# Sushil Kumar Shukla v. State of U.P. & Anr

- **Citation:** (2024) 4 ILRA 1044
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-04-23
- **Case number:** Criminal Misc Anticipatory Bail Application U/S 438 Cr.P.C. No. 846 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/sushil-kumar-shukla-v-state-of-u-p-anr-51767
- **Pages:** 6

## Headnote

G.A.

आपराधिक विधि - भारतीय दंड संहिता, 1860 -
िारा 420, 467, 468, 471, 34, 120-ख - अधिम
जमानत - कधर्थत प्रार्थधमकी िेखपाि द्वारा हदनांक
26.05.2023 को प्रार्थी एिं उसके पुर्त्र के विरुद्ध
म्जिाधिकारी के आदेिानुसार तिसीिदार के धनदेि पर
दजज कराई गई िै - तर्थावप, प्रार्थधमकी में उम्लिम्खत
कर्थनों से हकसी भी अधभयुि द्वारा कोई संज्ञेय अपराि
काररत िोना प्रतीत निीं िोता, अतः ऐसी पररम्स्र्थधत में
प्रार्थधमकी का अंकन उधचत निीं किा जा सकता -
म्जिाधिकारी द्वारा हदनांक 25.05.2023 को जारी
नोहर्स में प्रार्थी पर आरोप िै हक िेखपाि के पद पर
रिते िुए उसने सरकारी भूधम का एक भाग सि-
अधभयुि के नाम अनुधचत रूप से अंहकत हकया -
जबहक प्रार्थी का कर्थन िै हक उि सि-अधभयुि का
नामांतरण सिायक चकबंदी अधिकारी द्वारा मुकदमा के
आिार पर हकया गया र्था और प्रार्थी को िेखपाि के
पद पर 26.07.2012 को तैनात हकया गया र्था, जो
उि नामांतरण से काफी पूिज की घर्ना िै - प्रार्थजना-पर्त्र
के सार्थ संिग्न िपर्थ-पर्त्र में उलिेख िै हक प्रार्थी के
विरुद्ध एक अन्य प्रार्थधमकी दजज िै, म्जसमें उसे िारा
41क भा.दं.सं. का िाभ प्रदान हकया जा चुका िै -
अधभधनिाजररत, वििेष न्यायािीि (भ्रष्टाचार धनिारण
अधिधनयम), सी.बी.आई. द्वारा पाररत आदेि हदनांक
06.04.2024 से स्पष्ट िै हक विद्वान न्यायािीि ने
गुरुबक्ि धसंि धसम्ब्बया बनाम पंजाब राज्य (नीचे) में
उच्चतम न्यायािय के धनणजय का समयक अध्ययन
हकए वबना, अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र धनरस्त हकया
िै - उपरोि तथ्यों के आिोक में, चूाँहक प्रार्थधमकी में
प्रार्थी द्वारा हकसी संज्ञेय अपराि के काररत िोने का
कोई उलिेख निीं िै, तर्था राजस्ि अधभिेखों में
नामांतरण प्रार्थी के पद ििण करने से पूिज सक्षम
अधिकारी के आदेि से संपाहदत िो चुका र्था, प्रार्थी
द्वारा कोई नामांतरण निीं हकया गया िै - प्रार्थी
सरकारी कमजचारी िै, उसके न्याधयक प्रहिया से फरार
िोने की कोई संभािना निीं िै एिं वििेचना पूणज िो
चुकी िै - अतः प्रार्थी अधिम जमानत का अधिकारी िै।
(पैरा 3, 4, 5, 13, 17)

आवेदन स्वीकारI (E-13)

प्रोद्धृत मामिों की सूची:

## Text

1044 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
demand or satisfaction of demand that may
arise pursuant to the assessment proposed
to be made, such refundable amount would
attract liability of interest under Section
132 B (4) of the Act read with Rule 119 A
of the Rules.

36. In view of the above, we decline to
issue the writ of Mandamus as prayed.
Instead, we dispose of the writ petition
with
a
direction
on
the
Assessing
Authority/respondent No.2 to proceed to
deal with and decide the application of the
petitioner dated 15.09.2022 within two
weeks from today, by a reasoned and
speaking order, after hearing the petitioner.
No order as to costs.

