# Tejpal Singh v. U.O.I. & Ors

- **Citation:** (2024) 9 ILRA 1587
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-09-13
- **Case number:** Matter Under Article 227 No. 4400 of 2024
- **Bench:** Subhash Vidyarthi
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/tejpal-singh-v-u-o-i-ors-52574
- **Pages:** 6

## Headnote

Civil Law-The Constitution of India,195 0-
Article 227 - The Limitation Act,1963 -
Section
5
-
The
Securitisation
and
Reconstruction of Financial Assets and
Enforcement of Security Interest Act,
2002
-
Section
17
-
Petition
for
expeditious
disposal
of
Securitisation
Application- Securitisation application was
filed with a delay of about 939 days while the
limitation period prescribed under Section 17 is
45 days---When this Court from a perusal of the
record available before it, finds that the DRT
has passed orders in violation of well-settled
principles of law, the Court, under the power of
superintendence conferred by Article 227 of the
Constitution of India, not only has the power to
set aside those orders but it is also the
responsibility of this Court to set aside the
orders passed illegally---A persual of Debt
Recovery Tribunal's order sheet duly establishes
that while condoning the delay of 939 in
presenting the petition on 20/08/2024, on the
same day opportunity to file objection against
the petition against the securitisation application
was closed. Before the application under Section
5 of the Limitation Act was accepted, the
securitisation application itself was not admitted
and therefore in such circumstances accepting
the amendment in that application and closing
the opportunity to present objection against the
application is an action contrary to wellestablished
judicial
principles.---Petition
is
disposed of with the direction that the learned
Debt Recovery Tribunal will ensure to take
further action after passing an order on the
application for review of the order dated
20.08.2024, after giving adequate opportunity
of being heard to the parties in accordance with
law. (Para 20, 24 & 32) (E-15)

List of Cases cited:

Shalini Shyam Shetty & anr. Vs Rajendra
Shankar Patil (2010) 8 SCC 329
1588 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

## Text

9 All. Tejpal Singh Vs. U.O.I. & Ors.
1587
अशभयुक्त्‌ द्वारा्‌ ही्‌ अपराध्‌ काररत्‌ करने्‌
की्‌ कोई्‌ धारणा्‌ बनाना्‌ सांभव्‌ नहीां्‌ है।्‌ ऐसी्‌
जस्थनत्‌
में्‌
इस्‌
अपीलीय्‌
न्यायालय्‌
का्‌
मानना्‌
है्‌
कक्‌
धारा्‌
384 दां०प्र०सां०्‌
के्‌
अांतगफत्‌
पवचारण्‌
न्यायालय्‌
द्वारा्‌
पाररत्‌
ननणफय्‌
में्‌
हस्तक्षेप्‌
करने्‌
के्‌
शलए्‌
कोई्‌
पयाफप्त्‌ आधार्‌ नहीां्‌ है, जजसके्‌ कारण्‌ यह्‌
अपील्‌ सरसरी्‌ तौर्‌ पर्‌ अांगीकरण्‌ के्‌ स्तर्‌
पर्‌ ननरस्त्‌ ककये्‌ जाने्‌ योग्य्‌ है।

23. तद्नुसार, अपीलाथी्‌ की्‌ ओर्‌ से्‌
प्रस्तुत्‌ यह्‌ दाजण्डक्‌ अपील्‌ अांगीकरण्‌ के्‌
स्तर्‌ पर्‌ ही्‌ अपवलांब्‌ तनरस्त्‌ की्‌ जाती्‌ है्‌
तथा्‌
पवचारण्‌
न्यायालय्‌
द्वारा्‌
पाररत्‌
ननणफय्‌ ददनाांक्‌ 13.03.2024 की पुजष्ट्‌ की्‌
जाती्‌ है।

24. कायाफलय्‌ को्‌ ननदेश्‌ ददया्‌ जाता्‌ है्‌
कक्‌ पवचारण्‌ न्यायालय्‌ का्‌ अशभलेख्‌ वापस्‌
भेज्‌ ददया्‌ जाय्‌ तथा्‌ इस्‌ आदेश्‌ की्‌ एक्‌
प्रनतशलपप्‌ सांबांगधत्‌ पवचारण्‌ न्यायालय्‌ को्‌
अनुपालन्‌ हेतु्‌ तुरांत्‌ भेजना्‌ सुननजश्चत्‌ ककया्‌
जाए।
----------
(2024) 9 ILRA 1587
ORIGINAL JURISDICTION
CIVIL SIDE
DATED: LUCKNOW 13.09.2024

BEFORE

THE HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Matter Under Article 227 No. 4400 of 2024

Tejpal Singh ...Petitioner
Versus
U.O.I. & Ors. ...Respondents

Counsel for the Petitioner:
Alok Saxena Khan

Counsel for the Respondents:
A.S.G.I., Arvind Kumar, Brajendra Amiy

Civil Law-The Constitution of India,195 0-
Article 227 - The Limitation Act,1963 -
Section
5
-
The
Securitisation
and
Reconstruction of Financial Assets and
Enforcement of Security Interest Act,
2002
-
Section
17
-
Petition
for
expeditious
disposal
of
Securitisation
Application- Securitisation application was
filed with a delay of about 939 days while the
limitation period prescribed under Section 17 is
45 days---When this Court from a perusal of the
record available before it, finds that the DRT
has passed orders in violation of well-settled
principles of law, the Court, under the power of
superintendence conferred by Article 227 of the
Constitution of India, not only has the power to
set aside those orders but it is also the
responsibility of this Court to set aside the
orders passed illegally---A persual of Debt
Recovery Tribunal's order sheet duly establishes
that while condoning the delay of 939 in
presenting the petition on 20/08/2024, on the
same day opportunity to file objection against
the petition against the securitisation application
was closed. Before the application under Section
5 of the Limitation Act was accepted, the
securitisation application itself was not admitted
and therefore in such circumstances accepting
the amendment in that application and closing
the opportunity to present objection against the
application is an action contrary to wellestablished
judicial
principles.---Petition
is
disposed of with the direction that the learned
Debt Recovery Tribunal will ensure to take
further action after passing an order on the
application for review of the order dated
20.08.2024, after giving adequate opportunity
of being heard to the parties in accordance with
law. (Para 20, 24 & 32) (E-15)

List of Cases cited:

Shalini Shyam Shetty & anr. Vs Rajendra
Shankar Patil (2010) 8 SCC 329
1588 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
(Delivered by Hon'ble Subhash Vidyarthi, J.)

1. य सचक कत ा के सिद्व न असििि श्री आलोक क् ेन ,
सिपिी िंख्य 1 भ रत िंघ के सिद्व न असििि श्री अरसिन्द
कुम र, सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न असििि
श्री प्रि न्त कुम र श्रीि स्ति को ुन तथ पत् िली क अिलोकन
सकय ।

2. भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227 के अिंतगात
प्रस्तुत इ य सचक द्व र य सचक कत ा ने सिपिी िंख्य 2 ऋण
ि ूली न्य य सिकरण, लखनऊ को प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत्
(Securitisation Application) प्र थान -पत् िंख्य
617 न 2022 को सनयत सतसथ सदन िंक 17.09.2024
अथि इ न्य य लय द्व र सनयत की गयी मय िसि में सनणीत
करने क सनदेि देने क अनुरोि सकय है।

3. उपरोि प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् (1)- मे.
आर.के. प्रोसबल्डकॉन प्र इिेट सलसमटेड, (2)- रसिन्र, (3)-
सबजेन्र य दि, (4)- तेजप ल स िंह तथ (5)- देिेन्र य दि ने
सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक के सिरुद्ध सदन िंक
29.08.2022 को ि र 5 परर ीम असिसनयम के अिंतगात एक
प्र थान -पत् के थ प्रस्तुत सकय थ । य सचक के थ म त्
प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् की प्रसत िंलग्न की गयी तथ ि र 5,
परर ीम असिसनयम के अन्तगात प्रस्तुत प्र थान -पत् की प्रसत िंलग्न
नहीं की गयी है। य सचक में यह कथन भी नहीं सकय गय है सक
प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् सिलिंब के थ प्रस्तुत सकय गय थ तथ
इ के थ सिलम्ब को िम करने हेतु प्र थान -पत् प्रस्तुत सकय गय
थ ।

4. प्र थान -पत् को प्रस्तुत करने में हुए सिलिंब को िम
सकये सबन प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् अिंगीकृत नहीं हो कत , सकन्तु
सिलिंब िम करने के पूिा ही ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने
य सचक कत ा द्व र प्र थान -पत् के िंिोिन हेतु प्रस्तुत प्र थान -पत्
सदन िंक 17.04.2023 द्व र स्िीक र कर सलय । उि आदेि में
यह अिंसकत है सक सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न
असििि ने यह आपसत्त की सक प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् परर ीम
अिसि े ब सित थ तथ परर ीम क प्रश्न पहले सनणीत सकय
ज न च सहए इ के उपर न्त भी ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने
य सचक कत ा क िंिोिन प्र थान -पत् स्िीक र कर सलय तथ
सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक को प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत्
सिलिंब िम करने हेतु प्र थान -पत्, दोनों के ही सिरुद्ध आपसत्त प्रस्तुत
करने क सनदेि सदय । सदन िंक 18.05.2023 को ऋण ि ूली
न्य य सिकरण ने एक आदेि प ररत सकय , सज में यह अिंसकत है सक
य सचक कत ा ने कथन सकय सक सिि सदत िंपसत्त क भौसतक
अध्य न उनके प है तथ उि आदेि सदन िंक 18.05.2023
द्व र ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने पिों को यथ सस्थसत बन ए रखने
क सनदेि दे सदय ।

5. सदन िंक 24.07.2024 को सिपिी िंख्य 3
पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न ने पुनः यह अनुरोि सकय सक
प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् परर ीम अिसि े ब सित है और यह
प्रश्न पहले सनणीत सकय ज न च सहए। इ पर न्य य सिकरण ने
अिंतररम आदेि को प्रभ िी रखते हुए नील मी में िंपसत्त िय करने
ि ले व्यसि को पिक र बन ने के प्र थान -पत् के सनस्त रण हेतु
सदन िंक 31.07.2024 की सतसथ सनयत कर दी।

6. सदन िंक 20.08.2024 के आदेि े ऋण
ि ूली न्य य सिकरण ने प्र थान -पत् प्रस्तुत करने में हुए सिलिंब को
िम कर सदय । इ ी आदेि में न्य य सिकरण ने यह भी अिंसकत
सकय सक सिपिीगण को आपसत्त प्रस्तुत करने के सलए सदय गय
अि र म प्त सकय ज त है। नील मी खरीदद र को पिक र बन ने
के सलए प्रस्तुत प्र थान -पत् भी इ ी आदेि े स्िीक र सकय गय ।

7. सदन िंक 27.08.2024 को सिपिी िंख्य 3
पिंज ब नेिनल बैंक के असििि क िक लतन म प्रस्तुत सकय
गय तथ सदन िंक 30.08.2024 के आदेि में यह अिंसकत है सक
नील मी खरीदद र को प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् की प्रसत उ ी सदन
उपलब्ि कर यी गयी। ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने अगली सतसथ
सदन िंक 06.09.2024 को प्रकरण में अिंसतम बह ुनने के सलए
सनयत कर दी।

8. सदन िंक 06.09.2024 के आदेि में अिंसकत है
सक सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न असििि ने
आपसत्त करते हुए कथन सकय सक इ प्रकरण में कोई सििेि िीघ्रत
 सम्मसलत नहीं है, तब भी बहुत िोटे अिंतर ल पर सतसथय ाँ अिंसकत
की ज रही हैं। इ पर न्य य सिकरण ने सदन िंक 17.09.2024
की सतसथ अिंसतम बह के सलए सनयत कर दी।

9. यसचक कत ा के सिद्व न असििि क कथन है सक
य सचक कत ा एक 85 ििीय िृद्ध व्यसि है, सज को उ के घर े
ब हर कर सदय गय है तथ घर को नील म कर सदय गय है।
9 All. Tejpal Singh Vs. U.O.I. & Ors.
1589
य सचक कत ा ििा 2023 े सबन सक ी सनि के अपन गुजरब र कर रह है और इ क रण े यह य सचक स्िीक र करते हुए
ऋण ि ूली न्य य सिकरण को यह सनदेि सदय ज न च सहए सक िह
सनयत सतसथ सदन िंक 17.09.2024 को प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत्
क अिंसतम रूप े सनस्त रण कर दें।

10. इ के सिरुद्ध आपसत्त करते हुए सिपिी िंख्य 3
पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न असििि श्री प्रि न्त कुम र श्रीि स्ति
ने कह सक ऋण ि ूली न्य य सिकरण द्व र प ररत आदेिों े स्पि
होत है सक न्य य सिकरण इ प्रकरण में अनुसचत िीघ्रत े
क याि ही कर रह है, जै सक अन्य प्रकरणों में म न्यतः नहीं
सकय ज त है। ऐ ी पररसस्थसत में ऋण ि ूली न्य य सिकरण को
प्रकरण क और िीघ्र सनस्त रण क सनदेि सदये ज ने क कोई
औसचत्य नहीं है।

11. सिपिी िंख्य 3 पिंज ब नेिनल बैंक के सिद्व न
असििि ने यह भी कथन सकय सक उन्होंने सिलिंब िम करने के
आदेि सदन िंक 20.08.2024 के पुनर िलोकन के सलए एक
प्र थान -पत् प्रस्तुत सकय है, सज क सनस्त रण अभी तक नहीं हुआ
है तथ उि प्र थान -पत् के सनस्त रण के सबन प्रसतभूसतकरण प्र थान -
पत् क अिंसतम सनस्त रण न्य सयक प्रसिय के सिपरीत है।

12. पिों के सिद्व न असििि के तकों को ुन तथ
पत् िली क अिोलकन सकय ।

13. भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227 के अिंतगात
प्रस्तुत यह य सचक ऋण ि ूली न्य य सिकरण के मि लिंसबत ि द
के िीघ्र सनस्त रण के िंबिंि में है तथ उ ि द के भी पिक र इ
य सचक में आिश्यक पिक र हैं। ऋण ि ूली न्य य सिकरण के
 मि प्र थी िंख्य 1, 2, 3 तथ 5 इ य सचक में न तो प्र थी
बन ये गये हैं और न ही सिपिी तथ इ क रण े इ य सचक में
आिश्यक पिों के कु िंयोजन क दोि है।

14. प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् लगभग 939 सदन के
सिलिंब े प्रस्तुत सकय गय थ , जो तथ्य इ य सचक में कहीं
असभकसथत नहीं सकय गय है। अतः य सचक में िंगत तथ्यों के
सिलोसपत सकये ज ने क भी दोि है।

15. ऋण ि ूली न्य य सिकरण के आदेि-पत् के
अिलोकन े स्पि है सक सदन िंक 20.08.2024 को य सचक
प्रस्तुत करने में हुए 939 सदन के सिलिंब को िम करने के थ ही
उ ी सदन य सचक के सिरुद्ध प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त देने क अि र म प्त कर सदय गय । ि र 5 परर ीम
असिसनयम क प्र थान -पत् स्िीक र होने के पूिा प्रसतभूसतकरण
प्र थान -पत् अिंगीकृत ही नहीं हुआ थ और ऐ ी पररसस्थसत में उ
प्र थान -पत् में िंिोिन स्िीक र करन तथ प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त प्रस्तुत करने क अि र म प्त कर देन ुस्थ सपत न्य सयक
स द्ध न्तों के सिपरीत की गयी क याि ही है।

16. ि र 5 परर ीम असिसनयम क प्र थान -पत्
प्रस्तुत कर देने म त् े पिक र यह नहीं म न कते सक िह प्र थान -
पत् सनश्चय की स्िीक र सकय ज येग । ि र 5 परर ीम असिसनयम
क प्र थान -पत् अस्िीक र करने की सस्थसत में प्रसतभूसतकरण प्र थान -
पत् के सिरुद्ध आपसत्त प्रस्तुत करने क कोई अि र उत्पन्न नहीं
होत । ऐ ी पररसस्थसत में ि र 5 परर ीम असिसनयम क प्र थान -
पत् स्िीक र सकये ज ने के पूिा प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त प्रस्तुत करने क कोई औसचत्य नहीं थ । ि र 5 परर ीम
असिसनयम क प्र थान -पत् स्िीक र करने के थ ही प्रसतभूसतकरण
प्र थान -पत् के सिरुद्ध आपसत्त क अि र म प्त कर देन ुस्थ सपत
न्य सयक प्रसिय के सिपरीत प ररत सकय हुआ आदेि प्रतीत होत है
तथ यह आदेि सिसि में िंि या नहीं है।

17. य सचक कत ा के सिद्व न असििि ने इ स्तर पर
तका सदय सक ऋण ि ूली न्य य सिकरण द्व र प ररत आदेि
20.08.2024 की िैित को इ न्य य लय के मि चुनौती
नहीं दी गयी है और इ क रण े उि आदेि के िंदभा में इ
न्य य लय को कोई सटप्पणी नहीं करनी च सहए।

18. भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227 के
प्र सिि न सनम्नित् हैं-

"227. िी न्यायालयों के अधीक्षण
की उच्च न्यायालय की िसि:-

(1) प्रत्येक उच्च न्यायालय, उन
राज्यक्षेत्रों में वफत्र, सजनके म्बन्ध में वह अपनी
असधकाररता का प्रयोग करता है, िी न्यायालयों
और असधकरणों का अधीक्षण करेगा।
(2) पूवफगामी उपबन्ध की व्यापकता
पर प्रसतकूल प्रिाव डाले सबना, उच्च न्यायालय-
(क) ऐ े न्यायालयों े सववरणी माांग
 केगा;
1590 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
(ख) ऐ े न्यायालयों की पद्धसत और
कायफवासहयों के सवसनयमन के सलए ाधारण सनयम
बना केगा और जारी कर केगा तथा प्ररूप
सवसहत कर केगा; और
(ग) सकन्ही ऐ े न्यायालयों के
असधकाररयों द्वारा रखी जाने वाली पुस्तकों,
प्रसवसियों और लेखाओां के प्ररूप सवसहत कर
 केगा।
(3) उच्च न्यायालय उन र्ी ों की
 ारसणयाां िी सस्थर कर केगा जो ऐ े न्यायालयों
के िैररर् तथा िी सलसपकों और असधकाररयों
को तथा उनमें सवसध-व्यव ाय करने वाले
अटासनफयों, असधविाओां और वकीलों को समल
 केगी;
परन्तु खण्ड (2) या खण्ड (3) के
अधीन बनाए गए कोई सनयम, सबसहत सकए गए
कोई प्ररूप या सस्थर की गई कोई ारणी तत् मय
प्रवृत्त सक ी सवसध के उपबन्ध में अ ांगत नहीं होगी
और इनके सलए राज्यपाल के पूवफ अनुमोदन की
अपेक्षा होगी।
(4) इ अनुच्छेद की कोई बात उच्च
न्यायालय को िस्त्र बलों े म्बसन्धत सक ी
सवसध द्वारा या उ के अधीन गसित सक ी
न्यायालय या असधकरण पर अधीक्षण की िसियाां
देने वाली नहीं मझी जाएगी।

19. शादलनी श्याम शेट्टी बनाम राजेन्र शांकर
पादटल (2010) 8 SCC 329 के सनणाय में म ननीय उच्चतम
न्य य लय ने भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227 द्व र उच्च
न्य य लयों को प्रदत्त िसियों की व्य ख्य करते हुए यह कह सक
म ननीय उच्चतम न्य य लय उपरोि प्र सिि न में प्रदत्त अिीिण की
िसियों क प्रयोग अपने अिीनस्थ न्य य लयों तथ न्य य सिकरणों
को उनके िेत् सिक र की ीम में आबद्ध रखने के उद्देश्य े कर
 कते हैं। इ िसि क प्रयोग यह ुसनसश्चत करने के सलए सकय
ज न च सहए सक न्य य लय तथ न्य य सिकरण उनमें सनसहत
िेत् सिक र क प्रयोग करें एििं ऐ करने े अस्िीक र न करें तथ
न्य य लय तथ न्य य सिकरण सिसि क अनुप लन करें। उपरोि के
असतररि उच्च न्य य लय अिीिण की िसि क प्रयोग उ
पररसस्थसत में भी कर कत है जब प्र कृसतक न्य य के स द्ध न्तों क
उल्लिंघन हुआ हो अथि न्य य की सििलत होन स्पि रूप े
पररलसित हो रह हो। भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227 द्व र
उच्च न्य य लय को प्रदत्त िसि िंसिि न की मूलभूत िंरचन क
अिंि है तथ इ को सक ी अन्य सिसि द्व र अथि िंिैि सनक
 िंिोिन द्व र भी ीसमत नहीं सकय ज कत । यह िसि
सििेक िीन है तथ मुसचत प्रकरणों में इ क प्रयोग उच्च
न्य य लय द्व र स्ियिंमेि भी सकय ज कत है। यह िसि व्य पक
एििं बिंिनसिहीन है तथ इ क उद्देश्य उच्च न्य य लयों द्व र
प्रि सनक तथ न्य सयक सनयिंत्ण बन ये रखन है, सज े सक
न्य सयक व्यिस्थ ुगमत पूिाक तथ म्यक रुप े क या करती रहे
और इ क अपयि न हो। इ क उद्देश्य यह है सक न्य य के पसहये
की गसत रुक न ज य तथ न्य य की ि र सनमाल तथ अप्रदूसित रहे,
सज े न्य य लयों तथ न्य य सिकरणों की क या प्रण ली पर जनत
क सिश्व बन रहे।

