# Vijay Pal Singh v. State of U.P

- **Citation:** (2024) 4 ILRA 33
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2024-04-16
- **Case number:** Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/s 438 CR.P.C No. 807 of 2024
- **Bench:** Ajay Bhanot
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/vijay-pal-singh-v-state-of-u-p-54574
- **Pages:** 6

## Headnote

G.A.

आपराधिक विधि - भारतीय दंड संहिता, 1860 -
िारा 419, 420, 467, 468, 471 - दंड प्रहिया
संहिता, 1973 - िारा 82 - अधिम जमानत -
हदनांक 15.06.2022 को प्रार्थी सहित पााँच नाधमत
एिं एक अज्ञात व्यवि के विरुद्ध दजज प्रार्थधमकी में
आरोप िै हक हदनांक 13.05.2022 को धिकायतकर्त्री
की भूधम का वििय-पर्त्र सि-अधभयुि घनश्याम धसंि
के पक्ष में फजी तरीके से धनष्पाहदत हकया गया,
जबहक धिकायतकर्त्री को कोई िनराधि प्राप्त निीं िुई
- प्रार्थी प्रर्थम सूचना ररपोर्ज में नाधमत निीं िै हकन्तु
धिकायतकर्त्री ने िारा 161 दं०प्र०सं० के अंतगजत हदये
गये अपने बयान में किा हक प्रार्थी भी अन्य
अधभयुिगण के सार्थ इस िोखािडी में सम्ममधित र्था
- उि वििय-पर्त्र के धनष्पादन के संबंि में िेता
घनश्याम धसंि द्वारा भी प्रार्थधमकी दजज कराई गई र्थी,
म्जसमें प्रार्थी को न्यायािय द्वारा अधिम जमानत
प्रदान की जा चुकी िै - प्रार्थजना-पर्त्र का विरोि करते
िुए राज्य सरकार के विद्वान अधिििा ने किा हक
प्रार्थी के विरुद्ध िारा 82 दं०प्र०सं० की कायजिािी
प्रारंभ की जा चुकी िै हकन्तु उनको प्राप्त अनुदेि में
निीं किा गया िै हक िारा 82 दं०प्र०सं० के अंतगजत
34 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
उद्घोषणा
का
प्रकािन
िुआ
िै
या
निीं
-
अधभधनिाजररत, प्राप्त अनुदेिों में ऐसा कोई तथ्य निीं
पाया गया म्जससे यि धसद्ध िो हक प्रार्थी के विरुद्ध
उद्घोषणा का प्रकािन िारा 82(2) दं.प्र.सं. के अनुसार
िुआ िो या न्यायािय ने िारा 82(3) के अंतगजत
उसके समयक प्रकािन पर संतोष व्यि हकया िो -
अतः प्रार्थी को िारा 82(3) दं.प्र.सं. के अंतगजत फरार
घोवषत निीं किा जा सकता, और उसका अंतररम
जमानत प्रार्थजना-पर्त्र गुण-दोष के आिार पर विचारणीय
िै - उपरोि तथ्यों के पररप्रेक्ष्य में, चूाँहक प्रार्थी इस
प्रार्थधमकी में नाधमत निीं िै और धिकायतकर्त्री के
बयान में उसके विरुद्ध कोई विधिष्ट कृत्य का कर्थन
निीं हदया गया िै, सार्थ िी इसी वििय-पर्त्र के संबंि
में सि-अधभयुि घनश्याम धसंि की प्रार्थधमकी में प्रार्थी
को अधिम जमानत प्राप्त िै, अतः प्रार्थी इस प्रकरण में
भी अधिम जमानत का अधिकारी िै। (पैरा 3 से 6,
11, 12)

आवेदन स्वीकार I (E-13)

प्रोद्धृत मामिों की सूची:

## Text

4 All. Vijay Pal Singh Vs. State of U.P.
33
in holding the said applicability, the Apex
Court noted with affirmative that Section
13(1A) of the Commercial Courts Act does
not contain any provision akin tosection
34(3)of the Arbitration Act, 1996 and
merely provides for a limitation period of
60 days from the date of the judgment or
order appealed against, without going into
whether delay beyond this period can or
cannot be condoned.

