# Smt. Laxmi Devi & Ors v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2022) 1 ILRA 357
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2022-01-17
- **Case number:** Application U/S 482 Cr.P.C. No.5688 of 2018
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/smt-laxmi-devi-ors-v-state-of-u-p-anr-48032
- **Pages:** 10

## Headnote

G.A., Sri Anmol Tiwari

(अ) फौजदारी कानून - भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता
,1973 - धारा 482 - अंतर्निहित शक्ततयां - धारा
156(3) ,200,202 ,203 - भारतीय दंड संहिता,
1860 - धारा 302,306,354,376,384,385,498A,506,511 - जब तक अपराधी द्वारा उसको या अन्य
व्यक्तत को साशय क्षर्त पि ंचाने के भय के कारण व
उसके द्वारा बेईमानी से उत्प्प्रेररत िोकर कोई संपत्ति या
मूल्यवान या िस्ताक्षररत या म द्ांक्रकत कोई चीज, क्जसे
मूल्यवान प्रर्तभूर्त में पररवर्तित क्रकया जा सके, क्रकसी
व्यक्तत को प्रदान ना िो गई िो, तब तक उद्यापन का
अपराध पूणि निीं िो सकता िै। (पैरा - 10)
आवेदक संख्या 1, व ववपक्षी संख्या 2 एक दूसरे के
ववरुद्ध अलग-अलग तारीख पर एक प्रथम सूचना ररपोर्ट
, धारा 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के उपरांत दर्ट कराई
- प्राथटना पत्र पररवाद के रूप में दर्ट क्रकया गया -
प्रततपक्ष संख्या 2( वादी) व गवाि का बयान धारा दर्ट
क्रकया गया - तदुपरांत आदेश हदनांक 27.02 .2017
द्वारा धारा 384, 385 ,506 भारतीय दंड संहिता के
अंतगटत दंडनीय अपराध के मामले में आवेदक गणों को
द्वारा समन आिूत क्रकया गया - आवेदक गण पर
उद्यापन करने व उद्यापन करने के ललए क्रकसी व्यक्तत
को क्रकसी छतत के भय में डालने व आपराधधक अलभत्रास
के आरोप लगाए - अनुधचत दबाव डालने के उद्देश्य के
ललए दायर क्रकया गया। (पैरा - 1,3)
र्नणिय : पररवाद के कथन व साक्षक्षयों के बयान से,
आवेदक गण द्वारा धारा 384, 385, 511 भारतीय दंड
संहिता के अंतगटत प्रथम दृष्र्या अपराध काररत िोना
निीं प्रतीत िोता िै । यहद पररवाद व साधथयों के बयान में
लगाए गए और अवववाहदत आरोप से क्रकसी भी अपराध
358 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
का कृत्य का िोना प्रकर् निीं िोता िो या अपराध के
आवश्यक अवयव उपक्थथत निीं िो तो यि न्यायालय
अपनी अंततनटहित शक्ततयों का उपयोग करते िुए
आदेलशका ( सम्मन) तनरथत कर सकता िै। अक्षेवपत
आदेश तनरथत क्रकया र्ाता िै। ( परा-14 )
धारा 482 के अन्तगटत दायर आवेदन पत्र थवीकार क्रकया
र्ाता िै । (E-7)
उद्धृत मामलों की सूची :

## Text

1 All. Smt. Laxmi Devi & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
357
requirement of committal of the accused,
and thereafter to summon the accusedapplicants to face trial.

83. The diminished role of the
committing court under the Code of 1973
while committing the case to the Court of
Session; particularly when a case is
instituted on the basis of a police report and
it appears to the Magistrate that the offence
is triable exclusively by the Court of
Session, would also be a reason to arrive at
an inference that irregularity in procedure,
if any, with regard to committal would not
be a cause of injustice or prejudice to the
applicants.

84. The order of summoning passed
by the Special Judge, POCSO and also the
proceedings of the criminal case, of which
quashment is sought, being in accord with
the scheme of the statutory enactment,
cannot be said to suffer from any illegality
so as persuade this Court to exercise its
inherent jurisdiction under Section 482 of
the Code.

85. The application thus fails and is
accordingly dismissed.
----------
(2022)01ILR A357
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 17.01.2022

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Application U/S 482 Cr.P.C. No.5688 of 2018

Smt. Laxmi Devi & Ors. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicants:
Sri Ram Kumar Pal

Counsel for the Opposite Parties:
G.A., Sri Anmol Tiwari

(अ) फौजदारी कानून - भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता
,1973 - धारा 482 - अंतर्निहित शक्ततयां - धारा
156(3) ,200,202 ,203 - भारतीय दंड संहिता,
1860 - धारा 302,306,354,376,384,385,498A,506,511 - जब तक अपराधी द्वारा उसको या अन्य
व्यक्तत को साशय क्षर्त पि ंचाने के भय के कारण व
उसके द्वारा बेईमानी से उत्प्प्रेररत िोकर कोई संपत्ति या
मूल्यवान या िस्ताक्षररत या म द्ांक्रकत कोई चीज, क्जसे
मूल्यवान प्रर्तभूर्त में पररवर्तित क्रकया जा सके, क्रकसी
व्यक्तत को प्रदान ना िो गई िो, तब तक उद्यापन का
अपराध पूणि निीं िो सकता िै। (पैरा - 10)
आवेदक संख्या 1, व ववपक्षी संख्या 2 एक दूसरे के
ववरुद्ध अलग-अलग तारीख पर एक प्रथम सूचना ररपोर्ट
, धारा 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के उपरांत दर्ट कराई
- प्राथटना पत्र पररवाद के रूप में दर्ट क्रकया गया -
प्रततपक्ष संख्या 2( वादी) व गवाि का बयान धारा दर्ट
क्रकया गया - तदुपरांत आदेश हदनांक 27.02 .2017
द्वारा धारा 384, 385 ,506 भारतीय दंड संहिता के
अंतगटत दंडनीय अपराध के मामले में आवेदक गणों को
द्वारा समन आिूत क्रकया गया - आवेदक गण पर
उद्यापन करने व उद्यापन करने के ललए क्रकसी व्यक्तत
को क्रकसी छतत के भय में डालने व आपराधधक अलभत्रास
के आरोप लगाए - अनुधचत दबाव डालने के उद्देश्य के
ललए दायर क्रकया गया। (पैरा - 1,3)
र्नणिय : पररवाद के कथन व साक्षक्षयों के बयान से,
आवेदक गण द्वारा धारा 384, 385, 511 भारतीय दंड
संहिता के अंतगटत प्रथम दृष्र्या अपराध काररत िोना
निीं प्रतीत िोता िै । यहद पररवाद व साधथयों के बयान में
लगाए गए और अवववाहदत आरोप से क्रकसी भी अपराध
358 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
का कृत्य का िोना प्रकर् निीं िोता िो या अपराध के
आवश्यक अवयव उपक्थथत निीं िो तो यि न्यायालय
अपनी अंततनटहित शक्ततयों का उपयोग करते िुए
आदेलशका ( सम्मन) तनरथत कर सकता िै। अक्षेवपत
आदेश तनरथत क्रकया र्ाता िै। ( परा-14 )
धारा 482 के अन्तगटत दायर आवेदन पत्र थवीकार क्रकया
र्ाता िै । (E-7)
उद्धृत मामलों की सूची :
1.
एस0डब्लू0 पलातनतकर प्रतत बबिार राज्य : (2002)
1 एस0सी0सी0 241
2.केवल कृष्णनन प्रतत सूरर्भान व अन्य : (1980)
सप्पली एस0सी0सी0 499
3.बबरला कॉरपोरेशन लललमर्ेड प्रतत एडवेन्र्ेर् इन्वेथर्
मेन्र् व िोक््डंग लललमर्ड : (2019) 16 एस0सी0सी0
610
4.श्रीमती नागव्वा प्रतत ववरन्ना लशवललंगगप्पा कोंर्ा्
गी व अन्य : (1976) 3 एस0सी0सी0 736,
5.माधवराव र्ीवार्ीराव लसंधधया व अन्य प्रतत सम्भा
र्ीराव चन्रोर्ीराव अंगरे व अन्य : (1988)। एस0सी
0सी0 692
6.कमल लशवार्ी पोकामेकर प्रतत मिाराष्र राज्य व अ
न्य : (2019) 14 एस0सी0सी0 350
7.इसांगा मुसुम्बा व अन्य प्रतत मिाराष्र शासन व अ
न्य : (2014) 15 एस.सी.सी. 357
(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. तथ्यात्मक प्रारुप