20. जब यह न्य य लय अपने म्मुख उपलब्ि
असभलेख के अिलोकन े यह प ती है सक ऋण ि ूली
न्य य सिकरण ने सिसि के ुस्थ सपत स द्ध न्तों के उल्लिंघन में आदेि
प ररत सकये हैं तो न्य य लय भ रतीय िंसिि न के अनुच्िेद 227
द्व र प्रदत्त अिीिण की िसि में उन आदेिों को अप स्त करने क
न स िा असिक र रखत है असपतु यह इ न्य य लय क
उत्तरद सयत्ि भी है सक ऋण ि ूली न्य य सिकरण द्व र अिैि सनक
रूप े प ररत आदेिों को सनरस्त करे।

21. प्रस्तुत प्रकरण में प्रसतभूसतकरण और सित्तीय
आसस्तयों के पुनगाठन और प्रसतभूसत सहत क प्रितान असिसनयम,
2002 की ि र 17 के अिंतगात प्र थान -पत् 939 सदन के सिलिंब
 े प्रस्तुत सकय थ , जबसक ि र 17 में 45 सदन की परर ीम
अिसि सनि ाररत है।

22. व्यिह र प्रसिय िंसहत के आदेि 41 सनयम
3क में यह प्र सिि न है सक जह ाँ कोई अपील परर ीम अिसि
 म प्त होने के उपर न्त सिलिंब िम करने हेतु प्र थान -पत् के थ
प्रस्तुत की ज ती है, जब तक अपील ुनि ई हेतु अिंगीकृत न हो
ज य, न्य य लय कोई अिंतररम आदेि प ररत नहीं करेग । यद्यसप
व्यिह र प्रसिय िंसहत के प्र सिि न ऋण ि ूली असिकरण पर
ल गू नहीं होते हैं सकन्तु व्यिह र प्रसिय िंसहत में सम्मसलत
प्रसिय त्मक स द्ध न्त भी न्य य लयों के न्य य सिकरणों, सज में
ऋण ि ूली असिकरण सम्मसलत है, पर ल गू होते हैं।

23. सिलिंब िम होने के पूिा प्र थान -पत् अिंगीकृत
नहीं हुआ तथ प्र थान -पत् अिंगीकरण के पूिा अिंतररम आदेि प ररत
करने क कोई औसचत्य नहीं थ । इ के ब द भी ऋण ि ूली
न्य य सिकरण ने परर ीम े ब सित प्र थान -पत् पर सिलिंब िम
करने के पूिा ही सदन िंक 18.05.2023 को य सचक कत ा के पि
9 All. Tejpal Singh Vs. U.O.I. & Ors.
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में अिंतररम आदेि प ररत करते हुए पिों को यथ सस्थसत बन ये रखने
क आदेि दे सदय , जो न्य योसचत नहीं थ । इ न्य य लय के
 मि य सचक कत ा के सिद्व न असििि ने तका सदय है सक
य सचक कत ा क घर नील म करके उ को घर े ब हर कर सदय
गय है तथ िह ििा 2023 े बेघर होकर रह रह है, जबसक
ऋण ि ूली न्य य सिकरण के आदेि सदन िंक 18.05.2023 में
अिंसकत है सक य सचक कत ा के सिद्व न असििि ने कह सक
 िंपसत्त क भौसतक अध्य न य सचक कत ा के प है और उ ी
सदन िंक को ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने पिों को यथ सस्थसत
बन ये रखने क अिंतररम आदेि प ररत कर सदय । इ न्य य लय
के मि य सचक कत ा के सिद्व न असििि द्व र सदय कथन,
य सचक कत ा सिि सदत िंपसत्त के अध्य न में नहीं है, े यह
प्रतीत होत है सक ऋण ि ूली न्य य सिकरण के मि सदन िंक
18.05.2023 को उनके द्व र सकय गय कथन, सक
य सचक कत ा िंपसत्त के भौसतक अध्य न में है, त्य नहीं है और
ऐ ी तथ्य त्मक पररसस्थसत में य सचक कत ा के पि में अिंतररम
आदेि प ररत सकये ज ने क कोई औसचत्य नहीं थ ।

24. ऋण ि ूली न्य य सिकरण के आदेि-पत् के
अिलोकन े स्पि है सक सदन िंक 20.08.2024 को य सचक
प्रस्तुत करने में हुए 939 सदन के सिलिंब को िम करने के थ ही
उ ी सदन य सचक के सिरुद्ध प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त देने क अि र म प्त कर सदय गय । ि र 5 परर ीम
असिसनयम क प्र थान -पत् स्िीक र होने के पूिा प्रसतभूसतकरण
प्र थान -पत् अिंगीकृत ही नहीं हुआ थ और ऐ ी पररसस्थसत में उ
प्र थान -पत् में िंिोिन स्िीक र करन तथ प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त प्रस्तुत करने क अि र म प्त कर देन ुस्थ सपत न्य सयक
स द्ध न्तों के सिपरीत की गयी क याि ही है।

25. ि र 5 परर ीम असिसनयम क प्र थान -पत्
प्रस्तुत कर देने म त् े पिक र यह नहीं म न कते सक िह प्र थान -
पत् सनश्चय की स्िीक र सकय ज येग । ि र 5 परर ीम असिसनयम
क प्र थान -पत् अस्िीक र करने की सस्थसत में प्रसतभूसतकरण प्र थान -
पत् के सिरुद्ध आपसत्त प्रस्तुत करने क कोई अि र उत्पन्न नहीं
होत । ऐ ी पररसस्थसत में ि र 5 परर ीम असिसनयम क प्र थान -
पत् स्िीक र सकये ज ने के पूिा प्रसतभूसतकरण प्र थान -पत् के सिरुद्ध
आपसत्त प्रस्तुत करने क कोई औसचत्य नहीं थ । ि र 5 परर ीम
असिसनयम क प्र थान -पत् स्िीक र करने के थ ही प्रसतभूसतकरण
प्र थान -पत् के सिरुद्ध आपसत्त क अि र म प्त कर देन ुस्थ सपत
न्य सयक प्रसिय के सिपरीत प ररत सकय हुआ आदेि प्रतीत होत है
तथ यह आदेि सिसि में िंि या नहीं है।
26. ऋण ि ूली न्य य सिकरण ने आदेि सदन िंक
20.08.2024 द्व र प्र थान -पत् प्रस्तुत करने में हुए 939 सदन के
सिलिंब को िम सकय तथ तभी प्र थान -पत् अिंगीकृत हुआ म न
ज येग और इ के उपर न्त सिपिीगण को प्र थान -पत् पर आपसत्त
प्रस्तुत करने क मुसचत अि र सदय ज न च सहए सकन्तु ऋण
ि ूली न्य य सिकरण सदन िंक 20.08.2024 को ही सिपिीगण
द्व र आपसत्त प्रस्तुत सकये ज ने क अि र म प्त कर सदय , जो
आदेि प्र कृसतक न्य य के स द्ध न्तों के उल्लिंघन में प ररत सकय गय
है तथ इ े न्य य के मूलभूत उद्देश्यों की िसत होती है। इ क रण
 े सिपिीगण द्व र आपसत्त प्रस्तुत सकये ज ने क अि र म प्त करने
क आदेि सनरस्त सकये ज ने योग्य है।

27. जब सक अभी तक सिपिीगण को आपसत्त प्रस्तुत
करने क मुसचत अि र नहीं समल है, प्रकरण को अिंसतम बह के
सलए सनयत करन भी िैि सनक रूप े उसचत नहीं है तथ यह
आदेि भी प्र कृसतक न्य य के स द्ध न्तों के उल्लिंघन में प ररत सकय
गय है।

28. जबसक ऋण ि ूली न्य य सिकरण के आदेि
पत् िली पर उपलब्ि है, सजनके अिलोकन े न्य सयक स द्ध न्त क
उल्लिंघन होन ुस्पि रूप े स द्ध होत है, भ रतीय िंसिि न के
अनुच्िेद 227 के अिंतगात प्रदत्त िसियों के अिंतगात यह न्य य लय
उपरोि सटप्पणी करने के सलए न स िा असिकृत है असपतु ब ध्य भी
है।

29. उपरोि तथ्यों तथ पररसस्थसतयों े यह प्रतीत
होत है सक इ प्रकरण में ऋण ि ूली न्य य सिकरण सबन
सिपिीगण को ुनि ई क मुसचत अि र देते हुए अिैि सनक रूप
 े क याि ही कर रह है तथ ऋण ि ूली न्य य सिकरण के पीठ ीन
असिक री न्य सयक प्रसिय के ुस्थ सपत स द्ध न्तों के उल्लिंघन में
सिपिीगणों के सहतों के सिरुद्ध क याि ही कर रहे हैं, जो एक
न्य य सिकरण के पीठ ीन असिक री े ि िंसित आचरण के सिपरीत
है।

30. अतः सदन िंक 20.08.2024 क आदेि इ
 ीम तक सनरस्त सकय ज त है, सज के द्व र सिपिीगण द्व र
आपसत्त प्रस्तुत सकये ज ने क अि र म प्त कर सदय गय तथ
प्रकरण को अिंसतम ुनि ई हेतु सनयत कर सदय गय ।

31. जह ाँ तक आदेि सदन िंक 20.08.2024 द्व र
ि र 5 परर ीम असिसनयम क प्र थान -पत् स्िीक र सकये ज ने क
प्रश्न है, इ िंबिंि में एक पुनर िलोकन प्र थान -पत् प्रस्तुत सकय ज
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चुक है, सज पर ऋण ि ूली न्य य सिकरण पिों को ुनि ई क
 मुसचत अि र देते हुए सिसि उपर न्त आदेि प ररत करेग ।
पुनर िलोकन प्र थान -पत् स्िीक र होने की सस्थसत में सक ी असग्रम
क याि ही की आिश्यकत नहीं रहेगी। पुनर िलोकन प्र थान -पत्
सनरस्त होने की सस्थसत में पिों को ुनि ई क मुसचत अि र देत
हुए असग्रम क याि ही सिसिनु र करन ुसनसश्चत सकय ज येग ।

32. अतः यह य सचक इ सनदेि के थ सनस्त ररत
की ज ती है सक सिद्व न ऋण ि ूली न्य य सिकरण आदेि सदन िंक
20.08.2024 के पुनर िलोकन के सलए प्रस्तुत प्र थान -पत् पर
सिसिनु र, पिों को ुनि ई क मुसचत अि र देते हुए आदेि
प ररत करने के उपर न्त आगे की क य ाि ही करन ुसनसश्चत करेंगे।

33. यह न्य य लय ऋण ि ूली न्य य सिकरण के
पीठ ीन असिक री े यह अपेि करती है सक इ प्रकरण में
असग्रम क याि ही में अपने द्व र पूिा में ुस्थ सपत न्य सयक प्रसिय के
सिरुद्ध अपन यी गयी क यािैली को दोहर एिंगे नहीं तथ न्य सयक
प्रसिय की िुसचत तथ पसित्त को बन ये रखते हुए न्य यपूणा ढिंग
 े सिसिनु र असग्रम क याि ही करन ुसनसश्चत करेंगे।
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