# Sonu Yadav v. The State of U.P. & Ors

- **Citation:** (2021) 1 ILRA 730
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2021-01-08
- **Case number:** Writ -A No. 4577 of 2019
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/sonu-yadav-v-the-state-of-u-p-ors-46710
- **Pages:** 9

## Headnote

A. Service law - Indian Penal Code,1860-
Section 323/504- Selection on the Police
Constable post - Criminal case against the
candidate - Deliberate concealment of
fact - Effect - No case at the time of
online submission of application - After 2
years, an affidavit declaring pendency of
no criminal case filed - One month earlier
to this affidavit, a N.C.R. was filed against
the candidate, which was informed to the
District
Magistrate
through
second
affidavit after 11⁄2 months - N.C.R. filed
for petty offence under Section 323/504
I.P.C., which has been compounded too -
Held, Concealment of fact relating to the
filing of N.C.R. is not reflected - The
conduct of candidate is fair. (Para 4.05,
4.06 and 4.07)
1 All. Sonu Yadav Vs. The State of U.P. & Ors.
731
Writ Petition allowed (E-1)
List of Cases cited:-

## Text

730 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
envisaged under Section 33(1) of the Act,
1940 cannot be done away with by the
State Government even if there existed a
scope.

16. This position is elaborately
discussed in the judgements rendered by
the Full Bench of this Court as well as by
Delhi High Court in the judgements
mentioned above. The position of law put
forth on the strength of decision in Satpal
Reddy case is distinguishable for the
reason that in the case of Satpal Reddy,
the provisions of the Transport Act stood
at variance and left enough scope for the
State to legislate within the scope of
Section 213 mentioned therein. The
situation in the present case looking to
the mandate of Section 21 read with
Section 33 of the Act, 1940 is different.
In the present case, the Parliament has
firstly exhausted the legislative power on
the subject of prescription of eligibility
qualifications and secondly the law
makes
the
Central
Government
a
repository of such a power leaving no
scope for the State Government to step in
so long as Rule-49 is amended.

17. In my humble consideration,
therefore, the advertisement issued by the
U.P. Public Service Commission on
10.8.2016 as per amended Rule-8 of the
Service Rules lacks authority and being
inconsistent with Rule-49 of the Drugs
and Cosmetics Rules, 1945, the same is
liable to be set aside and is accordingly
set aside. The selection held in pursuance
thereof is also set aside with the liberty
open to the State to issue a fresh
advertisement or corrigendum inviting
applications from the eligible candidates
having
regard
to
the
prescribed
qualifications as per Rule 49 of the Drugs
and Cosmetics Rules, 1949. The U.P.
Public Service Commission being the
selection body, is also expected to
proceed in accordance with law, as
applicable.

18. The writ petition is accordingly
allowed with no order as to cost.
----------
(2021)01ILR A730
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 08.01.2021

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Writ -A No. 4577 of 2019

Sonu Yadav ...Petitioner
Versus
The State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Vijay Gautam, Sri Mohd. Fahad, Sri
Sanjeev Singh, Sri Suresh Bahadur Singh,
Sri Ved Prakash Mishra

Counsel for the Respondents:
C.S.C.

A. Service law - Indian Penal Code,1860-
Section 323/504- Selection on the Police
Constable post - Criminal case against the
candidate - Deliberate concealment of
fact - Effect - No case at the time of
online submission of application - After 2
years, an affidavit declaring pendency of
no criminal case filed - One month earlier
to this affidavit, a N.C.R. was filed against
the candidate, which was informed to the
District
Magistrate
through
second
affidavit after 11⁄2 months - N.C.R. filed
for petty offence under Section 323/504
I.P.C., which has been compounded too -
Held, Concealment of fact relating to the
filing of N.C.R. is not reflected - The
conduct of candidate is fair. (Para 4.05,
4.06 and 4.07)
1 All. Sonu Yadav Vs. The State of U.P. & Ors.
731
Writ Petition allowed (E-1)
List of Cases cited:-
1. Avtar Singh Vs U.O.I. , (2016) 8 SCC 471

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. संक्षेप में प्रकरण के िथ्य

1.01 याचिकाकिाथ/अभ्यिी ने पुललस
आरक्षी ि आरक्षी पी0ए0सी0 के पिों पर सीधी
भिी िषथ 2015 के अन्िगथि पुललस आरक्षी पि
पर भिी ककये जाने के ललए ऑनलाईन आिेिन
पत्र दिनााँक 19.02.2016 को प्रथिुि ककया िा,
स्जसका रस्जथरेिन नम्बर 10217540181
आिंदटि ककया गया।

1.02 उ0प्र0 पुललस भिी एिं प्रोन्नति बोडथ
लिनऊ द्िारा ियन प्रकक्रया की अहथिा पूणथ
करने के र्लथिरुप याचिकाकिाथ/अभ्यिी के
गृह जनपि में पुललस अधीक्षक, गाजीपुर द्िारा
िारीररक परीक्षण (नाप-िौल), थिाथथ्य परीक्षण
एिं िररत्र सत्यापन की कायथिाही पूणथ कराने के
उपरान्ि जे0टी0सी0 प्रलिक्षण हेिू,आिंदटि
ककये गये जनपि गाजीपुर के पुललस अधीक्षक
को तनयुस्क्ि आिेि तनगथि ककये जाने के ललए
पत्रािली प्रेवषि की गयी।