क) आवेदक सांख्या 1, श्रीमती लक्ष्मी देवी
ने एक प्रथम सूचना ररपोटय सांख्या 0311, ददनाांक
29.03.2015 को, दवपक्षी सांख्या 2 व उसके अन्य
ररश्तेदार के दवरुद्ध, िारतीर् दि सांदहता की
धारा 302, 354, 498-ए, 511 के अांतगयत आवेदन
धारा 156 (3) दि प्रदिर्ा सांदहता, ददनाांक
05.01.2015 के कार्यवाही के उपरान्त दजय
करवाई दक:-

"1. र्ह दक प्रादथयनी का दामाद
रमाशांकर कुशवाहा उसके िाई राजू, मनोज,
शांकरलाल, लल्लन पुत्र रामनरार्न तथा श्रीमती
वीना कुशवाहा पत्नी मनोज कुशवाहा दनवादसनी
म0नां0 112 मसवानपुर थाना कल्यानपुर कानपुर
नगर प्रादथयनी की पुत्री श्रीमती बसन्ती पत्नी
रमाशांकर को दपिले लगिग तीन साल से
कािी ज्यादा प्रताद़ित करके उसके साथ
अत्यदधक मारपीट करते थे तथा उसे आत्महत्या
कर लेने के दलर्े उकसाते थे। 2. र्ह दक दामाद
रमाशांकर के गलत सम्बि एक मदहला से होने
के कारण प्रादथयनी की पुत्री उसका दवरोध करती
थी दकन्तु रमाशांकर का सहर्ोग उसके उक्त
िाई करते थे। उक्त लोगोां की जमीन एक्वार्र
होने के कारण सरकारी मुआवजा दमला है
दजसके कारण उक्त सिी िाई आपस में बैठकर
शराब िी पीते थे। तमाम लोगोां के साथ जुआ िी
खेलते थे। 3. र्ह दक मनोज कुशवाहा िी प्रादथयनी
की पुत्री पर गलत नजर रखता था दलहाजा
उसके साथ शराब पीकर कई बार िे़ििा़ि िी
कर चुका था व बलात्कार के प्रर्ास में िी था
जानकारी पर प्रादथयनी कई बार अपनी पुत्री के
घर में जाकर पूवय में कई ददनोां तक रुकी िी थी।
मनोज की पत्नी क्षेत्रीर् सिासद है दलहाजा इन
लोगोां को थथानीर् पुदलस का सांरक्षण िी प्राप्त
है। 4. र्ह दक ददनाांक 18.12.2014 को प्रादथयनी
को अज्ञात व्यस्क्त से सूचना दमली की उक्त लोग
प्रादथयनी की पुत्री की हत्या की र्ोजना बना रहे हैं।
सूचना पर प्रादथयनी अपने पुत्र के साथ तत्काल
पुत्री बसन्ती की ससुराल करीब 2:30 बजे ददन
1 All. Smt. Laxmi Devi & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
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पहुाँची तो उक्त सिी लोग घर के अन्दर प्रादथयनी
की पुत्री को िाांसी पर लटका रहे थे। 5. र्ह दक
प्रादथयनी की आहट पर सिी िाग ख़िे हुए।
प्रादथयनी की पुत्री की हालत खराब थी। थो़िा
थो़िा बोल पा रही थी तब उसने बतार्ा दक देवर
मनोज ने उसके साथ शराब पीकर बलात्कार का
प्रर्ास दकर्ा है दजसकी दशकार्त पर सिी लोगोां
को मनोज ने बरगलार्ा और पररवार को
बेइज्जती से बचाने के दलए सिी ने दमलकर
बसन्ती की हत्या करने के इरादे से आत्महत्या
का रुप देने के दलर्े जबररर्ा िाांसी पर लटका
ददर्ा। 6. र्ह दक उसने र्ह िी बतार्ा दक
रमाशांकर ने प्रादथयनी की पुत्री को पक़िा राजू व
शांकरलाल ने पैर पक़िे, लल्लन ने िी दलपट कर
पक़िा मुह बन्द दकर्ा। बीना कुशवाहा ने िाांसी
का िन्दा गले में डाला था मनोज ने क़िे में रस्सी
िांसा कर खीांचा दजसमें उक्त सिी लोगोां ने
सहर्ोग दकर्ा। 7. र्ह दक प्रादथयनी की पुत्री की
हालत नाजुक थी तब तुरन्त प्रादथयनी अपने पुत्र के
साथ पास के अस्पताल ले गर्ी तथा अन्य लोगोां
व पुदलस को िी 100 नांबर पर सूचना ददर्ा तब
तक उसकी मृत्यु हो गर्ी। 8. र्ह दक मौके पर
पुदलस आर्ी जहााँ पर पदत रमाशांकर व उसके
िाई आदद िरार थे बाद में पुदलस के कहने पर
पुत्री बसन्ती को हैलट ले जार्ा गर्ा जहााँ पर िी
डाक्टरोां ने उसे मृत बनार्ा। 9. र्ह दक प्रादथयनी ने
घटना की सूचना पुदलस को ददर्ा तो पोस्टमाटयम
के बाद कार्यवाही का आश्वासन ददर्ा तब से
लगातार प्रादथयनी थाना कल्यानपुर दौ़िती रही
दकन्तु प्रादथयनी का मुकदमा दजय नहीां दकर्ा गर्ा।
तब प्रादथयनी द्वारा जररर्े डाक प्राथयनापत्र ददनाांक
24.12.2014 श्रीमान् एस0एस0 पी0 साहब
कानपुर नगर को व थानाध्यक्ष कल्यानपुर को
प्रेदषत दकर्ा तथा एस0एस0पी0 साहब से िी
व्यस्क्तगत रुप में दमली दकन्तु आज तक प्रादथयनी
का मुकदमा दजय नहीां दकर्ा गर्ा। उक्त
अदिर्ुक्त बीना कुशवाहा क्षेत्रीर् सिासद है
दजसके कारण थाना पुदलस उनके प्रिाव में होने
के कारण मुकदमा दजय नहीां कर रही है। 10.
र्ह दक न्यार्दहत में प्रादथयनी का मुकदमा दजय
कर दववेचना दकर्े जाने हेतु थाना प्रिारी
कल्यानपुर को आदेदशत दकर्ा जाना न्यार्ोदचत
होगा।"

