ने
गांिसभा के रास्र्े की भूचम पर मात्र 0.019 हे० भूचम पर ही कब्िा
चकया है। अर्ः उसी के संिंि में िेदखली का आदेश पाररर् चकया गया।
दूसरा सिे आख्या भी संपूणा नाप-िोख को कायािाही यािी की
उपचस्थचर् में करने के उपरान्र् प्रथम आख्या का सत्यापन करर्े हुए
प्रस्र्ुर् चकया गया था। यह कहना गलर् है चक नायि र्हसीलदार ने चस्थर
चिन्दुओं के आिार पर सिे की कायािाही नहीं चकया है। क्षचर्पूचर्ा की
िनराचश को अपर र्हसीलदार ने सही पाया अर्ः उक्त क्षचर् पूचर्ा को
प्रदान करने का आदेश 7 ििों र्क अिैि कब्िे में रहने के आिार पर
पाररर् चकया गया। क्षचर्पूचर्ा का चनिाारण िािार दर के आिार पर चकया
गया है। अर्ः उसने संगणना में कोई अिैिर्ा नहीं है। अर्ः याचिका
खाररि चकया िाये। ऐसी प्रचर् शपथ पत्र के साथ छाया प्रचर् कब्िा प्राचप्त
अचभलेख चदनांचकर् 22.12.2000 भी संलग्न चकया गया है चिसे
अनुसार िकरोड भूचम सं0 461/1390 क्षेत्रफल 0.019 हे० ग्राम
सोना का कब्िा मौके पर ग्राम प्रिान को चशि गोपाल गुप्ता (यािी) को
िेदखल करके प्रदान चकया गया है।

11. उक्त प्रचर् शपथ पत्र के चिरुद्ध यािी द्वारा कोई
ररज्िाइंडर शपथ पत्र प्रस्र्ुर् नहीं चकया गया है।

12. सुना र्था पत्रािली का अिलोकन चकया।

13. यािी ने मुख्य रूप से प्रथम आिार यह चलया है चक
दुिारा िि उप- र्हसीलदार ने चदनांक 09-12-1999 को
आख्या प्रस्र्ुर् चकया र्ो ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है चक कमरे में िैठकर
चिना नाप िोख चकये र्था चस्थर चिंदुओं को अििाररर् चकये िगैर
र्ैयार चकया।

14. यािी ने चद्वर्ीय आिार यह चलया है चक पूिा में
उत्तरदार्ागण के अनुसार यािी द्वारा अचर्क्रचमर् भूचम का क्षेत्रफल
0.031 हेक्टेयर था परन्र्ु दुिारा उसे घटाकर मात्र 0.016 हेक्टेयर
पर अचर्क्रमण करना िर्ाया।

15. यािी ने र्ृर्ीय आिार यह चलया है चक अचर्क्रचमर्
भूचम का क्षेत्रफल 0.031 हेक्टेयर से घटकर 0.019 हेक्टेयर हो
गया र्ो क्योंकर क्षचर्पूचर्ा की िनराचश दस गुना िढाकर पांि सौ
रुपए िाचिाक कर चदया गया। प्रचर्कर की िनराचश मनमाना र्था
िािार दर के चिपरीर् है। इसका आकलन चनयम- 115, द(ii) के
अंर्गार् चकया िाना िाचहए था।

16. यािी की र्ीनों आपचत्तयों का चनस्र्ारण करर्े हुए इस
याचिका का चनस्र्ारण चकया िार्ा हैं।