1.03 पुललस अधीक्षक, गाजीपुर द्िारा
याचिकाकिाथ/अभ्यिी की िारीररक एिं थिाथथ्य
परीक्षण की कायथिाही पूणथ होने के उपरान्ि, िररत्र
सत्यापन की कायथिाही कराई गयी। िानाध्यक्ष विरनो
जनपि गाजीपुर के िररत्र सत्यापन की आख्या दिनांक
26.06.2018 के अनुसार याचिकाकिाथ/अभ्यिी के
विरुद्ध एक एन0सी0आर0 संख्या 76/2018 अंिगथि
धारा 323/504 भा0िं0सं0, िाना विरनो, जनपि
गाजीपुर में पंजीकृि होने के कारण, उसके िररत्र
सत्यापन की संथिुति नहीं की गई।

1.04 इसके उपरान्ि प्रकरण में
स्जलाचधकारी गाजीपुर के पत्र संख्या 55/15जे0ए0/2018 दिनांक 20.08.2018 के द्िारा
अिगि कराया गया कक संयुक्ि तनिेिक,
अलभयोजन गाजीपुर से प्राप्ि आख्यानुसार,
अभ्यिी के विरुद्ध एन0 सी0आर0 संख्या
76/2018 अन्िगथि धारा 323/504 भा0िं0सं0,
में िोनों पक्षों के बीि आपस में दिनााँक
28.06.2018 को सुलहनामा हो गया है ििा
अभ्यिी के विरुद्ध अन्य कोई विपरीि िथ्य नहीं
है। स्जसके दृस्ष्टगि अभ्यिी के ियन हेिु कोई
आपवत्त नहीं है।

1.05 इसी क्रम में अभ्यिी, आिंदटि स्जला
के प्राचधकारी के समक्ष उपस्थिि हुआ पर
उसको प्रलिक्षण के ललए अनुमति प्रिान नहीं
करी गयी। अिः अभ्यिी ने इस न्यायालय के
समक्ष ररट 'ए' सं0 21425/2018 िाखिल की,
जो
इस
न्यायालय
के
आिेि
दिनााँक
20.11.2018 द्िारा तनथिाररि की गयी ि
आिेलिि ककया गया की पुललस अधीक्षक,
अम्बेडकर नगर, अभ्यिी के आिेिन को,
उच्ििम न्यायालय द्िारा अितार ससंह बनाम
भारत सरकार ि अन्य 2016 (8) SCC 471
में पाररि तनणथय में उल्लेखिि लसद्धान्िों के
पररपेक्ष में विचधनुसार तनथिाररि करें।

1.06 इस क्रम में अभ्यिी ने पुललस
अधीक्षक, अम्बेडकर नगर को आिेिन कर
तनिेिन ककया कक-

(i) अभ्यिी ने सत्यापन प्रपत्र दिनााँक
04.06.2018 को तनयुस्क्ि प्राचधकारी के समक्ष
प्रथिुि ककया िा, परन्िु उसमें जानकारी के
अभाि में ककसी भी आपराचधक मामले की
जानकारी प्रिान नहीं करायी िी, जब कक उसके
विरुद्ध एक एन0सी0आर दिनांक 05.05.2018
को धारा 323/504 भा0िं0सं0 के अन्िगथि
पंजीकृि िी।
732 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(ii) उपरोक्ि सत्यापन प्रपत्र प्रथिुि करने
के उपरान्ि, उपरोक्ि एन0सी0 आर0 की
जानकारी अभ्यिी को लमली ििा इसके उपरान्ि
अभ्यिी का िािी से आपसी सुलहनामा
28.06.2018 को हो गया ि इस आिय का एक
िपि
पत्र
दिनााँक
16.07.2018
को
स्जलाचधकारी, गाजीपुर के समक्ष प्रथिुि कर
दिया गया।

(iii) इसके पूिथ ही अभ्यिी ने, िपिपत्र
दिनांक 22.06.2018 के माध्यम से उसके
विरुद्ध एन0सी0आर0 पंजीकृि होने की सूिना
स्जलाचधकारी गाजीपुर को प्रेवषि की कर िी िी
ििा उसकी एक प्रति पुललस अधीक्षक गाजीपुर
को भी प्रेवषि कर िी िी।

(iv) इसके उपरान्ि स्जलाचधकारी, गाजीपुर
ने उपरोक्ि सुलहनामा का संज्ञान लेिे हुए,
अभ्यिी के पक्ष में ियन हेिु अनापवत्त पत्र
दिनााँक 20.08.2018 को, पुललस अधीक्षक
गाजीपुर को प्रेवषि भी कर दिया।

1.07 इस न्यायालय के आिेि दिनांक
20.11.2018 के अनुसार अभ्यिी के तनिेिन
का तनथिारण पुललस अधीक्षक, अम्बेडकर नगर
द्िारा 27.02.2019 को ककया गया, स्जसके द्िारा
अभ्यिी का अभ्यिथन/ियन तनरथि करने का
आिेि दिया गया। आिेि के मुख्य अंि तनम्न
है:-