(ख) तदोपरान्त दवपक्षी सांख्या 2 ने,
आवेदक सांख्या 1 व उसके तीनोां पुत्र (आवेदक
सांख्या 2 लगात् 4) के दवरुद्ध एक प्राथयना पत्र
धारा 156(3) दां0प्र0सां0, ददनाांक 21.01.2015 को
न्यार्ालर् सी.एम.एम. II, कानपुर नगर में
िा0दां0सां0 की धारा 306, 384, 385, 506 के
अांतगयत दार्र की दक:-

"2. र्ह दक प्राथी की शादी बसन्ती
पुत्री स्व0 हीरालाल दन0-देवकदलर्ा थाना
अकबरपुर दजला कानपुर देहात से असाय
करीबन 20 वषय पूवय हुई थी प्राथी और बसन्ती के
सांसगय से एक पुत्र अदिषेक उम्र करीब 15 वषय
पैदा हुआ जो प्राथी के पास है। प्राथी की पैत्रक
जमीन एक्वार्र होने के कारण प्राथी को
मुआवजा धनरादश प्राप्त हुई थी उससे प्राथी की
पत्नी बसन्ती ने अपनी मााँ से 5 वषय पूवय दो बीघा
जमीन सम्पूणय दविर् धनरादश अदा करके िर्
की थी। जो प्राथी की सास लक्ष्मी देवी के कब्जे
में थी कुि समर् बाद प्राथी की सास श्रीमती
लक्ष्मी देवी, साले श्रीपाल, रामपाल, दशवपाल की
नीर्त खराब हो गई और उक्त जमीन पर
जबरन कब्जा कर दलर्ा तथा प्राथी व प्राथी की
पत्नी बसन्ती पर उक्त जमीन पुनः अपने नाम
करने का दबाव देने लगे और मानदसक
शारीररक रुप से प्राथी की पत्नी बसन्ती को
प्रताद़ित करने लगे तथा झूठे मुकदमें में बांद
करा देने व हत्या कर देने की धमकी देने लगे
उपरोक्त लोगोां की प्रता़िना से प्राथी की पत्नी
बसन्ती मानदसक रुप से अस्वथथ हो गर्ी।
ददनाांक 18.12.14 को समर् करीबन 2 बजे ददन
में प्राथी की सास लक्ष्मी देवी पत्नी स्व0 हीरालाल,
360 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
साले श्रीपाल, पुत्र स्व0 हीरालाल दनवासीगण
देवकदलर्ा थाना अकबरपुर कानपुर देहात,
रामपाल, दशवपाल, पुत्रगण स्व0 हीरालाल
दनवासी तरगाांव थाना गजनेर दजला कानपुर
देहात एकरार् होकर प्राथी के घर पर आर्े और
प्राथी की पत्नी बसन्ती पर उपरोक्त जमीन पुनः
अपने नाम करने का दबाव ददर्ा और तरह-तरह
से प्रताद़िता दकर्ा और चले गर्े उपरोक्त लोगोां
की प्रता़िना के कारण प्राथी की पत्नी बसन्ती ने
उसी ददन समर् करीबन 4 बजे ददन में कमरे में
लगे पांखे से िाांसी लगाकर आत्महत्या कर ली
उस समर् प्राथी बैंक गर्ा था वापस घर आने पर
प्राथी ने अपनी पत्नी को कमरे में िाांसी पर
लटका पार्ा। उपरोक्त लोग गार्ब थे। प्राथी ने
अपने िोन नम्बर 7668759818 से उपरोक्त
लोगोां को पत्नी के िाांसी लगाकर आत्महत्या कर
लेने की सूचना दी और उपरोक्त घटना की
सूचना प्राथी के िाई रदवशांकर ने सम्बस्ित थाना
कल्यानपुर में दी दजसके आधार पर प्राथी की
पत्नी बसन्ती का प्राथी की सास लक्ष्मी देवी, साले
श्रीपाल, रामपाल, दशवपाल की उपस्थथदत में
पांचनामा होकर दद0 19.12.14 को पोस्टमाटयम
हुआ। प्राथी अपनी पत्नी बसन्ती की लाश प्राप्त
कर उसका अांदतम सांस्कार दकर्ा। मुहल्लेवालोां
द्वारा र्ह कहे जाने पर दक बसन्ती की आत्महत्या
का कारण बसन्ती की मााँ और िाई है। उक्त
बाते सुनकर प्राथी की सास लक्ष्मी देवी, साले
श्रीपाल, रामपाल, दशवपाल उपरोक्त ने प्राथी की
धमकी दी दक र्दद आप हम लोगोां के स्खलाि
कोई कार्यवाही की तो हम तुम लोगोां को झूठे
सांगीन मुकदमें में िांसाकर जेल में स़िवा देंगे
और उक्त धमकी देते हुर्े चले गर्े। उपरोक्त
घटना को अश्वनी दमश्रा ददनेश कुशवाहा दन0मसवानपुर कानपुर नगर तथा अन्य मोहल्ले के
लोगोां ने देखा व सुना है।

3. र्ह दक प्राथी उपरोक्त घटना की
ररपोटय दलखाने थाना कल्यानपुर गर्ा जहााँ पर
पुदलसवालोां ने कहा दक जााँच में जो मुस्िम होगा
उसी के स्खलाि कार्यवाही की जार्ेगी। कहते
हुर्े प्राथी को वापस कर ददर्ा परन्तु ररपोटय आज
तक
नहीां
दलखी
गई।
तब
प्राथी
ने
ददनाांक17.01.15 को एस0एस0 पी0 कानपुर
नगर,
एस0ओ0
कल्यानपुर,
सी0ओ0
कल्यानपुर, डी0 आई0जी0 कानपुर जोन,
कानपुर, डी0जी0पी0 उ0प्र0 शासन लखनऊ को
पांजीकृत डाक से प्राथयनापत्र ददर्े परन्तु दिर िी
आज तक ररपोटय नहीां दलखी गई। प्राथयना पत्र व
रदजस्टरी रसीदोां की िोटोांप्रदतर्ाां साथ में सांलग्न
है।

