# Suresh Singh Yadav v. State of U.P. & Ors. 532 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

- **Citation:** (2024) 1 ILRA 531
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-01-05
- **Case number:** Habeas Corpus Writ Petition No. 220 of 2023
- **Bench:** Mrs. Sangeeta Chandra, Narendra Kumar Johari
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/suresh-singh-yadav-v-state-of-u-p-ors-532-indian-law-reports-allahabad-series-51374
- **Pages:** 30

## Headnote

G.A., A.S.G.I., Ishan Baghel

(अ) र्ौजदारी कानून - िारिीय दिंर् प्रकक्रया सिंकहिा
,1973 - िारा 161, िारिीय दिंर् सिंकहिा, 1860 -
िारा 120-B, 142, 143, 153-A, 295, 295-A,
298, 504, 504 (2) एििं 506 - राष्ट्रीय सुरक्षा
अधिधनयम,
1980
-
िारा
3(2),3(4),3(5),4,5,12(1) - सिंवििान के अनुच्छे
द 21 में ककसी नार्ररक को प्रदत्त दैकहक स्िििंत्रिा का
मौधलक अधिकार उसे आत्यिंधिक (Absolutely) रूप
से प्रदत्त नहीिं ककया र्या है, िरन यह स्िििंत्रिा विधि के
प्राििानों से शाधसि होिी है - Liberty of an
individual has to be subordinated, within
reasonable bounds, to the good of the
people. Security of State, maintenance of
public order and services essential to the
community, prevention of smuggling and
blackmarketing activities, etc. demand
effective
safeguards
in
the
larger
interests of sustenance of a peaceful
democratic way of life. (पैरा - 59,60)

(ब) िारि का सिंवििान, 1950 - ककसी व्यवक्त की
व्यवक्तर्ि स्िििंत्रिा का अधिकार हमारे सिंवििान द्वारा
ईष्याग से सिंरजक्षि है, लेककन यह स्िििंत्रिा धनरपेक्ष नहीिं
है और इसे ऐसी र्धिविधियों में धलि होने के धलए
लाइसेंस के रूप में नहीिं समझा जाना चाकहए जो
समुदाय या समाज को आिश्यक सेिाओिं और आपूधिग
से र्लि और अन्यायपूणग रूप से ििंधचि करिी हैं -
समि रूप से समाज का अधिकार, अपनी प्रकृधि से,
ककसी व्यवक्त के अधिकार की िुलना में बहुि अधिक
महत्िपूणग है - दोनों अधिकारों के बीच र्कराि के
मामले में, व्यवक्त के अधिकार को हमारे सिंवििान द्वारा
समाज के व्यापक कहि में उधचि प्रधिबिंिों के अिीन
ककया जािा है।(पैरा - 59)

आपराधिक षर्यिंत्र - सािगजधनक स्र्थल पर रामचररि
मानस की प्रधियािं र्ाडकर ि उन्हें पैरों से कुचलिे हुए
जला कदया र्या - रामचररि मानस ि रामचररि मानस
के अनुयाधययों पर अिर कर्प्पणी िी की र्ई - जजनसे
आम जनमानस में अत्यिंि आक्रोश र्ैल र्या ि लोक
व्यिस्र्था धछन्न-धिन्न हो र्ई (पैरा - 2,3,4,)

धनणगय:- याची ने अपने सहयोधर्यों के सार्थ,
सािगजधनक स्र्थल पर, कदन के प्रकाश में, समाज के
बहुसिंख्यक िर्ग द्वारा उनकी िाधमगक मान्यिाओिं ि
आस्र्था के अन्िर्गि आराधिि िर्िान राम के, जीिन
के घर्नाक्रम से सिंबिंधिि िमग ििंर्थ रामचररि मानस
का जजस प्रकार से अपमान ककया है, उससे समाज में
आक्रोश ि र्ुस्से का उत्पन्न होना स्िािाविक है,
समाज में िाधमगक उन्माद ि आक्रोश र्ैलने की जस्र्थधि
का पररदृश्य में आ सकना, ििगमान जस्र्थधि में
विशेषकर जहािं मोबाइल फोन ि सोशल मीकर्या से
समाज का लर्िर् प्रत्येक व्यवक्त जुडा हुआ है,
स्िािाविक प्रिीि होिा है। अिः ऐसी जस्र्थधि में
जबकक
आसन्न
खिरे
को
देखिे
हुए
कायगपाधलका/प्रशासन द्वारा याची को धनरुवद्ध आदेश
कदनािंक 08.02.2023 के जररए धनरुद्ध ककया र्या है,
इसे याची के व्यवक्तर्ि स्िििंत्रिा का अयुवक्तयुक्त ि
विधि विरुद्ध प्रधिबिंि नहीिं माना जा सकिा है।(पैरा -
61)

याधचका धनरस्ि की जािी है। (E-7)

उद्धृि मामलों की सूची :-

## Text

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1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
531
the two rights, the individual's right is
subjected
by
our
Constitution
to
reasonable restrictions in the larger
interests of the society."

62. इसी अनुक्रम में State of
Maharastra and Others Vs. Bhaurao
Punjabrao Gawande (2008) 3 SCC 613 के
प्रस्िर 36 में माननीय उच्चिम न्यायालय ने
यह िाररि ककया है ककः-

"36. Liberty of an individual has to be
subordinated, within reasonable bounds, to
the good of the people. The framers of the
Constitution were conscious of the practical
need of preventive detention with a view to
striking a just and delicate balance between
need and necessity to preserve individual
liberty and personal freedom on the one hand
and security and safety of the country and
interest of the society on the other hand.
Security of State, maintenance of public order
and services essential to the community,
prevention of smuggling and blackmarketing
activities, etc. demand effective safeguards in
the larger interests of sustenance of a
peaceful democratic way of life."

63. हस्िर्ि प्रकरण में याची ने अपने
सहयोधर्यों के सार्थ, सािगजधनक स्र्थल पर, कदन
के प्रकाश में, समाज के बहुसिंख्यक िर्ग द्वारा
उनकी िाधमगक मान्यिाओिं ि आस्र्था के
अन्िर्गि आराधिि िर्िान राम के, जीिन के
घर्नाक्रम से सिंबिंधिि िमग ििंर्थ रामचररि मानस
का जजस प्रकार से अपमान ककया है, उससे
समाज में आक्रोश ि र्ुस्से का उत्पन्न होना
स्िािाविक है, समाज में िाधमगक उन्माद ि
आक्रोश र्ैलने की जस्र्थधि का पररदृश्य में आ
सकना, ििगमान जस्र्थधि में विशेषकर जहािं
मोबाइल फोन ि सोशल मीकर्या से समाज का
लर्िर् प्रत्येक व्यवक्त जुडा हुआ है, स्िािाविक
प्रिीि होिा है। अिः ऐसी जस्र्थधि में जबकक
आसन्न
खिरे
को
देखिे
हुए
कायगपाधलका/प्रशासन द्वारा याची को धनरुवद्ध
आदेश कदनािंक 08.02.2023 के जररए धनरुद्ध
ककया र्या है, इसे याची के व्यवक्तर्ि स्िििंत्रिा
का अयुवक्तयुक्त ि विधि विरुद्ध प्रधिबिंि नहीिं
माना जा सकिा है।

इस प्रकार से प्रकरण के िथ्य ि
पररजस्र्थधियों एििं पत्रािली में उपलब्ि साक्ष्य की
विधि के प्रावििानों ि मा० उच्चिम न्यायालय
द्वारा प्रधिपाकदि विधिक धसद्धािंिों के पररपेक्ष्य में
उपरोक्तानुसार
वििेचना
के
उपरािंि
इस
न्यायालय
के
सुविचाररि
धनष्कषागनुसार
हस्िर्ि याधचका बलहीन होने के कारण धनरस्ि
होने योग्य है।

64. िदनुसार, याधचका धनरस्ि की जािी
है।
----------
(2024) 1 ILRA 531
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: LUCKNOW 05.01.2024

BEFORE

THE HON'BLE MRS. SANGEETA CHANDRA, J.
THE HON'BLE NARENDRA KUMAR JOHARI, J.