"15- इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का
तनिेि हुआ है कक विभाग की तनयमािली, भिी
की विज्ञस्प्ि, कालमथक विभाग के उक्ि
िासनािेि एिं मा0 सिोच्ि न्यायालय के उक्ि
तनणथयों से यह थपष्ट होिा है कक पुललस विभाग
की सेिा संिेिनिील एिं सुरक्षाथ से सम्बस्न्धि
होने के कारण सभी माप िण्डों पर उत्कृष्ट
अभ्यिी को ही सेिा िी जानी िादहए, स्जससे
सेिा में आने के पश्िाि् अभ्यिी को अनुचिि
प्रोत्साहन प्राप्ि न हो सकें।

16- िासन को उपलब्ध कराये गये
अलभलेिों में तनदहि िथ्यों के अनुसार पक्षकारों
द्िारा दिनााँक 27.06.2018 (छायाप्रति संलग्न)
को समझौिा ककया गया है। सुलहनामा िाने के
भारसाधक अचधकारी को नोटरी एकर्डेविड पर
दिया गया है। िाने के भारसाधक अचधकारी के
समक्ष दिये गये सुलहनामें को मेररट पर
िोषमुस्क्ि नहीं कही जा सकिी है।

17- श्री सोनू यािि द्िारा प्रथिुि िपि पत्र
दिनााँक 04.06.2018 (छाया प्रतिसंलग्न) में उक्ि
अलभयोगों का उल्लेि उनके द्िारा नहीं ककया
गया है, इससे थपष्ट है कक उक्ि अलभयोग से
सम्बस्न्धि िथ्यों को तछपाया गया है। पुललस
विभाग की सेिा संिेिनिील होने के साि सुरक्षा
से सम्बस्न्धि है। अपराधों को रोकने एिं
अपराचधयों को िण्ड दिलिाने का विचधक
उत्तरिातयत्ि पुललस विभाग का है। अिएि
इनको पुललस की सेिा दिये जाने पर उन्हे यह
अनुचिि प्रोत्साहन प्राप्ि हो सकेगा कक िे थिेच्छा
उपहति एिं लोक िास्न्ि भंग कराने को
प्रकोवपि कराने के आिय से सािय अपमान
हेिु अलभयोगों के सम्बन्ध में िाना के भारसाधक
अचधकारी के समक्ष सुलहनामा िाखिल करा
दिये ििा िपि पत्र में उक्ि िथ्यों का भी
उल्लेि नहीं ककया। अिएिं यािी/अभ्यिी का
उक्ि अभ्यिथन/ियन तनरथि होने योग्य है।"

1.08 उपरोक्ि िखणथि आिेि दिनााँक
27.02.2019, ििथमान आज्ञापत्र याचिका में
आक्षेवपि है।

1.09 अभ्यिी ने आज्ञापत्र याचिका में
मुख्यिया तनम्न आधार ललए हैं:-

(i) 06.06.2018 को सत्यापन िपिपत्र
िाखिल करिे समय अभ्यिी को उसके विरुद्ध
एन0सी0आर0 दिनााँक 05.05.2018 पंजीकृि
होने की जानकारी का अभाि िा। इसललए उक्ि
का उल्लेि िपिपत्र में नहीं ककया िा।

(ii) उपरोक्ि एन0सी0आर0 की जानकारी
प्राप्ि होिे ही, इस आपराचधक प्रकरण के
1 All. Sonu Yadav Vs. The State of U.P. & Ors.
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पंजीकरण की सूिना िपि पत्र दिनााँक
22.06.2018 के माध्यम से स्जलाचधकारी,
गाजीपुर ि पुललस अधीक्षक, गाजीपुर को प्रेवषि
ककया गया। िद्उपरान्ि 28.06.2018 को
सुलाहनामा होने पर उसकी भी सूिना
16.07.2018 को िपिपत्र के माध्यम से पुललस
अचधक्षक ि स्जलाचधकारी गाजीपुर को भी प्रेवषि
की गई। यह िथ्य स्जलाचधकारी, गाजीपुर की
अभ्यिी
के
ियन
हेिू
अनापवत्त
पत्र
दिनााँक20.08.2018 में उल्लेखिि भी है। अिः
आपराचधक मामले की जानकारी जानबूझ कर
नहीं छुपाई गई िी।

(iii) इस न्यायालय के आिेि दिनााँक
20.11.2018 मेेेें
 विलिष्ठ तनिेि िा कक
अभ्यिी के आिेिन को उच्ििम न्यायालय के
'अितार ससंह' के मामले मेेेें
 पाररि तनणथय के
लसद्धान्िों के अनुकूल तनधाथररि ककया जाये,
इसके बािजूि, अभ्यिी आिेिन मात्र इस कारण
से तनरथि कर दिया गया कक सुलहनामें को
गुणिोष के आधार पर िोषमुस्क्ि नहीं माना जा
सकिा
है,
जबकक
ििथमान
प्रकरण,
एन0सी0आर0 पंजीकरण से संबंचधि िा जहााँ
सुलहनामा के बाि वििारण का प्रश्न ही नहीं रह
जािा है। अिः आक्षेवपि आिेि रद्ि ककया जाये।

1.10 प्रतििािी की ओर से प्रतििपिपत्र
िाखिल ककया गया है, स्जसमें मुख्य रुप से किन
ककया गया कक-

