# Yespal Singh Yadav (In Jail) v. The State of U.P

- **Citation:** (2022) 4 ILRA 123
- **Court:** High Court of Judicature at Allahabad
- **Decided:** 2022-03-30
- **Case number:** Criminal Appeal No. 6711 of 2011
- **Bench:** Saurabh Shyam Shamshery
- **Source:** https://unisonlegal.in/judgment/allahabad-high-court/yespal-singh-yadav-in-jail-v-the-state-of-u-p-48408
- **Pages:** 7

## Headnote

A.G.A.

(अ) फौजदारी कानून - भारतीय दंड प्रक्रिया
संक्रिता ,१९७३ - धारा ३७४(२) - दोष क्रसद्ध के
खिलाफ - स्वापक ओषक्रध और मनः प्रभावी पदार्थ
अक्रधक्रनयम, १९८५ - धारा 20 (ि) (ii) (ई) - जिााँ
उल्लंघन, वाक्रिखिक मात्रा से संबंक्रधत िो विााँ
कठोर कारावास, क्रजसकी अवक्रध दस वषथ से कम
निीं िोगी, क्रकन्तु बीस वषथ तक की िो सकती िै
और जुमाथने से भी, जो एक लाि रुपये से कम निीं
िोगा, क्रकन्तु जो दो लाि रुपये तक का िो सकेगा
और लेिबद्ध कारिों के सार् दो लाि रुपये से
अक्रधक का जुमाथना अक्रधरोक्रपत भी क्रकया जा सकता
िै। (पैरा - १४ )

अपीलार्थी दोषसिद्धि के आदेश को चुनौती नहीीं देना
चाहता - मात्र दण्डादेश के कारावाि की अवसि व
अर्थथदण्ड की मात्रा को चुनौती -वासिद्धिक मात्रा िे 99
गुनी चरि बरामद हुई - दोनोीं अपीलार्थी द्वारा िमान
अपराि काररत करना - दोनोीं अपीलार्थी िमान
दींडादेश के असिकारी - दोनोीं अपीलार्थीयोीं द्वारा 13
वषथ का कारावाि पूिथ सकया जाना - उम्र को भी ध्यान
रखना - अपराि िे पूवथ कोई और अपराि का इसतहाि
न होना - कारावाि में रहते हुए कोई प्रसतकूल सिप्पिी
का भी न होना । (पैरा - २,१५, १९ )

(ब) स्वापक ओषक्रध और मनः प्रभावी पदार्थ
अक्रधक्रनयम, १९८५ - धारा 32 ि - न्यूनतम दंड से
उच्चतर दंड अक्रधरोक्रपत करने के क्रलए क्रवचार में
क्रलए जाने वाली बातें - सजा देने के पिलुओं को
िल्के में निी लेना चाक्रिए, क्ोंक्रक आपराक्रधक न्याय
व्यवस्र्ा का यि भाग समाज पर क्रनिाथयक प्रभाव
डालता िै - अपराधों के क्रलए सजा का तीन परीक्षि
- अपराध परीक्षि, आपराक्रधक परीक्षि और
तुलनात्मक अनुपाक्रतकता परीक्षि के मापदण्ड पर
परीक्षि क्रकया जाना ।( पैरा - ११ ,१२)

क्रनिथय : दोनोीं अपीलार्थीयोीं के सवरुि दोषसिद्धि के
आदेशोीं को मान्य करते हुए िींबींसित दींडादेश में पाररत
कारावाि की अवसि, उनके द्वारा आज तक व्यतीत
कारावाि की अवसि में पररवसतथत सकया जाता है । अर्थथ
दींड की मात्रा को न्यूनतम करते हुए दोनोीं अपीलार्थी पर
अलग अलग एक-एक लाख रुपये का अर्थथदण्ड
सनिाथररत सकया जाता है, सजिकी अदायगी न करने पर
दोनोीं अपीलार्थी को अलग अलग एक-एक वषथ का
असतररक्त कारावाि भुगतना पडेगा। ( पैरा - २० )

आपराक्रधक अपील आंक्रिक रूप से स्वीकायथ। (E-7)

उद्धृत मामलों की सूची :-

## Text

4 All. Yespal Singh Yadav Vs. The State of U.P.
123
doubt. As a result, the appeal is allowed.
The judgment and order of the trial court is
set aside. The appellants are acquitted of
the charges for which they have been tried.
The appellant no.1 (Birnami) is on bail, he
need not surrender subject to compliance of
section 437-A Cr.P.C. to the satisfaction of
the court below. The appellant no.2 (Tej
Pal) is reportedly in jail. He shall be set at
liberty forthwith subject to compliance of
the provisions of section 437-A Cr.P.C. to
the satisfaction of the court below.

32. Let the certified copy of the
judgment and the record of the court below
be sent to the trial court for information and
compliance.
----------
(2022)04ILR A123
APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: ALLAHABAD 30.03.2022

BEFORE

THE HON'BLE SAURABH SHYAM
SHAMSHERY, J.

Criminal Appeal No. 6711 of 2011

Criminal Appeal No. 6975 of 2011

Yespal Singh Yadav ...Appellant (In Jail)
Versus
The State of U.P. ...Respondent

Counsel for the Appellant:
Sri Mahavir Verma, Sri Nitin Agarwal, Sri
Rajesh Kumar Singh, Sri Santosh Kumar
Rai, Sri Satya Dheer Singh Jadaun, Sri
Utkarsh Singh

Counsel for the Opposite Party:
A.G.A.