Habeas Corpus Writ Petition No. 220 of 2023

Suresh Singh Yadav ...Petitioner
Versus
State of U.P. & Ors. ...Respondents
532 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Counsel for the Petitioner:
Ram Pratap Yadav

Counsel for the Respondents:
G.A., A.S.G.I., Ishan Baghel

(अ) र्ौजदारी कानून - िारिीय दिंर् प्रकक्रया सिंकहिा
,1973 - िारा 161, िारिीय दिंर् सिंकहिा, 1860 -
िारा 120-B, 142, 143, 153-A, 295, 295-A,
298, 504, 504 (2) एििं 506 - राष्ट्रीय सुरक्षा
अधिधनयम,
1980
-
िारा
3(2),3(4),3(5),4,5,12(1) - सिंवििान के अनुच्छे
द 21 में ककसी नार्ररक को प्रदत्त दैकहक स्िििंत्रिा का
मौधलक अधिकार उसे आत्यिंधिक (Absolutely) रूप
से प्रदत्त नहीिं ककया र्या है, िरन यह स्िििंत्रिा विधि के
प्राििानों से शाधसि होिी है - Liberty of an
individual has to be subordinated, within
reasonable bounds, to the good of the
people. Security of State, maintenance of
public order and services essential to the
community, prevention of smuggling and
blackmarketing activities, etc. demand
effective
safeguards
in
the
larger
interests of sustenance of a peaceful
democratic way of life. (पैरा - 59,60)

(ब) िारि का सिंवििान, 1950 - ककसी व्यवक्त की
व्यवक्तर्ि स्िििंत्रिा का अधिकार हमारे सिंवििान द्वारा
ईष्याग से सिंरजक्षि है, लेककन यह स्िििंत्रिा धनरपेक्ष नहीिं
है और इसे ऐसी र्धिविधियों में धलि होने के धलए
लाइसेंस के रूप में नहीिं समझा जाना चाकहए जो
समुदाय या समाज को आिश्यक सेिाओिं और आपूधिग
से र्लि और अन्यायपूणग रूप से ििंधचि करिी हैं -
समि रूप से समाज का अधिकार, अपनी प्रकृधि से,
ककसी व्यवक्त के अधिकार की िुलना में बहुि अधिक
महत्िपूणग है - दोनों अधिकारों के बीच र्कराि के
मामले में, व्यवक्त के अधिकार को हमारे सिंवििान द्वारा
समाज के व्यापक कहि में उधचि प्रधिबिंिों के अिीन
ककया जािा है।(पैरा - 59)

आपराधिक षर्यिंत्र - सािगजधनक स्र्थल पर रामचररि
मानस की प्रधियािं र्ाडकर ि उन्हें पैरों से कुचलिे हुए
जला कदया र्या - रामचररि मानस ि रामचररि मानस
के अनुयाधययों पर अिर कर्प्पणी िी की र्ई - जजनसे
आम जनमानस में अत्यिंि आक्रोश र्ैल र्या ि लोक
व्यिस्र्था धछन्न-धिन्न हो र्ई (पैरा - 2,3,4,)

धनणगय:- याची ने अपने सहयोधर्यों के सार्थ,
सािगजधनक स्र्थल पर, कदन के प्रकाश में, समाज के
बहुसिंख्यक िर्ग द्वारा उनकी िाधमगक मान्यिाओिं ि
आस्र्था के अन्िर्गि आराधिि िर्िान राम के, जीिन
के घर्नाक्रम से सिंबिंधिि िमग ििंर्थ रामचररि मानस
का जजस प्रकार से अपमान ककया है, उससे समाज में
आक्रोश ि र्ुस्से का उत्पन्न होना स्िािाविक है,
समाज में िाधमगक उन्माद ि आक्रोश र्ैलने की जस्र्थधि
का पररदृश्य में आ सकना, ििगमान जस्र्थधि में
विशेषकर जहािं मोबाइल फोन ि सोशल मीकर्या से
समाज का लर्िर् प्रत्येक व्यवक्त जुडा हुआ है,
स्िािाविक प्रिीि होिा है। अिः ऐसी जस्र्थधि में
जबकक
आसन्न
खिरे
को
देखिे
हुए
कायगपाधलका/प्रशासन द्वारा याची को धनरुवद्ध आदेश
कदनािंक 08.02.2023 के जररए धनरुद्ध ककया र्या है,
इसे याची के व्यवक्तर्ि स्िििंत्रिा का अयुवक्तयुक्त ि
विधि विरुद्ध प्रधिबिंि नहीिं माना जा सकिा है।(पैरा -
61)

याधचका धनरस्ि की जािी है। (E-7)

उद्धृि मामलों की सूची :-

1. महाराष्ट्र राज्य और अन्य बनाम िाऊराि पिंजाबराि
र्िािंर्े, (2008) 3 एससीसी 613

2. अरुण घोष बनाम पजिम बिंर्ाल राज्य, 1970.1
एससीसी 1998

3. राम रिंजन चर्जी बनाम पजिम बिंर्ाल राज्य,
(1975) 4 एससीसी 143

4. इिंरदेि महिो बनाम पजिम बिंर्ाल राज्य, (1973) 4
एससीसी 4
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
533
5. इब्राकहम नजीर बनाम िधमलनार्ु राज्य और दूसरा,
(2006) 6 एससीसी 64

6. खुदीराम दास बनाम पजिम बिंर्ाल राज्य, (SCC pp.
90-91, para 8)

7. सूरज पाल साहू बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य,
(1986) 4 एससीसी 378

8. िारि सिंघ बनाम अरवििंद शेरधर्ल, (2000) 7
एससीसी 601

9. मर्न र्ोप बनाम पजिम बिंर्ाल राज्य, (1975) 1
एससीसी 415

10. पिंजाब राज्य बनाम सुखपाल धसिंह, (1990) 1
एससीसी 35

11. सरबजीि धसिंह मोख बनाम जजला मजजस्रेर्,
जबलपुर और अन्य, 2021 एससीसी ऑनलाइन एससी
1019

(Delivered by Hon'ble Narendra Kumar
Johari, J.)

1. हस्िर्ि याधचका में याची सुरेश धसिंह यादि
द्वारा अपने पैरोकार/पत्नी सीिा देिी के द्वारा
धनम्नधलजखि अनुिोष के सार्थ प्रस्िुि की र्ई
हैः-

"(i) issue a writ Habeas Corpus in the
nature of Habeas Corpus directing the
respondents
to
release
the
petitioner/detenue forthwith.

(ii) issue a writ Habeas Corpus in the
nature of Certiorari quashing the impugned
detention order dated 16.2.2023 passed by
the District Magistrate, Lucknow i.e.
opposite party No. 4 as well as order dated
24.2.2023 and 27.3.2023 passed by the
opposite party No. 3 as contained in
Annexure No. 1,2 & 3 respectively and
rejection order dated 28.2.2023 passed by
the District Magistrate, Lucknow i.e.
opposite party No. 4 as contained in
Anexure No. 7 to this writ petition as well
as the entire consequential proceedings and
orders with respect to the detention of the
petitioner

(iii) issue a writ, order or direction in
any nature which this Hon'ble Court may
deem
fit
and
proper
under
the
circumstances of the case.

(iv) allow the writ petition with cost in
favour of the petitioner/detenue."

2. सिंक्षेप में प्रकरण के िथ्य धनम्निि
हैंः-

कदनािंक 29.01.2023 को समय 23:47
बजे िादी सिनाम धसिंह लिी ने र्थाना
पी०जी०आई लखनऊ में प्रर्थम सूचना ररपोर्ग
अन्िर्गि िारा 120-B, 142, 143, 153-A,
295, 295-A, 298, 504, 504 (2) एििं 506
िारिीय दडर् सिंकहिा इस आशय से अिंककि
करिाई की, आज कदनािंक 29.01.2023 को
समय लर्िर् 9:00 बजे, पूिग सुधनयोजजि
योजना के अनुसार ि एक आपराधिक षर्यिंत्र
के अन्िर्गि स्िामी प्रसाद मौयग के द्वारा
रामचररि
मानस
के
प्रधि
ककए
र्ए
अपमानजनक कर्प्पणी के समर्थगन में ि उनकी
शह पर देिेंर प्रिाप यादि, यशपाल धसिंह लोिी,
सिेन्र कुशिाहा, महेन्र प्रिाप यादि, सुजीि
यादि, नरेश धसिंह, एस.एस यादि, सिंिोष िमाग,
सलीम ि अन्य कुछ अज्ञाि व्यवक्तयों द्वारा,
आिास विकास ऑकर्स सेक्र्र-9 के पास, नई
534 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
रोर्िेज र्ेर् पर रामचररि मानस की प्रधियािं
र्ाडकर सािगजधनक स्र्थान पर पैरों से कुचलिे
हुए जला कदया र्या ि स्िामी प्रसाद मौयाग के
समर्थगन में नारेबाजी की र्ई िर्था रामचररि
मानस ि इसके अनुयाधययों पर अिर कर्प्पणी
की र्ई, जजससे िहाूँ आक्रोश र्ैल र्या ि
अर्ल-बर्ल के लोर् आक्रोधशि होकर इकट्ठा
होने लर्े। अिेिर िादी प्रर्थम सूचनाकिाग ने
यह िी अिंककि ककया है कक "मैं िी मौके पर
मौजूद र्था िर्था मैंने िी आपवत्त ककया र्था,
लेककन ये लोर् नहीिं माने और मुझे िी
िमकाया।"