----------
(2024) 4 ILRA 1044
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 23.04.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Criminal Misc Anticipatory Bail Application U/S
438 Cr.P.C. No. 846 of 2024

Sushil Kumar Shukla ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Respondents

Counsel for the Applicant:
Piyush Tripathi, Manoj Kumar Mishra

Counsel for the Respondents:
G.A.

आपराधिक विधि - भारतीय दंड संहिता, 1860 -
िारा 420, 467, 468, 471, 34, 120-ख - अधिम
जमानत - कधर्थत प्रार्थधमकी िेखपाि द्वारा हदनांक
26.05.2023 को प्रार्थी एिं उसके पुर्त्र के विरुद्ध
म्जिाधिकारी के आदेिानुसार तिसीिदार के धनदेि पर
दजज कराई गई िै - तर्थावप, प्रार्थधमकी में उम्लिम्खत
कर्थनों से हकसी भी अधभयुि द्वारा कोई संज्ञेय अपराि
काररत िोना प्रतीत निीं िोता, अतः ऐसी पररम्स्र्थधत में
प्रार्थधमकी का अंकन उधचत निीं किा जा सकता -
म्जिाधिकारी द्वारा हदनांक 25.05.2023 को जारी
नोहर्स में प्रार्थी पर आरोप िै हक िेखपाि के पद पर
रिते िुए उसने सरकारी भूधम का एक भाग सि-
अधभयुि के नाम अनुधचत रूप से अंहकत हकया -
जबहक प्रार्थी का कर्थन िै हक उि सि-अधभयुि का
नामांतरण सिायक चकबंदी अधिकारी द्वारा मुकदमा के
आिार पर हकया गया र्था और प्रार्थी को िेखपाि के
पद पर 26.07.2012 को तैनात हकया गया र्था, जो
उि नामांतरण से काफी पूिज की घर्ना िै - प्रार्थजना-पर्त्र
के सार्थ संिग्न िपर्थ-पर्त्र में उलिेख िै हक प्रार्थी के
विरुद्ध एक अन्य प्रार्थधमकी दजज िै, म्जसमें उसे िारा
41क भा.दं.सं. का िाभ प्रदान हकया जा चुका िै -
अधभधनिाजररत, वििेष न्यायािीि (भ्रष्टाचार धनिारण
अधिधनयम), सी.बी.आई. द्वारा पाररत आदेि हदनांक
06.04.2024 से स्पष्ट िै हक विद्वान न्यायािीि ने
गुरुबक्ि धसंि धसम्ब्बया बनाम पंजाब राज्य (नीचे) में
उच्चतम न्यायािय के धनणजय का समयक अध्ययन
हकए वबना, अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र धनरस्त हकया
िै - उपरोि तथ्यों के आिोक में, चूाँहक प्रार्थधमकी में
प्रार्थी द्वारा हकसी संज्ञेय अपराि के काररत िोने का
कोई उलिेख निीं िै, तर्था राजस्ि अधभिेखों में
नामांतरण प्रार्थी के पद ििण करने से पूिज सक्षम
अधिकारी के आदेि से संपाहदत िो चुका र्था, प्रार्थी
द्वारा कोई नामांतरण निीं हकया गया िै - प्रार्थी
सरकारी कमजचारी िै, उसके न्याधयक प्रहिया से फरार
िोने की कोई संभािना निीं िै एिं वििेचना पूणज िो
चुकी िै - अतः प्रार्थी अधिम जमानत का अधिकारी िै।
(पैरा 3, 4, 5, 13, 17)

आवेदन स्वीकारI (E-13)

प्रोद्धृत मामिों की सूची:

1. जयप्रकाश ससिंह बनाम सबहार राज्य और एक अन्य
(2012) 4 एससीसी 379
4 All. Sushil Kumar Shukla Vs. State of U.P. & Anr.
1045
2. गुरुवक्श ससिंह सासबया बनाम पिंजाब राज्य
एआईआर 1980 सुप्रीम कोटथ 1632

3. पोकर राम बनाम राज्य एआईआर 1985 सुप्रीम
कोटथ 1969

4. गुरुवक्श ससिंह ससखब्बया बनाम पिंजाब राज्य 1977
एससीसी ऑनलाइन पिंजाब और हररयाणा 157

5. गुरुवक्श ससिंह ससखब्बया बनाम स्टेट ऑफ पिंजाब
(1980) 2 एससीसी 565

6. पोकर राम बनाम पिंजाब राज्य (1985) 2 एससीसी
597

7. भाव नगर यूसनवससथटी बनाम पलीताना शुगर समल
(प्राइवेट सलसमटेड) (2003) 2 एससीसी 111

(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi, J.)