(अ) फौजदारी कानून - भारतीय दंड प्रक्रिया
संक्रिता ,१९७३ - धारा ३७४(२) - दोष क्रसद्ध के
खिलाफ - स्वापक ओषक्रध और मनः प्रभावी पदार्थ
अक्रधक्रनयम, १९८५ - धारा 20 (ि) (ii) (ई) - जिााँ
उल्लंघन, वाक्रिखिक मात्रा से संबंक्रधत िो विााँ
कठोर कारावास, क्रजसकी अवक्रध दस वषथ से कम
निीं िोगी, क्रकन्तु बीस वषथ तक की िो सकती िै
और जुमाथने से भी, जो एक लाि रुपये से कम निीं
िोगा, क्रकन्तु जो दो लाि रुपये तक का िो सकेगा
और लेिबद्ध कारिों के सार् दो लाि रुपये से
अक्रधक का जुमाथना अक्रधरोक्रपत भी क्रकया जा सकता
िै। (पैरा - १४ )

अपीलार्थी दोषसिद्धि के आदेश को चुनौती नहीीं देना
चाहता - मात्र दण्डादेश के कारावाि की अवसि व
अर्थथदण्ड की मात्रा को चुनौती -वासिद्धिक मात्रा िे 99
गुनी चरि बरामद हुई - दोनोीं अपीलार्थी द्वारा िमान
अपराि काररत करना - दोनोीं अपीलार्थी िमान
दींडादेश के असिकारी - दोनोीं अपीलार्थीयोीं द्वारा 13
वषथ का कारावाि पूिथ सकया जाना - उम्र को भी ध्यान
रखना - अपराि िे पूवथ कोई और अपराि का इसतहाि
न होना - कारावाि में रहते हुए कोई प्रसतकूल सिप्पिी
का भी न होना । (पैरा - २,१५, १९ )

(ब) स्वापक ओषक्रध और मनः प्रभावी पदार्थ
अक्रधक्रनयम, १९८५ - धारा 32 ि - न्यूनतम दंड से
उच्चतर दंड अक्रधरोक्रपत करने के क्रलए क्रवचार में
क्रलए जाने वाली बातें - सजा देने के पिलुओं को
िल्के में निी लेना चाक्रिए, क्ोंक्रक आपराक्रधक न्याय
व्यवस्र्ा का यि भाग समाज पर क्रनिाथयक प्रभाव
डालता िै - अपराधों के क्रलए सजा का तीन परीक्षि
- अपराध परीक्षि, आपराक्रधक परीक्षि और
तुलनात्मक अनुपाक्रतकता परीक्षि के मापदण्ड पर
परीक्षि क्रकया जाना ।( पैरा - ११ ,१२)

क्रनिथय : दोनोीं अपीलार्थीयोीं के सवरुि दोषसिद्धि के
आदेशोीं को मान्य करते हुए िींबींसित दींडादेश में पाररत
कारावाि की अवसि, उनके द्वारा आज तक व्यतीत
कारावाि की अवसि में पररवसतथत सकया जाता है । अर्थथ
दींड की मात्रा को न्यूनतम करते हुए दोनोीं अपीलार्थी पर
अलग अलग एक-एक लाख रुपये का अर्थथदण्ड
सनिाथररत सकया जाता है, सजिकी अदायगी न करने पर
दोनोीं अपीलार्थी को अलग अलग एक-एक वषथ का
असतररक्त कारावाि भुगतना पडेगा। ( पैरा - २० )

आपराक्रधक अपील आंक्रिक रूप से स्वीकायथ। (E-7)

उद्धृत मामलों की सूची :-

1. रफीक कुरैशी प्रसत नारकोसिक्स कींिरोल ब्यूरो ईस्टनथ
जोनल यूसनि : (2019) 6 एि िी िी 492
124 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
2. मध्य प्रदेश राि प्रसत उिम व अन्य : (2019) 10 एि
िी िी 300

3. असभयुक्त 'X' प्रसत महाराष्ट्र राि : (2019) 7 एि िी
िी 1

4. गुरुदेव सिींह प्रसत पींजाब राि : (2021) 6 एि िी िी
386

5. कल्लू व अन्य प्रसत उत्तर प्रदेश राि : सिसमनल
अपील िींख्या 741/1983

6. मध्यप्रदेश शािन बनाम ऊिम और अन्य : (2019)
10 एि िी िी 300

7. मध्य प्रदेश शािन प्रसत िुरेश : (2019) 14 एि िी िी
151

8. आसलस्टर ऑन्थानी परेरा प्रसत महाराष्ट्र शािन :
(2012) 2 एि िी िी 648

9. मध्य प्रदेश शािन प्रसत घनश्याम सिींह : (2013) 8 एि
िी िी 13

10. रवजी प्रसत राजस्र्थान शािन : (1996) 2 एि िी िी 175

(Delivered by Hon'ble Saurabh Shyam
Shamshery, J.)

1. दाण्डिक अप़ील संख्या 6711/2011 दोषससद्ध
असियुक्त यशपाल यादव व दाण्डिक अप़ील संख्या
6975/2011 दोषससद्ध असियुक्त संजय कुमार सवश्वकमाा
द्वारा िारत़ीय दि संसिता क़ी धारा 374 (दोष ससण्डद्ध से
अप़ील) क़ी उपधारा (2) के अंतगात दाण्डिल क़ी गई िै,
सजसके द्वारा अपर सजला व सत्र न्यायाध़ीश कक्ष संख्या-
20, कानपुर नगर, द्वारा सत्र पऱीक्षण संख्या 432/09, में
पाररत सनणाय व आदेश सदनांक 19.10.2011 व
21.10.2011 को आक्षेसपत सकया गया िै, सजसके द्वारा
दोनों अप़ीलार्थीयों को आरोसपत अपराध अन्तगात धारा
20 (ि) (ii) (ई), स्वापक ओषसध और मनः प्रिाव़ी पदार्था
असधसनयम, 1985, (संक्षेप में ''असधसनयम 1985') में दोष
ससद्ध सकया गया व अप़ीलार्थी यशपाल ससंि यादव को
15 वषा का सश्रम कारावास व 3 लाि रुपये के अर्था
दि से दण्डित सकया गया व अर्थादि क़ी अदायग़ी न
सकये जाने क़ी दशा में 2 वषा का असतररक्त कारावास
िुगतने का आदेश ि़ी सदया गया व अप़ीलार्थी संजय
कुमार सवश्वकमाा को 18 वषा का सश्रम कारावास व 4
लाि रुपये के अर्थादि से दण्डित सकया गया व
अर्थादि क़ी अदायग़ी न करने क़ी दशा में 3 वषा का
असतररक्त कारावास िुगतने का आदेश ि़ी सदया गया।