उपयुगक्त लोर्ों के द्वारा एक समुदाय की
िािना को आहि करने, साम्प्रदाधयक दिंर्े,
िर्ग-विद्वेष र्ैलाने, कहिंसा के धलए उकसाने,
लखनऊ िर्था राज्य की लोक व्यिस्र्था ि
कानून व्यिस्र्था को खराब करने ि माहौल
वबर्ाडने के धलए जानबूझकर उक्त कृत्य ककया
र्या है जजससे आम जनमानस में अत्यिंि
आक्रोश व्याि है। अिेिर िादी ने यह िी कर्थन
ककया है कक, "मैंने पुधलस को िी सूचना दी है।
इन लोर्ों के द्वारा उक्त कृत्य देश ि समाज के
अमन ि िाईचारे के पूणगिः प्रधिकूल है ि
अराजकिा र्ैलाने के उद्देश्य से ककया र्या है।
अिः समुधचि कायगिाही की जाए।"

3. ित्पिाि पुधलस द्वारा सकक्रय होकर ि
ित्परिा से याची देिेंर प्रिाप यादि ि यशपाल
धसिंह ि अन्य िीन अधियुक्तर्ण को धर्रफ्िार
ककया र्या। कदनािंक 01.02.2023 को वििेचक
द्वारा अधियुक्त/याची देिेंर प्रिाप यादि के घर
से ि उसकी धनशानदेही पर घर्ना से सिंबिंधिि
एक मोबाइल र्ोन (Samsung) को कब्जे में
धलया र्या सार्थ ही उक्त कदनािंक 01.02.2023
को ही पुधलस द्वारा याची/अधियुक्त की
धनशानदेही पर "अनिंि स्र्ेशनरी" िृन्दािन
सेक्र्र-2 जस्र्थधि दुकान से एक रेर्मी मोबाइल
र्ोन, जजसके सम्बिंि में कहा र्या है कक उक्त
मोबाइल र्ोन पर मिंर्िाए र्ए रामचररि
मानस की प्रधियों को उक्त दुकान से वप्रिंर् कराया
र्या र्था एििं पुधलस ने सम्बिंधिि वप्रिंर्र को िी
उक्त दुकान से अपने कब्जे में धलया िर्था इन
सब बरामद िस्िुओिं की र्दग बरामदर्ी
(Recovery memo) िी िैयार की।

4. याची/अधियुक्त द्वारा ककये र्ये उक्त
कृत्य के सिंबिंि में कदनािंक 16.02.2023 को
प्रिारी धनरीक्षक, र्थाना पी०जी०आई० लखनऊ
ने पुधलस उपायुक्त (पूिी) लखनऊ को अपनी
आख्या प्रस्िुि की, जजसमें यह अिंककि ककया
र्या है कक याची सुरेश धसिंह यादि, देिेंर प्रिाप
यादि, यशपाल धसिंह ि अन्य के द्वारा आिास
विकास ऑकर्स सेक्र्र-9 के पास, सािगजधनक
स्र्थल पर रामचररि मानस की प्रधियािं र्ाडकर
ि उन्हें पैरों से कुचलिे हुए जला कदया र्या
िर्था रामचररि मानस ि रामचररि मानस के
अनुयाधययों पर अिर कर्प्पणी िी की र्ई,
जजनसे आम जनमानस में अत्यिंि आक्रोश र्ैल
र्या ि लोक व्यिस्र्था धछन्न-धिन्न हो र्ई।
जब िीड इकट्ठा होने लर्ी िब उक्त लोर्
िमकी देिे हुए एििं नारेबाजी करिे हुए िार्
र्ए। अधियुक्तर्ण ने सुधनयोजजि योजना के
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
535
अन्िर्गि लखनऊ कधमश्नरेर् ि प्रदेश को कहिंसा
की आर् में झोंकने के धलए उक्त कृत्य को
काररि करिे हुए, उनका िीकर्यो िी बनाया र्था,
िाकक उसे प्रसाररि कर प्रदेश को कहिंसा की
आर् में झोंक सकें। प्रिारी धनरीक्षक ने
अिेिर यह िी अिंककि ककया है कक, समय
लर्िर् 13:34 बजे के आसपास सोशल
मीकर्या पर उक्त िीकर्यो िायरल होने लर्ी।
िीकर्यो प्रसाररि होने पर एक समुदाय में
आक्रोश और क्षुब्ििा बढनी शुरू हो र्यी र्थी।
िथ्य की जानकारी होने पर प्रिारी धनरीक्षक
द्वारा उप-धनरीक्षक चन्रिान िमाग को र्थाने से
रिाना ककया र्या। राि होिे-होिे माहौल
कार्ी र्मग हो र्या र्था। लोर् िरह-िरह की
चचागएिं करने लर्े र्थे। ऐसा लर् रहा र्था कक इस
कृत्य में कोई र्हरा षर्यिंत्र ि साजजश है।
अधियुक्तों को धचकिि करने के धलए अलर्-
अलर् र्थाने से पुधलसबल की र्ीमें रिाना की
र्ईं ि सिी चौकी प्रिाररयों ि र्थाने की र्ोसग
को सिकगिा बरिने हेिु क्षेत्र में िेजा र्या ि
सिकग रहने के धनदेश िी कदए र्ए। क्षेत्र की
पालीर्ान को िी लोर्ों को समझाने बुझाने में
लर्ाया र्या। देर राि होिे-होिे अधियुक्तों
द्वारा ककए र्ए इस कृत्य के िायरल िीकर्यो से
उक्त र्थाना क्षेत्र में चारों िरर् सनसनी ि
िनाि का माहौल व्याि हो र्या ि सामान्य
जनजीिन अस्ि-व्यस्ि हो र्या। र्थाना क्षेत्र में
सिंिेदनशीलिा लर्ािार बढिी जा रही र्थी,
जजस पर अर्ल-बर्ल के र्थानाध्यक्षों को क्षेत्र
में पहुूँचने ि र्ोसग िेजने ि अधिररक्त सिकगिा
बरिने के धलए अनुरोि ककया र्या।

5. घर्ना िाले कदन राि में ही याची सुरेश
धसिंह यादि ि अन्य अधियुक्तर्ण देिेंर प्रिाप
यादि ि सिेंर कुशिाहा आकद को धर्रफ्िार
ककया र्या। र्थाना प्रिारी ने यह िी कर्थन
ककया है कक पुधलस द्वारा ककसी प्रकार से जस्र्थधि
को धनयिंत्रण में लाया जा सका र्था, लेककन
िनाि लर्ािार बरकरार रहा है। आििंकर्ि
अधिररक्त पुधलस र्ोसग को एस०पी० कायागलय
कैंर् में रोका र्या र्था। क्षेत्र में िारी पुधलस बल
का पैदल माचग िी सिंिेदनशील स्र्थानों पर
कराया र्या। आख्या में र्थाना प्रिारी ने अिेिर
यह िी अिंककि ककया है कक,
मैं ि
उच्चाधिकारीर्ण भ्रमण पर रहकर लोर्ों को
समझािे बुझािे रहे। अिी-िी क्षेत्र में िनाि
बना हुआ है। विधिन्न समाचारपत्रों िर्था
इलेक्राधनक चैनलों ने िी उक्त खबर को
लर्ािार प्रमुखिा से प्रसाररि ककया है। पुधलस
के द्वारा एक्सपर्ग के माध्यम से िी िीकर्यो का
प्रसारण/पररचालन को रोकने का प्रयास ककया
र्या। याची ि अन्य सह अधियुक्तर्ण अपना
जुमग स्िीकार करिे हुए उक्त जघन्य कृत्य को
आर्े िी जारी रखने की बाि कह रहे हैं। प्रकरण
में राज्य ि देश के अमनचैन में खलल र्ालने
िाली बाहरी एजेंधसयों के सिंधलििा की िी
सम्िािना कदख रही है और यकद पुधलस द्वारा
िात्काधलक िौर पर ित्परिापूिगक कारगिाई न
की र्ई होिी िो देश ि प्रदेश दिंर्े की चपेर् में
िी आ सकिा र्था। र्थाना प्रिारी ने यह िी
अिंककि ककया है कक, याची/अधियुक्त सुरेश धसिंह
यादि ने उक्त अपराि सिंख्या 75 सन 2023 में
जमानि हेिु मुख्य न्याधयक मजजस्रेर् लखनऊ
536 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
के समक्ष जमानि प्रार्थगना पत्र प्रस्िुि ककया र्था
जो न्यायालय द्वारा धनरस्ि कर कदया र्या है,
परन्िु याची ने पुनः सत्र न्यायालय में जमानि
प्रार्थगना पत्र प्रस्िुि कर कदया है और जमानि
पर छूर्ने का हर सम्िि प्रयास कर रहा है।
उसके जमानि पर छूर्ने की प्रबल सम्िािना
है। यह िी सुधनजिि है कक जमानि पर छूर्ने
पर िह पुनः इसी प्रकार के आपराधिक कृत्यों में
धलि हो जाएर्ा। अिः अधियुक्त सुरेश धसिंह
यादि को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिधनयम की िारा
3(2)
के
अन्िर्गि
धनरुद्ध
करने
हेिु
धनरोिात्मक
प्राधिकारी/जजला
मजजस्रेर्
लखनऊ से अनुरोि करने की कृपा की जाए।