1. प्रार्थी के विद्वान अधिििा श्री मनोज
कुमार धमश्रा तर्था राज्य सरकार के विद्वान
अधिििा श्री पुनीत कुमार यादि को सुना तर्था
पर्त्राििी का अििोकन हकया।

2. िारा 438 दं०प्र०सं० द्वारा प्रस्तुत
प्रार्थजना-पर्त्र द्वारा प्रार्थी ने मुकदमा अपराि
संख्या 0211 सन 2023 अन्तगजत िारा 420,
467, 468, 471, 34, 120-B भा०द०वि० र्थाना
सरोम्जनी नगर म्जिा िखनऊ में अधिम
जमानत की प्रार्थजना की िै।

3. उपरोि प्रर्थम सूचना ररपोर्ज एक
िेखपाि ने हदनांक 26.05.2023 को प्रार्थी
तर्था उसके पुर्त्र पररतोष िुक्िा के विरुद्ध
धिखाते िुए किा हक म्जिाधिकारी के आदेि
के िम में तिसीिदार, सरोम्जनीनगर द्वारा एक
आदेि पाररत कर उसे प्रर्थम सूचना ररपोर्ज दजज
कराने का धनदेि हदया गया िै। प्रर्थम सूचना
ररपोर्ज में किे गये कर्थनों से हकसी भी
अधभयुि द्वारा कोई भी संज्ञेय अपराि काररत
करना प्रतीत निीं िोता िै तर्था ऐसी पररम्स्र्थधत
में प्रर्थम सूचना ररपोर्ज अंहकत निीं की जा
सकती िै।

4. म्जिाधिकारी, िखनऊ द्वारा प्रार्थी
को
हदये
गये
एक
नोहर्स
हदनांक
25.05.2023 में यि आरोप िगाया गया िै
हक प्रार्थी ने िेखपाि के पद पर रिते िुए
सरकारी भूधम के एक अंि को एक सि-
अधभयुि वििाि धतिारी के नाम गित तरीके
से अंहकत कर हदया र्था। इस संबंि में प्रार्थी
का यि कर्थन िै हक वििाि धतिारी का नाम
सिायक चकबंदी अधिकारी, मधििाबाद, िखनऊ
द्वारा मुकदमा नंबर 463/8.8.99 के आिार
पर अंहकत िुआ र्था। प्रार्थी िेखपाि, अमौसी के
पद पर हदनांक 26.07.2012 को तैनात हकया
गया र्था तर्था प्रश्नगत नामांतरण उसके काफी
पूिज िो चुका र्था।

5. प्रार्थजना-पर्त्र के सार्थ प्रस्तुत िपर्थ
पर्त्र में किा गया िै हक प्रार्थी एक अन्य प्रर्थम
सूचना ररपोर्ज संख्या 0374 सन 2023 अंतगजत
िारा 406, 420, 504, 506, 120-B भा०दं०सं०
र्थाना सरोम्जनी नगर जनपद िखनऊ में भी
आरोपी िै, म्जसमें उसको भा०दं०सं० की िारा
41A का िाभ हदया जा चुका िै।

6. प्रस्तुत प्रकरण में सि-अधभयुि
वििाि धतिारी को जमानत प्रार्थजना-पर्त्र संख्या
10344 सन 2023 में पाररत आदेि हदनांक
18.08.2023 द्वारा जमानत दी जा चुकी िै।

7. प्रार्थी ने इसके पूिज इस न्यायािय
के समक्ष आपराधिक प्रकीणज याधचका संख्या
4697 सन 2023 प्रस्तुत की र्थी, म्जसमें
1046 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
पाररत आदेि हदनांक 16.06.2023 द्वारा प्रार्थी
की धगरफ्तारी पर रोक िगा दी गयी र्थी।