(46)
Further,
the
expression
'sufficient cause' under Section 5 of the
Limitation Act is not elastic enough to
cover long delays and merely because
sufficient cause has been made out, there is
no right to have such delay condoned. The
Apex Court further held that only short
delays, can be condoned only by way of an
exception and not by the way of rule, and
that too only when the party acted in a
bona fide manner and not negligently.

(47) Since, in the present bunch
of appeals, the impugned order passed by
the Additional District Judge, Barabanki
under Section 34 of the Act, 1996 has been
sought to be challenged by NHAI by filing
a belated appeal under Section 37 of the
Act, 1996 beyond the permissible 60 days
without any "sufficient cause", the abovecaptioned appeals are held to be time
barred."

6. Upon a perusal of the above
judgement, it is clear that the Arbitration
Act being a legislation for speedy redressal,
the delay in filing the appeal can only be
allowed if the appellant makes out a very
strong case and explains the reasons for
delay. In the present case, one does not find
any such reason provided which would
enable this Court to condone the delay.

7. In light of the same, the appeal is
dismissed as barred by limitation.
----------
(2024) 4 ILRA 33
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 16.04.2024

BEFORE

THE HON'BLE AJAY BHANOT, J.

Criminal Misc. Anticipatory Bail Application U/s
438 CR.P.C No. 807 of 2024

Vijay Pal Singh ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Opposite Party

Counsel for the Applicant:
Pawan Kumar Pandey

Counsel for the Opposite Party:
G.A.

आपराधिक विधि - भारतीय दंड संहिता, 1860 -
िारा 419, 420, 467, 468, 471 - दंड प्रहिया
संहिता, 1973 - िारा 82 - अधिम जमानत -
हदनांक 15.06.2022 को प्रार्थी सहित पााँच नाधमत
एिं एक अज्ञात व्यवि के विरुद्ध दजज प्रार्थधमकी में
आरोप िै हक हदनांक 13.05.2022 को धिकायतकर्त्री
की भूधम का वििय-पर्त्र सि-अधभयुि घनश्याम धसंि
के पक्ष में फजी तरीके से धनष्पाहदत हकया गया,
जबहक धिकायतकर्त्री को कोई िनराधि प्राप्त निीं िुई
- प्रार्थी प्रर्थम सूचना ररपोर्ज में नाधमत निीं िै हकन्तु
धिकायतकर्त्री ने िारा 161 दं०प्र०सं० के अंतगजत हदये
गये अपने बयान में किा हक प्रार्थी भी अन्य
अधभयुिगण के सार्थ इस िोखािडी में सम्ममधित र्था
- उि वििय-पर्त्र के धनष्पादन के संबंि में िेता
घनश्याम धसंि द्वारा भी प्रार्थधमकी दजज कराई गई र्थी,
म्जसमें प्रार्थी को न्यायािय द्वारा अधिम जमानत
प्रदान की जा चुकी िै - प्रार्थजना-पर्त्र का विरोि करते
िुए राज्य सरकार के विद्वान अधिििा ने किा हक
प्रार्थी के विरुद्ध िारा 82 दं०प्र०सं० की कायजिािी
प्रारंभ की जा चुकी िै हकन्तु उनको प्राप्त अनुदेि में
निीं किा गया िै हक िारा 82 दं०प्र०सं० के अंतगजत
34 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
उद्घोषणा
का
प्रकािन
िुआ
िै
या
निीं
-
अधभधनिाजररत, प्राप्त अनुदेिों में ऐसा कोई तथ्य निीं
पाया गया म्जससे यि धसद्ध िो हक प्रार्थी के विरुद्ध
उद्घोषणा का प्रकािन िारा 82(2) दं.प्र.सं. के अनुसार
िुआ िो या न्यायािय ने िारा 82(3) के अंतगजत
उसके समयक प्रकािन पर संतोष व्यि हकया िो -
अतः प्रार्थी को िारा 82(3) दं.प्र.सं. के अंतगजत फरार
घोवषत निीं किा जा सकता, और उसका अंतररम
जमानत प्रार्थजना-पर्त्र गुण-दोष के आिार पर विचारणीय
िै - उपरोि तथ्यों के पररप्रेक्ष्य में, चूाँहक प्रार्थी इस
प्रार्थधमकी में नाधमत निीं िै और धिकायतकर्त्री के
बयान में उसके विरुद्ध कोई विधिष्ट कृत्य का कर्थन
निीं हदया गया िै, सार्थ िी इसी वििय-पर्त्र के संबंि
में सि-अधभयुि घनश्याम धसंि की प्रार्थधमकी में प्रार्थी
को अधिम जमानत प्राप्त िै, अतः प्रार्थी इस प्रकरण में
भी अधिम जमानत का अधिकारी िै। (पैरा 3 से 6,
11, 12)