6. ित्क्रम में सहायक पुधलस आयुक्त,
(कैंर्) कधमश्नरेर्, लखनऊ के द्वारा िी प्रिारी
धनरीक्षक र्थाना पी०जी०आई० लखनऊ की उक्त
आख्या कदनािंककि 16.02.2023 से सहमि होिे
हुए उक्त आख्या को पुधलस उपायुक्त (पूिी)
लखनऊ को कदनािंक 16.02.2023 को ही
अिसाररि कर कदया।

7. पुधलस उपायुक्त (पूिी) लखनऊ ने िी
प्रिारी धनरीक्षक र्थाना पी०जी०आई० की
आख्या कदनािंक 16.02.2023 से सहमि होिे
हुए याची सुरेश धसिंह यादि को राष्ट्रीय सुरक्षा
अधिधनयम की िारा 3(2) के अन्िर्गि धनरुद्ध
ककये जाने हेिु, धनरोिादेश पाररि करने के
अनुरोि
के
सार्थ
अपनी
आख्या
कदनािंककि16.02.2023जजला
मजजस्रेर्
लखनऊ को प्रेवषि कर कदया, जजसमें पुधलस
उपायुक्त (पूिी) लखनऊ ने याची सुरेश धसिंह
यादि ि उसके सहयोधर्यों द्वारा ककए र्ए
कृत्य, िायरल कराए र्ए िीकर्यो ि इस घर्ना
का जनमानस पर असर पडने के िथ्य ि लोक
व्यिस्र्था धछन्न-धिन्न होने की जस्र्थधि को
देखिे हुए, पुधलस के व्यापक प्रबिंि के िथ्य को
विस्िृि रूप से अिंककि, करने के सार्थ ही सार्थ
यह िी अिंककि ककया है कक उक्त सुरेश धसिंह
यादि न्याधयक अधिरक्षा में है और उसने
जमानि हेिु प्रार्थगना पत्र िी प्रस्िुि कर रखा है,
जजसके शीघ्र ही स्िीकार ककए जाने की
सम्िािना है और यकद िह जमानि पर धनमुगक्त
हो र्या िो पुनः इसी प्रकार की आपराधिक
र्धिविधियों में धलि हो जाएर्ा।

8. जजला मजजस्रेर् लखनऊ ने प्रिारी
धनरीक्षक र्थाना पी०जी०आई० ि पुधलस उपायुक्त
की आख्याओिं का सम्यक पररशीलन ि परीक्षण
करिे हुए अपनी सिंिुवष्ट को, विस्िार से, धनरुवद्ध
के आिार कदनािंक 16.02.2023 में उललेख
करिे हुए याची सुरेश धसिंह यादि को राष्ट्रीय
सुरक्षा अधिधनयम (जजसे अिेिर 'अधिधनयम'
अिंककि ककया र्या है) की िारा 3 (2) के
अन्िर्गि जजला कारार्ार लखनऊ में धनरुद्ध
ककए
जाने
हेिु
धनरोिादेश
कदनािंक
16.02.2023 को पाररि कर कदया।

9. जजला मजजस्रेर् लखनऊ/प्रधिपक्षी
सिंख्या 4 ने उक्त कदनािंक 16.02.2023 को ही
धनरोिादेश, धनरुवद्ध के आिार, ि प्रकरण से
सिंबिंधिि
समस्ि
प्रलेजखय
साक्ष्य
बिौर
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
537
सिंलग्नक सूची, कार्जाि क्रमािंक 1 से 15
(जजसे याची ने अपनी याधचका में 'सिंलग्नक' के
िौर पर सिंलग्न ककया है), याची पर िामीली हेिु
प्रधिपक्षी सिंख्या 6/जेल अिीक्षक लखनऊ को
प्रेवषि ककया, जहािं याची अपराि सिंख्या 75
सन 2023 में धनरुद्ध र्था। प्रधिपक्षी सिंख्या
6/जेल अिीक्षक लखनऊ ने उक्त आदेश ि अन्य
सिंलग्न प्रपत्र, याची को कदनािंक 16.02.2023
को ही उपलब्ि करा कदए िर्था उनकी पाििी
पत्र
कदनािंककि
16.02.2023,
िी
जजला
मजजस्रेर् लखनऊ को प्रेवषि कर कदया।

10. प्रकरण में यह िथ्य िी दधशगि ककया
र्या
है
कक
याची
के
विरुद्ध
कदनािंक
29.01.2023 को अिंककि कराई र्ई प्रर्थम
सूचना ररपोर्ग मुकदमा अपराि सिंख्या 0075
सन 2023 अन्िर्गि िारा 120B, 142, 143,
153A, 295, 295A, 298, 504, 505(2) ि
506 िा०दिं०वि० में, याची का जमानि प्रार्थगना
पत्र, विशेष न्यायािीश पी०सी० एक्र् प्रर्थम
लखनऊ द्वारा कदनािंक 23.02.2023 को स्िीकार
कर धलया र्या ि याची अधियुक्त को रु०
1,00,000/- के दो स्र्थानीय जमानिों ि समान
िनराधश के व्यवक्तर्ि बिंिपत्र पर सशिग
जमानि पर धनमुगक्त करने का आदेश पाररि कर
कदया र्या।

11. धनरोिादेश कदनािंक 16.02.2023 को
अनुमोकदि ककए जाने हेिु धनरोिादेश, धनरुवद्ध
के आिार, सिंबिंधिि प्रलेखीय साक्ष्य ि उपरोक्त
के सिंदिग में अपनी आख्या, प्रधिपक्षी सिंख्या 4
जजला
मजजस्रेर्
लखनऊ
द्वारा
कदनािंक
16.02.2023 को ही उत्तर प्रदेश शासन
लखनऊ/प्रधिपक्षी सिंख्या 1 को, अनुमोदनार्थग
प्रेवषि कर कदया र्या र्था, जजसे प्रधिपक्षी सिंख्या
1 के सम्बिंधिि वििार् (Section) द्वारा कदनािंक
17.02.2023 को प्राि ककया र्या। ित्पिाि
प्रधिपक्षी
सिंख्या-1
के
द्वारा
कदनािंक
22.02.2023 को विपक्षी सिंख्या 4 द्वारा पाररि
धनरोिादेश को अनुमोकदि कर कदया र्या। इस
स्िर पर, पाूँच कदिस का समय अनुमोदन में
लर्ने के वबिंदु पर, मौजखक िकों, में विद्वान
शासकीय अधििक्ता द्वारा यह बिाया र्या कक
चूिंकक विपक्षी सिं०1 के कायागलय (सधचिालय) के
कायग 'Rules of Business' के धनयमानुसार
सिंचाधलि होिे हैं, िर्था सधचिों के विधिन्न
स्िरों (समीक्षाधिकारी, अनुसधचि, विशेष
सधचि, सधचि ि अपर मुख्य सधचि) पर
प्रकरण का अिलोकन ि परीक्षण होिा है, अिः
पाूँच कदिस का समय लर्ना अनािश्यक नहीिं है
और ककसी िी अन्य सूरि में, उक्त अनुमोदन
चूिंकक
अधिधनयम
की
िारा
3(4)
में
अधिधनयधमि ,12कदिस की विकहि अिधि के
अिंदर ही ककया र्या है, अिः विपक्षी सिंख्या 1
के द्वारा याची के धनरोिादेश को अनुमोकदि
करने में प्रधिपक्षी सिंख्या 1 के स्िर से, न िो
कोई अनािश्यक विलिंब काररि ककया र्या है
और न अधिधनयम के िारा 3 (4) का कोई
उललिंघन ही काररि ककया र्या है। प्रधिपक्षी
सिंख्या 1 द्वारा, प्रधिपक्षी सिंख्या 4 को, अपने
उक्त 'अनुमोदन आदेश' को रेकर्योिाम द्वारा
याची को सिंसूधचि करने हेिु, दो कदिस के अिंदर
538 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
ही अर्थागि कदनािंक 24.02.2023 को, प्रधिपक्षी
सिंख्या 4 के माध्यम से, प्रधिपक्षी सिंख्या 6 को
प्रेवषि कर कदया र्या र्था, जजसे कदनािंक
24.02.2023 को प्रधिपक्षी सिंख्या 6 द्वारा याची
को धनयमानुसार सिंसूधचि कर कदया र्या र्था
िर्था सिंसूचना/पाििी की आख्या कदनािंक
24.02.2023 िी प्रधिपक्षी सिंख्या 4 को प्रेवषि
कर कदया र्था।