8. राज्य सरकार के विद्वान अधिििा
ने याधचका के विरोि हकया। प्रकरण में आरोप
- पर्त्र हदनांक 16.04.2023 को प्रस्तुत हकया
जा चुका िै म्जसमें िारा 34/ 120-B भा०दं०सं०
का आरोप भी जोडा गया िै।

9. इसके पूिज प्रार्थी वििेष न्यायािीि
(भ्रष्टाचार धनिारण अधिधनयम), सी०बी०आई०,
कोर्ज नं०.- 03, िखनऊ के समक्ष अधिम
जमानत प्रार्थजना-पर्त्र संख्या 2331 सन 2024
प्रस्तुत हकया र्था, म्जसमें अधभयोजन पक्ष की
तरफ से जयप्रकाि धसंि बनाम वबिार राज्य
और एक अन्य (2012) 4 SCC 379 की विधि
व्यिस्र्था प्रस्तुत की गयी, म्जसमें यि प्रधतपाहदत
हकया गया र्था हक:- "Parameters for grant of
anticipatory bail in a serious offence are
required to be satisfied and further while
granting such relief, the court must record
the reasons therefor. Anticipatory bail can
be
granted
only
in
exceptional
circumstances where the court is prima
facie of the view that the applicant has
falsely been enroped in the crime and
would not misuse his liberty."

10. विद्वान वििेष न्यायािीि ने यि
किा हक:- "अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र के
संबंि में माननीय उच्चतम न्यायािय द्वारा
गुरूिक्ि धसंि सावबया बनाम पंजाब राज्य
एआईआर 1980 सुप्रीम कोर्ज 1632 एिं पोकर
राम बनाम राज्य एआईआर 1985 सुप्रीम कोर्ज
1969 में माननीय उच्चतम न्यायािय द्वारा यि
विधिक धसद्धान्त प्रधतपाहदत हक गया िै हक
अधिम जमानत केिि तभी प्रदान की जा
सकती िै, जब प्रार्थी / अधभयुि की ओर से
अपिादीय एिं असािारण पररम्स्र्थधतयां इस
प्रकार की प्रदधिजत की जायें, म्जन कारणो से
न्यायािय द्वारा अधिम जमानत प्रदान हकया
जाना उधचत प्रतीत िोता िो, हकन्तु इस मामिे
में इस प्रकार की कोई अपिादीय एिं असािा
रण पररम्स्र्थधत सामने निीं आयी िै।

अतः माननीय न्यायाियों की उपरोि
विधि व्यिस्र्थाओं में पाररत हकये गये विधिक
धसद्धान्तों ि उपरोि िाद के समस्त तथ्यों एिं
पररम्स्र्थधतयों को दृवष्टगत रखते िुये इस
न्यायािय की राय में प्रार्थी / अधभयुि को
अधिम जमानत पर ररिा हकये जाने िेतु इस
स्तर पर पयाजप्त विधिक आिार निीं िै।
तदानुसार प्रार्थी अधभयुि की ओर से प्रस्तुत
अधिम जमानत प्रार्थजनापर्त्र धनरस्त हकये जाने
योग्य िै।"

11. गुरुिक्ि धसंि धसम्ब्बया के प्रकरण
में पंजाब और िररयाणा उच्च न्यायािय ने
अपने धनणजय (गुरुिक्ि धसंि धसम्ब्बया बनाम
पंजाब राज्य 1977 SCC ऑनिाइन पंजाब और
िररयाणा 157) में पंजाब एिं िररयाणा उच्च
न्यायािय ने यि प्रधतपाहदत हकया र्था हक िारा
438 दं०प्र०सं० के अंतगजत प्रदान की गयी िवि
असािारण प्रकृधत की िै तर्था इसका प्रयोग
अत्यन्त संयम के सार्थ, मार्त्र असािारण
पररम्स्र्थधतयों में हकया जाना चाहिए।