(i) उ0प्र0 पुललस मुख्यालय द्िारा जारी
पररपत्र दिनााँक 22.05.2018 के अनुच्छेि 7 में
विलिष्ठ रुप से उल्लेखिि ककया गया है कक
"ककसी अभ्यिी के िररत्र सत्यापन के िौरान
कोई प्रतिकूल िथ्य सामने आने पर, उसे
तनयुस्क्ि प्राचधकारी द्िारा अनुपयुक्ि घोवषि
ककया जायेगा" ििा अनुच्छेि 8(ज) में
उल्लेखिि है कक "यदि अभ्यिी द्िारा प्रथिुि
ककये गये िपिपत्र में अंककि िथ्य गलि पाये
जाये िो भिी के ललए अभ्यिी का कोई िािा
नहीं होगा" ऐसा ही विज्ञापन में भी उल्लेखिि
है।

(ii) अभ्यिी
ने
अपने
ऊपर
लगे
आपराचधक मामले की जानकारी छुपाकर सेिा
तनयुक्ि प्राप्ि की अिाथि् सेिा तनयुस्क्ि छल से
प्राप्ि करी गयी अिः अभ्यिी के ियन को
तनरथि करने का आिेि उचिि है।

(iii) अभ्यिी को िपिपत्र दिनााँक
04.06.2018 सत्यावपि करिे समय अपने
विरुद्ध एन0सी0आर0 पंजीकृि है, इस िथ्य
की जानकारी िी, कर्र भी लमथ्या िपि पत्र
िाखिल ककया।

(iv) 'अितार ससंह' (पूिथ में उल्लेखित)
तनणथय के अनुसार भी अभ्यिी के विरुद्ध पाररि
ियन को तनरथि करने का आिेि न्यायोचिि
है।

1.11 अभ्यिी द्िारा प्रतिउत्तर िपिपत्र
भी िाखिल ककया स्जसमें आज्ञापत्र याचिका के
किनों का समिथन ककया।

अभ्यर्ी के पक्ष में तनिेदन:-

2.00 संजीि लसंह ि उनके सहायक सुरेि
बहािुर लसंह, अभ्यिी के विद्िान अचधिक्िाओं ने
मुख्य रुप से तनिेिन ककया कक-

(i) अभ्यिी को िपिपत्र सत्यावपि करिे
समय, उसके विरुद्ध कोई एन0सी0आर0
पंजीकृि िी, इसकी जानकारी नहीं िी, अिः
इसकी सूिना िपिपत्र में नहीं िी िी। प्रकरण में
जानकारी का अभाि िा न कक जानकारी होिे
हुए भी तछपाने का। िपिपत्र में समथि
जानकारी सद्भािना में उल्लेखिि की गयी िी।

(ii) अभ्यिी ने अपने विरुद्ध एन0सी0आर0
दिनााँक 05.05.2018 पंजीकृि होने की सूिना
प्राप्ि होने पर िुरंि ही इसकी जानकारी
िपिपत्र दिनााँक 22.06.2018 के माध्यम से
स्जलाचधकारी ि पुललस अधीक्षक, गाजीपुर को
734 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
प्रेवषि कर िी अिाथि् एन0सी0आर0 पंजीकृि
होने के महज 1 1/2 मदहने के भीिर ही समथि
जानकारी सक्षम अचधकारी को िे िी गई िी।

(iii) इसके अतिररक्ि सुलाहनामा की
सूिना भी 16.07.2018 को स्जलाचधकारी,
गाजीपुर को प्रेवषि कर िी गई ििा इस
जानकारी के बाि अभ्यिी के पक्ष में
स्जलाचधकारी गाजीपुर ने ियन हेिु अनापवत्त भी
दिनााँक 22.08.2018 को िे िी, परन्िु पुललस
प्राचधकारी ने उसका उचिि संज्ञान ललए बबना ही
अभ्यिी के विरुद्ध आिेि पाररि कर दिया।

(iv) उच्ििम न्यायालय द्िारा पाररि
'अितार ससंह' (पूिथ में उल्लेखित) के तनणथय के
अनुसार अगर आपराचधक मामले की जानकारी
जानबूझ कर नहीं छुपाई गयी है ि अपराध की
प्रकृति मामूली हो िो सेिा तनयुस्क्ि के पक्ष में
आिेि दिया जा सकिा है, जबकक ििथमान
प्रकरण में जानकारी प्राप्ि होिे ही अभ्यिी ने
उसके विरुद्ध एन0सी0आर0 के पंजीकृि होने
की ि सुलहनामा होने की जानकारी सक्षम
प्राचधकारी को िे िी िी ि प्रकरण में अपराध की
प्रकृति मामूली है। अभ्यिी ने समथि कायथिाही
सद्भािना से की है। अिः ििथमान याचिका
थिीकार की जाये।

प्रततिादी के पक्ष में कर्न:-

3. अभ्यिी के पक्ष के किन का विरोध
करिे हुए िेि प्रकाि लमश्रा सरकारी अचधिक्िा
ने किन ककया कक-

(i) अभ्यिी ने जानबूझ के अपने ऊपर
लंबबि आपराचधक मामले की जानकारी छुपाई
ि छल कपट से सेिा तनयुस्क्ि प्राप्ि करने का
प्रयास ककया।

(ii) विज्ञापन ि पररपत्र में यह विलिष्ठ रुप से
उल्लेखिि है कक,िररत्र सत्यापन के िौरान कोई
प्रतिकूल िथ्य सामने आने पर उक्ि अभ्यिी को
अनुपयुक्ि घोवषि ककया जायेगा।

(iii) आक्षेवपि आिेि उच्ििम न्यायालय
द्िारा पाररि 'अििार लसंह' के तनणथय के अनुसार
ही पाररि ककया गया है। सुलहनामा के आधार
पर िोषमुस्क्ि थपष्ट रुप से िोषमुक्ि का आिेि
नहीं माना जा सकिा है।

विश्लेषण .