17. प्रथम आपचत्त- यािी की प्रथम आपचत्त यह है चक
उप-र्हसीलदार ने चिना सिे चकये चदनांक 09-12-1999 को
आख्या प्रस्र्ुर् चकया। पत्रािली के अिलोकन से ज्ञार् होर्ा है चक
पूिा में भी सिे चदनांचकर् 03-01-1993 को एक पक्षीय आख्या
कहर्े हुए यािी ने चनगरानी संख्या 31/1994 प्रस्र्ुर् चकया था
उसमें चदनांक 31-01-1995 को पुनः सिे करने का आदेश
पाररर् चकया गया, परन्र्ु पुनः उप-र्हसीलदार द्वारा िार ििा के
उपरान्र् सिे की कायािाही की गई र्था यािी के अनुसार चिना सिे
चकये हुए चदनांक 09-12-1999 को आख्या प्रस्र्ुर् की गई। इस
सिे आख्या को यािी ने संलग्नक पााँि के रूप में याचिका के साथ
संलग्न चकया। संलग्नक संख्या-5 के अिलोकन से ज्ञार् होर्ा है चक
पूिा में नायि र्हसीलदार श्री होरी लाल शाक्य ने चिपक्षी के
अचििक्ता के समक्ष पैमाइश कर अपनी आख्या चदनांक 03-081993 को प्रस्र्ुर् चकया था। आदेश चदनांचकर् 31-01-1995
के अनुपालन में िर्ामान नायि-र्हसीलदार द्वारा पुनः कानूनगो एिं
लेखपाल के साथ मौके पर पहुंिकर यािी चिपक्षी की उपचस्थचर् में
मौके की नाप की गई र्था चस्थर चिंदुओं की पुचष्ट की गई। मौके पर
चस्थर चिंदु सही चमले र्था पुनः नाप चकया र्ो ज्ञार् हुआ चक िक
संख्या-661/1390, िो भूचम संख्या-461 के पूरि चस्थर् है, को
चिपक्षी ने अपने खेर् संख्या-461 में चमला चलया है र्था िक
संख्या 461 की मेड़ को ही 462 की मेड़ िना चदया है र्था िक
संख्या -461 की पूिी मेड़ मौके पर चिद्यमान नहीं है एिं 461 के
पूरि की ओर के िकरोड को अपने खेर् में चमला चलया है। माप
करने पर 0.019 हेक्टेयर भूचम को सन् 1400 फसली से
3 All. Shiv Gopal Gupta Vs. Additional Collector Finance & Revenue, Kanpur Nagar & Ors.
1175
अनचिकृर् कब्िा करके चिपक्षी यािी द्वारा अपने खेर् संख्या 461
में चमला लेने का र्थ्य सिे से साचिर् पाया गया र्था यह पाया गया
चक मौके पर िकरोड पूरी र्रह समाप्त हो गया है। चिससे ग्रामसभा
को क्षचर् हुई है।

18. उक्त आख्या के उपरान्र् पुनः यािी को सुना गया र्था
चदनांक 10-01- 2000 को यािी को भूचम संख्या-46/1390,
क्षेत्रफल 0.019 हेक्टेयर से िेदखल करने का आदेश पाररर् चकया
गया।

19. इस न्यायालय के मर्ानुसार अपर र्हसीलदार एिं
चनगरानी न्यायालय का चनणाय िो नायि र्हसीलदार के सिे आख्या
पर आिाररर् है, में र्थ्यर्ः एिं चिचिर्ः कोई त्रुचट नहीं है। पैमाइश से
यह चनष्किा नहीं चनकला चक मुन्नी देिी ने भी गांिसभा की भूचम पर
कोई अचर्क्रमण चकया है। मात्र इस आिार पर चक यािी के पक्ष में
चनष्किा नहीं चनकला, यह नहीं कहा िा सकर्ा चक सिे आख्या र्था
इस संिंि में पाररर् प्रश्नगर् दोनों आदेश त्रुचटपूणा हैं, अर्ः यािी की
प्रथम आपचत्त संिाया नहीं है र्था चनरस्र् चकया िार्ा है।

20. चद्वर्ीय आपचत्त- यािी ने चद्वर्ीय आपचत्त यह की है चक
पूिा में अचर्क्रचमर् भूचम का क्षेत्रफल 0.0131 हेक्टेयर िर्ाया गया
था परन्र्ु िाद में उसे घटाकर 0.019 हेक्टेयर मात्र िर्ाया िा रहा
है। इस न्यायालय के मर्ानुसार यचद सिे पैमाइश से यह चनष्किा
चनकलर्ा है चक यािी ने चििाचदर् भूचम गाटा संख्या- 46/1390
के मात्र 0.019 हेक्टेयर पर अिैि कब्िा चकया है र्ो उक्त क्षेत्रफल
की भूचम के संिंि में ही आदेश पाररर् चकया गया। यह संभि है चक
िारा- 122 (िी.), की कायािाही को देखर्े हुए यािी ने अपने
अचर्क्रमण का चिस्र्ार कम कर चदया हो, अर्ः यह चभन्नर्ा कोई
आिार नहीं है चक प्रश्नगर् आदेश त्रुचटपूणा मान चलया िाये। अर्ः
यह आपचत्त भी यािी के चिरुद्ध चनणीर् की िार्ी है।