12. विपक्षी सिंख्या 1 के द्वारा, धनरुवद्ध
आदेश कदनािंक 16.02.2023, धनरुवद्ध के आिार
कदनािंक 16.02.2023, प्रकरण से सम्बिंधिि प्रपत्र
जो उन्हें जजला मजजस्रेर् लखनऊ के द्वारा प्रेवषि
ककया र्या र्था िर्था धनरुद्धी आदेश को अपने स्िर
से अनुमोदन के आदेश कदनािंककि 22.02.2023
की प्रधियों सकहि पत्र कदनािंक 24.02.2023, र्ृह
सधचि िारि सरकार/प्रधिपक्षी सिंख्या 2 को िी
रजजस्र्र्ग पत्र कदनािंक 01.03.2023 के द्वारा प्रेवषि
कर कदया र्या र्था। (न्यायालय द्वारा आहूि ककए
र्ए मूल ररकॉर्ग के पररशीलन से यह पररलजक्षि
होिा है कक अनुमोदन आदेश पाररि होने की
धिधर्थ कदनािंक 22.02.2023को धनयमानुसार
अपिजजगि करिे हुए र्णना ककए जाने पर िर्था
कदनािंक 01.03.2023 को प्रधिपक्षी सिंख्या-1 द्वारा
उक्त अनुमोदन सम्बिंिी प्रपत्र प्रधिपक्षी सिं०2र्ृह
सधचि िारि सरकार को अनुमोदन कक धिधर्थ से 7
िें कदिस को प्रेवषि ककए जाने हेिु र्ाक से िेज
कदए जाने के िथ्य पर विचार ककए जाने पर यह
पररलजक्षि होिा है कक प्रधिपक्षी सिंख्या-1 द्वारा
अधिधनयम की िारा 3 (5) का उललिंघन नहीिं
ककया र्या है।)

13. धनरोिात्मक आदेश के विरुद्ध याची
द्वारा अपना प्रधििेदन कदनािंककि 24.02.2023,
जजला मजजस्रेर् लखनऊ, उत्तर प्रदेश शासन,
परामशगदात्री पररषद (धनरुद्धी) ि केंर सरकार को
प्रेवषि ककए जाने हेिु प्रधिपक्षी सिंख्या 6/जेल
अिीक्षक लखनऊ को कदनािंक 24.02.2023 को
प्राि कराया र्या। प्रधिपक्षी सिंख्या 6 द्वारा
कदनािंक 24.02.2023को ही, याची के उक्त
प्रधििेदन ि उसकी प्रधियों को सम्बिंधिि
प्रधिपक्षीर्ण को प्रेवषि ककए जाने हेिू प्रधिपक्षी
सिंख्या 4 को प्रेवषि कर कदया र्या र्था, िर्था
प्रेषण सिंबिंिी आख्या कदनािंक 24.02.2023 िी
जजला मजजस्रेर् लखनऊ/प्रधिपक्षी सिंख्या 4 को
प्रेवषि कर कदया र्या।

14. जजला मजजस्रेर् लखनऊ/प्रधिपक्षी
सिंख्या 4 द्वारा याची के उक्त प्रधििेदन कदनािंक
24.02.2023 पर, सम्यक विचार करिे हुए,
उसे अपने आदेश कदनािंक 28.02.2023 के द्वारा
धनरस्ि कर कदया र्या िर्था प्रधििेदन के
धनरस्िीकरण आदेश की प्रधि को जेल अिीक्षक
लखनऊ/ प्रधिपक्षी सिंख्या 6 को कदनािंक
02.03.2023 को प्राि हुई, जजसे जेल अिीक्षक
लखनऊ/प्रधिपक्षी सिंख्या 6 द्वारा कदनािंक
02.03.2023को ही, याची को धनयमानुसार
सिंसूधचि कर कदया र्या।

15. जजला मजजस्रेर् लखनऊ/प्रधिपक्षी
सिंख्या 4 द्वारा प्रेवषि याची का प्रधििेदन कदनािंक
24.02.2023मय
सम्बिंधिि
कार्जाि
ि
प्रस्िरिार आख्या, विपक्षी सिंख्या 1 को
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
539
03.03.2023 को प्राि हुई, जजसका परीक्षण,
अिंर्र सेक्रेर्री (अनु सधचि) एििं विशेष सधचि
द्वारा कदनािंक 06.03.2023 को ककया र्या।
कदनािंक 07.03.2023 ि 08.03.2023 अिकाश
के कदिस र्थे, ित्पिाि सधचि उत्तर प्रदेश
शासन द्वारा कदनािंक 09.03.2023 को ि प्रमुख
सधचि (र्ृह) उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कदनािंक
10.03.2023 को याची के प्रधििेदन का
परीक्षण ककया र्या। ित्पिाि पत्रािली को
उत्तर प्रदेश शासन के उच्चाधिकाररयों के
अिलोकन ि अिंधिम आदेश हेिु प्रस्िुि की
र्ई। 11.03.2023 ि 12.03.2023को अिकाश
र्था। उपरोक्त स्िर से प्रकरण पर सम्यक
विचारण
के
पिचाि,
उत्तर
प्रदेश
शासन/प्रधिपक्षी सिंख्या 1 द्वारा याची के
प्रधििेदन कदनािंक 24.02.2023 को, कदनािंक
13.03.2023 को धनरस्ि कर कदया र्या।
धनरस्िीकरण के उक्त आदेश को प्रधिपक्षी
सिंख्या 1 ने प्रधिपक्षी सिंख्या 6 को e-mail
कदनािंक 14.03.2023 के द्वारा प्रेवषि कर कदया,
जजसे प्रधिपक्षी सिंख्या 6 द्वारा याची को, कदनािंक
14.03.2023 को ही सिंसूधचि कर कदया र्या।

16. प्रधिपक्षी सिंख्या 1/उत्तर प्रदेश शासन
को प्रधिपक्षी सिंख्या 4 द्वारा प्रकरण से सिंबिंधिि
जो प्रपत्र ि आख्या कदनािंक 03.03.2023 को
उन्हें उपलब्ि कराया र्या र्था, उन्हें अपने पत्रों
कदनािंककि 03.03.2023 के द्वारा प्रधिपक्षी
सिंख्या 1 ने प्रधिपक्षी सिंख्या 2/ केन्रीय सरकार
ि अध्यक्ष परामशगदात्री पररषद, (धनरुवद्धयािं)
लखनऊ को प्रेवषि कर कदया र्या र्था।