आवेदन स्वीकार I (E-13)

प्रोद्धृत मामिों की सूची:

1. लवेश बनाम राज्य (2012) 8 एससीसी 730

2. अम्बर चौहान @ अमर ससिंह बनाम उ. प्र. राज्य,
आपरासिक प्रकरण असिम जमानत प्रार्थना - पत्र सिंख्या
2670 सन 2023, आदेश सदनािंक 28.11.2023, (तटस्र्
उद्धरण सिंख्या- 2023:एएचसी - लखनऊ :77863)

(Delivered by Hon'ble Ajay Bhanot, J.)

1. प्रार्थी के विद्वान अधिििा श्री
पिन कुमार पाण्डेय तर्था राज्य सरकार
के विद्वान अधिििा श्री पुनीत कुमार
यादि को सुना तर्था पर्त्राििी का
अििोकन हकया।

2. िारा 438 दं०प्र०सं० द्वारा प्रस्तुत
प्रार्थजना-पर्त्र द्वारा प्रार्थी ने मुकदमा
अपराि संख्या 0270 सन 2022 अन्तगजत
िारा 419, 420, 467, 468, 471 भा०द०वि०
र्थाना वबसिां जनपद सीतापुर में अधिम
जमानत की प्रार्थजना की िै।

3. हदनांक 15.06.2022 को प्रार्थी
सहित 5 नाधमत तर्था एक अज्ञात व्यवि
के विरुद्ध धिखाई गई प्रर्थम सूचना
ररपोर्ज में किा गया हक हदनांक
13.05.2022 को धिकायतकती की भूधम
के संबंि में एक वििय-पर्त्र सि-
अधभयुि घनश्याम धसंि के पक्ष में फजी
तरि से धनष्पाहदत िो गया तर्था
धिकायतकती को कोई भी िनराधि प्राप्त
निीं िुई।

4. प्रार्थी प्रर्थम सूचना ररपोर्ज में
नाधमत निीं िै हकन्तु धिकायतकती ने
िारा 161 दं०प्र०सं० के अंतगजत हदये गये
अपने बयान में किा हक प्रार्थी भी अन्य
अधभयुिगण के सार्थ इस िोखािडी में
सम्ममधित र्था।

5. इसी वििय-पर्त्र के धनष्पादन के
संबंि में िेता घनश्याम धसंि ने भी एक
प्रर्थम सूचना ररपोर्ज संख्या 285 सन
2022 अंतगजत िारा 409, 419,420, 467,
468, 471, 506 भा०दं०सं० र्थाना वबसिां
म्जिा सीतापुर में अंहकत करायी र्थी,
4 All. Vijay Pal Singh Vs. State of U.P.
35
म्जसमें प्रार्थी को अधिम जमानत प्रार्थजना
पर्त्र संख्या 2458 सन 2023 में इस
न्यायािय द्वारा पाररत आदेि हदनांक
02.11.2023 द्वारा अधिम जमानत दी जा
चुकी िै।

6. प्रार्थजना-पर्त्र का विरोि करते िुए
राज्य सरकार के विद्वान अधिििा श्री
पुनीत कुमार यादि ने किा हक प्रार्थी के
विरुद्ध िारा 82 दं०प्र०सं० की कायजिािी
प्रारंभ की जा चुकी िै हकन्तु उनको प्राप्त
अनुदेि में निीं किा गया िै हक िारा 82
दं०प्र०सं० के अंतगजत उद्घोषणा का
प्रकािन िुआ िै या निीं।