4. र्ह दक प्राथी की पत्नी बसन्ती का
पांचनामा
दद0
19.12.14
को
हुआ
तथा
पोस्टमाटयम िी दद0 19.12.14 को हुआ।
िोटोकॉदपर्ाां साथ में सांलग्न है।

5. र्ह दक सम्बस्ित थाना पुदलस
प्राथी की ररपोटय दजय नहीां कर रही है दजससे
प्राथी के पास श्रीमान जी के समक्ष प्राथयनापत्र
प्रस्तुत के अलावा अन्य कोई रास्ता ररपोटय
दलखाने का नहीां रहा है।"

(ग) उक्त प्राथयनापत्र पर ए.सी.एम.एम. (II),
कानपुर नगर द्वारा आदेश ददनाांक 06.02.2015
पाररत दकर्ा गर्ा दक, उक्त प्राथयनापत्र को
पररवाद के रुप में दजय दकर्ा जाता है व पत्रावली
वास्ते अदग्रम कार्यवाही के दलए पेश हो।

(घ) उपरोक्त आदेशानुसार रमाशांकर
(प्रदतपक्ष सां0 2) (वादी) का ब्यान धारा 200
दां0प्र0सां0 के अांतगयत, गवाह ददनेश व गवाह
अश्वदन का ब्यान धारा 202 दां0प्र0सां0 के
अांतगयत दजय करे गर्े। तद्उपरान्त आदेश
ददनाांक 27.02.2017 द्वारा धारा 384, 385,
506 िा0दां0सां0 के अन्तगयत दिनीर् अपराध
के मामले में आवेदकगणोां को द्वारा समन
आहूत दकर्ा गर्ा। आदेश का प्रासांदगक िाग
दनम्न है-
1 All. Smt. Laxmi Devi & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
361

"सांक्षेप में पररवादपत्र के अनुसार
कथानक इस प्रकार है दक प्राथी की शादी
बसन्ती से असाय करीब 20 वषय पूवय हुई थी प्राथी
और बसन्ती के सांसगय से एक पुत्र अदिषेक पैदा
हुआ जो प्राथी के पास है। प्राथी की पैत्रक जमीन
एक्वार्र होने के कारण प्राथी को मुआवजा
धनरादश प्राप्त हुई थी उससे प्राथी की पत्नी
बसन्ती ने अपनी मााँ से 05 वषय पूवय दो बीघा
जमीन सम्पूणय धनरादश अदा करके िर् की थी,
जो प्राथी के सास लक्ष्मी देवी के कब्जे में थी कुि
समर् बाद प्राथी की सास लक्ष्मी देवी, साले
श्रीपाल, रामपाल, दशवपाल की नीर्त खराब हो
गई और उक्त जमीन पर जबरन कब्जा कर
दलर्ा तथा प्राथी व प्राथी की पत्नी बसन्ती पर
उक्त जमीन पुनः अपने नाम करने का दबाव देने
लगे और मानदसक व शारीररक रुप से प्राथी की
पत्नी बसन्ती को प्रताद़ित करने लगे तथा झूठे
मुकदमें में बांद करा देने व हत्या कर देने की
धमकी देने लगे उपरोक्त दवपक्षीगण की
प्रता़िना से प्राथी की पत्नी बसन्ती मानदसक रुप
से अस्वथथ हो गर्ी। ददनाांक 18.12.14 को समर्
करीबन 2:00 बजे ददन में दवपक्षीगण एकरार्
होकर प्राथी के घर पर आर्े और प्राथी की पत्नी
बसन्ती पर उपरोक्त जमीन पुनः अपने नाम
करने का दबाव ददर्ा और तरह-तरह से
प्रताद़िता दकर्ा और चले गर्े उपरोक्त लोगोां की
प्रता़िना के कारण प्राथी की पत्नी बसन्ती ने उसी
ददन समर् करीबन 4:00 बजे ददन में कमरे में
लगे पांखे से िाांसी लगाकर आत्महत्या कर ली,
उस समर् प्राथी बैंक गर्ा था वापस घर आने पर
प्राथी ने अपनी पत्नी को कमरे में िाांसी पर
लटका पार्ा। उक्त के बावत सांबांदधत थाने व
उच्चादधकाररर्ोां को सूदचत दकर्ा गर्ा दकन्तु
कोई कार्यवाही नहीां हुई।

पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य बर्ान पररवादी
अांतगयत धारा-200 दां0प्र0सां0 एवां धारा-202
दां0प्र0सां0 के अन्तगयत परीदक्षत साक्षीगण ददनेश
व अश्वनी दमश्रा की साक्ष्य के आधार पर
प्रथम दृष्टर्ा अदिर्ुक्तगण श्रीमती लक्ष्मी देवी,
श्रीपाल, रामपाल व दशवपाल के दवरुद्ध धारा-
384, 385, 506 िा0दां0सां0 के तहत मामला
बनता प्रकट होता है। अतः अदिर्ुक्तगण
उपरोक्त को तलब दकर्ा जाना न्यार्ोदचत प्रकट
होता है।"

(ङ) प्रकरण की पत्रावली के अनुसार
आवेदक सांख्या 1 की पुत्री व दवपक्षी सांख्या 2 की
पत्नी दजसकी मृत्यु 18.12.2014 को हुई थी,
उसके शव दवच्छेदन आख्या के अदिमत के
अनुसार उसकी मृत्यु का तत्काल कारण दम
घुटना (asphyxia), बतार्ा गर्ा, दजसका कारण
मृत्यु पूवय (anti mortem) िााँसी (hanging)
बतार्ा गर्ा।

(च) उपरोक्त आदेश वतयमान प्राथयना पत्र में
आक्षेदपत दकर्ा गर्ा है। प्रदत शपथपत्र व प्रत्युत्तर
शपथपत्र दास्खल दकर्े जा चुके हैं।