17. उत्तर प्रदेश परामशगदात्री पररषद
(Advisory Board) लखनऊ ने प्रकरण की
सुनिाई करने की धिधर्थ कदनािंक 17.03.2023
धनयि ककया और प्रधिपक्षी सिंख्या 1 के
माध्यम से सिंसूधचि करिे हुए, याची से यह
िािंञ्छा की कक िह सुनिाई के समय व्यवक्तर्ि
रूप से अर्थिा अपने िाद धमत्र के द्वारा सुनिाई
में उपजस्र्थि रहना चाहिा है। परामशगदात्री
पररषद लखनऊ द्वारा, याची को सिंसूधचि ककए
जाने हेिु, अपने पत्र कदनािंककि 13.03.2023 के
जररए, प्रधिपक्षी सिंख्या 1 को प्रेवषि ककया,
जजसे
प्रधिपक्षी
सिंख्या
6
के
जररए,
समयान्िर्गि याची को सिंसूधचि कर कदया
र्या। ििक्रम में धनयि धिधर्थ पर याची ने
उ०प्र० परामशगदात्री पररषद के समक्ष प्रस्िुि
होकर अपना पक्ष रखा, जजसे सुनिाई ि
विचारण के पिचाि पररषद द्वारा धनरस्ि करिे
हुए अपनी आख्या मय प्रकरण से सम्बिंधिि
प्रपत्र, अपने पत्र कदनािंककि 21.03.2023 के
सार्थ प्रधिपक्षी सिंख्या 1/उत्तर प्रदेश शासन को
िेजा जो विपक्षी सिंख्या 1 के सम्बिंधिि वििार्
(Section) को कदनािंक 23.03.2023 को प्राि
हुआ। उपरोक्त प्रकार से परामशगदात्री पररषद
द्वारा, याची के प्रत्यािेदन का धनस्िारण, करके
आख्या धनरोिादेश के पाररि होने की धिधर्थ से
7 सिाह के अिंदर ही शासन को प्रेवषि कर कदया
र्या र्था। अिः उत्तर प्रदेश परामशगदात्री पररषद
द्वारा िी याची के प्रधििेदन के धनस्िारण ककए
जाने में, अधिधनयम के िारा 11(1) के
प्रावििान का कोई अननुपालन ककया जाना
पररलजक्षि नहीिं होिा है।
540 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

18. उपरोक्त के अनुक्रम में, प्रधिपक्षी
सिंख्या 1 द्वारा, याची के प्रधििेदन मय
प्रस्िरिार आख्या ि सम्बिंधिि अधिलेख, जो
प्रधिपक्षी सिं० 2को जररए पत्र कद० 03.03.2023
िेजा र्या र्था, िह केंर सरकार के केंरीय
रजजस्री कायागलय में कदनािंक 16.03.2023 को
प्राि हुआ। कदनािंक 17.03.2023 को अिंर्र
सेक्रेर्री
(अिर
सधचि)
द्वारा
प्राि
(पररशीलन/परीक्षण)
ककया
र्या।
कदनािंक
18.03.2023 ि 19.03.2023को अिकाश र्था।
ित्पिाि प्रधििेदन को कदनािंक 20.03.2023 को
विकहि र्ायरी में अिंककि ककया र्या और जजसे
कदनािंक 21.03.2023 को र्ृह सधचि के समक्ष
प्रस्िुि ककया र्या। र्ृह सधचि द्वारा प्रधििेदन ि
सम्बिंधिि पररपत्रों का अिलोकन ि परीक्षण
करने के उपरािंि याची के प्रत्यािेदन को कदनािंक
26.03.2023 को धनरस्ि कर कदया र्या जजसे
िापस,
वििार्/(Section)
में
कदनािंक
27.03.2023को
िेजा
र्या
जहािं
से
धनरस्िीकरण का यह आदेश की सूचना
िायरलेस मैसेज के जररए कदनािंक 28.03.2023
को प्रधिपक्षी सिं० 1 के पास िेजा र्या, जजसे कद०
30.03.2023 को, याची को, प्रधिपक्षी सिंख्या 6
द्वारा सिंसूधचि कर कदया र्या।

19. प्रधिपक्षी सिंख्या 1/उत्तर प्रदेश शासन
द्वारा, प्रकरण से सम्बिंधिि समस्ि प्रपत्रों का
अिलोकन करिे हुए, अपने आदेश कदनािंक
27.03.2023 के जररए याची के धनरुवद्धकरण
का आदेश, धनरुवद्ध की धिधर्थ से अनजन्िम रूप
से िीन माह िक की अिधि कक धलए विस्िाररि
कर कदया र्या िर्था इस आदेश को जररए
रेकर्योिाम प्रधिपक्षी सिंख्या 6/जेल अिीक्षक
को याची के सूचनार्थग उसी कदन प्रेवषि िी कर
कदया र्या, जजसे प्रधिपक्षी सिंख्या 6 ने कदनािंक
27.03.2023 को ही याची को सिंसूधचि कर
कदया और इसके र्ामगल आदेश की प्रधि,
कदनािंक 01.04.2023 को, प्रधिपक्षी सिं० 6 को
प्राि होने पर, इसे िी याची को सिंसूधचि करा
कदया र्या।

20. याची के धनरोिादेश को आदेश की
धिधर्थ से अनजन्िम रूप से छः माह िक
विस्िाररि ककए जाने के आदेश का रेकर्योिाम
कदनािंक 01.05.2023 को ि इसका र्ामगल
आदेश कदनािंक 09.05.2023 को प्रधिपक्षी
सिंख्या 6 को प्राि हुआ र्था, जजसे प्रधिपक्षी
सिंख्या 6 द्वारा प्राि होने की उक्त धिधर्थयों पर ही
याची को धनयमानुसार सिंसूधचि कर कदया
र्या।

21. उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पुनः याची के
धनरोिादेश को धनरुवद्ध की धिधर्थ से अििर 9
माह की अिधि के धलए विस्िाररि करिे हुए
विस्िारण आदेश की प्रधि को जररए रेकर्योिाम
कदनािंक 02.08.2023, प्रधिपक्षी सिंख्या 4 के
माध्यम से, विपक्षी सिंख्या 6/जेल अिीक्षक
लखनऊ को िेजा र्या, जजसे प्रधिपक्षी सिंख्या
6 ने याची को उसी कदन सिंसूधचि कर कदया।
ित्पिाि उक्त विस्िारण आदेश का र्ामगल
आदेश प्राि होने पर इसे िी प्रधिपक्षी सिंख्या 6
द्वारा याची को सिंसूधचि कर कदया र्या र्था।
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
541

22. याधचका में याधचका के आिार के
समर्थगन में प्रस्िुि शपर्थ पत्र के प्रत्युत्तर में,
प्रधिपक्षीर्ण द्वारा प्रत्युत्तर शपर्थ पत्र (Counter
Affidavit) प्रस्िुि ककया र्या है, जजसके अनुक्रम
में, प्रधिपक्षी सिंख्या 1 ि 3 की िरर् से प्रत्युत्तर
शपर्थ पत्र कदनािंक 29.08.2023 को, प्रधिपक्षी
सिंख्या 2 की िरर् से प्रत्युत्तर शपर्थ पत्र कदनािंक
28.10.2023 को ि प्रधिपक्षी सिंख्या 4 की िरर्
से कदनािंक 29.08.2023 को िर्था प्रधिपक्षी सिंख्या
6 की िरर् से कदनािंक 29.08.2023 को अपने-
अपने प्रत्युत्तर शपर्थ पत्र (Counter Affidavits)
प्रस्िुि ककए र्ए। उपरोक्त प्रत्युत्तर शपर्थ पत्रों के
पिाि प्रधिपक्षी सिंख्या 6 द्वारा अनुपूरक प्रत्युत्तर
शपर्थ पत्र (Supplementary Counter Affidavit)
कदनािंक 31.10.2023 को न्यायालय में प्रस्िुि
ककया र्या है।

23. याची के विद्वान अधििक्ता द्वारा
मौजखक िकों में यह कर्थन ककया र्या है कक
जजला मजजस्रेर् लखनऊ द्वारा याची को र्लि
ि विधि विरुद्ध िरीके से आदेश पाररि करके
धनरुद्ध ककया र्या है जो सिंवििान द्वारा प्रदत्त
अनुच्छेद 21 के प्रावििानों का उललिंघन है।
जजला मजजस्रेर् के समक्ष उनके व्यवक्तपरक
सिंिुवष्ट (Subjective Satisfaction) हेिु ि
प्रश्नर्ि आदेश पाररि ककए जाने हेिु समुधचि
िथ्य ि साक्ष्य उपलब्ि नहीिं र्थे। इस प्रकार से
जजला मजजस्रेर् लखनऊ/प्रधिपक्षी सिंख्या 4
द्वारा सिंवििान के अनुच्छेद 19, 21 ि 22 का
उललिंघन ककया र्या है। जबकक प्रर्थम सूचना
ररपोर्ग के िथ्यों के अनुसार लोक व्यिस्र्था ििंर्
होने की कोई जस्र्थधि, पररदृश्य में नहीिं र्थी।
अिः प्रश्नर्ि आदेश धनरस्ि होने योग्य है।

24. िकग के उपरोक्त वबन्दु के सिंदिग में
सिगप्रर्थम राष्ट्रीय सुरक्षा अधिधनयम 1980 के
ित्सिंबिंिी प्रावििान, िारा 3 का, पररशीलन
करना समीचीन होर्ा-

"3. Power to make orders detaining
certain
persons.
-
(1)
The
Central
Government or the State Government may,-

(a) if satisfied with respect to any
person that with a view to preventing him
from acting in any manner prejudicial to
the defence of India, the relations of India
with foreign powers, or the security of
India, or

(b) if satisfied with respect to any
foreigner that with a view to regulating his
continued presence in India or with a view
to making arrangements for his expulsion
from India,

it is necessary so to do, make an order
directing that such person be detained.
(2) The Central Government or the State
Government may, if satisfied with respect to
any person that with a view to preventing
him from acting in any manner prejudicial
to the security of the State or from acting in
any manner prejudicial to the maintenance
of Public order or from acting in any
manner prejudicial to the maintenance of
supplies and services essential to the
community it is necessary so to do, make an
order directing that such person be
detained.