7. ििेि बनाम राज्य (2012) 8 SCC
730 में माननीय उच्चतम न्यायािय ने
यि अििाररत हकया िै हक सामान्यतयः
एक फरार घोवषत व्यवि को अधिम
जमानत निीं दी जानी चाहिए। माननीय
उच्चतम न्यायािय ने यि अििाररत
हकया हक ऐसी व्यवि म्जसके विरुद्ध
िारण्र् जारी िुआ हकन्तु िि फरार िै
अर्थिा िारण्र् की तामीिी से बचने के
धिए अपने को धिपा रिा िै तर्था जो
िारा 82 दं०प्र०सं० के प्राििानों के अनुसार
फरार व्यवि घोवषत िो चुका िै, अधिम
जमानत पाने का अधिकारी निीं िै।

8. िारा 82 द०प्र०सं० के प्राििान
धनमनित िैं:-

"82. फरार व्यवि के धिए
उद्घोषणा. (1) यहद हकसी न्यायािय को
(चािे साक्ष्य िेने के पश्चात् या धिए
वबना) यि विश्वास करने का कारण िै हक
कोई व्यवि म्जसके विरुद्ध उसने िारण्र्
जारी हकया िै, फरार िो गया िै, या अपने
को धिपा रिा िै म्जससे ऐसे िारण्र् का
धनष्पादन निीं हकया जा सकता तो ऐसा
न्यायािय उससे यि अपेक्षा करने िािी
धिम्खत उद्घोषणा प्रकाधित कर सकता िै
हक िि व्यवि विधनहदजष्ट स्र्थान में और
विधनहदजष्ट समय पर, जो उस उद्घोषणा के
प्रकािन की तारीख से कम से कम तीस
हदन पश्चात् का िोगा, िाम्जर िो।

(2) उद्घोषणा धनमनधिम्खत रूप
से प्रकाधित की जाएगी:-

(i) (क) िि उस नगर या िाम
के, म्जसमें ऐसा व्यवि मामूिी तौर पर
धनिास करता िै, हकसी सिजदृश्य स्र्थान
में सािजधनक रूप से पढी जाएगी,

(ख) िि उस गृि या िासस्र्थान
के, म्जसमें ऐसा व्यवि मामूिी तौर पर
धनिास करता िै, हकसी सिजदृश्य भाग
पर या ऐसे नगर या िाम के हकसी
सिजदृश्य स्र्थान पर िगाई जाएगी,
36 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

(ग) उसकी एक प्रधत उस
न्याय सदन के हकसी सिजदृश्य भाग
पर िगायी जाएगी,

(ii)
यहद
न्यायािय
ठीक
समझता िै तो िि यि धनदेि भी दे
सकता िै हक उद्घोषणा की एक प्रधत उस
स्र्थान में, पररचाधित हकसी दैधनक
समाचार पर्त्र में प्रकाधित की जाए जिााँ
ऐसा व्यवि मामूिी तौर पर धनिास
करता िै।

(3) उद्घोषणा जारी करने िािे
न्यायािय द्वारा यि धिम्खत कर्थन हक
उद्घोषणा विधनहदजष्ट हदन उपिारा (2) के
खण्ड (1) में विधनहदजष्ट रीधत से समयक्
रूप से प्रकाधित कर दी गई िै, इस बात
का धनश्चयाक साक्ष्य िोगा हक इस िारा
की अपेक्षाओं का अनुपािन कर हदया
गया िै और उद्घोषणा उस हदन प्रकाधित
कर दी गई र्थी।

2[(4) जिााँ उपिारा (1) के
अिीन प्रकाधित की गई उद्घोषणा
भारतीय दण्ड संहिता की िारा 302,
िारा 304, िारा 364, िारा 367, िारा
382, िारा 392, िारा 393, िारा 394,
िारा 395, िारा 396, िारा 397, िारा
398, िारा 399, िारा 400, िारा 402,
िारा 436, िारा 449, िारा 459 या िारा
460 के अिीन दण्डनीय अपराि के
अधभयुि व्यवि के संबंि में िै और
ऐसा
व्यवि
उद्घोषणा
में
अपेम्क्षत
विधनहदजष्ट
स्र्थान
और
समय
पर
उपम्स्र्थत िोने में असफि रिता िै तो
न्यायािय, तब ऐसी जााँच करने के
पश्चात् जैसी िि ठीक समझता िै, उसे
उद्घोवषत अपरािी प्रकर् कर सकता िै
और उस प्रभाि की घोषणा कर सकता
िै।