4. उभयपक्ष के अचधिक्िाओं को सुना ि
पत्रािली का पररिीलन ककया।

4.01 यह अवििादिि है, कक अभ्यिी के
विरुद्ध 05.05.2018 को एक एन0सी0आर0,
धारा 323/504 भा0िं0सं0 के अंिगथि पंजीकृि
हुई, स्जसकी जानकारी अभ्यिी द्िारा िपिपत्र
दिनांक 04.06.2018 में नहीं िी गई। प्रिम बार
इस एन सी आर के पंजीकृि होने की जानकारी
अभ्यिी द्िारा िपिपत्र दिनााँक 22.06.2018 के
माध्यम से स्जलाचधकारी, गाजीपुर को िी गई
उपरोक्ि एन0सी0आर0 में सुलहनामा िपिपत्र
27.06.2018 को सत्यावपि हुआ ििा स्जसकी
जानकारी भी सक्षम अचधकारी को िपि पत्र
दिनांक 16.07.2018 के माध्यम से िी गई,
स्जसका उल्लेि स्जलाचधकारी की ियन
अनापवत्त पत्र दिनांक 20.08.2018 में ककया
गया है। आक्षेवपि आिेि में इस सुलहनामें को
कोई महत्ि नहीं दिया गया ििा यह तनधाथररि
ककया गया की अभ्यिी द्िारा एन0सी0आर0 के
पंजीकरण के िथ्य को तछपाया गया।

4.02 यह भी अवििादिि है कक पुललस
विभाग की सेिा एक अनुिालसि सेिा है स्जसका
किथव्य अपराधों को रोकना एिं अपराचधयों को
िण्ड
दिलिाने
की
प्रकक्रया
का
विचधक
उत्तरिातयत्ि का तनिथहन करना है।

4.03 उच्ििम न्यायालय द्िारा 'अितार
ससंह' (पूिथ में उल्लेखित) के तनणथय के अनुच्छेि
38 में यह प्रतिपादिि ककया गया है कक,-
1 All. Sonu Yadav Vs. The State of U.P. & Ors.
735

"38.1 ककसी अभ्यिी द्िारा तनयोक्िा को
िोषलसद्चध, िोषमुस्क्ि या चगरफ़्िारी या ककसी
लंबबि आपराचधक मामले की जानकारी, िाहे िो
सेिा में प्रिेि करने से पहले या बाि में िी गयी
हो, सत्य ही होनी िादहए और आिश्यक
जानकारी को छुपाना या उसका गलि उल्लेि
नहीं होना िादहए।

38.2. झूठी सूिना िेने के ललए सेिाओं की
समास्प्ि या उम्मीििारी को रद्ि करने का आिेि
पाररि करिे समय तनयोक्िा को ऐसी जानकारी
िेिे समय मामले की वििेष पररस्थितियों का,
यदि कोई हो, संज्ञान ले सकिा है।

38.3 तनयोक्िा तनणथय लेने के समय कमथिारी
के ललए लागू सरकारी आिेिों / तनिेिों / तनयमों
को ध्यान में रिेगा।

38.4 ककसी ऐसे आपराचधक मामले में
िालमल होने की जानकारी का छुपाना या गलि
सूिना िेना ,स्जसमें आिेिन / सत्यापन प्रपत्र भरने
से पहले ही िोषलसद्ध या िोषमुक्ि कर दिया गया
िा और ऐसा िथ्य बाि में तनयोक्िा के ज्ञान में आिा
है, िो तनम्नललखिि में से कोई भी प्रकक्रया जो
उपयुक्ि हो,अपनायी जा सकिी है।

38.4.1 ऐसे मामलों में जहां िोषलसद्घ का
आिेि में अपराध की प्रकृति मामूली हो, जैसे कक
कम उम्र में नारे लगाना या एक छोटे से अपराध के
ललए, स्जसका अगर िुलासा ककया जािा िो भी,
अभ्यिी प्रश्नागि पि के ललए अयोग्य नहीं हो जािा ,
िो तनयोक्िा अपने वििेक से इस िथ्य को छुपाने ि
ग़लि जानकारी िेने के कृत्य की उपेक्षा या कमी
को क्षमा कर सकिा है।

38.4.2 जहां िोषलसद्घ ऐसे मामले में हुआ
हो, जो मामूली प्रकृति का नहीं है, िब तनयोक्िा
कमथिारी की उम्मीििारी या सेिाओं को तनरथि
कर सकिा है।

38.4.3. अगर पहले से ही िकनीकी आधार
पर नैतिक क्रूरिा या जघन्य / गंभीर प्रकृति के
अपराध से जुडे मामले में िोषमुक्ि का आिेि
पाररि ककया जा िुका है और यह थपष्ट रुप से
िोषमुक्ि का मामला नहीं है, या उचिि संिेह का
लाभ दिया गया है, िो तनयोक्िा, कमथिारी के
पूिथििी रहन-सहन ि सभी प्रासंचगक िथ्य पर
वििार कर के कमथिारी की तनरंिरिा के प्रति,
उचिि तनणथय ले सकिा हैं।