2. आिेदकगण का पक्ष

(क) आवेदकगण का पक्ष रखते हुए उनके
दवद्वान अदधवक्ता श्री राम कुमार पाल के कथन
दकर्ा दक दवपक्षी सांख्या 2 व उसके पररवार के
दवरुद्ध धारा 156 (3) दां0प्र0सां0 (ददनाांक
05.01.2015) के माध्यम से एक प्रथम सूचना
ररपोटय
सांख्या
311
वषय
2015,
ददनाांक
29.03.2015 को धारा 302, 354, 376, 498-ए,
511 िारतीर् दि सांदहता के अन्तगयत दजय
कराई, दजसकी दवषर्वस्तु का उल्लेख पूवय में
दकर्ा जा चुका है, दक इन्ोने उसकी पुत्री की
कदथत रुप से हत्या 18.12.2014 को कर दी व
उसको कदथत रुप से आत्महत्या का रुप दे ददर्ा
गर्ा। आवेदक सांख्या 1 द्वारा प्राथयना पत्र ददनाांक
05.01.2015 प्रथम सूचना ररपोटय दजय करने के
दलए दार्र करने के तुरन्त बाद ही दवपक्षी सांख्या
362 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
2 ने एक प्राथयना पत्र ददनाांक 21.01.2015 प्रथम
सूचना ररपोटय दजय करने के दलए दार्र दकर्ा,
दजसके अनुसार आवेदकगण पर उद्दापन करने
व उद्दापन करने के दलए दकसी व्यस्क्त को दकसी
क्षदत के िर् में डालने व आपरादधक अदित्रास
के आरोप लगार्े, जो न केवल दुष्िावना से
प्रेररत थे परन्तु उनके द्वारा दार्र प्राथयना पत्र का
जवाब देने के दलए व उन पर अनुदचत दबाव
डालने के उद्देश्य के दलए दार्र दकर्ा गर्ा था।

(ख) दवद्वान अदधवक्ता ने र्ह िी कथन
दकर्ा दक पररवाद के अन्तःवस्तु, धारा 200
दां0प्र0सां0 के अांतगयत वादी के ब्यान व धारा 202
दां0प्र0सां0 के अांतगयत अन्य गवाहोां के ब्यान के
आधार पर दवद्वान अवर न्यार्ालर् के पास,
सम्मन करने का पर्ायप्त आधार होने का उदचत
सांतोष नहीां था। आवेदक गण के दवरुद्ध प्रथम
दृष्टर्ा मामला ही नहीां बनता है। उद्दापन व
उसको काररत करने के दलए दकसी क्षदत के िर्
में डालने व आपरादधक अदित्रास के तत्व, प्रथम
दृष्टर्ा िी इस मामले में उपस्थथत नहीां है। अतः
उपरोक्त सम्मन का आदेश व उसके िम में
समस्त आपरादधक कार्यवाही को दनरस्त दकर्ा
जाना चादहए।

3. िादी (विपक्षी संख्या 2) का पक्ष

 दवपक्षी सांख्या 2 के दवद्वान अदधवक्ता श्री
अनमोल दतवारी ने उपरोक्त बहस का दवरोध
दकर्ा। उन्ोने तकय ददर्ा दक आवेदक सांख्या 1,
द्वारा दजय प्रथम सूचना ररपोटय पर अन्वेषण के
उपरान्त अस्न्तम ररपोटय दार्र कर दी गर्ी थी।
आवेदक द्वारा प्रोटेस्ट प्राथयना पत्र दार्र दकर्ा
गर्ा था। परन्तु इसके अदग्रम कार्यवाही का कोई
साक्ष्य इस न्यार्ालर् के समक्ष नहीां लार्ा गर्ा है।
इसके दवपरीत दवपक्षी 2 द्वारा दार्र पररवाद,
उसकी गवाही व अन्य गवाहोां की ब्यानोां के
आधार पर आवेदकगण के दवरुद्ध धारा 384,
385, 511 िा0दां0सां0 के अांतगयत अपराध काररत
करने का प्रथम दृष्टर्ा मामला बनता है दजसमें
कोई दवदधक त्रुदट नहीां है इसदलर्े इस न्यार्ालर्
के समक्ष उसकी अन्तदनयदहत शस्क्त के उपर्ोग
का कोई मामला नहीां बनता है। अतः वतयमान
प्राथयना पत्र दनरस्त दकर्ा जार्े।

4. दवद्वान अदधवक्तागणोां को सुना व
पत्रावली का अवलोकन दकर्ा।

5. मवजस्ट्रेटों से पररिाद ि उच्च
न्यायालय की अन्तविथवहत शक्तक्तयां की
विवि:-

(क) मदजस्टरेट से दकर्े गए पररवाद की
प्रदिर्ात्मक र्ोजना को दांड प्रदिर्ा सांदहता,
1973 (दां0प्र0सां0) के अध्यार् 15 में उल्लेस्खत
दकर्ा गर्ा है। पररवाद दार्र होने पर सांज्ञान लेने
वाला मदजस्टरेट, पररवादी की और र्दद कोई
साक्षी उपस्थथत हो तो उसकी शपथ पर परीक्षा
करेगा और ऐसा साराांश लेखबद्ध िी करेगा।
र्दद पररवाद दलस्खत रुप में दकसी लोकसेवक ने
अपने पदीर् कतयव्योां के दनवयहन में कार्य करते
हुए र्ा कार्य करने का तात्पर्य रखते हुए दार्र
दकर्ा हो र्ा मदजस्टरेट मामले की जााँच र्ा
दवचरण के दलए धारा 192 दां0प्र0सां0 के अधीन
दकसी अन्य मदजस्टरेट के हवाले कर ददर्ा हो तब
मदजस्टरेट के दलर्े पररवादी व साक्ष्य की परीक्षा
करना आवश्यक नहीां है। अगर मदजस्टरेट
पररवाद व साक्ष्य की परीक्षा करने के उपरान्त
अन्य मदजस्टरेट के हवाले करता है तो बाद वाले
मदजस्टरेट को उनकी दिर से परीक्षा करना
आवश्यक नहीां है। (देखें धारा 200 दां प्र सां)। र्दद
दलस्खत पररवाद ऐसे मदजस्टरेट को दकर्ा गर्ा हो,
जो उस अपराध का सांज्ञान करने में सक्षम नहीां
है तो ऐसा पृष्ाांकन कर उसको समुदचत
न्यार्ालर् में पेश करने के दलर्े लौटा देगा, और
अगर पररवाद दलस्खत नहीां है, तो पररवादी को
समुदचत न्यार्ालर् जाने का दनदेश देगा। (देखें
धारा 201 दां प्र सां )
1 All. Smt. Laxmi Devi & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
363