(5) उपिारा (2) और उपिारा
(3) के उपबंि न्यायािय द्वारा उपिारा
(4) के अिीन की गई घोषणा को उसी
प्रकार िागू िोंगे जैसे िे उपिारा (1) के
अिीन प्रकाधित उद्घोषणा को िागू िोते
िैं।"

9. िारा 82 द०प्र०सं० के प्राििानों
के अनुसार न्यायािय ऐसा विश्वास िोने
पर, हक कोई व्यवि म्जसके विरुद्ध
िारण्र् जारी हकया गया िो, फरार िो
गया िै या अपने को धिपा रिा िै,
म्जससे िारण्र् का धनष्पादन निीं हकया
जा सकता, तो न्यायािय धिम्खत
उद्घोषणा प्रकाधित कर सकता िै हक िि
व्यवि विधनहदजष्ट स्र्थान में और विधनहदजष्ट
समय पर प्रस्तुत िो। उद्घोषणा के
प्रकािन की रीधत िारा 82 की उपिारा
(2) में दी गयी िै। उपिारा 3 के
4 All. Vijay Pal Singh Vs. State of U.P.
37
प्राििान के अनुसार उद्घोषणा जारी
करने िािे न्यायािय को उद्घोषणा के
प्रकािन के संबंि में धिम्खत कर्थन से
संतोष अंहकत करना आिश्यक िै।

10. अंबर चौिान @ अमर धसंि
बनाम उ०प्र० राज्य आपराधिक प्रकरण
अधिम जमानत प्रार्थजना-पर्त्र संख्या 2670
सन 2023 में पाररत आदेि हदनांक
28.11.2023
(Neutral
Citation
No.-
2023:AHC
LKO:77863)
में
इस
न्यायािय ने ििेि बनाम राज्य के
धनणजय तर्था िारा 82 दं०प्र०सं० के
प्राििान पर विचार करते िुए यि
प्रधतपाहदत हकया हक िारा 82 दं०प्र०सं०
के अंतगजत व्यवि फरार उद्घोवषत
अपरािी तभी माना जाएगा जब िारा
82 दे०प्र०सं० के समस्त उपिाराओं के
अंतगजत कायजिािी संपूणज िो जाय।

11. प्रस्तुत प्रकरण में ऐसा कोई
तथ्य विद्वान अपर िासकीय अधिििा
को प्राप्त अनुदेिों में कधर्थत निीं हकया
गया िै, म्जससे यि प्रतीत िो हक प्रार्थी
के फरारी की उद्घोषणा का प्रकािन िारा
82 (2) दं०प्र०सं० के अनुसार िुआ िै और
िारा 82(3) के अंतगजत न्यायािय ने इस
उद्घोषणा के समयक प्रकािन से संतुष्ट
िोने का धिम्खत कर्थन हकया िै। ऐसी
पररम्स्र्थधत में यि निीं किा जा सकता
हक प्रार्थी िारा 82(3) दं०प्र०सं० के
अंतगजत फरार व्यवि घोवषत हकया जा
चुका िै। अतः प्रार्थी इस स्तर पर फरार
उद्घोवषत व्यवि निीं किा जा सकता
और
उसके
द्वारा
प्रस्तुत
अंतररम
जमानत प्रार्थजना-पर्त्र गुण-दोष के आिार
पर धनस्ताररत िोने योग्य िै।

