# Vinod Patel v. State of U.P

- **Citation:** (2025) 5 ILRA 1899
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2025-05-30
- **Case number:** Criminal Appeal No. 74 of 2020
- **Bench:** Siddhartha Varma, Madan Pal Singh
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/vinod-patel-v-state-of-u-p-53377
- **Pages:** 9

## Headnote

G.A.

A.
Criminal
matter-Indian
Penal
Code,1860-
Section
302-Criminal
Procedure Code, 1973-Section 374 (2)-
Challenge to-Conviction-deceased died by
burning in her matrimonial home-The
deceased had a love marriage with the
accused-The
prosecution
failed
to
establish any motive or prior incident of
quarrel-No eye witness or documentary
evidence was produced by the prosecution
to
establish that
the
deceased
was
murdered-PW1, PW2, PW3, PW4, PW5 did
not
support
the
prosecution
as
all
witnesses were relatives of the deceased
who
did
not
witness
the
incident
themselves-The
main
witness,
Rita
(Jethani)
was
not
examined-Medical
report did not support the prosecution
version as the cause of death attributed to
shock and extensive burning-The Court
relied
on
the
precedent
Sharad
Birdhichand Sarda Vs. St. of Mah. which
emphasized that in case of circumstantial
evidence,
all
circumstances
must
be
conclusively proven to establish guiltThus, the prosecution failed to prove the
case beyond reasonable doubt. (Para 1 to
38)
B. It is well-settled that Section 106 of
the Evidence Act does not directly
operate against either a husband or
wife staying under the same roof and
being the last person seen with the
deceased. Section 106 of the Evidence
Act does not absolve the prosecution
of discharging its primary burden of
proving the prosecution case beyond
reasonable doubt. It is only when the
prosecution has led evidence which, if
believed, will sustain a conviction, or
which makes out a prima facie case,
that the question arises of considering
facts of which the burden of proof
would lie upon the accused. (Para 27)

The appeal is allowed. (E-6)

List of Cases cited:

## Text

5 All. Vinod Patel Vs. State of U.P.
1899
----------
(2025) 5 ILRA 1899
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 30.05.2025

BEFORE

THE HON'BLE SIDDHARTHA VARMA, J.
THE HON'BLE MADAN PAL SINGH, J.

Criminal Appeal No. 74 of 2020

Vinod Patel ...Appellant
Versus
State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Appellant:
Alok Kumar Kushwaha, Amit Kumar Pandey,
Rabindra Bahadur Singh

Counsel for the Respondent:
G.A.

A.
Criminal
matter-Indian
Penal
Code,1860-
Section
302-Criminal
Procedure Code, 1973-Section 374 (2)-
Challenge to-Conviction-deceased died by
burning in her matrimonial home-The
deceased had a love marriage with the
accused-The
prosecution
failed
to
establish any motive or prior incident of
quarrel-No eye witness or documentary
evidence was produced by the prosecution
to
establish that
the
deceased
was
murdered-PW1, PW2, PW3, PW4, PW5 did
not
support
the
prosecution
as
all
witnesses were relatives of the deceased
who
did
not
witness
the
incident
themselves-The
main
witness,
Rita
(Jethani)
was
not
examined-Medical
report did not support the prosecution
version as the cause of death attributed to
shock and extensive burning-The Court
relied
on
the
precedent
Sharad
Birdhichand Sarda Vs. St. of Mah. which
emphasized that in case of circumstantial
evidence,
all
circumstances
must
be
conclusively proven to establish guiltThus, the prosecution failed to prove the
case beyond reasonable doubt. (Para 1 to
38)
B. It is well-settled that Section 106 of
the Evidence Act does not directly
operate against either a husband or
wife staying under the same roof and
being the last person seen with the
deceased. Section 106 of the Evidence
Act does not absolve the prosecution
of discharging its primary burden of
proving the prosecution case beyond
reasonable doubt. It is only when the
prosecution has led evidence which, if
believed, will sustain a conviction, or
which makes out a prima facie case,
that the question arises of considering
facts of which the burden of proof
would lie upon the accused. (Para 27)

The appeal is allowed. (E-6)

List of Cases cited:

1. Sharad Birdhichand Sarda Vs St. of Mah.
reported in (1984) 4 SCC 116

2. St. of M.P. Vs Balweer Singh (2025) SCC
Online SC 390

3. Nagendra Shah Vs St. of Bih.

4. Shivaji Chintappa Patil Vs St of Mah. (2021)
AIR SC 1249 (AIR Online 2021 SC 97

5. Mangat Ram Vs St. of Har. (2014) AIR SC
1782
(Delivered by Hon'ble Madan Pal Singh, J.)

प्रारधभभकः-

1- विथमान अपील अपीलािी तवनोद पटेल द्वारा सत्र
परीक्षण सांख्या 36/2018 में अपर सत्र न्द्यायािीश, कक्ष
सांख्या-7,
वाराणसी
द्वारा
पाररि
आदेश
तदनााँतकि
14.11.2019 के तवरूद्ध योतर्जि की गयी है, तर्जसके द्वारा
तवचारण न्द्यायालय ने अपीलािी को मु०अ०सां० 604/2017,
अन्द्िगथि िारा 302 भा०दां०सां०, िाना चोलापुर, र्जनपद
वाराणसी में दोषतसद्ध करिे हुए आर्जीवन कारावास व
25,000/- रूपए अिथदण्ड्ड से दतण्ड्डि तकया है ििा र्जुमाथना न
अदा करने की तथिति में अतभयुक्त को एक वषथ का अतिररक्त
सािारण कारावास भुगिने का आदेश तदया है।
1900 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

अधभयोजन केसः-

2- सांक्षेप में इस अपील के तनथिारण के तलए ससुांगि िथ्य
इस प्रकार हैं तक इस मुकदमें के वादी कैलाश द्वारा तदनााँक
04.08.2017 को एक तलतखि िहरीर प्रदशथ क-1 िानाध्यक्ष
चोलापुर, वाराणसी को इस आशय के साि प्रथिुि की िी तक प्रािी
ने अपनी लडकी अांर्जू की शादी करीब 5-6 वषथ पहले तवनोद पटेल
पुत्र थवगीय प्यारेलाल ग्राम दशनीपुर िाना चोलापुर, वाराणसी के
साि की िी। शादी के बाद तववातहिा मृिका को अतिररक्त दहेर्ज के
तलए वह बहुि मारिा-पीटिा िा। तदनााँक 03.08.2017 को
उसकी बेटी को र्जान से मारने की नीयि से आग लगा दी तर्जससे
उसकी बेटी की हालि गम्भीर होने पर कबीर चौराहा अथपिाल ले
गए र्जहाां उसकी मृत्यु हो गयी, तवनोद घर से िरार है। सायां 4.00
बर्जे र्जब पिा चला िो तदनााँक 04.08.2017 को ररपोटथ
तलखवाने आए हैं।