(ख) मदजस्टरेट ऐसे अपराध, दजसका सांज्ञान
लेने के दलए वह प्रादधकृत हो र्ा धारा 192 के
अधीन उसके हवाले दकर्ा गर्ा हो और ठीक
समझता है और ऐसे मामले जहॉां अदिर्ुक्त का
दनवास उसके क्षेत्रादधकार से परे हो, तो
अदिर्ुक्त के दवरुद्ध आदेदशका जारी करना
मुल्तवी कर सकता है, और र्ह दवदनश्चत करने
के प्रर्ोजन से की कार्यवाही करने के पर्ायप्त
आधार हैं र्ा नहीां, र्ा तो मामले की जााँच स्वर्ां
कर सकता है और अगर ठीक लगे तो साक्षी का
साक्ष्य शपथ पर ले िी सकता, र्ा दकसी पुदलस
अदधकारी से अन्य दकसी व्यस्क्त से, दजसको वो
ठीक समझे ( उस व्यस्क्त को वारांट के दबना
दगरफ़्तार करने के दसवार् वो सब अदधकार होगे
जो पुदलस थाने के िारसाधक अदधकारी को होते
है ), अन्वेषण दकर्े जाने के दलए दनदेश दे
सकता है, परन्तु अन्वेषण दकर्े जाने के दलए
दनदेश दनम्न होने पर नहीां ददर्ा जा सकता है:-
जहाां मदजस्टरेट को र्ह प्रतीत होता हो, अपराध
दजसका पररवाद दकर्ा गर्ा है अनन्यत: सेशन
न्यार्ालर् द्वारा दवचारणीर् है, परन्तु पररवादी से
अपने साक्ष्य को पेश करने की अपेक्षा करेगा
और उसकी शपथ पर परीक्षा करेगा अन्यथा
जहाां पररवाद न्यार्ालर् द्वारा नहीां दकर्ा गर्ा है,
जब तक पररवादी की र्ा उपस्थथत सादक्षर्ोां की
(र्दद कोई हो) धारा 200 के अधीन शपथ पर
परीक्षा नहीां कर ली जाती है। (देखें धारा 202 दां
प्र सां )

(ग) र्दद पररवादी के और सादक्षर्ोां के
शपथ पर दकए गर्े कथन पर (र्दद कोई हो)
और धारा 202 के अधीन जााँच र्ा अन्वेषण (
र्दद कोई है) के पररणाम पर दवचार करने के
पश्चात, मदजस्टरेट की र्ह रार् है दक कार्यवाही
करने के दलर्े पर्ायप्त आधार नहीां है, तो वो
पररवाद खाररज कर देगा, व ऐसा करने के अपने
कारण को सांक्षेप में अदिदलस्खत करेगा। (देखें
धारा 203 दां प्र सां) और र्दद अपराध का सांज्ञान
करने वाले मदजस्टरेट की रार् में कार्यवाही
करने के दलए पर्ायप्त आधार है तो वो धारा 204
दां0प्र0सां0 के प्रावधानोां के अांतगयत र्थोदचत
आदेदशका जारी करेगा।

(घ) उच्चतम न्यार्ालर् के दनणयर्ोां की शांखला
की र्ह अवधारणा है, दक धारा 203 दां0 प्र0सां0, में
उल्लेस्खत ''पर्ायप्त आधार' पर मदजस्टरेट की रार्
होने का अथय वो ''सांतोष' है, दजतना अदिर्ुक्त के
स्खलाि प्रथम दृष्टर्ा मामला बनने के दलए पर्ायप्त
आधार का होना हो, न दक वो ''सांतोष' जो अदिर्ुक्त
के दखलाफ़ दोष दसद्ध होने के दलए पर्ायप्त आधार
का होना होता है। आदेदशका जारी करते समर्
मदजस्टरेट को उपलब्ध साक्ष्य का मूल्याांकन का माप
दांड वैसा नहीां हो सकता है, जैसा की न्यार्ालर्
दवचारण के समर् करता है और न ही साक्ष्य का
मूल्याांकन करते समर् वो मानक अपनाना है, जो
मदजस्टरेट आरोप की दवरचना के समर् ध्यान में
रखता है। (देखें एस0डब्लू0 पलावितकर प्रवत
विहार राज्य:(2002) 1 एस0सी0सी0 241, केिल
कृष्णिि प्रवत सूरजभाि ि अन्य:(1980) सप्पली
एस0सी0सी0 499)

(ङ) आदेदशका जारी करने की प्रदिर्ा
र्ाांदत्रक नहीां होनी चादहए और न ही वो अदिर्ुक्त
का उत्पीडन करने के साधन के रूप में उपर्ोग
होनी चादहए। आरोदपर्ोां को आपरादधक मामले में
पेश होने के दलए बुलाए जाने की आदेदशका जारी
करने की प्रदिर्ा एक गांिीर दवषर् है और आदेश
में दवदधक दववेक का उपर्ोग न होना व आवश्यक
दववरण
की
कमी
को
केवल,
प्रदिर्ागत
अदनर्दमतता नहीां माना जा सकता है। (देखें
विरला कॉरपोरेशि वलवमटेड प्रवत एडिेन्टेज
इन्वेस्ट्मेन्ट ि होक्तडंग वलवमटड (2019) 16
एस0सी0सी0 610)

(च) दकसी आपरादधक कार्यवाही को रद्द
तिी दकर्ा जा सकता, जब पररवाद व सादक्षर्ोां
364 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
के ब्यान का दववरण दकसी अपराध को
उद्घादटत नहीां करता है, र्ा दशकार्त दनरथयक
हो और केवल अपराधी को परेशान र्ा उस पर
अत्याचार करने के दलए करी गर्ी हो। परन्तु
परीक्षण के दौरान उपलब्ध बचाव र्ा वो तथ्य जो
परीक्षण के अन्त में दोषरदहत होने का कारण
बन सकते हो, उनके आधार पर पररवाद दनरस्त
नहीां दकर्ा जा सकता है। आपरादधक दशकार्तोां
को केवल इस आधार पर िी समाप्त नहीां दकर्ा
जा सकता है दक उसमें लगाए गए आरोप
दीवानी प्रकृदत के हैं, र्दद कदथत अपराध के
तत्व दशकार्त में प्रथम र्द्ष्टव्य उद्घादटत होते
हो। उच्च न्यार्ालर् को अपने अन्तदनयदहत शस्क्त
का उपर्ोग, मदजस्टरेट के न्यादर्क दववेकादधकार
को अपने न्यादर्क दववेकादधकार से प्रदतथथादपत
करने हेतु र्ह जाांच नहीां करनी चादहर्े दक क्या
पररवाद में उल्लेस्खत आरोप अगर दसद्ध हो जाते
हैं तो क्या अपराधी को सजा दमल जार्ेगी। ऐसी
जाांच धारा 202 द0प्र0सां0 के अन्तगयत दक जाने
वाली जाांच प्रदिर्ा की र्ोजना से अदिन्न है।