38.5 ऐसे मामले में जहां कमथिारी ने सत्यिा
पूिथक पूणथ हुए आपराचधक मामले की घोषणा की
है, तनयोक्िा को िब भी पूिथििी रहन-सहन पर
वििार करने का अचधकार है और उसको
उम्मीििार को तनयुक्ि करने के ललए बाध्य नहीं
ककया जा सकिा है।

38.6. यदि मामले में िुच्छ प्रकृति के
आपराचधक मामले के लंबबि होने का िथ्य को
सत्य रूप से िररत्र सत्यापन प्रपत्र में घोवषि ककया
गया है, िो मामले के िथ्यों और पररस्थितियों में
तनयोक्िा, अपने वििेक से, ऐसे आपराचधक मामले
के तनणथय के अधीन,उम्मीििार को तनयुक्ि कर
सकिा है।

38.7 कई लंबबि अपराचधक मामलों की
सूिना को जानबूझकर छुपाने के मामले में इस
िरह की असत्य सूिना अपने आप में महत्िपूणथ हो
जायेगी और तनयोक्िा ऐसे व्यस्क्ि की उम्मीििारी
रद्ि करने या सेिाओं को रद्ि करने का या के
तनयुस्क्ि को रद्ि करने का उचिि आिेि पाररि कर
सकिा है क्योंकक ऐसे व्यस्क्ि स्जसके विरुद्ध कई
आपराचधक मामले लंबबि हों , उसकी तनयुस्क्ि
उचिि नहीं हो सकिी है ।

38.8 आिेिन पत्र भरने के समय यदि
उम्मीििार को यह ज्ञाि नहीं हो कक कोई
आपराचधक मामला लंबबि है , कर्र भी इसका
प्रतिकूल प्रभाि पड सकिा है और तनयुस्क्ि
प्राचधकारी अपराध की गंभीरिा को िेििे हुए
तनणथय ले सकेगा ।

38.9 यदि सेिा में कमथिारी थिायी हो जािा
है, िो सत्यापन आिेिन पत्र में असत्य जानकारी
प्रथिुि करने के आधार पर पिच्युति या
सेिामुस्क्ि के आिेि पाररि करने से पूिथ
विभागीय जांि करना आिश्यक होगा।

38.10 छुपाने या गलि जानकारी के
तनधाथरण के ललए सत्यापन प्रपत्र विलिष्ट होना
736 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
िादहए न की अथपष्ट, केिल ऐसी जानकारी स्जसे
वििेष रूप से उस्ल्लखिि ककया जाना आिश्यक
िा, की सूिना िी जानी िादहए। यदि जानकारी
नहीं मांगी जािी है, परन्िु प्रासंचगक हो और
तनयोक्िा के जानकारी में आये िो िो जानकारी
अनुकूलिा के प्रश्न को संबोचधि करिे समय एक
उद्िेश्यपूणथ रुप में वििारािथ की जा सकिी है।
हालााँकक, ऐसे मामलों जहां कोई िथ्य पूछा ही न
गया हो िो उसके छुपाने या असत्य सूिना िेने
पर कारथिाई नहीं की जा सकिी है ।

38.11 इससे पूिथ कक ककसी व्यस्क्ि को
''सप्रेलसयो िेरर या सुझावियो र्ाल्सी' (सत्य का
िमन या असत्य का सुझाि) का िोषी ठहराया
जाए, िथ्य की जानकारी आिश्यक रुप से
उसको काररि होनी िादहए ।"

(उपरोक्ि दहन्िी रुपान्िरण न्यायालय द्िारा
ककया गया है)

4.04 उपरोक्ि िखणथि िथ्य ि विचधक
पररपेक्ष, में सिथप्रिम यह तनधाथररि करना है कक,
क्या ििथमान प्रकरण में अभ्यिी द्िारा आपराचधक
मामले की िथ्यात्मक सूिना, जानबूझ कर
छुपाई गई है ििा क्या अभ्यिी द्िारा िपिपत्र
िाखिल करने के बाि, बहुि कम समयन्िराल में
आपराचधक मामले की सूिना को सक्षम
अचधकारी के समक्ष उल्लेखिि करने का कृि,
उसकी सद्भािना को दृस्ष्टगि करिा है?

4.05 पत्रािली में पररिीलन से यह विदिि
है कक, सिथप्रिम अभ्यिी ने पुललस आरक्षी का
आिेिन 19.02.2016 को ऑनलाईन प्रथिुि
ककया स्जसमें उसने यह घोवषि ककया कक उसको
कभी भी िोष लसद्ध नहीं ककया गया। जो
अवििादिि रुप से सत्य िा।