3- वादी की उपरोक्त िहरीर प्रदशथ क-1 के आिार पर
अपीलािी/अतभयुक्त के तवरूद्ध िारा 498-ए, 304-बी
भा०दां०सां० ििा िारा 3⁄4 दहेर्ज प्रतिषेि अतितनयम1961 के
अिीन मुकदमा पांर्जीकृि हुआ तर्जसकी तचक एि०आइ०आर० प्रदशथ
क-2 के रूप में पत्रावली पर उपलब्ि है। मामले के तववेचक ने
घटनाथिल का तनरीक्षण तकया ििा पांचायिनामा की कायथवाही करिे
हुए मृिका शव को पोथटमाटथम के तलए भेर्जा गया। नक्शा-नर्जरी,
पांचनामा व पोथटमाटथम पत्रावली पर िमशः क-10, क-4 व क-9
के रूप में उपलब्ि है। तववेचक ने गवाहों के बयान दर्जथ करके व
अन्द्य औपचाररकिाएां पूरी करिे हुए अतभयुक्त तवनोद पटेल के
तवरूद्ध पयाथप्त साक्ष्य पािे हुए आरोप-पत्र अन्द्िगथि िारा 498-ए,
302 भा०दां०सां व िारा 3⁄4 दहेर्ज प्रतिषेि अतितनमय में प्रेतषि
तकया। सम्बतन्द्िि मतर्जथट्रेट द्वारा तववेचक द्वारा प्रथिुि आरोप पत्र पर
तदनााँक 12.01.2018 को सांज्ञान तलया ििा िारा 207
दां०प्र०सां० की सभी औपचाररकिाएां पूरी करिे हुए पत्रावली तदनाांक
25.01.2018 को सत्र न्द्यायालय को तवचारण हेिु सुपूदथ कर
तदया। तवचारण न्द्यायालय द्वारा तदनाांक 20.03.2018 को
अतभयुक्त/अपीलािी तवनोद पटेल के तवरूद्ध िारा 498-ए, 302
भा०दां०सां एवां िारा 4 दहेर्ज प्रतिषेि अतितनयम का आरोप तवरतचि
तकया। आरोप अतभयुक्त को पढकर सुनाये गये तर्जस पर अतभयुक्त ने
आरोपों का खण्ड्डन करिे हुए तवचारण की मााँग की।

अधभयोजन साक्षीः-

4- अतभयुक्त के तवरूद्ध लगाए गए आरोपों को सातबि करने
के तलए अतभयोर्जन के द्वारा िथ्य के साक्षी के रूप में पी०डब्जयू०1 वादी कैलाश, पी०डब्जयू०-2 मृिका की मााँ तवमला देवी,
पी०डब्जय०-03 मृिका का भाई गुड्डू पटेल ििा पी०डब्जयू०-04
के रूप में प्रीिी (मृिका की बहन) ििा औपचाररक साक्षी के रूप में
पी०डब्जयू०-05 काांथटेबल प्रमोद कुमार मौयथ, पी०डब्जयू०-06
नायब िहसीलदार आनन्द्द कुमार कन्द्नौतर्जया, पी०डब्लू०-07 डॉ०
पी०के० भारिी, पी०डब्लयू०-8 क्षेत्रातिकारी अतभनव यादव,
पी०डब्जयू०-9 इस घटना के तववेचक तवनय प्रकाश तसांह को
परीतक्षि कराया गया।

5- तवचारण के दौरान अतभयोर्जन में तनम्न दथिावेर्जी साक्ष्यों
को तनम्न प्रदशों के रूप में सातबि कराया गयाः-

साक्ष्य
प्रदशथ
तलतखि िहरीर
क-1
तचक एि०आइ०आर०
क-2
र्जी०डी० मुकदमा कायमी
क-3
पांचायिनामा
क-4
तचट्ठी आर०आई० सी०एम०ओ०
क-5
तचट्ठी मुख्य तचतकत्सातिकारी
क-6
पुतलस प्रपत्र िामथ
क-7
पुतलस प्रपत्र सां०-13
क-8
पोथटमाटथम
क-9
नक्शा-नर्जरी
क-10
आरोप-पत्र
क-11

6- अतभयोर्जन साक्ष्य समाप्त होने के उपरान्द्ि अतभयुक्त के
बयान अन्द्िगथि िारा 313 दां०प्र०सां० अांतकि तकये गये तर्जसमें
अतभयुक्त ने थवयां को तनदोष बिाया एवां तवशेष रूप से यह कहा है
तक घटना के समय वह काम पर गया िा, उसकी भाभी ने िोन
करके सूचना दी िी, िब मैं कबीर चौराहा अथपिाल गया और दवा
करायी र्जहााँ उसकी पत्नी की मृत्यु हो गयी।

7- हमने अपीलािी के तवद्वान अतिवक्ता ििा रायय की
ओर से तवद्वान अपर शासकीय अतिवक्ता को सुना ििा पत्रावली पर
उपलब्ि साक्ष्यों का अवलोकन तकया।
5 All. Vinod Patel Vs. State of U.P.
1901

8- हमारे तवचार में साक्ष्य का मूजयााँकन करके तकसी
तनष्कषथ पर पहुांचने से पहले, अतभयोर्जन के द्वारा प्रथिुि सातक्षयों के
साक्ष्य का उजलेख तकया र्जाना उतचि प्रिीि होिा है।

9- पी०डब्जयू०-01 के रूप में इस घटना के वादी कैलाश
को परीतक्षि कराया गया तर्जसने अपनी मुख्य परीक्षा के रूप में मुख्य
रूप से यह कहा है तक उसने अपनी लडकी की शादी तवनोद पटेल
के साि वषथ 2009 में की िी। शादी में कोई दहेर्ज की मााँग नहीं
की गयी िी। तवनोद पटेल मेरी लडकी को मारिा-पीटिा नहीं िा
बाद में मारिा-पीटिा िा। मेरी लडकी के ऊपर तमट्टी का िेल तिडके
िे मैं नहीं बिा सकिा क्योंतक मैं बहुि दूर िा। उसकी लडकी को
मारने-पीटने से गम्भीर चोटे आई हैं। तवनोद के घरवाले उसकी
लडकी को अथपिाल ले र्जाकर भिी कराये हैं। तवनोद घर से भाग
गया। अथपिाल में अगले तदन उसकी लडकी की मृत्यु हो गयी। इस
साक्षी ने अपने द्वारा प्रथिुि िहरीर पर अपने हथिाक्षर की तशनाख्ि
की ििा िहरीर को प्रदशथ क-1 के रूप में सातबि तकया है।

10- पी०डब्जयू०-2 के रूप में अतभयोर्जन द्वारा साक्षी
तवमला देवी को परीतक्षि कराया है तर्जसमें उसने अपनी मुख्य परीक्षा
में यह कहा है तक मेरी लडकी अांर्जू की शादी तवनोद पटेल के साि
8-9 वषथ पहले हुई िी, शादी के बाद तवनोद उसकी लडकी को
मारिा-पीटिा िा, तवनोद दूसरी लडकी से प्यार करिा िा एवां अांर्जू
के मना करने पर उसे मारिा-पीटिा िा और उसे प्रिातडि करिा िा।
साक्षी ने यह भी कहा है तक मेरी लडकी को तवनोद ने र्जलाकर मार
डाला, तवनोद दूसरी शादी करने की िमकी दे रहा िा, तवनोद पटेल
मेरी लडकी को 8-9-10 वषथ पहले भगाकर ले गया िा, मेरी
लडकी के दो बच्चे हैं। र्जब मेरी लडकी र्जल गई िब वह कबीर
चौराहा अथपिाल गया र्जहाां पर उसकी लडकी की मृत्यु हो गयी।