21. र्ृर्ीय आपचत्त- यािी की र्ृर्ीय आपचत्त यह है चक
यचद गााँिसभा की अचर्क्रचमर् भूचम का क्षेत्रफल 0.031 हेक्टेयर
के ििाय मात्र 0.019 हेक्टेयर ही पाया गया र्था पूिा में मात्र
पिास रुपए प्रचर् ििा की दर से ििा 1994 में िुमााना आरोचपर्
चकया गया र्ो िाद में पााँि सौ रुपए प्रचर् माह क्षचर्पूचर्ा अदायगी
का आदेश चकस प्रकार कर चदया गया। इस संिंि में यह र्का
चदया िा सकर्ा है चक ििा 1994 र्था ििा 2000 में छः ििा
में मुद्रास्फीचर् की चस्थचर् को देखर्े हुए क्षचर्पूचर्ा की िनराचश को
िढाया िाना स्िाभाचिक है र्था यािी के चलए कोई कारण नहीं
था चक अनायास गााँिसभा की िकरोड की भूचम पर कब्िा कर
अपने खेर् में चमलाकर आिागमन को अिरुद्ध कर दे र्था
दोिपूणा अचभलाभ प्राप्त करे। यद्यचप यह अिश्य है चक प्रचर्कर का
आकलन र्त्समय प्रिचलर् उत्तर प्रदेश िमींदारी उन्मूलन
अचिचनयम्/उत्तर प्रदेश िमींदारी एिम् भूचम सुिार उन्मूलन
चनयम, 1952 के अंर्गार् चनचमार् चनयमों के अनुसार चकया
िाना िाचहए। िस्र्ुर्ः चनष्पादन व्यय र्था क्षचर्पूचर्ा की िसूली
का चििान चनयम 115 ङ एिं 115 ि में चकया गया है न चक
चनयम 115 द(1) में चकया गया है।

22. चनयम 115 ड़ (2) में यह िचणार् है चक 49 ि
फामा में चनष्पादन व्यय के रूप में िसूल की िाने िाली िनराचश
र्था चनयुक्त कचमायों का िेर्न एिं भत्ता पैरा-405 रेिेन्यू कोटा
मैनुअल में चिचहर् दर से आकचलर् करके चलखा िाएगा।

23. िारा-115 ि (1) के अनुसार समस्र् क्षचर्पूचर्ा
एिं चनष्पादन व्यय की िनराचश को चिलाचिकारी द्वारा
मालगुिारी की िसूली की भांचर् िसूल कर गााँि फण्ड अथिा
स्थानीय प्राचिकारी के फण्ड में िमा चकया िाएगा र्था कचमायों
के िेर्न एिम् टी. ए. की िनराचश को र्हसील, उप-खिाना में
शीिाक ''029 भू-रािस्ि इ अन्य रसीद (5), कलेक्शन ऑफ
पेमेंट फॉर सचिासेि रेन्डडा 99' में िमा चकया िाएगा।

24. 115 ि (2) के अनुसार यचद दुचिाचनयोिन के
कारण हुई क्षचर् या हाचन इस प्रकृचर् की है चक उसको पूिािर््
करना अथिा प्रचर्पूचर्ा करना संभि नहीं है र्ो चिलाचिकारी
िािार दर से िन के रूप में उसका आकलन करेंगे र्था यचद
अिैि कब्िे से गााँिसभा अथिा स्थानीय प्राचिकारी को क्षचर् हुई
है र्ो प्रत्येक ििा के चलए इस र्रह के कब्िे या उसके चकसी
स्िीकृर् िंशानुगर् दरों के सौ गुना पर ह्रास का आकलन चकया
िाएगा। यचद ऐसा कब्िािारी इस र्रह के गलर् कब्िे में िना
रहर्ा है र्ो िह आदेश की र्ारीख के िाद िारी कब्िे के संिंि
में प्रत्येक माह के चलए इस र्रह से चनिााररर् नुकसान के 1/8
चहस्से का भुगर्ान करने के चलए और उत्तरदायी होगा। इस संिंि
में उत्तर प्रदेश राज्य िनाम रािाराम 1983 आर.डी. 351 में
भी चसद्धांर् प्रचर्पाचदर् चकये गये हैं।

25. यािी ने चसिाय इस र्थ्य के इनकार करने के चक
उसने ग्राम पंिायर् की भूचम गाटा संख्या-46/1390 में अचर्क्रमण
नहीं चकया है, यह कथन नहीं चकया है चक उसने स्ियं के द्वारा चकये
गये अचर्क्रमण को हटा चलया है। इस संिंि में यह अििाररर् चकया
िार्ा है चक क्षचर्पूचर्ा का आकलन उत्तर-प्रदेश िमींदारी उन्मूलन
चनयम- 115 द (ii) के अनुसार चकया िाना िाचहए। अर्ः यािी
की यह आपचत्त उपरोक्तानुसार चनस्र्ाररर् की िार्ी है।

26. िारा-122 ख., उत्तर-प्रदेश िमींदारी उन्मूलन
अचिचनयम चनम्निर्् है-
1176 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

27. िारा-122 ख., (1), के अनुसार यचद ग्राम पंिायर् में
चनचहर् चकसी भूचम को चकसी व्यचक्त द्वारा क्षचर् पहुाँिायी िार्ी है अथिा
दुचिाचनयोग चकया िार्ा है। र्ो ग्राम पंिायर् उसको ग्रहण करने एिं उसके
कब्िे को िापस प्राप्त करने के चलए अचिकारी है। ग्राम पंिायर् की भूचम
चनयमानुसार ही चकसी व्यचक्त को आिंचटर् की िा सकर्ी है र्था िकरोड़
की भूचम चकसी भी दशा में चकसी भी व्यचक्त को आिंचटर् नहीं की िा सकर्ी
है। यचद ऐसा अिैि अचदक्रमण पाया िार्ा है र्ो सहायक कलेक्टर िारा-
122 ख. (2) के अंर्गार् ऐसे व्यचक्त को नोचटस िारी करेगा। िारा-122
ख, (3) के अनुसार यचद स्पष्टीकरण अपयााप्त पाया िार्ा है र्ो उसकी
िेदखली र्था क्षचर्पूचर्ा प्रदान करने का आदेश पाररर् करेगा िो मालगुिारी
की र्रह िसूल योग्य होगी र्था िारा-122 ख (4), के अनुसार यचद ऐसे
व्यचक्त को दोिी नहीं पाया िार्ा है र्ो नोचटस समाप्त कर चदया िाएगा।

28. िारा-122 ख, (4) क के अनुसार सहायक कलेक्टर के
आदेश से क्षुब्ि व्यचक्त र्ीन चदन के अंदर कलेक्टर के समक्ष चनगरानी प्रस्र्ुर्
कर सकर्ा है, र्था चनगरानी सहायक कलेक्टर का आदेश उप-िारा-4(क),
एिं (4) घ, के अंर्गार् अंचर्म होगा, अथाार्् चनगरानी अथिा उप-िारा-
4(घ), के अंर्गार् प्रस्र्ुर् िाद सक्षम न्यायालय के चनणाय के अध्यिीन
होगा। उप-िारा-4(ङ). एक प्रचर्िंि आरोचपर् करर्ा है चक यचद उप-िारा-
4(क), के अंर्गार् चनगरानी प्रस्र्ुर् की गई है र्ो उप-िारा-4(घ), के
अंर्गार् िाद प्रस्र्ुर् नहीं चकया िा सकेगा।

29. उप-िारा-4(ि), एक उपिार अनुसूचिर् िाचर् एिं
अनुसूचिर् िनिाचर् के कृचि श्रचमकों को प्रदान करर्ा है चक यचद िह िारा
132, िमींदारी उन्मूलन अचिचनयम् के अंर्गार् ग्राम-पंिायर् में चनचहर्
चकसी भूचम पर 13-05-2007 के पूिा से कब्िे में है र्था उसके पास
3.125 एकड़ से अचिक भूचम नहीं है, र्ो ऐसे व्यचक्त के चिरुद्ध कोई
कायािाही नहीं की िाएगी। चनचिर् ही यािी गुप्ता चिरादरी का होने के कारण
इस लाभ को प्राप्त करने का अचिकारी नहीं है।