Explanation.
(3) If, having regard to the circumstances
prevailing or likely to prevail in any area
within the local limits of the jurisdiction of
a District Magistrate or a Commissioner of
Police, the State Government is satisfied
542 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
that it is necessary so to do, it may, by
order in writing, direct, that during such
period as may be specified in the order,
such District Magistrate or Commissioner
of Police may also, if satisfied as provided
in sub-section (2), exercise the powers
conferred by the said sub-section:

Provided..

(4).....

(5)....

25. उपरोक्त प्रावििानों के अनुसार, ककसी
व्यवक्त के धनरुवद्धकरण का आदेश, केंर सरकार
अर्थिा राज्य सरकार अर्थिा जजला मजजस्रेर्
अर्थिा पुधलस आयुक्त के द्वारा दोषी व्यवक्त के
विरुद्ध, उसके समाज के कहि के विरुद्ध
हाधनकारक कृत्य करने या लोक व्यिस्र्था को
बनाए रखने के विरुद्ध कायग करने अर्थिा िारि
की सुरक्षा के प्रधिकूल कायग करने से रोकने के
धलए ि उस कृत्य के पररणामस्िरूप सम्बिंधिि
क्षेत्र में उत्पन्न हुई जस्र्थधि, अर्थिा पैदा हो सकने
िाली जस्र्थधि, के पररप्रेक्ष्य में अपनी सम्यक
व्यवक्तपरक सिंिुवष्ट (Subjective Satisfaction) के
उपरािंि पाररि ककया जा सकिा है।

26. प्रकरण के िथ्यानुसार याची द्वारा अपने
सहयोधर्यों के सार्थ कदनािंक 29.01.2023 को
सािगजधनक स्र्थल पर समय लर्िर् प्रािः
9:00 बजे िाधमगक ििंर्थ रामचररि मानस की
प्रधियों को र्ाडकर ि उन्हें पैरों से कुचलिे हुए
जला कदया र्या िर्था नारेबाजी की र्ई ि
रामचररिमानस के अनुयायीयों के विरुद्ध अिर
कर्प्पजणयािं की र्ई र्थी। सार्थ ही उक्त कृत्य का
िीकर्यो बनाकर उसे सोशल मीकर्या पर
पररचाधलि िी ककया र्या, जजसकी सूचना
धमलने पर िात्काधलक िौर पर र्थाना
पी०जी०आई० लखनऊ के प्रिारी धनरीक्षक,
जजसके कायग क्षेत्र में घर्नास्र्थल आिा है, ने
सिगप्रर्थम घर्नास्र्थल पर पहुूँचकर आिश्यक
कायगिाही की। जजसके सिंदिग में प्रिारी धनरीक्षक
ने अपने अनुरोि पत्र कदनािंक 16.02.2023 में
विस्िार से यह िी अिंककि ककया है कक याची ि
उसके सहयोधर्यों के उक्त कृत्य से आम
जनमानस में अत्यिंि आक्रोश र्ैल र्या, लोक
व्यिस्र्था धछन्न-धिन्न हो र्ई और जैसे ही
याची के कृत्यों का िीकर्यो पररचाधलि हुआ एक
समुदाय में और क्षुब्ििा बढनी शुरू हो र्ई।
राि होिे-होिे माहौल कार्ी र्मग हो र्या,लोर्
चचागओिं में मशर्ूल हो र्ए। देर राि होिे-होिे
याची ि उसके सहयोधर्यों द्वारा ककए र्ए कृत्य
का िीकर्यो हर िरर् िायरल हो र्या, जजससे
उक्त र्थाना क्षेत्र में चारों िरर् सनसनी ि िनाि
का माहौल व्याि हो र्या। सामान्य जन जीिन
िी अस्िव्यस्ि हो र्या र्था। र्थाना प्रिारी द्वारा
िेजी र्ई पुधलसकधमगयों की र्ीमें क्षेत्र में लोक
व्यिस्र्था के अनुरक्षण में लर्ी रहीिं, कर्र िी
क्षेत्र में सिंिेदनशीलिा बढिी जा रही र्थी। जजस
पर, प्रिारी धनरीक्षक र्थाना पी०जी०आई०,
लखनऊ ने उच्चाधिकाररयों से अधिररक्त र्ोसग
िेजने का अनुरोि ककया, जजस पर घर्ना िाले
कदन ि उसके अर्ले कदन िी, र्थाना आधशयाना,
कैंर् ि आलमबार् के प्रिारी धनरीक्षकर्ण मय
िारी र्ोसग के सिंिेदनशील स्र्थानों पर मौजूद रहे
और लोर्ों को समझाने-बुझाने ि प्रधिकूलिा
की जस्र्थधि के धनिारण हेिु लर्े रहे।
ररजिग/आििंकर्ि र्ोसग िी िैयार जस्र्थधि में
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
543
ए०सी०पी० कायागलय कैंर् में उपजस्र्थि रहीिं।
क्षेत्र में िारी पुधलस बल का पैदल माचग,
सिंिेदनशील स्र्थानों पर कराया र्या। अििर
प्रिारी धनरीक्षक ने यह िी दधशगि ककया है कक
र्थाना की पुधलस ने घर्ना िाले कदन ही याची के
सार्थ-सार्थ उसके सहयोधर्यों सिेंर कुशिाहा,
देिेन्र प्रिाप यादि, मोहम्मद सलीम ि
यशपाल धसिंह कुल पाूँच नर्र अधियुक्तों को
ित्परिा के सार्थ धर्रफ्िार िी कर धलया र्था।
जजससे अन्य कोई प्रधिकूलिा की जस्र्थधि
उत्पन्न नहीिं हो पाई, परन्िु क्षेत्र में िनाि
अिी-िी कायम है ि आम जनिा अज्ञाि
आशिंकाओिं से अिी-िी सशिंककि है। कदनािंक
29.01.2023
के
उक्त
घर्नाक्रम
को
इलेक्राधनक चैनलों ि समाचार पत्रों ने िी
प्रमुखिा से लर्ािार, प्रसाररि ककया है। प्रिारी
धनरीक्षक ने अपने अनुरोि पत्र में यह िी
अिंककि ककया है कक अधियुक्तर्ण धर्रफ्िारी में
रहिे हुए िी अपने अपराि को स्िीकार करके
उक्त कृत्य को आर्े िी जारी रखने के धलए कह
रहे हैं। पुधलस छानबीन से यह िथ्य िी उजार्र
हुए कक अधियुक्तों की योजना प्रदेश के विधिन्न
जजलों में रामचररि मानस की प्रधियाूँ जलाकर
देश ि प्रदेश के विधिन्न समुदायों में दिंर्ा
र्ैलाने की र्थी और यकद ित्परिापूिगक पुधलस
ने पररजस्र्थधियों को सिंिालने की कायगिाही न
की होिी िो, देश ि प्रदेश दिंर्े की चपेर् में आ
सकिा र्था। प्रिारी धनरीक्षक ने उक्त घर्ना में
बाहरी एजेंधसयों के शाधमल होने की आशिंका को
िी जाकहर ककया है िर्था यह िी कर्थन ककया है
कक याची ने उपरोक्त अपराि के सिंदिग में अपना
जमानि प्रार्थगना पत्र मजजस्रेर् के न्यायालय में
प्रस्िुि ककया र्था जो कक न्यायालय द्वारा
धनरस्ि कर कदया र्या है, परन्िु अब
याची/अधियुक्त ने सत्र न्यायालय में अपना
जमानि प्रार्थगना पत्र प्रस्िुि कर कदया है,
जजसके स्िीकार होने ि उसके जमानि पर
छूर्ने की प्रबल सम्िािना है। इस बाि की िी
सम्िािना है कक यकद अधियुक्तर्ण जमानि
पर छूर् जािे हैं िो िह पुनः इसी प्रकार के
आपराधिक कृत्यों में धलि हो जाएिंर्े और लोक
व्यिस्र्था की जस्र्थधि पुनः ििंर् हो जाएर्ी।