11- पी०डब्लयू०-03 के रूप में अतभयोर्जन के द्वारा गुड्डू
पटेल को परीतक्षि कराया गया है तर्जसने अपनी मुख्य परीक्षा में कहा
है तक उसकी बडी बहन अांर्जू की मृत्यु हो गयी है। अांर्जू की शादी
अतभयुक्त तवनोद पटेल के साि 10 वषथ पहले हुई िी। वह नहीं बिा
सकिी तक उसकी बहन तकस िरह से मरी, तवनोद पटेल ने उसकी
हत्या की या नहीं उसे र्जानकारी नहीं है।

12- पी०डब्जयू०-4 के रूप में अतभयोर्जन द्वारा प्रीिी को
परीतक्षि कराया है उसने भी लगभग ऐसा ही बयान अपनी मुख्य
परीक्षा में तदया है र्जैसातक उसके भाई (पी०डब्जयू०-03) ने तदया
है। उसने मुख्य रूप से अपनी मुख्य परीक्षा में कहा है तक उसकी
बहन तवनोद पटेल के साि बाहर चली गयी िी र्जब वह लौटी िो
उसने शादी कर ली, उसकी बहन के दो बच्चे पैदा हुए तर्जसमें से एक
लडकी आि वषथ एवां लडका पााँच वषथ का है, उसकी बहन कैसे मरी
उसे इसकी र्जानकारी नहीं है, उसे बाद में पिा चला तक तवनोद पटेल
अांर्जू को तकसी दूसरी लडकी के चक्कर में मारिा-पीटिा िा इसतलए
उसने उसे र्जलाकर मार तदया है।

13- पी०डब्जयू०-05 के रूप में काांथटेबल 3995 प्रमोद
कुमार मौयथ को परीतक्षि कराया गया है तर्जसने अपने साक्ष्य के रूप में
कहा है तक तदनााँक 04.08.2017 को िाना चोलापुर में
काांथटेबल मुहररथर के पद पर िैनाि िा, उस तदन वादी द्वारा प्रथिुि
प्रािथना पत्र उसके द्वारा बोल-बोल कर सी०सी०टी०एन०एस०
काांथटेबल रत्नेश कुमार पाण्ड्डेय द्वारा कम्प्यूटर में िीड कराया गया।
इस साक्षी ने तचक एि०आइ०आर कागर्ज सांख्या 4अ/1 लगायि
4अ/3 माकथ करिे हुए प्रदशथ क-2 के रूप में सातबि तकया ििा
र्जी०डी० मुकदमा कायमी कागर्ज सां० 6अ/3 को प्रदशथ क-3 के
रूप में सातबि तकया है।

14- पी०डब्जयू-06 के रूप में अतभयोर्जन द्वारा आनन्द्द
कन्द्नौतर्जया र्जोतक नायब िहसीलदार के रूप में सदर िहसील में
उपतथिि िे, उन्द्होंने अपनी मुख्य परीक्षा में कहा है तक उनके द्वारा
पांचायिनामा व नकल रपट सांख्या 20 समय 10.25 बर्जे तदनााँक
04.08.2017 को करीब 5.45 पर उन्द्हें सूचना प्राप्त हुई। सूचना
पर वह, आरक्षी 2144 िमेन्द्र के साि मौके पर गये और उन्द्होंने
पांचान तनयुक्त करके मृिका का पांचायिनामा िैयार तकया और पांचान
की राय के अनुसार मृिका के शरीर पर आई चोटों का उजलेख करिे
हुए पांचान राय तलखी गयी ििा पांचायिनामा िैयार तकया गया र्जोतक
कागर्ज सांख्या 10अ/1 लगायि 10अ/2 पत्रावली पर मौर्जूद है
तर्जसे उसने प्रदशथ क-4 के रूप में सातबि तकया है ििा शव को
पोथटमाटथम हेिु भेर्जा गया। साक्षी ने तचट्ठी िाना प्रभारी को प्रदशथ क5, मुख्य तचतकत्सातिकारी क-6 ििा मृिका की िोटो लाश क7के रूप में सातबि तकया है।

15- पी०डब्जयू०-07 के रूप डॉ० पी०के० भारिी को
परीतक्षि कराया गया तर्जसने अपने बयान में कहा है तक मुख्य
तचतकत्सातिकारी के आदेश से उनकी ड्यूटी पोथटमाटथम के तलए हुई
िी। उक्त तदनाांक को सायां 4.00 बर्जे मृिका अांर्जू देवी पत्नी तवनोद
पटेल तनवासी ग्राम सोनखे, िाना चोलापुर बनारस के शव का
पोथटमाटथम तकया। पोथटमाटथम के दौरान बाह्य परीक्षण तकया- मृिका
के पूरे शरीर पर अकडन मौर्जूद िी, आांखे बन्द्द िी, मुांह अिखुला
िा, र्जीभ ििा नाखून एन०ए०डी० व प्राकृति द्वार भी एन०ए०डी०,
1902 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
Anti-mortem
इांर्जरी
Dermo
epidermal
Extensive burn इांर्जरी पूरे शरीर पर िी तसवाय तसर के ऊपरी
तहथसे एवां दोनों पैरों के तनचले तहथसे को िोडकर। आतन्द्िरक
परीक्षण- ब्रेन की तझतजलयााँ कन्द्र्जेथटेड िी, वर्जन 1203 ग्राम। दााँि
16-16 मौर्जूद िे। साांस की नली में काबथन के पाटीकजस मौर्जूद
पाए गए। दोनों साइड के िेिडे वर्जन िमशः 435 ग्राम व 410
ग्राम प्लूरा कन्द्र्जेथटेड पाए गए। पेरीकातडथयम कन्द्र्जेथटेड िा हृदय का
वर्जन 250 ग्राम एवां चैम्बर िुल िा। पेरीटोतनअम कन्द्र्जेथटेड िा।
आमाशय में 200 तमली. पानी िा एवां अिपचा चावल पाया गया।
म्यूकस मेम्ब्रेन नामथल िी। िोटी आाँि में पचा हुआ भोर्जन एवां गैस
िी। लीवर कन्द्र्जेथटेड िा तर्जसका वर्जन 1195 ग्राम िा। गालब्लैडर
आिा भरा िा। थपलीन कन्द्र्जेथटेड िा तर्जसका वर्जन 102 ग्राम िा।
तकडनी कन्द्र्जेथटेड पायी गयी। यूट्रस खाली िा। इस साक्षी ने मृिका
की मृत्यु का कारण सदमे एवां अतिक र्जल र्जाने से आई चोटों के
कारण बिाया ििा पोथटमाटथम को प्रदशथ क-9 के रूप में सातबि
तकया है।