अपीलार्थी का पक्ष

2. अप़ीलार्थी यशपाल ससंि यादव क़ी ओर से
सवद्वान असधवक्ता श्ऱी उत्कषा ससंि (अप़ीलार्थी के
असधवक्ता श्ऱी राजेश कुमार ससंि द्वारा सनदेसशत) ने
प्रारम्भ में ि़ी कर्थन सकया सक अप़ीलार्थी दोषससण्डद्ध के
आदेश को चुनौत़ी नि़ीं देना चािता िै तर्था वो मात्र
दिादेश के कारावास क़ी अवसध व अर्थादि क़ी मात्रा
को ि़ी चुनौत़ी देना चािता िै।

3. सवद्वान असधवक्ता ने जेल अध़ीक्षक, कानपुर
नगर द्वारा, अप़ीलार्थी के कारावास क़ी अवसध संबध़ी
प्रमाणपत्र, जो पूरक शपर्थपत्र के द्वारा इस अप़ील क़ी
पत्रावल़ी पर प्रस्तुत सकया गया िै पर इस न्यायालय का
ध्यान आकसषात करवाया सक प्रमाणपत्र क़ी सतसर्थ
(21.01.2022) तक अप़ीलार्थी द्वारा 15 वषा के कारावास
दि में से 12 वषा 11 माि व 29 सदवस व्यत़ीत कर चुका
िै। अर्थाात कऱीब-कऱीब 13 वषा कारावास में व्यत़ीत
कर चुका िै अतः दि के प्रसतस्र्थासपत ससद्धान्तों के
तित 15 वषा के कारावास के दि को अब तक
कारावास में व्यत़ीत 13 वषा के दि में पररवसतात कर
सदया जाये व अर्थादि क़ी मात्रा जो रु0 3 लाि
सनधााररत क़ी िै उसको कम करके न्यूनतम कर सदया
जाये, तो न्याय के उद्देश्ों क़ी प्राण्डि के सलए उसचत
रिेगा।

4. सवद्वान असधवक्ता ने दि के ससद्धान्त के
सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय द्वारा रफीक कुरैशी
प्रति नारकोतिक्स कंिरोल ब्यूरो ईस्टनन जोनल
यूतनि : (2019) 6 एस सी सी 492, मध्य प्रदेश राज्य
प्रति उधम व अन्य : (2019) 10 एस सी सी 300,
अतियुक्त 'X' प्रति महाराष्ट्र राज्य (2019) 7 एस सी
सी 1, गुरुदेव तसंह प्रति पंजाब राज्य: (2021) 6 एस
सी सी 386 के मामलों में पाररत सनणायों व इस
न्यायालय द्वारा कल्लू व अन्य प्रति उत्तर प्रदेश राज्य
(तितमनल अपील संख्या 741/1983, तनर्नय तदनांक
10.07.2020) के मामले में पाररत सनणाय को प्रस्तुत
सकया।
4 All. Yespal Singh Yadav Vs. The State of U.P.
125

5. सवद्वान असधवक्ता ने उपरोक्त सनणायों का
िवाला देते हुए कर्थन सकया सक सकस़ी अपराध़ी को
दि देते समय त़ीन कारकों का पऱीक्षण करना िोता
िै वो िैं- अपराध पऱीक्षण, आपरासधक पऱीक्षण व
तुलनात्मक आनुपासतकता पऱीक्षण, सजसका वतामान
प्रकरण में सत्र न्यायालय द्वारा सवचार नि़ीं सकया
गया। इसके असतररक्त असधसनयम 1985 क़ी धारा 32
ि (न्यूनतम दंड से उच्चतर दंड असधरोसपत करने के
सलए सवचार में सलए जाने वाल़ी बातें) के अंतगात
उच्चतर दंड असधरोसपत करने के कारकों का वणान
करते हुए सवद्वान असधवक्ता ने कर्थन सकया सक
वतामान प्रकरण में 3 असियुक्त (अप़ीलार्थी को
समलाकर) को एक मसिन्द्रा सपकअप वैन के सार्थ
अवरोसधत सकया गया र्था व जांच के दौरान सपकअप
वैन क़ी फशा में बनाये गये गुि स्र्थान जो गाड़ी के
फशा के ऩीचे र्था, विाँ से चरस के एक-एक सकलोग्राम
के 100 बिल बरामद हुए र्थे, सजसक़ी मात्रा
वासणण्डिक मात्रा से 99 गुना असधक र्थ़ी। परन्तु धारा
32 ि में उल्लेण्डित कारक (क) लगायत (च) में से
कोई ि़ी कारक उपण्डस्र्थत नि़ीं र्था, अतः सत्र
न्यायालय के पास न्यूनतम दंड से उच्चतर दंड
असधरोसपत करने का कोई न्यायसंगत कारण नि़ीं र्था
तर्था सत्र न्यायालय द्वारा सदया गया कारण सक
सपकअप वैन से एक गुि स्र्थान से िाऱी मात्रा में चरस
का समलना व असियुु्क्तगण क़ी अपराध में संसलि
िोना, अपराध को और ि़ी गंि़ीर बनाता िै, अप़ीलार्थी
को सदया गया दंडादेश को न्यायसंगत नि़ीं बनाता िै।
अप़ीलार्थी को 15 वषा का दि, प्रकरण के तथ्य व
पररण्डस्र्थसतयों में असधक उच्चतर िै तर्था अप़ीलार्थी
सजसने अबतक13 वषा का कारावास व्यत़ीत कर
सलया िै प्रकरण क़ी पररण्डस्र्थसतयों में उक्त अपराध का
उसचत दि माना जा सकता िै। सवद्वान असधवक्ता ने
यि ि़ी कर्थन सकया सक अप़ीलार्थी वतामान में 37 वषा
का िै अर्थाातु् अपराध काररत करते समय उसक़ी उम्र
मात्र 24 वषा र्थ़ी तर्था दि के सुधारवाद़ी ससद्धान्तों को
ि़ी ध्यान में रिते हुए, अप़ीलार्थी के दि को अबतक
कारावास में व्यत़ीत अवसध में पररवसतात करा जा
सकता िै तर्था अर्था दि क़ी मात्रा को ि़ी यर्थोसचत
कम सकया जा सकता िै।