4.05 इसी क्रम में अभ्यिी के एक िपि
पत्र दिनााँक 04.06.2018 को सत्यावपि ककया
स्जसमें यह घोवषि ककया कक "यह कक मेरे विरुद्ध
कोई
आपराचधक
मुकिमा/मामला
मेरी
जानकारी में कभी पंजीकृि नहीं हुआ और न ही
कोई पुललस वििेिना (INVESTIGATION)
लस्म्बि है।" यह भी विदिि है कक इससे पूिथ
05.05.2018 एक एन0सी0आर0 अभ्यिी के
विरुद्ध पंजीकृि हो गयी िी। स्जसकी सूिना
िपि पत्र दिनााँक 22.06.2018 ि सुलहनामे
की सूिना िपिपत्र दिनााँक 16.07.2018, के
द्िारा सक्षम अचधकारी को िे िी गयी िी।
िानाध्यक्ष बबरनो जनपि गाजीपुर के िररत्र
सत्यापन की आख्या दिनााँक 26.06.2018 के
अनुसार एन0सी0आर0 पंजीकृि की सूिना
पुललस प्राचधकारी को िी गयी। अिः यह कहना
की एन0सी0आर0 की सूिना जानकारी होिे भी
जानबूझ के छुपाई, प्रकरण के िथ्यों से
पररलक्षक्षि नहीं होिा है, क्योंककमास के भीिर ही
अभ्यिी ने सही सूिना पुललस अधीक्षक ि
स्जलाचधकारी को प्रेवषि कर िी िी। यहााँ यह भी
उल्लेिनीय है कक स्जलाचधकारी, गाजीपुर ने
सुलाहनामे के िथ्य का संज्ञान लेिे हुए अभ्यिी
के ियन की अनापवत्त भी दिनााँक 20.08.2018
को पुललस अधीक्षक गाजीपुर को प्रेवषि कर िी
िी। अिः ििथमान प्रकरण में अभ्यिी का कृि
सिभािना पूणथ रहा है।

4.06 इससे उपरान्ि यह तनधाथररि करना
है कक क्या एन0सी0आर0 जो धारा 323/504
भा0िं0सं0 के अन्िगथि पंजीकृि िी ििा उसमें
सुलहनामा भी हो गया है िो ऐसी पररस्थितियों में
उच्ििम न्यायालय द्िारा िी गये 'अितार ससंह'
(पूिथ में उल्लेखित) के तनणथय के लसद्धान्ि के
दृस्ष्ट में क्या आक्षेवपि आिेि न्याय संगि है?

4.07 उच्ििम न्यायालय द्िारा 'अितार
ससंह' (पूिथ में उल्लेखित) के प्रकरण में पाररि
तनणथय में प्रतिपादिि लसद्धान्िो के पररपेक्ष में यह
विदिि है कक ककसी भी अभ्यिी द्िारा तनयोक्िा
को उसके विरुद्ध सभी पंजीकृि आपराचधक
मामले िाहे उसमें उसको िोष लसद्ध या
िोषमुक्ि ककया जा िुका है या लंबबि हो की
1 All. Sonu Yadav Vs. The State of U.P. & Ors.
737
जानकारी सत्यिापूिथक, सेिा में प्रिेि करने के
पूिथ आिश्यक रुप से िेनी िादहए ििा ऐसी
जानकारी को छुपाने या असत्य जानकारी िेने
की ििा में तनयोक्िा को ऐसे अभ्यिी की
उम्मीििारी या सेिा को तनरथि करने का
अचधकार रहेगा। ''अितार ससंह' में ऐसे मामलों
में तनयोक्िा द्िारा तनणथय लेिे समय कुछ िथ्य या
कारकों को ध्यान में रिने को उपेक्षा की है,
स्जसके र्लथिरुप अभ्यिी द्िारा िथ्यों को छुपाने
या असत्य जानकारी िेने के कृत्य की उपेक्षा या
त्रुदट को क्षमा ककया जा सकिा है। ऐसे
आपराचधक मामले स्जसके अंिगथि छोटे अपराध
या ऐसे अपराध स्जसकी प्रकृति मामूली हो और
यदि आिेिनपत्र प्रथिुि करिे समय ककसी
लंबबि मामले की जानकारी नहीं हो ि बाि में
उसकी जानकारी प्राप्ि होिी है िो अपराध की
गंभीरिा पर वििार करके तनयोक्िा द्िारा उचिि
तनणथय ललया जा सकिा है, इसके अतिररक्ि
तनयोक्िा, अभ्यिी के पूिथ रहन सहन का भी
संज्ञान ले सकिा है और मामले की वििेष
पररस्थितियों का ध्यान भी रि सकिा है।
उपरोक्ि मापिण्डों को अगर ििथमान प्रकरण
के िथ्य ि पररस्थितियों में लागू ककया जाये िो
यह विदिि होिा है कक ििथमान प्रकरण में,

(i) यह नहीं कहा जा सकिा है कक अभ्यिी
को प्रिम थिर पर आिेिन पत्र भरिे समय
उसके विरुद्ध एन0सी0आर0 के पंजीकरण की
सूिना िी। अिः उसने उक्ि िथ्य को जानबूझ
कर नहीं छुपाया िा।

(ii) आिेिन प्रपत्र भरने केमाह के भीिर
अभ्यिी ने उसके विरुद्ध एक एन0सी0आर0
पंजीकृि है, इस िथ्य की जानकारी सक्षम
अचधकारी को िे िी िी। बाि में सुलहनामा होने
की सूिना भी प्रेवषि कर िी िी।