12. पंजाब तर्था िररयाणा उच्च
न्यायािय के उि धनणजय के विरुद्ध अपीि
स्िीकार करते िुए माननीय उच्चतम न्यायािय
ने अपने धनणजय (गुरुिक्ि धसंि धसम्ब्बया बनाम
स्र्ेर् ऑफ पंजाब (1980) 2 SCC 565) में यि
4 All. Sushil Kumar Shukla Vs. State of U.P. & Anr.
1047
किा हक पंजाब एिं िररयाणा उच्च न्यायािय
की पूणज पीठ द्वारा िारा 438 दं०प्र०सं० के ऊपर
िगाये गये अिरोि स्िीकार हकये जाने योग्य
निीं िैं। विधि की व्याख्या के धसद्धान्त के
अनुसार व्यापक प्रभाि िािे िब्दों को इस
प्रकार निीं पढा जाना चाहिए, म्जससे हक
िैिाधनक प्राििानों पर ऐसा अंकुि िग जाय, जो
हक वििाधयका ने स्ियं निीं िगाये िैं। यि
वििेषतया तब और भी सत्य िो जाता िै जबहक
िैिाधनक प्रावििान धनजी स्ितंर्त्रता के अधिकार
को सुधनम्श्चत करने से संबंधित िो तर्था इसके
सार्थ िी इस धसद्धान्त का उपयोग भी सम्ममधित
िो हक कोई व्यवि जब िि दोषी धसद्ध न िो
जाय, तो धनदोष माना जायेगा।

गुरुिक्ि धसंि धसम्ब्बया के धनणजय में
माननीय उच्चतम न्यायािय ने यि स्पष्ट रूप
से किा हक पंजाब एिं िररयाणा उच्च
न्यायािय द्वारा हदया गया धनणजय, हक िारा
438 दं०प्र०सं० के अंतगजत अधिम जमानत हदये
जाने की िवि अपिाद स्िरूप मामिों में
इस्तेमाि की जानी चाहिए क्योंहक यि एक
असािारण प्रिृवत्त की िवि िै, हकसी भी प्रकार
से न्यायोधचत निीं िै। माननीय उच्चतम
न्यायािय ने मार्त्र इतना किा हक इस िवि का
प्रयोग साििानीपूिजक, प्रकरण की पररम्स्र्थधतयों
को देखते िुए तब हकया जाना चाहिए जब
इसका प्रयोग न्यायोधचत िो। माननीय उच्चतम
न्यायािय ने यि किा हक अधिम जमानत
प्रार्थजना-पर्त्र इस आिार पर धनरस्त निीं हकया
सकता हक प्रार्थी कोई असािारण पररम्स्र्थधतयााँ
हदखाने में समर्थज निीं रिा िै तर्था अधिम
जमानत प्रार्थजना-पर्त्र उसके गुण-दोष पर िी तय
हकया जाना चाहिए।
13. वििेष न्यायािीि (भ्रष्टाचार
धनिारण अधिधनयम), सी०बी०आई०, कोर्ज नं०.-
03, िखनऊ द्वारा पाररत आदेि हदनांक
06.04.2024 के अििोकन से यि प्रतीत िोता
िै हक विद्वान वििेष न्यायािीि ने गुरुिक्ि
धसंि धसम्ब्बया बनाम पंजाब राज्य के माननीय
उच्चतम न्यायािय के धनणजय को ठीक प्रकार से
पढे वबना, उसके आिार पर अधिम जमानत
प्रार्थजना-पर्त्र धनरस्त कर हदया िै।

14. पोकर राम बनाम पंजाब राज्य
(1985) 2 SCC 597 के प्रकरण में गोिी
मारकर ित्या का प्रयास कर देने के आरोपी
व्यवि को सर्त्र न्यायािीि द्वारा अधिम जमानत
दे दी गयी र्थी तर्था उच्च न्यायािय ने उि
आदेि को धनरस्त करने से मना कर हदया र्था।
ऐसी पररम्स्र्थधत में माननीय उच्चतम न्यायािय
ने किा हक जब अधभयुि आग्नेयास्त्र से ित्या
काररत करने का आरोपी िै, न्यायािय को
अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र तय करते िुए
अत्यन्त साििानी बरतनी चाहिए।