16- पी०डब्जयू०-8 के रूप में अतभयोर्जन में साक्षी
अतभनव यादव को परीतक्षि कराया है तर्जसने शुरुआिी र्जााँच करने के
उपरान्द्ि अतभयुक्त के तवरूद्ध िारा 304-बी, 498-ए व िारा 3⁄4
दहेर्ज प्रतिषेि अतितनयम के िहि कोई साक्ष्य नहीं पािे हुए, मृिका
की मृत्यु र्जलने के कारण मामले को मृिका की हत्या के रूप में पािे
हुए तववेचना एस०एच०ओ० चोलापुर को दे दी िी। इस साक्षी ने
नक्शा-नर्जरी प्रदशथ क-10 के रूप में सातबि तकया है।

17- पी०डब्जयू०-09 के रूप में अतभयोर्जन साक्षी तवनय
प्रकाश तसांह र्जो इस मामले के तववेचक है को परीतक्षि कराया है,
उन्द्होंने अपने बयानों में अपने द्वारा तभन्द्न-तभन्द्न तितियों में र्जो
तववेचना की है उसका ब्यौरा बिाया है ििा अतभयुक्त के तवरूद्ध
िारा 498-ए, 302 भा०दां०सां एवां िारा 3⁄4 दहेर्ज प्रतिषेि
अतितनयम का आरोप-पत्र प्रेतषि तकया है तर्जसे उन्द्होंने प्रदशथ क-11
के रूप में सातबि तकया है।

प्रधतरक्षा साक्ष्यः-

18- अतभयोर्जन की ओर से न िो कोई साक्षी मौतखक रूप
से परीतक्षि कराया गया है न ही कोई दथिावेर्जी साक्ष्य प्रथिुि तकया
गया है।

19- अपीलािी की ओर से मुख्य रूप से िकथ प्रथिुि
तकये गये तक तवचारण न्द्यायालय द्वारा पाररि आदेश तवति के
तवरूद्ध िा, प्राकृतिक न्द्याय के तवरूद्ध है। पी०डब्जयू०-05 ने
घटना का समिथन नहीं तकया है न ही तचतकत्सीय आख्या ने घटना
का समिथन तकया है। घटना का कोई प्रत्यक्षदशी साक्षी नहीं है
तर्जससे यह सातबि हो सके तक मृिका की हत्या की गयी है। अिः
याचना की गयी तक अतभयुक्त की अपील को थवीकार करिे हुए
तवचारण
न्द्यायालय
के
आदेश
एवां
तनणथय
तदनाांक
14.11.2019 को अपाथि तकया र्जाए।

तकव अधभयोजनः-

20- तवद्वान अपर शासकीय अतिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से
यह िकथ प्रथिुि तकया गया है तक मृिका की मृत्यु र्जलने से उसके
ससुराल वाले घर में अपने पति की अतभरक्षा में हुई है, अिः िारा
106 भारिीय साक्ष्य अतितनयम के अनुसार अतभयुक्त को यह
बिाना होगा तक मृिका की मृत्यु कैसे हुई, अिः अवर न्द्यायालय
द्वारा तलया गया तनष्कषथ भारिीय साक्ष्य अतितनयम की िारा
106 के प्राविानों के पररप्रेक्ष्य में के अनुसार पूणथिः सही है
तर्जसमें अपीलीय हथिक्षेप तकये र्जाने की आवश्कयकिा नहीं है।
अिः अपीलािी की तनरथि की र्जाए।

धिश्लेर्णः-

21- उपरोक्त िकों के समिथन में हमने पत्रावली पर आए
साक्ष्यों का सूक्ष्मिः से अवलोकन तकया। यह थवीकृि िथ्य है तक
इस घटना का कोई चश्कमदीद साक्षी नहीं है र्जो भी िथ्य के साक्षी
के कैलाश, तवमला देवी गुड्डु पटेल व प्रीिी को िमशः
पी०डब्जयू० 01, 02, 03, 04 के रूप में परीतक्षि कराया गया
है उन्द्होंने घटना अपनी आांखों से नहीं देखी है क्योंतक वे मृिका के
मायके वाले पररवार से सम्बतन्द्िि हैं इसतलए उनका घटना के
समय मृिका के ससुराल वाले घर में रहकर घटना को देखना
थवाभातवक भी नहीं है। सातक्षयों ने खुद भी अपने साक्ष्यों में
थवीकार तकया है तक वे घटनाथिल पर नहीं िे। अिः हमारे तवचार
में विथमान मामला पूणथिः पररतथितिर्जन्द्य साक्ष्य पर आिाररि है।
पी०डब्जयू०-3 व 4 पक्षरोही हो गये हैं, अिः उनके साक्ष्य का
तवश्लेषण तकये र्जाने का कोई औतचत्य नहीं है।

22- पररतथितिर्जन्द्य साक्ष्य के रूप में तवति-व्यवथिा
Sharad Birdhichand Sarda vs. State of
Maharashtra reported in (1984) 4 SCC
116 में माननीय उच्चिम न्द्यायालय द्वारा पााँच थवतणथम तसद्धान्द्ि
प्रतिपातदि करिे हुए यह कहा है तक पररतथितिर्जन्द्य साक्ष्य के मामले
में तनम्न शिें आवश्कयक रूप से पूरी हो र्जानी चातहएः-
5 All. Vinod Patel Vs. State of U.P.
1903

"1.
The
circumstances
from
which the conclusion of guilt is to be drawn
must be fully established.

2. The facts established should be
consistent with the hypothesis of the guilt of
the accused.

3. The circumstances should be of
a conclusive nature and tendency.

4. They should exclude every
possible hypothesis except the one to be
proved.

5.There must be a chain of
evidence so complete as not to leave any
reasonable ground for the conclusion
consistent with the innocence of the
accused and must show that within all
human probability, the act must have been
done by the accused."

23- यतद विथमान मामले में आए साक्ष्य का अवलोकन
तकया र्जाए िो अवर न्द्यायालय द्वारा पाररि तनणथय के अवलोकन से
यह थपष्ट होिा है तक अवर न्द्यायालय ने अतभयुक्त को मात्र िारा
106 भारिीय साक्ष्य अतितनयम के प्राविानों के पररप्रेक्ष्य में ही
िारा 302 भा०दां०सां के अपराि में दोषतसद्ध तकया है। अिः
सवथप्रिम हमारे तवचार से िारा 106 भारिीय साक्ष्य अतितनयम के
प्राविान ििा िारा 106 से सम्बतन्द्िि तवति व्यवथिाओां का
उजलेख करना समीचीन होगा र्जो इस प्रकार हैः-

24- तवशेषिः ज्ञाि िथ्यों को सातबि करने का भार--
र्जबतक कोई िथ्य तवशेषिः तकसी व्यतक्त के ज्ञान में है, िब उस िथ्य
को सातबि करने का भार उस पर है।

दृिान्त

ख पर रेल से तबना तटकट यात्रा करने का आरोप है यह सातबि करने
का भार तक उसके पास तटकट िा उस पर है।

25- तवति व्यवथिा मध्य प्रदेश राज्य बनाम बलिीर
धसंि 2025 एस०सी०सी० आनलाइन एस०सी० 390 में
माननीय उच्चिम न्द्यायालय द्वारा िारा 106 भारिीय साक्ष्य
अतितनयम के प्राविानों के सम्बन्द्ि में यह अतभमि व्यक्त तकया है
तक इस िारा का सहारा दोषतसद्ध करने के तलए िब िक नहीं तलया
र्जा सकिा र्जब िक तक अतभयोर्जन ने िथ्यों को सातबि करने के
अपने प्रारतम्भक भार के दातयत्व का उन्द्मोचन न कर तदया हो।

"This section cannot be used to
support a conviction unless the prosecution
has discharged the onus by proving all the
elements necessary to establish the offence.
It does not absolve the prosecution from the
duty of proving that a crime was committed
even though it is a matter specifically
within the knowledge of the accused and it
does not throw the burden on the accused
to show that no crime was committed."