12. उपरोि तथ्यों को दृवष्टगत
रखते िुए, जबहक प्रार्थी इस प्रर्थम सूचना
ररपोर्ज में नाधमत निीं िै, धिकायतकमी
ने अपने बयान में प्रार्थी के इस अपराि
में सम्ममधित िोने का कर्थन हकया िै,
हकन्तु उसमें भी प्रार्थी द्वारा हकये गये
हकसी विधिष्ट कृत्य का कर्थन निीं िै
तर्था इसी वििय पर्त्र के संबंि में िेता
सि-अधभयुि
घनश्याम
धसंि
द्वारा
धिखाई गई प्रर्थम सूचना ररपोर्ज के
संबंि में प्रार्थी को अधिम जमानत दी
जा चुकी िै, न्यायािय का मत िै हक
प्रार्थी इस प्रकरण में भी अधिम जमानत
पाने का अधिकारी िै।

13. उपरोि मुकदमा अपराि संख्या
में आिेदक की धगरफ्तारी / न्यायािय
के समक्ष उपम्स्र्थधत की दिा में, उसे
संबंधित र्थाने के भारसािक अधिकारी /
न्यायािय
की
संतुवष्ट
के
अनुसार
38 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
व्यविगत बंि पर्त्र एिं दो प्रधतभू प्रस्तुत
करने पर परीक्षण के अंधतम रूप से
धनस्तारण तक, धनमन ितों के अिीन
अधिम जमानत पर ररिा हकया जाएगाः
- क- आिेदक, यहद आिश्यक िोगा तो
पुधिस अधिकारी द्वारा जॉच िेतु अपेम्क्षत
समय पर उपम्स्र्थत िोगा।

ख- आिेदक मामिे के तथ्यों
से पररधचत हकसी व्यवि या पुधिस
अधिकाररयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से
कोई िमकी, िादा या प्रिोभन निीं देगा
म्जससे हक िि ऐसे तथ्य को न्यायािय
के समक्ष या हकसी पुधिस अधिकारी के
समक्ष प्रकर् न करने पर मान जाए।

ग- आिेदक अदाित की पूिज
अनुमधत के वबना भारत निीं िोडेगा;

घ-
आिेदक
को
प्रत्येक
धनिाजररत धतधर्थ पर ट्रायि कोर्ज के समक्ष
उपम्स्र्थत िोना िोगा, जब तक हक
व्यविगत उपम्स्र्थधत से िूर् न दी गयी
िो;

ड- आिेदक अधभयोजन पक्ष के
गिाि पर दबाि निीं डािेगा / िमकी
निीं देगा। च- आिेदक वििेचना एिं
विचारण के दौरान सियोग करेंगे और
जमानत की स्ितंर्त्रता का दुरुपयोग निीं
करेगा।
----------
(2024) 4 ILRA 38
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 16.04.2024

BEFORE

THE HON'BLE AJAY BHANOT, J.

Criminal Misc. Bail Application No. 2322 of 2024

Aman @ Vansh ...Applicant
Versus
State of U.P. & Ors. ...Opposite Parties

Counsel for the Applicant:
Sri Vikash Chandra Tiwari

Counsel for the Opposite Party:
Sri Ajay Singh Yadav, G.A.

Criminal Law - Indian Penal Code, 1860 -
Sections 363 & 376 - Protection of
Children from Sexual Offences Act, 2012 -
Sections 3⁄4 , 27 - Code of Criminal
Procedure,
1973
-
Section
164A
-
Determination of Age - Counsel on behalf
of applicant submitted that victim was
falsely shown as minor of 16 years in FIR
to implicate applicant under provisions of
POCSO Act and secure his imprisonment -
Age of victim, as alleged in prosecution, is
refuted in view of judgment in Monish v.
St. of U.P. (infra) on grounds that the
victim's age is materially contradictory in
prosecution records - School records
showing
16
years
10
months
are
unreliable and incorrectly registered in
school records by victim's parents to give
her advantage in life - Victim St.d age as
15 years u/s 161 Cr.P.C - No medical
examination to determine victim's age
conducted at time of applicant's arrest, it
was subsequently carried out pursuant to
Court's order in Aman @ Vansh v. St. of
U.P. (infra) - Medical report opines
victim's age to be about 17 years, medical
report is flawed, infact victim was major -
Four-day delay in lodging FIR is fatal to
prosecution - Victim and applicant were
intimate, FIR arose from victim's family's