(iii)
एन0सी0आर0
धारा
323/504
भा0िं0सं0 के अंिगथि पंजीकृि हुई िी। धारा
323 में िखणथि अपराध स्जसमें िोष लसद्ध होने
पर एक साल िक की सजा ि रु0 1000 िक
का जुमाथना लगाया जा सकिा है ििा धारा 504
में िखणथि अपराध में िोष लसद्ध होने पर 2 िषथ
िक की सजा ि जुमाथने का प्रािधान है। अिः यह
अपराध मामूली अपराध की श्रेणी में आयेंगे न
की ककसी संगीन अपराध की श्रेणी में। पत्रािली
के पररिीलन से यह िथ्य पररलक्षक्षि नहीं होिा है
कक प्रकरण में कोई उपहति काररि की गयी िी
या लोक िांति भंग की संभािना उत्पन्ना हुई िी।

(iv) इसके अतिररक्ि प्रकरण की वििेष
पररस्थितियों में कक, अभ्यिी नेमास के भीिर ही
एन0सी0आर0 की जानकारी तनयोक्िा को
प्रेवषि कर िी िी ि अभ्यिी ि लिकायकिाथ के
मध्य सुलहनामे का िथ्य भी सक्षम प्राचधकारी को
िे दिया गया िा स्जसका स्जलाचधकारी ने संज्ञान
लेिे हुए, अभ्यिी के पक्ष में ियन हेिु संथिुति भी
कर िी िी। अभ्यिी के पूिथ रहन सहन को िेिा
जाये िो उसके विरुद्ध उक्ि एन0सी0आर0 के
अतिररक्ि कोई और आपराचधक मामला िजथ
नहीं हुआ है। अिः अभ्यिी का कृि सद्भािना
पूणथ रहा।

(v) आक्षेवपि आिेि के पररिीलन से यह
भी विदिि है कक आिेि में उपरोक्ि िखणथि
लसद्धान्िों ि प्रकरण के िथ्यों ि पररस्थितियों का
सही संज्ञान नहीं ललया गया है ि ििथमान प्रकरण
की िुलना ककसी अपराध के वििारण से कर,
गलिी की है, क्योंकक जबकक ििथमान प्रकरण में
एन0सी0आर0 पंजीकृि होने के उपरान्ि
सुलहनामा हो गया िा, अिः अग्रसर कोई
कायथिाही नहीं हुई है। अिः आक्षेवपि आिेि
िथ्यों ि विचधक दृस्ष्टकोण से न्यायसंगि नहीं है।

तनष्कषथ:-

5. उपरोक्ि विश्लेषण के र्लथिरुप
पुललस अधीक्षक, अम्बेडकर नगर द्िारा पाररि
आक्षेवपि आिेि दिनांक 27.02.2019 तनरथि
करने योग्य है, अिः तनरथि ककया जािा है ििा
विपक्षीगण को आिेलिि ककया जािा है कक िो
अभ्यिी/याचिकाकिाथ (सोनू यािि) को अविलम्ब
738 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
प्रलिक्षण की अनुमति प्रिान करें। इस तनिेि के
साि ििथमान आज्ञापत्र याचिका थिीकार ि
अंतिम रुप से तनथिाररि की जािी है।
----------
(2021)01ILR A738
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: ALLAHABAD 14.12.2020

BEFORE

THE HON'BLE PRAKASH PADIA, J.

Writ-A No. 5259 of 2020

Bindresh Singh ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Sri Siddharth Khare

Counsel for the Respondents:
C.S.C.

A.
Service
law
-
Selection
on
the
Constable post - Failure to submit O.B.C.
Certificate - Effect - Held, merely for the
reason that O.B.C. certificate was not
submitted by the petitioner within the
time,
the
authorities
would
not
be
justified
in
denying
petitioner's
consideration for appointment in O.B.C.
category - If a person belonging to a
reserve category, a certificate issued by
the competent authority to this effect is
only affirmation of the fact which is
already in existence - The purpose of such
certificate is enable the authorities to
believe in the assertion of the candidate
that he belongs to a reserved category.
(Para 13)
Writ Petition allowed. (E-1)
Cases relied on :-
1. Ram Kumar Gijroya Vs Delhi Subordinate
Services Selection Board reported in (2016) 4
SCC 754.
2. Special Appeal No. 762 of 2016, Arvind
Kumar
Yadav
Vs
U.P.
Recruitment
and
Promotion Board & ors. decided on 05.12.2016
3. Special Appeal No.156 of 2017 (Gaurav
Sharma Vs State of U.P. & ors.) decided on
04.05.2017
4. Seema Kumari Sharma Vs St. of H.P. (1998)
9 SCC 128

(Delivered by Hon'ble Prakash Padia, J.)

1. Heard Sri Siddharth Khare, learned
counsel for the petitioner and learned
Standing Counsel for the respondents.

2. The petitioner has preferred the
present writ petition with the prayer to
direct
the
respondents-authorities
to
consider the candidature of the petitioner
under OBC category and to undertake
follow up proceeding for appointment of
the petitioner on the post of Constable
pursuant
to
the
advertisement
dated
16.11.2018..

3. Facts in brief as contained in the
writ petition are that an advertisement was
issued by the respondents on 16.11.2018
inviting applications for the post of
constable in Civil Police and Provincial
Armed Constabulary (in short "P.A.C.").
The process of selection comprises of
written examination followed by the
document
verification
and
physical
standard
test
which
is
subsequently
followed by physical efficiency test and
medical examination.

4. The petitioner is an O.B.C.
candidate and pursuant to the aforesaid
advertisement, he applied for the post of
constable. An admit card was issued by the
respondents permitting the petitioner to
appear in the written examination which
was held on 28.1.2019. The petitioner duly