26- एक अन्द्य तवति व्यवथिा नागेन्र शाि बनाम धबिार
राज्य धनणीत धदनांधकत 14.9.2021 में माननीय उच्चिम
न्द्यायालय ने यह भी अतभमि तदया है तक

"Section 106 is an exception to section
101. Section 101 lays down the general
rule about the burden of proof. "Whoever
desires any Court to give judgment as to
any legal right or liability dependent on the
existence of facts which he asserts, must
prove that those facts exist". Illustration (a)
says- "A desires a Court to give judgment
that B shall be punished for a crime which
A says B has committed. A must prove that
B has committed the crime". This lays down
the general rule that in a criminal case the
burden of proof is on the prosecution and
section 106 is certainly not intended to
relieve it of that duty. On the contrary, it is
designed to meet certain exceptional cases
in which it would be impossible, or at any
rate disproportionately difficult, for the
prosecution to establish facts which are
"especially" within the knowledge of the
accused and which he could prove without
difficulty or inconvenience. The word
"especially" stresses that. It means facts
that are pre-eminently or exceptionally
within his knowledge."
1904 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES

27- एक अन्द्य तवति-व्यवथिा धशिाजी धचंतप्पा पाधटल
बनाम मिाराष्ट्ट्र राज्य ए०आई०आर० 2021 सुप्रीम कोटव
1249 ए०आई०आर० ऑनलाइन 2021 एस०सी० 97 में
माननीय उच्चिम न्द्यायालय द्वारा यह भी अतभमि तदया है तक

"It could thus be seen, that it is
well-settled that Section 106 of the
Evidence Act does not directly operate
against either a husband or wife staying
under the same roof and being the last
person seen with the deceased. Section 106
of the Evidence Act does not absolve the
prosecution of discharging its primary
burden of proving the prosecution case
beyond reasonable doubt. It is only when
the prosecution has led evidence which, if
believed, will sustain a conviction, or
which makes out a prima facie case, that
the question arises of considering facts of
which the burden of proof would lie upon
the accused".

28- उपरोक्त तवति व्यवथिाओां के प्रकाश में विथमान मामले
के िथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन तकया र्जाए िो अतभयोर्जन को
अपने ऊपर सबूि के प्रारतम्भक भार के दातयत्व के उन्द्मोचन से िूट
प्राप्त नहीं होगी। यानी अतभयोर्जन को उन सभी साक्ष्यों को न्द्यायालय
में प्रथिुि करना होगा र्जो अतभयुक्त के दोषी होने का इशारा करिे हों
और उन साक्ष्यों को अतभयोर्जन आसानी से प्रथिुि कर सकिा हो।
विथमान मामले में अतभयोर्जन द्वारा ऐसा कोई साक्षी प्रथिुि नहीं
तकया गया तर्जसने अपने साक्ष्य में इस िथ्य का किन तकया हो तक
घटना वाले तदन घटनाथिल पर घटना के समय अतभयुक्त मौर्जूद िा
अिवा अतभयुक्त/अपीलािी तवनोद पटेल को घटना करने के कुि
समय पूवथ अिवा पश्चाि घटनाथिल पर देखा गया हो, इस िथ्य को
सातबि करने के तलए भी तक, अतभयुक्त घटना काररि करके
घटनाथिल से भागिे हुए देखा गया िा, कोई साक्षी अतभयोर्जन की
ओर से प्रथिुि नहीं तकया गया है िातक इस बाि का तनष्कषथ
तनकाला र्जा सके तक घटना के समय घर में अतभयुक्त ही एकमात्र
व्यतक्त मौर्जूद िा और घटना को उसी के द्वारा अांर्जाम तदया गया हो।

29- उपरोक्त तवति व्यवथिाओां में र्जो तवतिक अतभमि
सवोच्च न्द्यायालय द्वारा तदया गया है उसके अनुसार िारा 106
भारिीय साक्ष्य अतितनयम का सहारा केवल उन मामलों में अतभयुक्त
को दोषतसद्ध करने के तलए तलया र्जा सकिा है तर्जनमें कोई िथ्य
अपवातदक रूप से अतभयुक्त के ज्ञान में हो और तसवाय अतभयुक्त के
तकसी अन्द्य के ज्ञान में उस िथ्य के होने की कजपना भी न रही हो।

30- पी०डब्लयू०-01 र्जोतक घटना का वादी है ििा
पी0डब्जयू0-02 र्जो मृिका की मााँ है ने भी अपने साक्ष्य में यह
कहा है तक मृिका को तवनोद पटेल के पररवारवालों ने अथपिाल में
भिी कराया िा, पी0डबजयू0-01 ने अपनी प्रतिपरीक्षा में यह बाि
भी कही है तक उसे घटना की सूचना तवनोद पटेल की मााँ ने सुबह
5.00 बर्जे दी िी, घटनाथिल पोखरे के पास िा र्जहााँ वे लोग रहिे
िे। पांचायिनामे के अवलोकन से भी यह थपष्ट होिा है तक मृिका की
र्जेिानी रीिा द्वारा मृिका को र्जली अवथिा में कबीर चौराहा
अथपिाल में भिी कराया गया िा। अिः अतभयोर्जन सातक्षयों के
उपरोक्त साक्ष्य से यह थपष्ट है तक मृिका के ससुराल वाले अन्द्य लोग
भी उस घर में तनवास करिे िे अिः ऐसी तथिति में र्जहाां मृिका,
उसका पति, उसके बच्चे, सास ििा र्जेिानी व अन्द्य पररवारर्जन
रहिे हों और घटना को कोई चक्षुदशी साक्षी न हो िो भारिीय साक्ष्य
अतितनयम की िारा 106 के आिार पर मात्र अतभयुक्त के तवरूद्ध
मृिका की हत्या तकये र्जाने की उपिारणा, माननीय सवोच्च
न्द्यायालय द्वारा दी गयी उपरोक्त तवति व्यवथिाओां में तदये गये
अतभमि के तवरूद्ध होगी। यह सामान्द्य प्रज्ञा का प्रश्न है तक घर में
कोई घटना हो र्जाने पर उस घर के पुरुष सदथय घटना में घायल
व्यतक्त को अथपिाल ले र्जािे हैं ििा उस घटना के सम्बन्द्ि में समथि
कायथवातहयााँ भी लगभग भारिीय पररवेश में पुरुष सदथयों द्वारा ही की
र्जािी हैं परन्द्िु विथमान मामले में मृिका को र्जली हालि में उसकी
र्जेिानी रीिा द्वारा कबीर चौराहा अथपिाल में भिी कराया गया
र्जैसातक पत्रावली पर मौर्जूद पांचायिनामे के अवलोकन से थपष्ट होिा
है। अतभयुक्त तवनोद पटेल ने अपने बयान अांिगथि िारा 313
दां0प्र0सां0 में अपनी तथिति थपष्ट करिे हुए यह कहा है तक वह
घटना के समय अपने काम पर िा उसकी भाभी ने उसे िोन पर
सूचना दी िी िब वह कबीर चौराहा अथपिाल गया और दवा
कराया र्जहााँ उसकी पत्नी की मृत्यु हो गयी। अतभयुक्त के उपरोक्त
थपष्टीकरण से यह िथ्य थपष्ट हो र्जािा है तक वह वाथिव में घटना के
समय घटनाथिल पर मौर्जूद ही नहीं िा क्योंतक यतद वह वहााँ मौर्जूद
होिा िो या िो थवयां उसके द्वारा या पररवार के तकसी अन्द्य पुरुष
सदथय द्वारा मृिका को अथपिाल में भिी कराया र्जािा और घर की
तकसी स्त्री को, मृिका को अथपिाल में ले र्जाने की आवश्कयकिा न
होिी। अिः मृिका की र्जेिानी के द्वारा मृिका को अथपिाल में भिी
कराया र्जाना, अतभयुक्त के इस थपष्टीकरण को समिथन देिा है तक
वह घटना के समय घटनाथिल पर मौर्जूद नहीं िा बतजक उसे घटना
की र्जानकारी उसकी भाभी के द्वारा िोन के माध्यम से प्राप्त हुई।