(ि) र्दद पररवाद व सादक्षर्ोां के ब्यान में
लगार्े गर्े अदववाददत आरोप से दकसी िी
अपराध का कृत्य का होना प्रकट नहीां होता हो र्ा
अपराध के आवश्यक अवर्व उपस्थथत नहीां हो
र्ा पररवाद दकसी दवदधक प्रावधान के कारण
बादधत र्ा दनषेध हो तो इन पररस्थथदतर्ोां में उच्च
न्यार्ालर् अन्तदनयदहत शस्क्तर्ोां का उपर्ोग कर
आदेदशका दनरस्त कर सकती है। परन्तु र्ह ध्यान
में रखना होगा दक इन असधारण शस्क्तर्ोां का
दार्रा तो व्यापक है, परांतु इसका उपर्ोग सांर्म्
एवम् सावधानीपूवयक ही करना चादहए। (देखें
श्रीमती िागव्वा प्रवत विरन्ना वशिवलंगगप्पा
कोंजाल्गी ि अन्य (1976) 3 एस0सी0सी0 736,
माििराि जीिाजीराि वसंविया ि अन्य प्रवत
सम्भाजीराि चन्द्रोजीराि अंगरे ि अन्य
(1988)। एस0सी0सी0 692, कमल वशिाजी
पोकामेकर प्रवत महाराष्ट्र राज्य ि अन्य (2019)
14 एस0सी0सी0 350)

6. विश्लेिण एिं विष्किथ

उपरोक्त दवदध दवश्वलेषण की पृष्िूदम में
वतयमान प्रकरण के तथ्योां के आधार पर, र्ह
दनधायररत करना है दक क्या पररवाद के कथन व
सादक्षर्ोां के ब्यान से, आवेदकगण द्वारा धारा 384,
385, 511 िा0दां0सां0 के अन्तगयत प्रथम दृष्या
अपराध काररत होना प्रतीत होता है र्ा नहीां
अथवा दकसी अन्य दवदधक कारण से आदेदशका
दनरस्त की जा सकती है।

7. आवेदक के दवद्वान अदधवक्ता का
सवयप्रथम तकय है दक उनके द्वारा धारा 156 (3)
की प्रदिर्ा के दलए प्राथयना पत्र ददनाांक 5.1.2015
के माध्यम से एक प्रथम सूचना ररपोटय ददनाांक
29.03.2015 दवपक्षी सांख्या 2 व उसके पररवार
के दवरुद्ध दजय करवाई। दवपक्षी सांख्या 2 ने
इसका जवाब देने हेतु व आवेदक पर दबाव
बनाने के दलए धारा 156 (3) की प्रदिर्ा के दलए
प्राथयना पत्र ददनाांक 21.01.2015 (आवेदक के
प्राथयना पत्र के तुरांत बाद) दार्र दकर्ा दजस पर
आदेशानुसार पररवाद वाद दजय हुआ दजसके
िम में धारा 200 व 202 दां0प्र0सां0 के ब्यानोां के
आधार पर आवेदकगण को सम्मन की
आदेदशका पाररत की गर्ी। इस स्तर पर र्ह
ध्यान देना आवश्यक है दक आवेदकगण द्वारा
उनके द्वारा ददर्े गर्े प्राथयनापत्र पर आदेश के
उपरान्त दजय प्रथम सूचना ररपोटय पर अस्न्तम
ररपोटय आने के बाद उनके द्वारा दार्र प्रोटेस्ट
प्राथयना पत्र पर पाररत आदेश व वतयमान में
अन्वेषण र्दद कोई हुआ है तो उसकी वतयमान
स्थथदत के सम्बि में न तो कोई कथन ही कहा
गर्ा है और न ही इस सम्बि में कोई दस्तावेज
पत्रावली पर उपलब्ध है। जबदक दवपक्षी सांख्या 2
के द्वारा दास्खल प्राथयना पत्र को पररवाद मानते
हुए दां0प्र0सां0 के अन्तगयत कार्यवाही करते हुए
वतयमान में सम्मन आदेदशत दकर्ा गर्ा है, अतः
आवेदक गण का कथन/तकय दक समस्त
कार्यवाही केवल आवेदकगण पर दबाव डालने
1 All. Smt. Laxmi Devi & Ors. Vs. State of U.P. & Anr.
365
के दलए की गर्ी है, सत्य प्रतीत नहीां होता है।
अतः र्ह तकय अस्वीकार दकर्ा जाता है।

8. अब न्यार्ालर् को र्ह दनधायररत करना
है दक अवर न्यार्ालर् द्वारा आवेदकगण के
दवरुद्ध आदेदशका पाररत करने में कोई वैधादनक
त्रुदट हुई है र्ा नहीां। इसके दलए सवयप्रथम धारा
383, 384, 385 व 506 िा0दां0सां0 का उल्लेख
करना आवश्यक है जो दनम्न है।

"383. उद्दापि- जो कोई दकसी व्यस्क्त को
स्वर्ां उस व्यस्क्त को र्ा दकसी अन्य व्यस्क्त को
कोई क्षदत करने के िर् में साशर् डालता है,
और तद्द्वारा इस प्रकार िर् में डाले गए व्यस्क्त
को, कोई सम्पदत्त र्ा मूल्यवान प्रदतिूदत र्ा
हस्ताक्षररत र्ा मुर्द्ाांदकत कोई चीज दजसे
मूल्यवान प्रदतिूदत में पररवदतयत दकर्ा जा सके,
दकसी व्यस्क्त को पररदत्त करने के दलए बेईमानी
से उत्प्रेररत करता है, वह "उद्दापन" करता है।

384. उद्दापि के वलए दण्ड- जो कोई
उद्दापन करेगा वह दोनोां में से दकसी िाांदत के
कारावास से, दजसकी अवदध तीन वषय तक की
हो सकेगी, र्ा जुमायने से, र्ा दोनोां से, दस्ित
दकर्ा जार्ेगा।

385. उद्दापि करिे के वलए वकसी
व्यक्तक्त को क्षवत के भय में डालिा- जो कोई
उद्दापन करने के दलए दकसी व्यस्क्त को दकसी
क्षदत के पहुाँचाने के िर् में डालेगा र्ा िर् में
डालने का प्रर्त्न करेगा, वह दोनोां में से दकसी
िाांदत के कारावास से, दजसकी अवदध दो वषय
तक की हो सकेगी, र्ा जुमायने से, र्ा दोनोां से,
दस्ित दकर्ा जार्ेगा।

506. आपराविक अवभत्रास के वलए
दण्ड- जो कोई आपरादधक अदित्रास का
अपराध करेगा, वह दोनोां में से दकसी िाांदत के
कारावास से, दजसकी अवदध दो वषय तक की
हो सकेगी, र्ा जुमायने से, र्ा दोनोां से, दस्ित
दकर्ा जाएगा।

यवद िमकी मृत्यु या घोर उपहवत
इत्यावद काररत करिे की हो- तथा र्दद धमकी
मृत्यु र्ा घोर उपहदत काररत करने की, र्ा अदग्न
द्वारा दकसी सम्पदत्त का नाश काररत करने की
र्ा मृत्यु दि से र्ा आजीवन कारावास से, र्ा
सात वषय की अवदध तक के कारावास से
दिनीर् अपराध काररत करने की, र्ा दकसी
स्त्री पर अस्स्तत्व का लाांिन लगाने की हो, तो
वह दोनोां में से दकसी िाांदत के कारावास से,
दजसकी अवदध सात वषय तक की हो सकेगी, र्ा
जुमायने से, र्ा दोनोां से, दस्ित दकर्ा जार्ेगा।"