27. जजला मजजस्रेर् लखनऊ ने प्रिारी
धनरीक्षक पी०जी०आई० लखनऊ की उक्त
आख्या कदनािंक 16.02.2023ि उस पर पुधलस
उपायुक्त (पूिी) लखनऊ के अधिमि से
सहमधि/अनुशिंसा पत्र कदनािंक 16.02.2023, ि
घर्ना के सिंदिग में प्रस्िुि र्ोर्ोिाफ्स,
अधियुक्तर्ण ि साक्षीर्ण के द्वारा वििेचना के
अनुक्रम में कदए र्ए बयान, मोबाइल फोन ि
वप्रिंर्र के ररकिरी मेमो, घर्ना की वििेचना के
क्रम में ककिा की र्ई केस र्ायरी एििं घर्ना
िाले कदन ि उसके पिाि पुधलसकधमगयों के
घर्नास्र्थल पर धनयुवक्त सम्बिंिी ड्युर्ी चार्ग,
याची/अधियुक्त के जमानि प्रार्थगना पत्र को
मुख्य न्याधयक मजजस्रेर्, लखनऊ द्वारा
धनरस्ि ककए जाने के पिाि याची के द्वारा
कदनािंक 15.02.2023 को सत्र न्यायालय
लखनऊ को प्रस्िुि की र्ई जमानि प्रार्थगना पत्र
की प्रधि आकद साक्ष्य का सम्यक ि र्हनिा से
परीक्षण करके याची/अधियुक्त को अधिधनयम
544 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
के िारा 3(2) के प्रावििान के अिंिर्गि, धनरुवद्ध
हेिु समुधचि पािे हुए, याची के विरुद्ध
धनरुवद्धकरण आदेश कदनािंक 16.02.2023
पाररि कर कदया, जजसे हस्िर्ि याधचका में
चुनौिी दी र्ई है।

28.

प्रदेश/सिंबिंधिि
जजलों
में,
कानून
व्यिस्र्था/लोक
व्यिस्र्था
की
जस्र्थधि
का
आिंकलन करने ि उसे अक्षुडण रखने का कायग
कायगपाधलका का है। अिः अधिधनयम के
अन्िर्गि वििायन ने समुधचि पररजस्र्थधियों में
धनरोिादेश
पाररि
करने
का
अधिकार,
कायगपाधलका के उच्चाधिकाररयों को दे रखा है
जो
समस्ि
िथ्यों,
पररजस्र्थधियों
ि
ित्सम्बिंधिि प्रलेखीय ि अन्य साक्ष्यों ि
आख्याओिं
पर
विचार
करने
ि
अपनी
व्यवक्तपरक
सिंिुवष्ट
(Subjective
Satisfaction) के उपरािंि धनरोिादेश पाररि
करने की अधिकाररिा रखिे हैं िस्िुिः
अधिधनयम की िारा 3(2) में पाररि ककया जाने
िाला धनरोिक आदेश, दोषी व्यवक्त द्वारा ककए
र्ए कृत्य/अपराि, के सिंदिग में, की जाने िाली
दाजडर्क कायगिाकहयों से पृर्थक ि अपराि के
ककए जाने के पररणामस्िरूप पैदा होने, अर्थिा
हो सकने िाली, पररजस्र्थधियों, को रोकने यर्था
लोक व्यिस्र्था को कायम रखने में बािक कृत्य
से बचाने के अनुक्रम में, कायगपाधलका द्वारा
दोषी व्यवक्त के विरुद्ध िात्काधलक रूप से की
र्ई कायगिाही होिी है।

29. उपरोक्त वबन्दु पर माननीय उच्चिम
न्यायालय ने State of Maharastra &
Others vs Bhaurao Punjabrao Gawande
(2008) 3 SCC 613 में धनम्नानुसार अधिमि
व्यक्त ककया हैः-

32. There is no authoritative definition
of "preventive detention" either in the
Constitution or in any other statute. The
expression,
however,
is
used
in
contradistinction to the word "punitive". It
is not a punitive or penal provision but is in
the
nature
of
preventive
action
or
precautionary measure. The primary object
of preventive detention is not to punish a
person for having done something but to
intercept him before he does it. To put it
differently, it is not a penalty for past
activities of an Individual but is intended to
preempt the person from Indulging in future
activities sought to be prohibited by a
relevant law and with a view to preventing
him from doing harm in future.

33. In Haradhan Saha v. State of W.8.1
explaining the concept of preventive
detention, the Constitution Bench of this
Court, speaking through Ray, C.J. stated:
(SCC p. 205, para 19)

"19.
The
essential
concept
of
preventive detention is that the detention of
a person is not to punish him for something
he has done but to prevent him from doing
it. The basis of detention is the satisfaction
of the executive of a reasonable probability
of the likelihood of the detenu acting in a
manner similar to his past acts and
preventing him by detention from doing the
same. A criminal conviction on the other
hand is for an act already done which can
only be possible by a trial and legal
evidence. There is no parallel between
prosecution in a court of law and a
detention order under the Act. One is a
punitive action and the other is a preventive
act. In one case a person is punished on
proof of his guilt and the standard is proof
1 All. Suresh Singh Yadav Vs. State of U.P. & Ors.
545
beyond reasonable doubt whereas in
preventive detention a man is prevented
from doing something which it is necessary
for reasons mentioned in Section 3 of the
Act to prevent."

34. In another leading decision in
Khudiram Das v. State of W.B.this Court
stated: (SCC pp. 90-91, para 8).

"8... The power of detention is clearly
a preventive measure. It does not partake in
any manner of the nature of punishment. It
is taken by way of precaution to prevent
mischief to the community. Since preventive
measure is based on the principle that a
person should be prevented from. doing
something which, if left free and unfettered,
it is reasonably probable he would do, it
must necessarily proceed in all cases, to
some extent, on suspicion or anticipation as
distinct from proof, Patanjali Sastri, C.J.
pointed out In State of Madras v. V. G. Row
that
preventive
detention
is
'largely
precautionary and based on suspicion and
to these observations may be added the
following words uttered by the learned
Chief Justice in that case with reference to
the observations of Lord Finlay In R.v.
Halliday, namely, that "the court was the
least appropriate tribunal to investigate
into circumstances of suspicion on which
such anticipatory action must be largely,
based This being the nature of the
proceeding, it is impossible to conceive
how it can possibly be regarded as capable
of objective assessment. The matters which
have to be considered by the detaining
authority
are
whether
the
person
concerned, having regard to his past
conduct judged in the light of the
surrounding
circumstances
and
other
relevant material, would be likely to act in
a prejudicial manner as contemplated in
any of sub-clauses (i), (ii) and (iii) of
Clause (1) of sub -section (1) of Section 3,
and if so, whether it is necessary to detain
him with a view to preventing him from so
acting. These are not matters susceptible of
objective determination and they could not
be intended to be judged by objective
standards. They are essentially matters
which
have
to
be
administratively
determined for the purpose of taking
administrative action. Their determination
is, therefore, deliberately and advisedly left
by the legislature to the
subjective
satisfaction of the detaining authority
which by reason of its special position,
experience and expertise would be best
fitted to decide them. It must in the
circumstances be held that the subjective
satisfaction of the detaining authority as
regards these matters constitutes the
foundation for the exercise of the power of
detention and the Court cannot be invited
to consider the propriety or sufficiency of
the grounds on which the satisfaction of the
detaining authority is based. The Court
cannot, on a review of the grounds,
substitute its own opinion for that of the
authority, for what is made a condition
precedent to the exercise of the power of
detention is not an objective determination
of the necessity of detention for a specified
purpose but he subjective opinion of the
detaining authority, and if a subjective
opinion is formed by the detaining
authority as regards the necessity of
detention for a specified purpose, the
condition of exercise of the power of
detention would be fulfilled.