31- यहााँ यह भी उजलेखनीय होगा तक घटनाथिल से कोई
तमट्टी के िेल की कैन अिवा मातचस अिवा र्जल र्जाने का सामान
5 All. Vinod Patel Vs. State of U.P.
1905
बरामद नहीं हुआ है र्जैसातक इस वाद के प्राितमक तववेचक अतभनव
यादव द्वारा अपनी परीक्षा में थवीकार तकया गया है तर्जससे
घटनाथिल के बारे में भी सांदेह उत्पन्द्न होिा है। तवद्वान अवर
न्द्यायालय ने अपने तनणथय ने तनणथय के पृष् सांख्या 5 पर यह अतभमि
व्यक्त तकया है "क्योंधक यधद एक मधिला के सार् ऐसी घटना
घटती िै तो घटना में स्िाभाधिक प्रयुक्त िोने िाला धमट्टी के
तेल का पात्र, माधचस की धतल्ली या आग लगाए जाने का
सामान धकन पररधस्र्धतयों में ििााँ निीं र्ा इसको स्पि करने
की एकमात्र धजभमेदारी अधभयुक्त पर र्ी" र्जैसातक तववेचक ने
अपने साक्ष्य में थवीकार तकया है तक घटनाथिल पर कोई तमट्टी के
िेल का पात्र, मातचस अिवा आग लगाए र्जाने का सामान नहीं
तमला उससे हमारे तवचार में अतभयोर्जन द्वारा कतिि घटनाथिल के
सम्बन्द्ि में सांदेह उत्पन्द्न होिा है न तक आग लगाए र्जाने वाले सामान
का मौके पर न तमलने से इस बाि का तनष्कषथ तनकलिा है तक अगर
ऐसा सामान मौके पर नहीं पाया गया िो उसके सम्बन्द्ि में तथिति
थपष्ट करने की तर्जम्मेदारी अतभयुक्त की होगी। हमारे तवचार में तवद्वान
अवर न्द्यायालय ने थिातपि तवतिक तसद्धान्द्िों के तवरूद्ध र्जाकर
अतभयुक्त पर अपनी तनदोतषिा सातबि करने का भार डाल तदया है
र्जो थिातपि आपरातिक तवतिक तसद्धान्द्िों के तवपरीि है बतजक
अतभयुक्त के तवरूद्ध समथि आरोपों को युतक्तयुक्त सांदेह से परे सातबि
करने का भार अतभयोर्जन का है और सांदेह की तथिति में इसका
लाभ अतभयुक्त के पक्ष में र्जाएगा।

32- मामला पररतथितिर्जन्द्य साक्ष्य पर आिाररि है अिः
ऐसे मामलों में हेिुक एक महत्वपूणथ थिान रखिा है र्जहाां िक
पत्रावली पर आए साक्ष्य के अवलोकन से हेिुक के सम्बन्द्ि में आए
साक्ष्य का प्रश्न है िो हेिुक के सम्बन्द्ि में वादी ने ऐसा कोई किन
अपनी िहरीर में उतजलतखि नहीं तकया है तक अतभयुक्त के द्वारा
मृिका की हत्या करने का कोई अमुक हेिुक रहा िा और न ही उसने
अपने सशपि में तदये गए बयानों में ऐसा कोई हेिुक बिाया है।
हाांलातक पी०डब्लयू०-2 र्जो मृिका की मााँ है ने अपनी मुख्य परीक्षा
में यह किन तकया है तक तवनोद पटेल दूसरी लडकी से प्यार करिा
िा इसतलए वह मृिका के साि मार-पीट करिा िा और वह दूसरी
लडकी के साि शादी करने की िमकी दे रहा िा इसतलए उसने
मृिका को र्जलाकर मार डाला।

33- र्जहााँ िक अतभयोर्जन के द्वारा हेिुक सातबि करने का
प्रश्न है िो, हेिुक के सम्बन्द्ि में अतभयोर्जन की ओर से ऐसा कोई
साक्ष्य पत्रावली पर दातखल नहीं तकया गया तर्जससे अतभयुक्त का
तकसी अन्द्य मतहला के साि तकसी भी प्रकार का सम्बन्द्ि सातबि
होिा हो र्जैसेतक उस कतिि मतहला के साि अतभयुक्त का कोई
पत्राचार, कतिि मतहला के द्वारा अिवा अतभयुक्त के द्वारा एक-दूसरे
को तलखे गए कोई पत्र आतद या मोबाइल के माध्यम से अतभयुक्त
ििा कतिि मतहला के साि की गयी तकसी बािचीि के अांश या
अतभयुक्त के उस मतहला के साि कोई िोटोग्राि आतद पत्रावली पर
दातखल नहीं तकये गये हैं, तर्जससे प्रिमदृष्टया इस बाि का तनष्कषथ
तनकाला र्जा सके तक वाथिव में अतभयुक्त तकसी अन्द्य मतहला के
सम्पकथ में िा और इसी कारण अपीलािी अपनी पत्नी से िुटकारा
पाना चाहिा िा और उसने अपनी पत्नी को राथिे से हटाने के तलए
उसे र्जलाकर मार डाला। यहाां इस बाि का उजलेख करना भी
महत्वपूणथ प्रिीि होिा है तक यतद अतभयुक्त का तकसी अन्द्य मतहला
के साि प्रेम सम्बन्द्ि िा और उसकी पत्नी इस बाि का तवरोि करिी
िी िो इस िथ्य की र्जानकारी तनतश्चि रूप से मृिका के मािा-तपिा
या करीबी पररवारवालों को हो गई होिी और इस बाि का उजलेख
वादी ने अपनी िहरीर में इस आशय से तकया होिा तक अतभयुक्त
तकसी अन्द्य मतहला से सम्बन्द्ि रखिा िा और इसी कारण उसने
मृिका की र्जलाकर हत्या कर दी। अतभयुक्त का तकसी मतहला से
सम्बन्द्ि होना एक महत्वपूणथ िथ्य है तर्जसका िहरीर में तलखा र्जाना
आवश्कयक िा क्योंतक यही िथ्य मृिका की हत्या करने का एक मात्र
आिार िा और यतद वह िथ्य वादी ने िहरीर में भी नहीं तलखा िा
िो कम-से-कम वादी को अपने सशपि बयान में न्द्यायालय के
समक्ष यह बाि बिानी िी तक अतभयुक्त के द्वारा मृिका की हत्या
तकये र्जाने का एकमात्र कारण उसका तकसी अन्द्य मतहला के साि
अनैतिक सम्बन्द्ि िा, परन्द्िु ऐसा कोई किन वादी ने अपनी मुख्य
परीक्षा में भी न्द्यायालय के समक्ष नहीं तकया है। अिः हमारे तवचार में
पी०डब्लयू०-2 तवमला देवी के द्वारा अपने सशपि साक्ष्य में
अतभयुक्त का तकसी मतहला के साि सम्बन्द्ि होने का र्जो किन
तकया गया है वह आिारहीन है और इम्प्रूवमेंट (सुिार) की श्रेणी में
आिा है र्जो तकसी भी दृतष्टकोण से तवश्वसनीय नहीं माना र्जा सकिा।
अिः तवद्वान अवर न्द्यायालय द्वारा अपने तनष्कषथ में प्रेम प्रसांग के
बावि आए साक्ष्य को तवश्वसनीय माना र्जाना िथ्यों के तवपरीि िा,
र्जबतक अतभयुक्त का तकसी अन्द्य मतहला के साि तकसी भी प्रकार
के सम्बन्द्ि का कोई साक्ष्य पत्रावली पर नहीं िा। अिः हमारे तवचार
में अतभयोर्जन अतभयुक्त के तवरूद्ध हेिुक सातबि करने में भी पूणथिः
तविल रहा है।

34- यह सामान्द्य प्रज्ञा का िथ्य है तक तकसी भी अपरािी
का यह थवाभातवक आचरण रहिा है तक वह अपराि को खुले िौर
पर नहीं करिा बतजक सामान्द्यिः वह उसे तिपाकर करने का प्रयास
करिा है िातक वह अपने आप को उस अपराि में सांतलप्त होने से
बचा सके। विथमान मामले में भी अतभयुक्त के पास अनेको अवसर
या िरीके हो सकिे िे र्जहााँ वह अपनी पत्नी की हत्या कर सकिा िा
र्जैसेतक र्जब वह तकसी काम से घर के बाहर र्जा रही होिी या गला
दबाकर या र्जहर देकर या अन्द्य िरीके से उसकी हत्या की र्जा सकिी
िी िातक उसके द्वारा तकया गया आपरातिक कृत्य तकसी की
र्जानकारी में न आ सके, र्जबतक अतभयुक्त के द्वारा अपनी पत्नी को
1906 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
खुले िौर पर र्जलाकर मारे र्जाने से उसका आपरातिक कृत्य
आसपास के लोगों द्वारा आसानी से र्जाना र्जा सकिा िा। अिः
अतभयुक्त के द्वारा अपनी पत्नी को र्जलाकर मारा र्जाना भी हमारे
तवचार में तवश्वसनीय प्रिीि नहीं होिा है। इसके अलावा र्जब भी
तकसी व्यतक्त की र्जान र्जोतखम में रहिी है या उसे इस बाि का
अांदेशा होिा है तक उसकी र्जान को खिरा है, िो यह सामान्द्य
मानवीय आचरण है तक वह अपनी र्जान बचाने की हर सम्भव
कोतशश करिा है, अिः इस मामले में भी यतद िकथ के तलए
अतभयोर्जन का सारा केस सही मान तलया र्जाए िो भी मृिका के
पास इस बाि का पयाथप्त अवसर रहा होगा तक वह अतभयोर्जन के
द्वारा घटना काररि करिे समय उस थिान से भागकर अपने प्राणों की
रक्षा करिी र्जब उसके ऊपर िेल डाला र्जा रहा िा और अपने बचाव
के तलए सांघषथ करिी या आसपास के लोगों से मदद की गुहार
लगािी, ऐसा सम्भव नहीं है तक वह चुप-चाप अपने ऊपर अपने
पति से िेल डलवािी रहेगी और इस बाि का इांिर्जार करिी रहेगी
तक उसका पति िेल डालकर उसे आग लगा दे। इस दृतष्टकोण से भी
मृिका की अतभयुक्त के द्वारा हत्या तकये र्जाने का तवश्वास से परे
प्रिीि होिा है।

35- वादी पी०डब्लयू०-1 ििा मृिका की मााँ ने इस बाि
को थवीकार तकया है तक उनकी पुत्री ने अतभयुक्त के साि प्रेमतववाह
तकया िा। अिः सामान्द्यिः प्रेमतववाह वाले मामलों में यह बाि
तवश्वास से परे है तक तर्जस व्यतक्त ने अपनी पत्नी से प्रेमतववाह तकया
हो वह उसे प्रिातडि करे या र्जलाकर उसकी हत्या करे दे। हालााँतक
इस बाि की सम्भावना अवश्कय हो सकिी है तक तववाह हो र्जाने के
पश्चाि मृिका को अपने पति से उस िरह का प्यार अिवा सम्मान न
तमला हो तर्जसकी अपेक्षा के अिीन उसने तववाह तकया िा। तवति
व्यवथिा मंगतराम बनाम िररयाणा राज्य ए०आइ०आर०
2014 सुप्रीम कोटव 1782 में माननीय उच्चिम न्द्यायालय द्वारा
यह तवतिक अतभमि तदया है तक

"A
woman
may attempt
to
commit suicide due to various reasons,
such as, depression, financial difficulties,
disappointment in love, tired of domestic
worries, acute or chronic ailments and so
on"

अिः इस बाि की सम्भावना से इांकार नहीं तकया र्जा सकिा
तक मृिका ने उपरोक्त तकन्द्हीं कारणों में से परेशान होकर अपनी
आत्महत्या न कर ली हो।

36- पत्रावली के अवलोकन से एक महत्वपूणथ िथ्य यह भी
प्रदतशथि होिा है तक मृिका ने अतभयुक्त से प्रेमतववाह तकया िा,
उसके दो बच्चे हैं तर्जनमें से एक घटना के समय लडकी 6 वषथ की
और एक लडका 5 वषथ का िा। अतभयुक्त मर्जदूर वगथ का है, र्जो
पेण्ड्टर का काम करिा है। अतभयोर्जन अतभयुक्त के तवरूद्ध हेिुक भी
सातबि नहीं कर पाया है। मृिका के साि की गयी घटना के पूवथ
कतिि रूप से की गयी मारपीट की कोई तशकायि अिवा
पाररवाररक पांचायि का कोई सबूि पत्रावली पर नहीं है, अिः हमारे
तवचार में ऐसा कोई कारण प्रिीि नहीं होिा तक अतभयुक्त मृिका को
तबना तकसी कारण के र्जलाकर उसकी हत्या करेगा। इस तबन्द्दु पर
तवति थिातपि हो चुकी है तक सांदेह चाहे तर्जिना भी मर्जबूि हो वह
सबूि का थिान नहीं ले सकिा। अिः मात्र शक के आिार पर
अतभयुक्त को दोषी नहीं िहराया र्जा सकिा है।

37- हमारे तवचार से यहााँ यह उजलेखनीय होगा तक इस
मामले में सबसे महत्वपूणथ साक्षी मृिका की र्जेिानी रीिा िी र्जो इस
तबन्द्दु पर प्रकाश डाल सकिी िी तक र्जब वह पहली बार मृिका से
घायल अवथिा में तमली िो मृिका ने उसे अपने र्जलने का क्या
कारण बिाया परन्द्िु अतभयोर्जन द्वारा मृिका की र्जेिानी रीिा को
अतभयोर्जन साक्षी ही नहीं बनाया, इस दृतष्टकोण से भी अतभयोर्जन
की कहानी सांदेहाथपद हो र्जािी है और इसका लाभ तनतश्चि रूप से
अतभयुक्त के पक्ष में र्जायेगा।

38- अिः हमारे तवचार में तवति-व्यवथिा शरद धबरदीचन्द
शारदा बनाम मिाराष्ट्ट्र राज्य (1984) 4 एस0सी0सी0 116
में तदये गये तवतिक अतभमि के प्रकाश में अतभयोर्जन अतभयुक्त के
तवरूद्ध पररतथितियों की श्रांखला को पूणथ करने ििा अपने द्वारा सबूि
के प्रारतम्भक दातयत्व को उन्द्मोतचि करने में तविल रहा है, अिः
हमारे तवचार में तवद्वान अवर न्द्यायालय के द्वारा मात्र िारा 106
भारिीय साक्ष्य अतितनयम के प्राविान के आिार पर अतभयुक्त को
हत्या के अपराि में दोषतसद्ध तकये र्जाने का तनष्कषथ तवति अिवा
िथ्यों के तवपरीि है। अिः अतभयुक्त तवनोद पटेल द्वारा योतर्जि
अपील थवीकार तकये र्जाने योग्य है एवां अवर न्द्यायालय द्वारा पाररि
आदेश एवां तनणथय तदनााँतकि 14.11.2019 अपाथि तकये र्जाने
योग्य है।

आदेश

अिः अतभयुक्त तवनोद पटेल द्वारा योतर्जि अपील सांख्या
74/2020, अन्द्िगथि िारा 302 भा०दां०सां० थवीकार की र्जािी है
और तवद्वान अवर न्द्यायालय द्वारा पाररि आक्षेतपि आदेश तदनााँतकि
14.11.2019 अपाथि तकया र्जािा है। अतभयुक्त को उस पर
लगाए गये आरोप अन्द्िगथि िारा 302 भा०दां०सां०, मु०अ०सां०
604/2017, िाना चोलापुर, तर्जला वाराणसी से दोषमुक्त तकया
5 All. Jahid Beg @ Jahid Jamal Beg Vs. State of U.P.
1907
र्जािा है। अतभयुक्त न्द्यातयक अतभरक्षा में है, यतद वह तकसी अन्द्य
मामले में वाांतिि न हो िो अतवलम्ब ररहा तकया र्जाए। िारा 437ए दां०प्र०सां० का अनुपालन सुतनतश्चि तकया र्जाए।

पत्रावली मय अपीलीय आदेश/तनणथय अवर न्द्यायालय को
अतवलम्ब आवश्कयक कायथवाही हेिु प्रेतषि की र्जाए।
----------
(2025) 5 ILRA 1907
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 28.05.2025

BEFORE

THE HON'BLE SANJAY KUMAR SINGH, J.

Criminal Misc. Bail Application No. 13376 of
2025

Jahid Baig @ Jahid Jamal Beg ...Applicant
Versus
State of U.P. ...Opposite Party

Counsel for the Applicant:
Sr. Advocate, Zeeshan Mazhar

Counsel for the Opposite Party:
G.A.

Criminal Law - Bhartiya Nyaya Sanhita,
2023 (Corresponding to Section 306 IPC),
Section 108 - Abetment of suicide -
Ingredients
-
Maid
found
dead
in
employer's house - Allegation of suicide
due to harassment at workplace - No
suicide note - No evidence of instigation,
conspiracy, or aiding the act - Statements
of co-worker and parents of deceased
silent on abetment - Delay of five days in
lodging FIR - Deceased's last calls with
third person (boyfriend) indicate private
cause - Mens rea absent - Prima facie
case not made out - Bail granted. (Paras
7.1-7.4, 9.1, 9.3, 11.9-11.15)

HELD:
In order to bring a case within the purview of
Section 108 BNS, 2023 (corresponding Section
306 IPC), there must be case of suicide and in
the commission of the said offence, the
person who is said to have abetted the
commission of suicide must have played an
active role by an act of instigation or by doing
certain act to facilitate the commission of
suicide. (Para 7.1)

To satisfy the requirement of "instigation",
though it is not necessary that actual words
must be used to that effect or what constitutes
"instigation" must necessarily and specifically be
suggestive
of
the
consequence.
Yet
a
reasonable certainty to incite the consequence
must be capable of being spelt out. Where the
accused had, by his acts or omission or by a
continued course of conduct, created such
circumstances that the deceased was left with
no other option except to commit suicide, in
which case, an "instigation" may have to be
inferred. (Para 7.2)

-In the light of above mentioned settled law, in
case of suicide, a person is liable for abetment if
the person has inter alia instigated the deceased
for committing suicide or has engaged in any
conspiracy
for
committing
suicide
or
intentionally aided the commission of suicide.
(Para 7.4)

Application allowed. (E-14)

List of Cases cited:

1. Mohit Singhal & anr. Vs The St. of
Uttarakhand & ors., (2024) 1 SCC 417

2. Jayedeepsinh Pravinsinh Chavda & ors. Vs St.
of Guj., (2025) 2 SCC 116

3. Ayyub & ors. Vs St. of U.P. & anr., 2025
Supreme (SC) 289

4. Ramesh Kumar Vs St. of Cg., (2001) 9 SCC
618

5. Rajesh Vs St. of Har. (2020) 15 SCC 359

6. Kamaruddin Dastagir Sanadi Vs St. of Kar.
(2024) SCC Online SC 3541

7. Patel Babubhai Manohardas & ors. Vs The St.
of Guj., 2025 Live Law (SC)288