15. कोई भी न्याधयक धनणजय अपने
वििेष तथ्यों एिं पररम्स्र्थधतयों के आिार पर
हदया जाता िै तर्था उसकी न्याधयक बाध्यता
मार्त्र उन तथ्यों एिं पररम्स्र्थधतयों के आिोक में
िी िोती िै। भाि नगर यूधनिधसजर्ी बनाम
पिीताना
िुगर
धमि
(प्राइिेर्
धिधमर्ेड)
(2003) 2 SCC 111 में माननीय उच्चतम
न्यायािय ने अििाररत हकया हक कोई भी
धनणजय मार्त्र उस वबन्दु पर बाध्यकारी िै, जो
उसके द्वारा तय हकया िै, न हक उस वबन्दु पर
म्जनके संबंि में तकजपूणज पररणाम धनकािे जा
सके। माननीय उच्चतम न्यायािय ने यि भी
1048 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
किा हक यि विधि का सुस्र्थावपत धसद्धान्त िै
हक तथ्यों में िोर्े से अंतर से अर्थिा कुि
अधतररि तथ्यों से हकसी धनणजय के बाध्यकारी
प्रभाि पर बडा अंतर आ सकता िै।

16. चूंहक पोकर बनाम राजस्र्थान
राज्य का धनणजय उस िाद के तथ्यों के आिोक
में हदया गया र्था, जिााँ अधभयुि ने आग्नेयास्त्र
से गोिी मारकर ित्या काररत की र्थी, जबहक
प्रश्नगत मामिे में ऐसा कोई आरोप निीं िै
तर्था उ०प्र० राज्य में ित्या के आरोप में िारा
438(6) (जैसा हक उ०प्र० राज्य में िागू िै), के
अनुसार अंतररम जमानत प्रार्थजना- पर्त्र पोषणीय
िी निीं िै, पोकर का उपरोि धनणजय प्रस्तुत
मामिे के धनणजय के धिए हकसी भी प्रार्थी के
अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र के धनणजय के धिए
हकसी भी प्रकार संगत निीं र्था और विद्वान
वििेष न्यायािीि ने उि धनणजय पर गित
आश्रय िेते िुए अंतररम जमानत आदेि
प्रार्थजना-पर्त्र तय हकया।

17. उपरोि तथ्यों को दृवष्टगत रखते
िुए, जबहक प्रर्थम सूचना ररपोर्ज में प्रार्थी द्वारा
हकये गये हकसी भी ऐसे कृत्य का कर्थन निीं
िै म्जससे एक संज्ञेय अपराि काररत िोता िो;
राजस्ि अधभिेखों में हकया गया नामांतरण
प्रार्थी के पद पर आने के कई िषों पूिज सक्षम
अधिकारी के आदेि से हकया जा चुका र्था और
प्रार्थी ने कोई नामांतरण निीं हकया िै; प्रार्थी
एक सरकारी कमजचारी िै और अधिम जमानत
हदये जाने की म्स्र्थधत में उसके न्याधयक प्रहिया
से भागने की कोई संभािना प्रतीत निीं िोती िै
और प्रकरण में वििेचना पूणज िो चुकी िै,
न्यायािय का मत िै हक प्रार्थी अधिम जमानत
पाने का अधिकारी िै।

18. उपरोि मुकदमा अपराि संख्या
में आिेदक की धगरफ्तारी / न्यायािय के
समक्ष उपम्स्र्थधत की दिा में, उसे संबंधित र्थाने
के भारसािक अधिकारी/न्यायािय की संतुवष्ट
के अनुसार व्यविगत बंि पर्त्र एिं दो प्रधतभू
प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंधतम रूप से
धनस्तारण तक, धनमन ितों के अिीन अधिम
जमानत पर ररिा हकया जाएगाः-

 क- आिेदक, यहद आिश्यक िोगा तो
पुधिस अधिकारी द्वारा जॉच िेतु अपेम्क्षत समय
पर उपम्स्र्थत िोगा;
 ख- आिेदक मामिे के तथ्यों से
पररधचत हकसी व्यवि या पुधिस अधिकाररयों
को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई िमकी, िादा
या प्रिोभन निीं देगा म्जससे हक िि ऐसे तथ्य
को न्यायािय के समक्ष या हकसी पुधिस
अधिकारी के समक्ष प्रकर् न करने पर मान
जाए;