9. धारा 383 िा0दां0सां0 में उद्दापन के
अपराध का दववरण ददर्ा गर्ा है, दजसके
अनुसार इस अपराध के आवश्यक अवर्व हैं:-
(I) अपराधी, दकसी व्यस्क्त को स्वर्ां उस व्यस्क्त
को र्ा अन्य व्यस्क्त को कोई क्षदत करने के िर्
में डालता है। (ii) क्षदत करने का िर् साशर् हो,
(iii) अपराधी उस िर् में डाले गर्े व्यस्क्त को
कोई सांपदत्त र्ा मूल्यवान र्ा हस्ताक्षररत र्ा
मुर्द्ाांदकत कोई चीज दजसे मूल्यवान प्रदतिूदत में
पररवदतयत दकर्ा जा सके, दकसी व्यस्क्त को
पररदत्त करने के दलए बेइमानी से उत्प्रेररत करे।

10. उच्चतम न्यार्ालर् ने इसाक इसांगा
मुसुम्बा ि अन्य प्रवत महाराष्ट्र शासि ि अन्य :
(2014) 15 एस.सी.सी. 357 के मामले में
उद्दापन के अवर्व पर दवचार दकर्ा और र्ह
अवधाररत दकर्ा दक जब तक अपराधी द्वारा
उसको र्ा अन्य व्यस्क्त को साशर् क्षदत पहुाँचाने
के िर् के कारण व उसके द्वारा बेइमानी से
उत्प्रेररत होकर कोई सांपदत्त र्ा मूल्यवान र्ा
हस्ताक्षररत र्ा मुर्द्ाांदकत कोई चीज, दजसे
मूल्यवान प्रदतिूदत में पररवदतयत दकर्ा जा सके,
366 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
दकसी व्यस्क्त को प्रदान न हो गर्ी हो, तब तक
उद्दापन का अपराध पूणय नहीां हो सकता है।

11. वतयमान प्रकरण में अदववाददत रुप से
मृतका ने अपनी माता (आवेदक सां0 1) से िर्
की गर्ी िूदम को वापस नहीां दकर्ा है, जो
आपरादधक पररवाद व धारा 200 व 202 दां0प्र0सां0
के अांतगयत दजय ब्यानोां के पररशीलन से िी पूणय
रुप से पररलदक्षत होता है। अतः वतयमान प्रकरण
में उद्दापन के समस्त अवर्व, प्रथम दृष्टर्ा िी पूणय
नहीां होते हैं। अतः वतयमान प्रकरण में उद्दापन
(धारा 383 िा0दां0 सां0) का कोई अपराध प्रथम
दृष्टर्ा िी नहीां प्रकट होता है। अतः उसे धारा 384
िा0दां0सां0 के अन्तगयत सजा होने के िी प्रथम
दृष्या मामला नहीां बनता है।

12. अब न्यार्ालर् को र्ह देखना है क्या
धारा 385 िा0दां0सां0 (उद्दापन करने के दलए
दकसी व्यस्क्त को क्षदत के िर् में डालना) का
अपराध क्या पत्रावली पर उपस्थथत आपरादधक
पररवाद, धारा 200 व 202 दां0प्र0सां0 के ब्यान के
मद्देनजर प्रथम दृष्टर्ा बनता है र्ा नहीां।
आपरादधक पररवाद व वादी व गवाहोां के ब्यानोां में
र्ह कथन दकर्ा गर्ा है दक आवेदकगण वादी की
पत्नी पर जमीन पुनः उनके नाम करने का दबाव
देने लगे और मानदसक व शारीररक रुप से
उसको प्रताद़ित करने लगे।

13. धारा 385 के अवर्व उद्दापन का प्रर्ास
करते हुए दकसी व्यस्क्त को दकसी क्षदत के िर् में
डालने र्ा डालने का प्रर्त्न करने का अपराध को
वदणयत करते हैं। वतयमान प्रकरण में आपरादधक
पररवाद, धारा 200 व 202 दां0प्र0सां0 के ब्यानोां से
प्रथम दृष्टर्ा वादी की पत्नी को उद्दापन करने का
प्रर्ास करते हुए उसको मानदसक व शारीररक
प्रता़िना पहुाँचाना कहा गर्ा है। परन्तु इस नाते
कैसे उसको िर् में डालने र्ा डालने का प्रर्त्न
करने का कोई दवदनष् साक्ष्य र्ा कथन पत्रावली
पर उपस्थथत नहीां है और न ही र्ह कथन दकर्ा
गर्ा है दक क्या मानदसक र्ा क्या शारीररक
प्रता़िना पहुांचार्ी गई थी। अतः वतयमान प्रकरण
में धारा 385 िा0दां0 सां0 के अवर्व प्रथम दृष्टर्ा
उपस्थथत न होने के कारण इस अपराध के काररत
होने का मामला िी नहीां बनता है। इसी प्रकार
धारा 506 िा0दां0सां0 के िी अवर्व िी उपस्थथत
न होने के कारण िी उस अपराध के घदटत होने
का प्रथम दृष्टर्ा मामला नहीां बनता है।

14. जैसा की पूवय में दवश्लेषण दकर्ा गर्ा है
दक र्दद पररवाद व सादक्षर्ोां के ब्यान में लगार्े गर्े
अदववाददत आरोप से दकसी िी अपराध का कृत्य
का होना प्रकट नहीां होता हो र्ा अपराध के
आवश्यक अवर्व उपस्थथत नहीां हो तो र्ह
न्यार्ालर् अपनी अन्तदनयदहत शस्क्तर्ोां का उपर्ोग
करते हुए आदेदशका (सम्मन) दनरस्त कर सकता
है।

15. अतः उपरोक्त दवश्लेषण का एक ही
पररणाम है दक र्ह आवेदन स्वीकार करने र्ोग्य
है तद्नुसार स्वीकार दकर्ा जाता है तथा आक्षेदपत
आदेश ददनाांक 27.02.2017 जो ए0सी0एम0
दद्वतीर्, कानपुर नगर द्वारा पररवाद सांख्या-
776/15, रमाशांकर बनाम श्रीमती लक्ष्मी देवी
आदद, अन्तगयत धारा-384, 385, 506 िा0द0सां0
के मामले में पाररत दकर्ा गर्ा है, दनरस्त दकर्ा
जाता है।
----------
(2022)01ILR A366
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.12.2021

BEFORE

THE HON'BLE DR. YOGENDRA KUMAR
SRIVASTAVA, J.

Application U/S 482 Cr.P.C. No. 12578 of 2021

Badri Prasad & Ors. ...Applicants
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties