# Sitaram & Ors v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2024) 3 ILRA 917
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-03-13
- **Case number:** Application U/S 482. No. 2062 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/sitaram-ors-v-state-of-u-p-anr-51704
- **Pages:** 6

## Headnote

G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 323,
506, 325 - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 156(3) -
आपराकिि िायगवाही िे कवरुद्ध - वैिता - कवपक्षी सं. 2 िे कदिांि
22.10.2018 िो िारा 156(3) दं0प्र0सं0 िे अंतर्गत प्राथगिा
पत्र देिर िहा कि कदिांि 24.09.2018 िो िब वह अपिे मुिदमे
िी पैरवी िरिे वापस लौट रहा था, रात 9:30 बिे रास्ट्ते में सर्ी
अकर्युक्तर्ण िे उसिो मारा-पीटा, र्ाकलयााँ दी और िाि से मारिे िी
िमिी दी तथा प्राथी सं. 3 िे उसिी िेब से रु०1220/- िबरि
कििाल कलए - प्राथगिा पत्र िो पररवाद रूप में पंिीिृत किया र्या -
कवपक्षी सं. 2 िे िारा 200 दं.प्र.सं. िे अंतर्गत कदए र्ए बयाि में
आरोपों िा समथगि िरते हुए बताया कि प्राथी सं. 3 िे साथ मारपीट से
उसिा बायााँ हाथ टूट र्या था - चक्षुदशी साक्षी िे िारा 202 दं.प्र.सं.
िे अंतर्गत अपिे बयाि दिग िरािर घटिा िी पुकष्ट िी - प्राथी िे
अकिवक्ता िे तिग कदया कि कवपक्षी सं. 2 द्वारा दायर वतगमाि पररवाद
प्रकतशोिवश प्रस्ट्तुत है, क्योंकि पूवग में प्राथी सं. 2 द्वारा दायर पररवाद में
ए.सी.िे.एम. िे कदिांि 27.07.2017 िो कवपक्षी सं. 2 व उसिे
कपता िो िारा 323, 498ि र्ा.दं.सं. एवं 3/4 दहेि प्रकतषेि
अकिकियम िे आरोपों पर कवचारण हेतु आहूत किया था - अकर्कििागररत,
पत्रावली िे अवलोिि से स्ट्पष्ट है कि कवचारण न्यायालय िे िारा 202
दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत र्वाहों िे बयाि अंकित िरिे प्राथगि पत्र िो
कवचारण हेतु आहूत िरिे िा किणगय कलया है - र्वाहों िे बयाि अंकित
िरिा िारा 202 दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत ही िी र्ई िााँच िी िायगवाही है
और आलोच्य आदेश में इस आिार पर िोई त्रुकट िहीं है कि कवचारण
न्यायालय िे िारा 202 दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत िााँच िहीं िी है - िारा
156(3) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत पररवाद; मारपीट, र्ाली-र्लौि, िमिी
व िि िी िबरि वसूली िा आरोप हैं, िारा 200 व 202 दं.प्र.सं.
िे बयािों से आरोप िा समथगि होता हैं - प्रकतशोि िा तिग अस्ट्वीिार -
कवचारण योग्य मामला बिता है, िायगवाही िो किरस्ट्त िरिे िा आिार
िहीं। (पैरा 3 से 5, 12, 16)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

## Text

3 All. Sitaram & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
917
FIR that co-accused Aqueel Ahmad @
Beeka has taken into possession of the
government land meant to be used as
chakroad and nali and the applicant is
carving out residential plots on the land
including the Government land.

13. In these circumstances, a case for
prosecution of the application under
Sections 2/3 of the Prevention of Damage
to Public Property Act, 1984 is made out.
The application lacks merit and is hereby
dismissed.
----------
(2024) 3 ILRA 917
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 13.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 2062 of 2024

Sitaram & Ors. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicants:
Jalaj Kumar Gupta

Counsel for the Opposite Parties:
G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 323,
506, 325 - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा 156(3) -
आपराकिि िायगवाही िे कवरुद्ध - वैिता - कवपक्षी सं. 2 िे कदिांि
22.10.2018 िो िारा 156(3) दं0प्र0सं0 िे अंतर्गत प्राथगिा
पत्र देिर िहा कि कदिांि 24.09.2018 िो िब वह अपिे मुिदमे
िी पैरवी िरिे वापस लौट रहा था, रात 9:30 बिे रास्ट्ते में सर्ी
अकर्युक्तर्ण िे उसिो मारा-पीटा, र्ाकलयााँ दी और िाि से मारिे िी
िमिी दी तथा प्राथी सं. 3 िे उसिी िेब से रु०1220/- िबरि
कििाल कलए - प्राथगिा पत्र िो पररवाद रूप में पंिीिृत किया र्या -
कवपक्षी सं. 2 िे िारा 200 दं.प्र.सं. िे अंतर्गत कदए र्ए बयाि में
आरोपों िा समथगि िरते हुए बताया कि प्राथी सं. 3 िे साथ मारपीट से
उसिा बायााँ हाथ टूट र्या था - चक्षुदशी साक्षी िे िारा 202 दं.प्र.सं.
िे अंतर्गत अपिे बयाि दिग िरािर घटिा िी पुकष्ट िी - प्राथी िे
अकिवक्ता िे तिग कदया कि कवपक्षी सं. 2 द्वारा दायर वतगमाि पररवाद
प्रकतशोिवश प्रस्ट्तुत है, क्योंकि पूवग में प्राथी सं. 2 द्वारा दायर पररवाद में
ए.सी.िे.एम. िे कदिांि 27.07.2017 िो कवपक्षी सं. 2 व उसिे
कपता िो िारा 323, 498ि र्ा.दं.सं. एवं 3/4 दहेि प्रकतषेि
अकिकियम िे आरोपों पर कवचारण हेतु आहूत किया था - अकर्कििागररत,
पत्रावली िे अवलोिि से स्ट्पष्ट है कि कवचारण न्यायालय िे िारा 202
दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत र्वाहों िे बयाि अंकित िरिे प्राथगि पत्र िो
कवचारण हेतु आहूत िरिे िा किणगय कलया है - र्वाहों िे बयाि अंकित
िरिा िारा 202 दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत ही िी र्ई िााँच िी िायगवाही है
और आलोच्य आदेश में इस आिार पर िोई त्रुकट िहीं है कि कवचारण
न्यायालय िे िारा 202 दं०प्र०सं० िे अन्तर्गत िााँच िहीं िी है - िारा
156(3) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत पररवाद; मारपीट, र्ाली-र्लौि, िमिी
व िि िी िबरि वसूली िा आरोप हैं, िारा 200 व 202 दं.प्र.सं.
िे बयािों से आरोप िा समथगि होता हैं - प्रकतशोि िा तिग अस्ट्वीिार -
कवचारण योग्य मामला बिता है, िायगवाही िो किरस्ट्त िरिे िा आिार
िहीं। (पैरा 3 से 5, 12, 16)

आवेदि किरस्ट्त I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. कृष्ण लाल चावला िथा अन्य बनाम उिर प्रिेर्श राज्य िथा एक अन्य
2021 5 एस.सी.सी. 435

2. ववजय िानुका आवि बनाम नजीमा मोहिाज (2014) 14 एस.सी.सी.
638

3. केन्रीय जाांच ब्यरो बनाम आयान वसांह आवि, 2023 एसएससी ऑनलाइन
एससी 379

4. राजीव कौरव बनाम बाई साहब िथा अन्य, (2020) 3 एसएससी
317
(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi,
J.)

1. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता श्री
जलज कुमार गुप्ता तर्था राज्य सरकार के
विद्िान अधििक्ता श्री पुनीत कुमार यादि
को सुना तर्था पत्रािली का अिलोकन
ककया।

2. िारा 482 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
अन्तगगत प्रस्तुत इस प्रार्थगना पत्र द्िारा
918 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
प्रार्थी ने विद्िान अततररक्त मुख्य न्यातयक
मजजस्रेट प्रर्थम, कक्ष सिं. 7, गोण्डा द्िारा
पररिाद सिं. 311/2021 में पाररत आदेश
हदनािंक 01.02.2023, जजसके द्िारा प्रार्थी सिं.
1 ि 4 को िारा 323 िा०दिं०सिं०, प्रार्थी सिं. 3
को िारा 323, 325 िा०दिं०सिं० एििं प्रार्थी सिं.
2 को िारा 506 िा०दिं०सिं० के अपराि के
विचारण के सलए आहूत ककया, की िैिता
को चुनौती दी है।

3. विपक्षी सिं. 2 ने हदनािंक 22.10.2018
को िारा 156 (3) दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत एक
प्रार्थगना
पत्र
देकर
कहा
कक
हदनािंक
24.09.2018 को जि िह अपने मुकदमे की
पैरिी करके िापस लौट रहा र्था, रात 9:30
िजे रास्ते में सिी असियुक्तगण ने उसको
मारा-पीटा, गासलयािं दी और जान से मारने
की िमकी दी तर्था प्रार्थी सिं. 3 ने उसकी
जेि से रु० 1220/- जिरन तनकाल सलए।

4. उक्त प्रार्थगना पत्र को न्यायालय ने
एक पररिाद के रूप में पिंजीकृत ककया है।
विपक्षी सिं. 2 ने िारा 200 दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत सलखाए गए अपने ियान में
पररिाद के कर्थनों का समर्थगन ककया तर्था
यह िी कहा कक प्रार्थी सिं. 3 के मारने से
उसके िाएिं हार्थ की हड्डी टूट गई र्थी।
अजुगन दुिे तर्था इिंद्रपाल, जो घटना के
चक्षुदशी साक्षी कहे गए हैं, उन्होंने िारा 202
दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत अपने ियान अिंककत
कराके घटना का समर्थगन ककया।

5. आलोच्य आदेश की िैिता को
चुनौती देते हुए प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता
ने तकग हदया कक इसके पूिग में प्रार्थी सिं 2
ने विपक्षी सिं. 2 के विरुद्ि एक पररिाद
प्रस्तुत ककया र्था। पररिाद की प्रतत अर्थिा
पररिाद प्रस्तुत करने की ततधर्थ प्रार्थगना पत्र
में असिकधर्थत नहीिं की गई है। उक्त
पररिाद के आिार पर सिंजस्र्थत िाद सिं. 626
सन 2016 में विद्िान अततररक्त मुख्य
न्यातयक मजजस्रेट कक्ष सिं. 13 जौनपुर
द्िारा पाररत आदेश हदनािंक 27.07.2017 की
प्रतत प्रार्थगना पत्र के सार्थ सिंलग्न है, जजसके
द्िारा विपक्षी सिं. 2 तर्था उसके वपता घुरऊ
को िारा 323, 498 (A) िा०दिं०सिं० एििं 3/4
दहेज प्रततषेि अधितनयम के आरोप के
विचारण हेतु आहूत ककया गया। प्रार्थी के
विद्िान अधििक्ता का कर्थन है कक िषग
2017 में पाररत उपरोक्त आदेश के
प्रततशोिस्िरूप यह पररिाद प्रस्तुत ककया
गया है।

6. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
कृष्ट्ण लाल चािला तथा अन्य बनाम उत्तर
प्रदेश राज्य तथा एक अन्य 20215
ए . ी. ी. 435 में माननीय उच्चतम
न्यायालय द्िारा पाररत तनणगय का आश्रय
सलया, जजसमें यह अििाररत ककया गया है
कक विचारण न्यायालय को उधचत मामलों
में असियोजन को प्रारिंि में ही तनरस्त कर
देना चाहहए, जजससे कक िहुमूलय न्यातयक
समय की िरिादी रुक सके।
3 All. Sitaram & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
919

7. कृष्ट्ण लाल चािला के उपरोक्त
प्रकरण के तथ्य इस प्रकार र्थे कक हदनािंक
05.08.2012 को सशकायतकताग ने एक
असिंज्ञेय अपराि की सूचना दी जजसमें उसने
कहा कक असियुक्तगण ने उसके घर आकर
उसे और उसकी पत्नी को लोहे की सररया
से मारा और जान से मारने की िमकी दी।
असियक्त की तरफ से िी उसी घटना की
एक ररपोटग हदनािंक 05.08.2012 को ही
प्रस्तुत करके िारा 323, 504, 506 िा०दिं०सिं
के अपरािों का आरोप सशकायतकताग और
उसकी पत्नी के विरुद्ि लगाया गया।
पक्षकारों के मध्य पहले से वििाद चला आ
रहा र्था। घटना के पािंच िषग के िाद हदनािंक
27.04.2017 को असियुक्तगण ने मजजस्रेट
के समक्ष िारा 155(2) दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत प्रार्थगना पत्र देकर प्रकरण की
वििेचना पुसलस से कराए जाने का अनुरोि
ककया, जजसके अनुिम में प्रर्थम सूचना
ररपोटग
पिंजीकृत
हुई
तर्था
हदनािंक
17.09.2017 को पुसलस ने िारा 323, 325,
504, 506 िा०दिं०सिं० के अन्तगगत आरोपों के
सिंििंि में आरोप पत्र प्रस्तुत ककया तर्था
मजजस्रेट ने असियुक्तगण को आहूत कर
आरोप विरधचत कर हदया। आरोप विरधचत
करने के िाद कई िषग िीतने के उपरािंत िी
कोई साक्षी प्रस्तुत नहीिं ककया गया र्था।
इसके उपरािंत सशकायतकताग ने हदनािंक
05.08.2012 को घहटत हुई घटना के सिंििंि
में ही िषग 2018 में एक पररिाद प्रस्तुत कर
हदया, जजसमें कक घटना के सिंििंि में पूिग में
कहे गए कर्थनों में काफी फेर-िदल करके
घटना को गिंिीर हदखाया गया तर्था कई
नए आरोप िी लगा हदए गए। उपरोक्त
तथ्यों के आलोक में माननीय उच्चतम
न्यायालय ने उक्त तनणगय देते हुए यह कहा
कक न्यायालयों को इस प्रकार के व्यर्थग के
प्रकरणों द्िारा िादकाररयों को न्यातयक
प्रकिया का दुरुपयोग नहीिं करने देना
चाहहए। कृष्ण लाल चािला का उपरोक्त
तनणगय उस िाद के तथ्यों पर आिाररत र्था
जिकक प्रस्तुत प्रकरण में ऐसा नहीिं है।

8. प्रस्तुत प्रकरण में विपक्षी सिं. 2 के
विरुद्ि सशकायत िषग 2017 में प्रस्तुत की
गई र्थी। यहद विपक्षी सिं. 2 को िदले की
िािना से कोई झूठी सशकायत करनी होती
तो िह उस प्रकरण के पिंजीकृत होने के
तुरन्त िाद ऐसी कोई कायगिाही करता।
उक्त प्रकरण के लगिग 6 िषग के पश्चात
एक अलग घटना दशागते हुए अिंककत ककए
गए पररिाद को िषग 2016 की घटना से
व्यधर्थत होकर िदले में की गई कायगिाही
कहते हुए बिना विचारण के अपास्त नहीिं
ककया जा सकता है।

9. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने यह
िी तकग हदया कक प्रार्थीगण विचारण
न्यायालय की पररसीमा से िाहर तनिास
करते हैं तर्था ऐसे में विचारण न्यायालय
को प्रार्थीगण को आहूत करने से पहले िारा
202 (1) दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत जााँच की
कायगिाही करनी चाहहए र्थी।
920 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

10. िारा 202 दण्ड प्रकिया सिंहहता के
प्रावििान तनम्न प्रकार हैं: -

(1) यहद कोई मजजस्रेट ऐसे
अपराि का पररिाद प्राप्त करने पर, जजसका
सिंज्ञान करने के सलए िह प्राधिकृत है या
जो िारा 192 के अिीन उसके हिाले ककया
गया है, ठीक समझता है तो और, ऐसे
मामले में जहााँ असियुक्त ऐसे ककसी स्र्थान
में तनिास कर रहा है जो उस क्षेत्र से परे है
जजसमें िह अपनी अधिकाररता का प्रयोग
करता है। असियुक्त के विरुद्ि आदेसशका
का जारी ककया जाना मुलतिी कर सकता है
और यह वितनजश्चत करने के प्रयोजन से
कक कायगिाही करने के सलए पयागप्त आिार
है अर्थिा नहीिं, या तो स्ियिं ही मामले की
जािंच कर सकता है या ककसी पुसलस
अधिकारी द्िारा या अन्य ऐसे व्यजक्त
द्िारा, जजसको िह ठीक समझे अन्िेषण
ककए जाने के सलए तनदेश दे सकता है:
परन्तु अन्िेषण के सलए ऐसा कोई तनदेश
िहािं नहीिं हदया जाएगा-

(क) जहािं मजजस्रेट को यह प्रतीत
होता है कक िह अपराि जजसका पररिाद
ककया गया है अनन्यतः सेशन न्यायालय
द्िारा विचारणीय है; अन्यर्था

(ख)
जहािं
पररिाद
ककसी
न्यायालय द्िारा नहीिं ककया गया है जि
तक कक पररिादी की या उपजस्र्थत साक्षक्षयों
की (यहद कोई हो) िारा 200 के अिीन
शपर्थ पर परीक्षा नहीिं कर ली जाती है।

(2) उपिारा (1) के अिीन ककसी
जािंच में यहद मजजस्रेट ठीक समझता है तो
साक्षक्षयों का शपर्थ पर साक्ष्य ले सकता है:

परन्तु यहद मजजस्रेट को यह
प्रतीत होता है कक िह अपराि जजसका
पररिाद ककया गया है अनन्यतः सेशन
न्यायालय द्िारा विचारणीय है तो यह
पररिादी से अपने सि साक्षक्षयों को पेश
करने की अपेक्षा करेगा और उनकी शपर्थ
पर परीक्षा करेगा।

(3) यहद उपिारा (1) के अिीन
अन्िेषण ककसी ऐसे व्यजक्त द्िारा ककया
जाता है जो पुसलस अधिकारी नहीिं है तो
उस अन्िेषण के सलए उसे िारण्ट के बिना
धगरफ्तार करने की शजक्त के ससिाय पुसलस
र्थाने के िारसािक अधिकारी को इस
सिंहहता द्िारा प्रदि सिी शजक्तयािं होंगी।

11. वििय धानुका आटद बनाम
निीमा मोहताि (2014) 14 ए . ी. ी. 638
आहद में माननीय उच्चतम न्यायालय ने
यह ससद्िािंत प्रततपाहदत ककया कक उपरोक्त
प्राििानों से यह स्पष्ट है कक विचारण के
अततररक्त
मजजस्रेट
अर्थिा
न्यायालय
द्िारा की गई कोई िी जााँच िारा 2 (छ) के
अन्तगगत जािंच मानी जाएगी। िारा 202
दिं०प्र०सिं० जााँच का कोई विसशष्ट तरीका
प्रावििातनत नहीिं करती है। िारा 202
दिं०प्र०सिं० की जााँच के अन्तगगत गिाहों का
परीक्षण सजम्मसलत है, जिकक िारा 200
दिं०प्र०सिं० में मात्र पररिादी का साक्ष्य
3 All. Sitaram & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
921
अिंककत ककया जाना अतनिायग है तर्था िारा
200 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत यहद कोई साक्षी
उपजस्र्थतत है तो उसका ियान िी अिंककत
ककया जा सकता है। मजजस्रेट द्िारा यह
िी सुतनजश्चत करने के सलए कक असियुक्त
के विरुद्ि कायगिाही आगे चलाने के सलए
पयागप्त आिार है, की गई उपरोक्त कायगिाही
िारा 202 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत की गई
जााँच ही मानी जाएगी।

12. पत्रािली के अिलोकन से स्पष्ट है
कक विचारण न्यायालय ने िारा 202
दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत दो गिाहों के ियान
अिंककत करके प्रार्थीगण को विचारण हेतु
आहूत करने का तनणगय सलया है। गिाहों के
ियान अिंककत करना िारा 202 दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत ही की गई जााँच की कायगिाही है
और आलोच्य आदेश में इस आिार पर
कोई त्रुहट नहीिं है कक विचारण न्यायालय ने
िारा 202 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत जााँच नहीिं
की है।

13. प्रार्थी के विद्िान अधििक्ता ने
अगला तकग हदया कक लगाए गए आरोप
झूठे हैं और विपक्षी सिं. 2 द्िारा पररिाद में
तर्था अपने ियान में कही गई घटना प्रर्थम
दृष्टया सत्य नहीिं प्रतीत होती है।

14. माननीय सिोच्च न्यायालय के
तनणगय केंद्रीय िांच ब्यूरो बनाम आयुन
स ंह आटद, 2023 ए ी ी ऑनलाइन
ए ी 379 में अििाररत है कक िारा 482
दिं०प्र०सिं० के अिंतगगत शजक्तयों का उपयोग
करते हुए न्यायालय को लघु विचारण
(समनी रायल) करने की आिश्यकता नहीिं
है। इसमें असियोजन / जािंच एजेंसी को
आरोपों को साबित करने की आिश्यकता
नहीिं है। दिं०प्र०सिं० की िारा 482 के अिंतगगत
शजक्तयों का उपयोग करते समय न्यायालय
के पास िहुत सीसमत अधिकार क्षेत्र है और
मात्र यह विचार करने की आिश्यकता है
कक "क्या आरोपी के विरुद्ि आगे िढ़ने के
सलए कोई पयागप्त सामग्री उपलब्ि है,
जजसके सलए आरोपी पर मुकदमा चलाने की
आिश्यकता है या नहीिं"।

15. रािीि कौरि बनाम बाई ाहब
तथा अन्य, (2020) 3 ए ी ी 317, में
माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह कहा
कक यह विधि का सुस्र्थावपत ससद्िािंत है कक
िारा 482 दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत न्यायालय
को अपनी अन्ततनगहहत शजक्तयों का प्रयोग
मात्र न्यायालय की प्रकिया का दुरुपयोग
रोकने अर्थिा अन्यर्था न्याय के हहतों की
रक्षा करने के सलए ही करना चाहहए। इस
स्तर पर असियुक्त द्िारा अपने िचाि में
प्रस्तुत ककए गए साक्ष्य सामान्यतः नहीिं
देखे जा सकते। यहद असियोजन कर्थानक
तर्था उसके समर्थगन में प्रस्तुत सामग्री से
असियुक्त के विचारण के सलए प्रर्थम
दृष्टया प्रकरण प्रतीत हो रहे है तो
न्यायालय को िारा 482 दिं०प्र०सिं० के
अन्तगगत आपराधिक कायगिाही को तनरस्त
नहीिं करना चाहहए।
922 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

16. जि उपरोक्त विधि व्यिस्र्था के
आलोक में प्रस्तुत प्रकरण के तथ्यों को
देखा जाए तो यह प्रतीत होता है कक
पररिाद में विपक्षी सिं. 2 ने असियुक्तगण
द्िारा उसको मारने पीटने, गाली देने और
िमकी देने का आरोप लगाया तर्था यह िी
कहा कक प्रार्थी सिं. 3 ने उसकी जेि से रु०
1220/- जिरन तनकाल सलए। पररिादी ने
िारा 200 दिं०प्र०सिं. के अन्तगगत अपना
ियान अिंककत कराके घटना का समर्थगन
ककया है। दो साक्षक्षयों ने िारा 202
दिं०प्र०सिं० के अन्तगगत अपना ियान अिंककत
करके घटना का समर्थगन ककया है। पररिाद
में कहे गए कर्थन तर्था इसके समर्थगन में
प्रस्तुत साक्ष्य के आिार पर प्रार्थीगण के
विचारण का मामला िन रहा है तर्था बिना
विचारण के प्रार्थीगण के विरुद्ि आपराधिक
कायगिाही को तनरस्त ककए जाने का कोई
आिार प्रतीत नहीिं होता है।

17.

आलोच्य
आदेश
हदनािंककत
01.02.2023 में कोई त्रुहट नहीिं है। प्रार्थगना
पत्र िलहीन है, तदनुसार, ननरस्त ककया
जाता है।
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(2024) 3 ILRA 922
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 13.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Application U/S 482. No. 2066 of 2024
Laxmi Narayan Soni @ Pintoo & Ors.
 ...Applicants
Versus
State of U.P. ...Opposite Party

Counsel for the Applicants:
Jai Narayan Pandey, Aprajita Tiwari

Counsel for the Opposite Party:
G.A.

आपराकिि कवकि : र्ारतीय दंि संकहता, 1860 - िारा 323,
504, 506, 452 - दंि प्रकक्रया संकहता, 1973 - िारा
202(4) - आपराकिि िायगवाही िे कवरुद्ध - वैिता - प्राथी पक्ष
िा तिग है कि पररवाद िे साथ र्वाहों िी सूची प्रस्ट्तुत ि होिे से िारा
202(4) दं.प्र.सं. िा उल्लंघि हुआ, किससे संज्ञाि एवं अकर्युक्तों िो
आहूत िरिे िा आदेश अवैि हो िाता है - साथ ही, िारा 204(2)
दं.प्र.सं. िे अिुसार अकर्योिि साक्ष्यों िी सूची कदए कबिा समि या वारंट
िारी िहीं िर सिता - िारा 204(2) दं.प्र.सं. िा उद्देश्य अकर्युक्त
िो र्वाहों िी प्रकत-परीक्षा हेतु तैयारी िा अवसर देिा है - यह प्राविाि
बाध्यिारी िहीं है तथा र्वाहों िी सूची समि िारी िरिे से पूवग प्रस्ट्तुत ि
होिे पर र्ी बाद में प्रस्ट्तुत िी िा सिती है। िेवल उल्लंघि मात्र से
आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं होती, िब ति अकर्युक्त िो िोई
वास्ट्तकवि पूवाग्रह ि हुआ हो - लक्ष्मी शंिर पाण्िेय व अन्य बिाम उत्तर
प्रदेश राज्य (िीचे) में यही कसद्धांत प्रकतपाकदत किया र्या है - िारा
204(2) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत र्वाहों िी सूची ि प्रस्ट्तुत किया िािा
िेवल अकियकमतता है, िो सुिार योग्य है और इससे आदेश िी वैिता
प्रर्ाकवत िहीं होती, अतः प्राथी िा प्रथम तिग अस्ट्वीिार किया िाता है
- प्राथी िा अर्ला तिग कि चूाँकि वह मकिस्ट्रेट िे क्षेत्राकििार से बाहर
किवास िरते हैं, इसकलए कवचारण न्यायालय िो उन्हें आहूत िरिे से पूवग
िारा 202(1) दं.प्र.सं. िे अंतर्गत अकिवायगतः िााँच िरिी चाकहए थी
- अकर्कििागररत - पत्रावली से स्ट्पष्ट है कि कवचारण न्यायालय िे िारा
202 दं.प्र.सं. िे अंतर्गत दो र्वाहों िे बयाि दिग िर प्राथीर्ण िो
आहूत िरिे िा आदेश कदया है - र्वाहों िे बयाि दिग िरिा िारा
202 िी िााँच िी श्रेणी में आता है, अतः यह िहिा कि न्यायालय िे
िारा 202 िे अंतर्गत िााँच िहीं िी, किरािार है - िेवल आरोप असत्य
होिे िे आिार पर आपराकिि िायगवाही किरस्ट्त िहीं िी िा सिती -
प्राथी द्वारा कवचारण न्यायालय में प्रस्ट्तुत िमाित आवेदि पर सतेंर िुमार
अंकतल (िीचे) िे आलोि में शीघ्र किणगय िा किदेश। (पैरा 3 से 7,
10, 13, 14)

आवेदि किस्ट्ताररत I (E-13)

प्रोद्धृत मामलों िी सूची:

1. लक्ष्मी र्शांकर पाण्डेय िथा अन्य बनाम उिर प्रिेर्श राज्य िथा अन्य,
2023
(123
ए.सी.सी.
579)