6. अप़ीलार्थी संजय कुमार सवश्वकमाा का पक्ष
रिते हुए उसके सवद्वान असधवक्ता श्ऱी राजनरायण
ने यि कर्थन सकया सक वो ि़ी मात्र दंडादेश पर
बिस करना चािते िै। उन्होने सनवेदन सकया सक
अप़ीलार्थी संजय कुमार सवश्वकमाा को 18 वषा के
कारावास व 4 लाि रुपये के अर्थादि को आदेश
देने का एक मात्र कारण िै सक वो अपराध में
उपयोग क़ी गई सपकअप वैन का मासलक र्था। अतः
उसका अपराध और ि़ी गम्भ़ीर प्रकृसत का िो जाता
िै। यि कारण धारा 32 ि में उल्लेण्डित कारक व
अन्य कोई न्याय संगत कारक पर आधाररत नि़ीं िै
तर्था कारावास क़ी अवसध व अर्थादि क़ी मात्रा तय
करने में सत्र न्यायालय ने मनमाना रवैया अपनाया
िै। सवद्वान असधवक्ता के अनुसार इस अप़ीलार्थी ने
ि़ी अप़ीलार्थी यशपाल ससंि यादव के समान ि़ी 13
वषा का कारावास व्यत़ीत कर सलया िै अतः उसको
ि़ी उक्त कारावास में व्यत़ीत अवसध व अर्थादि क़ी
मात्रा को कम से कम कर, न्यायसित में आदेश
पाररत करने का सनवेदन सकया।

राज्य का पक्ष

7. राि क़ी ओर से श्ऱी मुन्ना लाल, असतररक्त
शाससकय असधवक्ता ने पक्ष रिा। उन्होने कर्थन
सकया सक, वतामान प्रकरण में 100 सकलोग्राम चरस
एक सपकअप वैन में बनाये गये एक गुि स्र्थान से
प्राि सकया गया र्था। चरस क़ी वासणण्डिक मात्रा 1
सकलोग्राम िै अतः बरामद हुई चरस क़ी मात्रा उक्त
वासणण्डिक मात्रा से 99 गुऩी िै। दोनों अप़ीलार्थी को
सपकअप वैन से सगरफ्तार सकया गया। अतः उनको
इस तथ्य क़ी जानकाऱी र्थ़ी सक सपकअप वैन में इतऩी
असधक मात्रा में चरस छुपाई गई िै। सवद्वान
असधवक्ता ने रफ़ीक कुरेश़ी (पूवा में उल्लेण्डित)
मामले में सनणाय का िवाला देते हुए कर्थन सकया सक
'असधसनयम 1985' क़ी धारा 32 ि में उल्लेण्डित
कारक के असतररक्त सजन्हे न्यायालय ठ़ीक समझें उन
कारक को सवचार में ले सकता िै, अतः बरामद क़ी
गई चरस क़ी अत्यसधक मात्रा (100 सकलोग्राम) ि़ी
एक सवचारण़ीय कारक िो सकता िै। अतः सत्र
न्यायालय ने बरामद क़ी गई चरस क़ी मात्रा को ध्यान
में रिते हुए अप़ीलार्थी यशपाल ससंि यादव को 15
वषा का कारावास का दि व त़ीन लाि रु0 का
अर्थादि का आदेश पाररत करने में तर्था अप़ीलार्थी
संजय कुमार सवश्वकमाा को सपकअप वैन के मासलक
िोने के नाते उसके सवरुद्ध अपराध क़ी असधक
गंि़ीरता को ध्यान में रिते हुए 18 वषा का कारावास
126 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
व चार लाि रु0 का अर्थादि का दंडादेश पाररत
करने में ि़ी कोई सवसधक त्रुसि नि़ीं कऱी िै।

8. मैंने अप़ीलासर्थायों व राि के सवद्वान
असधवक्ताओं को ध्यानपूवाक सुना व पत्रावल़ी का
सम्यक पररश़ीलन सकया।

दण्ड के तसद्धान्त

9. िारत़ीय सवधाय़ी ने दंडादेश के सम्बंध में
कोई ऩीसत सनधााररत नि़ीं कऱी िै, परंतु मालीमर्थ
सतमति (2003) व माधव मेनन सतमति (2008) ने
दंडादेश ऩीसत सनधााररत करने क़ी आवश्कता पर
जोर सदया व ऩीसत बनाने के सलए ससफाररश ि़ी क़ी
िै।

10. दंडादेश के ससद्धांत या दंडादेश क़ी ऩीसत
क्या िो, उच्चतम न्यायालय इस सवषय पर सचंसतत रिा
िै और समय-समय पर अपने सवसिन्न सवसधक उद्धरण
के द्वारा इस सवषय पर स्पष्टता लाने का प्रयास ि़ी
करता रिा िै तर्था सजला न्यायालय व उच्च न्यायालय
द्वारा दंडादेश पाररत करते समय लापरवाि़ी िोने से
रोकने के सलये सचेत ि़ी करता रिा िै।

11. उच्चतम न्यायालय क़ी त़ीन सदस्य़ीय प़ीठ
द्वारा पाररत सनणाय मध्यप्रदेश शासन बनाम ऊधम
और अन्य : (2019) 10 एस सी सी 300 के माध्यम
से पुनः दंडादेश के ससद्धांत पर प्रकाश डाला गया िै
और असिसनधााररत सकया गया :-

"8. आरंि में, यि ध्यान रिना उसचत िै
सक वतामान प्रत्यार्थीगण-असियुक्तगणों क़ी अप़ीलों
को आंसशक रूप से स्व़ीकृत करने और आक्षेसपत
आदेश को पाररत के सलए उच्च न्यायालय का तका
सम्मत सवचार केवल दंडादेश तक ि़ी स़ीसमत िै।
उच्च न्यायालय अपने आदेश में किता िै सक अपराध
क़ी प्रकृसत, यि तथ्य सक प्रत्यार्थीगण का प्रर्थम
अपराध िै और उसके द्वारा पिले से व्यत़ीत सजा क़ी
अवसध को देिते हुए आक्षेसपत आदेश पाररत सकया
गया।

9. इस स्तर पर, इस न्यायालय के
असियुक्त ('X' ) बनाम मिाराष्टर राि (2009) 7 एस.
स़ी. स़ी. 1, सजसमें िम में से दो सदस्य प़ीठ के िाग
र्थे, क़ी सिप्पण़ी िारत में सजा के संबंध में प्रांसंसगक
िै-

"49. आपरासधक प्रसतबंधो का उसचत
आबंिन, जो सक िादातर न्यासयक शािा द्वारा सदया
जाता िै। {सनकोला पैडफ़ील्ड, रॉड मॉगान और
माइक मैगुइयर "न्यायालय से बािर, दृसष्ट से बािर"
आपरासधक प्रसतबंधों और कोई न्यासयक सनणाय नि़ी",
ओक्सफोडा, अपराध शास्त्र क़ी पुण्डस्तका (5 वां,
संस्करण)}। सवचारण के अंत में िोने वाल़ी यि
प्रसिया अि़ी ि़ी आपरासधक न्याय प्रणाल़ी क़ी
प्रिावकाररता पर बडा प्रिाव डालत़ी िै। यह
स्र्थातपि है तक सजा एक सामातजक-तवतधक
प्रतिया है तजसमें एक न्यायाधीश िथ्यात्मक,
पररस्स्र्थियों और ओतित्य पर तविार करिे हुए
अतियुक्त के तलए उतिि दण्ड िलाशिा है। इस
िथ्य के प्रकाश में यह आवश्यक हो जािा है तक
तवधातयका ने न्यायाधीशों को सजा देने के तलए
जो तववेकातधकार प्रदान तकया, उसका उपयोग
एक सैद्धांतिक रुप से तकया जाये। िमें यि
मूल्ांकन करने क़ी जरूरत िै सक सजा देने में एक
सख्त सनधााररत दि क़ी सोच मान्य नि़ी िो सकत़ी
िै, सक न्यायाध़ीश को पयााि स्वसववेक क़ी ि़ी
आवश्कता िोत़ी िै।

50. इस प्रकरण का पऱीक्षण करने से पूवा,
िमें सजा देने क़ी प्रसिया में तासकाकता के प्रिाव के
प्रश्न को संबोसधत करने क़ी आवश्कता िै। सवचारण
न्यायालय क़ी तासकाकता, काररत सकये गये अपराध
क़ी सजा के सलए सामान्य स्तर और तथ्यों व
पररण्डस्र्थसतयों के ब़ीच क़ी कड़ी के जैसे काया करत़ी
िै। सवचारण न्यायालय सजा देने के सलए तकों को देने
के सलए बाध्य िै,क्योंसक प्रर्थमतः नैसतगनक न्याय का
मूलिूि तसद्धांि है तक न्यायकिान को तनर्नय िक
पहुंिने के कारर् अवश्य प्रदान करने िातहए,
और तििीय कारर् अतधक महत्वपूर्न हो जािा है,
क्ोंतक अतियुक्त की स्विंत्रिा उपरोक्त वतर्नि
िकन के अधीन होिी है। इसके आगे, अप़ील़ीय
न्यायालय के समक्ष, सजा क़ी मात्रा को चुनौत़ी देने पर
आदेश क़ी यर्थार्थाता का आकलन करने के सलए
बेितर रुप से सक्षम िो जायेगा, यसद सवचारण
न्यायालय ने उसे कारणों ससित न्यायोसचत ठिराया िै
......" (जोर सदया गया)

10. X X X
4 All. Yespal Singh Yadav Vs. The State of U.P.
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11. िमाऱी यि राय िै सक अवर न्यायालय
द्वारा अपयााि या गलत सजा सदये जाने के कारण इस
न्यायालय के समक्ष बड़ी संख्या में प्रकरण दायर सकये
जा रिे िैं। कसतपय प्रकरणों में दंडादेश देने में
लापरवाि़ी बरतने के सवरुद्ध िमने बार बार चेतावऩी
द़ी िै। इसमें कोई दो राय नि़ी िै सक सजा देने के
पिलुओं को िल्के में नि़ी लेना चासिए, क्योंसक
आपरासधक न्याय व्यवस्र्था का यि िाग समाज पर
सनणाायक प्रिाव डालता िै। इसके प्रकाश में िमाऱी
राय िै सक िमें इसको और स्पष्टता प्रदान करने क़ी
जरूरत िै।

12. अपराधों के तलए सजा को िीन
परीक्षर् अर्थानि अपराध परीक्षर्, आपरातधक
परीक्षर् और िुलनात्मक अनुपातिकिा परीक्षर्
के मापदण्ड पर परीक्षर् तकया जाना है। अपराध
परीक्षर् के कारकों में जैसे अपराध की योजना
की सीमा, अपराध में इस्तेमाल हतर्थयार का
िुनाव, अपराध का िरीका, अपवहन का िरीका
(यतद कोई हो), अतियुक्त की िूतमका, अपराधी
की असामातजकिा या तिनौना िररत्र, पीतिि की
दशा सम्मतलि रहिे है। आपरासधक पऱीक्षण में
कारकों का मूल्ांकन जैसे अपराध़ी क़ी आयु,
अपराध़ी का सलंग, अपराध़ी क़ी आसर्थाक ण्डस्र्थसत या
सामासजक पृष्ठिूसम, अपराध के सलए प्रेरणा, प्रसतरक्षा
क़ी उपलब्धता, मानससक ण्डस्र्थसत, मृतक के समूि में
से सकस़ी के द्वारा उत्प्रेरण, सवचारण में पयााि रूप से
प्रसतसनसधत्व, न्यायाध़ीश द्वारा अप़ील़ीय प्रसिया में
असिमसत, पछतावा, सुधार क़ी संिावना, पूवावती
आपरासधक असिलेि (लंसबत प्रकरणों को न लेकर)
तर्था कोई अन्य सुसंगत कारण (यि एक सवस्तृत सूच़ी
नि़ीं िै) के आधार पर िोना चासिए।

13. इसके असतररक्त िमें यि ध्यान दे
सकते िै सक अपराध पऱीक्षण के अंतगात गंि़ीरता को
सुसनसित सकये जाने क़ी आवश्कता िै। अपराध क़ी
गंि़ीरता को (i) प़ीसडत क़ी शाऱीररक सम्पूणाता; (ii)
िौसतक समर्थान या सुि-सुसवधा क़ी िासन; (iii)
मानिंग क़ी स़ीमा; और (iv) सनजता के उल्लघंन के
द्वारा सनधााररत क़ी जा सकत़ी िै।

"(उपरोक्त
https://main.sci.gov.in/
Supremecourt
vernacular/
2013/
10532_2013_3_1501_
17728
Judgement_22_Oct_
2019_
HIN.
pdf
से
अधोिारण (download) सकया गया िै, सजसमें यि
'िंडन' सलिा गया िै सकः- "क्षेत्ऱीय िाषा में अनुवासदत
सनणाय से आशय केवल पक्षकारों को उनक़ी अपऩी
िाषा में समझने के सलये िै एवं इसका प्रयोग सकस़ी
अन्य उद्देश् के सलये नि़ीं सकया जा सकेगा। सि़ी
व्यविाररक एवं कायाालय़ीन उद्देश् के सलये सनणाय
का अंग्रेज़ी संस्करण ि़ी प्रमासणत िोगा और सनष्पादन
तर्था सियान्वयन के उद्देश् के सलये प्रिाव़ी माना
जायेगा।" अधोिरण के उपरान्त इस न्यायालय ने
स्वयं के स्तर से अनुवाद में कुछ संशोधन ि़ी सकये िैं)

12. उच्चतम न्यायालय के एक और सनणाय जो
मध्य प्रदेश शासन प्रति सुरेश : (2019) 14 एस सी
सी 151 के मामले में पाररत सकया िै का उल्लेि
करना सम़ीच़ीन िोगा। इस सनणाय में उच्चतम
न्यायालय के ि़ी पूवा में सदये गये आतलस्टर ऑन्थानी
परेरा प्रति महाराष्ट्र शासन (2012) 2 एस सी सी
648, मध्य प्रदेश शासन प्रति िनश्याम तसंह
(2013) 8 एस सी सी 13 और रवजी प्रति
राजस्र्थान शासन (1996) 2 एस सी सी 175 के
मामलों में पाररत सनणायों का उल्लेि करते हुए यि
प्रसतपासदत सकया दोष ससद्ध अपराध में दोष़ी को
उसचत व पयााि दंड देना न्यायालय के कताव्य का
िाग रिा िै। सकस़ी मामले में पाररत दंडादेश अपराध
क़ी गंि़ीरता के सार्थ सार्थ प्रासंसगक तथ्य व
पररण्डस्र्थसतयों के अनुरुप ि़ी िोना चासिए। सनस्सन्देि
गंि़ीरता बढाने व घिाने वाले कारको के मध्य नाजुक
संतुलन ि़ी बनाये रिना िोगा। इस़ी के सार्थ सकस़ी
मामले में दंडादेश के प्रश्न पर ध्यान करते समय सवसध
के समाज क़ी सुरक्षा के प्रसत स्व़ीकृत उद्देश् और
न्याय के सलए समाज क़ी आवाज के प्रसत ि़ी
उत्तरदाय़ी िोना िोगा। अण्डन्तम सवश्लेषण में अपराध
एवं दंड का अनुपात बनाये रिना िोगा और इस़ी
िम में आगे अपराध़ी, प़ीसडत व व्यापक समाज के
असधकारों का संतुलन ि़ी बनाये रिना िोगा।

13. दंड सनधाारण क़ी प्रसिया में अपराध़ी के
पक्ष क़ी ओर से कोई कारक चािे वो लघुकाऱी
पररण्डस्र्थसत िो या गंि़ीरता कम करने वाले बताया जाये
परन्तु वो सनणाायक नि़ीं िोगा और इस़ी िम में समय
का व्यत़ीत िो जाना स्वयं में मजबूत कारण नि़ीं िो
सकता िै। उपयुक्त मामले में इन कारकों क़ी ि़ी
अन्य कारकों के संग कुछ मित्ता िो सकत़ी िै। इन
सब कारकों क़ी उपण्डस्र्थसत िोते हुए ि़ी अन्य कारक
128 INDIAN LAW REPORTS ALLAHABAD SERIES
जैसे अपराध क़ी प्रकृसत व उसका समाज पर िोने
वाला असर को अनदेिा नि़ीं सकया जा सकता िै।

14. 'असधसनयम 1985' क़ी धारा 20 (कैनेसबस
के पौधे और कैनेसबस के संबंध में उल्लंघन के सलए
दंड) क़ी उपधारा ि (ii) (ई) के अनुसार जिाँ
उल्लंघन, वासणण्डिक मात्रा से संबंसधत िो विाँ कठोर
कारावास, सजसक़ी अवसध दस वषा से कम नि़ीं िोग़ी,
सकन्तु ब़ीस वषा तक क़ी िो सकत़ी िै और जुमााने से
ि़ी, जो एक लाि रुपये से कम नि़ीं िोगा, सकन्तु जो
दो लाि रुपये तक का िो सकेगा और लेिबद्ध
कारणों के सार्थ दो लाि रुपये से असधक का जुमााना
असधरोसपत ि़ी सकया जा सकता िै। संदिा के सलए
धारा 20 सनम्न उल्लेण्डित क़ी जा रि़ी िै।

"20. कैनेतबस के पौधे और कैनेतबस
के संबंध में उल्लंिन के तलए दंि-जो कोई, इस
असधसनयम के सकस़ी उपबंध या इसके अध़ीन बनाए
गए सकस़ी सनयम या सनकाले गए सकस़ी आदेश या द़ी
गई अनुज्ञण्डि क़ी शता के उल्लंघन में, -

(क) सकस़ी कैनेसबस के पौधे क़ी िेत़ी
करेगा; या

(ि) कैनेसबस का उत्पादन, सवसनमााण,
कब्जा, सविय, िय, पररविन अन्तरराण्डिक आयात,
अन्तरराण्डिक सनयाात या उपयोग करेगा;

(i) जिां उल्लंघन िंड (क) के संबंध में िै
विां, कठोर कारावास से, सजसक़ी अवसध दस वषा
तक क़ी िो सकेग़ी और जुमााने से ि़ी, जो एक लाि
रुपए तक का िो सकेगा, दंडऩीय िोगा; और

(ii) जिां उल्लंघन िंड (ि) के संबंध में
िै, -

(अ) और अल्पमात्रा से संबंसधत िै, विां
कठोर कारावास से, सजसक़ी अवसध (एक वषा) तक
क़ी िो सकेग़ी, या जुमााने से, जो दस िजार रुपए तक
का िो सकेगा, अर्थवा दोनों से,

(आ) और जिां वासणण्डिक मात्रा से कम
सकंतु अल्प मात्रा से असधक मात्रा से संबंसधत िै, विां
कठोर कारावास से, सजसक़ी अवसध दस वषा तक क़ी
िो सकेग़ी, और जुमााने से, जो एक लाि रुपए तक
का िो सकेगा,

(इ) और जिां वासणण्डिक मात्रा से संबंसधत
िै, विां, कठोर कारावास से, सजसक़ी अवसध दस वषा से
कम क़ी नि़ीं िोग़ी सकंतु ब़ीस वषा तक क़ी िो सकेग़ी,
और जुमााने से ि़ी, जो एक लाि रुपए से कम का नि़ीं
िोगा सकंतु जो दो लाि रुपए तक का िो सकेगा,

दंडऩीय िोगा:

परंतु न्यायालय, ऐसे कारणों से, जो सनणाय
में लेिबद्ध सकए जाएंगे, दो लाि रुपए से असधक का
जुमााना असधरोसपत कर सकेगा।"

15. उपरोक्त से यि सवसदत िै सक वतामान
प्रकरण में जिाँ वासणण्डिक मात्रा से 99 गुऩी चरस
बरामद हुई िै, विाँ दंडादेश कठोर कारावास सजसक़ी
अवसध दस वषा से कम नि़ीं िो सकत़ी परन्तु ब़ीस वषा
तक िो सकत़ी िै तर्था लेिबद्ध कारण से अर्थादि दो
लाि रुपये से असधक ि़ी िो सकता िै। परन्तु एक
लाि रुपये से कम सकस़ी ि़ी दशा में नि़ीं िो सकता
िै।

16. 'असधसनयम 1985' क़ी धारा 32 ि (क
लगायत च) के अनुसार न्यूनतम दंड से उच्चतर दंड
आरोसपत करने के सलए सवचार करने के कुछ कारक
वसणात सकये गये िै परन्तु उन कारकों के असतररक्त
न्यायालय अन्य उसचत कारकों पर ि़ी सवचार कर
सकता िै। जैसा सक उच्चतम न्यायालय के रफ़ीक
कुरैश़ी (पूवा में उल्लेण्डित) के मामले में सनणाय में
सनधााररत सकया गया िै। संदिा के सलये धारा 32 ि सनम्न
उल्लेण्डित क़ी जा रि़ी िै।

"32ख. न्यूनिम दंि से उच्चिर दंि
अतधरोतपि करने के तलए तविार में तलए जाने वाली
बािें-जिां इस असधसनयम के अध़ीन सकए गए सकस़ी
अपराध के सलए कारावास क़ी कोई न्यूनतम अवसध या
जुमााने क़ी रकम सवसित िै, विां न्यायालय, कारावास
क़ी न्यूनतम अवसध या जुमााने क़ी रकम से उच्चतर
कोई दंड असधरोसपत करने के सलए ऐस़ी बातों के
असतररक्त सजन्हें वि ठ़ीक समझे, सनम्नसलण्डित बातों को
सवचार में ले सकेगा, अर्थाातु्: -

(क) अपराध़ी द्वारा सिंसा या आयुध का
उपयोग या उसके उपयोग क़ी धमक़ी;

(ि) यि तथ्य सक अपराध़ी लोक पद धारण
करता िै और उसने अपराध करने में उस पद का
लाि उठाया िै;

(ग) यि तथ्य सक अपराध द्वारा अवयस्क
प्रिासवत िोते िैं या उस अपराध के सकए जाने के सलए
अवयस्कों का उपयोग सकया जाता िै;
4 All. Pankaj Third Bail Appl. Vs. State of U.P. & Anr.
129

(घ) यि तथ्य सक अपराध सकस़ी सशक्षा
संस्र्था या सामासजक सेवा संकाय में या ऐस़ी संस्र्था या
संकाय के ठ़ीक सनकि या ऐसे अन्य स्र्थान में, सजसमें
सवद्यालय के बालक और छात्र सशक्षा, ि़ीडा और
सामासजक सियाकलापों के सलए आते-जाते िैं, सकया
जाता िै;

(ङ) यि तथ्य सक अपराध़ी संगसठत
अंतरराष्टऱीय या सकस़ी ऐसे अन्य अपराध़ी समूि का िै
जो अपराध करने में लगा हुआ िै ; और

(च) यि तथ्य सक अपराध़ी अपराध करके
सुकर बनाए गए अन्य अवैध सियाकलापों में लगा
हुआ िै।"

17. उपरोक्त उल्लेण्डित सवसधक सवश्लेषण क़ी
पृष्ठिूसम में यि सनधााररत करना िै सक आक्षेसपत
दंडादेश में पाररत कारावास क़ी अवसध व अर्थादंड क़ी
मात्रा को वतामान प्रकरण के तथ्य जैसे घिना का 13
वषा पूवा में काररत िोना, दोनों अप़ीलासर्थायों द्वारा 13
वषा का कारावास व्यत़ीत कर लेना, अप़ीलार्थी
यशपाल क़ी वतामान उम्र कऱीब 37 वषा व अप़ीलार्थी
संजय क़ी वतामान उम्र 52 वषा का िोना तर्था यि ि़ी
ध्यान में रिना िोगा क़ी वतामान प्रकरण में सपकअप
वैन में एक गुि स्र्थान से 100 सकलोग्राम चरस
(वासणिक मात्रा से 99 गुऩी) बरामद क़ी गई र्थ़ी तर्था
यि अपराध एक समासजक अपराध िै तर्था ऐस़ी
स्वापक औषसधयों और मनः प्रिाव़ी पदार्थों के अवैध
व्यापार का समपिरण करने के कडे उपबन्ध करने
के सलए ि़ी 'असधसनयम 1985' असधसनयसमत सकया
गया िै। वतामान प्रकरण में दोनों अप़ीलार्थी ने समान
अपराध काररत सकया िै अतः दोनों को समान
दंडादेश से दण्डित करना चासिये र्था। अप़ीलार्थी
संजय को मात्र इस कारण से सक वो सपक अप वैन का
मासलक िै, अप़ीलार्थी यशपाल से असधक कारावास
क़ी अवसध व असधक अर्थादंड क़ी मात्रा का आदेश
पाररत करने का कोई यर्थोसचत कारण नि़ीं माना जा
सकता।

18. वतामान प्रकरण में अप़ीलासर्थायों को
दोषससण्डद्ध के उपरान्त दस वषा से ब़ीस वषा का
कारावास व अर्थादंड एक लाि रुपये तक तर्था सवशेष
कारण से 2 लाि रुप से असधक ि़ी िो सकता िै परन्तु
सकस़ी ि़ी दशा में एक लाि रुपये से कम नि़ीं िो
सकता िै। अप़ीलासर्थायों को अर्थादि रु0 त़ीन लाि व
रु0 चार लाि सनधााररत करने का कोई सवशेष आधार,
आक्षेसपत आदेश में नि़ीं सदया गया िै।

19. दोनों अप़ीलार्थी अब तक 13 वषा का
कारावास व्यत़ीत कर चुके िैं। जैसा पूवा में उल्लेण्डित
सकया गया क़ी दोनों अप़ीलार्थी समान दंडादेश के
असधकाऱी िै। अतः दोनों अप़ीलार्थीयों द्वारा अबतक 13
वषा का कारावास पूणा सकया जा चुका िै तर्था दोनों
अप़ीलासर्थायों क़ी उम्र को ि़ी ध्यान में रिते हुए एवं इस
अपराध से पूवा कोई और अपराध का इसतिास न िोने
व कारावास में रिते हुए कोई प्रसतकूल सिप्पण़ी का ि़ी
न िोना, ऐसे उसचत कारण िै, जो दंड के सुधारवाद़ी
ससद्धान्त व पूणा में वसणात दिादेश के ससद्धान्तो के
अनुसार व न्यायसित के उद्देश् क़ी प्राण्डि के सलए दोनों
अप़ील सनम्न आदेश के सार्थ सनस्ताररत क़ी जात़ी िै।

आदेश:-

20. अप़ीलार्थी यशपाल ससंि यादव व अप़ीलार्थी
संजय कुमार सवश्वकमाा के सवरुद्ध उपरोक्त वसणात
दोषससण्डद्ध के आदेशों को मान्य करते हुए उपरोक्त
वसणात संबंसधत दंडादेश में पाररत कारावास क़ी अवसध,
उनके द्वारा आज तक व्यत़ीत कारावास क़ी अवसध में
पररवसतात सकया जाता िै तर्था संबंसधत अर्था दंड क़ी
मात्रा को न्यूनतम करते हुए दोनों अप़ीलार्थी पर अलग
अलग एक-एक लाि रुपये का अर्थादि सनधााररत
सकया जाता िै, सजसक़ी अदायग़ी न करने पर दोनों
अप़ीलार्थी को अलग अलग एक-एक वषा का असतररक्त
कारावास िुगतना पडेगा।

21. उपरोक्त वसणात दोनों अप़ील उपरोक्त
आदेशानुसार आंसशक रुप से स्व़ीकार क़ी जात़ी िै।
----------
(2022)04ILR A129
ORIGINAL JURISDICTION
CRIMINAL SIDE
DATED: LUCKNOW 13.04.2022

BEFORE

THE HON'BLE RAJESH SINGH CHAUHAN, J.

Criminal Misc. Bail Application No. 1629 of 2020

Pankaj Third Bail Appl. ...Applicant
Versus
State of U.P. & Anr. ...Opposite Parties