ग-
आिेदक
अदाित
की
पूिज
अनुमधत के वबना भारत निीं िोडेगा;

घ- आिेदक को प्रत्येक धनिाजररत
धतधर्थ पर ट्रायि कोर्ज के समक्ष उपम्स्र्थत िोना
िोगा, जब तक हक व्यविगत उपम्स्र्थधत से िूर्
न दी गयी िो;

ड- आिेदक अधभयोजन पक्ष के
गिाि पर दबाि निीं डािेगा। िमकी निीं देगा;

च- आिेदक वििेचना एिं विचारण
के दौरान सियोग करेंगे और जमानत की
स्ितंर्त्रता का दुरुपयोग निीं करेगा।
4 All. Amit Maurya @ Amit Kumar Singh Vs. State of U.P.
1049

19. इस आदेि की एक प्रधत वििेष
न्यायािीि (भ्रष्टाचार धनिारण अधिधनयम),
सी०बी०आई०, कोर्ज नं०.- 03, िखनऊ को भेजी
जाय।
----------
(2024) 4 ILRA 1049
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 13.03.2024

BEFORE

THE HON'BLE MRS. MANJU RANI
CHAUHAN, J.

Criminal Misc Bail Application No. 6712 of 2024

Amit Maurya @ Amit Kumar Singh
 ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Applicant:
Ms. Mahima Maurya Kushwaha, Sri Mukesh
Kumar Kushwaha

Counsel for the Respondents:
Sri Desh Ratan Chaudhary, G.A., Sri Harish
Kumar Srivastava, Sri Ishwar Chandra Pandey,
Sri Kumar Ankit Srivastava, Sri Manoj Kumar
Singh, Sri Siddharth Chaudhary, Sri Sujan Singh

Criminal Law - Indian Penal Code, 1860 -
Sections 386, 389, 504 & 506 - As per FIR,
informant, Vice President of Purvanchal
Truck Owners Association, pursued action
against
A.R.T.O.,
leading
to
his
incarceration - Applicant allegedly offered
bribe of ₹1 crore and demanded ₹1 lakh
monthly
to
restrain
informant
from
pursuing case against A.R.T.O, threatening
to defame him through media - He is
further accused of issuing threats, using
abusive language, and posting hate and
derogatory content against public and
religious figures on social media - In
defence, counsel for applicant contends
that allegations are false and motivated
by malice - It is submitted that applicant
has no connection with cases against
A.R.T.O or any criminal activity - FIR is
alleged to be consequence of applicant's
publication
exposing
corruption
in
transport department - Further asserted
that

applicant
neither
sent
any
threatening
messages
nor
visited
informant's
residence
-
Counsel
for
informant contends that applicant falsely
poses as press reporter/editor to conceal
illegal activities, lacks requisite publishing
licenses, and questions authenticity of his
publications
-
Considering
gravity
of
allegations,
including
misuse
of
publication for extortion, abusive remarks
against public figures, and disregard for
religious sentiments, no merit is found in
granting bail - Application rejected. (Para
3, 4, 5, 32)

Application rejected. (E-13)

(Delivered by Hon'ble Mrs. Manju Rani
Chauhan, J)

1. Heard Ms. Mahima Maurya
Kushwaha,
learned
counsel
for
the
applicant, Mr. Desh Ratan Chaudhary,
learned counsel for the informant, Mr. Amit
Singh Chauhan, learned AGA for the State
and perused the record.

2. The instant bail application has
been filed on behalf of the applicant, Amit
Maurya @ Amit Kumar Singh with a
prayer to release him on bail in Case Crime
No.0259 of 2023, under sections 386, 389,
504, 506 IPC, Police Station ? Lalpur,
District?Varuna
(Commissionerate
Varanasi), during pendency of trial.

3. As per the allegations in the
FIR, the informant, serving as the Vice
President of the Purvanchal Truck Owners
Association, stands as the prime witness
and key individual in the FIR lodged
against R.S. Yadav, the A.R.T.O. of
Chandauli. It is alleged that the informant
was instrumental in pursuing the case