30. िोि चसंह चिरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य 2000 आर.डी.
233., सूरि िली चिरुद्ध गााँिसभा 1982 ए.डब््यू. सी.(आर.) 149
एिं श्रीपचर् चिरुद्ध गााँिसभा 1994 (23), ए.एल.आर (आर.) 18 में
यह अििाररर् चकया गया चक गााँिसभा की भूचम पर अिैि चनमााण,
िृक्षारोपण र्था िकरोड़ के चकसी भाग को अपनी भूचम में चमला लेना
गााँिसभा की सम्पचत्त की क्षचर् करने एिं उसका दुचिाचनयोग करने के उदाहरण
हैं। प्रस्र्ुर् िाद में ग्राम-पंिायर् के िकरोड को यािी द्वारा अपने िक में
चमलाकर ग्राम पंिायर् को क्षचर् एिं दुचिाचनयोग काररर् चकया गया।

31. डालचसंह चिरुद्ध अचर्ररक्त कलेक्टर मेरठ 2006 ( 101),
आर.डी.(एि.) 7, हाईकोटा में अििाररर् चकया गया चक अिैि कब्िा
संिंिी चनणाय र्थ्य का चनष्किा है र्था यह उच्ि न्यायालय द्वारा खचण्डर्
चकये िाने योग्य है। यह चनणायि चिचि भी यािी के चिरुद्ध प्रयुक्त होर्ी है।

32. उपरोक्त आिारों पर यह चनष्किा चनकलर्ा है चक यािी ने ग्राम
पंिायर् के िकरोड गाटा संख्या-461/1390 के 0.019 हेक्टेयर भूचम
पर अिैि कब्िा कर ग्राम पंिायर् को क्षचर् काररर् चकया है र्था ग्राम
पंिायर् की सम्पचत्त का दुचिाचनयोग चकया है, अर्ः उक्त 0.019 हेक्टेयर
भूचम से यािी िेदखल चकये िाने योग्य है र्था इस संिंि में पाररर् प्रश्नगर्
आदेश र्थ्यर्ः एिं चिचिर्ः सही एिं िैि है।

33. िहााँ र्क क्षचर्पूचर्ा के आरोपण का प्रश्न है यह क्षचर्पूचर्ा का
आरोपण चनयम- 115 द (ii), के अनुसार आकचलर् कर आरोचपर् चकया
िाना िाचहए परन्र्ु इस संिंि में प्रभगर् आदेशों में कोई चििरण प्रस्र्ुर् नहीं
चकया गया है चक उक्त चनयम का अनुपालन करर्े हुए पााँि सौ रुपए प्रचर् ििा
की िनराचश की क्षचर्पूचर्ा की राचश का भुगर्ान का आरोपण चकया गया है,
अर्एि यह याचिका अंशर्ः क्षचर्पूचर्ा की िनराचश के आरोपण के संिंि में
स्िीकार चकये िाने योग्य है।

आदेश

34. यह याचिका अंशर्ः अपर र्हसीलदार, कानपुर नगर के
आदेश चदनांचकर् 10-01-2000 र्था चनगरानी न्यायालय के चनणाय
चदनांचकर् 31-07-2000, िािल िेदखली यािी उपरोक्तानुसार खचण्डर्
की िार्ी है र्था िािर् आरोपण क्षचर्पूचर्ा की िनराचश अंशर्ः इस प्रकार
स्िीकार की िार्ी है चक चिपक्षीगण उत्तर-प्रदेश िमींदारी उन्मूलन एिम् भूचम
सुिार चनयम, 1952 के चनयम115 (ङ) एिम् (ि), के अनुसार चिर्नी
क्षचर्पूचर्ा की िनराचश िनर्ी है, उर्नी क्षचर्पूचर्ा की िनराचश का आरोपण
एक माह में करे र्था उसे यािी र्दुपरान्र् र्ीस चदिस के अंदर भुगर्ान करे।
यह आदेश अनुपालनाथा चिलाचिकारी कानपुर नगर को प्रेचिर् हो।
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(2023) 3 ILRA 1176
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 15.03.2023

BEFORE

THE HON'BLE DR. KAUSHAL JAYENDRA
THAKER, J.
THE HON'BLE ARUN KUMAR SINGH
DESHWAL, J.

Criminal Appeal No. 1071 of 2010

Hasmuddin ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Appellant: